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दिनभर मोबाइल चलाता रहता है बच्चा ? हो जाइये सावधान!

डेस्क | जब कोई बच्चा कंप्यूटर, फोन या टीवी देखने में बहुत ज्यादा समय बिताता है, तो उनके लिए दोस्त बनाना और लोगों से बात करना कठिन हो सकता है | इसे Virtual Autism कहा जाता है, लेकिन यह वास्तविक ऑटिज़्म के समान नहीं होता है | वास्तविक ऑटिज्म एक विकसित होता विकार है जो बच्चों के सीखने और संवाद करने के तरीके को कुछ हद तक प्रभावित करता है, लेकिन वर्चुअल ऑटिज्म की बात करें तो ये तब होता है जब बच्चे मोबाइल स्क्रीन पर बहुत अधिक समय बिताते हैं और इससे उनके लिए फिर सामाजिक मेलजोल कठिन हो जाता है | 

जब कोई व्यक्ति दूसरों के साथ सहज नहीं हो पता है और उसे उनसे बात करने में कठिनाई का सामना करना पड़ता है, तो उनकी दोस्ती ख़त्म होने लगती है |  यह वैसा ही है जैसे जब कोई बच्चा पुरे दिन टीवी देखने या फोन पर खेलने में बिताता है, तो उसका मस्तिष्क उसी तरह काम करना शुरू कर देता है | उन्हें लोगों की आंखों में देखने में असहज महसूस हो सकता है और उनसे बात करने में तकलीफ हो सकती है | इससे उनके लिए नई चीजें सोचना और उनसे सीखना कठिन हो सकता है. कुछ लोग इस स्थिति को वर्चुअल ऑटिज्म कहते हैं | 

सरल भाषा में कहें तो जब बच्चा कंप्यूटर, मोबाइल या स्क्रीन पर अधिक समय बिताने लगता है वो और बच्चों की तुलना में दोस्त बनाने, घुलने-मिलने में पीछे रह जाता है या रह सकता है और उसके लिए ये मुश्किन होने लगता है | ऐसे में बच्चे की सीखने, समझने और उसके बातचीत करने की क्षमता और किसी बच्चों के मुकाबले कम हो जाती है | 

बच्चे द्वारा स्क्रीन पर बहुत ज्यादा बिताए जाने वाले समय को कम करने के लिए, एक शेड्यूल बनाएं जो उन्हें पूरे दिन भर व्यस्त रखे. स्कूल और दोपहर के भोजन के बाद, उन्हें बाहर खेलने और दोस्तों से बात करने में समय बिताना दे | उनके लिए नियमित नींद का शेड्यूल बनाना भी अति महत्वपूर्ण है ताकि वे अपने फोन पर वीडियो देखने में देर तक समय न दे  | माता-पिता बच्चे का मनोरंजन करने के लिए स्वयं भी खेल और मनोरंजक गतिविधियों में शामिल हो सकते हैं और उनके मोबाइल डिवाइस का उपयोग करने की इच्छा से उनका ध्यान भटका सकते हैं |