देश-विदेश

पारंपरिक चिकित्सा के पहले महाकुंभ में जुटे 75 से अधिक देशों के प्रतिनिधि

नईदिल्ली। दुनिया भर की पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के धुरंधरों को एक मंच पर लाकर अनेक महत्वपूर्ण पहलुओं पर संवाद करने के लिए आयोजित पहली विश्व स्वास्थ्य संगठन की पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों पर पहली ग्लोबल समिट का उद्धाटन डब्ल्यूएचओ के महासचिव डॉ. ट्रेडोस एडनोम गेब्रेयेसस ने ब्रहस्पतिवार को गांधीनगर में किया। अपने संबोधन में उन्होंने पारंपरिक चिकित्सा के क्षेत्र में भारत की ऐतिहासिक पहल की जमकर तारीफ की और कहा कि हम पारंपरिकपूरक और एकीकृत चिकित्सा के जरिए दुनिया को स्वस्थ बना सकते हैं।

उल्लेखनीय है कि इस शिखर सम्मेलन में 75 से भी अधिक देशों के प्रतिनिधि और अनेक देशों के स्वास्थ्य मंत्री भाग ले रहे हैं। अपने संबोधन में डॉ. ट्रेडोस ने खास तौर पर भारत के घर-घर में पूजी जाने वाली तुलसी का जिक्र किया। उन्होंने तुलसी के गुणों का वर्णन करते हुए कहा कि ये मेरा सौभाग्य है कि मुझे तुलसी पौधा लगाने का मौका मिला ।

केंद्रीय आयुष मंत्री सर्बानंद सोणोवाल ने इस शिखर सम्मेलन का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देते हुए कहा कि उनके सक्षम और समर्थ नेतृत्व में पारंपरिक चिकित्सा को नई पहचान मिली है और आयुष मंत्रालय पारंपरिक चिकित्सा को जन-जन तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। केंद्रीय स्वास्थ्य परिवार कल्याण मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने इस अवसर पर कहा कि पारंपरिक औषधियों की फार्मास्यूटिकल और कॉस्मेटिक उद्योग में जबर्दस्त मांग है। दुनिया के 170 से भी अधिक देशों में इन औषधियों का किसी न किसी रूप में उपयोग हो रहा है।

शिखर सम्मेलन में सूत्र वाक्यों का कई बार जिक्र हुआ । वसुधैव कुटंबकम्सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाअच्छे विचारों को हर तरफ से आने दोसत्य एक है लेकिन उस तक पहुंचने के रास्ते अलग-अलग हैंसोना-चांदी से ज्यादा महत्वपूर्ण है स्वास्थ्य-जैसे प्रेरणादायी वाक्यों के जरिए कई वक्ताओं ने दुनिया को अपना सार्थक संदेश दिया ।

विश्व के पहले पारंपरिक चिकित्सा वैश्विक शिखर सम्मेलन के पहले दिन ट्रेडिशनल मेडिसिन से जुड़ी फिल्म और वृत्त चित्र भी दिखाये गये । इन फिल्मों में देश- दुनिया के अलग अलग कोने में प्रचलित पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को दिखाया गया और संदेश दिया गया कि समाज को चुस्त-दुरूस्त और तंदुरूस्त ऱखने का रास्ता पारंपरिक चिकित्सा के घर से होकर ही गुजरता है ।

 

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