देश-विदेश
बिहार कोकिला शारदा सिन्हा ने दिल्ली एम्स में अंतिम सांस ली.. पीएम ने दी श्रद्धांजलि
डेस्क। बिहार कोकिला के नाम से प्रसिद्ध पद्म भूषण से सम्मानित शारदा सिन्हा का निधन हो गया। उन्होंने दिल्ली एम्स में अंतिम सांस ली। शारदा सिन्हा बीते छह वर्षों से ब्लड कैंसर से जूझ रही थीं। कुछ दिनों पहले उनकी तबियत बिगड़ी और उन्हें एम्स में भर्ती किया गया और सोमवार रात को उन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट दिया गया।
बता दें कि शारदा सिन्हा, जिन्हें बिहार कोकिला के नाम से भी जाना जाता है। उनके छठ पूजा के गीत लोगों के बीच काफी लोकप्रिय हैं। उन्होंने हिंदी फिल्मों में भी अपनी आवाज दी है।
भारत आटा और भारत चावल की खुदरा बिक्री के दूसरे चरण का शुभारंभ
डेस्क। केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने आज यहां राज्य मंत्री बीएल वर्मा की उपस्थिति में एनसीसीएफ, नेफेड और केंद्रीय भंडार की मोबाइल वैन को हरी झंडी दिखाकर भारत आटा और भारत चावल की खुदरा बिक्री के दूसरे चरण का शुभारंभ किया।
दूसरे चरण में उपभोक्ताओं को 30 रुपये प्रति किलोग्राम के अधिकतम खुदरा मूल्य की दर से भारत आटा और 34 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से भारत चावल उपलब्ध कराया जा रहा है। कार्यक्रम के दौरान मीडियाकर्मियों से बातचीत करते हुए जोशी ने कहा कि यह पहल उपभोक्ताओं को रियायती कीमतों पर आवश्यक खाद्य वस्तुओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए भारत सरकार की प्रतिबद्धता की पुष्टि है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत ब्रांड के अंतर्गत चावल, आटा और दाल जैसे आधारभूत खाद्य पदार्थों की खुदरा बिक्री के माध्यम से प्रत्यक्ष हस्तक्षेप ने मूल्यों में स्थिरता की व्यवस्था बनाए रखने में मदद की है।
दूसरे चरण में आरंभिक स्तर पर खुदरा बिक्री के लिए 3.69 लाख मीट्रिक टन गेहूं और 2.91 लाख मीट्रिक टन चावल उपलब्ध कराया गया है। पहले चरण में सामान्य उपभोक्ताओं को लगभग 15.20 लाख मीट्रिक टन भारत आटा और 14.58 लाख मीट्रिक टन भारत चावल रियायती दरों पर उपलब्ध कराया गया। भारत आटा और भारत चावल केन्द्रीय भंडार, नैफेड और एनसीसीएफ तथा ई-कॉमर्स/बड़ी श्रृंखला वाले खुदरा विक्रेताओं के स्टोर और मोबाइल वैन पर उपलब्ध होंगे। दूसरे चरण के दौरान 'भारत' ब्रांड आटा और चावल 5 किलोग्राम और 10 किलोग्राम के थैलों में बेचे जाएंगे।
पंजाब में धान की खरीद पर अद्यतन जानकारी देते हुए, केंद्रीय मंत्री ने पंजाब में 184 लाख मीट्रिक टन अनाज की खरीद के लक्ष्य अनुमान को प्राप्त करने और किसानों की ओर से मंडियों में लाए गए अनाज के हर एक दाने की खरीद करने के लिए केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।
4 नवंबर 2024 तक , पंजाब की मंडियों में कुल 104.63 लाख मीट्रिक टन धान आया, जिसमें से 98.42 लाख मीट्रिक टन की खरीद राज्य की एजेंसियों और भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) ने की है। यह खरीद ग्रेड 'ए' धान के लिए भारत सरकार द्वारा तय किए गए 2320 रुपये के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर की जा रही है। चालू खरीफ विपणन सीजन 2024-25 में अभी तक भारत सरकार ने कुल 20557 करोड़ रुपये के धान का क्रय किया है। इससे 5.38 लाख किसान लाभान्वित हुए हैं और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की राशि उनके बैंक खातों में जमा कर दी गई है।
रायपुर सेंट्रल जेल गेट पर भाई से मिलने आए बदमाश पर गोली चलाने वाले दो शूटर गिरफ्तार
रायपुर। रायपुर के सेंट्रल जेल में भाई से मिलने आए बदमाश ने जेल के गेट पर गोली चलाई। गोली चलाने वाले दो शूटर को पुलिस ने देर रात गिरफ्तार कर लिया है। एएसपी सिटी लखन पटेल, एएसपी क्राइम संदीप मित्तल ने बताया कि आरोपियों की धर पकड़ के लिए 10 अलग-अलग विशेष टीमों का गठन किया था।। रायपुर की सभी सीमाओं पर चेक पोस्ट लगाने के साथ ही नाकेबंदी भी लगायी गई।
संतोषीनगर के बदमाश साहिल को गोली मारने के लिए पांच युवक दो मोटरसाइकिल में निकले थे। गिरफ्तार हमलावर शेख शाहनवाज उर्फ शानू महाराज (25) तथा शाहरूख (19) हैं। रायपुर से बाहर भागने के फिराक में थे कि उन्हें रायपुर एवं दुर्ग जिले के सीमा पर नंदनवन के समीप घेराबंदी कर हिरासत में लिया गया। इनके तीसरे साथी हीरा छुरा की तलाश में छापेमारी चल रही है। तीनों मौदहापारा तालाबपार के निवासी बताए गए हैं।
बदमाशों से कट्टा बरामद कर लिया गया है, वारदात में इस्तेमाल बाइक जल्दी ही रिकवर हो जाएगी। आरोपियों के साथ दो और युवक एक बाइक पर कट्टा लेकर जेल गेट तक पहुंचे थे, ताकि ये तीनों चूके तो दूसरे गोली चला दे। इन दोनों के नाम भी पुलिस को मिल गए हैं। इस फायरिंग के बाद आधा दर्जन से ज्यादा युवक इन आरोपियों से 8-9 थे। जल्दी ही सभी गिरफ्तार कर ली जाएगी।
बता दें कि रायपुर में सोमवार को दोपहर 12 बजे सेंट्रल जेल के गेट के सामने खड़े संतोषीनगर के शेख साहिल को बाइक सवार हमलावर कट्टे से दो गोलियां मारकर भाग निकले थे। साहिल को गोलियां कंधे और पीठ पर लगी थीं। वह जेल में बंद अपने भाई से मिलने आया था। फिलहाल उसकी हालत खतरे से बाहर है।
कोल इंडिया लिमिटेड ने भविष्य के विकसित भारत विज़न के साथ मनाया 50वां स्थापना दिवस
डेस्क। कोयला मंत्रालय के अधीन कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) ने कल कोलकाता स्थित सीआईएल मुख्यालय में अपना 50वां स्थापना दिवस मनाया। इस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में कोयला सचिव विक्रम देव दत्त उपस्थित थे। इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में न केवल पिछले पांच दशकों में देश के ऊर्जा क्षेत्र में सीआईएल के उल्लेखनीय योगदान का जश्न मनाया गया, बल्कि इसके भविष्य की पहलों और रणनीतिक दिशा के लिए आधारशिला भी रखी गई।
केंद्रीय मंत्री जी किशन रेड्डी ने इस महत्वपूर्ण अवसर पर स्वर्ण जयंती ‘लोगो’ लॉन्च किया और शुभंकर "अंगारा" का अनावरण किया। यह ‘लोगो’ भारत के ऊर्जा क्षेत्र की रीढ़ के रूप में सीआईएल की महत्वपूर्ण भूमिका का प्रतीक है, जो नवाचार, प्रगति और निरंतरता के लिए कंपनी की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। शुभंकर कोयला खनिकों की ताकत और जीवटता का प्रतीक है, जो उनके साहस और समर्पण को दर्शाता है। शुभंकर रॉयल बंगाल टाइगर से प्रेरित है।
जी. किशन रेड्डी ने इस समारोह को संबोधित करते हुए कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) के 50 साल पूरे होने पर अधिकारियों, कर्मचारियों और श्रमिकों को हार्दिक बधाई दी और इस बात पर जोर दिया कि कोयला उत्पादन बढ़ाना और आयात कम करने के लिए आपूर्ति बढ़ाना सीआईएल की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने खनिकों के कल्याण और खदान बंद होने से प्रभावित समुदायों के पुनर्वास के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा, ‘’कोल इंडिया के उत्पादन में संविदा कर्मचारी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और मैं उनके लिए प्रदर्शन से जुड़े प्रोत्साहन (पीएलआई) को लागू करने के प्रबंधन के फैसले की सराहना करता हूं, जो वित्त वर्ष 2023-24 से प्रभावी होगा।’’
केन्द्रीय मंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में, नीलामी के जरिए कोयला खदानों के पारदर्शी आवंटन के माध्यम से कोयला उत्पादन को बढ़ाने के लिए वर्ष 2015 में कोयला खदान विशेष प्रावधान (सीएमएसपी) अधिनियम लागू किया गया था। यह पहल इस्पात, सीमेंट और बिजली उपयोगिताओं जैसे क्षेत्रों के लिए कोयले की उपलब्धता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण रही है। उन्होंने आगे कहा कि वर्ष 2020 में वाणिज्यिक कोयला खनन की शुरुआत से पारदर्शिता, व्यापार करने में आसानी और निवेश के अवसरों की शुरुआत हुई, जिससे कोयला क्षेत्र को सार्वजनिक करने में मदद मिली। सीआईएल में भरोसा जताते हुए उन्होंने कहा कि कंपनी के पास मौजूदा खुले बाजार परिदृश्य में प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता और प्रतिबद्धता है।
देश में नागरिक विमानों के विनिर्माण का मार्ग प्रशस्त होगा : मोदी
नई दिल्ली | प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि देश में रक्षा विनिर्माण इकोसिस्टम नयी ऊंचाई छू रहा है और इससे भविष्य में ‘मेड इन इंडिया नागरिक विमानों’ के बनाये जाने का मार्ग प्रशस्त – होगा।
मोदी ने सोमवार को यहां स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज़ के साथ टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड (टीएएसएल) परिसर में सी-295 सैन्य परिवहन विमान के निर्माण के लिए टाटा एयरक्राफ्ट कॉम्प्लेक्स का संयुक्त रूप से उद्घाटन किया। ये विमान वायु सेना की परिवहन जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण साबित होंगे। दोनों प्रधानमंत्रियों ने इस अवसर पर प्रदर्शित प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया।

इस अवसर पर गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत, गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल, केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और विदेश मंत्री एस जयशंकर सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि वह आज के कार्यक्रम को परिवहन विमान के निर्माण से परे देख रहे हैं। उन्होंने पिछले दशक में भारत के विमानन क्षेत्र की अभूतपूर्व वृद्धि और परिवर्तन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत देश के सैकड़ों छोटे शहरों को हवाई कनेक्टिविटी प्रदान कर रहा है, साथ ही देश को विमानन का केंद्र बनाने के लिए काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि यह पारिस्थितिकी तंत्र भविष्य में मेड इन इंडिया नागरिक विमानों के लिए भी मार्ग प्रशस्त करेगा। उन्होंने कहा कि विभिन्न भारतीय एयरलाइनों ने 1200 नए विमानों का ऑर्डर दिया है, इसका मतलब केवल यह है कि नव उद्घाटन कारखाना भविष्य में भारत और दुनिया की जरूरतों को पूरा करने के लिए नागरिक विमानों के डिजाइन से लेकर निर्माण तक प्रमुख भूमिका निभाएगा।
सीएसआईआर ने विशेष अभियान 4.0 के तहत : नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर बड़े पैमाने पर स्वच्छता अभियान चलाया
नई दिल्ली | वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद ने जारी विशेष अभियान 4.0 के तहत उत्तरी रेलवे के साथ मिलकर, नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर सफाई अभियान चलाया। सीएसआईआर के महानिदेशक डॉ. एन कलईसेलवी और नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के स्टेशन निदेशक महेश यादव ने इस सफाई अभियान का नेतृत्व किया। कार्यक्रम के दौरान, नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के सफाई मित्रों को सीएसआईआर द्वारा सम्मानित किया गया, जो सार्वजनिक स्वच्छता बनाए रखने में सफाई कर्मचारियों के योगदान के लिए सीएसआईआर की प्रशंसा को रेखांकित करता है। इस अभियान के दौरान, उत्तरी रेलवे ने रेलवे स्टेशन पर स्वच्छता बनाए रखने के लिए अपने विभिन्न उन्नत मोटर चालित उपकरणों और सफाई प्रणालियों का प्रदर्शन किया।

पर्यावरणीय स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए, सीएसआईआर के महानिदेशक तथा वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान विभाग (डीएसआईआर) के सचिव; सीएसआईआर के संयुक्त सचिव और सीएसआईआर-आईएमएमटी के निदेशक ने एक वृक्षारोपण अभियान का नेतृत्व किया। यह प्रयास सीएसआईआर की चल रही पहल #Plant4Mother और #EkPedMaaKeNaam के साथ जुड़ा हुआ था, जिसका उद्देश्य हरित क्षेत्र को बढ़ाना और पारिस्थितिक संतुलन को बढ़ावा देना है।
सीएसआईआर दल ने एक नाटक भी प्रस्तुत किया, जिसमें सीएसआईआर के योगदान को दर्शाया गया था तथा इसमें भारतीय रेलवे के साथ सहयोग और कई प्रौद्योगिकियां, विशेष रूप से अपशिष्ट प्रबंधन से संबंधित प्रौद्योगिकियां शामिल थीं।
इस कार्यक्रम की अध्यक्षता सीएसआईआर के महानिदेशक और डीएसआईआर के सचिव डॉ. एन कलैसेलवी ने की, जिसमें महेंद्र कुमार गुप्ता, संयुक्त सचिव (प्रशासन), डॉ. रामानुज नारायण, निदेशक, सीएसआईआर-आईएमएमटी, मयंक माथुर, मुख्य वैज्ञानिक और नोडल अधिकारी, विशेष अभियान 4.0, डॉ. एएस निर्मला देवी, प्रधान वैज्ञानिक और उप नोडल अधिकारी और सीएसआईआर के अन्य गणमान्य व्यक्ति शामिल हुए। उत्तर रेलवे से, महेश यादव, स्टेशन निदेशक और अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने इस कार्यक्रम में भाग लिया और अपना समर्थन दिया।
सीएसआईआर और भारतीय रेलवे के बीच ये भागीदारी स्वच्छ भारत अभियान के तहत विशेष अभियान 4.0 के लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में एक एकीकृत प्रयास का उदाहरण है।
2035 तक भारत के पास अपना खुद का अंतरिक्ष स्टेशन होगा : "भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन" के नाम से जाना जाएगा
इसरो और जैव प्रौद्योगिकी विभाग ने अंतरिक्ष तथा जैव प्रौद्योगिकी नवाचार के नए युग की शुरुआत करते हुए ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन पर किया हस्ताक्षर
डॉ. जितेंद्र सिंह का कहना है कि इसरो-डीबीटी समझौता ज्ञापन भारत को अंतरिक्ष तथा जैव प्रौद्योगिकी के एक नए युग में आगे बढ़ाएगा
जैव प्रौद्योगिकी की नई ऊंचाइयों तक पहुँच: डॉ. जितेंद्र सिंह ने ऐतिहासिक इसरो-डीबीटी सहयोग की सराहना की
नई दिल्ली | यह खुलासा भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) तथा जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी) के बीच एक ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर करने की घोषणा के बाद एक मीडियाकर्मी के सवाल का जवाब देते हुए, डॉ. जितेंद्र सिंह; विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार); पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार); प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री; कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय में राज्य मंत्री; परमाणु ऊर्जा विभाग में राज्य मंत्री; और अंतरिक्ष विभाग में राज्य मंत्री ने किया।

ईस महत्वपूर्ण विकास में, एमओयू भारत में वैज्ञानिक नवाचार के एक नए युग की शुरुआत करते हुए, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के साथ जैव प्रौद्योगिकी को एकीकृत करने के उद्देश्य से एक अद्वितीय सहयोग का प्रतीक है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने जैव प्रौद्योगिकी की परिवर्तनकारी यात्रा पर प्रकाश डाला, जो परंपरागत रूप से प्रयोगशालाओं तक ही सीमित रही थी और अब अंतरिक्ष के विशाल विस्तार तक पहुँच रही है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह समझौता ज्ञापन सैद्धांतिक अनुसंधान से आगे बढ़कर जैव प्रौद्योगिकी के व्यावहारिक अनुप्रयोगों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम का प्रतिनिधित्व करता है।
मंत्री ने इस सहयोग को संभव बनाने में उनके प्रयासों के लिए इसरो के अध्यक्ष एस. सोमनाथ और जैव प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव डॉ. राजेश गोखले की प्रशंसा की। उन्होंने दोनों विभागों की ऐतिहासिक यात्रा और उनकी सफलता को प्रेरित करने वाले दूरदर्शी नेतृत्व का उल्लेख किया।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने सार्वजनिक-निजी भागीदारी पर जोर दिया, जो भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र के तेजी से विकास में सहायक रही है। उन्होंने अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोलने हेतु प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को श्रेय दिया, जिससे नवाचार और उद्यमिता में वृद्धि हुई। मंत्री ने बताया कि अंतरिक्ष स्टार्टअप की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, लगभग 300 स्टार्टअप अब अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में योगदान दे रहे हैं।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने विशेष रूप से कोविड-19 महामारी के मद्देनजर जैव प्रौद्योगिकी की बढ़ती प्रमुखता के बारे में भी बात की। उन्होंने पहली डीएनए वैक्सीन विकसित करने में जैव प्रौद्योगिकी विभाग की भूमिका को स्वीकार किया, जिसने भारत की वैज्ञानिक क्षमताओं को वैश्विक पहचान दिलाई।
समझौता ज्ञापन कई प्रमुख पहलों की रूपरेखा तैयार करता है, जिसमें भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन की स्थापना और बायोई3 (अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और रोजगार के लिए जैव प्रौद्योगिकी) नीति का अनावरण शामिल है। इस नीति का लक्ष्य 2030 तक $300 बिलियन की जैव-अर्थव्यवस्था तक पहुँचने के लक्ष्य के साथ देश में उच्च-प्रदर्शन जैव-विनिर्माण को बढ़ावा देना है। सहयोग माइक्रोग्रैविटी अनुसंधान, अंतरिक्ष जैव प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष जैव-विनिर्माण, बायोएस्ट्रोनॉटिक्स और अंतरिक्ष जीव विज्ञान जैसे क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करेगा।
इस साझेदारी से राष्ट्रीय मानव अंतरिक्ष कार्यक्रम को लाभ होने तथा कुशल अपशिष्ट प्रबंधन और पुनर्चक्रण के लिए मानव स्वास्थ्य अनुसंधान, नवीन फार्मास्यूटिकल्स, पुनर्योजी चिकित्सा और जैव-आधारित प्रौद्योगिकियों में नवाचारों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। यह व्यावसायिक रूप से आकर्षक तकनीकी समाधान विकसित करने के लिए अंतरिक्ष और जैव प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में स्टार्टअप के लिए अवसर भी खोलेगा।
अपने संबोधन का समापन करते हुए, डॉ. जितेंद्र सिंह ने जैव-अंतरिक्ष विज्ञान और अंतरिक्ष जीव विज्ञान के एक नए युग की कल्पना करते हुए भविष्य के बारे में आशावाद व्यक्त किया। उन्होंने अभूतपूर्व अनुसंधान और नवाचार की क्षमता पर प्रकाश डाला, जिसे यह सहयोग उन्मुक्त कर सकता है, जिससे न केवल भारत बल्कि पूरे दुनिया भर को लाभ होगा।
इसरो और जैव प्रौद्योगिकी विभाग के बीच यह ऐतिहासिक साझेदारी विज्ञान और प्रौद्योगिकी में अभूतपूर्व प्रगति का मार्ग प्रशस्त करेगी, जिससे नवाचार में वैश्विक नेता के रूप में भारत की स्थिति मजबूत होगी।
इस ऐतिहासिक साझेदारी को चलाने वाली उच्च स्तरीय प्रतिबद्धता और सहयोगात्मक भावना को रेखांकित करते हुए, इस कार्यक्रम में इसरो के अध्यक्ष एस. सोमनाथ, जैव प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव डॉ. राजेश गोखले, आईसीजीईबी के निदेशक डॉ. रमेश वी. सोंती, जैव प्रौद्योगिकी विभाग में मुख्य वैज्ञानिक डॉ. अलका शर्मा और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया था।
भारतीय नौसेना ने ओडिशा में चक्रवात दाना से प्रभावित गांवों के लिए राहत कार्य आरंभ किए
नई दिल्ली | भारतीय नौसेना ने ओडिशा में चक्रवात दाना से हुई तबाही के पश्चात राहत कार्य आरंभ किए हैं। इन राहत कार्यों में कान्हापुर, बागपतिया, बरहीपुर, मगरकांडा, चारिघेरिया और सतभाया सहित प्रभावित गांवों की तत्काल जरूरतों पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
चक्रवात से प्रभावित लोगों को आवश्यक सहायता प्रदान करने के लिए बाटीपाड़ा और तलचुआ में राहत शिविर लगाए गए हैं। भोजन की तत्काल आवश्यकता को पूरा करने के लिए प्रभावित कुल 9,000 आबादी को भोजन वितरित किया गया है।

खाद्य राहत के अलावा, एनओआईसी (ओडीएस) ने राज्य एजेंसियों के साथ मिलकर एक चिकित्सा शिविर स्थापित किया है जो लगभग 400 व्यक्तियों को आवश्यक चिकित्सा सहायता प्रदान करता है। यह सुनिश्चित करता है कि इस संकट के दौरान स्वास्थ्य संबंधी आवश्यकताओं को अच्छी तरह से पूरा किया जाए।
दूरदराज के क्षेत्रों तक पहुँचने की चुनौतियों को पहचानते हुए जरूरतमंद लोगों को सीधे भोजन और चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के लिए दो मोबाइल राहत दल तैनात किए गए हैं।
चक्रवात दाना के पश्चात लोगों को उनका जीवन फिर से सामान्य बनाने में सहायता करने के प्रयास जारी हैं।
साइक्लोन दाना से ओडिशा में 1.75 लाख एकड़ में फसल बर्बाद : बिहार-झारखंड में बारिश
नई दिल्ली | मौसम विभाग के मुताबिक बंगाल की खाड़ी से उठा साइक्लोन दाना शनिवार रात तक पूरी तरह बेअसर हो जाएगा। तूफान के चलते पश्चिम बंगाल के पूर्वी बर्धमान, दक्षिण 24 परगना, कोलकाता और हावड़ा में 4 लोगों की मौत हो गई है।
ओडिशा में किसी की जान नहीं गई, लेकिन बारिश और तूफान से 1.75 लाख हेक्टेयर इलाके में फसल बर्बाद हो गई है। मोहन चरण मांझी ने बताया कि तुफान से पहले 8 लाख लोगों को रेस्क्यू कर लिया गया था।

दाना का असर आंध्र प्रदेश, झारखंड, बिहार, छत्तीसगढ़ और तमिलनाडु में भी पड़ा। बिहार और झारखंड में बारिश जारी है। झारखंड में तापमान 6 डिग्री गिर गया है। अगले 24 घंटे तक बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़ में बारिश का अनुमान है। पेड़-बिजली के खंभे उखड़े, बिहार-झारखंड में भी बारिश ओडिशा में सबसे ज्यादा नुकसान केंद्रपाड़ा, भद्रक और बालासोर जिलों में हुआ है। तेज हवा से कई पेड़ उखड़ गए। बिजली के खंभे टूट गए हैं। इससे कई इलाकों में बिजली गुल हो गई। तूफान के चलते नजदीकी राज्यों झारखंड, बिहार में भी बारिश हो रही है। दक्षिण बंगाल के 8 जिलों में भारी बारिश होती रही। कोलकाता में 24 घंटे में 4 इंच पानी बरसा। हालांकि, दोनों राज्यों में शुक्रवार सुबह 8 से 9 बजे के बीच हवाई और 10 बजे रेल ट्रैफिक बहाल कर दिया गया था। तूफान के बीच जन्मे 2,211 बच्चे, इनमें 18 जुड़वां तूफान के दौरान ओडिशा में 4,859 गर्भवतियों को प्रसव केंद्र भेजा गया था। इनमें से 2,211 ने 23 और 24 अक्टूबर को बच्चों को जन्म दिया। 1,858 बच्चे सामान्य डिलीवरी से हुए। नवजातों में 18 ट्विन्स हैं।
बिहार में इसका असर दिवाली यानी 31 अक्टूबर तक दिखेगा। 28 अक्टूबर तक राज्य के 19 जिलों में बादल छाए रहेंगे, हल्की बूंदा बांदी होगी। यहां 10 से 20 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवा भी चलेगी। तूफान के कारण चल रही तेज हवा के कारण जिन पौधों में दाने आ चुके हैं, वह गिर रहे हैं। छत्तीसगढ़ के जिलों में तूफान दाना का असर (शनिवार को) आज देखने को मिलेगा। ओडिशा से लगते प्रदेश के जिलों में हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। मौसम विभाग ने 12 जिलों के लिए यली अलर्ट जारी किया है।
इंडिया एआई और मेटा ने आईआईटी जोधपुर में सृजनात्मक एआई : सृजन केंद्र की स्थापना की घोषणा की
भारत में ओपन सोर्स एआई इनोवेशन, अनुसंधान एवं विकास और कौशल विकास को आगे बढ़ाने के लिए एमईआईटीवाई और मेटा ने सहयोग किया |
मेटा आईआईटी जोधपुर में जनरेटिव एआई, सृजन, (सृजन) (“जेनएआई सीओई”) केंद्र की स्थापना का समर्थन करेगा |
“युवएआई इनिशिएटिव फॉर स्किलिंग एंड कैपेसिटी बिल्डिंग” वास्तविक दुनिया के समाधानों के लिए ओपन-सोर्स एलएलएम का लाभ उठाते हुए एआई कौशल के साथ एक लाख छात्रों और युवा डेवलपर्स को सशक्त बनाएगी |

स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, कृषि, स्मार्ट शहरों, मोबिलिटी और वित्तीय समावेशन के प्रमुख क्षेत्रों को संबोधित करने के लिए सीओई और कौशल पहल
ये पहल अनुसंधान, कौशल विकास और एआई उन्नति में मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र के लिए महत्वपूर्ण हैं, साथ ही जिम्मेदार और नैतिकता को सुनिश्चित करते हैं: एस कृष्ण
नई दिल्ली | साथ ही अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) के सहयोग से भारत में ओपन सोर्स आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को आगे बढ़ाने के लिए "युवएआई इनिशिएटिव फॉर स्किलिंग एंड कैपेसिटी बिल्डिंग" की शुरुआत की है। यह साझेदारी स्वदेशी एआई अनुप्रयोगों के विकास, एआई में कौशल विकास को आगे बढ़ाने, तकनीकी श्रेष्ठता सुनिश्चित करने के भारत के एआई मिशन में योगदान देने के उद्देश्य से अनुसंधान क्षमताओं को बढ़ावा देने और भारत के लिए विशेष रूप से बनाए गए एआई समाधान बनाने की दृष्टि को सक्षम करेगी।
इस सहयोग के हिस्से के रूप में, मेटा आईआईटी जोधपुर में जनरेटिव एआई, सृजन (सृजन) ("जेनएआई सीओई") के लिए केंद्र की स्थापना का समर्थन करेगा। इस जेनएआई सीओई का उद्देश्य भारत में जिम्मेदार और नैतिक एआई प्रौद्योगिकियों के विकास को बढ़ावा देते हुए एआई में अनुसंधान और विकास को आगे बढ़ाना है। यह एआई प्रौद्योगिकी परिदृश्य में खुले विज्ञान नवाचार का समर्थन और संवर्धन करेगा।
शिक्षा, क्षमता निर्माण और नीति परामर्श के माध्यम से, केंद्र अगली पीढ़ी के शोधकर्ताओं, छात्रों और चिकित्सकों को जेनएआई प्रौद्योगिकियों के जिम्मेदार विकास और प्रसार के लिए आवश्यक ज्ञान और उपकरणों से सशक्त बनाएगा।
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) के सचिव श्री एस. कृष्णन ने सहयोगात्मक नवाचार की शक्ति पर प्रकाश डालते हुए इंडियाएआई, आईआईटी जोधपुर, एआईसीटीई और मेटा के बीच साझेदारी के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा, "ये पहल अभूतपूर्व अनुसंधान, कौशल विकास और ओपन-सोर्स नवाचार के लिए एक मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र बनाने, एआई तकनीक को आगे बढ़ाने और साथ ही इसकी जिम्मेदार और नैतिक प्रसार सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण हैं।" यह पहल देश के युवाओं को वैश्विक एआई क्षेत्र में नेतृत्व करने के लिए तैयार करके भारत के 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के महत्वाकांक्षी लक्ष्य का समर्थन करेगी, जिससे तकनीकी उन्नति और आर्थिक विकास में भारत की अग्रणी स्थिति सुनिश्चित होगी।
साझेदारी पर टिप्पणी करते हुए, एमईआईटीवाई के अपर सचिव, अभिषेक सिंह ने कहा, "भारत सरकार इंडिया एआई पहल के अंतर्गत समावेशी विकास को आगे बढ़ाने के लिए एआई नवाचार, कौशल और तकनीकी उन्नति के दृष्टिकोण का समर्थन कर रही है। मेटा जैसे उद्योग के नेताओं के साथ हमारा सहयोग इस दृष्टिकोण को साकार करने के लिए महत्वपूर्ण है। एआई में ओपन सोर्स नवाचार की संस्कृति को बढ़ावा देकर, उभरती प्रौद्योगिकियों में अनुसंधान और कौशल विकास को आगे बढ़ाकर, हम प्रतिभा की कमी को समाप्त रहे हैं और यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि हमारे युवा एआई क्रांति का नेतृत्व करने के लिए सुसज्जित हों, अंततः दायित्वपूर्ण विकास में एक वैश्विक नेतृत्व के रूप में भारत की स्थिति को सुरक्षित करें और एक मजबूत एआई इकोसिस्टम में योगदान दें।"
इस अवसर पर मेटा इंडिया के उपाध्यक्ष और सार्वजनिक नीति प्रमुख शिवनाथ ठुकराल ने कहा, "ओपन-सोर्स एआई के महत्व पर जोर देकर, मेटा एक ऐसे इकोसिस्टम को पोषित करने के लिए प्रतिबद्ध है, जहां स्वदेशी समाधान पनप सकें। आज की साझेदारी भारत में उभरती प्रौद्योगिकियों की उन्नति को आगे बढ़ाने के लिए हमारी गहरी प्रतिबद्धता का प्रमाण है, जबकि इंडिया एआई मिशन के साथ सहजता से संरेखित है। ये पहल अगली पीढ़ी के इनोवेटर्स को सशक्त बनाएगी और उन्हें वास्तविक दुनिया की चुनौतियों का सामना करने के लिए उपकरणों से लैस करेगी, जिससे अंततः भारत वैश्विक एआई उन्नति में सबसे आगे रहेगा।"
प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत मुद्रा ऋण अब 10 लाख रुपए से बढ़ाकर 20 लाख हो गया
रायपुर | केंद्रीय बजट 2024-25 में घोषणा के अनुरूप प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (पीएमएमवाई) के तहत मुद्रा ऋण की मौजूदा सीमा को 10 लाख रुपए से बढ़ाकर 20 लाख कर दिया गया है | यह वृद्धि मुद्रा योजना के समग्र उद्देश्य को प्रोत्साहन देने की एक और सकारात्मक पहल है | यह वृद्धि विशेष रूप से उभरते उद्यमियों के लिए लाभकारी है, जिससे उन्हें विकास और विस्तार में सहायता मिलेगी | यह पहल एक मजबूत उद्यमी इको-सिस्टम को बढ़ावा देने की सरकार की प्रतिबद्धता के अनुरूप है।

इस संबंध में जारी अधिसूचना के अनुसार तरुण प्लस की नई श्रेणी 10 लाख रुपए से अधिक और 20 लाख रुपए तक के ऋणों के लिए है | यह उन उद्यमियों को उपलब्ध होगी, जिन्होंने तरुण श्रेणी के अंतर्गत पिछले ऋणों का लाभ उठाते हुए उनका सफलतापूर्वक भुगतान भी किया है | 20 लाख रुपए तक के पीएमएमवाई ऋणों की गारंटी कवरेज माइक्रो यूनिट्स के लिए क्रेडिट गारंटी फंड (सीजीएफएमयू) के तहत प्रदान की जाएगी।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा, "पिछले 10 वर्षों में भारत-जर्मनी सहयोग में कई गुना वृद्धि हुई है"
भारत-जर्मनी विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सहयोग ने साझेदारी के 50 वर्ष पूरे होने का उत्सव मनाया: डॉ. जितेंद्र सिंह ने प्रमुख उपलब्धि और भविष्य की संभावनाओं पर प्रकाश डाला
भारत, जर्मनी के साथ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सहयोग के एक नए युग के लिए तैयार: डॉ. जितेंद्र सिंह
जर्मनी ने भारत के चंद्र मिशन की प्रशंसा की और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सहयोग में "मूनशॉट महत्वाकांक्षा" का आह्वान किया
भारत और जर्मनी ने नवाचार, प्रौद्योगिकी और अनुसंधान साझेदारी को प्रोत्साहन देने के लिए तीन ऐतिहासिक समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए
भारत के अंतरिक्ष और जैव प्रौद्योगिकी विकास को भारत-जर्मनी साझेदारी में प्रमुख उपलब्धि के रूप में रेखांकित किया गया

नई दिल्ली | पिछले 10 वर्षों में भारत-जर्मनी सहयोग में कई गुना वृद्धि हुई है"। यह बात केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री, परमाणु ऊर्जा विभाग, अंतरिक्ष विभाग, कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन विभाग राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने उस समय कही, जब जर्मनी की संघीय शिक्षा और अनुसंधान मंत्री बेट्टीना स्टार्क-वाटजिंगर ने उन्हें विज्ञान और प्रौद्योगिकी में भारत-जर्मनी सहयोग के स्वर्ण जयंती समारोह पर बधाई दी।
सुबह राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली पहुंची जर्मनी की मंत्री का पहला कार्यक्रम भारत के विज्ञान मंत्री के साथ एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल बैठक थी।
भारत और जर्मनी ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सफल सहयोग के 50 वर्ष पूरे होने पर एक ऐतिहासिक कार्यक्रम का आयोजन किया, जिसमें केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह और जर्मनी की संघीय शिक्षा और अनुसंधान मंत्री सुश्री बेट्टीना स्टार्क-वाटजिंगर भी शामिल हुईं। नई दिल्ली में आयोजित स्वर्ण जयंती समारोह में इस दीर्घकालिक साझेदारी के माध्यम से प्राप्त उल्लेखनीय प्रगति को दर्शाया गया और आने वाले दशकों में और अधिक गहन सहयोग के लिए मंच तैयार किया गया।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने सभा को संबोधित करते हुए इस बात पर बल दिया कि पिछले एक दशक में विज्ञान और प्रौद्योगिकी में भारत-जर्मनी साझेदारी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिसने विभिन्न वैज्ञानिक क्षेत्रों में दोनों देशों की प्रगति में योगदान दिया है। केंद्रीय मंत्री महोदय ने कहा, "यह स्वर्णिम सहयोग की स्वर्ण जयंती है।" "50 वर्ष पहले जो सहयोग शुरू हुआ था, वह एक मजबूत, बहुआयामी संबंध में बदल गया है जिसने अंतरिक्ष अनुसंधान से लेकर जैव प्रौद्योगिकी और जलवायु कार्रवाई से लेकर आर्टिफिशियल इंटैलिजेंस तक विज्ञान और प्रौद्योगिकी के लगभग हर पहलू को शामिल किया है।"
डॉ. जितेंद्र सिंह ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत की उल्लेखनीय प्रगति पर प्रकाश डालते हुए, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में वैश्विक नेतृत्व के रूप में भारत के उदय की ओर इशारा किया। उन्होंने कहा, "भारत की अंतरिक्ष यात्रा ने एक बड़ी छलांग लगाई है, जिसका समापन हमारे चंद्रयान-3 मिशन के माध्यम से हुआ, जिसने भारत को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरने वाला पहला देश बना दिया।" "यह प्रमुख उपलब्धि निजी क्षेत्र के लिए अंतरिक्ष क्षेत्र के खुलने के साथ, अंतरिक्ष अनुसंधान के भविष्य को अपनाने के लिए भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।"
इस कार्यक्रम में अंतर्राष्ट्रीय अनुसंधान प्रशिक्षण समूह की सफल स्थापना भी की गई, जो भारत और जर्मनी के बीच एक संयुक्त पहल है। यह पहल सुपर-मॉलिक्यूलर मैट्रिक्स में फोटोल्यूमिनेसेंस पर केंद्रित है। डॉ. जितेंद्र सिंह ने इस सहयोग को दोनों देशों की वैज्ञानिक क्षमता का प्रमाण बताया और द्विपक्षीय अनुसंधान और विकास के भविष्य के बारे में आशा व्यक्त की।
इस कार्यक्रम में भारत और जर्मनी दोनों देशों की कई प्रमुख हस्तियों ने भाग लिया, जिससे द्विपक्षीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी साझेदारी के महत्व पर और अधिक ध्यान दिया गया। प्रमुख उपस्थित लोगों में विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के सचिव प्रो. अभय करंदीकर, प्री-कॉम्पिटिटिव रिसर्च के निदेशक और अनुभाग प्रमुख डॉ. जोहान फेकल और जर्मन रिसर्च फाउंडेशन के उपाध्यक्ष प्रो. करिन जैकब्स शामिल थे। जर्मन अकादमिक एक्सचेंज सर्विस (डीएएडी) के अध्यक्ष प्रो. जॉयब्रत मुखर्जी, भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी (आईएनएसए) के अध्यक्ष प्रो. आशुतोष शर्मा और डीएसटी में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के प्रमुख डॉ. प्रवीणकुमार सोमसुंदरम भी इस अवसर पर मौजूद थे।
चक्रवात 'दाना' का कहर जारी : तेज बारिश के साथ तूफानी हवाएं
नई दिल्ली | ओडिशा के तट पर गंभीर चक्रवाती तूफान ‘दाना’ के पहुंचने की प्रक्रिया (लैंडफॉल) शुक्रवार सुबह पूरी हो गई | 'दाना' को यहां पहुंचने में कम से कम साढ़े 8 घंटे का समय लगा | आईएमडी के अनुसार, चक्रवाती तूफान ‘दाना’ के प्रभाव से हवाओं की गति 110 किलोमीटर प्रति घंटा थी और बाद में यह कमजोर हो कर चक्रवाती तूफान में तब्दील हो गया | अब इसके उत्तरी ओडिशा से होते हुए उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ने और अगले छह घंटों के दौरान धीरे-धीरे कमजोर होकर गहरे अवदाब में तब्दील होने की संभावना है |

IMD ने कहा कि 25 अक्टूबर को ओडिशा, गंगीय पश्चिम बंगाल में अलग-अलग स्थानों पर अत्यधिक भारी वर्षा होने की संभावना है | ओडिशा और पश्चिम बंगाल में लाखों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है | स्कूलों को बंद कर दिया गया है | 400 से अधिक रेलगाड़ियों को रद्द और उड़ानों को निलंबित कर दिया गया | हालांकि, कोलकाता और भुवनेश्वर एयरपोर्ट से अब उड़ानों का संचालन शुरू हो गया है |
ओडिशा के सीएम मोहन चरण माझी ने कहा, 'चक्रवाती तूफान दाना ने 24 और 25 अक्टूबर की रात को भीतरकनिका और धामरा तटों के बीच दस्तक दी | सतर्क प्रशासन और तैयारियों के कारण कोई हताहत नहीं हुआ | सरकार का 'शून्य हताहत' का लक्ष्य हासिल हो गया है | लगभग 6 लाख लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है | 6,000 गर्भवती महिलाओं को स्वास्थ्य केंद्रों में स्थानांतरित किया गया है |'
चक्रवाती तूफान के कारण भद्रक के धामरा के तटीय गांवों में सड़कें बंद हो गई हैं | स्थानीय लोगों को सड़कों पर गिरे पेड़ों को साफ करते देखा जा सकता है | सड़कें बंद हैं और कुछ घरों को भी नुकसान पहुंचा है |
भद्रक के धामरा में तेज़ हवाओं और बारिश के कारण पेड़ उखड़ गए हैं, इसलिए अग्निशमन सेवा दल द्वारा सड़कें साफ की जा रही हैं | ओडिशा अग्निशमन सेवा के दीपक कुमार ने ANI से कहा, 'यहां कई पेड़ उखड़ गए हैं, जिससे सड़कें अवरुद्ध हो गई हैं | सबसे पहले, हम एनएच और अन्य सड़कों को साफ़ करेंगे और फिर हम आवासीय क्षेत्रों की ओर बढ़ेंगे | हमारी दो टीमें धामरा में काम कर रही हैं | अभी तक हमारे पास किसी भी गंभीर नुकसान के बारे में कोई जानकारी नहीं है |'
ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी भुवनेश्वर में राजीव भवन में चक्रवात 'दाना' की लैंडफॉल के बाद की स्थिति की निगरानी कर रहे हैं | माझी के अनुसार, अब तक लगभग 5.84 लाख लोगों को आश्रय स्थलों तक पहुंचाया गया है |
भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, चक्रवात ‘दाना’ के मद्देनजर कोलकाता हवाई अड्डे पर गुरुवार शाम से 15 घंटे के लिए उड़ानों को स्थगित कर दिया गया | उड़ानों को शुक्रवार सुबह नौ बजे बहाल किया जाना है | इस बीच, हवाई अड्डा निदेशक ने बताया कि कोलकाता हवाई अड्डे से अंतिम उड़ान के रवाना होने के बाद टर्मिनल भवन के सभी प्रवेश और निकास द्वारों को सील कर दिया गया है |
ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में हवाई अड्डे के अधिकारियों ने चक्रवात ‘दाना’ के मद्देनजर 25 अक्टूबर को सुबह 8 बजे तक उड़ान संचालन को निलंबित करने का फैसला किया है | अधिकारी ने कहा कि उड़ान 15 घंटे तक निलंबित रहने के दौरान, घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों तरह की लगभग 40 उड़ानें प्रभावित होंगी | राज्य सरकार ने 23 से 25 अक्टूबर तक भुवनेश्वर में सभी शैक्षणिक संस्थान बंद कर दिए हैं |
चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ ने भारत को ‘सशक्त, सुरक्षित और विकसित’ बनाने के लिए : संयोजन-तालमेल अपनाने का आह्वान किया
चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ ने भारत को ‘सशक्त, सुरक्षित और विकसित’ बनाने के लिए रक्षा उद्योग, अनुसंधान एवं विकास संगठनों और सेना से संलयन और संयोजन-तालमेल अपनाने का आह्वान किया
नई दिल्ली | प्रमुख सेना अध्यक्ष जनरल अनिल चौहान ने 24 अक्टूबर, 2024 को प्रौद्योगिकी प्रबंधन पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन (टेकमा 2024) का आभासी माध्यम से उद्घाटन किया। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने मसूरी स्थित प्रौद्योगिकी प्रबंधन संस्थान में ‘विजन इंडिया @2047 के लिए रक्षा क्षेत्र में प्रौद्योगिकी प्रबंधन’ विषय पर इस सम्मेलन का आयोजन किया है। इसका उद्देश्य देश की रक्षा प्रौद्योगिकियों को वर्ष 2047 तक आत्मनिर्भर बनाने के राष्ट्रीय उद्देश्य में शामिल करना है।

प्रमुख सेनाध्यक्ष ने रक्षा उद्योग, अनुसंधान एवं विकास संगठनों और सेना से रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करने और भारत को सशक्त, सुरक्षित और विकसित भारत बनाने के लिए संलयन और तालमेल अपनाने का आह्वान किया। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ ने समय के साथ उन्नत बनने की आवश्यकता पर जोर देते हुए नवीन और अप्रतिम विचारों को सामने लाने का आह्वान किया जो सशस्त्र बलों और देश को रणनीतिक बढ़त दिलाए।
सम्मेलन की शुरूआत विजन इंडिया @ 2047 के लिए भविष्य की प्रौद्योगिकियों के इस्तेमाल और स्वदेशी क्षमताओं को मज़बूत करने पर एक गोलमेज चर्चा के साथ हुई। रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव और डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ. समीर वी कामत ने उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया। टेकमा-2024 के विषय हैं भविष्य की रक्षा तकनीकें, 2047 की रणनीतिक दृष्टि को सामने रखते हुए प्रौद्योगिकी प्रबंधन, रक्षा परियोजना प्रबंधन उत्कृष्टता और इंजीनियरिंग और रक्षा व्यावसायीकरण की दृष्टि से समुन्नतिकरण
टेकमा-2024 से प्राप्त ज्ञान और अनुभवों से भविष्य की रक्षा प्रौद्योगिकियों के लिए भारत के स्वदेशी अनुसंधान और विकास पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने, बहु-विषयी अनुसंधान क्षेत्रों की पहचान करने, परियोजना प्रबंधन प्रक्रियाओं में सुधार और तकनीकी, प्रचालन और कार्यान्वयन चुनौतियां दूर करने के समाधान विकसित होने की संभावना है। इससे भारत के 2047 तक वैश्विक नेता बनना सुनिश्चित होगा।
सिंगापुर भारत समुद्री द्विपक्षीय अभ्यास (सिम्बेक्स) 2024 : 23 से 29 अक्टूबर 2024 तक
नई दिल्ली | सिंगापुर भारत समुद्री द्विपक्षीय अभ्यास (सिम्बेक्स) का 31वां संस्करण 23 से 29 अक्टूबर 2024 तक, पूर्वी नौसेना कमान, विशाखापत्तनम में आयोजित हो रहा है। सिंगापुर गणराज्य के नौसेना जहाज आरएसएस टेनाशियस, जिसमें हेलीकॉप्टर शामिल हैं, सिम्बेक्स 2024 में भाग लेने 23 अक्टूबर 24 को विशाखापत्तनम पहुँचा है।

सिम्बेक्स, जो 1994 में 'एक्सरसाइज लायन किंग' के रूप में शुरू हुआ था, तब से भारतीय नौसेना और सिंगापुर गणराज्य की नौसेना (आरएसएन) के बीच सबसे महत्वपूर्ण द्विपक्षीय समुद्री सहयोगों में से एक बन गया है।
अभ्यास दो चरणों में आयोजित किया जाएगा - 23 से 25 अक्टूबर तक विशाखापत्तनम में बंदरगाह चरण और 28 से 29 अक्टूबर तक बंगाल की खाड़ी में समुद्री चरण। इस वर्ष के संस्करण का उद्देश्य भारत और सिंगापुर के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करना है, ताकि अंतःक्रियाशीलता बढ़ाई जा सके, समुद्री डोमेन को लेकर में सुधार हो सके और सामान्य समुद्री चुनौतियों का समाधान करने के लिए सहयोग को बढ़ावा दिया जा सके।
बंदरगाह चरण में विषय वस्तु विशेषज्ञ आदान-प्रदान (एसएमईई), क्रॉस-डेक विजिट्स, खेल कार्यक्रम और दोनों नौसेनाओं के कर्मियों के बीच पूर्व-नौकायन ब्रीफिंग शामिल होंगे। समुद्री चरण में उन्नत नौसेना अभ्यास देखने को मिलेंगे, जिसमें लाइव हथियार फायरिंग, पनडुब्बी रोधी युद्ध (एएसडब्ल्यू) प्रशिक्षण, सतह-रोधी और हवा-रोधी संचालन, समुद्री कौशल विकास और सामरिक युद्धाभ्यास शामिल हैं।
सिम्बेक्स 24 की शुरुआत के लिए उद्घाटन समारोह 24 अक्टूबर 24 को आईएनएस शिवालिक पर आयोजित किया जाएगा और इसमें पूर्वी बेड़े और सिंगापुर नौसेना की भाग लेने वाली इकाइयाँ शामिल होंगी।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उद्योगपतियों से की रीवा आरआईसी में वन-टू-वन चर्चा
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रीवा इंडस्ट्री कॉन्क्लेव (आरआईसी) में उद्योग जगत के प्रमुख उद्योगपतियों के साथ वन-टू-वन बैठक कर प्रदेश में औद्योगिक विकास और निवेश के नए अवसरों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि आरआईसी से रीवा प्रदेश का एक महत्वपूर्ण औद्योगिक केंद्र बनकर उभरेगा, जहाँ राज्य सरकार उद्योगपतियों को हर संभव सहयोग प्रदान करेगी। सरकार ने निवेश के लिए उद्योग-अनुकूल नीतियों को मजबूत किया है, जिससे प्रदेश में आर्थिक गतिविधियों को तेज़ी से बढ़ावा मिलेगा। उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल, एमएसएमई मंत्री चैतन्य काश्यप, मुख्य सचिव अनुराग जैन एवं प्रमुख सचिव औद्योगिक नीति एवं निवेश संवर्धन राघवेन्द्र कुमार सिंह उपस्थित रहे।

डालमिया सीमेंट के मैनेजिंग डायरेक्टर एवं सीईओ पुनीत डालमिया ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को प्रदेश में सीमेंट प्लांट एवं नवीन माइनिंग परियोजना स्थापित करने की जानकारी दी। उन्होंने ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देने एवं अपशिष्ट प्रबंधन की दिशा में अपनी कार्य योजना बताई।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव को एस. गोयनका ग्रुप के एमडी आनंद गोयनका ने खनन क्षेत्र अन्तर्गत क्लिंकर प्लांट लगाए जाने की योजना बताई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उन्हें आश्वस्त किया कि इस परियोजना के लिए सरकार द्वारा अतिरिक्त भूमि आवंटन, एकल खिड़की अनुमतियाँ एवं पूंजीगत सहायता प्रदान की जाएगी। पेट्रो-केमिकल उद्योग के विकास के अवसरों पर चर्चा करते हुए बीपीसीएल सीजीएम कपिल राजोरिया ने सिंगरौली जिले में पेट्रोलियम स्टोरेज एवं डिस्ट्रीब्यूशन डिपो स्थापित किए जाने की योजना बताई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उन्हें आश्वस्त किया कि डिस्ट्रीब्यूशन डिपो तक पहुंच मार्ग के लिए भूमि और कनेक्टिविटी संबंधी मुद्दों को हल किया जाएगा।
रामा ग्रुप के मैनेजिंग डायरेक्टर नरेश गोयल ने मेन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र में अपनी परियोजनाओं से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि इस परियोजना से लगभग 2000 से अधिक व्यक्तियों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रुप से रोजगार के अवसर प्रदान किए जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को स्टार ग्रुप के चेयरमैन रमेश सिंह ने पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने के लिए कम्प्रेस्ड बायोगैस प्लांट के संबंध में जानकारी दी। इसी क्रम में रिलायंस बॉयो एनर्जी बिजनेस हेड हरींद्र के. त्रिपाठी, सोलर एएमसी के सीईओ दिगेंद्र राठौड़ एवं महान एनर्जी लिमिटेड अडानी समूह के क्लस्टर प्रमुख बच्चा प्रसाद ने भी नवकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में संभावनाओं पर विचार साझा किए।
मेहरोत्रा बिल्डकॉन प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर अतुल मेहरोत्रा ने प्रदेश सरकार की औद्योगिक नीति की सराहना करते हुए खाद्य प्र-संस्करण उद्योग के विकास की दिशा में अपनी योजनाएं साझा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने खाद्य प्र-संस्करण उद्योग अंतर्गत अन्न के उत्पाद भी तैयार करने के लिए उन्हें प्रोत्साहित किया। केजेएस सीमेंट के डायरेक्टर के.एस. सिंघवी ने मैहर में सीमेंट उद्योग के विस्तारीकरण पर अपनी योजना बताई और इसके लिए वित्तीय सहायता एवं भूमि आवंटन की चर्चा की। आदित्य बिरला अल्ट्राटेक के चीफ ऑपरेशन ऑफिसर मैन्युफैक्चरिंग - सेन्ट्रल क्ल्स्टर राजेन्द्र काबरा ने निवेश के संबंध में चर्चा की।
वास्टेक इंक के निदेशक सिद्धार्थ शुक्ला ने आईटी एवं सेमीकंडक्टर क्षेत्र में अपनी योजनाओं को प्रस्तुत किया और भोपाल में फरवरी 2025 में होने वाले ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में अमेरिका में संचालित किए जा रहे डाटा सेंटर एवं ग्लोबल केपेबिलिटी सेंटर के प्रतिनिधियों को लेकर आने की इच्छा जाहिर की।बालाजी वेफर्स के एमपी हेड समीर पातर ने आरआईसी की प्रसंशा करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में यह कॉन्क्लेव विन्ध्य क्षेत्र के विकास में मील का पत्थर साबित होगी। पातर ने प्रदेश में खाद्य प्र-संस्करण क्षेत्र में अपार संभावनाओं से उन्हें अवगत कराया।
सुदर्शन टेक्नो सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड के सीईओ प्रतीक गोला ने रक्षा मेन्यूफैक्चरिंग तथा विजक्राफ्ट सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड के एमडी संतोष कांबले ने मैन्युफैक्चरिंग उद्योग में अपनी कंपनी की भूमिका के बारे में जानकारी दी।
अगरतला बांस और बेंत शिल्प के सतत विकास और संवर्धन पर केंद्रित एक अग्रणी पहल
रोजगार श्रृजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है अगरतला का बांस और बेंत विकास संस्थान
रायपुर | त्रिपुरा का बांस और बेंत विकास संस्थान (बीसीडीआई), अगरतला बांस और बेंत शिल्प के सतत विकास और संवर्धन पर केंद्रित एक अग्रणी पहल है । संस्थान का उद्देश्य स्थानीय कारीगरों और समुदायों को सशक्त बनाते हुए क्षेत्र के समृद्ध प्राकृतिक संसाधनों का दोहन करना है । यह प्रशिक्षण कार्यशालाओं, प्रदर्शनी क्षेत्रों और संसाधन केंद्रों सहित संरचित सुविधाएं प्रदान करता है । डिजाइनिंग पारंपरिक कारीगरी और आधुनिक कार्यक्षमता के एकीकरण को दर्शाता है, जो इसे सीखने और रचनात्मकता के लिए एक आकर्षक स्थान बनाता है। यह संस्थान न केवल त्रिपुरा राज्य में बल्कि सम्पूर्ण उत्तर पूर्वी राज्यों में रोजगार श्रृजन में महत्वपूर्ण निभा रहा है ।

संस्थान के प्रभारी अभिनव कांत ने बताया कि हस्तशिल्प कारीगरों को कौशल प्रदान करने के लिए 1974 में अगरतला में बांस और बेंत विकास संस्थान (बीसीडीआई) की स्थापना की गई थी । विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार के तहत एक स्वायत्त संस्थान नॉर्थ ईस्ट सेंटर फॉर टेक्नोलॉजी एप्लीकेशन एंड रीच (एनईसीटीएआर) को कौशल, डिजाइन, प्रौद्योगिकी, अनुसंधान और शिक्षा के क्षेत्र में बहु-विषयक सेवाएं प्रदान करने के उद्देश्य से संचालित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
उन्होंने बताया कि बांस त्रिपुरा के प्रमुख और महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधनों में से एक है। राज्य में सदाबहार प्रजातियों के जंगलों के पैच के साथ उष्णकटिबंधीय नम पर्णपाती वन हैं और बांस के बागानों के तहत एक बड़ा क्षेत्र राज्य में बांस की कम से कम 18 प्रजातियाँ आम तौर पर पाई जाती हैं। राज्य के जंगलों में बांस वाले क्षेत्र का विस्तार 3,246 वर्ग किमी है।
अभिनव कांत ने बोराक, मूली बांस, थाईलैण्ड बांस, कनक, कोरा, कैचरेज, बारी, ओरनामेंटल, डोलुबांस प्रतातियों के संबंध में विस्तृत जानकारी दी । इसके अलावा उन्होंने संथान में किए जा रहे अनुसंधान और किए जा रहे नवाचार के संबंध में भी बताया । उन्होंने बताया कि चीन की आपत्तियों के बावजूद बीसीडीआई को वाटर बाटल निर्माण पेंटेंट प्राप्त हुआ है ।
उन्होंने बांस से विभिन्न प्रकार के वस्तुओं के निर्माण में होने वाली प्रक्रियाओं जैसे बांस क्रॉस कट, स्प्लिटिंग, नॉट रिमूविंग, अगरबत्ती स्टिक मेकिंग, फोरसाइड प्लेनिंग, केमिकल ट्रिटमेंट, लेथ मशीन, लेज़र मशीन के माध्यम से बांस लकड़ी पर कारीगरी और खेल सामग्री निमार्ण संबंधी जानकारी छत्तीसगढ़ मीडिया टीम से साझा की।