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दुनिया की सबसे बड़ी डेमोक्रेसी में चुनाव करने के लिए पहाड़, नदियां और समंदर तक पार कर जातें हैं चुनाव अधिकारी

डेस्क | भारत दुनिया की सबसे बड़ी डेमोक्रेसी है, तो जाहिर सी बात है कि यहां का चुनाव भी सबसे बड़ा व अहम् होगा | भारत में वोटिंग कराना आसान नहीं होता, क्योंकि इस बात को सुनिश्चित करना होता कि एक भी वोटर छूटने न पाए | चुनाव अधिकारियों को मतदातों तक पहुंचने के लिए पहाड़, पर्वत, नदियों और समंदर से लेकर नक्सली इलाकों अपनी जान जोखिम में डालकर पार करना पड़ता है | 

सीआरपीएफ का एक जवान पश्चिम बंगाल में अलीपुरद्वार (Alipurduar) जिले के बक्सा टाइट रिजर्व फॉरेस्ट (Buxa Tiger Reserve Forest) के रिमोट एरिया में सेक्यूरिटी डिवाइस ले जा रहा है ताकि इस क्षेत्र के लोग बिना किसी रुकावट के अपने मताधिकारों का प्रयोग कर सकें | 

मेघालय के नोंग्रियाट गांव में स्थित फेमस रूट ब्रिज के नीचे एक सुरक्षाकर्मी इलेक्शन ड्यूटी कर रहा है जहां से वीवीपैट मशीन, वोर्टर्स और चुनाव अधिकारी गुजरते हैं | कोशिश है कि इस पुल पर कोई खतरा न हो, जिससे मतदात कराने में कोई दिक्कत न आए | 

राजस्थान में पोलिंग कराना काफी मुश्किल काम है क्योंकि यहां गर्मी बहुत ज्यादा पड़ती है | जहां चुनाव आयोग के कर्मचारी धूप की तपिश से राहत पाने के लिए पानी के जार बांट रहे हैं | 

असम के माजुली रिवर आइलैंड पोलिंग और पुलिस ऑफिसर बोट के जरिए ईवीएम और वीवीपैट मशीन को मतदाता केंद्रों में पहुंचा रहे हैं, ताकि वोटर्स को अपने अधिकारों का प्रयोग करने के लिए कहीं दूर न जाना पड़े | 

इलेक्शन कमीशन की टीम के लिए सबसे मुश्किल काम अंडमान निकोबार में होता है जहां अफ़्रा बे (Afra Bay), पिलोउलो (Piloulow), पिलोभा (Pilobha), पिलोपेटिया (Pilopatia), पिलोपांजा (Pilopanja) और मकाचुआ (Makachua) जैसे सुदूर इलाकों में शिप या बोट के जरिए पोलिंग मैटेरियल्स पहुंचाया जाता है | 

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