दिव्य महाराष्ट्र मंडल

खारुन की शुचिता का लें संकल्प.. ताकि अंजुलि में जल लेकर कर सके आचमनः शशि वरवंडकर

0- करुणा और भद्रभाव के साथ जलचेतना करनी होगी जागृतः उज्ज्वल पोरवाल

0- जल संरक्षण को लेकर किए जा सकते हैं अभूतपूर्व कार्य : डॉ. वाजपेई

रायपुर। राजधानी की जीवनदायिनी कही जाने वाली खारुन नदी की शुचिता को लेकर सामाजिक संगठन संकल्प लें, ताकि एक वर्ष के भीतर ही हम खारुन नदी के जल को अंजुलि में लेकर आचमन कर सकें। इस एक संकल्प से सामाजिक सेवा के इस कार्य के साथ रायपुर की चर्चा छत्तीसगढ़ ही नहीं पूरे देश में होगी। स्वच्छता को लेकर अगर इंदौर कार्य कर सकता है, अंबिकापुर कार्य कर सकता है तो हम राजधानीवासी क्यों नहीं कर सकते। उक्ताशय के विचार ‘एक सामाजिक कार्य, जिससे देशभर में हो रायपुर की पहचान’ विषय पर  चौबे कॉलोनी स्थित महाराष्ट्र मंडल में शहीद मेजर यशवंत गोरे स्मृति गणेशोत्सव में गुरुवार को आयोजित 'नागरिक संवाद' में महाराष्ट्र मंडल के वरिष्ठ सभासद, महाराष्ट्र नाट्य मंडल के वरिष्ठ रंगकर्मी व रोटरी क्लब के भूतपूर्व गवर्नर शशि वरवंडकर ने बतौर मुख्य वक्ता कहीं। 

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शशि वरवंडकर ने कहा कि 15 अगस्त 2014 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्वतन्त्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से स्वच्छ भारत की परिकल्पना की थी, तो हर कोई अचंभित रह गया था। इस भाषण में स्वच्छता के प्रति मोदी का न सिर्फ दर्द छलका, बल्कि एक लक्ष्य निर्धारित कर उसे पूरा करने का जज्बा भी। किसी समस्या को स्वीकार करना बड़ी बात होती है और उन्होंने इसे स्वीकार किया और इसका समाधान भी। आज उसके परिणाम आपके सामने है। आज राजधानी ही नहीं, सभी जगहों पर चलती कार का दरवाजा खोलकर सड़क पर थूकने में लोगों  को शर्म नहीं आती, क्योंकि लोगों को इसकी आदत पड़ गई है। जिस दिन हमें इसे लेकर शर्म आने लगेगी, हम स्वच्छता के लिए तैयार हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि स्वच्छता की चार कड़ियां हैं, इन चारों कड़ियों सत्ता, प्रशासन, सामाजिक संस्था और जनता को जागृत होना जरूरी है। 

राजधानी में हो नागरिक मंच का गठन

एनआईटी के ट्रेनिंग व प्लेसमेंट ऑफिसर डॉ. समीर वाजपेई ने कहा कि राजधानी में नागरिक चेतना का अभाव है। दूसरे शहरों के लोग आक्रामक है। इस मामले में रायपुर पीछे है। इस पर बात होनी चाहिए। सामाजिक कार्य को गति प्रदान करने के लिए नागरिक मंच का गठन होना चाहिए, ताकि सभी सामाजिक संस्था एक मंच पर आकर अपने सेवाभावी कार्यों को गति प्रदान कर सके। उन्होंने कहा कि आज पानी के प्रबंधन और साइबर फ्राड को लेकर सामाजिक चेतना पर कार्य करने की आवश्यकता है। पहले मई की गर्मी में भी नदियों में पानी का बहाव रहता था, आज बारिश खत्म होने के दो माह बाद नदियों का पानी एनीकटों पर स्थिर हो जाता है। इस पर कार्य नहीं किया गया तो आने वाले समय में हमारी पीढ़ी को पानी की बड़ी समस्या से जूझना पड़ेगा। 

डाॅ. वाजपेयी ने कहा कि साइबर फ्राड में युवाओं की संलिप्तता पर कार्य करने की जरूरत है। आज मोबाइल हमारी जरूरत बन गई है, लेकिन इसी मोबाइल ने युवाओं को एक्सप्रोजर दे दिया है। युवा अपराध की ओर बढ़ रहे है। युवाओं को इससे बचाने के लिए सामाजिक संस्थाओं को युवाओं को कौशल विकास से जोड़ने की दिशा में काम करना होगा। निःसंदेह शासन स्तर और सामाजिक संगठनों की ओर से यह कार्य किया भी जा रहा है, लेकिन इसे गति प्रदान करना होगा। 

करुणा और भद्रभाव दिला सकता है राष्ट्रीय ख्याति

रायपुर स्मार्ट सिटी के सीईओ उज्जवल पोरवाल ने कहा कि राजधानीवासियों में आज सबसे बड़ा गुण है करुणा और भद्रभाव का। अपने इसी गुण को लेकर हम राजधानीवासी, प्रशासन, सामाजिक संगठन, संस्था कार्य करें तो निःसंदेह हमारी ख्याति पूरे देश में होगी। साथ ही अन्य शहरों के लोग इससे प्रेरित होंगे। सभी को यह संस्कार मिले है कि घर में रोटी बनती है, तो हम पहली रोटी गाय को और आखिरी रोटी कुत्ते को देना चाहिए। आज हम सब मिलकर अनिवार्य रुप से ऐसा करेंगे तो कितने पशु- पक्षियों को पेट भर भोजन मिलेगा। कभी कोई पशु- पक्षी घायल अवस्था या परेशानी में दिख जाए, तो उसकी मदद करें। करुणा और भद्रभाव सिर्फ पशु- पक्षियों के लिए नहीं, बल्कि मनुष्यों के प्रति भी होना चाहिए। रास्ते पर दुर्घटना में कोई घायल दिख जाए, तो उसकी मदद अवश्य करें। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा 3 अक्टूबर 2021 को शुरू की गई "गुड सेमेरिटन योजना" के तहत ऐसे नेक व्यक्ति को पुरस्कार दिया जाता है, जिसने किसी दुर्घटना (मोटर वाहन से जुड़ी) के पीड़ित की जान तत्काल सहायता प्रदान करके और दुर्घटना के गोल्डन ऑवर के भीतर उसे अस्पताल/ट्रॉमा केयर सेंटर पहुंचाकर बचाई हो। 

प्रशासन, 70 पार्षद, सामाजिक संगठन एक साथ करें प्रयास

महाराष्ट्र मंडल के अध्यक्ष अजय मधुकर काले ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. समीर वाजपेई के नागरिक मंच गठन की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि महाराष्ट्र मंडल ने इस दिशा में कार्य शुरू किया है। राजधानी के कई सामाजिक संगठन के साथ मिलकर उन्होंने सभी को एक मंच पर लाने के लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह को सामाजिक संगठन या आयोग गठन का प्रस्ताव दिया है। ताकि शासन की योजनाओं को जन- जन तक पहुंचाने में कोई बाधा न हो। निःसंदेह शासन अपने स्तर पर कार्य कर रही है, लेकिन इस कार्य में समाज की सहभागिता इसे गति प्रदान करेगा। क्योंकि लोग कोई परेशानी होने पर पहले परिजनों, फिर समाज के पास ही आते है। रायपुर स्मार्ट सिटी के सीईओ उज्जवल पोरवाल के करुणा और भद्रभाव जागृत करने पर उन्होंने बताया कि सालों पहले आज के मुख्य वक्ता शशि वरवंडकर ने अपनी परिकल्पना को साकार करते हुए महाराष्ट्र मंडल ने दिव्यांग बालिका विकास गृह प्रारंभ किया। यहां प्रदेश भर से दिव्यांग बच्चियां आकर रहती है। उनके रहने, खाने, पढ़ाई- लिखाई, शादी, नौकरी सभी कार्य मंडल करता है। पिछले वर्ष एक बच्ची की शादी मंडल ने कराई। अपनी बेटी की तरह उसे विदा किया। आज राजधानी के 70 वार्ड के पार्षद, प्रशासन और राजधानी के विभिन्न सामाजिक संगठन संकल्पित हो जाएं, तो किसी भी कार्य को गति प्रदान कर उसे अंजाम तक पहुंचा सकते हैं।

'नागरिक संवाद' का संचालन मंडल समन्वयक रविंद्र ठेंगड़ी ने और आभार प्रदर्शन मराठी साहित्य समिति की प्रभारी कुमुद लाड ने किया। इस अवसर पर प्रा. अनिल श्रीराम कालेळे, प्रसन्न निमोणकर, मंडल समन्वयक श्याम सुंदर खंगन, निरंजन पंडित, प्रवीण क्षीरसागर, हेमंत मार्डीकर, परितोष डोनगांवकर, मालती मिश्रा, विजय लाड, भारती पलसोदकर, सुमीत मोड़क सहित अन्य लोग उपस्थित थे।