दूषित पानी से खैरागढ़ बीमार, नया करेला में 50 लोग प्रभावित; विभाग की लापरवाही फिर उजागर
2025-11-27 02:05 PM
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खैरागढ़। वर्षों से स्वच्छ पेयजल की मांग कर रहे खैरागढ़ क्षेत्र में अब हालात इतने बिगड़ गए हैं कि दूषित पानी लोगों की जान पर बन आया है। लिमउटोला में 31 अक्टूबर को 37 वर्षीय समारू गोंड की मौत के बाद भी प्रशासन और विभागों में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, जिसका नतीजा यह है कि अब नया करेला गांव में 50 से ज्यादा लोग उल्टी-दस्त और डायरिया से पीडि़त हो गए हैं। स्थिति गंभीर होने पर स्वास्थ्य विभाग को आपात चिकित्सा शिविर लगाना पड़ा, जबकि 5 मरीजों की हालत बिगडऩे पर उन्हें राजनांदगांव मेडिकल कॉलेज रेफर करना पड़ा।
लिमउटोला में हुई मौत के बाद ग्रामीणों ने पीएचई विभाग और पंचायत पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया था। गांव में पेयजल लाइन कई जगहों पर नालियों के पास से गुजरती है और लीकेज के कारण गंदा पानी सीधे सप्लाई लाइन में मिल रहा था। ग्रामीण बताते हैं कि शिकायतें लगातार की गईं, लेकिन विभाग ने समय रहते कोई कदम नहीं उठाया। परिणामस्वरूप अब नया करेला भी बीमारियों की चपेट में है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि लिमउटोला की घटना के बाद कार्रवाई होती, तो आज पूरा नया करेला गांव बीमारी से नहीं जूझ रहा होता। 23 नवंबर से मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। खैरागढ़ विकासखंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. विवेक सेन ने बताया कि बढ़ते मामलों को देखते हुए मेडिकल टीमों को सुबह, शाम और रात—तीनों शिफ्ट में तैनात किया गया है। स्वास्थ्य विभाग लगातार स्थिति पर नजर रखे हुए है।
उधर पीएचई विभाग ने पानी के सैंपल लेकर जांच शुरू की है और क्षतिग्रस्त पाइपलाइनों की मरम्मत की जा रही है। लेकिन बड़ा सवाल अभी भी बरकरार है—क्या विभाग हर बार तब सक्रिय होगा जब हालात गंभीर होकर अस्पतालों तक पहुंच जाएंगे?
समारू गोंड की मौत पहली चेतावनी थी और नया करेला में 50 लोग बीमार पडऩा दूसरी। ग्रामीणों का दर्द साफ है—कब तक वे दूषित पानी पीकर अपनी सेहत और जान जोखिम में डालते रहेंगे? प्रशासन और विभागों की धीमी कार्यवाही इस संकट को खत्म करने के बजाय और बढ़ा रही है।