मंच पर हथकड़ी ले जाना ही भूल गए थे थानेदार... महाराष्ट्र नाट्य मंडळ की बैठक में कलाकारों ने रिहर्सल व मंचन के साझा किए अनुभव
2023-10-14 05:23 PM
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रायपुर। महाराष्ट्र मंडल में दो मराठी एकांकिका विट्ठल तो आला आला और चोर आले पाहिजेत का एक बार फिर मंचन किया जाएगा। महाराष्ट्र मंडल में शुक्रवार की रात महाराष्ट्र नाट्य मंडल की समीक्षा बैठक में पदेन अध्यक्ष अजय काले के इस आग्रह पर महाराष्ट्र नाट्य मंडल के निर्देशक अनिल श्रीराम कालेले सहित समस्त पदाधिकारी सहमत दिखे।
काले ने अपने संक्षिप्त समीक्षात्मक संबोधन में प्रशांत दलवी लिखित तीन अंकीय नाटक सेलिब्रेशन का मंचन करने का भी आग्रह किया क्योंकि यह नाटक वर्तमान परिस्थितियों में भी प्रासंगिक है। महाराष्ट्र नाट्य मंडल के निर्देशक अनिल श्रीराम कालेले ने रायपुर के बाद दुर्ग में 'विट्ठल तो आला आला' और 'चोर आले पाहिजेत' के सफल मंचन के बाद दोनों ही नाटकों के प्रत्येक कलाकार और मंच के पीछे विभिन्न जिम्मेदारियों के साथ सक्रिय सहयोगियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने उम्मीद जताई कि जल्दी ही वे नए नाटक के साथ फिर एक साथ जुटेंगे।

दोनों नाटकों की समीक्षा बैठक में प्रत्येक कलाकारों ने लगभग 50 दिन की रिहर्सल और दुर्ग और रायपुर के महाराष्ट्र मंडल में इनके मंचन को लेकर अपने अनुभव साझा किए। इनमें 'चोर आले पाहिजेत' में फौजदार (थानेदार) की भूमिका निभाने वाले भगीरथ कालेले ने बताया कि जब वह मंच पर अपनी 10 मिनट की भूमिका निभा चुके थे और अगले डायलॉग की ओर बढ़ते हुए अचानक उन्हें याद आया कि उन्होंने अपनी वर्दी के साथ तो हथकड़ी लटकाई ही नहीं है, जिसे लेकर उन्हें सामने के पात्र रामभाऊ को धमकाना था कि 'चलो हथकड़ी पहनाकर थाने ले चलता हूं'। उन्होंने तुरंत डायलॉग बदलकर धमकाया कि 'चलो थाने ले जाकर हथकड़ी पहनाता हूं'।
सुरुचिपूर्ण रात्रिभोज के बाद प्रसन्न निमोणकर, दिलीप लांबे, रामदास जोगळेकर, अनिल कालेले, सुशांत गुप्ते, प्रकृति दंडवते, कुमारी ओगले, पवन ओगले और प्रगति ओगले ने समधुर गीत प्रस्तुत किया। पवन ओगले ने केस्टो मुखर्जी, नीलू फूले, अशोक सराफ और दादा कोडके की मिमिक्री कर सभी को खूब हंसाया।