देश-विदेश
उपराष्ट्रपति ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की
देलही : उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में उपराष्ट्रपति ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय को दूरदर्शी विचारक और राष्ट्र निर्माता के रूप में सराहा, जिन्होंने अपना संपूर्ण जीवन समाज सेवा में समर्पित कर दिया था। उन्होंने कहा कि उपाध्याय का समग्र मानवतावाद का सिद्धांत आज भी पूरे विश्व के लिए प्रासंगिक है।
सी.पी. राधाकृष्णन ने यह भी कहा कि करुणा के साथ सबसे पिछड़े और वंचित लोगों की सेवा करना और नैतिकता पर आधारित सार्वजनिक जीवन को बनाए रखना उनका जीवन संदेश है, जो भारत को एक विकसित राष्ट्र की ओर ले जाने में मार्गदर्शक शक्ति बना हुआ है।
गांव की ज़मीन से उठेगा नया आसमान, वाराणसी में कार्गो टर्मिनल देगा किसानों को अंतर्राष्ट्रीय पहचान…
गतिशक्ति कार्गो टर्मिनल केवल एक बुनियादी ढांचा परियोजना नहीं, बल्कि पूर्वांचल के किसानों और कारीगरों के लिए आर्थिक सशक्तिकरण का द्वार है। यह परियोजना स्थानीय उत्पादों को वैश्विक मंच तक ले जाएगी और वाराणसी को कृषि व हस्तशिल्प निर्यात का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में निर्णायक कदम साबित होगी।
उत्तराखंड में एकल महिला स्वरोजगार योजना शुरू
Manipur Violence: मणिपुर में फिर भड़की हिंसा, 5 दिनों के लिए इंटरनेट बंद
डेस्क। मणिपुर के उखरुल जिले में तांगखुल नगा समुदाय के एक सदस्य पर हमले के बाद मंगलवार सुबह हिंसा भड़क उठी। उपद्रवियों ने लिटान सारेइखोंग इलाके में खाली पड़े मकानों में आग लगा दी और जमकर गोलीबारी की, जिसके बाद राज्य सरकार ने जिले में 5 दिनों के लिए इंटरनेट सेवाएं पूरी तरह निलंबित कर दी हैं।
पुलिस के मुताबिक, यह हिंसा तब शुरू हुई जब दो तांगखुल नगा संगठनों ने उखरुल और कामजोंग जिलों में कुकी समुदाय की आवाजाही पर प्रतिबंध लगा दिया। इसके विरोध में सशस्त्र उपद्रवियों ने मंगलवार को रिहायशी इलाकों को निशाना बनाया। स्थिति इतनी तनावपूर्ण है कि महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों सहित सैकड़ों ग्रामीण अपना घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर रहे हैं।
मणिपुर सरकार ने एहतियात के तौर पर ब्रॉडबैंड, VPN और V-SAT सेवाओं को बंद करने का आदेश दिया है ताकि सोशल मीडिया के जरिए अफवाहें न फैलें। इलाके में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं, लेकिन स्थानीय लोगों ने सुरक्षा बलों की विफलता पर नाराजगी भी जाहिर की है। मंत्री गोविंदास कोंथौजाम के अनुसार, अब तक कम से कम 21 मकानों को आग के हवाले किया जा चुका है।
गुरुग्राम में आज से 'लखपति दीदियों के सरस आजीविका मेले' का महाकुंभ
देलही :हरियाणा की साइबर सिटी गुरुग्राम एक बार फिर देश की ग्रामीण परंपराओं, लोक कलाओं और महिला उद्यमिता के रंगों से सराबोर होने जा रही है। आज से सेक्टर-29 स्थित लेजर वैली पार्क ग्राउंड में ‘सरस आजीविका मेला-2026’ का भव्य आयोजन किया जा रहा है। राष्ट्रीय स्तर के इस मेले का उद्घाटन केंद्रीय ग्रामीण विकास तथा कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान करेंगे। कार्यक्रम में ग्रामीण विकास राज्य मंत्री डॉ. चंद्रशेखर पेम्मासानी और कमलेश पासवान विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल होंगे। 10 फरवरी से 26 फरवरी तक चलने वाले इस मेले में ‘मिनी भारत’ की जीवंत झलक देखने को मिलेगी।
इस वर्ष का सरस मेले में देश के 28 राज्यों से आईं लगभग 900 से अधिक महिला उद्यमी भाग ले रही हैं, जो विभिन्न स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी हैं। मेला परिसर में 450 से अधिक स्टॉल लगाए गए हैं, जहाँ उत्तर में कश्मीर के पश्मीना से लेकर दक्षिण में तमिलनाडु के सिल्क तक और पश्चिम में राजस्थान की कढ़ाई से लेकर पूर्व में असम के बांस शिल्प तक, सब एक ही छत के नीचे उपलब्ध होगें।
मेले के दौरान आयोजित संवाददाता सम्मेलन में केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय की संयुक्त सचिव स्वाति शर्मा ने स्वयं सहायता समूहों की प्रगति पर महत्वपूर्ण तथ्य साझा किए। उन्होंने बताया कि 'दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन' के तहत वर्तमान में देश की 10 करोड़ महिलाएं संगठित हैं। साथ ही उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री द्वारा 3 करोड़ लखपति दीदी बनने का लक्ष्य दिया गया था जिसमें से दिसंबर 2025 तक 2.9 करोड़ दीदी लखपति दीदी बन चुकी है,और आने वाले कुछ ही समय में इससे पूरा कर लिया जाएगा।
स्वाति शर्मा ने एक महत्वपूर्ण वित्तीय पहलू पर प्रकाश डालते हुए कहा कि स्वयं सहायता समूह की महिलाओं की ईमानदारी और आर्थिक उन्नति के कारण बैंकिंग सेक्टर में उनका विश्वास बढ़ा है। उन्होंने साझा किया कि विभिन्न राज्यों में स्वयं सहायता समूहों का एनपीए (नॉन-परफॉर्मिंग एसेट) घटकर 2 प्रतिशत से भी कम रह गया है, जो इस बात का प्रमाण है कि ग्रामीण महिलाएं अपने ऋण का भुगतान समय पर कर रही हैं और वित्तीय प्रबंधन में कुशल हो रही हैं।
जर्मनी में आयोजित बायोफैच (BIOFACH) 2026 में भारत ‘कंट्री ऑफ द इयर’ नामित
देलही : जैविक उत्पादों के लिए विश्व के अग्रणी व्यापार मेले बायोफैच 2026 में भारत को ‘कंट्री ऑफ द इयर’ नामित किया गया है। इसका आयोजन 10 से 13 फरवरी 2026 तक जर्मनी के नूरेमबर्ग में किया जा रहा है।
भारत सरकार के वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अधीन कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीईडीए) बायोफैच 2026 में भारत की प्रमुख और प्रभावशाली भागीदारी का आयोजन कर रहा है। इसमें भारत की भागीदारी देश की समृद्ध कृषि विरासत और जैविक उत्पादों के प्रमुख वैश्विक आपूर्तिकर्ता के रूप में इसकी मजबूत क्षमता को दर्शाएगी।
जर्मनी में आयोजित बायोफैच जैविक खाद्य पदार्थों और कृषि को समर्पित विश्व की सबसे बड़ी और सबसे प्रभावशाली प्रदर्शनी है। एपीडा एक दशक से अधिक समय से बायोफैच में भाग ले रहा है और इसमें लगातार अपनी मजबूत उपस्थिति बनाए हुए है।
बायोफैच 2026 में भारत की भागीदारी पिछले संस्करणों की तुलना में इस बार महत्वपूर्ण विस्तार को दर्शाती है जो भारतीय जैविक निर्यात के बढ़ते प्रभाव, जैविक उत्पादों की बढ़ती वैश्विक मांग और निर्यातकों, संघों और किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) की बढ़ती हिस्सेदारी को प्रतिबिंबित करती है।
14 वर्षों के अंतराल के बाद भारत का जैविक कृषि क्षेत्र एक बार फिर बायोफैच 2026 में केंद्र बिंदु बनने के लिए तैयार है।
बायोफैच 2026 में एपीडा की ओर से बनाया गया भारत का राष्ट्रीय मंडप 1,074 वर्ग मीटर क्षेत्र में फैला होगा और इसमें जैविक उत्पादों के निर्यातकों, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ), सहकारी समितियों, जैविक प्रयोगशालाओं, राज्य सरकारी संगठनों और कमोडिटी बोर्ड सहित 67 सह-प्रदर्शक शामिल होंगे। भारतीय मंडप में चावल, तिलहन, जड़ी-बूटियां, मसाले, दालें, काजू, अदरक, हल्दी, बड़ी इलायची, दालचीनी, आम की प्यूरी और आवश्यक तेलों सहित विभिन्न प्रकार के जैविक उत्पादों का प्रदर्शन किया जाएगा।
भारत के मंडप में 20 से अधिक राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रदर्शक भाग ले रहे हैं जो देश की व्यापक कृषि और क्षेत्रीय विविधता को दर्शाते हैं। इनमें असम, मेघालय, मणिपुर, दिल्ली, गुजरात, हरियाणा, कर्नाटक, केरल, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, अरुणाचल प्रदेश, तमिलनाडु, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड शामिल हैं। यह भागीदारी अलग-अलग क्षेत्रों के विशिष्ट जैविक उत्पादों और मूल्यवर्धित खाद्य उत्पादों को दर्शाने के साथ अंतरराष्ट्रीय जैविक व्यापार में भारत की वार्षिक वृद्धि को प्रदर्शित करती है।
भारतीय मंडप में उत्पादों के प्रदर्शन के अतिरिक्त आगंतुकों को भारतीय जैविक उत्पादों के स्वाद और सुगंध को प्रदर्शित करने वाले विशेष खाद्य पदार्थों को चखने का अवसर भी मिलेगा। इस दौरान प्रीमियम जैविक बासमती चावल और मसालों से तैयार की गई ताजा सुगंधित बिरयानी के नमूने की भी प्रस्तुति की जाएगी। इसके अतिरिक्त चावल की भारत की पारंपरिक किस्मों को दर्शाने के लिए पांच जीआई-टैग वाली चावल की किस्में, इंद्रायणी चावल, नवारा चावल, गोविंदभोग चावल, लाल चावल और चक हाओ (काला चावल) आगंतुकों को परोसी जाएंगी।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पूर्व विधानसभा अध्यक्ष स्व. राजेंद्र प्रसाद शुक्ला की जयंती पर किया नमन
भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने मध्य प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष रहे स्व. राजेंद्र प्रसाद शुक्ला की जयंती पर विधानसभा परिसर में उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की। विधायक एवं पूर्व प्रोटेम स्पीकर रामेश्वर शर्मा, पूर्व मंत्री पी.सी. शर्मा, पूर्व विधायक सुदर्शन गुप्ता और स्व. शुक्ला के परिजन ने भी चित्र पर पुष्पांजलि की।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि 10 फरवरी 1930 को छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में जन्मे राजेंद्र प्रसाद शुक्ला, वर्ष 1985 से 1990 तक मध्य प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष रहे। उन्होंने छत्तीसगढ़ क्षेत्र में पदयात्राओं के माध्यम से जन जागरण का कार्य किया। लोकप्रिय जन नेता रहे शुक्ला राज्य सरकार में विधि-विधायी एवं सामान्य प्रशासन मंत्री भी रहे। छत्तीसगढ़ राज्य के निर्माण के बाद, उन्होंने 14 दिसंबर 2000 से 19 दिसंबर 2003 तक छत्तीसगढ़ के प्रथम विधानसभा अध्यक्ष के रूप में कार्य किया। स्व. राजेंद्र प्रसाद शुक्ला ने 'असंसदीय अभिव्यक्तियां' नामक पुस्तक की संकल्पना की, जो विधायी कामकाज पर एक महत्वपूर्ण संदर्भ है। उन्होंने संसदीय मामलों सहित कई पुस्तक लिखीं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश के राज्यपाल, मुख्यमंत्री और विधानसभा अध्यक्ष रहे व्यक्तित्वों की जयंती और पुण्यतिथि पर मध्य प्रदेश विधानसभा भवन में उन्हें स्मरण करने की परंपरा स्थापित करने के लिए विधानसभा अध्यक्ष तोमर की सराहना करते हुए उनका आभार माना।
महाशिवरात्रि पर बाबा विश्वनाथ दूल्हा स्वरूप में, रुद्राक्ष और मेवों से सजे सेहरे संग काशी होगी शिवमय
महाशिवरात्रि की पावन रात्रि में जब बाबा विश्वनाथ रुद्राक्ष और मेवों से सजे सेहरे के साथ दूल्हे के रूप में भक्तों को दर्शन देंगे, तब काशी में भक्ति, परंपरा और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा। यह दृश्य न केवल श्रद्धालुओं के हृदय को भावविभोर करेगा, बल्कि काशी की सनातन परंपरा को पुनः जीवंत कर देगा।
राज्यमंत्री गौर ने किया पुलिस टीम का सम्मान
भोपाल : पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कृष्णा गौर ने गोविंदपुरा क्षेत्र में युवतियों पर हमला कर दहशत फैलाने वाले कथित कटर मैन बदमाश को गिरफ्तार करने वाली पुलिस टीम को सोमवार को सम्मानित किया। कार्रवाई में पिपलानी, अयोध्या नगर, गोविंदपुरा और अवधपुरी थानों की पुलिस की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
राज्यमंत्री गौर ने पुलिस की सराहना करते हुए कहा कि पुलिस की सुरक्षित और भरोसेमंद छवि समाज के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि समाज में घट रही गंभीर घटनाओं पर समय पर कार्रवाई करना पुलिस की जिम्मेदारी है और इसमें सहयोग करना स्थानीय नागरिकों की नैतिक ज़िम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि आरोपी मदमाश की गिरफ्तारी बड़ी उपलब्धि है। राज्यमंत्री ने पुलिस बल का मनोबल बढ़ाते हुए कहा कि इस तरह की त्वरित और प्रभावी कार्रवाई से जनता का विश्वास मजबूत होता है और अपराधियों में कानून का डर पैदा होता है।
झोलाछाप डॉक्टर के क्लिनिक पर छापा, दवाएं जब्त
आदिवासी आश्रम स्कूल में फूड पॉइजनिंग से हड़कंप, भोजन के बाद 70 छात्र बीमार, कई की हालत गंभीर, ICU में भर्ती
दालें प्रोटीन का सबसे बढ़ा स्रोत, इसकी उत्पादकता और पोषण बढ़ाने के लिए आगे आएं किसान
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश की उपजाऊ धरती, समृद्ध जल संसाधन और अनुकूल जलवायु हमारी सबसे बड़ी ताकत हैं। इकार्डा जैसे अंतर्राष्ट्री य अनुसंधान संस्थान का सशक्त होना प्रदेश के लिए गर्व का विषय है। भारत में अन्न केवल उत्पादन नहीं, बल्कि जीवन, संस्कृति और संस्कार का आधार है “अन्न देवो भव:” हमारी कृषि परंपरा का मूल मंत्र है। मध्यप्रदेश ‘कृषक कल्याण वर्ष’ मना रहा है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में ‘बीज से बाजार तक’ किसान के साथ खड़ी सरकार ने दलहन आत्मनिर्भरता मिशन की शुरुआत की है। इसका लक्ष्य वर्ष 2030-31 तक दलहन उत्पादन को 350 लाख टन तक पहुंचाना, आयात निर्भरता कम करना और किसानों की आय बढ़ाना है। इस मिशन किसानों को बेहतर बीज, आधुनिक भंडारण और सुनिश्चित विपणन की सुविधाएं मिलेंगी। उन्होंने कहा कि भारत विश्व का सबसे बड़ा दाल उत्पादक एवं उपभोक्ता देश है। दलहन उत्पादन में मध्यप्रदेश देश में पहले स्थान पर है, जिससे इस मिशन का सर्वाधिक लाभ प्रदेश के किसानों को मिलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शनिवार को सीहोर जिले के अमलाहा स्थित खाद्य दलहन अनुसंधान केंद्र में दलहन आत्मनिर्भरता राष्ट्रीय मिशन के अंतर्गत आयोजित राष्ट्रीय परामर्श एवं रणनीति सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव और केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने दीप प्रज्ज्वलित कर राष्ट्रीय परामर्श एवं रणनीति सम्मेलन का शुभारंभ किया। इस अवसर पर अंतर्राष्ट्रीय शुष्क क्षेत्र कृषि अनुसंधान केंद्र (ICARDA) सीहोर के नवनिर्मित प्रशासनिक भवन, प्रशिक्षण केंद्र तथा अत्याधुनिक प्लांट टिशु कल्चर प्रयोगशाला का लोकार्पण भी किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इकार्डा का यह नवीन भवन प्रदेश के अन्नदाताओं के लिए नई आशाओं और संभावनाओं का द्वार खोलेगा। यह केंद्र वैज्ञानिक खेती, उन्नत तकनीक और वैश्विक कृषि अनुभव को किसानों से जोड़ने में ऐतिहासिक भूमिका निभाएगा।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सिंचाई विस्तार और जल संरक्षण पर जोर देते हुए कहा कि इकार्डा द्वारा विकसित वैज्ञानिक मॉडल प्रदेश की योजनाओं को मजबूत आधार प्रदान करेंगे। केन्द्रीय कृषि मंत्रालय और इकार्डा का यह संयुक्त प्रयास मध्यप्रदेश को टिकाऊ और समृद्ध कृषि का राष्ट्रीय ही नहीं, वैश्विक मॉडल बना सकता है। उन्होंने कहा कि सीहोर का यह राष्ट्रीय सम्मेलन दलहन क्षेत्र की वर्तमान चुनौतियों, मूल संवेदनाओं और भविष्य की संभावनाओं पर गहन विमर्श का सशक्त मंच बनेगा और नीति निर्धारण व अनुसंधान के क्षेत्र में मील का पत्थर सिद्ध होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने केन्द्रीय कृषि मंत्रालय एवं इकार्डा की पूरी टीम को बधाई देते हुए कहा कि यह अनुसंधान केंद्र प्रदेश की कृषि को नई दिशा देगा और किसानों के जीवन में एक सकारात्मक बदलाव लेकर आएगा।
वाराणसी को मिलने जा रही है एक और विश्वस्तरीय पहचान!
भारतीय तटरक्षक बल ने समन्वित समुद्री-हवाई अभियान के जरिए अंतरराष्ट्रीय तेल तस्करी रैकेट का भंडाफोड़ किया
भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजी) ने 5-6 फरवरी 2026 को एक सुनियोजित समुद्री-हवाई समन्वित अभियान के जरिए एक अंतरराष्ट्रीय तेल तस्करी रैकेट का सफलतापूर्वक भंडाफोड़ किया। इस अभियान से संघर्षग्रस्त क्षेत्रों से उत्पन्न होने वाले भारी मात्रा में तेल और तेल-आधारित कार्गो के अवैध हस्तांतरण में शामिल एक जटिल नेटवर्क ध्वस्त हुआ है।
5 फरवरी 2026 को, मुंबई से लगभग 100 समुद्री मील पश्चिम में भारतीय तटरक्षक बल के जहाजों ने तीन संदिग्ध जहाजों को रोका। आईसीजी की विशेषज्ञ बोर्डिंग टीमें जहाजों की लगातार तलाशी, जहाज पर बरामद इलेक्ट्रॉनिक डेटा की पुष्टि, दस्तावेजों का सत्यापन और चालक दल के सदस्यों से विस्तृत पूछताछ के द्वारा घटनाक्रम की पूरी जानकारी जुटाने और आपराधिक कार्यप्रणाली की पुष्टि कर पाई।
तस्करी करने वाले गिरोह ने एक ऐसी कार्यप्रणाली अपनाई जिसमें सस्ते तेल को समुद्री जहाजों द्वारा ले जाया जाता था और अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में मोटर टैंकरों में स्थानांतरित किया जाता था। प्रारंभिक जांच से पता चला कि गिरोह में कई देशों में काम करने वाले दलाल शामिल थे, जो समुद्र में जहाजों के बीच माल की बिक्री और हस्तांतरण कार्य का समन्वय करते थे।
आईसीजी की तकनीक-आधारित निगरानी प्रणालियों द्वारा पता चलने के बाद यह अभियान शुरू किया गया, जिसमें देलही :भारतीय विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) के भीतर संदिग्ध गतिविधि में लिप्त एक मोटर टैंकर की पहचान की गई। इसके बाद, जहाजों की आवाजाही की डिजिटल जांच और डेटा पैटर्न विश्लेषण से टैंकर की ओर आ रहे दो अतिरिक्त जहाजों की पहचान हुई, जिन पर अवैध रूप से तेल के जहाज-से-जहाज पर हस्तांतरण में शामिल होने का संदेह था, जिससे भारत सहित तटीय राज्यों को देय भारी शुल्क की चोरी हो रही थी।
5 फरवरी 2026 को भौतिक तलाशी से डिजिटल साक्ष्य की पुष्टि होने पर तीनों जहाजों को जब्त कर लिया गया। प्रारंभिक जांच से पता चलता है कि समुद्री कानून प्रवर्तन एजेंसियों से बचने के लिए ये जहाज अक्सर अपनी पहचान बदलते रहते थे। शुरुआती जांच से यह भी पता चलता है कि जहाजों के मालिक विदेशी देशों में रहते हैं। जब्त किए गए जहाजों को आगे की जांच के लिए मुंबई ले जाया जाएगा और बाद में उचित कानूनी कार्रवाई के लिए भारतीय सीमा शुल्क और अन्य कानून प्रवर्तन एजेंसियों को सौंप दिया जाएगा।
उन्नत डिजिटल निगरानी के माध्यम से शुरू किया गया और भारतीय तटरक्षक बल की बढ़ती समुद्री उपस्थिति द्वारा लागू किया गया यह अभियान, समुद्री क्षेत्र में एक प्रमुख सुरक्षा प्रदाता के रूप में और समुद्र में अंतरराष्ट्रीय नियमों पर आधारित व्यवस्था के एक दृढ़ प्रवर्तक के रूप में भारत की भूमिका को दर्शाता है।
टोल प्लाजा पर गुंडागर्दी, टोल मांगने पर कर्मचारियों को लाठी-डंडों से पीटा, दो गंभीर घायल