रायपुर

विधानसभा में गूंजा बाघों के शिकार का मामला, सरकार से तीखे सवाल

रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा में ध्यानाकर्षण के जरिए नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने इंद्रावती टाइगर रिजर्व में बाघों के शिकार का मामला उठाया। महंत ने पूछा, मामले में गिरफ्तार आईबी के जवान का नाम सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया ? क्या इसमें कोई राजनीतिक सिंडिकेट है? अलर्ट जारी हुआ था फिर भी लापरवाही बरती गई।

वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा, किसी को बचाने की कोशिश नहीं की गई है, न ही किसी का नाम छिपाया गया। वन विभाग सक्रिय है। महंत ने कहा, टाइगर रिजर्व में चोरी हुई तो कैमरे 2 घंटे के लिए खराब कर दिए गए थे। आपने जवाब में माना है कि 30 महीने में 6 बाघ की मौत हुई। छत्तीसगढ़ में बाघों की चोरी हो रही है और कैमरे बंद हो जा रहे। मंत्री कश्यप ने कहा, कोई कैमरे में खराबी नहीं थी, बंद नहीं थे। 126 कैमरे लगाए गए हैं। बाघों की संख्या बढ़ रही है। दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

कांग्रेस विधायक विक्रम मंडावी ने वन मंत्री से पूछा, इंद्रावती टाइगर रिजर्व में कितने बाघ हैं ? मंत्री कश्यप ने कहा, 2022 की जानकारी के अनुसार 5 बाघों की पुष्टि हुई है, 6 बाघों के खाल मिले हैं। जो बाघ के खाल मिले हैं वो इंद्रावती के ही हैं, यह पुष्टि नहीं हुई है। विक्रम मंडावी ने पूछा, इंद्रावती टाइगर रिजर्व का वार्षिक बजट कितना होता है? इस पर मंत्री कश्यप ने कहा, 10 करोड़ प्रति वर्ष व्यय करते हैं।

नेताप्रतिपक्ष चरणदास महंत ने कहा, बस्तर में लाल आतंक की समाप्ति के बाद तस्कर सक्रिय हो गए हैं। इन्द्रावती टाइगर रिजर्व में पांच माह पूर्व तीन बाघ तथा एक सप्ताह पूर्व शिकार किए गए दो बाघों की खाल के साथ पुलिस एवं वन विभाग की संयुक्त टीम ने पांच लोगों को गिरफ्तार कर दो बाघों की खाल जब्त की गई है। खाल की लम्बाई के आधार पर इस बात की पुष्टि हुई है कि पांच माह पूर्व शिकार किए बाघ की उम्र ढाई साल तथा हाल के दिनों में शिकार किए गए बाघ की उम्र डेढ़ साल के आसपास थी। गिरफ्तार तस्कर महाराष्ट्र पुलिस के आईबी विभाग के हवलदार तथा सिपाही थे एवं उनकी पोस्टिंग छत्तीसगढ़ राज्य की सीमावर्ती पोस्ट में थी, परंतु वन विभाग ने उनके नामों का खुलासा नहीं किया है।

नेताप्रतिपक्ष ने कहा, प्रदेश में बाघों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए प्रतिवर्ष करोड़ों रुपये राज्य बजट से एवं अन्य मदों से खर्च किए जाते हैं, उसके बाद भी इस सरकार के अल्प कार्यकाल में सात आठ बाघों के शिकार हो जाने एवं उनके खाल तथा अंगों की तस्करी नहीं रोक पाने एवं विभाग की निष्क्रियता के कारण दुर्लभ प्राणियों के हो रहे शिकार एवं तस्करी से प्रदेश के वन्य जीव प्रेमियों एवं आम जनता में सरकार के प्रति रोष एवं आक्रोश व्याप्त है।

चरणदास महंत के प्रश्नों का जवाब देते हुए वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा, यह कहना सही नहीं है कि बस्तर में लाल आतंक की समाप्ति के बाद तस्कर सक्रिय हो गए हैं। यह कहना भी सही नहीं है कि इन्द्रावती टाइगर रिजर्व में पांच माह पूर्व तीन बाघों की शिकार की घटना हुई है। वास्तविकता यह है कि एक प्रकरण दंतेवाड़ा वनमण्डल में दिनांक 17/03/2026 को दर्ज किया गया है, जिसमें आरोपी से एक नग बाघ की खाल जब्त की गई थी। आरोपी के बयान अनुसार बाघ इन्द्रावती टाइगर रिजर्व के भीतर शिकार की गई थी। इस प्रकरण में 14 आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजा गया है, प्रकरण न्यायालय में विचाराधीन है।
मंत्री कश्यप ने कहा, 29 जून 2026 को मुखबिर से सूचना मिली कि दो व्यक्ति गढ़चिरौली (महाराष्ट्र) से बाघ की खाल लेकर छत्तीसगढ़ की ओर आ रहे हैं। तत्काल एक संयुक्त टीम गठित की गई। एंटी-पोचिंग टीम ने संयुक्त रूप से कार्यवाही करते हुए रात 11:20 बजे घेराबंदी कर कांकेर जिले में बांदे पखाजूर मार्ग पर दो संदिग्धों (1) बियेश्वर गेड़ाम ग्राम अहेरी, जिला गढ़चिरौली (महाराष्ट्र) एवं (2) बाबूराव मडावी, ग्राम गडअहेरी, जिला गढ़चिरौली (महाराष्ट्र) को रोका गया और तलाशी ली गई, जिनके पास से बाघ की 02 खालें, 13 मूंछें एवं मोटर साइकिल क्रमांक: MH 33 AJ 3872 जब्त की गई। पूछताछ में दोनों आरोपियों ने अपने आप को महाराष्ट्र पुलिस विभाग से संबद्ध होना बताया।