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अरुणाचल प्रदेश में भाजपा की ऐतिहासिक जीत, 60 में से 46 सीटों पर किया कब्जा

अरुणाचल-सिक्किम में जश्न शुरू, थोड़ी देर में राज्यपाल से मिलेंगे दोनों राज्यों के सीएम

डेस्क | भाजपा ने अरुणाचल प्रदेश में लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी करते हुए, 60 सदस्यीय विधानसभा में 46 सीट जीतकर बहुमत हासिल कर लिया है |  निर्वाचन आयोग के अधिकारियों ने यह जानकारी दी | राज्य में 60 में से 50 विधानसभा सीट के लिए 19 अप्रैल को लोकसभा चुनाव के साथ मतदान हुआ था. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने 10 सीट पहले ही निर्विरोध जीत ली थीं | अधिकारियों के अनुसार, जिन 50 सीट पर मतदान हुआ, उनमें से भाजपा ने 36 सीट पर जीत दर्ज की और मुख्यमंत्री पेमा खांडू निर्विरोध जीतने वाले 10 उम्मीदवारों में से एक हैं | पूर्वोत्तर के दो राज्यों अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम में विधानसभा चुनाव के नतीजे आ गए। सिक्किम में सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा (एसकेएम) ने भारी बहुमत के साथ जीत हसिल की। वहीं, अरुणाचल प्रदेश में एक बार फिर पेमा खांडू सरकार (भाजपा) की वापसी हुई।दोनों ही राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने अपनी-अपनी सीट से जीत हासिल की।

सिक्किम की 32 सीटों में एसकेएम ने 31 सीटें जीतीं, जबकि एक सीट सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट (एसडीएफ) के खाते में गई। अरुणाचल प्रदेश की 60 सीटों पर भाजपा ने 46 सीटों पर जीत हासिल की। इसके अलावा कांग्रेस को एक, एनपीपी को पांच और अन्य को आठ सीटों पर जीत मिलीं। इस बीच, दोनों ही राज्यों में कार्यकर्ता खुशियां मना रहे हैं। दोपहर बाद दोनों ही राज्यों के मुख्यमंत्री राज्यपाल से मिल सकते है |

2019 के अरुणाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 41 सीटें जीतीं और पेमा खांडू फिर से मुख्यमंत्री बने। कांग्रेस ने केवल 4 सीटें जीतीं जबकि जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) और एनपीपी ने क्रमशः 7 और 5 सीटें जीतीं। इससे पहले 2014 के में हुए अरुणाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 42 सीटें जीतीं, जबकि भाजपा केवल 11 सीटें जीतने में सफल रही थी। पीपुल्स पार्टी ऑफ अरुणाचल (पीपीए) ने 5 सीटें जीतीं। लेकिन प्रदेश में राजनीतिक उठा-पटक के बाद जुुलाई, 2016 में पेमा खांडू पहली बार प्रदेश के मुख्यमंत्री बने।

अरुणाचल प्रदेश में कोई बड़ी क्षेत्रीय राजनीतिक दल नहीं है। यहां पर भाजपा और कांग्रेस दो बड़े दल हैं और इन्हीं के बाच लड़ाई होती है। भाजपा ने राज्य की सभी 60 सीटों पर चुनाव लड़ा, जबकि कांग्रेस ने केवल 19 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे। भाजपा पहले ही बोमडिला, चौखम, ह्युलियांग, ईटानगर, मुक्तो, रोइंग, सागली, ताली, तालिहा और जीरो-हापोली सहित 10 सीटें बिना किसी चुनाव के जीत चुकी है।

एसकेएम ने 2019 में 24 साल 5 महीने और 15 दिन पुरानी एसडीएफ के मुख्यमंत्री पवन चामलिंग को हराया था। इस तरह से एसकेएम के प्रेम सिंह तमांग के नेतृत्व में सरकार बनाई थी। 2019 सिक्किम विधानसभा चुनाव में, एसकेएम ने 17 सीटों के साथ बहुमत हासिल किया और प्रेम सिंह मुख्यमंत्री बने। राज्य में मौजूदा एसडीएफ 15 सीटों पर सिमट गई थी। 2014 के सिक्किम विधानसभा चुनाव में एसडीएफ ने 22 सीटें जीतीं और पवन कुमार चामलिंग लगातार पांचवीं बार सीएम बने थे।

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