टॉयलेट क्रांति के जनक डॉ. पाठक नहीं रहे... पीएम मोदी ने कहा, देश के लिए बड़ी क्षति
2023-08-16 12:33 PM
307
टॉयलेट क्रांति के जनक और सुलभ इंटरनेशनल के संस्थापक- सामाजिक कार्यकर्ता बिंदेश्वर पाठक का मंगलवार को कार्डियक अरेस्ट से दिल्ली के एम्स में निधन हो गया। वे 80 साल के थे। पाठक को कई लोग 'स्वच्छता सांता क्लॉज' के नाम से बुलाते थे तो कोई भारत का टॉयलेट मैन। पाठक ने स्वतंत्रता दिवस पर सुबह सुलभ इंटरनेशनल कार्यालय में राष्ट्रीय ध्वज फहराया और उसके तुरंत बाद गिर गए। तत्काल उन्हें एम्स ले जाया गया, जहां डॉक्टर्स ने मृत घोषित कर दिया।
सुलभ इंटरनेशनल एक सामाजिक सेवा संगठन है, जो शिक्षा के जरिए मानव अधिकारों, पर्यावरण स्वच्छता, वेस्ट मैनेजमेंट और सुधारों को बढ़ावा देने के लिए काम करता है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत अन्य नेताओं ने पाठक के निधन पर शोक जताया है। पीएम ने कहा, डॉ. बिंदेश्वर पाठक का निधन हमारे देश के लिए एक गहरी क्षति है। वे एक दूरदर्शी व्यक्ति थे जिन्होंने सामाजिक प्रगति और वंचितों को सशक्त बनाने के लिए बड़े पैमाने पर काम किया। मोदी ने कहा, बिंदेश्वर जी ने स्वच्छ भारत के निर्माण को अपना मिशन बनाया। उन्होंने स्वच्छ भारत मिशन को जबरदस्त समर्थन दिया। हमारी विभिन्न बातचीत के दौरान स्वच्छता के प्रति उनका जुनून हमेशा दिखाई देता था।
बिंदेश्वर पाठक ने 1970 में सुलभ इंटरनेशनल की स्थापना की। संस्था का उद्देश्य खुले में शौच और अस्वच्छ सार्वजनिक शौचालयों को खत्म करना था। आगे चलकर सुलभ नाम सार्वजनिक शौचालय का पर्याय बन गया। संगठन के अग्रणी प्रयासों से सुलभ शौचालय की दिशा में क्रांतिकारी काम हुआ। सस्ते टॉयलेट सिस्टम बनाए गए, जिन्होंने लाखों लोगों के जीवन को बेहतर और स्वस्थ बनाया। सुलभ शौचालय ने स्वच्छता प्रथाओं में क्रांति लाई, जिससे लाखों लोगों को स्वच्छ और सम्मानजनक शौचालय सुविधाएं उपलब्ध हुईं।