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राज्यसभा में गूंजा मणिकर्णिका घाट: विकास या विरासत का ध्वस्तीकरण

वाराणसी| वाराणसी के मणिकर्णिका घाट, जो सदियों से धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक रहा है, उसके पुनर्विकास को लेकर राज्यसभा में तीखी बहस छिड़ गई। आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने नियम 267 के तहत नोटिस देकर सदन की कार्यवाही स्थगित कर इस विषय पर तत्काल चर्चा की मांग की। उनका कहना था कि घाट पर चल रहे कार्य विकास नहीं बल्कि ध्वस्तीकरण की ओर बढ़ते कदम हैं।

नोटिस में उठे गंभीर सवाल
संजय सिंह ने अपने नोटिस में स्पष्ट कहा कि पुनर्विकास के नाम पर मणिकर्णिका घाट की ऐतिहासिक और धार्मिक पहचान को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। भारी मशीनों का प्रयोग घाट की आत्मा और उसकी मूल संरचना को नष्ट कर रहा है। उन्होंने इसे सुनियोजित तरीके से विरासत मिटाने की कोशिश बताया।

धार्मिक-सांस्कृतिक विरासत पर खतरे का आरोप
सांसद ने आरोप लगाया कि धार्मिक स्थलों पर व्यावसायिक निर्माण को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया में आवश्यक धार्मिक संवेदनशीलता का अभाव है और विशेषज्ञों से कोई परामर्श नहीं लिया गया। उनके अनुसार यह रवैया न केवल निंदनीय है बल्कि देश की सांस्कृतिक धरोहर के लिए गंभीर खतरा भी है।

तत्काल हस्तक्षेप की मांग
संजय सिंह ने सदन से अपील की कि इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप किया जाए। उन्होंने कहा कि मणिकर्णिका घाट केवल वाराणसी का नहीं बल्कि पूरे देश का सांस्कृतिक प्रतीक है, जिसकी रक्षा करना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि घाट की मौलिकता और धार्मिक महत्व को सुरक्षित रखने के लिए पुनर्विकास कार्यों की समीक्षा की जाए।
 
राज्यसभा में उठे इस मुद्दे ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि विकास के नाम पर विरासत को किस हद तक बदला जा सकता है। मणिकर्णिका घाट का मामला केवल एक घाट का नहीं बल्कि उस सोच का प्रतीक है, जिसमें परंपरा और आधुनिकता के बीच संतुलन साधने की चुनौती सामने है। 
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