देश-विदेश
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने आज असम के डेरगाँव में लचित बोरफुकन पुलिस अकादमी का लोकार्पण किया
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में असम अब विकास के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है |
लचित बोरफुकन पुलिस एकेडमी के रूप में आज जो बीज बोया गया है, एक दिन वह वटवृक्ष बन पूरे देश की पुलिसिंग को छाया देगा |
महान योद्धा लचित बोरफुकन जी को केवल असम तक सीमित रखा गया, लेकिन मोदी सरकार में उनकी जीवनी 23 भाषाओं में देशभर के पुस्तकालयों में उपलब्ध है |
जिस असम में पहले केवल आंदोलन, उग्रवाद व गोलीबारी की चर्चा होती थी, वहां आज 27 हज़ार करोड़ रूपए लागत वाली सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री लग रही है
डबल इंजन सरकार ने असम में दोष सिद्धि दर 5% से बढ़ाकर 25% पहुँचाया |
असम में पहले जो पुलिस केवल आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई तक सीमित थी, आज वह नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए काम कर रही है |
पहले असम को दंगों की आग में झोंककर यहाँ अशांति बनाये रखी गयी थी, लेकिन मोदी सरकार में यहाँ शांति स्थापित हुई और विश्वस्तरीय इन्फ्रास्ट्रक्चर के साथ यहाँ बड़े उद्योग लग रहे हैं |
नई दिल्ली | केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने आज असम के डेरगाँव में लचित बोरफुकन पुलिस अकादमी का लोकार्पण किया। इस अवसर पर असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंता बिस्वा सरमा और केन्द्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

अपने संबोधन में केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि अगले 5 वर्षों में देशभर की पुलिस अकादमियों में लचित बोरफुकन पुलिस अकादमी प्रथम स्थान पर होगी। उन्होंने कहा कि असम के वीर सेनानी और सपूत लचित बोरफुकन जी ने असम को मुगलों के खिलाफ विजय दिलाई थी। उन्होंने कहा कि महान योद्धा लचित बोरफुकन को सिर्फ असम तक सीमित रखा गया था लेकिन आज उनकी जीवनी 23 भाषाओं में देशभर के पुस्तकालयों में बच्चों के लिए उपलब्ध है। शाह ने कहा कि असम के इस वीर सपूत के बारे में पूरे देश की जनता जाने और उनसे प्रेरणा प्राप्त करे, ऐसा काम असम सरकार ने किया है।उन्होंने कहा कि लचित बोरफुकन पुलिस एकेडमी के रूप में आज जो बीज बोया गया है एक दिन वह बहुत बड़ा वटवृक्ष बन पूरे देश की पुलिसिंग को छाया देगा। गृह मंत्री ने कहा कि यह एकेडमी न केवल असम बल्कि पूरे पूर्वोत्तर की पुलिसिंग के लिए काशी के समान एक तीर्थ बनेगी और यहीं से शांति की एक नई शुरुआत होगी।
अमित शाह ने कहा कि लचित बोरफुकन अकादमी का पहला चरण 167 करोड़ खर्च की लागत से पूरा किया गया है और तीनों चरणों पर कुल 1050 करोड़ रूपए खर्च होंगे। उन्होंने कहा कि इस अकादमी में कई प्रकार की अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं और यह अकादमी पूरे भारत की सबसे अच्छी पुलिस अकादमी बनेगी। उन्होंने कहा कि पहले असम की पुलिस अन्य राज्यों में ट्रेनिंग के लिए जाती थी, लेकिन पिछले 8 साल में राज्य के शासन में ऐसा परिवर्तन हुआ कि अब इस पुलिस अकादमी में गोवा और मणिपुर के 2 हज़ार पुलिसकर्मियों ने ट्रेनिंग ली है।
केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में असम अब विकास के रास्ते पर आगे बढ रहा है। उन्होंने कहा कि पिछले 10 साल में प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में कई शांति समझौते हुए हैं। 2020 में असम-बोड़ोलैंड समझौता, 2021 में कार्बी आंगलोंग समझौता, 2022 में आदिवासी शांति समझौता, 2023 में उल्फा, असम मेघालय और असम-अरुणाचल समझौते हुए। शाह ने कहा कि मोदी सरकार द्वारा किए गए इन शांति समझौतों के कारण 10 हज़ार से ज़्यादा युवा हथियार डालकर मेनस्ट्रीम में आए हैं। उन्होंने कहा कि जिस असम में एक ज़माने में आंदोलन, उग्रवाद और गोलीबारी की चर्चा होती थी वहां आज सबसे आधुनिक 27 हज़ार करोड़ रूपए की लागत वाली सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री लगने का काम हो चुका है।
अमित शाह ने कहा कि हाल ही में असम में निवेश के लिए हुए सम्मेलन में 5 लाख 18 हज़ार करोड़ के MoU हुए। उन्होंने कह कि इनमें से ज़्यादातर MoU ज़मीन पर उतरेंगे। शाह ने कहा कि मोदी सरकार भी असम के विकास के लिए 3 लाख करोड़ रूपए के इन्फ्रास्ट्रक्चर के प्रोजेक्ट लेकर आ रही है। उन्होंने कहा कि 8 लाख करोड़ रूपए के इन प्रोजेक्ट्स से यहां के युवाओं के लिए बड़ी संख्या में रोज़गार के अवसर पैदा होंगे।
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि पिछली सरकार के 10 साल के शासन में असम को 1 लाख 27 हज़ार करोड़ रूपए का डिवॉल्यूशन ग्रांट और ग्रांट-इन-एड मिला जिसे प्रधानमंत्री मोदी जी के 10 साल में 4 गुना बढ़ाकर 4 लाख 95 हज़ार करोड़ रूपए कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि पहले असम को दंगों की आग में झोंककर यहाँ अशांति बनाये रखी गयी थी, लेकिन मोदी सरकार में यहाँ शांति स्थापित हुई और विश्वस्तरीय इन्फ्रास्ट्रक्चर के साथ यहाँ बड़े उद्योग लग रहे हैं। उन्होंने कहा कि 10 हज़ार करोड़ की लागत से 200 किलोमीटर से अधिक लंबी भारतमाला परियोजना, 3000 करोड़ रूपए की लागत से धुबरी-फुलवाड़ी पुल, 3400 करोड़ रूपए की लागत से 3700 किलोमीटर लंबी ग्रामीण सड़कें, सिलचर-चुराईबाड़ी कॉरिडोर फोर लेन करना, 1000 करोड़ रूपए की लागत से माजुली द्वीप पर नया तटबंध और सड़क निर्माण जैसे कई काम मोदी सरकार ने किए हैं। उन्होंने कहा कि ब्रह्मपुत्र नदी पर 6 लेन पुल का काम निर्माणाधीन है, 382 करोड़ रूपए की लागत से नेशनल हाईवे 715-के पर माजुली और जोरहाट को जोड़ा जा रहा है। साथ ही 1100 करोड़ रूपए की लागत से गोपीनाथ बोरदोलोई जी के नाम से एयरपोर्ट का विस्तार, रेलवे क्षेत्र में 9000 करोड़ रूपए के लोकार्पण, 1000 करोड़ रूपए की लागत से एम्स, तुमुलपुर, कोकराझार, नलबाड़ी और धुबरी मे मेडिकल कॉलेज और कई अन्य इन्फ्रास्ट्रक्चर के काम मोदी जी के नेतृत्व में हुए हैं।
अमित शाह ने कहा कि मोदी सरकार और असम सरकार ने गरीब कल्याण के कई काम किए हैं। उन्होंने कहा कि 58 लाख घरों में पहली बार नल से जल पहुंचाया, 1 करोड़ 80 लाख लोगों को 5 लाख तक का मुफ्त इलाज दिया, 43 लाख घरों में शौचालय बनाए, 2 करोड़ 32 लाख गरीबों को प्रति व्यक्ति प्रति माह 5 किलो चावल मुफ्त दिया, 51 लाख गैस सिलेंडर और 21 लाख घर देने का काम भी मोदी सरकार और असम सरकार ने किया है।
केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि मोदी सरकार ने न सिर्फ असम में शांति लाने का प्रयास किया है बल्कि शांति लाकर दिखाई है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने इन्फ्रास्ट्रक्चर बनाया है और अब मुख्यमंत्री हिंमता बिस्वा सरमा जी के नेतृत्व में 5 लाख करोड़ का निवेश भी राज्य में आ रहा है जो यहां के युवाओं के लिए स्वर्णिम भविष्य की नींव रखेगा। उन्होंने कहा कि डबल इंजन सरकार ने असम में अपराध दोष सिद्धि अनुपात 5 प्रतिशत से बढ़ाकर 25 प्रतिशत पहुंचाया है। उन्होंने कहा कि असम में पहले जो पुलिस केवल आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई तक सीमित थी, आज वह नागरिकों के अधिकारों की रक्षा और प्रधानमंत्री मोदी जी द्वारा लाए गए तीन नए आपराधिक कानूनों पर सफल अमल के लिए काम कर रही है।
पूर्वोत्तर भारत केसर उत्पादन का अगला केंद्र बनकर उभरेगा, नेक्टर से कृषि-तकनीक क्रांति आएगी : डॉ. जितेंद्र सिंह
केंद्रीय मंत्री ने पूर्वोत्तर के तकनीक-संचालित विकास पर जोर देते हुए कहा, नेक्टर का नया परिसर नवाचार को बढ़ावा देगा
डॉ. जितेंद्र सिंह ने नेक्टर के स्थायी परिसर की आधारशिला रखी, पूर्वोत्तर के परिवर्तनकारी विकास पर प्रकाश डाला
नई दिल्ली | केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा प्रधानमंत्री कार्यालय, परमाणु ऊर्जा विभाग, अंतरिक्ष, कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने यहां कहा कि मिशन सैफरन पहल ने 2021 से सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश और मेघालय में केसर की खेती का विस्तार किया है। अब मेनचुखा (अरुणाचल प्रदेश) और युकसोम (सिक्किम) में केसर की खेती बड़े पैमाने पर चल रही है।

नागालैंड और मणिपुर राज्यों में भी केसर की खेती का विस्तार करने की योजनाएं क्रियान्वित की जा रही हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि पूर्वोत्तर भारत जम्मू-कश्मीर के पंपोर के बाद अगला केसर उत्पादन केंद्र बनकर उभरेगा। यह परियोजना बंजर भूमि को खेती के लिए उपयोग में लाने के लिए बनाई गई है। केसर की खेती परियोजना मौजूदा फसलों को नुकसान पहुंचाए बिना कृषि दक्षता में सुधार लाती है।
शिलांग में उत्तर पूर्वी प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग एवं प्रसार केंद्र (नेक्टर) के नए स्थायी परिसर की आधारशिला रखते हुए उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार देश के पूर्वोत्तर राज्यों को अगला केसर उत्पादन केंद्र बनाने के लिए विभिन्न योजनाएं क्रियान्वित कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में पूर्वोत्तर क्षेत्र में तेजी से हो रहे परिवर्तन से तकनीकी और कृषि उन्नति के नए अवसर पैदा हो रहे हैं।
इस कार्यक्रम में बोलते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने पिछले दशक में हुए महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे और तकनीकी प्रगति की ओर ध्यान दिलाया और कहा कि इस क्षेत्र में सड़क, रेलवे और हवाई परिवहन जैसी अवसंरचनात्मक सुविधाएं स्थापित करके दूरदराज के क्षेत्रों में परिवहन संपर्क में उल्लेखनीय सुधार किया गया है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा, "पूर्वोत्तर का विकास प्रधानमंत्री श्री मोदी की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है। अगर आप 2014 से पहले की स्थिति और आज की स्थिति की तुलना करें, तो बदलाव स्पष्ट है। पूर्वोत्तर, जो कभी कनेक्टिविटी की समस्या से ग्रस्त था, अब मजबूत बुनियादी ढांचे का दावा करता है, जिससे आर्थिक विकास और वैज्ञानिक उन्नति संभव हो रही है।"
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत स्वायत्त संस्थान नेक्टर की स्थापना 2014 में हुई थी। केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि इसका विकास क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और नवाचार को बढ़ावा देने के व्यापक दृष्टिकोण के अनुरूप है। उन्होंने जम्मू-कश्मीर में लैवेंडर की खेती की तर्ज पर पूर्वोत्तर में केसर की खेती को बढ़ावा देने, 'स्वामित्व' कार्यक्रम के तहत भूमि मानचित्रण के लिए ड्रोन तकनीक और बांस और शहद उत्पादन में प्रगति सहित नेक्टर की पहलों की सराहना की।
डॉ. जितेन्द्र सिंह ने यह भी बताया कि नेक्टर प्रौद्योगिकी के उपयोग और तैनाती में अंतिम-स्तरीय चुनौतियों का समाधान करने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहा है। न्यू शिलांग में नव नियोजित स्थायी परिसर उत्कृष्टता के एक सहयोगी केंद्र के रूप में कार्य करेगा, जो अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी और कौशल विकास के प्रदर्शन की सुविधा प्रदान करेगा। नेक्टर स्वदेशी तकनीकी समाधानों को एकीकृत करके सामाजिक-आर्थिक अंतराल को पाटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है, जिससे क्षेत्र में सतत विकास सुनिश्चित हो रहा है।
कार्यक्रम के समापन पर डॉ. जितेंद्र सिंह ने विज्ञान, प्रौद्योगिकी और बुनियादी ढांचे से संबंधित सुधारों के माध्यम से पूर्वोत्तर को सशक्त बनाने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि यह क्षेत्र भारत के विकास पथ पर देश के बाकी हिस्सों के बराबर खड़ा हो।
भारत और यूएन-वुमेन ने 69वें सीएसडब्ल्यू में महिला सशक्तिकरण पर मंत्रिस्तरीय गोलमेज सम्मेलन का आयोजन किया
भारत ने जीवन-चक्र निरंतरता के आधार पर महिलाओं द्वारा सामना किए जाने वाले मुद्दों को संबोधित करने के लिए “संपूर्ण सरकार” और “संपूर्ण समाज” को शामिल करते हुए एक बहुआयामी दृष्टिकोण अपनाया है: केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी
भारत सरकार ने "नारी शक्ति" की असीम शक्ति को पहचाना है - जिसे महिलाओं की सार्थक भागीदारी से प्राप्त किया जा सकता है, और इस दिशा में भारत "महिला-नेतृत्व वाले विकास" के साथ आगे बढ़ रहा है |

भारत में, हमने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम के जरिए डिजिटल वित्तीय समावेशन की शक्ति देखी है, डिजिटल भुगतान ने महिलाओं के रोजगार और स्वायत्तता को बढ़ाया है: सिमा बहौस, कार्यकारी निदेशक, संयुक्त राष्ट्र महिला
नई दिल्ली | भारत सरकार और संयुक्त राष्ट्र महिला द्वारा संयुक्त रूप से 69 वें महिला स्थिति आयोग सत्र के साथ-साथ 12 मार्च, 2025 को न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में ये मंत्रिस्तरीय गोलमेज सम्मेलन आयोजित किया गया।
गोलमेज सम्मेलन में महिला सशक्तिकरण और नेतृत्व के लिए डिजिटल और वित्तीय समावेशन के महत्वपूर्ण महत्व पर प्रकाश डाला गया। महिलाओं की शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक स्वायत्तता में निवेश पर जोर देकर, इस कार्यक्रम ने इस बात पर जोर दिया कि कैसे लैंगिक असमानता को दूर करने से विकास को गति मिल सकती है, गरीबी दूर हो सकती है और विभिन्न क्षेत्रों में नेतृत्व को बढ़ावा मिल सकता है।
इस कार्यक्रम ने बीजिंग प्लेटफ़ॉर्म फ़ॉर एक्शन में चिंता के बारह महत्वपूर्ण क्षेत्रों को लागू करने के लिए उभरते मुद्दों और रणनीतियों पर अनुभव साझा करने हेतु एक वैश्विक मंच प्रदान किया, जिसमें दो मंत्रिस्तरीय गोलमेज सम्मेलनों के माध्यम से परस्पर जुड़े विषयों पर चर्चा की गई: “महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास को गति देने के लिए डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना” और “समावेशन का वित्तपोषण - मुख्य संसाधनों की महत्ता”। इन सम्मेलनों में दुनिया भर के मंत्री और उच्च-स्तरीय प्रतिनिधि शामिल हुए, जिनमें ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ़्रीका और इंडोनेशिया जैसे तीन महाद्वीपों के जी20 देशों के सदस्य और पनामा जैसे छोटे द्वीपीय विकासशील देश शामिल थे। मंत्रियों ने सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा किया और महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास को आगे बढ़ाने के लिए प्रौद्योगिकी का लाभ उठाने की रणनीतियों पर चर्चा की।
केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी के संबोधन से पहले, दो लघु फिल्में प्रदर्शित की गईं, जिनमें भारत सरकार के बड़े पैमाने पर डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना और वित्तीय समावेशन पहलों के कारण समाज के सभी वर्गों की महिलाओं पर पड़ने वाले परिवर्तनकारी प्रभाव को दर्शाया गया।
महिला एवं बाल विकास मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आह्वान को दोहराते हुए कहा- "वर्तमान की प्रौद्योगिकी के लेहाज से उन्नत दुनिया में, प्रौद्योगिकी के सुरक्षित और जिम्मेदार उपयोग के लिए संतुलित विनियमन की आवश्यकता है, विशेष रूप से सामाजिक सुरक्षा प्रणालियों के लिए ई-गवर्नेंस का लाभ उठाने में। डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना एक सेतु होना चाहिए, न कि एक बाधा!"
भारतीय नौसेना के लिए दूसरे बेड़े के सहायक जहाज निर्माण का शुभारंभ
नई दिल्ली | पांच फ्लीट सपोर्ट शिप (एफएसएस) में से दूसरे का निर्माण कार्य 12 मार्च 2025 को मेसर्स एलएंडटी शिपयार्ड, कट्टुपल्ली में शुरू हुआ। इस कार्क्रम में वाइस एडमिरल राजाराम स्वामीनाथन, युद्धपोत उत्पादन और अधिग्रहण नियंत्रक और भारतीय नौसेना, हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड और मेसर्स एलएंडटी के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थिति थे। भारतीय नौसेना ने अगस्त 2023 में पांच फ्लीट सपोर्ट शिप (एफएसएस) के अधिग्रहण के लिए एचएसएल के साथ एक अनुबंध पर हस्ताक्षर किए थे जिसकी डिलीवरी 2027 के मध्य में शुरू होगी। सार्वजनिक-निजी भागीदारी की क्षमता का प्रदर्शन करते हुए, एचएसएल ने देश की जहाज निर्माण क्षमता का प्रभावी ढंग से उपयोग करने और डिलीवरी के लिए समयसीमा को पूरा करने के लिए मेसर्स एलएंडटी शिपयार्ड, कट्टुपल्ली को दो एफएसएस के निर्माण का अनुबंध दिया है।

नौसेना में शामिल होने पर, एफएसएस समुद्र में बेड़े के जहाजों की पुनःपूर्ति के माध्यम से भारतीय नौसेना की क्षमताओं को मजबूत करेगा। 40,000 टन से अधिक विस्थापन वाले ये जहाज ईंधन, पानी, गोला-बारूद और भंडार ले जाएंगे, जिससे समुद्र में लंबे समय तक संचालन संभव होगा और बेड़े की पहुंच और गतिशीलता बढ़ेगी। अपनी दूसरी भूमिका में, जहाज प्राकृतिक आपदाओं के दौरान कर्मियों को निकालने और राहत सामग्री के त्वरित वितरण के लिए मानवीय सहायता और आपदा राहत (HADR) संचालन के लिए सुसज्जित होंगे।
पूरी तरह से स्वदेशी डिजाइन और स्वदेशी निर्माताओं से अधिकांश उपकरणों की सोर्सिंग के साथ, यह परियोजना भारतीय जहाज निर्माण उद्योग को बढ़ावा देगी। यह परियोजना भारत सरकार की आत्मनिर्भर भारत , मेक इन इंडिया और मेक फॉर द वर्ल्ड पहलों के अनुरूप है।
पद्म पुरस्कार-2026 के लिए नामांकन शुरू.... 31 जुलाई 2025 तक कर सकते हैं आवेदन
नईदिल्ली। गणतंत्र दिवस, 2026 के अवसर पर घोषित किए जाने वाले पद्म पुरस्कार-2026 के लिए ऑनलाइन नामांकन/सिफारिशें आज, 15 मार्च 2025, से शुरू हो गई हैं। पद्म पुरस्कारों के नामांकन की अंतिम तारीख 31 जुलाई 2025 है। पद्म पुरस्कारों के लिए नामांकन/सिफारिशें राष्ट्रीय पुरस्कार पोर्टल https://awards.gov.in पर ऑनलाइन प्राप्त की जाएंगी।
पद्म पुरस्कार, अर्थात पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्म श्री देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में शामिल हैं।वर्ष 1954 में स्थापित, इन पुरस्कारों की घोषणा प्रतिवर्ष गणतंत्र दिवस के अवसर पर की जाती है। इन पुरस्कारों के अंतर्गत ‘उत्कृष्ट कार्य’ के लिए सम्मानित किया जाता है। पद्म पुरस्कार कला, साहित्य एवं शिक्षा, खेल, चिकित्सा, समाज सेवा, विज्ञान एवं इंजीनियरी, लोक कार्य, सिविल सेवा, व्यापार एवं उद्योग आदि जैसे सभी क्षेत्रों/विषयों में विशिष्ट और असाधारण उपलब्धियों/सेवा के लिए प्रदान किए जाते हैं। जाति, व्यवसाय, पद या लिंग के भेदभाव के बिना सभी व्यक्ति इन पुरस्कारों के लिए पात्र हैं। चिकित्सकों और वैज्ञानिकों को छोड़कर अन्य सरकारी सेवक, जिनमें सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में काम करने वाले सरकारी सेवक भी शामिल है, पद्म पुरस्कारों के पात्र नहीं हैं।
सरकार पद्म पुरस्कारों को “पीपल्स पद्म” बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। अत:, सभी नागरिकों से अनुरोध है कि वे नामांकन/सिफारिशें करें। नागरिक स्वयं को भी नामित कर सकते हैं। महिलाओं, समाज के कमजोर वर्गों, अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों, दिव्यांग व्यक्तियों और समाज के लिए निस्वार्थ सेवा कर रहे लोगों में से ऐसे प्रतिभाशाली व्यक्तियों की पहचान करने के ठोस प्रयास किए जा सकते हैं जिनकी उत्कृष्टता और उपलब्धियां वास्तव में पहचाने जाने योग्य हैं।
नामांकन/सिफारिशों में पोर्टल पर उपलब्ध प्रारूप में निर्दिष्ट सभी प्रासंगिक विवरण शामिल होने चाहिए, जिसमें वर्णनात्मक रूप में एक उद्धरण (citation) (अधिकतम 800 शब्द) शामिल होना चाहिए, जिसमें अनुशंसित व्यक्ति की संबंधित क्षेत्र/अनुशासन में विशिष्ट और असाधारण उपलब्धियों/सेवा का स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया हो।
इस संबंध में विस्तृत विवरण गृह मंत्रालय की वेबसाइट (https://mha.gov.in) पर ‘पुरस्कार और पदक’ शीर्षक के अंतर्गत और पद्म पुरस्कार पोर्टल (https://padmaawards.gov.in) पर उपलब्ध हैं। इन पुरस्कारों से संबंधित संविधि (statutes) और नियम वेबसाइट पर https://padmaawards.gov.in/AboutAwards.aspx लिंक पर उपलब्ध हैं।
पीयूष गोयल ने राइज/डीईएल सम्मेलन 2025 में सामग्री सृजनकर्ताओं को संबोधित किया
सामग्री निर्माणकर्ता भारत के डिजिटल दूत हैं, उन्हें भारत की कथा पूरी दुनिया में पहुंचानी चाहिए: पीयूष गोयल
नई दिल्ली | केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने नई दिल्ली में संगीत, रचनात्मक उद्योगों और स्टार्टअप से संबंधित तीन दिवसीय बहु-विषयक सम्मेलन राइज/डीईएल 2025 को संबोधित किया। उन्होंने भारत के रचनात्मक पारिस्थितिकी तंत्र की शक्ति और देश के भविष्य को संवारने में डिजिटल नवाचार की भूमिका पर जोर दिया।

गोयल ने रचनात्मक उद्योग से भारत की गाथा विश्व के समक्ष पहुंचाकर देश के आर्थिक विकास में और अधिक योगदान देने का आग्रह किया। श्री गोयल ने उनसे अपने काम में विश्वास और प्रामाणिकता बनाए रखने तथा अपने कार्य उत्पादन की जिम्मेदारी और जवाबदेही लेने को कहा। गोयल ने अमृत काल में भारत के अभ्युदय में रचनात्मक उद्योग के योगदान के लिए लिए 4 पहलुओं की पहचान की जिनमें दायित्वपूर्ण सामग्री, अभिनव कथ्य शिल्प, कार्य कौशल बढ़ाना और भारतीय रचनात्मकता को विश्व पटल पर प्रस्तुत करना शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि आप जो सपने देखते और संजोते हैं वे ही अंत में वास्तविकता का रुप लेते हैं। जब आप सब सृजनकर्ता एक साथ एक मंच पर आएंगे तो यह भविष्य के लिए महत्वपूर्ण सामग्री निर्माण में सहायक होगा। उन्होंने कहा कि सृजनकार भारत के डिजिटल दूत हैं जो भारत की गाथा दुनिया तक पहुंचाते हैं। यह भारत के प्रति वैश्विक धारणाओं को आकार देने तथा भारतीय संस्कृति को विस्तारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
गोयल ने उल्लेख किया कि कैसे प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने एक दशक पहले डिजिटल इंडिया की शुरुआत की थी जिसका उद्देश्य भारत के सबसे दूरस्थ इलाकों में भी प्रसारण सामग्री, स्टार्टअप और इससे जुड़े उद्यमियों की नई दुनिया निर्मित करने की क्षमता हो। उन्होंने कहा कि कम लागत वाले डेटा तक पहुंच प्रदान करना सरकार की डिजिटल इंडिया नीति के प्रमुख स्तंभों में से एक है। इसने भारत को वैश्विक स्तर पर डेटा का सबसे बड़ा उपभोक्ता बना दिया है। गोयल ने कहा कि यूरोप, अमेरिका या किसी अन्य विकसित देश की तुलना में हमारे डेटा की लागत बहुत कम है। कम लागत वाले इस डेटा को भारत की गुणवत्तापूर्ण प्रतिभा के साथ मिलाकर हम रचनात्मकता और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में क्रांति ला सकते हैं।
गोयल ने भारत के रचनात्मक क्षेत्र में अपार अवसरों का उल्लेख किया जो फिल्मों, नाटकों और थिएटरों जैसे मनोरंजन के पारंपरिक क्षेत्रों से आगे बढ़कर अब गेमिंग, कृत्रिम बुद्धिमत्ता युक्त प्रसारण सामग्री निर्माण और डिजिटल मीडिया की ओर तेज़ी से अग्रसर हो रही है। उन्होंने कहा कि यह उद्योग पहले ही कई अरब डॉलर का क्षेत्र बन गया है और देश में बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार दे रहा है। श्री गोयल ने कहा कि पहले के रचनात्मक उद्योग-फिल्म निर्माण, नाटक और थिएटर अब गेमिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी भविष्य की तकनीकों के साथ मनोरंजन के नए स्वरूपों में बदल रहे हैं।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री ने राइज/डीईएल में प्रतिभागियों से इस जुड़ाव का लाभ उठाते हुए भविष्य में वृद्धि और विकास के लिए कार्य योजना तैयार करने को प्रोत्साहित किया। गोयल ने नई तकनीकों को आम लोगों तक पहुंचाने और लोगों को भारत के समृद्ध इतिहास, परंपराओं और संस्कृति से जोड़ने में प्रभावित और प्रेरित करने वालों की भूमिका का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत की शिक्षण पद्धति से भी शिक्षा प्रदान करने के उपकरण विकसित किए जा सकते हैं जिससे प्रसारण सामग्री निर्माणकर्ताओं के लिए विपुल संभावना उत्पन्न होगी। उन्होंने कहा कि सामग्री निर्माणकर्ताओं की आम आदमी से जुड़ने की विशेष क्षमता होती है जो अवसरों के द्वार खोलती है।
गोयल ने लोगों के विचार और तकनीक विकसित करने में मदद के लिए सरकार की सहायक भूमिका पर फिर जोर दिया। उन्होंने रचनाशीलता, दृश्य-श्रव्य कला और प्रसारण सामग्री निर्माण में अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के साथ भारत की बढ़ती साझेदारी का उल्लेख करते हुए पूरी दुनिया के कलाकारों को इस क्षेत्र में भारत के साथ जुड़ने के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने कहा कि हम दुनिया के साथ जितना अधिक जुड़ेंगे, भारतीय सृजनकारों के लिए अवसर उतने ही अधिक बढ़ेंगे। श्री गोयल ने कहा कि भारतीय कलाकारों को पहले से ही वैश्विक स्तर पर मान्यता मिली हुई है और अब प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल से हम दुनिया के हर घर तक पहुंच सकते हैं।
पर्यटन को बढ़ावा देने में सृजनशीलता की क्षमता की चर्चा करते हुए श्री गोयल ने महाकुंभ का उदाहरण दिया कि कैसे डिजिटल तथ्य प्रस्तुतिकरण द्वारा वैश्विक दर्शक आकर्षित हुए। उन्होंने कहा कि जब आप भारत के अनुभवों को दुनिया में पहुंचाते हैं तो इससे अधिक जिज्ञासा उत्पन्न होती है और अधिक संख्या में पर्यटक भारत की ओर आकर्षित होते हैं। उन्होंने कहा कि यह अर्थव्यवस्था में कई गुना योगदान देगा। गोयल ने जोर देकर कहा कि सरकार आगंतुक सैलानियों की रोमांचक और आनंददायक यात्रा सुनिश्चित करने के लिए जमीनी स्तर पर उनके अनुभव यादगार बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।
कृषि पर भारत-चिली की पहली संयुक्त कार्यसमूह की बैठक आयोजित की गई
भारत सरकार की अभिनव पहलों पर प्रकाश डाला गया
नई दिल्ली | भारत और चिली के बीच कृषि पर पहली संयुक्त कार्यसमूह (जेडब्ल्यूजी) की बैठक 12 मार्च 2025 को वर्चुअल मोड में आयोजित की गई। इस बैठक की सह-अध्यक्षता कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के संयुक्त सचिव अजीत कुमार साहू और कृषि अध्ययन एवं नीति ब्यूरो (ओडीईपीए) में अंतर्राष्ट्रीय मामलों के विभाग के निदेशक गेब्रियल लेसेका ने की। दोनों देशों के अधिकारियों ने कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करने पर जोर दिया।

अजीत कुमार साहू ने भारत की उल्लेखनीय कृषि उपलब्धियों पर जोर देते हुए कृषि और संबद्ध क्षेत्रों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कृषि क्षेत्र को मजबूत करने के लिए सरकार द्वारा शुरू की गई विभिन्न अभिनव पहलों पर प्रकाश डाला। इनमें डिजिटल कृषि मिशन, लखपति दीदी कार्यक्रम और कृषि सखी जैसी महिला-नेतृत्व वाली विकास पहल के साथ- साथ किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) के माध्यम से किसानों को सशक्त बनाने के प्रयास शामिल हैं। उनके द्वारा उल्लिखित अन्य महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में प्राकृतिक और जैविक खेती, फसल बीमा, ई-नाम और एग्रीश्योर शामिल हैं, जिसका उद्देश्य कृषि क्षेत्र और ग्रामीण विकास में वृद्धि को बढ़ावा देना है।
गेब्रियल लेसेका ने जोर देकर कहा कि चिली भारत के साथ अपने संबंधों को महत्व देता है तथा कृषि और संबद्ध क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की दृढ़ इच्छा व्यक्त की। कृषि में अपने समृद्ध अनुभव के साथ दोनों देशों में कृषि उत्पादकता बढ़ाने, ग्रामीण विकास को बढ़ावा देने और किसानों के कल्याण में सुधार करने में एक-दूसरे के पूरक बनने की क्षमता है। उन्होंने आगे कहा कि यह बैठक भारत और चिली के बीच द्विपक्षीय संबंधों को गहरा और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो भविष्य में और भी अधिक सहयोग के लिए मंच तैयार करेगी।
दोनों पक्षों ने बाजार पहुंच, बागवानी में सहयोग, विस्तार के क्षेत्रों में क्षमता निर्माण और अनुसंधान संबंधी सहयोग सहित अन्य प्रमुख मुद्दों पर चर्चा की।
इस बैठक में कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, पशुपालन एवं डेयरी विभाग तथा विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए।
वन्य जीवों से किसानों की फसल हानि रोकने के लिए करें सभी उपाय - मुख्यमंत्री डॉ. यादव
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश वन्य जीवों से समृद्ध है। शेर, बाघ, चीता, सांभर, हाथी सभी यहां उपलब्ध हैं। वन्य जीवों के कल्याण के लिए सभी प्रयास किए जाएं। प्रदेश के वनों में रह रहे हाथियों के कल्याण की भी चिंता करें। इनके भोजन की व्यवस्था करें। घास के मैदान बनाएं ताकि वे भोजन की तलाश में आबादी क्षेत्रों में यहां-वहां न भटकें। इससे किसानों की फसल हानि भी रूकेगी और मानव-हाथी के बीच टकराव की स्थिति के स्थान पर साहचर्य की भावना विकसित होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुरुवार को मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन में मध्यप्रदेश टाइगर फाउंडेशन समिति की 15वीं आमसभा की बैठक की अध्यक्षता कर यह निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में वन्य जीव पर्यटन को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके लिए जहां बेहतर सुविधा उपलब्ध हो वहां वन्य जीव रेस्क्यू सेंटर कम जू स्थापित करने के लिए केन्द्र सरकार, सेंट्रल जू अथॉरिटी व अन्य वन्य जीव संस्थानों से मार्गदर्शन लेकर इस दिशा में आगे बढ़ें। वन्य जीवों को खुले में देखना पर्यटकों के लिए सदैव सहज आकर्षण का केन्द्र होता है और मध्यप्रदेश में इस दिशा में कार्य कर वन्य जीव पर्यटन को एक नई दिशा की ओर ले जाएं। बैठक में मध्यप्रदेश टाइगर फाउंडेशन समिति के सदस्य विधायक श्री हेमंत खंडेलवाल, श्री मोहन नागर, अन्य सदस्यगणों सहित मुख्यमंत्री कार्यालय में अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा, अपर मुख्य सचिव वन श्री अशोक बर्णवाल, प्रधान मुख्य वन संरक्षक, चीफ वाईल्ड लाईफ वार्डन व अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
बैठक में बताया गया कि प्रदेश में किसानों को जंगली पशुओं से होने वाली फसल हानि को रोकने के लिए विशेष कार्य योजना बनाई गई है। फसल हानि करने वाली नीलगायों एवं कृष्णमृगों (ब्लैक बक) को पकड़कर अन्यत्र स्थापित किया जाएगा। इन वन पशुओं को पकड़ने के लिए रॉबिन्सन 44 नामक हेलीकॉप्टर किराये पर लिया जाएगा। इसके लिए ई-टेंडर के जरिए निविदाएं भी आमंत्रित की गई हैं। किन्तु तीन निविदाएं बुलाने के बावजूद अभी तक वांछित हेलीकॉप्टर एवं अनुभवी पॉयलट की निविदा प्राप्त नहीं हुई है। इसलिए कैप्चर ऑपरेशन पूरा करने के लिए रॉबिन्सन 44 हेलीकॉप्टर या इसके समकक्ष विमान उपलब्ध कराने के लिए प्रमुख सचिव विमानन से अनुरोध किया गया है। हेलीकॉप्टर उपलब्ध होने पर नीलगाय और ब्लैक बक कैप्चर कार्य तत्काल प्रारंभ कर दिया जाएगा, इससे किसानों की फसल हानि रूकेगी।
बैठक में बताया गयाकि समिति द्वारा पेंच, सतपुड़ा, वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व, रालामण्डल, कूनो, गांधीसागर, वन्य जीव अभयारण्य एवं माधव राष्ट्रीय उद्यान में अब तक 180 जागरूकता कैम्प, 24 क्षमता उन्नयन कैम्प एवं 14 कर्मचारी कल्याण (सोलर इलेक्ट्रिफिकेशन ऑफ पेट्रोलिंग कैम्प) आयोजित किए गए। मध्यप्रदेश टाइगर फाउंडेशन समिति द्वारा नवीन वन भवन में एक स्मारिका दुकान स्थापित की जाएगी। यह सीधे समिति द्वारा ही संचालित की जाएगी। इस दुकान से प्राप्त होने वाली आय का उपयोग वन्य जीव संरक्षण में कार्यरत कर्मचारियों के कल्याण के लिए किया जाएगा। समिति द्वारा गत 29 जुलाई को मुख्यमंत्री डॉ. यादव के मुख्य आतिथ्य में अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस 2024 मनाया गया। इसके अलावा क्लोज-टू-मॉय हार्ट अभियान के जरिए जनसामान्य से सहयोग भी प्राप्त किया गया।
थीम संगीत प्रतियोगिताः सच्ची संगीत भावना को जागृत करने का एक उत्सव.. 1 से 4 मई, 2025 तक मुंबई में
नईदिल्ली। थीम संगीत प्रतियोगिता (टीएमसी) भारत की सच्ची संगीत भावना का उत्सव मनाती है। यह गीतकारों, गायकों, कलाकारों और संगीत रचनाकारों को ऐसा संगीत तैयार करने का आमंत्रण है जो भारतीय शास्त्रीय संगीत या शास्त्रीय और समकालीन शैलियों के मिश्रण को दर्शाता हो। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (आईएंडबी) द्वारा आयोजित और भारतीय संगीत उद्योग (आईएमआई) के सहयोग से, थीम संगीत प्रतियोगिता (टीएमसी) विश्व ऑडियो विजुअल और मनोरंजन शिखर सम्मेलन (वेव्स) के तहत आयोजित क्रिएट इन इंडिया चैलेंज का हिस्सा है।
विश्व ऑडियो विजुअल एवं मनोरंजन शिखर सम्मेलन (वेव्स) अपने पहले संस्करण में एक अनूठा हब और स्पोक प्लेटफॉर्म है, जो संपूर्ण मीडिया एवं मनोरंजन (एम एंड ई) क्षेत्र के संमिलन के लिए तैयार है। यह आयोजन एक प्रमुख वैश्विक आयोजन है जिसका उद्देश्य वैश्विक मीडिया एवं मनोरंजन (एम एंड ई) उद्योग का ध्यान भारत की ओर आकर्षित करना है और इसे भारतीय मीडिया एवं मनोरंजन (एम एंड ई) क्षेत्र तथा इसकी प्रतिभाओं से जोड़ना है।
यह शिखर सम्मेलन 1 से 4 मई, 2025 तक मुंबई के जियो वर्ल्ड कन्वेंशन सेंटर और जियो वर्ल्ड गार्डन में आयोजित किया जाएगा। चार प्रमुख स्तंभों - प्रसारण एवं इन्फोटेनमेंट, एवीजीसी-एक्सआर, डिजिटल मीडिया एवं इनोवेशन तथा फिल्म्स - पर ध्यान केंद्रित करते हुए वेव्स भारत के मनोरंजन उद्योग के भविष्य को प्रदर्शित करने के लिए उद्योग के अग्रजों, रचनाकारों और प्रौद्योगिकीविदों को एक साथ लाएगा।
इस प्रतियोगिता का विषय "सॉन्ग ऑफ इंडिया" भारतीय संगीत की शक्ति और समृद्धि पर प्रकाश डालता है। यह वेव्स पिलर 1 ब्रॉडकास्टिंग और इन्फोटेनमेंट का हिस्सा है। प्रतियोगिता के लिए कुल 178 प्रतिभागियों ने पंजीकरण कराया।
दिशानिर्देश और पंजीकरण प्रक्रिया
इसमें केवल भारतीय प्रतिभागियों को भाग लेने की अनुमति दी गई और सभी को एक विस्तृत प्रक्रिया से गुजरना पड़ा। इसके अलावा, प्रतिस्पर्धा के लिए कुछ नियमों का पालन किया गया:
प्रतियोगिता विवरण
इस प्रतियोगिता में गीतकारों, गायकों, कलाकारों और संगीत रचनाकारों ने भारतीय शास्त्रीय संगीत या शास्त्रीय और समकालीन वाद्ययंत्रों और शैलियों के मिश्रण से प्रेरित संगीत बनाने और साझा करने के लिए भाग लिया।
प्रतियोगिता दो चरणों में आयोजित की गई: प्रारंभिक चरण और अंतिम चरण।
प्रतियोगिता का विषय "सॉन्ग ऑफ इंडिया" था, जिसने प्रतिभागियों को भारतीय शास्त्रीय संगीत को समकालीन शैलियों के साथ मिश्रित करने पर ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रोत्साहित किया। इसका परिणाम एक सुसंगत और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध संगीत रचना थी।
महत्वपूर्ण टाइमलाइन
इस आयोजन की प्रमुख तिथियां और टाइमलाइन इस प्रकार है:
मूल्यांकन मानदंड
थीम संगीत प्रतियोगिता के लिए मूल्यांकन मानदंड को गहन और निष्पक्ष मूल्यांकन सुनिश्चित करने के लिए तैयार किया गया था। भारतीय संगीत उद्योग के विशेषज्ञों के एक पैनल ने शीर्ष 6 फाइनलिस्टों का चयन करने के लिए दो चरणों में प्रस्तुतियों की समीक्षा की। फाइनलिस्टों का चयन निम्नलिखित मानदंडों के आधार पर किया गया:
पुरस्कार और मान्यता
इस प्रतियोगिता में कुल छह विजेताओं का चयन किया गया, जिनमें एक ग्रैंड पुरस्कार विजेता और पांच उपविजेता शामिल हैं। पुरस्कार विवरण:
मुख्य पुरस्कार (1 विजेता):
नकद पुरस्कार या वैकल्पिक पुरस्कार
रचनाओं की व्यावसायिक रिकॉर्डिंग और निर्माण
प्रचार सामग्री और सोशल मीडिया में फ़ीचर
किसी प्रसिद्ध संगीतकार या संगीत रचयिता के साथ मेंटरशिप सत्र
वेव्स में भाग लेने का निमंत्रण
उपविजेता पुरस्कार (5 विजेता):
नकद पुरस्कार या वैकल्पिक पुरस्कार
शिखर सम्मेलन की वेबसाइट और सोशल मीडिया पर मान्यता
वेव्स में भाग लेने का निमंत्रण
निष्कर्ष
वेव्स पहल का एक हिस्सा थीम म्यूजिक प्रतियोगिता (टीएमसी) ने भारत की समृद्ध संगीत विरासत का उत्सव मनाया। प्रतिभागियों को भारतीय शास्त्रीय संगीत से प्रेरित होकर मौलिक रचनाएं बनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया। मजबूत भागीदारी और गहन मूल्यांकन प्रक्रिया के साथ इस प्रतियोगिता ने विविध प्रतिभाओं को एक साथ लाया, जो भारतीय संगीत की गहराई को प्रदर्शित करता है। इस कार्यक्रम में आकर्षक पुरस्कार प्रदान किए गए, जिनमें मेंटरशिप और वैश्विक मान्यता शामिल थी, जिसमें भारत के मनोरंजन उद्योग के भविष्य में विजेताओं के योगदान पर प्रकाश डाला गया।
सिंहस्थ - 2028 के लिए अभी से करें माइक्रो प्लानिंग : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सिंहस्थ - 2028 मध्यप्रदेश का अत्यंत महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजन है। लाखों-करोड़ों श्रद्धालु सिंहस्थ के दौरान उज्जैन आएंगे। किसी भी श्रद्धालु को स्नान व देव दर्शन में कोई कठिनाई हो, इसके लिए व्यापक प्रबंध किए जाएं। पुराने सिंहस्थ आयोजन से सीख लें और आगामी सिंहस्थ के सुव्यवस्थित आयोजन के लिए अभी से माइक्रो प्लानिंग कर व्यवस्थाओं को अंजाम देना प्रारंभ करें।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन में पूर्व में सम्पन्न हुए सिंहस्थ में प्राप्त अनुभवों को केन्द्र में रखते हुए सिंहस्थ - 2028 के योजनाबद्ध आयोजन के संबंध में बैठक की अध्यक्षता कर संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सबसे बेहतर यह होगा कि सिंहस्थ की व्यवस्थाओं और प्रबंधन से जुड़े सभी कार्य जून 2027 के पहले ही पूरे कर लिए जाएं। इससे रह गई कमोबेशी को दुरुस्त करने या व्यवस्थाओं को और भी अधिक बेहतर करने का समय भी मिल सकेगा।
बैठक में नगरीय विकास एवं आवास तथा संसदीय कार्य मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय, संस्कृति एवं पर्यटन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्मेन्द्र सिंह लोधी, मुख्य सचिव अनुराग जैन, मुख्यमंत्री कार्यालय में अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा, अपर मुख्य सचिव गृह जे.एन. कंसोटिया, अपर मुख्य सचिव नगरीयविकास एवं आवास संजय कुमार शुक्ल, पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना, सिंहस्थ की व्यवस्थाओं से जुड़े अन्य विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव सहित सचिव एवं आयुक्त जनसम्पर्क डॉ. सुदाम खाड़े व अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सिंहस्थ - 2028 की व्यवस्थाओं एवं प्रबंधन के लिए मंजूर किए गए सभी कार्य जून 2027 तक पूरे कर लिए जाएं। चल रहे कार्यों की मासिक प्रोग्रेस रिपोर्ट की समीक्षा की जाए। प्रबंधन में किसी भी प्रकार की कमी न रहे। मंजूर किए गए सभी काम प्रारंभ हो जाएं और तय समय-सीमा में ही पूरे किए जाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि श्री महाकाल लोक बनने के बाद प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु उज्जैन पहुंच रहे हैं। श्रद्धालुओं की दिनों-दिन बढ़ती संख्या के हिसाब से ही सिंहस्थ की तैयारी की जाए, क्योंकि जो श्रद्धालु सिंहस्थ में आएंगे, वे बाबा महाकाल सहित अन्य देव स्थलों पर भी अवश्य ही जाएंगे। भीड़ प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जाए। प्रयास यह हो कि श्रद्धालुओं को ई-बस या ई-ऑटो से महाकाल मंदिर के नजदीक ही छोड़ा जाए, ताकि उन्हें महाकाल दर्शन के लिए अधिक पैदल न चलना पड़े और प्रबन्धन में भी आसानी हो।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सिंहस्थ में लाखों-करोड़ों श्रद्धालु उज्जैन शहर में आएंगे। बड़े मार्गों के अलावा उज्जैन शहर की अंदरूनी गलियों व रास्तों का भी और अधिक चौड़ीकरण करें ताकि श्रद्धालुओं को आवागमन का वैकल्पिक मार्ग भी उपलब्ध रहे और वे आसानी से आ-जा सकें। उन्होंने कहा कि उज्जैन शहर में क्षिप्रा नदी व शहर के अंदर सिंहस्थ के लिए जितने भी सेतु निर्माण कार्य जरूरी हैं, वे अभी से प्रारंभ कर लिए जाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सिंहस्थ के दौरान उज्जैन शहर के सभी छोटे-बड़े मंदिरों में भी श्रद्धालुओं के देवदर्शन के लिए समुचित व्यवस्थाएं की जाए। उन्होंने कहा कि यदि संभव हो तो रूद्र सागर में भी घाट बनाने पर विचार कर प्रारंभिक सर्वे भी कर लें।
यमुना नदी पर क्रूज पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए आईडब्ल्यूएआई और दिल्ली सरकार ने किया समझौता
सोनिया विहार और जगतपुर के बीच के जलमार्ग को क्रूज पर्यटन के लिए विकसित किया जाएगा |
क्रूज पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए बिजली सौर हाइब्रिड नावों का परिचालन किया जाएगा |
नई दिल्ली | भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (आईडब्ल्यूएआई), जो राष्ट्रीय जलमार्गों के लिए पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय (एमओपीएसडब्ल्यू) की नोडल एजेंसी है, ने सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण विभाग, दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए), दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी), दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) सहित दिल्ली सरकार की कई एजेंसियों के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। समझौता ज्ञापन का उद्देश्य सोनिया विहार और जगतपुर के बीच यमुना नदी (राष्ट्रीय जलमार्ग 110) के चार किलोमीटर जलमार्ग पर क्रूज पर्यटन को विकसित करना और बढ़ावा देना है।

समझौता ज्ञापन हस्ताक्षर समारोह असिता पार्क में आयोजित किया गया, इस अवसर पर दिल्ली के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता; केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री (एमओपीएसडब्ल्यू) सर्बानंद सोनोवाल, केंद्रीय राज्य मंत्री (एमओपीएसडब्ल्यू) शांतनु ठाकुर; एमओपीएसडब्ल्यू सचिव टी के रामचंद्रन और आईडब्ल्यूएआई के अध्यक्ष विजय कुमार सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।
इस अवसर पर सर्बानंद सोनोवाल ने कहा, “माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में, भारत के जलमार्गों में दशकों की उपेक्षा के बाद एक परिवर्तनकारी पुनरुद्धार हुआ है। सतत और आधुनिक अंतर्देशीय जल परिवहन के लिए उनका दूरदर्शी प्रयास वास्तव में अद्भुत है - क्षमता को प्रगति में बदलना। यमुना पर पर्यावरण-अनुकूल क्रूज पर्यटन की शुरुआत इस यात्रा की एक और उपलब्धि है, जो स्वच्छ, हरित और अधिक कुशल जलमार्गों का मार्ग प्रशस्त करती है। यह क्रूज पर्यटन दिल्ली के केंद्र में परिवहन संपर्क और पर्यटन दोनों को बढ़ावा देगा। वर्षों से, दिल्ली के लोग यमुना पर गंदगी और उपेक्षा को देखकर दुखी थे, लेकिन यह पहल लंबे समय से प्रतीक्षित सुधार की शुरुआत है। इन क्रूज़ के लॉन्च होने से, दिल्लीवासियों के साथ-साथ राजधानी में आने वाले पर्यटकों को एक बार फिर अपनी नदी से प्यार हो जाएगा और वे इसकी सुंदरता का अनुभव ऐसे रूप में करेंगे, जिसकी उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की होगी।”
इस पहल का उद्देश्य दिल्ली में यमुना के सोनिया विहार-जगतपुर खंड को पर्यावरण के अनुकूल क्रूज़ संचालन के केंद्र में बदलना है। सतत और प्रदूषण रहित जल परिवहन सुनिश्चित करने के लिए, बिजली-सौर हाइब्रिड नाव - जिनमें से प्रत्येक 20-30 यात्रियों को ले जाने में सक्षम है - को नदी क्रूज़ जहाजों के रूप में तैनात किया जाएगा। इन नावों में बायो-टॉयलेट, सार्वजनिक घोषणा प्रणाली और यात्रियों की सुरक्षा के लिए लाइफ़ जैकेट की सुविधा होगी।
इसके अतिरिक्त, आईडब्ल्यूएआई सुचारू नौका संचालन की सुविधा के लिए दो एचडीपीई जेटी स्थापित करेगा। यह परियोजना वजीराबाद बैराज के ऊपर राष्ट्रीय जलमार्ग 110 (एनडब्ल्यू-110) पर छोटी दूरी की नौवहन और मनोरंजक गतिविधियों को बढ़ावा देने के साथ-साथ हरित और सतत पर्यटन को प्रोत्साहन देगी। अंतर्देशीय जल परिवहन (आईडब्ल्यूटी) को मजबूत करने के अलावा, इस पहल से यमुना के किनारे पर्यावरण-अनुकूल यात्रा अनुभव प्रदान करके दिल्ली के पर्यटन परिदृश्य को नया रूप देने की उम्मीद है।
दिल्ली के जगतपुर से प्रयागराज में गंगा के साथ संगम तक यमुना नदी का विस्तार, दिल्ली, हरियाणा और यूपी में 1,089 किलोमीटर तक फैला हुआ है, जिसे 2014 में राष्ट्रीय जलमार्ग-110 घोषित किया गया था। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व और केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल के मार्गदर्शन में, आईडब्ल्यूएआई जलमार्गों को विकास के एक मजबूत इंजन के रूप में विकसित करने के लिए प्रमुख अवसंरचनाओं के निर्माण को गति दे रहा है।
अरुणाचल से गुजरात और जम्मू-कश्मीर से केरल तक पूरे भारत में अपनी पहुंच का विस्तार करते हुए, आईडब्ल्यूएआई नए आईडब्ल्यूटी टर्मिनलों, फेयरवे, रात्रि परिचालन सहायक सामग्री और लॉक्स के साथ एनडब्ल्यू 1, एनडब्ल्यू 2, एनडब्ल्यू 3 और एनडब्ल्यू 16 को बेहतर बना रहा है। "हरित नौका दिशा-निर्देशों" के तहत सतत विकास पर जोर देते हुए, प्राधिकरण ने वाराणसी और अयोध्या में इलेक्ट्रिक कटमरैन पेश किए हैं, जबकि मथुरा और गुवाहाटी के लिए छह अन्य निर्धारित किए गए हैं।
गंगा और ब्रह्मपुत्र पर क्रूज टर्मिनल विकसित करके और नदी पर्यटन को बढ़ावा देकर, आईडब्ल्यूएआई भारत के जलमार्गों की क्षमता को सामने ला रहा है। दिल्ली सरकार के साथ साझेदारी शहरी जल परिवहन को मजबूत करेगी, पर्यावरण-अनुकूल क्रूज पर्यटन को बढ़ावा देगी और यात्रा के अनुभवों को बढ़ाते हुए स्थानीय आर्थिक विकास को बढ़ावा देगी।
भारत के विशाल ज्ञान के भंडार तक पहुंच बढ़ाने के उद्देश्य से एक दूरदर्शी पहल है ‘ज्ञान भारतम मिशन’ : गजेंद्र सिंह शेखावत
भारतीय राष्ट्रीय अभिलेखागार दुनिया के सबसे बड़े डिजिटलीकरण कार्यक्रम पर काम कर रहा है, जिसमें एक महीने में छह लाख से अधिक पृष्ठों का संरक्षण किया जा रहा है और प्रतिदिन लाखों पृष्ठों का डिजिटलीकरण किया जा रहा है |
भारतीय राष्ट्रीय अभिलेखागार ने अपना 135वां स्थापना दिवस मनाया |
नई दिल्ली | भारतीय राष्ट्रीय अभिलेखागार (एनएआई) ने 11 मार्च 2025 को अपना 135वां स्थापना दिवस “वास्तुकला के माध्यम से भारतीय विरासत” पर केंद्रित एक प्रदर्शनी के साथ मनाया। केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने प्रदर्शनी का उद्घाटन किया।

प्रदर्शनी में भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित किया गया, जो हजारों वर्षों से चली आ रही विविध वास्तुकला के चमत्कारों में परिलक्षित होती है और उसमें विभिन्न शैलियां, प्रभाव और ऐतिहासिक काल शामिल हैं। प्राचीन सिंधु घाटी सभ्यता से लेकर मध्ययुगीन मंदिरों, मुगल स्मारकों और औपनिवेशिक युग की संरचनाओं तक, भारतीय वास्तुकला देश के आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विकास का वर्णन करती है।
भारतीय विरासत की वास्तुकला संबंधी ऐतिहासिक धरोहरों के माध्यम से व्यापक जानकारियां उपलब्ध कराने के लिए, प्रदर्शनी ने इन स्थलों को विषयगत समूहों में वर्गीकृत किया, जिससे उनके ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व को गहराई के साथ समझा जा सके। अभिलेखीय भंडार से जुड़े कुछ चुनिंदा मूल दस्तावेजों को प्रदर्शित किया गया, जिसमें आधिकारिक सरकारी फाइलें, प्रतिष्ठित व्यक्तियों के निजी कागजात, पुरातात्विक उत्खनन रिकॉर्ड, यूनेस्को के दस्तावेज और एनएआई लाइब्रेरी की दुर्लभ पुस्तकें शामिल थीं।
अपने उद्घाटन भाषण में, गजेंद्र सिंह शेखावत ने इस उल्लेखनीय प्रदर्शनी के आयोजन के लिए भारतीय राष्ट्रीय अभिलेखागार की सराहना की और भारत की समृद्ध दस्तावेजी विरासत के संरक्षण में इसके योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि राष्ट्रीय अभिलेखागार (एनएआई) वर्तमान में दुनिया के सबसे बड़े डिजिटलीकरण कार्यक्रम पर काम कर रहा है, जिसमें एक महीने में छह लाख से अधिक पृष्ठों का संरक्षण किया जा रहा है और प्रतिदिन उनमें से लाखों का डिजिटलीकरण किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस डिजिटलीकरण कार्यक्रम की सफलता ने ‘ज्ञान भारतम मिशन’ के शुभारंभ को प्रेरित किया है, जो भारत के ज्ञान के विशाल भंडार तक पहुंच का विस्तार करने के उद्देश्य से जुड़ी एक दूरदर्शी पहल है।
इस अवसर पर, भारतीय राष्ट्रीय अभिलेखागार ने ‘थम्ब प्रिंटेड: चंपारण, इंडिगो पीजैंट्स स्पीक टू गांधी वॉल्यूम III’ नामक पुस्तक का भी विमोचन किया। इस खंड में 423 गवाहियां थीं, जिनमें पांच महिलाओं, 11 नाबालिगों सहित 143 मुख्य वसीयतकर्ता शामिल थे, 76 ने दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए थे और चार के पास कोई हस्ताक्षर या अंगूठे का निशान नहीं था। श्रृंखला का यह तीसरा खंड ऐतिहासिक चंपारण सत्याग्रह पर केंद्रित है।
संस्कृति मंत्रालय के अधीन एक संबद्ध कार्यालय भारतीय राष्ट्रीय अभिलेखागार की स्थापना मूल रूप से 11 मार्च 1891 को कोलकाता (कलकत्ता) में इंपीरियल रिकॉर्ड विभाग के रूप में की गई थी। 1911 में राजधानी के दिल्ली में स्थानांतरित होने के बाद, सर एडविन लुटियंस द्वारा डिजाइन किया गया वर्तमान एनएआई भवन 1926 में पूरा हुआ। कलकत्ता से नई दिल्ली में अभिलेखों के पूर्ण हस्तांतरण को 1937 में अंतिम रूप दिया गया था। भारतीय राष्ट्रीय अभिलेखागार सार्वजनिक अभिलेख अधिनियम, 1993 और सार्वजनिक अभिलेख नियम, 1997 को लागू करने के लिए नोडल एजेंसी के रूप में भी कार्य करता है।
वर्तमान में, भारतीय राष्ट्रीय अभिलेखागार में सार्वजनिक अभिलेखों के 34 करोड़ से अधिक पृष्ठ हैं, जिनमें फाइलें, खंड, मानचित्र, संधियां, दुर्लभ पांडुलिपियां, मानचित्र संबंधी अभिलेख, संसदीय बहस, जनगणनाएं, यात्रा विवरण, निषिद्ध साहित्य और सरकारी राजपत्र शामिल हैं। इसके प्राचीन अभिलेखों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा संस्कृत, फारसी, उडिया और अन्य भाषाओं में है।
135वें स्थापना दिवस समारोह ने इतिहास को संरक्षित करने, सार्वजनिक जुड़ाव को समृद्ध करने और अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय अभिलेखागार की निरंतर प्रतिबद्धता को प्रदर्शित किया है। डिजिटलीकरण, अभिलेखीय संरक्षण और सार्वजनिक आउटरीच में अपने निरंतर प्रयासों के माध्यम से, एनएआई भविष्य की पीढ़ियों के लिए भारत की दस्तावेजी विरासत की सुरक्षा के लिए समर्पित है।
वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने उभरती सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए त्वरित क्षमता वृद्धि की आवश्यकता पर बल दिया
नई दिल्ली | वायु सेना प्रमुख (सीएएस) एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने उभरते भू-रणनीतिक परिदृश्य में उभरती सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए तेजी से क्षमता वृद्धि की आवश्यकता पर जोर दिया है। वायु सेना प्रमुख एपी सिंह ने रक्षा सेवा स्टाफ कॉलेज (डीएसएससी), वेलिंगटन में स्थायी संकाय के 80वें स्टाफ कोर्स में भाग लेने वाले भारतीय सशस्त्र बलों के छात्र अधिकारियों को संबोधित करते हुए यह विचार व्यक्त किए। वायु सेना प्रमुख ने 11-12 मार्च 2025 को डीएसएससी का दौरा किया।

वायु सेना प्रमुख एपी सिंह ने कोर्स अधिकारियों से बदलाव को अपनाने, उभरते खतरों का गंभीरता से आकलन करने और भविष्य के संघर्षों के लिए अनुकूल रणनीति तैयार करने का आग्रह किया। संयुक्त कौशल के महत्व पर बल देते हुए उन्होंने युद्ध प्रभावशीलता को बढ़ाने के लिए तीनों सेनाओं के बीच एकीकृत प्रशिक्षण और परिचालन सामंजस्य की आवश्यकता पर जोर दिया।
वायु सेना प्रमुख ने अपने संबोधन में भारतीय वायु सेना की वर्तमान में जारी क्षमता विकास पहलों और आधुनिक युद्ध में एकीकृत संचालन के महत्व पर एक रणनीतिक परिप्रेक्ष्य के संदर्भ में चर्चा की। उन्होंने भारत के राष्ट्रीय हितों की रक्षा में भारतीय वायुसेना कर्मियों की उपलब्धियों, उदारता और अटूट प्रतिबद्धता का भी उल्लेख किया।
अपनी यात्रा के दौरान, सीएएस को डीएसएससी की प्रशिक्षण गतिविधियों और सशस्त्र बलों के बीच संयुक्तता को बढ़ावा देने के मामले में प्रोत्साहन के बारे में भी जानकारी दी गई। यह आधुनिक सैन्य तैयारियों का एक प्रमुख पहलू है। उन्होंने महत्वपूर्ण रूप से शैक्षणिक और पेशेवर प्रशिक्षण के माध्यम से भविष्य के सैन्य अधिकारियों को आकार देने में संस्थान की भूमिका की सराहना की।
इस यात्रा ने संयुक्त परिचालन क्षमताओं को बढ़ाने और अंतर-सेवा सहयोग को मजबूत करने की दिशा में भारतीय वायुसेना की प्रतिबद्धता की पुष्टि की, जिससे भविष्य की चुनौतियों के लिए एक बेहतर तरीके से तैयार नेतृत्व सुनिश्चित किया जा सके।
मॉरीशस में पीएम मोदी ने किया पौधारोपण : एक पेड़ मां के नाम
नई दिल्ली | प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को मॉरीशस के सर शिवसागर रामगुलाम बॉटनिकल गार्डन में एक पेड़ मां के नाम पहल के तहत एक पौधा लगाया। इससे पहले, उन्होंने गुयाना की अपनी यात्रा के दौरान भी इसी तरह एक पौधा लगाया है।
पीएम मोदी के निरंतर प्रयासों के कारण, इस पहल के परिणामस्वरूप भारत में 1 बिलियन से अधिक पेड़ लगाए गए हैं।
पीएम मोदी ने 5 जून 2024 को दिल्ली के बुद्ध जयंती पार्क में पीपल का पेड़ लगाकर एक पेड़ मां के नाम अभियान की शुरुआत की थी।
इस पहल का प्रभाव भारत के बाहर के देशों में भी फैल गया है। इसके तहत दुनिया भर के लगभग 136 देशों में कुल 27,500 से अधिक पेड़ लगाए जा चुके हैं।

पीएम मोदी दो दिवसीय मॉरीशस यात्रा पर मंगलवार को पोर्ट लुईस पहुंचे। सर शिवसागर रामगुलाम अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर मॉरीशस के प्रधानमंत्री नवीनचंद्र रामगुलाम ने पीएम मोदी का माला पहनाकर स्वागत किया।
भारतीय समुदाय की तरफ से पीएम मोदी का गर्मजोशी से स्वागत किया गया। समुदाय की महिलाओं ने ‘गीत गवई’ नामक पारंपरिक बिहारी सांस्कृतिक प्रस्तुति के माध्यम से उनका सम्मान किया।
पीएम मोदी ने एक्स पर लिखा, मॉरीशस में भारतीय समुदाय द्वारा किए गए गर्मजोशी भरे स्वागत से मैं बहुत प्रभावित हूं। भारतीय विरासत, संस्कृति और मूल्यों से उनका गहरा जुड़ाव वाकई प्रेरणादायक है। इतिहास और दिल का यह बंधन पीढिय़ों से चला आ रहा है।
एक अन्य पोस्ट में उन्होंने लिखा, मॉरीशस में अविस्मरणीय स्वागत से बहुत अभिभूत हूं। यहां की संस्कृति में भारतीयता किस तरह रची-बसी है, उसकी पूरी झलक गीत-गवई में देखने को मिली। हमारी भोजपुरी भाषा मॉरीशस में जिस तरह से फल-फूल रही है, वह हर किसी को गौरवान्वित करने वाली है।
प्रधानमंत्री मोदी बुधवार को देश के राष्ट्रीय दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। भारतीय नौसेना के एक जहाज के साथ भारतीय रक्षा बलों की एक टुकड़ी भी समारोह में भाग लेगी।
यह प्रधानमंत्री मोदी की 2015 के बाद पहली मॉरीशस यात्रा है। प्रधानमंत्री मोदी की वर्तमान यात्रा से विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने पंजाब केंद्रीय विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह को संबोधित किया
नई दिल्ली | भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज (11 मार्च, 2025) बठिंडा में पंजाब केंद्रीय विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में भाग लिया।
राष्ट्रपति ने इस अवसर पर कहा कि दीक्षांत समारोह विद्यार्थियों के जीवन में एक चरण के पूरा होने और दूसरे चरण की शुरुआत का अवसर है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सभी विद्यार्थी अपने आचरण और योगदान से इस विश्वविद्यालय, अपने परिवार और देश का नाम रोशन करेंगे।

राष्ट्रपति ने छात्रों को सलाह दी कि वे पांच अच्छी चीजों- जिज्ञासा, मौलिकता, नैतिकता, दूरदर्शिता और सहजता को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं।
श्रीमती मुर्मु ने कहा कि जिज्ञासा व्यक्ति को नई जानकारी प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित करती है। जिज्ञासु व्यक्ति जीवन भर नई-नई चीजें सीखते रहते हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी विषय को अच्छी तरह से समझने के बाद उस विषय या किसी अन्य क्षेत्र में कुछ नया करने का प्रयास करना चाहिए। मौलिकता से विशिष्ट पहचान मिलती है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि नैतिकता ही सार्थक जीवन का आधार है। सफल व्यक्ति बनने से ज्यादा महत्वपूर्ण है अच्छा व्यक्ति बनना। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वे अपने निजी जीवन या कार्य में जो भी अवसर चुनें, वह तात्कालिक लाभ के आधार पर नहीं, बल्कि अपनी क्षमताओं और रुचियों के स्थायी उपयोग की संभावना पर आधारित होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सहजता एक मूल्यवान गुण है। इसके कई आयाम हैं। दिखावे या दिखावे से बचना इसका एक आयाम है। शब्दों और कार्यों में एकरूपता सहजता का दूसरा आयाम है। अपनी जड़ों से जुड़े रहना भी सहजता का एक अन्य महत्वपूर्ण आयाम है।
राष्ट्रपति ने कहा कि उन्हें यह जानकर खुशी हुई कि पंजाब केंद्रीय विश्वविद्यालय में लगभग सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के छात्र अध्ययन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इसका शिक्षण समुदाय भी भारत की विविधता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि इस संस्थान में पूरे देश का प्रतिनिधित्व इस विश्वविद्यालय की एक सराहनीय विशेषता है। ऐसे संस्थान हमारे देश की जीवंत संस्कृति के प्रतिनिधि हैं।
शांति और विकास की नई कहानी लिख रही मोदी सरकार पूर्वोत्तर में : अमित शाह
नई दिल्ली। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने पूर्वोत्तर के विकास और शांति पर विशेष ध्यान दिया है। उन्होंने कहा कि बीजेपी सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि उसने पूर्वोत्तर और बाकी भारत के बीच की दूरी कम की है। उन्होंने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद द्वारा आयोजित पूर्वोत्तर छात्र और युवा संसद कार्यक्रम में बोलते हुए घोषणा की कि 2027 तक पूर्वोत्तर के हर राज्य की राजधानी को ट्रेन, हवाई मार्ग और सड़क से जोड़ा जाएगा।

शाह ने बताया कि पिछले 10 वर्षों में पूर्वोत्तर में हिंसा में भारी कमी आई है। 2004 से 2014 के बीच 11,000 हिंसक घटनाएं हुई थीं, जबकि 2014 से 2024 के बीच यह संख्या घटकर 3,428 रह गई, यानी 70% की कमी आई। उन्होंने कहा कि नागरिकों की मौतों में 89% और सुरक्षा बलों के जवानों की शहादत में 70% की कमी आई है। शाह ने बताया कि बीजेपी सरकार ने 10 वर्षों में 12 बड़े शांति समझौते किए, जिससे 10,500 से अधिक उग्रवादियों ने हथियार डालकर मुख्यधारा में शामिल होने का फैसला किया। उन्होंने कहा कि आज पूरा पूर्वोत्तर शांति की ओर बढ़ रहा है।
उन्होंने बताया कि स्वतंत्रता के बाद अब तक सभी प्रधानमंत्रियों ने मिलाकर सिर्फ 21 बार (असम को छोड़कर) पूर्वोत्तर का दौरा किया था, जबकि अकेले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 78 बार इस क्षेत्र का दौरा किया। इससे साफ है कि मोदी सरकार पूर्वोत्तर को कितनी अहमियत देती है। शाह ने यह भी बताया कि अब हर महीने एक केंद्रीय मंत्री पूर्वोत्तर के किसी राज्य में रात बिताएंगे, ताकि विकास कार्यों की निगरानी हो सके।
अमित शाह ने पूर्वोत्तर के विकास के लिए किए गए बड़े निवेशों की भी घोषणा की। उन्होंने बताया कि असम में 2,700 करोड़ रुपये की लागत से एक सेमीकंडक्टर प्लांट लगाया जा रहा है और 2.5 लाख करोड़ रुपये का निवेश पूर्वोत्तर में बुनियादी ढांचे और उद्योगों के लिए किया जा रहा है। उन्होंने पूर्वोत्तर के युवाओं को भरोसा दिलाया कि अगले 10 वर्षों में उन्हें नौकरी की तलाश में दूसरे राज्यों में जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी, क्योंकि उनके अपने राज्यों में ही रोजगार के अवसर मिलेंगे।
भारत और मॉरीशस के बीच गहरे आर्थिक : सांस्कृतिक और राजनयिक संबंध
नई दिल्ली | प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज दो दिवसीय राजकीय यात्रा के लिए मॉरीशस पहुंच चुके हैं, जहां उनका गर्मजोशी से स्वागत किया गया। पीएम की यह दूसरी यात्रा है, इससे पहले वे 2015 में भी मॉरीशस गए थे। पीएम मोदी 12 मार्च को मॉरीशस के राष्ट्रीय दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। गौरतलब है कि दोनों देशों के बीच गहरे द्विपक्षीय आर्थिक, सांस्कृतिक और राजनयिक संबंध हैं।

मॉरीशस, जो हिंद महासागर में एक रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण द्वीप राष्ट्र है, भारत का एक करीबी और महत्वपूर्ण पड़ोसी भी है। दोनों देशों के बीच विशेष संबंधों का एक प्रमुख कारण यह है कि मॉरीशस की 70% आबादी भारतीय मूल की है। माॅरीशस कभी फ्रांस का उपनिवेश था, लेकिन बाद में ब्रिटेन के अधीन आ गया। फ्रांसीसी शासन के दौरान (1700 के दशक में), पहली बार भारतीयों को पुदुच्चेरी क्षेत्र से कारीगर और राजमिस्त्री के रूप में मॉरीशस लाया गया था। ब्रिटिश शासन के दौरान, 1834 से 1900 की शुरुआत तक लगभग 5 लाख भारतीय अनुबंधित श्रमिक मॉरीशस पहुंचे, जिनमें से दो-तिहाई ने यहीं बसने का फैसला किया।
मॉरीशस का राष्ट्रीय दिवस भी भारत से एक खास जुड़ाव रखता है। 1901 में, महात्मा गांधी दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटते समय कुछ दिनों के लिए मॉरीशस में रुके थे। इस दौरान उन्होंने भारतीय श्रमिकों को तीन महत्वपूर्ण संदेश -शिक्षा का महत्व, राजनीतिक सशक्तिकरण, और भारत से जुड़े रहने की आवश्यकता पर जोर दिया। गांधीजी के इन विचारों से प्रेरित होकर मॉरीशस अपना राष्ट्रीय दिवस 12 मार्च को मनाता है, जो संयोग से भारत में ऐतिहासिक डांडी मार्च की वर्षगांठ भी है।
भारत ने मॉरीशस के साथ 1948 में ही राजनयिक संबंध स्थापित कर लिए थे, जो उसकी स्वतंत्रता (1968) से भी पहले की बात है। दोनों देशों के बीच संबंध आपसी विश्वास और सहयोग पर आधारित हैं। समुद्री सुरक्षा, विकास परियोजनाएं, तकनीकी सहायता, और सांस्कृतिक आदान-प्रदान जैसे क्षेत्रों में भारत ने मॉरीशस को निरंतर सहयोग दिया है। भारत ने मॉरीशस में महात्मा गांधी इंस्टीट्यूट, वर्ल्ड हिंदी सेक्रेटेरिएट और इंडियन कल्चरल सेंटर जैसे संस्थानों की स्थापना में मदद की है, जो भारतीय संस्कृति और भाषा को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
भारत हमेशा संकट के समय मॉरीशस का सबसे पहले सहयोग करने वाला देश रहा है। कोविड-19 महामारी के दौरान भारत ने 13 टन दवाइयां, 10 टन आयुर्वेदिक दवाएं और एक मेडिकल टीम भेजी। जनवरी 2021 में 1 लाख मुफ्त कोविशील्ड वैक्सीन भेजने के अलावा, मॉरीशस को बाद में कोवैक्सिन और कोविशील्ड की अतिरिक्त खेप भी दी गई। वहीं मॉरीशस ने भारत को 200 ऑक्सीजन कंसंट्रेटर भेजे थे। इसी तरह, 2020 में जापानी जहाज वाकाशियो से हुए तेल रिसाव संकट के दौरान भी भारत ने सबसे पहले सहायता भेजी। भारतीय वायुसेना ने 30 टन तकनीकी उपकरण और 10 विशेषज्ञों की एक टीम मॉरीशस भेजी।
व्यापार और आर्थिक मोर्चे पर, भारत 2005 से मॉरीशस के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में से एक बना हुआ है। 2023-24 में भारत से मॉरीशस को 778.03 मिलियन अमेरिकी डॉलर का निर्यात हुआ, जबकि मॉरीशस से भारत को 73.10 मिलियन अमेरिकी डॉलर का आयात हुआ। भारत से मॉरीशस को मुख्य रूप से पेट्रोलियम उत्पाद, दवाइयां, अनाज, कपास और झींगा निर्यात किया जाता है, जबकि मॉरीशस से भारत को वेनिला, चिकित्सा उपकरण और रिफाइंड कॉपर जैसे उत्पाद मिलते हैं। 2000 से अब तक मॉरीशस से भारत में 175 बिलियन अमेरिकी डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) आया है, जिससे यह भारत का तीसरा सबसे बड़ा निवेशक देश बन गया है। 2021 में भारत और मॉरीशस के बीच CECPA समझौता हुआ, जो दोनों देशों के बीच व्यापार और आर्थिक सहयोग को और मजबूत कर रहा है।
भारत ने मॉरीशस में कई विकास परियोजनाओं में सहायता की है। 2016 में भारत ने 353 मिलियन अमेरिकी डॉलर के विशेष आर्थिक पैकेज की घोषणा की, जिसके तहत मेट्रो एक्सप्रेस, सुप्रीम कोर्ट बिल्डिंग, नया ENT अस्पताल, सामाजिक आवास परियोजना और डिजिटल टैबलेट योजना जैसी परियोजनाएं शामिल थीं। इसके अलावा, 2017 में भारत ने 500 मिलियन अमेरिकी डॉलर का ऋण दिया, जिससे 10 प्रमुख परियोजनाओं को वित्तपोषित किया गया, जिनमें से 7 पहले ही पूरी हो चुकी हैं। भारत की सहायता से सिविल सर्विस कॉलेज, नेशनल आर्काइव्स, पुलिस अकादमी, किडनी ट्रांसप्लांट यूनिट और अन्य स्वास्थ्य केंद्रों जैसी परियोजनाएं भी प्रगति पर हैं।
शिक्षा और सांस्कृतिक सहयोग में भी भारत ने मॉरीशस को महत्वपूर्ण समर्थन दिया है। मॉरीशस में भारत का सबसे बड़ा सांस्कृतिक केंद्र, इंदिरा गांधी सेंटर फॉर इंडियन कल्चर (IGCIC), स्थापित किया गया है, जहां हर साल 2,500 से अधिक छात्रों को संगीत, कथक, तबला और योग की शिक्षा दी जाती है। ITEC कार्यक्रम के तहत हर साल लगभग 400 मॉरीशियन भारत में प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं, जबकि ICCR स्कॉलरशिप के माध्यम से 60 छात्रों को भारत में उच्च शिक्षा के लिए छात्रवृत्ति दी जाती है। 2007-08 से अब तक आईटीईसी कार्यक्रम के तहत लगभग 4868 मॉरीशसवासियों को प्रशिक्षित किया गया है।
भारतीय समुदाय और पर्यटन
मॉरीशस में 22,188 भारतीय नागरिक और 13,198 OCI कार्ड धारक रहते हैं। 2024 में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की यात्रा के दौरान घोषणा की गई कि भारतीय मूल के मॉरीशियनों को 7वीं पीढ़ी तक OCI कार्ड की सुविधा मिलेगी। पर्यटन भी दोनों देशों के बीच एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है। हर साल लगभग 80,000 भारतीय मॉरीशस घूमने जाते हैं, जबकि माॅरीशस के 30,000 लोग भारत आते हैं।
भारत और मॉरीशस के बीच संबंध ऐतिहासिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और रणनीतिक रूप से बेहद मजबूत हैं। भारत मॉरीशस के विकास में एक प्रमुख भागीदार बना हुआ है और दोनों देश आने वाले समय में अपनी साझेदारी को और गहरा करने के लिए निरंतर प्रयास कर रहे हैं।