महाराष्ट्र मंडल गणेशोत्सव में मराठी नाटक का मंचन,,,, फ्लैट में हुए लफड़े को नहीं छुपा पाए प्रा. मुकुंद व दिनकर
2024-09-16 10:55 PM
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: संत ज्ञानेश्वर सभागृह में मराठी हास्य नाटक 'भानगढ़ पहावी लपवून' का हुआ मंचन
रायपुर। आमतौर पर हम सभी अपने साथ होने वाले छोटे-छोटे लफड़ों को छुपाने की कोशिश करते हैं, लेकिन समय के साथ वह लोगों के सामने आ ही जाता है। महाराष्ट्र के एक लेखक अपने कलाकार मित्र के कहने पर एक हाॅट नाटक लिखते हैं। कलाकार मित्र इस नाटक के मंचन के लिए हाॅट नाटकों की एक अभिनेत्री को लेखक से मिलाने लाता है। नाटक के मंचन पूर्व अभ्यास दौरान अपने घर पर अभिनेत्री को देखकर भड़की लेखक की पत्नी उसे एक कमरे में बंद कर देती है। इस बीच लेखक और उनका दोस्त उसे कमरे से भगाने की कोशिश करते हुए पकड़े जाते हैं और उनका लफड़ा सबके सामने आ जाता है। इसके बाद भरपूर हास्य पुट के साथ शोर शराबे, लड़ाई- झगड़े, चीख- पुकार के साथ नाटक आगे बढ़ता है। यह दृश्य सोमवार को महाराष्ट्र मंडल के शहीद मेजर यशवंत गोरे स्मृति गणेश उत्सव में आयोजित मराठी हास्य नाटक 'भानगढ़ पहावी लपवून' के मंचन पर दिखाई दिया।
प्रा. अनिल सोनार लिखित नाटक 'भानगढ़ पहावी लपवून' में लेखक मुकुंद नायक की भूमिका में भगीरथ कालेले असर डालते हैं। दिनकर राव की भूमिका में प्रसन्न निमोणकर ने पूरे नाटक को अपने कंधों पर जिम्मेदारी से संभाला है। प्रेमलता नायक (प्रिया बक्षी) यशोदा की भूमिका अस्मिता कुसरे अपनी बेहतरीन टाइमिंग से हास्य के पल जुटातीं हैं। लीना के संक्षिप्त किरदार में कीर्ति हिशीकर के अलावा कुमारी ज्योति ढमढेरे की भूमिका में कुंतल कालेले, दुर्वे आजी के रूप में गौरी क्षीरसागर अपनी दमदार उपस्थिति से हास्य नाटक को गति प्रदान करते हैं। बंड्या की रोल में रविंद्र ठेंगड़ी हो हल्ला मचाते हुए नाटक को क्लाइमेक्स की ओर ले जाते हैं।
महाराष्ट्र नाट्य मंडल के प्रा. अनिल श्रीराम कालेले के मार्गदर्शन और प्रसन्न निमोणकर के निर्देशन में प्रस्तुत नाटक 'भानगढ़ पहावी लपवून' में वेशभूषा अपर्णा काळेले, रंगभूषा वंदना निमोणकर, संगीत संयोजन परितोष डोनगांवकर, नेपथ्य प्रवीण क्षीरसागर, प्रकाश संयोजन विनोद गौतम, रंगमंच सज्जा ज्योति नाथ, रंगमंच सज्जा सहायक अजय पोतदार और मंचीय व्यवस्था की कमान प्रकाश गुरुव ने संभाली थी।

कथानकः भानगढ़ पहावी लपवून
'भानगढ़ पहावी लपवून' मराठी नाटक महाराष्ट्र के ख्यातनाम नाटककार प्रा. मुकुंद नायक (भगीरथ कालेले) के प्लैट में हो रही घटना का चित्रण है। प्रा. नायक मूलतः सामाजिक, विचार प्रबोधक और पारिवारिक विषयों पर नाटक लिखते हैं। उनके मित्र पड़ोसी और उनके नाटकों के कलाकार दिनकर राव (प्रसन्न निमोणकर) के दबाव में उन्होंने जीवन में पहली बार हाॅट नाटक लिखा है। इस नाटक के मंचन से पूर्वाभ्यास के लिए दिनकर ने हाॅट नाटकों की अभिनेत्री लीना (कीर्ति हिशीकर) को प्रा. नायक के घर बुला लिया है। अभ्यास के दौरान प्रा. नायक की पत्नी प्रेमतला नायक (प्रिया बक्षी) ने लीना की उपस्थिति के कारण उत्पन्न संदेह के आधार पर लीना को शयनकक्ष में बंद कर दिया। प्रेमलता के गुस्से को शांत करने के लिए नायक परिवार की नौकरानी यशोदा (अस्मिता कुसरे) प्रेमलता को लेकर पड़ोसी दिनकर के घर चली गई। इसी समय प्रेमलता ने इस पूरे लफड़े का बदला लेने के लिए अपने कराटेबाज मुंह बोले भाई बंड्या (रविंद्र ठेंगड़ी) को बुला लिया। इस बीच नायक और दिनकर मिलकर जब लीना को शयनकक्ष से निकालकर बाहर भगाने का प्रयास करते हैं, तब वहां प्रेमलता और यशोदा पहुंच जाती है और ये पकड़े जाते हैं। इस लफड़े के दौरान बिल्डिंग के भूतल में रहने वाली मासिक पत्रिका अक्षता की संपादिका ज्योति ढमढेरे (कुंतल कालेले) और प्रथम तल में रहने वाली दुर्वे आजी यानी दादी (गौरी क्षीरसागर) वहां आ जाती है और प्रेमलता और यशोदा से रोचक और हास्यमय बहस करतीं है। अंत में लेखक नायक और दिनकर हाॅट नाटक के मंचन को लेकर फ्लैट में हुए लफड़े को छुपा पाने में असफल नजर आते हैं।
