दिव्य महाराष्ट्र मंडल

शिवाजी ने बचपन के खेल को युवावस्था में बनाया कर्म, महाराष्ट्र मंडल में की गई शिवाजी महाराज की महाआरती

रायपुर। चौबे काॅलोनी स्थित महाराष्ट्र मंडल में छत्रपति शिवाजी महाराज की महाआरती की गई। मंडल की युवा समिति की ओर से प्रतिमाह 19 तारीख को यह महाआरती की जाती है। बुधवार को इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सन एंड सन ज्वेलर्स के रिटेल हेड श्याम सोनी थे। 
 
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता व महाराष्ट्र नाट्य मंडल के निर्देशक अनिल कालेले ने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज बचपन में अपने हमउम्र दोस्तों को दो सेना समूह बांटते थे। एक ग्रुप के सेनापति वे स्वयं बनते थे और सामने की मित्र सेना पर हमला करके उनका किला जीतते थे। युवावस्था में यही खेल उनका कर्म बन गया। युवा अवस्था में शिवाजी ने जैसे ही पुरंदर और तोरण किले पर अपना अधिकार जमाया, वैसे ही उनकी ख्याति दक्षिण में चारों ओर फैल गई। दिल्ली के शासकों में भी शिवाजी की इस प्रसिद्धि का गहरा असर हुआ।
 
महाराष्ट्र मंडल के अध्यक्ष अजय काले ने अपने संक्षिप्त संबोधन में शिवाजी का एक किस्सा सुनाया। उन्होंने कहा कि शिवाजी के बढ़ते प्रताप से आतंकित बीजापुर के शासक आदिलशाह जब उन्हें बंदी न बना सका, तो उन्होंने शिवाजी के पिता शाहजी को गिरफ्तार कर लिया। इससे शिवाजी बुरी तरह बौखला गए। अपनी नीति और साहस का परिचय देते हुए उन्होंने आदिलशाह पर छापामार हमले कर अपने पिता को कैद से आजाद कराया। इसके बाद आदिलशाह ने शिवाजी को जिंदा या मुर्दा पकड़कर लाने का आदेश देकर अपने सेनापति अफजल खान को भेजा। अफजल खान ने भाईचारे और सुलह का झूठा नाटक कर शिवाजी को अपनी बाहों में भरकर मारना चाहा, पर अनुभवी शिवाजी ने हाथ में रखे बघनखे से उन्हीं का शिकार कर उनकी जान ले ली। यह देख अफजल खान की सेना दुम दबाकर भाग गई।
 
महाआरती पर संत ज्ञानेश्वर स्कूल के प्रभारी निरंजन पंडित, युवा समिति के प्रभारी विनोद राखुंडे, खेल समिति की प्रभारी गीता दलाल, स्वावलंबन समिति की प्रभारी शताब्दी पांडे, ओपी कटारिया, प्रवीण क्षीरसागर, अनुराग भवालकर, सुचिता देशमुख सहित अनेक पदाधिकारी व सदस्य उपस्थित रहे।