देश-विदेश
अमित शाह ने महान क्रांतिकारी, अजेय पराक्रमी चंद्रशेखर आजाद जी को उनकी पुण्यतिथि पर विनम्र वंदन किया
देलही : केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने महान क्रांतिकारी, अजेय पराक्रमी चंद्रशेखर आजाद जी को उनकी पुण्यतिथि पर विनम्र वंदन किया।
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा “जीवन की अंतिम सांस तक ‘वंदे मातरम्’ का गान करते हुए चंद्रशेखर आजाद जी ने अंग्रेजी हुकूमत के विरुद्ध वीरतापूर्ण लड़ाई लड़ी। काकोरी ट्रेन एक्शन हो, हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन (HSRA) का गठन हो, या क्रांतिकारियों के लिए सशक्त संगठन निर्माण, चंद्रशेखर आजाद जी के जीवन का पल-पल स्वाधीनता के लिए समर्पित रहा। उनकी बलिदान-गाथा का स्मरण कर आज भी रोम-रोम राष्ट्रप्रेम की भावना से भर उठता है। महान क्रांतिकारी, अजेय पराक्रमी चंद्रशेखर आजाद जी को उनकी पुण्यतिथि पर विनम्र वंदन करता हूँ।”
एक मार्च से WhatsApp पर नया नियम लागू.... बिना एक्टिव सिम नहीं चलेगा अकाउंट
डेस्क। अगर आप WhatsApp, Telegram या मोबाइल Signal का इस्तेमाल करते हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि एक मार्च 2026 से SIM-Binding नियम में कोई ढील नहीं दी जाएगी। यानी अब मैसेजिंग ऐप्स को एक्टिव SIM कार्ड से लगातार जुड़ा रहना अनिवार्य होगा।
सरकार के मुताबिक, जिस मोबाइल नंबर से आपने WhatsApp या अन्य मैसेजिंग ऐप पर अकाउंट बनाया है, वही SIM आपके फोन में एक्टिव रहनी चाहिए। अगर SIM हटाई जाती है या इनएक्टिव हो जाती है, तो उस डिवाइस पर ऐप की सेवाएं काम करना बंद कर सकती हैं।अब तक 6-डिजिट OTP डालकर एक बार लॉगिन करने के बाद SIM की मौजूदगी लगातार चेक नहीं होती थी, लेकिन नए नियम के तहत हर समय SIM का एक्टिव और फोन में मौजूद होना जरूरी होगा।
Department of Telecommunications यानी DoT ने 28 नवंबर 2025 को यह नियम जारी किया था और कंपनियों को इसे लागू करने के लिए 90 दिन का समय दिया था। अब 1 मार्च 2026 तक सभी मैसेजिंग प्लेटफॉर्म को इस सिस्टम को पूरी तरह लागू करना होगा।
साथ ही, वेब और डेस्कटॉप यूजर्स के लिए भी नया प्रावधान किया गया है। अगर आप कंप्यूटर या वेब पर WhatsApp चला रहे हैं, तो हर छह घंटे में ऑटो लॉगआउट होगा और दोबारा QR कोड स्कैन कर लॉगिन करना पड़ेगा।सरकार का कहना है कि यह कदम डिजिटल फ्रॉड, फर्जी नंबरों के दुरुपयोग और साइबर अपराध पर लगाम लगाने के लिए उठाया गया है। ऐसे में सभी यूजर्स को सलाह दी गई है कि 1 मार्च से पहले यह सुनिश्चित कर लें कि उनका मोबाइल नंबर और SIM पूरी तरह एक्टिव है, ताकि किसी भी तरह की परेशानी से बचा जा सके।
प्रधानमंत्री ने चंद्रशेखर आजाद के बलिदान दिवस पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की
देलही : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत माता के वीर सपूत चंद्रशेखर आजाद को उनके बलिदान दिवस पर श्रद्धांजलि अर्पित की।
प्रधानमंत्री ने कहा कि आजाद ने भारत माता को गुलामी की बेड़ियों से आजाद कराने के लिए अपना सब कुछ बलिदान कर दिया और इसी कारण उन्हें हमेशा याद किया जाएगा।
अमर क्रांतिकारी की विरासत को याद करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि चंद्रशेखर आजाद का जीवन यह दर्शाता है कि अन्याय के विरुद्ध अडिग रहने का संकल्प ही सच्चा पराक्रम है। मोदी ने यह भी कहा कि मातृभूमि के लिए उनके बलिदान की गाथा देश की हर पीढ़ी को प्रेरित करती रहेगी।
प्रधानमंत्री ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में लिखा:
“भारत माता के वीर सपूत चंद्रशेखर आजाद के बलिदान दिवस पर उन्हें मेरी आदरपूर्ण श्रद्धांजलि। उन्होंने मां भारती को गुलामी की बेड़ियों से आजाद कराने के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया, जिसके लिए वे सदैव स्मरणीय रहेंगे।”
“अमर क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद का जीवन बताता है कि अन्याय के खिलाफ अडिग रहने का संकल्प ही सच्चा पराक्रम है। मातृभूमि के लिए उनके बलिदान की गाथा देश की हर पीढ़ी को प्रेरित करती रहेगी।
न हि शौर्यात्परं किञ्चित् त्रिषु लोकेषु विद्यते।
शूरः सर्वं पालयति सर्वं शूरे प्रतिष्ठितम् ।।”
“तीनों लोकों में शौर्य से श्रेष्ठ कोई तत्व नहीं है। शौर्य ही वह आधारभूत शक्ति है जो चराचर जगत का पोषण और रक्षण करती है तथा समस्त लोक मर्यादा, समृद्धि व कर्तव्य का आधार बनती है।”
खेल महोत्सव मानवीय संकल्प, आत्मविश्वास और अदम्य साहस का प्रदर्शन : राज्यपाल
भोपाल। राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि मानवीय संकल्प, आत्मविश्वास और अदम्य साहस के अद्भुत प्रदर्शन का मंच है। राष्ट्रीय दिव्यांगजन क्रिकेट खेल महोत्सव- 2026 नॉट आउट @100 का समापन केवल समारोह भर नहीं है, यह आत्मसम्मान, आत्मनिर्भरता और सामाजिक समावेशन का उत्सव है। प्रतियोगिता के प्रत्येक प्रतिभागी खिलाड़ी ने अपनी क्षमता, धैर्य और परिश्रम से यह सिद्ध किया है कि सीमाएँ हमारे विचारों में होती हैं, संकल्प के सामने सब समाप्त हो जाती हैं।
राज्यपाल गुरुवार को राष्ट्रीय दिव्यांगजन क्रिकेट खेल महोत्सव- 2026 नॉट आउट @100 के समापन कार्यक्रम को पुलिस लाइन स्टेडियम में संबोधित कर रहे थे। प्रतियोगिता का आयोजन कुशाभाऊ ठाकरे न्यास, टास्क इंटरनेशनल, ध्यान-विज्ञान परमार्थ संस्थान एवं विवेकानंद विधिक न्याय केन्द्र के संयुक्त तत्वावधान में किया गया था।
राज्यपाल पटेल ने कहा कि संवेदनशील प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने “विकलांग” के स्थान पर “दिव्यांग” शब्द का प्रयोग कर समाज की सोच में सकारात्मक परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त किया है। उन्होंने खेल और खिलाड़ी का परिवार के मुखिया के रूप में सहयोग और प्रोत्साहन दिया है। राज्यपाल ने कहा कि गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में मोदी जी के मंत्रीमण्डल में उन्होंने 14 वर्ष कार्य किया है। गुजरात में खेल प्रतियोगिताओं का व्यापक स्तर पर आयोजन मोदी जी ने शुरू कराया था।
आज खेलों इंडिया में सारा देश खेल रहा है। उन्होंने खेल और क्रिकेट के प्रति अपनी अभिरूचि को बताते हुए खेल प्रतियोगिता के मुकाबलों को नहीं देख पाने का अफसोस करते हुए बताया कि कार्यक्रम में समय से पूर्व पहुँचने के उनके प्रयास विपरीत मौसम के कारण सफल नहीं हो सके। बावजूद इसके कि वह समापन समारोह में सीधे विमानतल से आयें है। उन्होंने कुशाभाऊ ठाकरे के मार्गदर्शन में कार्य की स्मृतियों को बताते हुए कहा कि समाज सेवा के कार्यों में वे उनके प्रेरणा स्त्रोत है। उन्होंने दिव्यांगजन की प्रतिभा को मंच प्रदान करने के प्रयासों की सराहना करते हुए आयोजनों की निरंतरता की बात कही है।
राज्यपाल ने मंचासीन दिव्यांग खिलाड़ी प्रियेश कुमार ने स्वरबद्ध काव्य का पाठ किया। राज्यपाल ने उनकी सराहना करते हुए कहा कि ईश्वर ने उनको दिव्य कंठ प्रदान किया है। उन्होंने प्रियेश कुमार की काव्य रचना को उत्कृष्ट बताते हुए उनकी रचनात्मकता को आगे बढ़ाने का अनुरोध किया। उन्होंने समारोह में जन-गण-मन और वन्दे मातरम् गीत का गायन करने वाली दिव्यांग कलाकार फाल्गुनी को मंच पर आमंत्रित कर पौधा और शॉल भेंट कर सम्मानित किया। मंचासीन अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी शैलेन्द्र यादव ने भी विचार व्यक्त किए।
राष्ट्रपति ने जमशेदपुर में श्री जगन्नाथ मंदिर के भूमि पूजन समारोह में लिया भाग
नईदिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 26 फरवरी को झारखंड में जमशेदपुर स्थित जगन्नाथ मंदिर के भूमि पूजन समारोह में भाग लिया। इसका आयोजन श्री जगन्नाथ आध्यात्मिक और सांस्कृतिक धर्मार्थ केंद्र ट्रस्ट, जमशेदपुर ने किया था। इस अवसर पर राष्ट्रपति ने कहा कि महाप्रभु जगन्नाथ समस्त ब्रह्मांड के स्वामी हैं। उनकी कृपा बिना किसी भेदभाव के समस्त मानव जाति पर समान रूप से बरसती है।
राष्ट्रपति ने कहा कि कोल्हान क्षेत्र जीवंत आदिवासी परंपराओं और देश की अन्य आध्यात्मिक परंपराओं के संगम का एक सुंदर उदाहरण प्रस्तुत करता है। इस क्षेत्र के लोगों ने सदियों पुरानी परंपराओं को संरक्षित रखा है। विभिन्न समुदायों के लोग सद्भाव से एक साथ रहते हैं। यह सामाजिक सद्भाव महाप्रभु जगन्नाथ के प्रति भक्ति का एक महत्वपूर्ण पहलू है।
राष्ट्रपति ने कहा कि विश्व भर में चल रहे युद्ध और संघर्ष उनके लिए चिंता और दुख का विषय हैं। साथ ही, विश्व समुदाय में महाप्रभु जगन्नाथ के प्रति श्रद्धा और भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं के प्रति सम्मान बढ़ रहा है। भक्ति और आध्यात्मिकता की ओर लोगों का झुकाव इस विश्वास को मजबूत करता है कि महाप्रभु जगन्नाथ विश्व समुदाय की रक्षा और कल्याण सुनिश्चित करेंगे।
मुर्मु ने कहा कि हमारी आध्यात्मिक परंपरा में सभी जीवित प्राणियों और पौधों के प्रति प्रेम और करुणा की भावना को सर्वोच्च महत्व दिया जाता है। इसके अलावा, दान को सबसे बड़ा सद्गुण माना जाता है। राष्ट्रपति ने कहा कि उन्हें यह जानकर प्रसन्नता हो रही है कि श्री जगन्नाथ आध्यात्मिक और सांस्कृतिक धर्मार्थ केंद्र ट्रस्ट समाज के अपेक्षाकृत कम सुविधा प्राप्त वर्गों के बच्चों की शिक्षा के लिए कार्य कर रहा है। उन्होंने ट्रस्ट को आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों की शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की सलाह दी। उन्होंने ट्रस्ट को इन बच्चों के लिए बड़े पैमाने पर छात्रावास की सुविधा उपलब्ध कराने का भी सुझाव दिया।
श्री जगन्नाथ आध्यात्मिक और सांस्कृतिक धर्मार्थ केंद्र ट्रस्ट श्रीमद्-भगवद्-गीता के अध्ययन के लिए एक आवासीय शिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने की प्रक्रिया का उल्लेख करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि यह प्रयास युवा पीढ़ी की आध्यात्मिक जागृति, चरित्र निर्माण और व्यक्तित्व विकास में अमूल्य योगदान देगा।
एनएमडीसी अनुसंधान एवं विकास केंद्र और आईआईटी हैदराबाद के बीच समझौता
नईदिल्ली। जिम्मेवार खनिक एनएमडीसी के अनुसंधान एवं विकास केंद्र ने भारत के खनिज और धातु क्षेत्र के भविष्य को बेहतर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, हैदराबाद (आईआईटीएच) के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। खनिज प्रसंस्करण और संबद्ध क्षेत्रों में स्वदेशी प्रौद्योगिकी को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से एनएमडीसी के अधिशासी निदेशक (आरएंडडी) संजीव साही और आईआईटी हैदराबाद के डीन (प्रायोजित अनुसंधान और परामर्श) ने आईआईटी हैदराबाद के निदेशक प्रो. बी. एस. मूर्ति की उपस्थिति में समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।
यह साझेदारी फील्ड की विशेषज्ञता और अकादमिक उत्कृष्टता के बीच एक मजबूत सहयोग का प्रतिनिधित्व करती है। एनएमडीसी और आईआईटी हैदराबाद एक साथ मिलकर लौह अयस्क बेनीफिशिएशन और एग्लोमेरेशन, हरित इस्पात निर्माण प्रौद्योगिकियों, स्वदेशी कच्चे माल का उपयोग करके वैकल्पिक लौह निर्माण, और खनन और धातुकर्म प्रक्रियाओं के उन्नत मॉडलिंग और सिमुलेशन में अनुसंधान को आगे बढ़ाएंगे। यह सहयोग प्राथमिक और माध्यमिक स्रोतों से महत्वपूर्ण और दुर्लभ पृथ्वी खनिजों के उत्खनन में नए रास्ते भी बनाएगा, जिससे भारत की खनिज सुरक्षा और संसाधन उपलब्धता सुदृढ होगी।
खनन क्षेत्र में तेजी से हो रहे डिजिटल परिवर्तन के साथ संरेखित, एमओयू स्वायत्त वाहन चालन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी), माइनिंग 4.0 फ्रेमवर्क और ड्रोन-सक्षम सर्वेक्षण और निगरानी में अनुसंधान और पायलट पहलों को चलाएगा। परिचालन शक्ति को अनुसंधान-संचालित नवाचार के साथ एकीकृत करके, गठजोड़ का उद्देश्य टिकाऊ, प्रौद्योगिकी-चालित समाधान प्रदान करना है जो भारत के विकासशील खनिज परिदृश्य में दक्षता, उत्पादकता और पर्यावरण प्रबंधन को बढ़ाता है।
अमिताभ मुखर्जी, अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक, एनएमडीसी ने समझौता ज्ञापन संपन्न होने के अवसर पर कहा, “आईआईटी हैदराबाद के साथ समझौता ज्ञापन उद्योग-अकादमिक गठजोड़ नवाचार के प्रति एनएमडीसी की प्रतिबद्धता को मजबूत करता है। आईआईटी हैदराबाद की अनुसंधान उत्कृष्टता और एनएमडीसी की डोमेन विशेषज्ञता का लाभ उठाकर, यह साझेदारी खनन, खनिज प्रसंस्करण और उभरते क्षेत्रों में स्वदेशी प्रौद्योगिकियों को आगे बढ़ाएगी, जो सतत विकास और आत्मनिर्भर भारत के विजन में योगदान देगी।“
यह साझेदारी नवाचार-संचालित विकास के लिए एनएमडीसी की प्रतिबद्धता और अनुसंधान को प्रभावशाली औद्योगिक अनुप्रयोगों में बदलने में आईआईटी हैदराबाद की भूमिका को रेखांकित करती है। दोनो संस्थान साथ मिलकर आत्मनिर्भर भारत के राष्ट्रीय विज़न में योगदान देंगे। विशेष रूप से, यह सहयोग एक ऐतिहासिक क्षण में आया है क्योंकि एनएमडीसी के अनुसंधान एवं विकास केंद्र ने भारत के खनिज विकास के इतिहास में समर्पित योगदान के 50 वर्ष पूरे किए हैं, जो अनुसंधान में उत्कृष्टता की अपनी विरासत और तकनीकी उन्नति के अपने निरंतर प्रयासों को और अधिक मजबूती प्रदान करता है।
पीएम विकसित भारत रोजगार योजना: मार्च अंत तक आएगी पहली किस्त
नईदिल्ली। प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना के लाभार्थियों के लिए एक महत्वपूर्ण सूचना सामने आई है। भारत सरकार ने इस योजना के अंतर्गत सहायता राशि की प्रथम किस्त मार्च महीने के अंत तक जारी करने की तैयारी में है। हालांकि, इस लाभ को प्राप्त करने के लिए कर्मचारी भविष्य निधि संगठन और संबंधित विभागों ने सदस्यों एवं प्रतिष्ठानों के लिए कड़े निर्देश जारी किए हैं, जिनका पालन न करने पर लाभार्थी राशि से वंचित रह सकते हैं।
योजना के दिशा-निर्देशों के अनुसार, प्रत्येक नए जुड़ने वाले और प्रथम बार सदस्य बनने वाले व्यक्तियों के लिए सार्वभौमिक खाता संख्या (UAN) का चेहरा प्रमाणीकरण तकनीक (Face Authentication Technology) के माध्यम से सत्यापन कराना अब अनिवार्य कर दिया गया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि बिना इस डिजिटल सत्यापन के योजना का लाभ प्रदान नहीं किया जाएगा। यदि किसी सदस्य को इस तकनीकी प्रक्रिया में कोई कठिनाई आती है, तो उन्हें तुरंत अपने संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय में उपस्थित होकर सहायता प्राप्त करने की सलाह दी गई है।
योजना की राशि का प्रेषण सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) के माध्यम से किया जाएगा। इसके लिए सदस्यों का बैंक खाता इस सुविधा हेतु सक्षम होना अनिवार्य है। जिन कर्मचारियों के खाते वर्तमान में इस प्रणाली से नहीं जुड़े हैं, उन्हें तत्काल अपनी बैंक शाखा में जाकर यह सुविधा सक्रिय कराने के निर्देश दिए गए हैं ताकि भुगतान प्रक्रिया में कोई बाधा न आए।
व्यक्तियों के साथ-साथ नियोक्ताओं और संस्थानों पर भी नियमों के पालन की जिम्मेदारी डाली गई है। आधिकारिक सूचना के अनुसार, जो प्रतिष्ठान नियमित रूप से इलेक्ट्रॉनिक चालान-सह-विवरणिका (ECR) प्रस्तुत नहीं कर रहे हैं या अंशदान जमा करने में विलंब कर रहे हैं, उनके कर्मचारियों को योजना के लाभ से रोका जा सकता है। प्रशासन ने सभी संस्थानों से समय पर विवरणिका भरने और अंशदान सुनिश्चित करने का आग्रह किया है ताकि सुचारू रूप से किस्त जारी की जा सके।
शिक्षा से ही जीवन में आगे बढ़ने का मार्ग होता प्रशस्त : राज्यपाल पटेल
भोपाल। राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि शिक्षा से ही जीवन में आगे बढ़ने का मार्ग प्रशस्त होता है। शिक्षा जीवन में प्रगति का आधार है। प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना आवश्यक है। उन्होंने जनजातीय और वंचितों को शासन की योजनाओं का प्राथमिकता से लाभ दिलाने पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से समाज के अंतिम व्यक्ति का सशक्तिकरण संभव होगा। राज्यपाल मंगुभाई पटेल मऊगंज जिले के हनुमना जनपद अंतर्गत दूरस्थ जनजातीय धरती आबा ग्राम सलैया खास में आयोजित कार्यक्रम में बुधवार को शामिल हुए।
राज्यपाल ने कहा कि बिरसा मुंडा के त्याग से प्रेरणा लेकर जनजातीय समाज के उत्थान के लिए कार्य करना चाहिए। उन्होंने बताया कि धरती आबा ग्राम उत्कर्ष योजना के तहत 18 विभागों की योजनाओं का लाभ जनजातीय परिवारों को मिलेगा। उन्होंने जनजातीय युवाओं का शिक्षित होकर समाज को जागरूक करने और मुख्यधारा में शामिल करने के प्रयासों में सहयोग करने का आह्वान किया। उन्होंने महिला सशक्तिकरण में स्वसहायता समूहों के योगदान की सराहना की। सिकल सेल उन्मूलन के लिए संवेदनशील प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 15 हजार करोंड़ रूपये के प्रवाधान की जानकारी दी। प्रधानमंत्री के प्रति आभार प्रदर्शन किया। उन्होंने निक्षय मित्र योजना, उज्ज्वला योजना सहित अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए अधिकारियों को प्रतिबद्धता के साथ कार्य करने के लिए प्रेरित किया।
राज्यपाल ने सिकल सेल उन्मूलन प्रयासों की सराहना सांसद जनार्दन मिश्र ने की। उन्होंने सलैया मार्ग निर्माण के लिये सांसद निधि से राशि उपलब्ध कराने की जानकारी दी। विधायक श्री प्रदीप पटेल ने कहा कि हनुमना क्षेत्र के 144 ग्रामों को धरती आबा ग्राम उत्कर्ष योजना से जोड़कर जनजातीय विकास और मुख्यधारा से जोड़ने का कार्य किया जा रहा है। कार्यक्रम में राज्यपाल पटेल का जनजातीय पारंपरिक नृत्य शैला एवं कर्मा से स्वागत हुआ। भगवान बिरसा मुंडा के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ शुभारंभ हुआ।
राज्यपाल ने विभिन्न योजनाओं से लाभान्वित हितग्राहियों को हितलाभ का वितरण किया। इस अवसर पर राज्यपाल द्वारा जनजातीय नायकों मोतीलाल बैगा, सुदर्शन सिंह गोड़ तथा जगन्नाथ कोल का शॉल और श्रीफल से सम्मान किया। कार्यक्रम स्थल पर विभिन्न विभागों द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी का अवलोकन किया। उन्होंने विभागीय अधिकारियों से शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं की विस्तृत जानकारी ली। राज्यपाल ने हितग्राहियों को योजनाओं का अधिकतम लाभ सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
इज़राइल दौरे के लिए प्रस्थान से पूर्व प्रधानमंत्री का वक्तव्य
देलही : अपने प्रिय मित्र प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के आमंत्रण पर, मैं 25-26 फरवरी 2026 के लिए इज़राइल के राजकीय दौरे पर जा रहा हूँ।
भारत और इज़राइल के बीच एक सुदृढ़ एवं बहुआयामी सामरिक साझेदारी है, जिसमें हाल के वर्षों में उल्लेखनीय प्रगति और गतिशीलता देखी गई है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, नवाचार, कृषि, जल प्रबंधन, प्रौद्योगिकी, रक्षा एवं सुरक्षा, व्यापार एवं निवेश और दोनों देशों के लोगों के परस्पर संबंधों सहित, विभिन्न क्षेत्रों में हमारे सहयोग को और सशक्त बनाने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री नेतन्याहू के साथ होने वाली अपनी चर्चाओं की मैं प्रतीक्षा कर रहा हूँ। हम आपसी हित के क्षेत्रीय एवं वैश्विक मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान करेंगे।
इस यात्रा के दौरान मैं इज़राइल के राष्ट्रपति महामहिम इसाक हर्ज़ोग से भी भेंट करूँगा। मुझे इज़राइली संसद ‘केनेस्सेट’ को संबोधित करने वाला प्रथम भारतीय प्रधानमंत्री बनने का भी सम्मान प्राप्त होगा। यह अवसर हमारे दोनों देशों को जोड़ने वाले सुदृढ़ संसदीय और लोकतांत्रिक संबंधों को एक श्रद्धांजलि होगा।
मैं भारतीय प्रवासी समुदाय के उन सदस्यों के साथ संवाद करने की भी उत्सुकता से प्रतीक्षा कर रहा हूँ, जो लंबे समय से भारत-इज़राइल की विशेष मित्रता को सुदृढ़ करते रहे हैं।
मुझे विश्वास है कि मेरा यह राजकीय दौरा दोनों देशों के बीच स्थायी संबंधों को और सुदृढ़ करेगा, सामरिक साझेदारी के लिए नए लक्ष्य निर्धारित करेगा तथा एक सुदृढ़, नवोन्मेषी और समृद्ध भविष्य के लिए हमारी साझा दृष्टि को आगे बढ़ाएगा।
प्रधानमंत्री ने जड़ों की सुरक्षा के महत्व पर संस्कृत सुभाषित साझा किया
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज एक संस्कृत सुभाषित साझा किया, जिसमें ज्ञान की मूलभूत जड़ों तथा दैनिक अनुशासन की रक्षा के निर्णायक महत्व पर बल दिया गया है। प्रधानमंत्री द्वारा साझा किया गया सुभाषित इस प्रकार है:
विप्रो वृक्षस्तस्य मूलं च सन्ध्या वेदाः शाखा धर्मकर्माणि पत्रम्।
तस्मान्मूलं यत्नतो रक्षणीयं छिन्ने मूले नैव शाखा न पत्रम्॥
“एक बुद्धिमान व्यक्ति वृक्ष के समान होता है। उस ज्ञान स्वरूपी वृक्ष की जड़ दैनिक उपासना है। वेद उसकी शाखाएँ हैं और सत्कर्म उसके पत्ते हैं। अतः जड़ की सावधानीपूर्वक रक्षा की जानी चाहिए, क्योंकि यदि जड़ नष्ट हो गई तो न शाखाएँ रहेंगी और न ही पत्ते।”
विप्रो वृक्षस्तस्य मूलं च सन्ध्या वेदाः शाखा धर्मकर्माणि पत्रम्।
तस्मान्मूलं यत्नतो रक्षणीयं छिन्ने मूले नैव शाखा न पत्रम्॥
विद्युत से सुरक्षा के लिये ग्रामीणजन सावधानियॉ जरूर बरतें
भोपाल :मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने ग्रामीणजनों को आगाह किया है कि वे अपने खेत-खलिहानों में विद्युत से सुरक्षा के लिये सावधानियां जरूर बरतें। अक्सर देखा गया है कि ग्रामीण क्षेत्रों में असावधानीवश विद्युत से कई बार अप्रिय घटनाएं घट जाती हैं। यह दुर्घटनाएं कईं बार जान-माल का नुकसान भी कर देती हैं। इनसे बचने के लिए ग्रामीणजनों से सावधानी बरतने की अपील करते हुए कंपनी ने कहा है कि कभी भी विद्युत लाइनों, उपकरणों एवं खंभों से छेड़खानी न करें क्योंकि ऐसा करना विद्युत अधिनियम 2003 के अंतर्गत दण्डनीय अपराध है।
कंपनी ने कहा किजरा भी असावधानी या छेड़खानी से बड़े-बड़े खतरे पैदा हो सकते हैं। इसलिए ऐसी लाइनें जिनमें विद्युत शक्ति प्रवाहित होती है उन्हें आँधी तूफान या अन्य किसी कारण से टूटने वाले तारों को अकस्मात छूने का प्रयास न करें। इस दौरान जरूरी होगा कि लाइन टूटने की सूचना तत्काल निकटस्थ बिजली कंपनी के अधिकारी को अथवा विद्युत कर्मचारी को दें। संभव हो तो किसी आदमी को उस जगह अन्य यात्रियों को चेतावनी देने के लिये भी बिठा दें।
किसानों को सलाह है कि वे खेतों खलिहानों में ऊॅंची-ऊँची घास की गंजी, कटी फसल की ढेरियां, झोपड़ी, मकान अथवा तंबू आदि विद्युत लाइनों के नीचे अथवा अत्यंत समीप न बनायें। साथ ही विद्युत लाइनों के नीचे से अनाज, भूसे आदि की ऊँची भरी हुई गाड़ियॉं न निकालें, इससे आग लगने एवं जान जाने का खतरा है।
कंपनी ने कहा कि बहुत से स्थानों पर बच्चे पतंग अथवा लंगर का खेल खेलते तरह-तरह के धागे और डोर विद्युत लाइनों में फंसा देते हैं। ऐसा करने से उन्हें रोकें। लाइनों में फंसी पतंग निकालने के लिए बच्चों को कभी भी खंभे पर न चढ़ने दें। इससे एक ओर जहां दुर्घटना को टाला जा सकेगा वहीं दूसरी ओर आप होने वाली आर्थिक हानि से भी बच सकेंगे।
मध्यप्रदेश कृषि उत्पादन में देश के शीर्ष राज्यों में शामिल : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश ने कृषि उत्पादन के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करते हुए देश के प्रमुख उत्पादक राज्यों में अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज की है। केंद्र सरकार द्वारा जारी आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार राज्य खाद्यान्न, दलहन तथ तिलहन फसलों के उत्पादन में शीर्ष तीन राज्यों में शामिल रहा है। मध्यप्रदेश ने कुल खाद्यान्न उत्पादन में 46.63 मिलियन टन उत्पादन के साथ देश में दूसरा स्थान प्राप्त किया, जो राष्ट्रीय उत्पादन का लगभग 13.04 प्रतिशत है। राज्य कुल दलहन फसल उत्पादन में देश में प्रथम स्थान पर हैं। तिलहन फसलों के उत्पादन में देश में दूसरा स्थान हासिल किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा कृषकों की आय को बढ़ाने एवं उनके समग्र कल्याण के उद्देश्य से वर्ष 2026 को "किसान कल्याण वर्ष" के रूप में मनाया जा रहा है।
गेहूं उत्पादन में राज्य ने 24.51 मिलियन टन उत्पादन किया और लगभग 20.78 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ देश में दूसरा स्थान हासिल किया। राज्य मक्का उत्पादन में भी अग्रणी रहा, 6.64 मिलियन टन उत्पादन के साथ मध्यप्रदेश का राष्ट्रीय हिस्सेदारी में लगभग 15.30 प्रतिशत योगदान रहा, जिससे यह देश का प्रमुख उत्पादक राज्य बना। मोटे अनाज (न्यूट्री/कोर्स सीरियल्स) के उत्पादन में भी राज्य ने 7.78 मिलियन टन उत्पादन करते हुए लगभग 12.17 प्रतिशत हिस्सेदारी दर्ज की और देश में तृतीय स्थान हासिल किया।
दलहन क्षेत्र में मध्यप्रदेश ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए कुल दलहन उत्पादन में 5.24 मिलियन टन उत्पादन किया और 20.40 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ देश में पहला स्थान प्राप्त किया। चना उत्पादन में राज्य 2.11 मिलियन टन उत्पादन और लगभग 19.01 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ शीर्ष तीन राज्यों में दूसरे स्थान पर रहा।
तिलहन क्षेत्र में भी राज्य की स्थिति मजबूत रही। कुल तिलहन उत्पादन में मध्यप्रदेश ने 8.25 मिलियन टन उत्पादन करते हुए लगभग 19.19 प्रतिशत राष्ट्रीय हिस्सेदारी दर्ज की एवं देश से दूसरा स्थान हासिल किया। विशेष रूप से सोयाबीन उत्पादन में राज्य ने 5.38 मिलियन टन उत्पादन किया, जो देश के कुल उत्पादन का लगभग 35.27 प्रतिशत है और इसे देश के प्रमुख सोयाबीन उत्पादक राज्यों में स्थापित करता है। राज्य में मूंगफली का उत्पादन 1.55 मिलियन टन रहा जो कि देश के कुल उत्पादन का 12.99 प्रतिशत रहा। मूंगफली उत्पादन में राज्य देश में तीसरे स्थान पर है।
मध्यप्रदेश में केंद्र एवं राज्य सरकार की कृषि विकास योजनाओं रासायनिक उर्वरकों का वितरण, पौध संरक्षण कार्यक्रम, मांग आधारित कृषि के लिए फसलों का विविधीकरण, एक जिला-एक उत्पाद योजना, मध्यप्रदेश राज्य मिलेट मिशन, कृषि उत्पादक संगठनों का गठन एवं संवर्धन, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, राष्ट्रीय कृषि विकास योजना, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, भावांतर भुगतान, रानी दुर्गावती श्रीअन्न प्रोत्साहन योजना आदि का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया गया। परिणामस्वरूप राज्य को कृषि क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की है। कुल उत्पादन में वृद्धि हुई है। कृषि आधारित नीतियों के परिणाम स्वरूप मध्यप्रदेश देश की कृषि अर्थव्यवस्था में एक महत्वपूर्ण राज्य के रूप में स्थापित है।
क्रियान्वयन में पारदर्शिता, तत्परता और संवेदनशीलता जरूरी : राज्यपाल पटेल
भोपाल : राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि मुख्यमंत्री दुधारू पशुप्रदाय योजना सबसे गरीब के जीवन में खुशहाली लाने का उपक्रम है। योजना की प्रक्रियाओं और क्रियान्वयन में गरीब के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। उनके हितों की अनदेखी सहन नहीं की जाएगी।
राज्यपाल पटेल मंगलवार को पशुपालन एवं डेयरी विकास विभाग द्वारा संचालित मुख्यमंत्री दुधारू पशुप्रदाय योजना के संबंध में लोकभवन में चर्चा कर रहे थे। बैठक का आयोजन जनजातीय प्रकोष्ठ द्वारा किया गया था। इस अवसर पर राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) पशुपालन एवं डेयरी विकास लखन पटेल, जनजातीय प्रकोष्ठ के अध्यक्ष दीपक खांडेकर, राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी, प्रमुख सचिव पशुपालन एवं डेयरी विकास उमाकांत उमराव, जनजातीय प्रकोष्ठ के सदस्य एवं अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि मुख्यमंत्री दुधारू पशुप्रदाय योजना अति पिछड़ी और गरीब पी.वी.टी.जी. जनजातियों बैगा, भारिया एवं सहरिया के कल्याण के लिए क्रियान्वित है। इस योजना की प्रक्रियाओं और क्रियान्वयन में पारदर्शिता, तत्परता के साथ ही संवेदनशील मनोभाव का होना भी जरूरी है। उन्होंने कहा है कि प्रदेश के पी.वी.टी.जी. जनजातीय जनसंख्या वाले सभी जिलों को योजना के दायरे में लाया जाना चाहिए। राज्यपाल को बताया गया कि योजना के तहत पशु वितरण कार्य की सामुदायिक निगरानी के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। सभी दुग्ध समितियों तथा संघों के द्वारा माह में 10-10 दिन के अंतराल पर तीन निश्चित तिथियों पर भुगतान की व्यवस्था को सुनिश्चित किया गया है। दूध के मूल्य में भी 2 से साढ़े 8 रुपए तक की वृद्धि की गई है। योजना में आवश्यक संशोधन किए गए हैं। मिल्क रूट तथा परिवहन की सुगमता वाले ग्रामों में प्राथमिकता के आधार पर हितग्राहियों के चयन के साथ ही आवश्यकतानुसार अन्य ग्रामों में भी हितग्राहियों को लाभान्वित किया जा सकेगा। चयनित हितग्राहियों को प्रदाय पूर्व तीन दिवस प्रशिक्षण दिया जाता है। वितरण के बाद 21 दिवस, तीन माह एवं छ माह पर हितग्राही-वार समीक्षा की जाएगी और हितग्राही को परिचयात्मक दौरा भी कराया जाएगा। प्रथमतः एक ही पशु की अंशदान राशि जमा कराकर हितग्राही को एक ही पशु वितरित किया जाएगा। पहले पशु का रखरखाव संतोषजनक पाए जाने पर ही उसे दूसरा पशु 3 माह बाद प्रदाय किये जाने की व्यवस्था की गई है।
एनआईएम और जिम एंड डब्ल्यूएस के संयुक्त दल ने अर्जेंटीना में माउंट एकांकागुआ पर सफलतापूर्वक चढ़ाई पूरी की
देलही : नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (एनआईएम), उत्तरकाशी और जवाहर पर्वतारोहण और शीतकालीन खेल संस्थान (जेआईएम एंड डब्ल्यूएस), पहलगाम के छह सदस्यीय दल ने भारतीय पर्वतारोहण के इतिहास में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। इस संयुक्त दल ने दक्षिण अमेरिका के सबसे ऊंचे शिखर और एशिया के बाहर दुनिया की दूसरी सबसे ऊंची चोटी माउंट एकांकागुआ पर 22 फरवरी 2026 को दोपहर 2:10 बजे सफलतापूर्वक चढ़ाई पूरी की।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कर्नल हेम चंद्र सिंह (प्रधानाचार्य, एनआईएम और जेआईएम एंड डब्ल्यूएस) के नेतृत्व में इस दल को 5 फरवरी 2026 को औपचारिक रूप से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। प्रस्थान के बाद यह दल 8 फरवरी 2026 को अर्जेंटीना पहुंचा और वहां से अपनी चढ़ाई शुरू की।
इस दल ने माउंट एकांकागुआ की बेहद कठिन परिस्थितियों का सामना करने से पहले वातावरण के अनुकूल ढलने के लिए बोनेट पीक (5,050 मीटर) पर विजय प्राप्त की। कैप्टन जी संतोष कुमार, दीप बहादुर साही, विनोद गुसाई, नायब सिपाही भूपिंदर सिंह और हवलदार रमेश कुमार सहित दल के सदस्यों ने तेज हवाओं और -20 डिग्री सेंटीग्रेड से -30 डिग्री सेंटीग्रेड तापमान की चुनौतीपूर्ण स्थिति का सामना करते हुए असाधारण साहस, आपसी सहयोग और तालमेल के साथ पेशेवर क्षमता का प्रदर्शन किया।
यह उपलब्धि अंतरराष्ट्रीय पर्वतारोहण के क्षेत्र में भारत की बढ़ती प्रतिष्ठा और विश्व स्तरीय मानकों पर हमारे प्रमुख पर्वतारोहण संस्थानों के प्रशिक्षण को रेखांकित करती है।
महाराष्ट्र के शेगांव में चार दिन तक चलेगा राष्ट्रीय आरोग्य मेला 2026
नईदिल्ली। केंद्रीय आयुष मंत्रालय, अखिल भारतीय आयुर्वेदिक कांग्रेस के सहयोग से महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले के पवित्र नगर शेगांव में 25 से 28 फरवरी 2026 तक चार दिवसीय "राष्ट्रीय आरोग्य मेला 2026" का आयोजन कर रहा है। इस मेले का उद्देश्य आम जनता के बीच आयुष चिकित्सा प्रणाली को बढ़ावा देना, व्यापक स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना और औषधीय पौधों की खेती और कृषि वानिकी के माध्यम से किसानों के लिए आजीविका के नए अवसर पैदा करना है।
राष्ट्रीय आरोग्य मेला 2026 का उद्घाटन 25 फरवरी 2026 को राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू करेंगी। उद्घाटन समारोह संत गजानन महाराज संस्थान के विसावा मैदान में होगा। इसमें महाराष्ट्र के राज्यपाल, महाराष्ट्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, आयुष मंत्री श्री प्रतापराव जाधव और कई अन्य विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहेंगे।
इस मेले के दौरान, आम लोगों को आयुर्वेद, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध, सोवा रिग्पा, होम्योपैथी और अन्य पारंपरिक स्वास्थ्य देखभाल पद्धतियों सहित विभिन्न आयुष प्रणालियों के तहत मुफ्त स्वास्थ्य जांच, चिकित्सा परामर्श और दवाएं प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।
इस कार्यक्रम में विषयगत प्रदर्शनियां, विशेषज्ञों के व्याख्यान, योग प्रदर्शन, लाइव थेरेपी काउंटर और निवारक एवं प्रोत्साहक स्वास्थ्य देखभाल पर संवादात्मक सत्र भी शामिल होंगे।
आयुष क्षेत्र में अच्छी विनिर्माण प्रथाओं, गुणवत्ता मानकों और नवीनतम शोधों को प्रदर्शित करने के लिए कई प्रतिष्ठित आयुष दवा और स्वास्थ्य कंपनियां भाग लेंगी। साथ ही, औषधीय पौधों और रोजमर्रा की स्वास्थ्य आवश्यकताओं के लिए सरल घरेलू उपचारों की एक समर्पित प्रदर्शनी भी आयोजित की जाएगी।
मंत्रालय के अंतर्गत आने वाली आयुष की सभी धाराओं के लिए अलग-अलग स्टॉल लगाए जाएंगे, जिससे आगंतुकों को एक ही मंच पर भारतीय पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों की समृद्ध विविधता का अनुभव करने में मदद मिलेगी।
राष्ट्रीय आरोग्य मेले 2026 का एक प्रमुख आकर्षण बुलढाणा जिले और आसपास के क्षेत्रों के किसानों के लिए एक विशेष पहल है, जिसका उद्देश्य उन्हें कृषि वानिकी और औषधीय पौधों की खेती को आय के एक स्थायी और लाभदायक स्रोत के रूप में अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है। "आयुर्वेदिक खेती, उत्पादन और विपणन" पर एक विशेष कार्यक्रम 27 फरवरी 2026 को दोपहर 3.00 बजे शेगांव स्थित विसावा परिसर में आयोजित किया जाएगा।
इस विशाल मेले में किसानों को वन-आधारित और औषधीय फसलों की खेती, प्रसंस्करण, मूल्यवर्धन और विपणन पर विशेषज्ञ मार्गदर्शन प्राप्त होगा, ताकि पारंपरिक कृषि करने वाले किसान आयुर्वेदिक खेती भी शुरू कर सकें और अपनी आय बढ़ा सकें।
केंद्रीय आयुष मंत्री श्री प्रतापराव जाधव ने किसानों से आयुर्वेदिक कृषि और उत्पादन कार्यक्रम में सक्रिय रूप से भाग लेने और पारंपरिक फसलों के साथ-साथ औषधीय पौधों की खेती के लाभ की संभावनाओं का पता लगाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि अपनी भूमि के कुछ हिस्से पर औषधीय पौधों की खेती करने से किसानों को स्थायी और लाभकारी आय प्राप्त करने में मदद मिलेगी, साथ ही नागरिकों को उच्च गुणवत्ता वाले प्राकृतिक उपचार के विकल्प मिलेंगे और इस तरह आयुष मूल्य श्रृंखला मजबूत होगी।
शेगांव की पवित्र भूमि में आयोजित होने वाला राष्ट्रीय आरोग्य मेला 2026 केंद्रीय आयुष मंत्री श्री प्रतापराव जाधव की परिकल्पना है जिसके दोहरे उद्देश्य हैं: औषधीय पौधों पर आधारित कृषि के माध्यम से किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार करना और आम जनता को गुणवत्तापूर्ण आयुष-आधारित स्वास्थ्य सेवाएं और जागरूकता प्रदान करना।
महाराष्ट्र और पड़ोसी राज्यों के नागरिकों, किसानों, स्वयं सहायता समूहों, छात्रों, स्वास्थ्य स्वयंसेवकों और आयुष हितधारकों को शेगांव आने और राष्ट्रीय आरोग्य मेले 2026 का अधिकतम लाभ उठाने तथा इस राष्ट्रीय आयोजन को भव्य सफलता दिलाने में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया जाता है।
रेडीमेड गारमेंट फैक्ट्री में लगी भीषण आग, मचा हड़कंप
हालांकि जांच के दौरान यह पाया गया कि फैक्ट्री में मानकों के अनुरूप अग्निशमन सुरक्षा व्यवस्था स्थापित नहीं थी, जो भविष्य में बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती थी। आग बुझाने के बाद दमकल कर्मियों ने कपड़ों के रोल्स में सुलग रही दबी हुई आग को भी बाहर निकलवाकर उलट-पलट कर पानी डालकर पूरी तरह बुझाया। लगभग 12:30 बजे तक अग्निशमन और बचाव कार्य समाप्त कर फायर सर्विस यूनिट्स ने आवश्यक दिशा-निर्देश देते हुए घटनास्थल से वापसी की। इस दौरान स्थानीय पुलिस टीम भी मौके पर मौजूद रही और राहत एवं बचाव कार्य में सहयोग करती रही।
Mumbai के तटीय इलाकों में 70 हेक्टेयर में 'हरित क्षेत्र' बनेगा
कोस्टल रोड गार्डन के 28 पेज के ड्राफ्ट कॉन्सेप्ट प्लान में इस प्रोजेक्ट को मुंबई के लिए एक नया आइकॉनिक पब्लिक एरिया बताया गया है और कहा गया है कि मास्टर प्लान जंगल जैसे एरिया को ज़्यादा से ज़्यादा इस्तेमाल करता है, जिसमें 55% रिक्लेम्ड ज़मीन जंगलों, वुडलैंड्स और गार्डन्स के लिए है, जो दूसरे वर्ल्ड क्लास वाटर फ्रंट पार्क्स के बराबर और कुछ मामलों में उनसे भी बेहतर है। कोस्टल रोड गार्डन्स में सात एक्सेस पॉइंट होंगे- नेपियन सी रोड, ब्रीच कैंडी, हाजी अली, महालक्ष्मी, वर्ली साउथ और वर्ली नॉर्थ। इसमें मैदान/फ्लेक्स फील्ड, स्पोर्ट्स कोर्ट (पिकलबॉल, पैडल, बास्केटबॉल, बैडमिंटन), आउटडोर जिम और फिटनेस पॉड, सोशल गार्डन (गेम टेबल और बैठने की जगह) और बच्चों के खेलने की जगह जैसी सुविधाएं होंगी।