देश-विदेश
सफेद कोट के पीछे काला सच’: कानपुर किडनी कांड में मास्टरमाइंड शिवम अग्रवाल के खुलासों ने हिलाई व्यवस्था
स्वच्छ भारत मिशन- अर्बन 2.0 के तहत नवाचार, गरिमा और समावेशी विकास की नई कहानी
नईदिल्ली। स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 के अंतर्गत देश के विभिन्न राज्यों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, सैनिटेशन इन्फ्रास्ट्रक्चर और नागरिक सहभागिता में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिले हैं। राज्यों ने बुनियादी ढांचे के विकास से लेकर व्यवहार परिवर्तन तक, कई क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की है। इन उपलब्धियों के बीच गुजरात ने तकनीकी नवाचार और सामाजिक कल्याण को जोड़कर स्वच्छता कर्मियों के जीवन स्तर को सुधारने कि दिशा में एक अग्रणी और प्रेरक मॉडल प्रस्तुत किया है।
राजकोट ने उन्नत रोबोटिक तकनीक को अपनाकर सीवर सफाई में क्रांतिकारी बदलाव लाया है। 2.29 करोड़ रुपये की लागत वाली इस पहल ने खतरनाक मैनुअल सफाई को समाप्त करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। अब सफाईमित्र ‘रोबोट ऑपरेटर’ के रूप में काम कर रहे हैं, जिससे उनकी सुरक्षा, सामाजिक स्थिति और कार्य दक्षता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। यह पहल "जीरो-ह्यूमन-एंट्री" विज़न को साकार करने की दिशा में एक मजबूत प्रयास है ताकि सफाईमित्रों को सीवर में सीधे प्रवेश का जोखिम ना उठाना पड़े।
राजकोट ने उन्नत रोबोटिक तकनीक को अपनाकर सीवर सफाई में क्रांतिकारी बदलाव लाया है। 2.29 करोड़ रुपये की लागत वाली इस पहल ने खतरनाक मैनुअल सफाई को समाप्त करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। अब सफाईमित्र ‘रोबोट ऑपरेटर’ के रूप में काम कर रहे हैं, जिससे उनकी सुरक्षा, सामाजिक स्थिति और कार्य दक्षता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। यह पहल "जीरो-ह्यूमन-एंट्री" विज़न को साकार करने की दिशा में एक मजबूत प्रयास है ताकि सफाईमित्रों को सीवर में सीधे प्रवेश का जोखिम ना उठाना पड़े।
वहीं, भरूच नगर पालिका द्वारा अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर महिला सफाईमित्रों के लिए आयोजित स्वास्थ्य शिविर भी गुजरात की संवेदनशीलता को दर्शाता है। 108 महिला कर्मियों के लिए आयोजित इस शिविर में स्वास्थ्य जांच, दवाइयों का वितरण और पोषण एवं स्वच्छता पर नियमित मार्गदर्शन दिया जा रहा है, जिससे उनके स्वास्थ्य और जागरूकता में वृद्धि हुई। इन पहलों के माध्यम से स्पष्ट होता है कि गुजरात न केवल स्वच्छता के क्षेत्र में अग्रणी है, बल्कि वह अपने स्वच्छता कर्मियों के जीवन स्तर को सुधारने के लिए भी प्रतिबद्ध है। SBM-U 2.0 के तहत राज्य ने तकनीक, संरचना और सामाजिक कल्याण को एक साथ जोड़कर एक संतुलित और सस्टेनेबल डेवलपमेंट मॉडल प्रस्तुत किया।
मिशन साधना सप्ताह के अंतर्गत भारतीय ज्ञान प्रणाली का एक संवादपूर्ण सत्र आयोजित
नईदिल्ली। उच्च शिक्षा विभाग ने 2 अप्रैल से 8 अप्रैल, 2026 तक मनाए गए स्ट्रेंथनिंग एडैप्टिव डेवलपमेंट एंड ह्यूमेन एप्टिट्यूड फॉर नेशनल एडवांसमेंट (साधना) सप्ताह 2026 के अंतर्गत भारतीय ज्ञान प्रणाली (आईकेएस) पर एक संवादपूर्ण सत्र का सफलतापूर्वक आयोजन किया। यह सप्ताह क्षमता विकास आयोग (सीबीसी) के स्थापना दिवस तथा नागरिक-केंद्रित सुशासन के लिए भारत की एक महत्वपूर्ण पहल, मिशन कर्मयोगी के पाँच वर्ष पूरे होने का प्रतीक है।
स्वागत भाषण उच्च शिक्षा विभाग के संयुक्त सचिव (प्रशासन) सैयद एकराम रिज़वी द्वारा दिया गया, जिन्होंने मिशन कर्मयोगी के अंतर्गत क्षमता विकास आयोग की भूमिका को रेखांकित करते हुए बताया कि यह नागरिक-केंद्रित सुशासन के लिए ज्ञान, कौशल और क्षमता बढ़ाने हेतु विभिन्न ऑनलाइन पाठ्यक्रम उपलब्ध कराता है।
यह सत्र समकालीन शिक्षा, अनुसंधान और शासन में भारतीय ज्ञान प्रणाली की प्रासंगिकता पर संरचित सहकर्मी अधिगम (पियर लर्निंग) तथा सार्थक विचार-विमर्श को प्रोत्साहित करने के लिए तैयार किया गया था। इसमें यह भी रेखांकित किया गया कि भारत की समृद्ध बौद्धिक परंपराएँ समस्या-समाधान, नवाचार और नीतिनिर्माण के आधुनिक दृष्टिकोणों को कैसे दिशा प्रदान कर सकती हैं।
कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण आईआईटी हैदराबाद के बायोमेडिकल इंजीनियरिंग विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. मोहन राघवन् का संबोधन था। ये हेरिटेज साइंस एंड टैक्नोलॉजी विभाग के संस्थापक प्रमुख रहे हैं और कृत्रिम बुद्धिमत्ता से भी जुड़े हुए हैं। डॉ. राघवन् ने अपने अंतर्विषयी कार्य से प्राप्त अनुभव साझा किए, जो प्रौद्योगिकी, विज्ञान और भारत की ज्ञान परंपराओं के बीच सेतु का कार्य करते हैं।
प्रोफेसर महोदय ने रेखांकित किया कि भले ही भारतीय ज्ञान प्रणाली (आईकेएस) की बाजार संभावनाएँ व्यापक हैं, किंतु इसकी वास्तविक शक्ति उच्च शिक्षा में इसकी परिवर्तनकारी भूमिका में निहित है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि आईकेएस को एक अलग विषय के रूप में नहीं, बल्कि एक बहु-विषयी रूपरेखा के रूप में देखा जाना चाहिए, जो विज्ञान, अभियांत्रिकी, मानविकी और प्रबंधन जैसे मौज़ूदा शैक्षणिक क्षेत्रों को समृद्ध कर सकती है। उच्च शिक्षा में आईकेएस के एकीकरण के माध्यम से विश्वविद्यालय रटने पर आधारित लर्निंग से आगे बढ़कर ऐसे समग्र मॉडल की ओर अग्रसर हो सकते हैं, जो ज्ञान, अनुप्रयोग और मूल्यों (धर्म) का समन्वय करता है। प्रोफेसर ने इस बात का भी उल्लेख किया कि यह दृष्टिकोण समकालीन शैक्षिक सुधारों के अनुरूप है, जो भारत की सांस्कृतिक और बौद्धिक विरासत पर आधारित अनुसंधान, नवाचार और समालोचनात्मक चिंतन को प्रोत्साहित करता है। आईकेएस को अपनाने वाले संस्थान अंतर्विषयी कार्यक्रम विकसित कर सकते हैं, मौलिक अनुसंधान को बढ़ावा दे सकते हैं तथा ऐसे स्नातक तैयार कर सकते हैं, जो न केवल दक्ष पेशेवर हों, बल्कि सांस्कृतिक रूप से सजग और सामाजिक रूप से उत्तरदायी नागरिक भी हों। उन्होंने बल दिया कि इस प्रकार का एकीकरण एक ऐसे शिक्षा तंत्र के निर्माण के लिए आवश्यक है, जो भविष्य के लिए तैयार हो, वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी हो और अपनी जड़ों से गहराई से जुड़ा हुआ हो।
नवागत जनपद सीईओ एवं विकास खंड अधिकारियों के अभिमुखीकरण प्रशिक्षण का हुआ समापन
भोपाल : भोपाल स्थित मध्यप्रदेश जल एवं भूमि प्रबन्ध संस्थान में नवागत मुख्य कार्यपालन अधिकारी (जनपद पंचायत) एवं विकास खंड अधिकारियों के अभिमुखीकरण प्रशिक्षण कार्यक्रम का आज समापन समारोह हुआ। इस अवसर पर पंचायत एवं ग्रामीण विकास एवं श्रम मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री पटेल ने नवनियुक्त अधिकारियों से सीधा संवाद करते हुए कहा कि आगामी 3 वर्षों में ऐसा कार्य करें जिससे उन्हें स्वयं संतुष्टि प्राप्त हो। उन्होंने कहा कि “आपकी आत्मसंतुष्टि ही इस बात का प्रमाण होगी कि आप आमजन के जीवन में कितना सकारात्मक परिवर्तन लाये है।”
मंत्री पटेल ने अधिकारियों से उनके कार्य क्षेत्र, भविष्य की योजनाओं एवं चुनौतियों पर चर्चा की तथा उन्हें निरंतर संवाद बनाए रखने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि संवाद बेहतर कार्य करने की प्रेरणा देता है और इससे प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता एवं प्रभावशीलता आती है।
उन्होंने आगे कहा कि कई बार हम यह सोचते हैं कि हम सभी कार्य कर सकते हैं, जो सकारात्मक सोच है, लेकिन अपनी रुचि और क्षमता के अनुसार कार्य करने से बेहतर परिणाम प्राप्त होते हैं। हर कार्य को एक स्पष्ट लक्ष्य, सुदृढ़ योजना और टीम वर्क के साथ किया जाए तो सफलता सुनिश्चित होती है।
इस अवसर पर नव नियुक्त अधिकारियों ने प्रशिक्षण अवधि के दौरान प्राप्त अपने अनुभवों को साझा किया। अधिकारियों ने बताया कि विगत 45 दिनों से संचालित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम ने उन्हें प्रशासनिक कार्य प्रणाली को समझने, विभिन्न क्षेत्रों का अवलोकन करने तथा जमीनी स्तर पर कार्य करने के व्यावहारिक पहलुओं को जानने का अवसर प्रदान किया। प्रशिक्षण के दौरान उन्हें विभिन्न स्थानों का भ्रमण करने का अवसर मिला, जिससे उन्होंने आने वाली चुनौतियों को समझते हुए अपने कार्य की रूपरेखा पर भी चर्चा की।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर मंत्री श्री पटेल द्वारा सभी नवनियुक्त अधिकारियों को सम्मानित भी किया गया तथा उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी गईं।
कार्यक्रम में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव दीपाली रस्तोगी एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।
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शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को जान से मारने की धमकी
डेस्क। गोरक्षा अभियान और माघ मेला विवाद के बाद से शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद लगातार सुर्खियों में है। इसी बीच शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को उनके सहयोगी के फोन पर जान से मारने की धमकी मिली है। शंकराचार्य को फोन कॉल के माध्यम से ये धमकी दी गई है। दरअसल, गौ रक्षा अभियान और शंकराचार्य के अलग अलग बयान को लेकर धमकी देने वाला शख्स नाराज था। फोन पर धमकी देने वाले युवक ने कहा कि तुम्हारा हाल अतीक अहमद जैसा कर देंगे।
धमकी के बाद शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद की तरफ से विधिक कार्रवाई की बात की जा रही है। वहीं धमकी भरे कॉल के बाद शंकराचार्य के समर्थकों और संत समाज में गुस्सा है। शंकराचार्य के समर्थकों का कहना है कि शंकराचार्य के निजी सहयोगी को फोन कॉल और मैसेज के माध्यम से धमकी दी गई है और जिसमें उनके लिए आपत्तिजनक शब्द कहते हुए जान से मारने की बात कही गई है. इसका ऑडियो कॉल रिकॉर्ड भी सामने आया है।
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद माघ मेला विवाद के बाद लगातार सुर्खियों में रहे , उन्होंने शासन-प्रशासन के खिलाफ जमकर नाराजगी जताई। वहीं उसके बाद आशुतोष ब्रह्मचारी द्वारा लगाए गए आरोप को लेकर भी उन्होंने सत्ता और आशुतोष ब्रह्मचारी पर तीखा हमला बोला। इसी बीच उन्होंने उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जनपद में गौ रक्षा के संकल्प के साथ एक यात्रा भी निकाली थी। फिलहाल देखना होगा कि आगे इस मामले में शंकराचार्य की तरफ से क्या कार्रवाई की जाती है।
कृषि, परंपरा और नवाचार के समन्वय से मध्यप्रदेश बना कृषि विकास का अग्रणी : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश हर क्षेत्र में प्रगति कर रहा है। मध्यप्रदेश में कृषि और कृषि से जुड़े व्यवसायों को सह अस्तित्व की दृष्टि से बड़े सम्मान के साथ देखा गया है। समृद्ध किसान-समृद्ध मध्यप्रदेश की थीम के साथ पूरे वर्ष प्रदेश में कृषि उत्सव मनाया जा रहा है। कृषि के माध्यम से हमें प्रकृति के साथ जीने का अवसर मिलता है। देश में कृषि की परंपरा लाखों साल पुरानी है। भीम बैठिका में पुरातन काल से कृषि की परंपरा के शैलचित्र देखने को मिलते हैं।
हमारे ऋषि-मुनियों ने हजारों सालों से कृषि के साथ जीने का मार्ग दिखाया है। भारतीय संस्कृति में खेती के प्रति आदर का भाव है। देश की धरती अन्न के रूप में सोना उगल रही है। देश में कभी अनाज का संकट आया था, लेकिन आज हमारे कृषि वैज्ञानिक नई-नई किस्में विकसित कर अनाज उत्पादन को बढ़ा रहे हैं। राज्य सरकार खेती को लाभकारी बनाने के लिए संकल्पित भाव के साथ आगे बढ़ रही है। पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी की भावना के अनुरूप जय किसान, जय जवान में जय विज्ञान जोड़ा गया था, वर्तमान दौर में हम, इसमें जय अनुसंधान भी जोड़ रहे हैं।
प्रदेश में किसानों को हम केवल बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि किसानों को आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक खेती और बेहतर मार्केट लिकेंजेस से भी सशक्त बना रहे हैं। कृषि मंथन कार्यशाला किसानों के अनुभव, विज्ञान के नवाचार, सरकार की नीतियों और बाजार की संभावनाओं को एक सूत्र में पिरोने का सशक्त प्रयास है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय जबलपुर में कृषि मंथन कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्ज्वलित कर तथा गौमाता का पूजन कर कार्यशाला का विधिवत शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अवसर पर उन्नत बीज प्रसंस्करण, औषधीय पौध प्रजाति, खाद्य प्रसंस्करण एवं उन्नत कृषि फसलों की प्रदर्शनी का अवलोकन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का जनजातीय समुदाय के कलाकारों ने पारंपरिक नृत्य एवं वाद्य यंत्रों से स्वागत किया।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम में 23 करोड़ 21 लाख की लागत के विभिन्न कार्यों का लोकार्पण कर विकास की सौगाते दी। इनमें प्रमुख रूप से 13 करोड़ रूपये की लागत से बने जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय के नवीन प्रशासनिक भवन, 1.11 करोड़ रूपये लागत के बोहानी गन्ना अनुसंधान केन्द्र के प्रशासनिक भवन, 1 करोड़ रूपये लागत के बालाघाट जिले के कृषि महाविद्यालय वारासिवनी के कौशल विकास केन्द्र के साथ ही जबलपुर में 1.26 करोड़ रूपये से बने स्वचालित तरल जैव उर्वरक उत्पादन केन्द्र का लोकार्पण किया। साथ ही किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग की 4 करोड़ 92 लाख रूपये से निर्मित 4 इकाइयों का भी लोकार्पण किया गया, इसमें रीवा एवं शहडोल के ज्ञान प्रसार केन्द्र शामिल है।
मध्य प्रदेश: गेहूं की खरीद के लिए 19 लाख से अधिक किसानों ने कराया पंजीकरण
कच्चे तेल के दाम में भारी गिरावट, राहत की खबर
काशी की आत्मा में डूबा काव्य—अस्सी घाट पर शब्दों ने रचा आध्यात्मिक संसार
रायसेन में तीन दिवसीय कृषि महाकुंभ में किसानों के लिए बहु आयामी आय के नए अवसर
नईदिल्ली। मध्य प्रदेश के रायसेन में तीन दिन “कृषि का महाकुंभ” चलेगा, जहाँ फसल के साथ साथ डेयरी, पोल्ट्री, मत्स्य पालन, बकरीपालन, एफपीओ मार्केटिंग और ग्रामीण महिलाओं की आजीविका के अवसरों पर विशेष ध्यान होगा ताकि किसानों की आय के अनेक मजबूत स्तंभ तैयार हो सकें। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण व ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि राष्ट्रीय स्तर के इस आयोजन में बीज से बाजार और मछली से मोती तक, पूरी ग्रामीण अर्थव्यवस्था की वैल्यू चेन को एक ही मंच पर जोड़ा जाएगा।
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि रायसेन में 11 से 13 अप्रैल तक होने वाले इस महोत्सव में उत्पादन, पशुपालन, प्रसंस्करण, मार्केटिंग और उद्यमिता की पूरी वैल्यू चेन को एक साथ रखा जाएगा ताकि किसान खेत से लेकर बाज़ार और निर्यात तक की पूरी यात्रा को एक ही जगह समझ सकें। रायसेन का दशहरा मैदान तीन दिनों के लिए लाइव डेमो, तकनीकी सत्र, प्रशिक्षण श्रृंखला और बिज़नेस मीटिंग्स का केंद्र बनेगा, जहाँ वैज्ञानिक, स्टार्ट अप, एफपीओ, स्वयं सहायता समूह और ग्रामीण उद्यमी आमने सामने संवाद करेंगे।
इस उन्नत कृषि महोत्सव में पशुपालन एवं डेयरी विभाग तथा राज्य सरकार की ओर से आयोजित पशुधन प्रदर्शन में गिर, साहीवाल, थारपारकर, मालवी जैसी उन्नत गाय नस्लें तथा जमुनापारी, बारबरी, सिरोही, बीटल, सोजत जैसी दुग्ध और मांस दोनों के लिए उपयुक्त बकरी नस्लें प्रदर्शित की जाएँगी, वहीं कड़कनाथ जैसी विशिष्ट पोल्ट्री नस्ल किसानों को उच्च मूल्य वाली मार्केट से जोड़ने का रास्ता दिखाएगी। मोबाइल पशु चिकित्सा इकाई के माध्यम से पशु स्वास्थ्य शिविर, टीकाकरण, पोषण प्रबंधन, प्रजनन एवं नस्ल सुधार पर विशिष्ट जानकारी दी जाएगी, जिससे छोटे एवं सीमांत पशुपालकों को कम लागत में अधिक उत्पादकता के व्यावहारिक उपाय सीखने का मौका मिलेगा। डेयरी कोऑपरेटिव, चारा प्रबंधन, गोबर आधारित ऊर्जा और ऑर्गेनिक इनपुट जैसे विषयों पर भी मार्गदर्शन दिया जाएगा, ताकि पशुधन को खेती के साथ जोड़कर चक्रीय और टिकाऊ कृषि मॉडल तैयार हो सकें।
मत्स्य विभाग और राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड (NFDB) द्वारा बायोफ्लॉक, पुनरावर्ती एक्वाकल्चर प्रणाली (Recirculatory Aquaculture System – RAS), एक्वापोनिक्स, सजावटी मछली पालन (Ornamental Fish Culture) और मोतीपालन (Pearl Culture) के लाइव मॉडल दिखाए जाएँगे ताकि किसान और युवाएँ कम पानी व कम स्थान में भी उच्च आय वाले आधुनिक मत्स्य मॉडलों को नज़दीक से समझ सकें। प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना, राष्ट्रीय मत्स्य विकास कार्यक्रम (NFDP), फिशरीज इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड (FIDF) और अन्य योजनाओं की जानकारी भी दी जाएगी, जिससे किसान खेत के साथ तालाब, रिसाइक्लिंग टैंक या एक्वापोनिक्स यूनिट के रूप में जल आधारित उद्यम भी शुरू कर सकें और साल भर आय के नए स्रोत बन सके।
मार्केटिंग डिवीजन के तहत 50 से अधिक किसान उत्पादक संगठन (FPOs) भाग लेंगे, जो GI टैग चिन्नौर चावल, शरबती गेहूँ, मिलेट आधारित उत्पाद (कोदो, कुटकी), विभिन्न दालें, बेसन, सोया उत्पाद, हल्दी लहसुन मोरिंगा पाउडर, सरसों अलसी तेल, शहद, अचार, गुड़, गुड़ पाउडर, गुड़ कैंडी, मूंगफली चिक्की और तिल लड्डू जैसे मूल्यवर्धित उत्पादों की प्रदर्शनी और बिक्री करेंगे, जिससे स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान और बेहतर दाम मिल सके। 12 अप्रैल को होने वाले एफपीओ सम्मेलन में संगठन प्रबंधन, ब्रांडिंग, पैकेजिंग, कोल्ड चेन, लॉजिस्टिक्स और ई ट्रेड प्लेटफॉर्म्स पर विस्तृत चर्चा होगी, ताकि छोटे किसान उत्पादक संगठन ई कॉमर्स और आधुनिक रिटेल चैनल के माध्यम से ‘लोकल टू नेशनल’ की यात्रा तेज़ी से पूरी कर सकें।
तमिलनाडु के CM एमके स्टालिन ने मदुरै मेट्रो पिच को लेकर देवेंद्र फडणवीस की आलोचना की
फडणवीस ने कानून-व्यवस्था के मुद्दों पर भी कमेंट किया, तमिलनाडु में बच्चों के यौन शोषण और ड्रग्स के बढ़ने का आरोप लगाया, और DMK पर अपराधियों के साथ मिलीभगत का आरोप लगाया, यह दावा करते हुए, "लोग देखते हैं कि DMK और इन सभी अपराधियों के बीच मिलीभगत है। और इसीलिए मुझे लगता है कि लोग जवाब देंगे, और लोग NDA को वोट देंगे।" यह कमेंट तमिलनाडु विधानसभा चुनावों से पहले आया है, जो 23 अप्रैल को एक ही फेज़ में होंगे, और वोटों की गिनती 4 मई को होगी।
ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क निर्माण में आधुनिक तकनीक का होगा अधिक से अधिक उपयोग
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क निर्माण कार्यों में आधुनिक तकनीक का अधिक से अधिक उपयोग किया जाए। कार्यों की गुणवत्ता पर नजर रखने के लिए ड्रोन का उपयोग हो। सिपरी साफ्टवेयर न सिर्फ डीपीआर तैयार करने की दृष्टि से उपयोगी है बल्कि सड़क के साथ पुल-पुलियों की आवश्यकता दर्शाने में भी इसका उपयोग हो रहा है। सड़क निर्माण कार्यों को पूर्ण करने में वैज्ञानिक पद्धति का उपयोग शुरू करना सराहनीय है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को समत्व भवन में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की सुगम संपर्कता परियोजना संबंधी बैठक को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निर्देश दिए कि गत माह शुरू किए गए राज्य स्तरीय जल गंगा संवर्धन अभियान की विभागीय स्तर पर प्रति सप्ताह समीक्षा की जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने "एक बगिया मां के नाम" अंतर्गत की गई गतिविधियों की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने जल गंगा संवर्धन अभियान में आमजन की भागीदारी बढ़ाने के निर्देश दिए। बैठक में जानकारी दी गई कि परियोजना में प्रदेश में एक हजार करोड़ रुपये की लागत से सड़कों का निर्माण कराया जाएगा तथा 100 से अधिक आबादी वाले मजरों-टोलों को सड़क सुविधा से जोड़ा जाएगा।
बैठक में मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव (मुख्यमंत्री कार्यालय) श्री नीरज मंडलोई, अपर मुख्य सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग श्रीमती दीपाली रस्तोगी और अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने परियोजना की समीक्षा करते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए गुणवत्तापूर्ण कार्य करने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि परियोजना में सड़कों का निर्माण मनरेगा अर्थात वीबी-जी-राम-जी योजना में से करवाया जाएगा। इसके लिए प्रदेश की प्रत्येक जनपद पंचायत तीन करोड़ तक की स्वीकृति प्रदान कर सकेगी। "सुगम संपर्कता परियोजना" के माध्यम से गांवों, ग्राम पंचायतों को दोहरी संपर्कता प्रदान की जाएगी।
सुगम संपर्कता परियोजना की विशेषता यह है कि इसमें पूर्व में बनी सड़कों की रिम्स पोर्टल के माध्यम से जियो-इंवेंट्री की जा रही है। इससे नई सड़कों के चयन में दोहराव की स्थिति नहीं बनेगी। जियो इंवेंट्री में राष्ट्रीय राजमार्ग, राज्य राजमार्ग, पीएमजीएसवाय, मुख्य जिला सड़क और संपर्कता ऐप से चयनित सड़कें शामिल हैं।
वाराणसी में गैस सिलेंडर की कालाबाजारी का खुलासा
आगरा एक्सप्रेसवे पर टोल प्लाज़ा की गुंडागर्दी
ईरान युद्ध में भारत की ताकत: होर्मुज से निकले आठ भारतीय जहाज, चीन के टैंकर अब भी फंसे
इंजीनियर युवती को IIT बाबा अभय सिंह ने बनाया जीवनसाथी, रचाई शादी
यूपी। महाकुंभ के दौरान अचानक चर्चा में आए और सोशल मीडिया पर वायरल हुए आईआईटी बाबा अभय सिंह ने शादी रचा ली है। उनकी पत्नी का नाम प्रतीका है। प्रतीका कर्नाटक की रहने वाली हैं। वह पेशे से इंजीनियर हैं। आईआईटी बाबा की शादी का खुलासा तब हुआ जब वह अचानक हरियाणा के झज्जर में अपने पिता के चैंबर में पहुंचे। अभय सिंह के पिता पेशे से वकील हैं। आईआईटी बाबा की शादी की खबर के साथ पत्नी के साथ उनकी तस्वीरें भी सामने आई हैं। इसी के साथ पति-पत्नी ने अपना आगे का प्लान भी बताया है। अब दोनों मिलकर सनातन और अध्यात्म को आगे बढ़ाना चाहते हैं। इस क्रम में दोनों की योजना भविष्य में एक सनातन यूनिवर्सिटी भी खोलने की है। इस यूनिवर्सिटी में गुरु, साधक और अध्यात्म से जुड़े लोग एक मंच पर आ सकेंगे।
शादी के बाद पहली बार पति-पत्नी मीडिया के सामने आए तो उन्होंने एक-दूसरे के बारे में काफी बातें बताईं। प्रतीका ने अभय सिंह को सरल स्वभाव का बेहद ईमानदार शख्स और सच्चा इंसान बताया। उन्होंने कहा कि मैं कर्नाटक से हूं और इनसे (अभय से) करीब एक साल पहले मिली थी। प्रतीका ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। उन्होंने कहा कि शादी के बाद हम पति-पत्नी सनातन को आगे बढ़ाने का काम करेंगे। हमारी योजना एक सनातन यूनिवर्सिटी बनाने की है। इसमें गुरु, साधक और अध्यात्म से जुड़े लोगों को एक मंच पर लाने की कोशिश होगी। अभय सिंह ने भी बताया कि वह इस यूनिवर्सिटी के प्लान पर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सनातन यूनिवर्सिटी में सांसारिक ज्ञान के साथ-साथ आध्यात्मिक साधना और विभिन्न प्रकार की साधनाओं को जोड़ा जाएगा। सिखाने वाले और साधना वाले, फोकस दोनों तरह के ज्ञान पर होगा।
आईआईटी बाबा और प्रतीका ने 15 फरवरी को महाशिवरात्रि के दिन हिमाचल के अघंजर महादेव मंदिर में शादी की। इसके बाद 19 फरवरी को उन्होंने कोर्ट मैरिज भी की। दुनिया के सामने इस शादी का खुलासा सोमवार को तब हुआ जब अभय सिंह, प्रतीका के साथ झज्जर में अपने पिता के चैंबर में पहुंचे। दोनों ने बताया कि शादी के बाद फिलहाल वे हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में रह रहे हैं। अभय सिंह अपनी पत्नी के साथ पिता के चैंबर में पहुंचे तो वह भगवा वस्त्रों में थे। उन्होंने यहां पुरानी यादों को साझा किया। उन्होंने बताया कि अध्यात्मिकता की ओर रूझान से पहले वह अक्सर अपने पिता के चैंबर में बैठकर कानूनी आवेदनों और केस स्टडी वगैरह देखा करते थे। उन्होंने कहा कि जिंदगी के अर्थ की तलाश ने उन्हें विज्ञान और तकनीकी के क्षेत्र से अध्यात्म की ओर मोड़ दिया। बता दें की अभय सिंह ने आईआईटी बॉम्बे से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी। इसके बाद उन्होंने कनाडा में एक एयरोस्पेस कंपनी में नौकरी भी की थी। वहां वह करीब तीन लाख रुपए मासिक वेतन पर कार्यरत थे लेकिन बाद में उन्होंने नौकरी छोड़ दी। अभय सिंह प्रयागराज महाकुंभ आईआईटी बाबा के रूप में चर्चित हुए तो दुनिया को उनकी कहानी के बारे में पता चला। तभी से किसी न किसी बहाने उन्हें लेकर सुर्खियां बनती रहती हैं।