बाल संरक्षण, सुरक्षा और कल्याण पर संगोष्ठी..... अतिथि बोले बच्चों के अधिकारों की रक्षा की जाए
2023-07-31 12:27 PM
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नईदिल्ली। भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने रांची के सेंट्रल कोलफील्ड लिमिटेड के सभागार में बाल संरक्षण, बाल सुरक्षा और बाल कल्याण पर एक दिवसीय क्षेत्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया। इसमें हिस्सा लेने वाले चार राज्यों में पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड एवं ओडिशा शामिल थे।
संगोष्ठी में बाल कल्याण समितियों (सीडब्ल्यूसी), किशोर न्याय बोर्ड (जेजेबी), ग्राम बाल संरक्षण समिति (वीसीपीसी) के सदस्यों और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के 1200 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया। यह कार्यक्रम बाल संरक्षण, बाल सुरक्षा और बाल कल्याण मुद्दों के बारे में जागरूकता और पहुंच बढ़ाने के लिए देश भर में आयोजित होने वाली क्षेत्रीय संगोष्ठियों की श्रृंखला का हिस्सा है।
संगोष्ठी को महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री डॉ. मुंजपरा महेन्द्रभाई, राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो, महिला एवं बाल विकास विभाग के अपर सचिव संजीव कुमार चड्ढा ने संबोधित किया। इस मौके पर झारखंड राज्य बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष काजल यादव भी उपस्थित रहीं। कार्यक्रम में किशोर न्याय अधिनियम, नियमों में संशोधन पर ध्यान केन्द्रित किया गया। गोद लेने की प्रक्रियाओं पर इसके प्रभाव को भावी दत्तक माता-पिता द्वारा साझा किए गए अनुभव में रेखांकित किया गया, जिन्हें सितंबर, 2022 में संशोधन के बाद त्वरित समाधान प्राप्त हुआ था।
संगोष्ठी को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित करते हुए महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री डॉ. मुंजपरा महेन्द्रभाई ने कहा कि किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015 को 2021 में संशोधित किया गया था, जिसने देश भर में बाल संरक्षण प्रणालियों को मानकीकृत किया है। इस प्रकार, सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि बच्चों के अधिकारों की रक्षा की जाए और देश के हर कोने में बच्चों के कल्याण के लिए कदम उठाए जाएं। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि मिशन वात्सल्य योजना के माध्यम से जुबेनाइल जस्टिस अधिनियम ने यह सुनिश्चित किया है कि राज्य स्तर पर एससीपीएस, एसएआरए, जिला स्तर पर जेजेबी, सीडब्ल्यूसी, डीसीपीयू और एसजेपीयू की वैधानिक संरचनाएं बाल संरक्षण और बाल कल्याण के लिए सुलभ हैं।
बच्चों के सर्वोत्तम हित को ध्यान में रखते हुए, और उनके स्थायी पुनर्वास में समुदाय को शामिल करते हुए, सरकार ने गैर-संस्थागत देखभाल पर जोर दिया है। यह बच्चे को पारिवारिक वातावरण में बढ़ने और उसकी कठिन परिस्थितियों के आघात और सीमाओं को दूर करने का अवसर प्रदान करता है। केंद्र सरकार प्रति माह प्रति बच्चे चार हजार रुपये फॉस्टर केयर और आफ्टर केयर के रूप में स्पांसर करती है। पिछले साल 62,000 से अधिक बच्चों को इससे लाभान्वित किया गया था