संत ज्ञानेश्वर स्कूल में हुई 'द पॉवर ऑफ नेचर' पर कार्यशाला.... पर्यावरण के प्रति बाल मन की शंकाओं का हुआ समाधान
रायपुर। बाल मन में प्रकृति को लेकर कई सवाल उठते है, जैसे पौधे हमारे लिए कितने उपयोगी है, हमें आक्सीजन कैसे मिलती है... प्रकृति की रक्षा कैसे की जाए...। आदि तमाम सवालों और जवाब आज संत ज्ञानेश्वर विद्यालय के बच्चों को मिला। मौका था संत ज्ञानेश्वर स्कूल द्वारा आयोजित 'द पॉवर ऑफ नेचर' विषय पर कार्यशाला का। मुख्य वक्ता महाराष्ट्र मंडळ के आजीवन सदस्य और इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय के पूर्व निदेशक डॉ. जेएस उरकुरकर थे। डा. उरकुरकर ने बच्चों की सभी सवालों के जवाब दिए।

कार्यशाला का शुभारंभ दीप प्रज्जवल के साथ हुआ। स्कूल के प्राचार्य मनीष गोवर्धन ने सूत माला पहनाकर डा. जेएस उरकुरकर का स्वागत किया। उरकुरकर ने सबसे पहले बच्चों से पृथ्वी के सबसे भारी जीव के बारे में पूछा। इसके बाद आक्सीजन, नाइट्रोजन के बारे में विस्तार से बताया। बच्चों ने उरकुरकर ने पूछा की पृथ्वी में आक्सीजन और नाइट्रोजन कितने प्रतिशत है।
उरकुरकर ने बच्चों के सभी सवालों के रोचक अंदाज में जवाब दिए। उन्होंने बच्चों से कहा कि पर्यावरण को बचाने के लिए प्लास्टिक को समुद्र में जाने से रोकना होगा। उन्होंने बताया कि पेड़ में ऐसा मैकेनिज्म होता है डस्ट खींच लेता है। पौधे एकॉस्टिक का काम करते है। आवाज को रोक लेते है। इसले एसी का खर्च 30 प्रतिशत कम हो जाता है। सुबह पेडों के पास रहने से हमारे लिए ज्यादा आकसीजन मिलती है।