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यमुनोत्री धाम में यात्रियों के जाम से बुरे हाल, यमुनोत्री धाम के कपाट 10 मई को खोल दिए गए थे

डेस्क | चारधाम यात्रा को सुचारू बनाने के लिए प्रशासन लाख दावे कर रहा है, फिर भी यमुनोत्री धाम में अव्यवस्थाएं फैली हुई हैं | यमुनोत्री धाम के कपाट 10 मई को खोल दिए गए थे, पहले ही दिन दर्शनों के लिए यात्रियों का सैलाब उमड़ पड़ा। लेकिन रास्ते में कोई सुचारू व्यवस्था न होने के कारण संकरे रास्ते पर हजारों यात्री एक दूसरे से चिपक चिपक कर चलते रहे। गनीमत रही कि धक्कामुक्की नहीं हुई वरना बड़ा हादसा कभी हो सकता था। जिला प्रशासन ने शनिवार को वीडियो जारी कर कहा है कि यात्रा मार्ग पर व्यवस्थाएं सुचारू हैं और अब ऐसी स्थिति नहीं है।

यमुनोत्री धाम के सड़क पड़ाव स्थल जानकी चट्टी और खरसाली में पार्किंग की व्यवस्था भी बहुत बुरी है। यात्रा व्यवस्थाओं को लेकर स्थानीय व्यवसायों और तीर्थ पुरोहितों ने भी आक्रोश व्यक्त किया है। 

मंदिर समिति भी ठीक से कोई ठोस व्यवस्था नहीं कर पा रही है। सही ढंग से यमुनोत्री में तीर्थ यात्रियों को दर्शन की व्यवस्था नहीं की जारी है। मंदिर समिति की जहां पर दुकानें हैं। वही पर तीर्थ यात्रियों के लिए रैन बसेरा एवं शौचालय बनना चाहिए था पर ऐसा नहीं हो पाया है।

आखिर जिला पंचायत और पुलिस प्रशासन राष्ट्रीय राजमार्ग के पाली गाड़ में बैरियर क्यों लग रहा है ये भी समझ से परे है।‌ यहां तीर्थ यात्रियों से टैक्स भी वसूला जा रहा है‌। जबकि सुविधा कुछ नहीं दी जा रही है। पैदल यात्रा मार्ग पर भी घोड़ा संचालन और डंडी कांडी संचालन की सही व्यवस्था नहीं हो पाई है।

हालांकि जिला प्रशासन ने शनिवार को लगातार फोटो औऱ वीडियो जारी कर कहा है कि अब यात्रा मार्ग पर जाम जैसी कोई स्थिति नहीं है। जानकी चट्टी और खरसाली में यात्रियों हेतु पार्किंग की उचित व्यवस्था की गई है। जानकी चट्टी से आगे पैदल यात्रियों का आवागमन सुचारू रूप से हो रहा है | साथ ही घोड़े खच्चर और कंडी वाले भी आसानी से आ जा रहे हैं।

यमुनोत्री धाम में पहले ही दिन 12 हजार से अधिक लोगों के पहुंचने के बाद सवालों का सिलसिला शुरू हो गया। जानकीचट्टी से यमुनोत्री धाम तक करीब 5 किलोमीटर लंबे पैदल मार्ग पर संकरे रास्तों में भारी भीड़ उमड़ने के कारण जाम जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई है। संकरी जगह पर हजारों तीर्थयात्री इकट्टा हुए हैं। लोग न आगे बढ़ रहे पा रहे थे, न पीछे जा पा रहे थे। घोड़ा और खच्चर वाले अपने-अपने स्थान पर भी पहले दिन उतर नहीं पाए। पालकी वालों को भी कोई मदद नहीं मिली थी।

 

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