महाराष्ट्र मंडल में सिखाई गई सीपीआर देने की विधि... पहुंची संकल्प हास्पिटल की टीम
2024-02-19 01:34 PM
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रायपुर। महाराष्ट्र मंडल में लगाए गए स्वास्थ्य शिविर में लोगों को सीपीआर (कार्डियो पल्मोनरी रिससिटैशन) के बारे में तकनीकी जानकारी दी गई। स्वास्थ्य समिति के प्रमुख अरविंद जोशी ने बताया कि जब प्राणवायु में रुकावट आ जाती है, तब उसकी मदद के लिए जो क्रियाएं की जाती हैं, उसे ही सीपीआर कहा जाता। यह एक प्रकार का प्राथमिक उपचार है, जो दिल की धड़कन को पुन: स्थिर करने और सांस लेने की क्रियाओं में मदद करता है।
जोशी ने बताया कि सीपीआर सभी को सीखना चाहिए क्योंकि किसी भी समय और किसी भी स्थिति में यह जीवन रक्षक हो सकता है। सीपीआर की व्यवस्था किसी भी व्यक्ति द्वारा की जा सकती है, चाहे वो डॉक्टर हो, नर्स हो या फिर एक साधारण इंसान हो।जोशी के मुताबिक सीपीआर की जरूरत तब होती है, जब कोई व्यक्ति बिना होश के गिर जाता है, या फिर हृदय गति रुक जाती है, यानी हार्ट अटैक होता है, या फिर सांस लेने में दिक्कत होती है, जिसे श्वसन विफलता कहते हैं। ऐसी गंभीर स्थितियों में तुरंत सीपीआर किया जाए, तो व्यक्ति की जिंदगी बच सकती है।
अरविंद जोशी ने श्री संकल्प हाॅस्पिटल की नर्स के माध्यम से सीपीआर करने की पूरी प्रक्रिया को समझाया। उन्होंने मानव आकृति वाले रबड़ के माॅडल पर सीपीआर करने की विधि समझाई। जोशी ने बताया कि अगर कोई व्यक्ति अचानक बेहोश हो जाता है, तो पहले यह देखें कि कहीं उसकी ह्रदय गति रुक तो नहीं गई है। ऐसा हार्टअटैक के समय होता है। अगर हार्टअटैक आया है, तो व्यक्ति को सीधा लेटाकर उसका सिर हल्के से पीछे की तरफ कीजिए। फिर उसके दोनों हाथ को खुली हवा में ऊपर की ओर उठाकर रखिए। उसके मुंह के पास का हिस्सा हल्का सा खुला रखें ताकि सांस लेने में कोई रुकावट ना आए। फिर व्यक्ति की छाती को अपने हाथ रखकर धीमे से दबाव लगते हुए हृदय गति की स्थिति जांच लें।अगर व्यक्ति का हृदय रुक जाता है, तो आपको छाती दबाने की जरूरत होती है। इसके लिए पीड़ित व्यक्ति की छाती पर दोनों हाथों के पंजों को एक के ऊपर रखकर से 30 बार दबाना होगा। फिर नाक को बंदकर मुंह से हवा फूंकना है। ऐसा करने से मुर्छित व्यक्ति की सांस चलने लगेगी। फिर तुरंत डाॅक्टर को बुलाएं।
जोशी से सीपीआर करने की समूची विधि को समझने के बाद उपाध्यक्ष श्याम सुंदर खंगन, सह सचिव सुकृत गनोदवाले, कला एवं सांस्कृतिक समिति की मेधा पोतदार भी रबड़ के मानव रूपी मॉडल पर सीपीआर करने का अभ्यास कर, उसे मुंह से ऑक्सीजन देकर पुनर्जीवित करने की विधि दोहराई। शिविर में पहुंचे अनेक लोगों के अलावा महाराष्ट्र मंडल कार्यकारिणी के सदस्य, समितियों के पदाधिकारी एवं आजीवन सदस्य भी उपस्थित रहे।