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बाल देखभाल गृहों की निगरानी के लिए मासी पोर्टल का किया गया शुभारंभ

नईदिल्ली।  राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने देश भर में बाल देखभाल संस्थानों और उनके निरीक्षण तंत्र की वास्तविक समय की निगरानी के लिए एक एप्लिकेशन 'मासी' - निगरानी एप विकसित किया है। इस ऐप को विकसित करने का उद्देश्य किशोर न्याय अधिनियम, 2015 के तहत प्रदान किए गए सीसीआई के निरीक्षण के तंत्र को प्रभावी और कुशल बनाना है।

ऐप निगरानी पोर्टल से जुड़ा हुआ है जहां स्वचालित रिपोर्ट तैयार होती है। 'मासीकिशोर न्याय अधिनियम, 2015 के तहत निर्धारित बाल कल्याण समितियों (सीडब्ल्यूसी)राज्य निरीक्षण समितियोंजिला निरीक्षण समितियोंकिशोर न्याय बोर्डों (जेजेबी) और राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोगों (एससीपीसीआर) के सदस्यों द्वारा एकीकृत निरीक्षण को सक्षम बनाता है।

यह ऊपर दिए गए प्राधिकरणों द्वारा देश भर के सभी सीसीआई के निरीक्षण के लिए एक एकल मंच के रूप में कार्य करता है। निरीक्षण चक्र के पूरा होने से पहले और बाद में नियमित अनुवर्ती कार्रवाई की जाती है। जैसे ही प्राधिकरण द्वारा प्रश्नावली भरी जाती है और प्रस्तुत की जाती हैपूरी रिपोर्ट स्वचालित रूप से पोर्टल पर तैयार हो जाती है। 24 जुलाई 2023 तक 32 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा मासी पोर्टल पर 4268 जांचें पूरी कर ली गई हैं।

किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015, के तहत प्रत्येक जिले में कम से कम एक बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) स्थापित करना अनिवार्य है। इसके तहतदेखभाल और संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों की देखभालसंरक्षणउपचारविकास और पुनर्वास के मामलों का निपटान करना और उनकी बुनियादी जरूरतों तथा मानवाधिकारों की सुरक्षा प्रदान करना है। सीडब्ल्यूसी की संरचना और कार्यप्रणाली किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015 और उसके नियमों के अनुसार है।

मिशन वात्सल्य योजना प्रत्येक जिले में सीडब्ल्यूसी की स्थापना की सुविधा और उनके प्रभावी कामकाज को सुनिश्चित करने के लिए राज्यों/केंद्र-शासित प्रदेशों को बुनियादी ढांचा और वित्तीय सहायता प्रदान करती है। सीडब्ल्यूसी किशोर न्याय अधिनियम, 2015 समय-समय पर संशोधित नियमों में निर्धारित कार्यों और भूमिकाएं निर्धारित करता है।

 

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