देश-विदेश
टीडीबी-डीएसटी ने एडवांस्ड ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए एसचार्ज प्राइवेट लिमिटेड से किया करार
नईदिल्ली। भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (टीडीबी) ने "इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग नवोन्मेषण सशक्तिकरण" नामक परियोजना के लिए मेसर्स एसचार्ज प्राइवेट लिमिटेड के साथ एक समझौता किया है। यह परियोजना औद्योगिक स्थिरता के लिए भारत-ब्रिटेन सहयोगात्मक अनुसंधान एवं विकास कार्यक्रम के तहत समर्थित है और ब्रिटेन स्थित अल्ब्राइट प्रोडक्ट डिजाइन लिमिटेड के साथ साझेदारी में इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) चार्जिंग अवसंरचना के लिए उन्नत और कुशल समाधान विकसित करने के उद्देश्य से चलाई जा रही है।
इस समर्थित परियोजना का मुख्य उद्देश्य वाणिज्यिक बेड़े और डिपो संचालन के लिए तैयार किए गए अगली पीढ़ी के इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग समाधान का विकास करना है। यह प्रौद्योगिकी एसचार्ज प्राइवेट लिमिटेड द्वारा विकसित एक नवोन्मेषी इलेक्ट्रिक वाहन चार्जर चार्ज कंट्रोलर को ब्रिटेन के भागीदार के पेटेंट प्राप्त स्वचालित केबल प्रबंधन प्रणाली के साथ एकीकृत करती है। इस एकीकृत दृष्टिकोण को उच्च मांग वाले इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग वातावरण में परिचालन दक्षता, सुरक्षा और उपयोगिता में सुधार करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
यह समाधान विशेष रूप से फ्लीट-आधारित अनुप्रयोगों के लिए डिज़ाइन की गई एक मोटरयुक्त ओवरहेड केबल प्रबंधन प्रणाली प्रस्तुत करता है, जो मैन्युअल हैंडलिंग को कम करके, केबलों की क्षति को न्यूनतम करके और उपयोगकर्ता की सुविधा को बढ़ाकर चार्जिंग संचालन को सुव्यवस्थित करता है। यह प्रणाली विद्यमान एसी टाइप-2 ईवी चार्जर के अनुकूल है और डिपो में सुरक्षित तथा व्यवस्थित अवसंरचना सुनिश्चित करते हुए चार्जिंग टर्नअराउंड समय को बेहतर बनाने का लक्ष्य रखती है।
केबल प्रबंधन, उपकरण सुरक्षा और कार्यप्रवाह अनुकूलन जैसी प्रमुख परिचालन चुनौतियों का समाधान करने के जरिए इस प्रौद्योगिकी द्वारा इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग डिपो की दक्षता में उल्लेखनीय वृद्धि किए जाने की उम्मीद है। साथ ही, केबल क्षति, तोड़फोड़ और परिचालन संबंधी खतरों को कम करके यह सुरक्षा मानकों को बेहतर बनाने में भी योगदान देती है।
एसचार्ज प्राइवेट लिमिटेड एक उभरती हुई भारतीय इलेक्ट्रिक वाहन प्रौद्योगिकी कंपनी है, जो उन्नत पावर इलेक्ट्रॉनिक्स और स्मार्ट चार्जिंग सिस्टम विकसित करने पर केंद्रित है। इस परियोजना के माध्यम से, कंपनी का लक्ष्य इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग प्रौद्योगिकियों में स्वदेशी क्षमताओं को सुदृढ़ करना और बढ़ते इलेक्ट्रिक मोबिलिटी सेक्टर के लिए परिमाणयोग्य और टिकाऊ बुनियादी ढांचा तैयार करना है।
नीतीश कुमार 10 अप्रैल को राज्यसभा शपथ लेंगे, कैबिनेट विस्तार पर होगी चर्चा
2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (NDA) ने राज्य में बड़ी जीत हासिल की थी। इस चुनाव में जनता दल (यूनाइटेड) और बीजेपी ने मिलकर सत्ता में वापसी की। नीतीश कुमार ने इस जीत के बाद 10वीं बार बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी। उनके कार्यकाल के दौरान उन्होंने राज्य में कई विकास कार्यों और सामाजिक योजनाओं की शुरुआत की थी। राज्य में अब सत्ता परिवर्तन की प्रक्रिया के दौरान राजनीतिक हलचल तेज़ है। बीजेपी और JD(U) के बीच अगले मुख्यमंत्री के चयन को लेकर बातचीत जारी है। शपथ ग्रहण और कैबिनेट विस्तार दोनों ही प्रक्रिया बिहार की राजनीति में नए अध्याय की शुरुआत के तौर पर देखी जा रही है।
ई-स्कूटर अनुदान योजना से दमोह की सायरा बी बनीं आत्मनिर्भर
भोपाल : श्रम विभाग द्वारा संचालित ई-स्कूटर अनुदान योजना 2024 श्रमिकों के जीवन में परिवर्तन का एक प्रभावी माध्यम बनकर उभर रही है। दमोह में गत दिनों महिला सशक्तिकरण सम्मेलन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने श्रमिक महिला सायरा बी को ई-स्कूटर की चाबी प्रदान की। अब उनका जीवन रोज के कामकाज के लिये किसी सहारे का मोहताज नहीं रहा।
भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार कल्याण मंडल, भोपाल द्वारा संचालित इस योजना में सायरा बी को 40 हजार रूपये की आर्थिक सहायता प्रदान की गई। इस सहयोग से अब उनके लिए आवागमन आसान हो गया है, जिससे उनके जीवन स्तर में भी सकारात्मक सुधार आया है।
ई-स्कूटर अनुदान योजना विशेष रूप से श्रमिक परिवारों, खासकर महिलाओं के लिए एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो रही है। इससे न केवल उनकी दैनिक जीवन की कठिनाइयाँ कम हो रही हैं, बल्कि वे आत्मनिर्भर बनकर समाज में अपनी मजबूत पहचान भी स्थापित कर रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की योजनाएं महिला सशक्तिकरण को नई दिशा देती हैं और ग्रामीण व अर्ध-शहरी क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को गति प्रदान करती हैं।
'ई-स्कूटर अनुदान योजना-2024' श्रमिकों के जीवन में सुविधा, आत्मनिर्भरता और सम्मान का नया अध्याय जोड़ रही है। यह पहल ‘श्रमिक सशक्त, समृद्ध देश, विकसित मध्यप्रदेश’ की परिकल्पना को साकार करने की दिशा में एक सशक्त कदम है।
एनएसजी भारत का अभेद्य कवच, इनसे हैं हम हर हाल में सुरक्षित : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि यद्यपि हमारी संस्कृति हमें सबके सुख की कामना करना सिखाती है, पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सशक्त नेतृत्व में दुनिया यह भी जान गई है कि यदि कोई हमें छेड़ेगा, तो हम उसे नहीं छोड़ेंगे। जो जिस भाषा में समझें, उसे उसी भाषा में समझाना जरूरी है।अतिवादी ताकतें देश के विकास में बड़ी बाधक हैं। हमें ऐसी ताकतों से पूरी मजबूती से निपटना होगा। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (नेशनल सिक्युरिटी गार्ड) भारत का अभेद्य सुरक्षा कवच है। एनएसजी के कारण ही हमारी आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था बेहद सुदृढ़ है। देश में बीते काल में हुई किसी भी प्रकार की अतिवादी, अप्रिय घटनाओं एवं असामान्य परिस्थितियों में एनएसजी गार्ड की पूरी मुस्तैदी से मौजूदगी ने हमें यह एहसास कराया है कि एनएसजी है तो हम हर हाल में सुरक्षित हैं। एनएसजी देश की सीमा के भीतर नागरिक सुरक्षा की पक्की गारंटी की तरह है। उन्होंने कहा कि एनएसजी के जवान अपनी जान की परवाह किए बिना राष्ट्र की रक्षा में तत्पर रहते हैं। यह बल अपनी पेशेवर क्षमता, अनुशासन और तकनीकी दक्षता के लिए पूरे विश्व में प्रसिद्ध है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सोमवार को लाल परेड मैदान में आयोजित एनएसजी-शो में सहभागिता कर एनएसजी द्वारा मध्यप्रदेश पुलिस के जवानों के लिए आयोजित समग्र क्षमता निर्माण प्रशिक्षण एवं प्रदर्शन के साझा कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लाल परेड मैदान में आयोजित एनएसजी शो देखा और कमांडो के प्रदर्शन की सराहना की। शो के दौरान एनएसजी जवानों ने मॉक टेररिस्ट अटैक का रीयलस्टिक सीन क्रिएट कर इस तरह के अटैक्स को काउंटर कर पूरी क्षमता से निपटने के लिए एनएसजी द्वारा अपनाई जाने वाली पूरी प्रकिया एवं कार्यवाही का सजीव प्रदर्शन किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह शो पुरुषार्थ और साहस से पराक्रम की पराकाष्ठा के प्रदर्शन का परिचायक है। इस प्रशिक्षण प्रदर्शन में जवानों ने हवा में उड़ते हुए जो करतब दिखाए हैं, वे सच में अद्भुत है। एनएसजी जवान हमारी सुरक्षा व्यवस्था की धुरी हैं। जल, थल, नभ हर तरह से देश पर किसी भी तरह की चुनौतियां और कठिनाइयां आ सकती हैं, इनसे निपटने की तैयारियों के लिए यह प्रशिक्षण और पूर्वाभ्यास बेहद महत्वपूर्ण है। प्रशिक्षण कार्यक्रम सह एनएसजी शो के शुभारंभ अवसर पर पुलिस बैंड द्वारा मुख्यमंत्री डॉ. यादव का अभिनंदन किया गया।
सिविल लाइन में फर्जी पुलिस बनकर ठगी, बुजुर्ग महिला से चेन लेकर फरार
आरोपियों ने महिला पर दबाव बनाते हुए कहा कि यदि उन्होंने चेन नहीं उतारी तो कार्रवाई की जा सकती है। पहले महिला ने विरोध किया, लेकिन ठगों ने डर और भ्रम का माहौल बनाकर उन्हें अपनी बातों में उलझा लिया। इसी दौरान उन्होंने महिला से सोने की चेन उतरवा ली और मौके से फरार हो गए। घटना के बाद महिला को ठगी का अहसास हुआ, जिसके बाद उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है। आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है, ताकि आरोपियों की पहचान की जा सके। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे इस तरह के झांसे में न आएं और किसी भी संदिग्ध व्यक्ति की सूचना तुरंत पुलिस को दें। इस घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल है और लोग सतर्कता बरत रहे हैं।
सेल के स्वदेशी स्पेशल स्टील से आईए`नएस तारागिरी को मिली मज़बूती
नईदिल्ली। इस्पात मंत्रालय के अधीन सार्वजनिक क्षेत्र की सबसे बड़ी स्टील उत्पादक महारत्न कंपनी स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) ने नीलगिरी-श्रेणी (प्रोजेक्ट 17A) के चौथे स्टील्थ फ्रिगेट, आईएनएस तारागिरी (INS Taragiri) को भारतीय नौसेना में शामिल किए जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस युद्धपोत को 03 अप्रैल, 2026 को नौसेना में शामिल किया गया।
इस युद्धपोत का निर्माण मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड द्वारा किया गया है, जिसमें सेल द्वारा आपूर्ति किए गए लगभग 4,000 टन विशेष ग्रेड के स्टील प्लेटों की पूरी ज़रूरत का उपयोग किया गया है। इस विशेष इस्पात का उत्पादन सेल के बोकारो, भिलाई और राउरकेला स्थित एकीकृत इस्पात संयंत्रों में किया गया है, जो कंपनी की उन्नत धातुकर्म क्षमताओं और निरंतर गुणवत्ता मानकों को प्रदर्शित करता है।
सेल भारत के रक्षा स्वदेशीकरण प्रयासों में प्रमुख रूप से अपनी भूमिका निभा रहा है और सरकार के 'आत्मनिर्भर भारत' और 'मेक इन इंडिया' मिशन को लगातार मजबूती प्रदान कर रहा है। कंपनी ने इससे पहले भी कई महत्वपूर्ण नौसैनिक प्लेटफार्मों के लिए स्पेशल स्टील की आपूर्ति की है, जिसमें स्वदेशी विमान वाहक आईएनएस विक्रांत और प्रोजेक्ट 17A श्रेणी के पहले तीन जहाज—आईएनएस नीलगिरी, आईएनएस हिमगिरि और आईएनएस उदयगिरि शामिल हैं।
आईएनएस तारागिरी का नौसेना में शामिल होना रक्षा विनिर्माण के क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता का एक बड़ा प्रमाण है और यह दिखाता है कि देश की समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने में घरेलू इस्पात उद्योग का कितना बड़ा योगदान है।
वाराणसी से उठी उम्मीद की नई लौ: बर्न इंस्टिट्यूट बनेगा जीवन बचाने का सबसे बड़ा केंद्र
भारतीय नौसेना का जहाज 'त्रिकंड' तंजानिया के दार-एस-सलाम पहुंचा
नईदिल्ली। भारतीय नौसेना का एक प्रमुख गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट आईएनएस त्रिकंड, 03 अप्रैल 2026 को तंजानिया के दार-एस-सलाम पहुंचा। यह यात्रा दक्षिण-पश्चिम हिंद महासागर क्षेत्र में उसकी तैनाती का एक हिस्सा है। इस यात्रा का उद्देश्य भारत और तंजानिया के बीच समुद्री सहयोग को मजबूत करना और द्विपक्षीय संबंधों को बढ़ावा देना है।
बंदरगाह पर रुकने के दौरान होने वाली गतिविधियों में आपसी तालमेल और समुद्री सहयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से पेशेवर संवाद- तंजानियाई नौसेना के साथ संयुक्त प्रशिक्षण अभ्यास - शामिल है। इसके अलावा, कई तरह के सामाजिक और सामुदायिक कार्यक्रम भी नियोजित हैं, जिनमें मैत्रीपूर्ण खेल प्रतिस्पर्धा और योग शामिल हैं। जहाज पर एक सांस्कृतिक संध्या का भी आयोजन किया जाएगा, जिससे सद्भावना और लोगों के बीच आपसी जुड़ाव को बढ़ावा मिलेगा। भारत से लाए गए जरूरी सामान इस दौरे के दौरान सौंपे जाएंगे।
जहाज के कमांडिंग ऑफिसर कैप्टन सचिन कुलकर्णी, तंजानिया पीपल्स डिफेंस फोर्सेज और यूनाइटेड रिपब्लिक ऑफ तंजानिया की सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात करेंगे। आईएनएस त्रिकंड का यह पोर्ट कॉल भारत के ‘महासागर’ विजन के अनुरूप है - जिसका अर्थ है “विभिन्न क्षेत्रों में सुरक्षा और विकास के लिए आपसी और समग्र प्रगति)।”
सबका साथ–सबका विकास से ही संभव सिकलसेल का उन्मूलन : राज्यपाल पटेल
भोपाल। सिकल सेल एनीमिया के उन्मूलन प्रयासों को जन-आंदोलन बनाना होगा। “सबका साथ, सबका विकास” के मूल मंत्र को अपनाकर ही इस अनुवांशिक बीमारी से समाज को मुक्त किया जा सकता है। उक्ताशय के विचार मध्य प्रदेश के राज्यपाल मंगूभाई पटेल ने रविवार को बदनावर के सिविल अस्पताल के नवीन भवन के आभासी माध्यम से लोकार्पण के बाद मेगा स्वास्थ्य शिविर को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।
राज्यपाल ने कहा है कि सिकल सेल उपचार के विषय मे भ्रामक जानकारियों से भ्रमित नहीं हो। सिकल सेल उपचार के प्रति किसी भी प्रकार की भ्रांति नही पालें। केवल पंजीकृत चिकित्सकों के परामर्श के अनुसार ही दवाइयों का नियमित सेवन करें। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस बीमारी को निरंतर उपचार और सही जानकारी के माध्यम से ही नियंत्रित किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में अब तक 1 करोड़ 31 लाख से अधिक जांचें की जा चुकी हैं। जनजातीय क्षेत्रों में विशेष रूप से जागरूकता बढ़ाने के लिए “सिकल सेल मित्र” तैयार किए जा रहे हैं, जो इस मिशन में सेतु का कार्य करेंगे। स्वास्थ्य सेवाओं को आधुनिक बनाते हुए मरीजों के लिए डिजिटल कार्ड की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है, जिससे उपचार अधिक सुगम और प्रभावी होगा।
राज्यपाल ने बदनावर प्रवास के दौरान 'संकल्प से समाधान अभियान' के समापन कार्यक्रम मे शासन कि विभिन्न योजनाओं के हितग्राहियों को हितलाभ प्रदान किए। स्थल पर शासकीय विभागों द्वारा आयोजित प्रदर्शनी का अवलोकन किया। राज्यपाल के समक्ष जिले की स्वास्थ्य सेवाओं को सुदूर अंचलों तक पहुँचाने के उद्देश्य से जिला रेडक्रॉस सोसायटी धार एवं अरविंदो आयुर्विज्ञान संस्थान, इन्दौर के मध्य अनुबंध (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। अनुबंध के तहत जिले के प्रत्येक विकासखंड में प्रति तीन माह में विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा वृहद स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन किया जाएगा। “संकल्प से समाधान अभियान” के तहत 80 शिविरों के माध्यम से विभिन्न योजनाओं के हितग्राहियों को लाभ वितरित किए गए है।
राज्यपाल को वर्ष 2025-26 में रेडक्रॉस की गतिविधियों से परिचित कराया गया। बताया गया कि जनजातीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य शिविर, सिकल सेल जागरूकता रैली, रक्तदान शिविर, महिला सशक्तिकरण कार्यक्रम, पोषण कार्यशालाएं एवं CPR प्रशिक्षण जैसे नवाचार किए गए है। साथ ही स्वच्छता अभियान एवं सामाजिक सहभागिता के माध्यम से जन-जागरूकता को भी बढ़ावा दिया गया है। वृहद स्वास्थ्य शिविर में विभिन्न संस्थानों के विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा 688 मरीजों का निःशुल्क उपचार किया गया, जिसमें 384 महिलाएं एवं 304 पुरुष शामिल हुए।
खुद को बताया कस्टम अफसर, फिर दिखाई असली करतूत, व्यापारियों को बनाया निशाना
ज्योति मौर्य का हुआ प्रमोशन, नई पोस्टिंग भी, पति संग विवाद खत्म
आजमगढ़ में गेहूं की फसल में भीषण आग, कई किसानों की मेहनत जलकर खाक।
पत्थरों में दर्ज 160 करोड़ साल की कहानी, सलखन जीवाश्म पार्क बनने जा रहा दुनिया का नया आकर्षण
ओडिशा के बाद देहरादून के बागेश्वर जिले में भूकंप के झटके
डेस्क। शनिवार रात को ओडिशा में महसूस किए गए भूकंप के झटके के बाद रविवार सुबह देहरादून के बागेश्वर जिले में हल्के भूकंप के झटके महसूस किए गए। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के अनुसार यह भूकंप सुबह 11 बजकर 47 मिनट पर आया, जिसकी तीव्रता रिक्टर स्केल पर 3.7 दर्ज की गई। भूकंप का केंद्र कपकोट तहसील के कर्मी गांव के पास जमीन के लगभग 10 किलोमीटर भीतर स्थित था।
झटके बेहद मामूली होने के कारण आम जनजीवन पर इसका कोई खास प्रभाव नहीं पड़ा। अधिकांश लोगों को तो इसका एहसास भी नहीं हुआ और कहीं भी घबराहट या अफरा-तफरी जैसी स्थिति देखने को नहीं मिली। जिला मुख्यालय के साथ-साथ गरुड़, कपकोट और कांडा क्षेत्रों में भी हालात पूरी तरह सामान्य रहे।
घटना की जानकारी मिलते ही आपदा प्रबंधन विभाग सतर्क हो गया और संबंधित अधिकारियों ने संवेदनशील क्षेत्रों से संपर्क कर स्थिति का जायजा लिया। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी ने बताया कि पूरे जिले में कहीं से भी किसी तरह के जान-माल के नुकसान, भवनों में दरार या अन्य क्षति की कोई सूचना नहीं मिली है।
रायसेन में 11 से 13 अप्रैल तक “उन्नत कृषि महोत्सव 2026: प्रदर्शनी एवं प्रशिक्षण”
नईदिल्ली। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण व ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि रायसेन में 11 से 13 अप्रैल तक आयोजित होने वाला “उन्नत कृषि महोत्सव 2026: प्रदर्शनी एवं प्रशिक्षण” वास्तव में खेती का गेम‑चेंजर राष्ट्रीय कृषि मेला होगा, जो तीन दिनों में किसानों के जीवन में नई उम्मीद, नई तकनीक और नए बाज़ार अवसर लेकर आएगा। श्री शिवराज सिंह ने आज केंद्र और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ रायसेन में मेला स्थल दशहरा मैदान का निरीक्षण कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए और महोत्सव के प्रचार रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया, साथ ही प्रबुद्धजनों से संवाद भी किया।
केंद्रीय कृषि मंत्री चौहान की पहल पर भारत सरकार का कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय मध्य प्रदेश के रायसेन ज़िले के दशहरा मैदान में 11, 12 और 13 अप्रैल को राष्ट्रीय स्तर का “उन्नत कृषि महोत्सव 2026 – प्रदर्शनी एवं प्रशिक्षण” आयोजित कर रहा है। इसे लेकर श्री शिवराज सिंह का कहना है कि ये सिर्फ मेला नहीं, किसानों की तकदीर बदलने का सबसे बड़ा मौका है और ये तीन दिन किसानों के जीवन में निश्चित रूप से नई उम्मीद लेकर आएँगे।
आयोजन स्थल दशहरा मैदान को तीन बड़े हैंगर और तीन सेमिनार हॉल के रूप में विकसित किया गया है। हैंगर‑1 में कृषि एरीना, फॉर्म मशीनरी, एग्री इरिगेशन, क्रॉप प्रोटेक्शन, सॉइल न्यूट्रीशन, सीड वर्ल्ड, किसान सेवाएँ और इनोवेशन एंड रिसर्च – CGIAR (कंसल्टेटिव ग्रुप ऑन इंटरनेशनल एग्रीकल्चरल रिसर्च) एवं अन्य संस्थान के लिए अलग‑अलग ब्लॉक बनाए गए हैं। इसी तरह, हैंगर‑2 में पशुपालन एवं डेयरी विभाग, सिंचाई कंपनियाँ, मृदा पोषण, NAFED (नेशनल एग्रीकल्चर कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन– राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ), NCCF (नेशनल कोऑपरेटिव कंज्यूमर्स फेडरेशन– राष्ट्रीय उपभोक्ता सहकारी महासंघ), NSC (नेशनल सीड्स कॉरपोरेशन– राष्ट्रीय बीज निगम), ICAR (भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद) के संस्थान, मार्केटिंग‑FPOs (किसान उत्पादक संगठन) और ग्रामीण विकास मंत्रालय के लिए स्टॉल निर्धारित हैं। इन दोनों में 300 स्टॉल्स रहेंगे। हैंगर‑3 को सांस्कृतिक एवं उद्घाटन हॉल के रूप में तैयार किया गया है, जिसमें विशाल मंच और अन्य सुविधाओं के साथ ही बड़ी संख्या में किसानों के बैठने की व्यवस्था होगी।
यह राष्ट्रीय कृषि मेला “सरकारी योजनाओं का साथ, बिचौलियों से मुक्त बाज़ार” और “सुरक्षित उपज, समृद्ध किसान” की थीम पर केंद्रित है। कृषि अवसंरचना कोष (Agriculture Infrastructure Fund – AIF) के अंतर्गत वेयरहाउस और कोल्ड‑स्टोरेज पर सरकार की ओर से दी जा रही छूट और ब्याज‑सबवेंशन की विस्तृत जानकारी दी जाएगी, ताकि किसान फसल कटाई के बाद वैज्ञानिक भंडारण कर सही समय पर बेहतर मूल्य प्राप्त कर सकें।
रायसेन के इस वृहद मेले में आधुनिक ट्रैक्टर एवं उपकरणों की प्रदर्शनी, उन्नत बीज‑खाद प्रदर्शनी, ऑर्गेनिक फार्मिंग (जैविक खेती) स्टॉल, डेयरी‑पोल्ट्री‑मत्स्य पालन जानकारी, किसानों के लिए मुफ्त प्रशिक्षण, सरकारी योजनाओं की लाइव जानकारी, कृषि स्टार्ट‑अप (नव प्रवर्तक उद्यम) प्रेज़ेंटेशन और वैज्ञानिकों व अधिकारियों से सीधा संवाद की व्यापक व्यवस्था की गई है।
LPG पर खुशखबरी! भारतीय ध्वज वाले जहाज ग्रीन आशा ने पार किया स्ट्रेट ऑफ होर्मुज
वॉटर प्लांट से क्लोरीन गैस का रिसाव, मची अफरा-तफरी, 50 से अधिक लोग बीमार
भोपाल। मध्य प्रदेश के झाबुआ जिले में पद्मावती नदी के किनारे स्थित इस प्लांट से अचानक जहरीली क्लोरीन गैस का रिसाव होने से 50 लोग बीमार हो गए जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। रिसाव इतना तेज था कि कुछ ही देर में जहरीली गैस का असर प्लांट के आसपास के करीब एक किलोमीटर के दायरे में फैल गया।
जो कर्मचारी वहां काम कर रहे थे और जो लोग पास के घरों में रह रहे थे, उन्हें अचानक हवा में एक बहुत ही तीखी और कड़वी गंध महसूस हुई। देखते ही देखते 7 कर्मचारियों सहित करीब 50 लोग इसकी चपेट में आ गए। स्थानीय लोगों के लिए वह मंजर बेहद खौफनाक था, क्योंकि अचानक ही लोगों को सांस लेने में भारी तकलीफ होने लगी और आंखों में ऐसी जलन हुई जिसे बर्दाश्त करना मुश्किल था।
जैसे ही गैस का असर बढ़ा, थांदला के उस इलाके में भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। लोग घबराहट के मारे अपने घरों से बाहर निकल आए, क्योंकि बंद कमरों में भी गैस का दमघोंटू अहसास होने लगा था। कई लोगों ने घबराहट और गले में जलन की शिकायत की। प्रशासन को जैसे ही इसकी भनक लगी, एसडीएम भास्कर गचले, टीआई अशोक कनेश और नगर परिषद की टीमें भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंच गईं। आनन-फानन में बीमार लोगों को अस्पताल पहुंचाया गया।
ब्लॉक चिकित्सा अधिकारी के मुताबिक, शुरुआत में 20-25 लोगों को भर्ती किया गया था, लेकिन धीरे-धीरे यह संख्या बढ़ती गई। कुछ मरीजों की हालत इतनी नाजुक थी कि उन्हें तुरंत ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखना पड़ा। फिलहाल, लगभग 50 मरीजों का इलाज चल रहा है और सभी की हालत अभी स्थिर है।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने कोई जोखिम नहीं लिया। मेघनगर की औद्योगिक इकाइयों से तकनीकी सहायता ली गई और विशेष रूप से इंदौर से विशेषज्ञों की एक टीम बुलाई गई। इन विशेषज्ञों ने रात करीब 9 बजे तक कड़ी मशक्कत के बाद लीकेज पर पूरी तरह काबू पाया और प्लांट के और भी टैंकों की सुरक्षा की जांच की।
जिला कलेक्टर ने बेहतर इलाज के सख्त निर्देश दिए हैं। स्थानीय निवासियों ने प्रशासन की सक्रियता पर राहत तो जताई है, लेकिन उनके मन में अब भी डर है। वहीं स्वास्थ्य विभाग की टीमें प्रभावित इलाकों में घर-घर जाकर सर्वे कर रही हैं ताकि उन लोगों की पहचान हो सके जिनमें मामूली लक्षण हैं और वे बिना जांच के न रह जाएं। सुरक्षा के लिहाज से प्लांट को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है।