प्रधानमंत्री ने जड़ों की सुरक्षा के महत्व पर संस्कृत सुभाषित साझा किया
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज एक संस्कृत सुभाषित साझा किया, जिसमें ज्ञान की मूलभूत जड़ों तथा दैनिक अनुशासन की रक्षा के निर्णायक महत्व पर बल दिया गया है। प्रधानमंत्री द्वारा साझा किया गया सुभाषित इस प्रकार है:
विप्रो वृक्षस्तस्य मूलं च सन्ध्या वेदाः शाखा धर्मकर्माणि पत्रम्।
तस्मान्मूलं यत्नतो रक्षणीयं छिन्ने मूले नैव शाखा न पत्रम्॥
“एक बुद्धिमान व्यक्ति वृक्ष के समान होता है। उस ज्ञान स्वरूपी वृक्ष की जड़ दैनिक उपासना है। वेद उसकी शाखाएँ हैं और सत्कर्म उसके पत्ते हैं। अतः जड़ की सावधानीपूर्वक रक्षा की जानी चाहिए, क्योंकि यदि जड़ नष्ट हो गई तो न शाखाएँ रहेंगी और न ही पत्ते।”
विप्रो वृक्षस्तस्य मूलं च सन्ध्या वेदाः शाखा धर्मकर्माणि पत्रम्।
तस्मान्मूलं यत्नतो रक्षणीयं छिन्ने मूले नैव शाखा न पत्रम्॥