सफल नवाचार के लिए उद्यमी और निवेशक का लक्ष्य एक दूसरे के अनुरूप होः डॉ. रविन्द्र दुबे
रायपुर। पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट इनोवेशन काउंसिल द्वारा आयोजित विषय “युसिंग एआई फॉर फण्डरेसिंग एंड इन्वेस्टर पिच प्रिपरेशन” और “एक्सप्लोरिंग एन्त्रेप्रेंयूर्शिप इन शिपिंग इंडस्ट्रीज” का आयोजन 15 जुलाई यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मेसी विभाग में किया गया।
पंडित रविशंकर शुक्व विवि के आईआईसी अध्यक्ष प्रो. कविता ठाकुर ने बताया कि इंस्टीट्यूट इनोवेशन काउंसिल,यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मेसी अध्ययन शाला, इलेक्ट्रॉनिक्स & फोटोनिक्स अध्ययनशाला एवं अक्षय उर्जा विभाग एवं सेक्शन 8 , एनआईटी रायपुर के संयुक्त तत्वाधान में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती के आशीर्वाद के साथ दीप प्रज्वलित कर की गई इसके पश्चात कुलगीत गायन किया गया। यह कार्यक्रम माननीय कुलपति प्रो. सच्चिदानंद शुक्ल के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया, जो सदैव ऐसे कार्यक्रमों के लिए प्रेरणा स्रोत रहे हैं। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. रविन्द्र दुबे , मैनेजिंग डायरेक्टर, फिबोनाच्ची लर्निंग प्राइवेट लिमिटेड एवं कैप्टन मयंक मिश्रा, मैनेजिंग डायरेक्टर- कावमा शिप मैनेजमेंट लिमिटेड & डायरेक्टर – सीनों कॉसमॉस शिप मैनेजमेंट लिमिटेड, होन्गकोंग उपस्थित रहे।
डॉ. रविन्द्र दुबे ने अपने व्याख्यान में फंडरेज़िंग के संदर्भ में कहा कि निवेश प्राप्त होने के साथ ही जवाबदेही, समय-सीमा और नियमित रिपोर्टिंग जैसी अपेक्षाएं भी बढ़ जाती हैं। यदि उद्यमी और निवेशक की सोच एवं लक्ष्य एक-दूसरे के अनुरूप हों तो यह साझेदारी नवाचार को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकती है, जबकि असंतुलन की स्थिति में अनुसंधान प्रभावित हो सकता है। इसलिए सही निवेशक का चयन किसी भी स्टार्टअप की सफलता का महत्वपूर्ण आधार है।
सत्र के दौरान कुल संभावित बाजार (टीएएम), सेवा योग्य उपलब्ध बाजार (एसएएम) तथा वास्तविक रूप से प्राप्त किए जा सकने वाले बाजार (एसओएम) जैसी बाजार विश्लेषण की प्रमुख अवधारणाओं को सरल उदाहरणों के माध्यम से समझाया गया। डॉ. रविन्द्र दुबे ने बताया कि एआई आधारित चैटजीपीटी, जेमिनी एवं परप्लेक्सिटी जैसे उपकरणों से बाजार विश्लेषण एवं प्रतिस्पर्धी अध्ययन को सरल बनाया जा सकता हैं। निवेशकों के संभावित कठिन प्रश्नों के उत्तर देने का अभ्यास करने हेतु चैटजीपीटी एवं जेमिनी जैसे एआई उपकरणों का रोल-प्ले पार्टनर के रूप में उपयोग करने की जानकारी दी गई। वित्तीय मॉडलिंग एवं प्रोजेक्शन तैयार करने के लिए स्प्रेडशीट एआई को-पायलट तथा चैटजीपीटी जैसे एआई उपकरणों के उपयोग और विभिन्न व्यावसायिक परिदृश्यों के विश्लेषण की जानकारी प्रदान की गई। और अंत में उन्होंने ये बताने का प्रयाश किया कि AI पूरी तरह से एक लीवरेज टूल (क्षमता बढ़ाने वाले साधन) के रूप में काम करता है, न कि किसी जादुई बटन की तरह। यह प्रशासनिक और ड्राफ्टिंग के काम में लगने वाले महीनों के समय को घटाकर हफ्तों में बदल देता है, लेकिन किसी भी डील को फाइनल करने के लिए संस्थापकों को आज भी अपने वास्तविक मानवीय विश्वास, दीर्घकालिक निर्णय क्षमता और भरोसे को खुद ही सामने रखना होगा।
इसके बाद कैप्टन मयंक मिश्रा ने अपने व्याख्यान में शिपिंग उद्योग में उद्यमिता की संभावनाएँ विषय पर समुद्री परिवहन क्षेत्र में उपलब्ध व्यावसायिक अवसरों, नवाचार और वैश्विक व्यापार में शिपिंग उद्योग की महत्वपूर्ण भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला।
उन्होंने शिपिंग उद्योग की संरचना एवं विभिन्न प्रकार के जहाजों की भूमिका को भी विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि बल्क कैरियर का उपयोग लौह अयस्क, कोयला एवं अन्य थोक सामग्री के परिवहन के लिए किया जाता है, जबकि टैंकर कच्चे तेल को रिफाइनरियों तक पहुँचाने का कार्य करते हैं। इस संदर्भ में उन्होंने गुजरात स्थित विश्व की सबसे बड़ी जामनगर रिफाइनरी का उल्लेख करते हुए समुद्री परिवहन के महत्व पर प्रकाश डाला। इसके अतिरिक्त एलपीजी एवं एलएनजी गैस कैरियर की उन्नत तकनीक तथा उच्च लागत पर चर्चा करते हुए बताया कि एलएनजी कैरियर विश्व के सबसे महंगे जहाजों में शामिल हैं। वहीं कंटेनर शिप वैश्विक व्यापार में विभिन्न प्रकार के माल को कंटेनरों के माध्यम से एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
व्याख्यान के दौरान उन्होंने यह भी बताया कि शिपिंग उद्योग अत्यधिक पूंजी-प्रधान क्षेत्र है। उदाहरण स्वरूप, एक कंटेनर शिप की अनुमानित लागत लगभग 40–45 मिलियन अमेरिकी डॉलर होती है, जबकि अत्याधुनिक एलएनजी कैरियर की लागत लगभग 230 मिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँच सकती है। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी पूंजीगत आवश्यकताओं को देखते हुए निवेशकों के लिए परियोजना की व्यवहार्यता, जोखिम प्रबंधन तथा दीर्घकालिक वित्तीय योजना अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। इसलिए शिपिंग क्षेत्र में उद्यमिता के लिए तकनीकी दक्षता के साथ-साथ मजबूत व्यावसायिक रणनीति और निवेश की समझ भी आवश्यक है।
प्रोफेसर मंजू सिंह, कार्यक्रम समन्वयक, निर्देशक इंस्टिट्यूट ऑफ़ फार्मेसी | प्रोफेसर कविता ठाकुर, अध्यक्ष, इंस्टीट्यूट इनोवेशन काउंसिल एवं विभागाध्यक्ष, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं फोटोनिक्स अध्ययनशाला उनकी उपस्थिति ने कार्यक्रम को और भी सफल और प्रभावशाली बनाया। इस कार्यक्रम में एन आई टी के प्रोफ अनुज शुक्ला, र वि वि से एस. जे. डहरवल, प्रो. दीपेन्द्र सिंह, प्रो. अम्बर व्यास, प्रो. धर्मेन्द्र गंगेश्वर प्रोफेसर विशाल जैन , प्रोफेसर राजेंद्र जांगड़े, प्रोफेसर तिर्की के साथ ही इस कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के विभिन्न अध्ययनशाला के लगभग 50 विद्यार्थी सहित अक्षय ऊर्जा प्रौद्योगिकी, इलेक्ट्रॉनिक्स एंड फोटोनिक्स अध्ययन शाला एवं फार्मेसी विभाग के शिक्षक गण उपस्थित रहे। कार्यक्रम का सफल संचालन प्रिया नामदेव के द्वारा किया गया।