देश-विदेश
पीएम मोदी का बड़ा ऐलान: भारत-कोरिया व्यापार 2030 तक 50 बिलियन डॉलर पहुंचाने का लक्ष्य
नईदिल्ली। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग के साथ द्विपक्षीय बैठक की। बैठक के बाद दोनों देशों के नेताओं ने अपना संबोधन दिया। दोनों देशों के बीच एमओयू एक्सचेंज हुए। इसके साथ ही दोनों देशों ने व्यापार, संस्कृति और तकनीक के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। पीएम मोदी ने कहा कि भारत और कोरिया का द्विपक्षीय व्यापार आज 27 बिलियन डॉलर तक पहुंच चुका है। 2030 तक इसे 50 बिलियन डॉलर तक पहुंचाने के लिए हमने आज कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं।
अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “राष्ट्रपति ली, दोनों देशों के डेलिगेट्स और मीडिया के साथियों नमस्कार। पहली भारत यात्रा पर प्रेसिडेंट ली का स्वागत करते हुए मुझे बहुत खुशी हो रही है। राष्ट्रपति ली का जीवन संघर्ष, सेवा और समर्पण का प्रेरणादायक उदाहरण है। हर चुनौती में उनके भीतर जन सेवा के संकल्प को और सशक्त किया है। भले ही यह उनकी पहली भारत यात्रा हो लेकिन भारत के प्रति उनकी आत्मीयता हमारी पहली मुलाकात से ही स्पष्ट रही है।”
पीएम मोदी ने कहा, “आठ वर्ष बाद कोरिया के राष्ट्रपति की भारत यात्रा अत्यंत महत्वपूर्ण है। लोकतांत्रिक मूल्य, मार्केट इकोनॉमी और कानून को लेकर सम्मान हम दोनों देशों के डीएनए में है। हिंद प्रशांत क्षेत्र में भी हमारा कॉमन आउटपुट है। इन सबके आधार पर पिछले एक दशक में हमारे संबंध अधिक गतिशील और व्यापक हुए हैं। उनकी यात्रा से हम इस भरोसेमंद साझेदारी को भविष्य की साझेदारी में बदलने जा रहे हैं। हम चिप से लेकर चिप्स, टैलेंट से लेकर तकनीक, पर्यावरण से लेकर ऊर्जा हर क्षेत्र में सहयोग के नए अवसरों को साकार करेंगे और साथ मिलकर दोनों देशों के विकास और समृद्धि सुनिश्चित करेंगे।”
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “भारत और कोरिया का द्विपक्षीय व्यापार आज 27 बिलियन डॉलर तक पहुंच चुका है। 2030 तक इसे 50 बिलियन डॉलर तक पहुंचाने के लिए हमने आज कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। दोनों देशों के बीच फाइनेंशियल फ्लो को सुगम बनाने के लिए हमने भारत-कोरिया फाइनेंशियल फोरम की शुरुआत की है। सहयोग को बल देने के लिए हमने एक इंडस्ट्रियल कॉर्पोरेशन कमेटी का गठन किया है। क्रिटिकल टेक्नोलॉजी और सप्लाई चेन में सहयोग बढ़ाने के लिए इकोनॉमिक सिक्योरिटी डायलॉग शुरू कर रहे हैं। हम कोरिया की कंपनी खासकर एसएमई की भारत में एंट्री सहज करने के लिए कोरियन इंडस्ट्रियल टाउनशिप भी स्थापित करेंगे।”
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मोहनखेड़ा महातीर्थ में आदिराज पारणा महोत्सव में की सहभागिता
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि अनेक योनियों के पश्चात मानव शरीर की प्राप्ति होती है, जो पंचतत्वों से निर्मित है। इस शरीर को संस्कारित करने के लिए उपवास एक श्रेष्ठ माध्यम है। आज अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर पारणोत्सव के माध्यम से इस जीवन को पुण्य संचयन से जोड़ने का यह अवसर अत्यंत पावन और कल्याणकारी है। ऐसे उत्सवों में सहभागिता से मानव जीवन धन्य हो जाता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव आज मोहनखेड़ा महातीर्थ में आयोजित आदिराज पारणा महोत्सव (वर्षीतप पारणा महोत्सव) में यह बात कही।
आदिराज पारणा महोत्सव (वर्षीतप पारणा महोत्सव) का भव्य एवं आध्यात्मिक आयोजन गच्छाधिपति श्रीमद विजय नित्यसेन सुरीश्वरजी महाराज साहब की पावन निश्रा में संपन्न हुआ। आयोजन के दौरान 550 से अधिक तपस्वियों का पारणा अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर विधिवत संपन्न हुआ। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर धर्मलाभ प्राप्त किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जैसे चराचर जगत में सूर्य ऊर्जा का संचार करता है, उसी प्रकार मानव जीवन में गुरुदेव सूर्य के समान मार्गदर्शक होते हैं। जीवन में अनेक प्रकार के भटकाव आते हैं, किन्तु अच्छे और बुरे का अंतर समझाने का कार्य गुरुदेव ही करते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि गुरुदेव आचार्य श्री राजेन्द्र सूरी जी महाराज के आशीर्वाद से ही सरकार भौतिक विकास के साथ-साथ आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक चेतना के संवर्धन के लिए भी प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि मानव अपने संस्कारों को न भूले और आदिकाल से चली आ रही सनातन संस्कृति से जुड़ा रहे। जीवन में पाने से अधिक आनंद देने में है, इसी उद्देश्य के साथ सरकार कार्य कर रही है।
उन्होंने कहा कि जनजातीय अंचल में गुरुदेव के आगमन से नई चेतना का संचार हो रहा है। गुरुदेव के इंदौर में चातुर्मास आगमन पर राज्य सरकार की ओर से पूर्ण सहयोग प्रदान किया जाएगा। साथ ही, उनके आशीर्वाद से शासन के कार्यों को और अधिक प्रभावी ढंग से पूर्ण करने के लिए सरकार निरंतर प्रयासरत है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि शासन स्तर पर सामाजिक चेतना के विकास के लिये अनेक कार्य किए जा रहे हैं। गौशालाओं में प्रति गाय अनुदान राशि 20 रुपये से बढ़ाकर 40 रुपये की गई है। दुग्ध उत्पादन और प्राकृतिक कृषि को बढ़ावा देने के लिए भी निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। गरीबों के जीवन स्तर में सुधार और उनके उत्थान के लिए सरकार संकल्पित होकर कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रसिद्ध मोहनखेड़ा महातीर्थ में पहुंचकर विधिवत पूजन-अर्चन कर दर्शन किए।
गच्छाधिपति पूज्य श्रीमद विजय नित्यसेन सुरीश्वरजी महाराज साहब ने अपने उद्बोधन में कहा कि जब मानव के मन में धर्म का अंश जागृत होता है, तभी वह इस प्रकार के पुण्य आयोजनों में सहभागी बनता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के आगमन पर उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि वे प्रदेश सेवा के लक्ष्य को लेकर निरंतर आगे बढ़ें, उनका आशीर्वाद सदैव साथ है।
इस अवसर पर सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री श्री चैतन्य कुमार काश्यप ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रदेश में विरासत के गौरव को आगे बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के साथ-साथ किसान, महिला, युवा और गरीब वर्ग के कल्याण हेतु सतत कार्य कर रही है।
आदि शंकराचार्य का दर्शन भारतीय संस्कृति, धर्म और आध्यात्मिक एकता का बना आधार : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि अद्वैत ज्ञान के सूर्योदय के केन्द्र ओंकारेश्वर की चेतना की अनुभूति आज सबको हो रही है। ज्ञान और ध्यान की धरती मध्यप्रदेश ने ऐतिहासिक रूप से धर्म, संस्कृति और आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार किया है। हर युग में इसके प्रमाण विद्यमान हैं। श्रीरामचन्द्र जी वनवास मिलने पर मंदाकिनी माता के किनारे चित्रकूट के धाम पधारें और प्रभु श्रीराम का आगे का जीवन मानव मात्र के लिए पूजनीय हो गया, समाज ने रामराज्य का अनुभव प्राप्त किया।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव आचार्य शंकराचार्य जी की जयंती के अवसर पर ओंकारेश्वर के एकात्म धाम में आयोजित 5 दिवसीय प्रकटोत्सव के शुभारंभ सत्र को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में श्री द्वारका शारदा पीठ के जगदगुरू शंकराचार्य स्वामी श्री सदानंद सरस्वती, विवेकानंद केंद्र की उपाध्यक्ष पद्मश्री निवेदिता भिड़े, स्वामी शारदानंद सरस्वती सहित वरिष्ठ संतवृंद उपस्थित थे। राज्य सरकार के संस्कृति विभाग तथा आचार्य शंकर सांस्कृतिक एकता न्यास के तत्वावधान में 17 अप्रैल से 21 अप्रैल तक एकात्म पर्व मनाया जा रहा है।
श्री द्वारका शारदा पीठ के जगदगुरु शंकराचार्य स्वामी श्री सदानंद सरस्वती ने एकात्म धाम की संकल्पना को सराहा। उन्होंने कहा कि प्राणी मात्र में परमात्मा का दर्शन करने वाला ही एकात्मता सिद्ध कर सकता है। व्यक्ति में एकात्म बोध होना आवश्यक है। ब्रह्म, भगवान और आत्मा तीनों एक हैं। प्राणी मात्र में विद्यमान आत्म तत्व का ज्ञान ही एकता का आधार है। सद्-चित-आनंद का भाव ही एकता है। इस जगत से जगदीश्वर को प्राप्त करना ही हमारा ध्येय है। उन्होंने कहा कि गौमाता, धरती माता और जन्म देने वाली माता का सम्मान होना आवश्यक है। गौमाता की सेवा और रक्षा को आवश्यक बताते हुए उन्होंने कहा कि हमारी संस्कृति, संस्कारों से समृद्ध होती है।
आचार्य शंकर सांस्कृतिक एकता न्यास के प्रो. जयकिशोर एस. शास्त्री ने कहा कि ओंकारेश्वर में एकात्म धाम के अंतर्गत आचार्य शंकर की 108 फीट एकात्म प्रतिमा का लोकार्पण 2023 में हो चुका है। ओंकारेश्वर में 2400 करोड़ की लागत से आचार्य शंकर का अद्वैत लोक संग्रहालय का कार्य प्रगति पर है। ओंकारेश्वर को ग्लोबल सेंटर ऑफ वननेस (एकात्मता का केंद्र) को बनाया जा रहा है। यहां अब तक 2 हजार पौधे रोपे गए हैं।
आचार्य शंकर सांस्कृतिक एकता न्यास के स्वामी श्री वेदतत्वानंद पुरी ने कहा कि आचार्य शंकर ने अद्वैत के सिद्धांत से विश्व का परिचय कराया। भारत भूमि को हमारे सिद्ध महापुरुषों ने तीर्थ बनाया। इनके योगदान को 5 दिवसीय महोत्सव में सामने लाया जाएगा। रामकृष्ण मिशन, स्वामी चिन्मयानंद मिशन, उड़िया बाबा, गुरुनानक देव-सिख परंपरा आदि पर चिंतन मंथन होगा। हम हमारी परंपराओं पर चलते हुए विश्व शांति के लिए अद्वैत के मार्ग पर आगे बढ़ रहे हैं। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) में अद्वैत की भूमिका पर भी मंथन होगा।
जानिए भारतीय ट्रेनों में कब शुरू हुई टॉयलेट की सुविधा... किसने लिखा था रेलवे को खत
डेस्क। भारतीय रेल के हर कोच आज टॉयलेट की सुविधा मिल जाती है। लेकिन क्या आपको पता है कि 1853 में शुरू हुई भारतीय ट्रेनों में अगले 55 सालों तक टॉयलेट की सुविधा नहीं थी। यात्रियों को टॉयलेट के लिए स्टेशन का इंतजार करना पड़ता था। 1909 में एक यात्री के खत ने रेलवे को इसके लिए मजबूर किया और भारतीय ट्रेनों में टॉयलेट की सुविधा प्रारंभ हुई। 1909 में लिखा उस यात्री का खत आज के दिल्ली के म्यूजियम में सुरक्षित रखा गया है।
बात साल 1909 की है, एक दोपहर ओखिल चंद्र सेन नामक यात्री पश्चिम बंगाल के अहमदपुर स्टेशन पर उतरे ताकि वे टॉयलेट जा सके। अभी वह लौटे ही नहीं थे कि गार्ड ने सीटी बजा दी और ट्रेन चलने लगी। ओखिल चंद्र को एक हाथ में लोटा और दूसरे में धोती संभालते हुए ट्रेन के पीछे भागना पड़ा लेकिन वह उसे पकड़ नहीं पाए और स्टेशन पर खड़े लोगों के सामने उन्हें शर्मिंदगी झेलनी पड़ी। इसी अपमान से व्यथीत होकर उन्होंने साहिबगंज रेल डिवीजन को अपनी टूटी-फूटी अंग्रेजी में एक ऐसा पत्र लिखा जिसने रेलवे के इस बदलाव के लिए मजबूर कर दिया।
ओखिल चंद्र ने अपने खत में साफ लिखा कि रेलवे की लापरवाही की वजह से उन्हें सार्वजनिक रूप से अपमानित होना पड़ा और उनकी ट्रेन छूट गई। इस शिकायत ने ब्रिटिश अधिकारियों को सोचने पर मजबूर कर दिया जिसके बाद फैसला हुआ कि 80 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय करने वाली हर ट्रेन के लोअर क्लास डिब्बे में टॉयलेट अनिवार्य रूप से बनाए जाएंगे। आज ओखिल चंद्र सेन का वह ऐतिहासिक खत नई दिल्ली के नेशनल रेल म्यूजियम में संभालकर रखा गया है जो हर यात्री को याद दिलाता है कि कभी-कभी एक लोटा और एक धोती भी बड़ा बदलाव ला सकते हैं।
काशी से बंगाल तक संदेश की तैयारी, प्रधानमंत्री के दौरे की आहट तेज
योगी सरकार का प्रवासी श्रमिकों के लिए मुफ्त एलपीजी सिलेंडर फैसला
योगी सरकार का यह फैसला प्रवासी श्रमिकों के जीवन में राहत लाने वाला है। मुफ्त एलपीजी सिलेंडर की उपलब्धता से न केवल उनके दैनिक जीवन में सुविधा बढ़ेगी बल्कि घरेलू गैस आपूर्ति की पारदर्शिता भी सुनिश्चित होगी। साथ ही, पीएनजी पाइपलाइन को बढ़ावा देने से प्रदेश में ऊर्जा आपूर्ति का ढांचा और सुदृढ़ होगा।
जनकल्याण के कामों में तेजी लायें, निरीक्षण करें, गांवों में करें रात्रि विश्राम: मुख्यमंत्री डॉ. यादव
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शुक्रवार को मंत्रालय से प्रदेश में चलाये जा रहे जल गंगा संवर्धन अभियान, पूर्ण हो चुके संकल्प से समाधान अभियान और सरकार द्वारा संचालित विभिन्न जनकल्याणकारी गतिविधियों की उच्च स्तरीय समीक्षा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए प्रदेश के सभी कमिश्नर्स एवं कलेक्टर्स के साथ योजनाओं की प्रगति पर विस्तार से चर्चा कर समुचित दिशा-निर्देश दिए।
समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी विभागीय अधिकारियों एवं कलेक्टर्स से कहा कि प्रदेश और समाज की बेहतरी के लिए सरकार द्वारा विभिन्न अभियानों के माध्यम से महती प्रयास किये जा रहे हैं। सरकार के इन सभी प्रयासों एवं अभियानों में जन जुड़ाव एवं सहभागिता बेहद जरूरी है। इन सभी अभियानों की सार्थकता और सफलता तभी सुनिश्चित होगी, जब इनमें अधिकाधिक जनसहयोग एवं जन भागीदारी भी हो। इसके लिए सभी समर्पित और फोकस्ड होकर प्रयास करें।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी कलेक्टर्स से कहा कि वे जनता के कल्याण के कामों को तेजी से पूर्ण करायें। सरकार की योजनाओं का फील्ड में पूर्णतया क्षमता और दक्षता के साथ व्यापक स्तर पर सुचारु एवं बेहतर क्रियान्वयन सुनिश्चित करें। जनता और जनप्रतिनिधियों के साथ मिलकर, उनकी जरुरतों और सुझावों पर अमल करते हुए जनोन्मुखी प्रशासन से खुद की और सरकार की साख बढ़ायें।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सभी कलेक्टर्स लगातार जिले में भ्रमण करें, लोगों से चर्चा करें, उनकी समस्या सुनकर समाधान करें और गांवों में रात्रि विश्राम करें, इससे सरकारी योजनाओं का मैदानी स्तर पर क्रियान्वयन में मदद मिलेगी।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में 12 जनवरी से 31 मार्च तक 2026 तक "संकल्प से समाधान अभियान" चलाया गया। इस अभियान से सरकार की 106 प्रकार की योजनाओं का सीधा लाभ जनता और जरुरतमंदों तक पहुंचाया गया। सभी कलेक्टर्स इस अभियान के मूल लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए हमेशा क्रियाशील रहें और जनता को अधिकतम लाभ दिलायें।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में जल संरक्षण के लिए जल गंगा संवर्धन अभियान 19 मार्च से प्रारंभ हुआ है। यह 30 जून 2026 तक चलेगा। विगत 2 सालों में अभियान के अंतर्गत हुए जल संचयन के कार्यों से यह अभियान राष्ट्रीय स्तर पर मध्यप्रदेश की पहचान बन चुका है। अब आवश्यकता है कि इस साल भी जल संरक्षण और सूख चुके जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने के भरसक प्रयास किये जायें।
माता-पिता के संस्कार और गुरूओं से प्राप्त ज्ञान के प्रति सदैव रहें कृतज्ञ : राज्यपाल
भोपाल। विद्यार्थी, सफलता के बाद अपने माता-पिता के त्याग, बलिदान और समर्पण को कभी नहीं भूले। उनका आजीवन सम्मान करें। वृद्धावस्था में उनकी विशेष देख-भाल करें। माता-पिता के संस्कारों और गुरूओं से मिले ज्ञान के प्रति सदैव कृतज्ञता का भाव रखें। जीवन में हमेशा ईमानदारी, परिश्रम और निष्ठा का पालन करें। गरीब, वंचित और जरूरतमंदों के कल्याण का भाव हमेशा मन में रखे, जब भी अवसर मिले उनकी जरूर मदद करें। उक्ताशय के विचार मध्य प्रदेश के राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने शुक्रवार को बंसल ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट्स भोपाल के प्लेसमेंट ऑफर वितरण समारोह को संबोधित करते हुए कहीं।
इस अवसर पर उन्होंने रोजगार प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थी, उनके गुरूजन और अभिभावकों को बधाई एवं शुभकामनाएं दी। राज्यपाल श्री पटेल ने समारोह में विद्यार्थियों को इंजीनियरिंग, फार्मेसी सहित अलग-अलग क्षेत्रों की निजी कंपनियों के प्लेसमेंट ऑफर सर्टिफिकेट भी प्रदान किए।
राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने विद्यार्थियों से कहा कि आज का दिन, आपकी सफलता पर गर्व करने का दिन है। यह उपलब्धि आपके कठिन परिश्रम, शिक्षकों के निरंतर मार्गदर्शन और अभिभावकों के सहयोग का परिणाम है। यह संकल्प, समर्पण और सफलता का उत्सव है। उन्होंने कहा कि जहां एक ओर यह आपके जीवन की उपलब्धि का विशेष क्षण है, वहीं नई जिम्मेदारियों की शुरुआत भी है। यह भी याद रखें कि सफलता, केवल उच्च पद अथवा वेतन से नहीं मापी जा सकती है। वास्तविक सफलता तब मानी जाती है जब आप अपने बौद्धिक और नैतिक मूल्यों से समाज तथा राष्ट्र के निर्माण एवं मानवता के कल्याण में सहभागी होते हैं।
राज्यपाल पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की “विकसित भारत” और “आत्मनिर्भर भारत” की संकल्पना में युवाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उनके विजनरी नेतृत्व में नई शिक्षा नीति, स्टार्ट अप इंडिया, स्किल इंडिया और डिजिटल इंडिया जैसे कार्यक्रम, युवाओं को सशक्त बनाने की अभूतपूर्व पहल है। उन्होंने कहा कि युवा इन अवसरों का भरपूर लाभ उठाएँ। अपने ज्ञान, कौशल और प्रतिभा से राष्ट्र के नव निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाएँ। तेजी से बदलती तकनीकों और नवाचारों के युग में केवल पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं रहें बल्कि नई संभावनाओं और चुनौतियों के लिए खुद को लगातार तैयार करें। राज्यपाल श्री पटेल ने युवाओं से समाज के कमजोर वर्ग की समस्याओं के प्रति संवेदनशील रहने और समाधान में सक्रिय सहयोग की अपील की।
राज्यपाल का कार्यक्रम में बंसल ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट्स के सचिव श्री सुनील बंसल ने पुष्प गुच्छ से स्वागत किया। शॉल, श्रीफल और स्मृति चिन्ह भेंट कर अभिनंदन किया। स्वागत उद्बोधन ग्रुप के एम.डी. श्री पार्थ बंसल ने दिया। सह सचिव डॉ.संजय जैन ने आभार माना। समारोह में डायरेक्टर डॉ.दामोदर तिवारी और डॉ. सतीश नायक, संस्थान के विभिन्न संकायों के प्राध्यापक, विद्यार्थी और उनके परिजन उपस्थित थे।
फाइटर जेट की हार्ड लैंडिंग...एयरपोर्ट रनवे की हुई मरम्मत, हवाई अड्डे पर विमान परिचालन फिर से शुरू
गुरुवार को हुई एक अलग घटना में दिल्ली हवाई अड्डे पर स्पाइसजेट का एक विमान अकासा एयर के एक खड़े विमान से टकरा गया। इस टक्कर से दोनों विमानों को मामूली नुकसान पहुंचा, हालांकि किसी के घायल होने की कोई खबर नहीं है। यह घटना दोपहर लगभग 2:15 बजे हुई। उस समय लेह से आया स्पाइसजेट का विमान अपने निर्धारित 'बे' (पार्किंग स्थल) की ओर बढ़ रहा था, तभी वह अकासा एयर के विमान के संपर्क में आ गया। अकासा एयर का वह विमान उस समय हैदराबाद के लिए उड़ान भरने की तैयारी कर रहा था।
नन्ही बच्ची की जान बचाने 15 करोड़ की सहायता, अब एक इंजेक्शन से मिलेगा नया जीवन
सरकार के इस फैसले से यामिका के परिवार के सदस्य भावुक हो गए. उनकी आंखों में आंसू साफ दिखाई दे रहे थे. उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि उन्हें इतनी बड़ी मदद मिलेगी और वे अपनी बच्ची को बचा पाएंगे. अगर वे अपनी पूरी संपत्ति भी बेच देते, तब भी इतना महंगा इलाज संभव नहीं था, लेकिन मंत्री की पहल ने उनकी बच्ची को नई जिंदगी की उम्मीद दी.
नई दिल्ली में सेना कमांडरों का सम्मेलन संपन्न हुआ
देलही : द्विवार्षिक सेना कमांडरों का सम्मेलन (एसीसी) 16 अप्रैल, 2026 को समाप्त हुआ। यह सम्मेलन 13 अप्रैल से शुरु हुआ था। सेना प्रमुख (सीओएएस) की अध्यक्षता में आयोजित इस सम्मेलन में शीर्ष सैन्य नेतृत्व ने भाग लिया। कैबिनेट सचिव, रक्षा प्रमुख, रक्षा सचिव और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बोर्ड (एनएसबीए) अध्यक्ष के अलावा नौसेना प्रमुख सहित सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों ने संबोधित किया। 'भविष्य के लिए तैयार बल' के रूप में विकसित होने की परिकल्पना के अनुरूप भारतीय सेना ने वर्ष 2026 को "नेटवर्किंग और डेटा केंद्रितता" का वर्ष घोषित किया है।
सम्मेलन में आधुनिकीकरण, युद्ध अभियानों में प्रौद्योगिकी का समावेश, सैद्धांतिक और प्रशिक्षण संबंधी आवश्यकताओं के साथ-साथ परिचालन तत्परता बढ़ाने और उभरती सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए नेटवर्किंग और डेटा केंद्रितता से संबंधित कई मुद्दों पर चर्चा की गई। ऑपरेशन सिंदूर से मिले सबक और वैश्विक स्तर पर मौजूदा परिचालन स्थितियों को ध्यान में रखते हुए, वरिष्ठ सेना नेतृत्व ने मानवरहित हवाई प्रणालियों (यूएएस) और प्रतिमानवरहित हवाई प्रणालियों (सी-यूएएस) के उपयोग सहित परिचालन क्षमता संबंधी आवश्यकताओं पर भी ध्यान केंद्रित किया।
विशिष्ट वक्ताओं ने बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्य और उभरते वैश्विक, क्षेत्रीय और आंतरिक सुरक्षा संबंधी पहलुओं पर प्रकाश डाला। वैश्विक संघर्षों से प्राप्त सबकों का विशेष रूप से उल्लेख करते हुए, वक्ताओं ने देश की रणनीतिक और सुरक्षा हितों की गारंटीकृत सुरक्षा के लिए कठोर शक्ति की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने अंतर-मंत्रालयी समन्वय, नागरिक और सैन्य संस्थानों के बीच बेहतर तालमेल और जटिल सुरक्षा चुनौतियों के समन्वित राष्ट्रीय समाधान के लिए राष्ट्रव्यापी दृष्टिकोण पर जोर दिया। चर्चा के दौरान यह बात सामने आई कि वर्तमान आपूर्ति श्रृंखला संकट को देखते हुए रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को मजबूत करने और दीर्घकालिक रणनीतिक लचीलापन सुनिश्चित करने के लिए स्वदेशी उत्पादन क्षमताओं को बढ़ाने की तत्काल आवश्यकता है।
भारतीय कॉर्पोरेट कार्य संस्थाोन (आईआईसीए) ने आईएफएससीए अधिकारियों के लिए एक सप्ताह का प्रवेश प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया
देलही : अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र प्राधिकरण (आईएफएससीए) और भारतीय कॉर्पोरेट कार्य संस्थान (आईआईसीए) के सहयोग से, आईआईसीए ने मानेसर स्थित अपने परिसर में 13 से 18 अप्रैल 2026 तक आईएफएससीए के सहायक प्रबंधकों के लिए एक सप्ताह का प्रवेश प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया है।
20 फरवरी 2026 को गुजरात के गिफ्ट सिटी में ज्ञानेश्वर कुमार सिंह, महानिदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी, आईआईसीए, एवं के. राजारामन, अध्यक्ष, आईएफएसए, के बीच हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन का उद्देश्य क्षमता निर्माण, नीति अनुसंधान और ज्ञान साझेदारी के माध्यम से भारत के अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा इकोसिस्टम को मजबूत करना है।
वर्तमान में प्रारंभ किया गया प्रशिक्षण कार्यक्रम, आईएफएससीए के अधिकारियों को कॉर्पोरेट कानूनों, शासन ढांचे, वित्तीय नियमों और सीमा पार लेनदेन की व्यापक समझ से लैस करके, इस सहयोग को क्रियान्वित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
आईआईसीए के महानिदेशक एवं सीईओ ज्ञानेश्वर कुमार सिंह ने अपने उद्घाटन भाषण में आईएफएसए विनियमन के भविष्य और आगे की राह पर अपने विचार साझा किए। आईएफएसए की स्थापना के उद्देश्य की दूरदृष्टि पर बल देते हुए, उन्होंने कहा कि मात्र पांच वर्षों के कम समय में एक एकीकृत नियामक का निर्माण किसी चमत्कार से कम नहीं है और यह भारत की नियामक दूरदर्शिता का प्रमाण है।
किसानों के हित सर्वोपरि: शिवराज सिंह चौहान के निर्देश पर अमानक बीज मामले में कार्रवाई, नुन्हेम्स कंपनी पर एफआईआर दर्ज
देलही :नई दिल्ली में मध्यप्रदेश के धार और खरगोन के किसानों ने केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान से मिलकर उनके सामने करेला की फसल में अमानक बीज और रोपे से हुए भारी नुकसान का मामला रखा, जिस पर शिवराज सिंह ने इसे किसानों की आजीविका पर सीधा प्रहार मानते हुए तुरंत अधिकारियों को निर्देश दिए कि पीड़ित किसानों को उचित मुआवजा दिलाया जाए और दोषी कंपनी के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह के निर्देशों के बाद मामले में तेज़ कार्रवाई हुई और धार जिले के मनावर थाने में संबंधित कंपनी- नुन्हेम्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, हैदराबाद, तेलंगाना के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि किसानों के हित उनके लिए सर्वोपरि हैं। मध्यप्रदेश के धार और खरगोन के किसानों ने नई दिल्ली में उनसे भेंट कर करेला फसल में अमानक बीज और रोपे के कारण हुए गंभीर नुकसान की जानकारी दी, जिस पर चौहान ने तत्काल संबंधित अधिकारियों को साफ कहा कि प्रभावित किसानों को न्याय मिलना चाहिए और उन्हें उचित मुआवजा दिलाने की दिशा में तेजी से कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही, उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि जिस कंपनी की भूमिका इस पूरे मामले में सामने आई है, उसके खिलाफ कठोर वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। इन निर्देशों के बाद प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई तेज हुई और मनावर थाना, जिला धार में एफआईआर क्रमांक 266 दर्ज की गई। प्राथमिकी में भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धाराएं 318(4) और 324(5), आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 की धाराएं 3 व 7 तथा बीज अधिनियम, 1966 की धारा 19 के तहत मामला पंजीबद्ध किया गया है। प्राथमिकी में नुन्हेम्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, हैदराबाद, तेलंगाना को आरोपी के रूप में दर्ज किया गया है।
जनजातीय विकास की शक्ति का उपयोग, वंचितों-गरीबों की भक्ति के भाव के साथ किया जाए : राज्यपाल पटेल
भोपाल। राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि जनजातीय विकास की शक्ति का वंचितों, गरीबों की भक्ति के भाव के साथ उपयोग करें। संवेदनशीलता और आत्मीयता के साथ किए गए कार्य ईश्वर की कृपा के भागी होते हैं। उन्होंने प्रदेश की 21 प्रतिशत आबादी के जनजातीय समुदाय के विकास के कार्यों के प्रभावी क्रियान्वयन की भावी रणनीति के लिए कार्यशाला आयोजन की पहल के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का आभार ज्ञापित किया। बजट में जनजातीय विकास के लिए आवंटित राशि की स्वीकृति प्राप्त करने के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि कार्यशाला के आयोजन की मंशा है कि आगे और अधिक बेहतर किया जाए। राज्यपाल पटेल तथा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रशासन अकादमी में दीप प्रज्वलित कर तथा भगवान बिरसा मुंडा के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर कार्यशाला का शुभारंभ किया। इस अवसर पर जनजातीय कार्य विकास मंत्री कुंवर विजय शाह उपस्थित थे।
राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि वर्तमान समय जनजातीय विकास का स्वर्ण काल कहा जा सकता है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में जनजातीय विकास की अभूतपूर्व योजनाएं, प्रधानमंत्री जनमन, धरती आबा ग्राम उत्कर्ष अभियान आदि के अभूतपूर्व कार्य हो रहे हैं। इनके लिए पर्याप्त बजट का भी प्रावधान किया गया है। आवश्यकता जनजातीय समुदाय के लिए अच्छा काम करने के मनोभाव और संवेदना की है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के विकासखंड, तहसील वार मूलभूत सुविधाओं का मानचित्र तैयार किया जाना चाहिए। मानचित्र में आबादी में स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क आदि मूलभूत जरूरतों की उपलब्धता को अंकित किया जाना चाहिए। उसी के अनुसार जनजातीय विकास का रोड मैप तैयार किया जाना चाहिए।
राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि निर्धारित राशि के कार्यों के लिए वर्क आर्डर भी समय से जारी किए जाने चाहिए। जिससे राशि का समय-सीमा में उपयोग हो जाए। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों के लिए निर्धारित राशि का समय सीमा में उपयोग बड़ी जवाबदारी है। जरूरी है कि विकास के विभिन्न कार्यों की डिजाइन, गुणवत्ता और उपयोगिता के संबंध में व्यापक चिंतन और मैदानी भ्रमण के अनुभवों के आधार पर योजना बनाई जानी चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के मुख्य मंत्रित्व काल में मंत्री के रुप में कार्य के अनुभव का स्मरण करते हुए कहा कि योजनाओं का निर्माण व्यापक मैदानी भ्रमण के अनुभवों के आधार पर किया जाना चाहिए। इससे क्रियान्वयन संबंधी चुनौतियों, कठिनाईयों की अग्रिम जानकारी हो जाती है। राज्यपाल पटेल ने कहा कि विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में आने वाली चुनौतियों को समझने के लिए हितग्राहियों के साथ परस्पर और आत्मीय संबंधों के द्वारा समझने की जरूरत पर बल दिया। स्कूल ड्रॉप आउट की चुनौती का उल्लेख करते हुए कहा कि ड्राप आउट के कारणों को विभिन्न आयाम हो सकते है। पालकों के अशिक्षित होने से शिक्षा के महत्व का ज्ञान नहीं होना। पढ़ाई में बच्चे, बच्ची का कमजोर होना, विद्यालय का घर से दूर होना, रास्ता दुर्गम होना, विद्यालय में शौचालय का अभाव आदि, आवश्यकता ऐसे कारणों को समझ कर योजना बनाने की है। उन्होंने कार्यशाला की सफलता के लिए बधाई दी।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और मार्गदर्शन में देश और प्रदेश में सभी वर्गों के विकास के लिए गतिविधियां जारी हैं। मध्यप्रदेश को राज्यपाल पटेल के मार्गदर्शन में जनजातीय कल्याण के क्षेत्र में एक नई ऊर्जा और दिशा मिल रही है। जनजातीय समाज को मुख्य धारा से जोड़ने और उनके समग्र विकास के लिए राज्यपाल पटेल द्वारा गुजरात में किए गए कार्यों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पटेल की जनजातीय समुदाय से आत्मीयता और उनकी परेशानियों को समझने की संवेदनशीलता अद्भुत है। इससे जमीनी स्तर पर प्रदेश के सुदूरवर्ती क्षेत्रों में जनजातीय कल्याण के लिए संचालित योजनाओं की प्रभावशीलता बढ़ी है। राज्य सरकार प्रदेश के हर वर्ग के हर व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने, उन्हें मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। जनजातीय समुदायों को शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, पेयजल की उपलब्धता और अधोसंरचना का विकास सुनिश्चित कराना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। राज्य सरकार अंत्योदय के लक्ष्य के साथ कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव जनजातीय विकास का लक्ष्य-राज्य स्तरीय जनजातीय उप योजना कार्यशाला के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश को जनजातियों का घर कहा जाता है। राज्य की 21 प्रतिशत से अधिक आबादी जनजातीय भाई-बहनों की है। इस तरह की कार्यशाला प्रदेश की 21 फीसदी से अधिक आबादी के भाग्य और भविष्य की नई रूपरेखा बनाने का प्लेटफार्म है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि कार्यशाला के निष्कर्ष जनजातीय कल्याण और विकास की योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाने, बजट के अधिकतम उपयोग, योजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने में सहायक होंगे। कार्यशाला में शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, ग्राम सभा आधारित विकास और आजीविका, अधोसंरचना, संस्कृति, सामाजिक क्षेत्र, उद्यमिता, वन और आयुष जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर जनजातीय भाई-बहनों के लिए बेहतर जीवन का खाका खींचा जा सकेगा।
एम्बुलेंस ड्राइवर समेत 6 आरोपी गिरफ्तार, मृत बच्ची को प्राइवेट हॉस्पिटल में भर्ती कराते पकड़े गए
पकड़े जाने के बाद आरोपितों ने बचने के लिए आनन-फानन में मृत बच्ची की दोबारा पर्ची तक कटवा दी, ताकि कार्रवाई से बच सकें। पूछताछ में सामने आया कि गैंगस्टर राहुल शर्मा (निवासी गाईबेला, थाना सिकरीगंज) के खिलाफ 31 आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं और उसकी अंकित शुक्ला (निवासी पकड़ी मिसरा, थाना कटया, जिला गोपालगंज) से मिलीभगत है। दोनों देवरिया, संतकबीरनगर और सिद्धार्थनगर के कई सरकारी एम्बुलेंस चालकों से साठगांठ कर मरीजों को निजी अस्पतालों में भेजते थे। इसके बदले ईएमटी और चालक 5 से 10 हजार रुपये तक कमीशन लेते थे। इसके बाद निजी एम्बुलेंस चालक गुंजेश यादव (निवासी बंधवा, थाना रामकोला, जिला कुशीनगर) और अमन पांडेय (निवासी घोरही, थाना महुली, जिला संतकबीरनगर) मरीजों को बीआरडी से निजी अस्पताल तक पहुंचाने का काम करते थे।
वित्तीय खुफिया इकाई-भारत और पेंशन निधि विनियामक एवं विकास प्राधिकरण ने धन शोधन और वित्तीय अपराधों से निपटने के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए
देलही : भारत में धन शोधन और वित्तीय अपराधों के खिलाफ लड़ाई को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए वित्तीय खुफिया इकाई-भारत (एफआईयू-आईएनडी) और पेंशन निधि विनियामक और विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) ने सूचना साझाकरण और समन्वय को बढ़ाने के लिए एक व्यापक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए।
एफआईयू-आईएनडी के निदेशक अमित मोहन गोविल और पीएफआरडीए के पूर्णकालिक सदस्य रणदीप सिंह जगपाल ने पीएफआरडीए के अध्यक्ष शिवसुब्रमणियन रामन की उपस्थिति में समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।
इस समझौता ज्ञापन का उद्देश्य दोनों एजेंसियों को विनियमित/रिपोर्टिंग संस्थाओं के लिए प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने में सक्षम बनाना है जिसमें पीएफआरडीए द्वारा विनियमित संस्थाओं के बीच मनी लॉन्ड्रिंग विरोधी और आतंकवाद के वित्तपोषण का मुकाबला करने (एएमएल/सीएफटी) क्षमताओं को उन्नत करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। दोनों पक्ष लागू अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूपता सुनिश्चित करेंगे और सूचनाओं के आदान-प्रदान और पारस्परिक हित के मुद्दों पर विचार-विमर्श के लिए त्रैमासिक बैठकें आयोजित करेंगे।
समझौते के प्रत्येक पक्ष द्वारा एक नोडल अधिकारी और एक वैकल्पिक नोडल अधिकारी की नियुक्ति की जाएगी ताकि दोनों एजेंसियों के बीच नियमित समन्वय और संवाद सुगम हो सके। यह समझौता ज्ञापन एगमोंट सूचना विनिमय सिद्धांतों के माध्यम से विदेशी एफआईयू के साथ सूचनाओं के आदान-प्रदान में भी सहायता करेगा।
इस सहयोग में प्रासंगिक वित्तीय उप-क्षेत्रों में मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद वित्तपोषण (एमएल/टीएफ) के जोखिमों और कमियों का आकलन, संदिग्ध लेनदेन के लिए चेतावनी संकेतकों की पहचान और प्रसार और पीएमएलए, पीएमएल नियमों और पीएफआरडीए दिशानिर्देशों के अंतर्गत दायित्वों के साथ रिपोर्टिंग संस्थाओं द्वारा अनुपालन की निगरानी और पर्यवेक्षण भी शामिल होगा।
वित्तीय खुफिया इकाई-भारत एक केंद्रीय राष्ट्रीय एजेंसी है जो संदिग्ध वित्तीय लेनदेन से संबंधित जानकारी प्राप्त करने, प्रोसेस करने, विश्लेषण करने और प्रसारित करने तथा मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद के वित्तपोषण के खिलाफ प्रयासों के समन्वय के लिए जिम्मेदार है।
पेंशन निधि विनियामक एवं विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) भारत में पेंशन क्षेत्र के विनियमन, विकास और पर्यवेक्षण के लिए जिम्मेदार वैधानिक नियामक निकाय है जिसकी स्थापना पीएफआरडीए अधिनियम, 2013 के अंतर्गत की गई है। इसमें राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली और अटल पेंशन योजना शामिल हैं। पीएफआरडीए पेंशन फंड, केंद्रीय अभिलेखपालन एजेंसियों, ट्रस्टियों, एग्रीगेटरों और उपस्थिति केंद्रों जैसे मध्यस्थों के लिए एक व्यापक नियामक और पर्यवेक्षी ढांचा प्रदान करता है ताकि पेंशन इकोसिस्टम का सुचारू रुप से विकास सुनिश्चित हो सके और ग्राहकों के हितों की रक्षा हो सके।
116 हेक्टेयर से ज्यादा जमीन अतिक्रमण मुक्त, 54 कब्जों पर चला बुलडोजर
रायपुर। छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में वन विभाग द्वारा अतिक्रमण के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की गई है। जिले के वनांचल क्षेत्र में स्थित दक्षिण सिंगपुर वन परिक्षेत्र में अवैध कब्जों को हटाने के लिए वन, राजस्व और पुलिस विभाग की संयुक्त टीम ने अभियान चलाया। इस दौरान 116.596 हेक्टेयर वनभूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया और 54 अवैध कब्जों पर बुलडोजर चलाकर झोपड़ीनुमा संरचनाओं को ध्वस्त किया गया।
जानकारी के अनुसार, यह पूरा मामला दक्षिण सिंगपुर वन परिक्षेत्र के पालगांव और गोंदलानाला क्षेत्र से जुड़ा है। यहां कक्ष क्रमांक 169 के जंगलों में कुछ लोगों द्वारा अवैध रूप से कब्जा कर झोपड़ीनुमा मकान बना लिए गए थे। लंबे समय से वन विभाग इन अतिक्रमणों को हटाने की तैयारी कर रहा था, जिसके तहत मंगलवार को यह बड़ी कार्रवाई की गई। जैसे ही प्रशासनिक टीम बुलडोजर के साथ मौके पर पहुंची, अतिक्रमणकारियों में हड़कंप मच गया। कई लोग अपने सामान को बचाने में जुट गए, जबकि कुछ ने कार्रवाई का विरोध भी किया। शुरुआती दौर में अतिक्रमणकारियों और प्रशासनिक अमले के बीच झूमा-झटकी की स्थिति भी बनी, लेकिन मौके पर तैनात पुलिस बल ने हालात को नियंत्रित कर लिया।
इस कार्रवाई में वन विभाग, राजस्व विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम शामिल रही, जिससे अभियान को सुचारु रूप से अंजाम दिया जा सका। अधिकारियों के अनुसार, कार्रवाई पूरी तरह नियमों के तहत की गई और अतिक्रमणकारियों को पहले ही नोटिस देकर समझाइश दी गई थी।
एसडीओ एवं संयुक्त वनमंडल अधिकारी बिरगुड़ी एस.एस. नाविक ने बताया कि अतिक्रमणकारियों को पूर्व में कई बार चेतावनी दी गई थी। साथ ही जिन लोगों ने वर्ष 2005 से पहले वनभूमि पर कब्जा किया था, उन्हें वन अधिकार पत्रक भी प्रदान किया जा चुका है। इसके बावजूद जो लोग अवैध रूप से नए कब्जे कर रहे थे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह अभियान यहीं नहीं रुकेगा, बल्कि आगे भी लगातार जारी रहेगा। वनभूमि को अवैध कब्जों से मुक्त कराना विभाग की प्राथमिकता है और भविष्य में भी ऐसे अतिक्रमणों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।