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महाराष्ट्र में गुइलेन-बैरे सिंड्रोम के मामले बढ़े... अब तक 7 की मौत... 167 को संक्रमण

डेस्क। महाराष्ट्र में गुइलेन-बैरे सिंड्रोम (GBS) के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। अब तक 192 संदिग्ध मरीज सामने आ चुके हैं, जिनमें से 167 में संक्रमण की पुष्टि हुई है। पुणे में 10 फरवरी को एक 37 वर्षीय युवक की इलाज के दौरान मौत हो गई, जिससे इस बीमारी से मरने वालों की संख्या 7 हो गई है। GBS के कारण 21 मरीज वेंटिलेटर पर और 48 मरीज ICU में भर्ती हैं। एक्टिव केसों में 39 पुणे म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन, 91 पुणे ग्रामीण इलाकों, 29 पिंपरी चिंचवाड़, 25 पुणे के अन्य ग्रामीण क्षेत्रों और 8 अन्य जिलों से हैं। 7 फरवरी को कुल 180 मामले थे, जो अब बढ़कर 192 हो गए हैं।

गुइलेन-बैरे सिंड्रोम (GBS) क्या है?

यह एक ऑटोइम्यून न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर है, जिसमें इम्यून सिस्टम खुद शरीर की नसों (नर्व्स) पर हमला करने लगता है। यह बीमारी पेरिफेरल नर्वस सिस्टम को प्रभावित करती है, जिससे मांसपेशियों तक सही ढंग से सिग्नल नहीं पहुंचते। इसके कारण चलने, उठने-बैठने और सांस लेने में परेशानी हो सकती है। कुछ मामलों में लकवे (पैरालिसिस) तक की स्थिति बन सकती है। आमतौर पर यह बीमारी बैक्टीरियल या वायरल संक्रमण के बाद होती है। पुणे में E. कोली बैक्टीरिया का स्तर अधिक पाया गया है, जो इस बीमारी के बढ़ने का कारण हो सकता है। हर साल दुनिया में एक लाख से ज्यादा मामले सामने आते हैं, जिनमें पुरुषों की संख्या अधिक होती है। यह बीमारी आमतौर पर दवाओं से ठीक हो सकती है, लेकिन कुछ मामलों में कमजोरी लंबे समय तक बनी रहती है।

GBS के शुरुआती लक्षण

हाथों-पैरों में झुनझुनी और कमजोरी। चलने-फिरने में कठिनाई, खासकर सीढ़ियां चढ़ने में दिक्कत। बोलने, चबाने और निगलने में परेशानी। आंखों को हिलाने में कठिनाई और डबल विजन। तेज मांसपेशियों में दर्द। मल-मूत्र त्याग में दिक्कत। सांस लेने में परेशानी। अगर इन लक्षणों को नजरअंदाज किया गया तो यह तेजी से बढ़ सकता है और गंभीर लकवे का कारण बन सकता है। इसलिए शुरुआती लक्षणों पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

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