देश-विदेश
गेहूं और जौ उत्पादन बढ़ाने के साथ लागत घटाना भी जरूरी: शिवराज सिंह चौहान
नईदिल्ली। केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि भारत आज गेहूं और चावल के उत्पादन में आत्मनिर्भर है, लेकिन उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ लागत घटाना भी उतना ही जरूरी है ताकि खेती लाभकारी बन सके। वे मंगलवार को ग्वालियर स्थित राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय में आयोजित '64वीं अखिल भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान कार्यकर्ता गोष्ठी' को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। श्री चौहान ने गोष्ठी की शुरुआत में कृषि वैज्ञानिक डॉ. एम.एस. स्वामीनाथन के शताब्दी वर्ष का स्मरण करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और कहा कि देश में खाद्यान्न आत्मनिर्भरता में उनका योगदान अविस्मरणीय है। उन्होंने किसानों की मेहनत को नमन करते हुए कहा कि किसानों के परिश्रम और वैज्ञानिकों के शोध के बल पर भारत आज वैश्विक स्तर पर मजबूत कृषि राष्ट्र के रूप में खड़ा है।
गेहूं और जौ का उत्पादन बढ़ाने महामंथन...
— PIB in MP (@PIBBhopal) August 26, 2025
माननीय केंद्रीय मंत्री श्री @ChouhanShivraj जी ने आज ग्वालियर स्थित राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय (RVSKVV) में आयोजित 64वीं अखिल भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान कार्यकर्ता गोष्ठी में सहभागिता की।
इस दौरान केंद्रीय मंत्री… pic.twitter.com/pPXX3ITnRF
कृषि मंत्री ने बताया कि बीते 10-11 वर्षों में गेहूं का उत्पादन 86.5 मिलियन टन से बढ़कर 117.5 मिलियन टन हो गया है, जो लगभग 44 प्रतिशत की वृद्धि है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि उल्लेखनीय है, लेकिन अभी भी हमें प्रति हेक्टेयर उत्पादन को वैश्विक औसत के बराबर लाने की दिशा में काम करना होगा। श्री चौहान ने कहा कि गेहूं और चावल का पर्याप्त उत्पादन हो चुका है, लेकिन अब दलहन और तिलहन की उत्पादकता बढ़ाना समय की मांग है ताकि आयात पर निर्भरता घटे। उन्होंने कहा कि जौ जैसे परंपरागत अनाज का औषधीय महत्व है और इसके प्रोत्साहन पर भी ध्यान देने की आवश्यकता है।
चौहान ने वैज्ञानिकों से आग्रह किया कि वे बायोफोर्टिफाइड गेहूं विकसित करें और असंतुलित खादों के उपयोग से मृदा की गुणवत्ता पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव को रोकने की दिशा में कार्य करें। उन्होंने कहा कि पराली प्रबंधन और किसानों को आधुनिक तकनीक अपनाने के लिए शिक्षित करना भी जरूरी है। श्री चौहान ने कहा कि केंद्र सरकार किसानों को नकली खाद और कीटनाशकों से बचाने के लिए सख्त कदम उठा रही है। उन्होंने बताया कि जिन कंपनियों के उत्पाद से फसल को नुकसान हुआ है, उनके लाइसेंस रद्द किए जा रहे हैं और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होगी।
प्रदेश के साथ देश की विद्युत आवश्यकताओं की पूर्ति कर रहा है मध्यप्रदेश : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि वर्तमान युग में विद्युत (ऊर्जा) का महत्व वायु और जल के समान है। गर्व का विषय है कि हम उद्योगों और किसानों सहित सभी प्रदेशवासियों की बिजली की मांग के साथ देश की बिजली की जरूरत को भी पूरा कर रहे हैं। देश की राजधानी दिल्ली की मेट्रो ट्रेन मध्यप्रदेश की बिजली से चल रही है। अब इस तरह की योजना बनाई जा रही है कि वर्ष 2047 तक बिजली की कोई कमी नहीं होगी, प्रदेश ऊर्जा क्षेत्र में सरप्लस रहेगा। प्रदेश में विद्युत उत्पादन के लिए सभी उपलब्ध संसाधनों का उपयोग किया जा रहा है। देश में क्लीन एनर्जी के लिए गतिविधियों का विस्तार हो रहा है। प्रदेश में पिछले 11 वर्षों में सौर ऊर्जा 30 प्रतिशत बढ़ी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव 6 विद्युत कंपनियों के नवनियुक्त 1060 कार्मिकों को नियुक्त-पत्र वितरण और अभिनंदन समारोह को रवीन्द्र भवन में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को औषधीय पौधा भेंट कर स्वागत किया गया।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बिजली कंपनियों के द्वारा एक हजार से अधिक युवाओं को नियुक्ति पत्र बांटे जा रहे हैं। प्रदेश की बिजली कंपनियों में 51 हजार से अधिक नए पद भरे जाएंगे। इससे बिजली कम्पनियों की स्थिति सुदृढ़ होगी। किसान भाइयों को लगभग 20 हजार 267 करोड़ रुपए की सब्सिडी इस वर्ष दी जा रही है। प्रदेश के एक करोड़ से अधिक परिवारों को बिजली विभाग ने 6445 करोड़ रुपए की सब्सिडी प्रदान की है। प्रदेश में बिजली तैयार करने के लिए हर उपलब्ध संसाधन का उपयोग किया जा रहा है। पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना को भी प्रोत्साहन दिया जा रहा है। सांची को प्रदेश की पहली सोलर सिटी बनाया गया है। राज्य के 32 लाख किसानों को सोलर पंप प्रदान किए जा रहे हैं। प्रदेश में उत्पादित क्लीन एनर्जी से बिजली, उद्योग का रूप ले रही है। प्रदेश के अन्य विभागों द्वारा अपनी स्वयं की बिजली बनाने की पहल लोक स्वास्थ्य विभाग ने आरंभ की है। इससे ऊर्जा विभाग की जिम्मेदारी बढ़ेगी तथा प्रबंधन के लिए दक्ष मानव संसाधन की आवश्यकता होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश को सभी क्षेत्रों में देश के अग्रणी राज्यों की श्रेणी में शामिल कराने के लिए संकल्पित है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अवसर पर प्रदेश की विभिन्न बिजली कंपनियों की उपलब्धियों पर केंद्रित प्रदर्शनी का शुभारंभ कर अवलोकन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विद्युत कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों से भेंट भी की। कार्यक्रम में मध्यप्रदेश में ऊर्जा क्षेत्र पर केंद्रित एक लघु फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नव नियुक्त विद्य़त कार्मिकों को नियुक्ति-पत्र प्रदान किए। ऊर्जा विभाग के अंतर्गत सभी बिजली कंपनियों के लिये 51 हजार से अधिक नियमित पद स्वीकृत करने पर ऊर्जा मंत्री ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव का पगड़ी पहना कर तथा अंग वस्त्रम और प्रशस्ति-पत्र भेंट कर अभिनंदन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के सम्मान में प्रशस्ति-पत्र का वाचन भी किया गया। इस अवसर पर नव नियुक्त कर्मिकों के अभिभावक भी उपस्थित थे।
ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने कहा कि बिजली कंपनियों में बड़ी संख्या में नियुक्ति देकर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बिजली कंपनियों को जीवनदान प्रदान किया है। उन्होंने कहा कि पहली बार इतनी बड़ी संख्या में नियमित पद स्वीकृत किये गये हैं। इसीलिये आज मुख्यमंत्री डॉ. यादव का अभिनंदन किया गया है। उन्होंने कहा कि ऊर्जा विभाग लगातार बिजली उपभोक्ताओं और किसानों के हित में कार्य कर रहा है। किसानों को अब कड़कड़ाती ठंडी रातों में सिंचाई नहीं करनी पड़ेगी। अब इन्हें सिंचाई के लिये दिन में बिजली उपलब्ध कराई जायेगी। उन्होंने अधोसंरचना सुधार के लिये राशि की जरूरत पर भी बल दिया।
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गो-डॉउन में ही उपार्जन केन्द्र बनाने को दी जायेगी प्राथमिकता : अपर मुख्य सचिव खाद्य श्रीमती शमी
भोपाल। गो-डॉउन में ही उपार्जन केन्द्र बनाने को प्राथमिकता दी जायेगी। जिससे उपार्जित अनाज के परिवहन में लगने वाला खर्च बच सके। अपर मुख्य सचिव खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण रश्मि अरूण शमी ने यह बात प्रोक्योरमेंट रिफार्म पर हुई स्टेट लेवल वर्कशॉप में कही। वर्कशॉप कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में संपन्न हुई। वर्कशॉप में भारत सरकार के अपर मुख्य सचिव एवं वित्तीय सलाहकार खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति संजीव शंकर, भारत सरकार में संयुक्त सचिव सी. शिखा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
अपर मुख्य सचिव शमी ने कहा कि गत रबी सीजन में लगभग 9 लाख किसानों से 77 लाख मीट्रिक टन से अधिक गेहूं का उपार्जन किया गया और लगभग 20 हजार करोड़ रूपये किसानों के खाते में अंतरित किये गये। गेहूं के उपार्जन में राज्य सरकार द्वारा 175 रूपये प्रति क्विंटल का बोनस दिया गया है। इसी तरह लगभग 6 लाख 50 हजार किसानों से 43.5 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी की गई है। उपार्जन के लिये किसानों के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया में आधार नम्बर को भी जोड़ा गया है। उपार्जन केन्द्रों से ही मिलर्स को धान देने का प्रावधान किया गया है। उपार्जन केन्द्रों पर किसानों को जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। पीडीएस दुकानों में अनाज ले जाने वाले वाहनों की सघन मॉनिटरिंग की जाती है। प्रदेश में उचित मूल्य की दुकानों को जन पोषण केन्द्र के रूप में विकसित करने की भी योजना है। वर्तमान में इंदौर में यह कार्य शुरू कर दिया गया है। उचित मूल्य की दुकानों से खाद्यान्न लेने वाले उपभोक्ताओं की ई-केवायसी कराई जा रही है। ई-केवायसी के बाद अपात्र लोगों को बाहर किया गया है और लगभग 5 लाख 70 हजार नये उपभोक्ताओं को सूची में जोड़ा गया है।
वर्कशॉप में भारत सरकार के अपर सचिव एवं वित्तीय सलाहकार खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति संजीव शंकर ने आयोजन के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि वर्कशॉप में उपस्थित अधिकारी अपने सुझाव जरूर दें। शंकर ने कहा कि उपार्जन की प्रक्रिया को और बेहतर कैसे बनाया जा सकता है, इस संबंध में गहन विमर्श किया जायेगा। भारत सरकार की संयुक्त सचिव पॉलिसी एण्ड एफसीआई सी. शिखा ने बिलिंग प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सब्सिडी की जानकारी प्रतिमाह भेजें। उन्होंने मध्यप्रदेश की गुड प्रेक्टिसेस के बारे में भी जानकरी दी और विभाग की कार्यप्रणाली की सराहना की।
भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं लघु उद्योग : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि उद्योगों के हित में ही राष्ट्र का हित निहित है। लघु और कुटीर उद्योग भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। सीमित संसाधनों का समुचित उपयोग कर हम इन उद्योगों के विकास की ओर बढ़ रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्वतंत्रता के अमृत काल में लघु उद्योग भारती के प्रदेश कार्यालय का लोकार्पण हमारे उत्कर्ष को दर्शाता है। उद्योगों के विकास के लिए हमें पूरे देश के परिदृश्य में सोचना होगा। सभी जगह समान रूप से उद्योग लगाने होंगे, तभी संतुलित विकास हो सकेगा। देश हित में हम सब मिलजुलकर काम करेंगे। उन्होंने कहा कि हम उद्योगों को विस्तार देने के लिए उद्योगपतियों के साथ कदम से कदम मिलाकर चलेंगे। हमने समाज के सभी वर्गों का बराबर ध्यान रखा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव रविवार को लघु उद्योग भारती के गोविंदपुरा औद्योगिक प्रक्षेत्र में नवनिर्मित प्रदेश कार्यालय के लोकार्पण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लघु उद्योग भारती के करीब 4 करोड़ रुपए की लागत से नवनिर्मित प्रदेश कार्यालय भवन 'उद्यम सेतु'का वैदिक मंत्रोच्चार के बीच फीता काटकर लोकार्पण किया।लोकार्पण अवसर पर लघु उद्योग भारती का द्वि-वार्षिक प्रादेशिक सम्मेलन और स्टार्टअप एवं लघु उद्यमी महाकुंभ-2025 भी आयोजित किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अन्य अतिथियों के साथ लघु उद्योग भारती के नए ब्रोशर का विमोचन भी किया।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि उद्योगों के हित में ही राष्ट्र का हित निहित है। लघु और कुटीर उद्योग भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। सीमित संसाधनों का समुचित उपयोग कर हम इन उद्योगों के विकास की ओर बढ़ रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्वतंत्रता के अमृत काल में लघु उद्योग भारती के प्रदेश कार्यालय का लोकार्पण हमारे उत्कर्ष को दर्शाता है। उद्योगों के विकास के लिए हमें पूरे देश के परिदृश्य में सोचना होगा। सभी जगह समान रूप से उद्योग लगाने होंगे, तभी संतुलित विकास हो सकेगा। देश हित में हम सब मिलजुलकर काम करेंगे। उन्होंने कहा कि हम उद्योगों को विस्तार देने के लिए उद्योगपतियों के साथ कदम से कदम मिलाकर चलेंगे। हमने समाज के सभी वर्गों का बराबर ध्यान रखा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव रविवार को लघु उद्योग भारती के गोविंदपुरा औद्योगिक प्रक्षेत्र में नवनिर्मित प्रदेश कार्यालय के लोकार्पण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लघु उद्योग भारती के करीब 4 करोड़ रुपए की लागत से नवनिर्मित प्रदेश कार्यालय भवन 'उद्यम सेतु'का वैदिक मंत्रोच्चार के बीच फीता काटकर लोकार्पण किया।लोकार्पण अवसर पर लघु उद्योग भारती का द्वि-वार्षिक प्रादेशिक सम्मेलन और स्टार्टअप एवं लघु उद्यमी महाकुंभ-2025 भी आयोजित किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अन्य अतिथियों के साथ लघु उद्योग भारती के नए ब्रोशर का विमोचन भी किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने घोषणा की कि किसी भी प्रकार का संस्थागत या बैंक लोन चुकता होते ही संबंधित बंधक संपत्ति मॉर्टगेज या डबल मॉर्टगेज से मुक्त हो जाएगी। इस प्रावधान का लाभ हम सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम उद्योगों (एमएसएमई इंडस्ट्री) को भी देंगे। उन्होंने कहा कि प्रदेश में लघु उद्योगों की स्थापना और इससे जुड़ी सभी कठिनाइयों का समुचित हल भी निकाला जायेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हम एमएसएमई उद्योगों की स्थापना से जुड़ी सभी प्रकार की अनुमतियां को समयबद्ध कार्य योजना की अनुरूप समय-सीमा में देने का प्रावधान करने जा रहे हैं। प्रदेश में रोजगार आधारित उद्योग लगाने वाले उद्योगपतियों को प्रोत्साहन दे रहे हैं। प्रदेश में नया आईटीआई पॉलिटेक्निक कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेज खोलने के लिए भी नीति से प्रावधान अनुसार सब्सिडी दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि हम प्रदेश में रिसर्च वर्क को बढ़ावा देने के लिए आगे आ रहे हैं। आईआईटी इंदौर में शोध कार्यों के लिए देशी और विदेशी शिक्षण संस्थानों के स्टडी सेंटर के लिए हमारी चर्चा चल रही है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार लघु उद्योगों के साथ हमेशा साथ खड़ी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमें लघु उद्योगों को पुनर्जीवित करना होगा। इसी से हमारी अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि विरासत से विकास का सबसे सटीक उदाहरण भारतीय लघु उद्योग ही हैं। यह कारोबार नहीं, बल्कि करोड़ों परिवारों की आशा, आत्म-सम्मान और आर्थिक स्वावलंबन का आधार हैं। जैसे शरीर की मजबूती रीढ़ पर टिकी होती है, वैसे ही भारत की अर्थव्यवस्था की मजबूती लघु उद्योगों पर टिकी है। लघु उद्योग सिर्फ कारखाने नहीं हैं, ये रोज़गार के सबसे बड़े निर्माता हैं। एमएसएमई वह पुल है, जो मेहनतकश हाथों को बड़े बाज़ारों से जोड़ता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज भारत में 6 करोड़ से अधिक सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग (एमएसएमई) हैं, जो देश की जीडीपी में लगभग 30 प्रतिशत से अधिक योगदान देते हैं और कुल निर्यात में 45 प्रतिशत हिस्सेदारी रखते हैं। आज हम विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन पाए हैं, तो इसमें एक बड़ा योगदान लघु उद्योगों का ही है।
नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में रोल मॉडल बनकर उभरा मध्यप्रदेश
भोपाल : मध्यप्रदेश नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में रोल मॉडल बनकर उभर रहा है। प्रदेश में स्थापित की गई अनेक अभूतपूर्व परियोजनाओं से सौर ऊर्जा की आपूर्ति न केवल प्रदेश में, बल्कि दिल्ली मेट्रो एवं भारतीय रेल को भी की जा रही है। ओंकारेश्वर में नर्मदा नदी पर विश्व की सबसे बढ़ी फ्लोटिंग सौर परियोजना स्थापित की है। मुरैना में भी एक अभिनव सौर परियोजना स्थापित की जा रही है, जिसमें ऊर्जा भण्डारण कर सुबह और शाम के व्यस्ततम समय (पीक ऑवर्स) में भी प्रदेश को हरित ऊर्जा प्रदाय की जाएगी। इस परियोजना की ऊर्जा भंडारण क्षमता 600 मेगावॉट होगी।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वर्ष 2030 तक 500 गीगावॉट की नवकरणीय ऊर्जा क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखा है। उनके संकल्प की पूर्ति के लिये मध्यप्रदेश प्रतिबद्ध है और लक्ष्य प्राप्ति के लिये नवकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में निरंतर नवाचार भी कर रहा है। मुरैना में स्थापित होने जा रही अनूठी परियोजना के लिए निवादा प्रक्रिया अंतिम चरण में है। इस परियोजना में सलाहकार आईएफसी की सेवाएं ली गई हैं। साथ ही डेवलपर और निवेशकों के सुझाव भी सम्मिलित किये गए हैं। मुरैना सोलर पार्क में प्राप्त विद्युत् दर भविष्य की सौर ऊर्जा भण्डारण आधारित परियोजनाओं के लिए मानक होगी। परियोजना से प्रदेश में लगभग 4 हजार करोड़ रूपये का निवेश अपेक्षित है। इससे चंबल क्षेत्र का विकास होगा, साथ ही स्थानीय युवाओं के लिये रोज़गार के अवसर भी उपलब्ध होंगे। मुरैना में विश्व-स्तरीय सौर ऊर्जा भण्डारण परियोजना की स्थापना गर्व का विषय है। इस परियोजना से प्रदेश नवकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में एक और कीर्तिमान स्थापित करेगा। मुरैना परियोजना से सौर ऊर्जा केवल दिन में ही नहीं बल्कि सूर्यास्त के बाद भी प्रदाय की जाएगी।
नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री राकेश शुक्ला का कहना है कि मुरैना परियोजना राज्य सरकार की सकारात्मक सोच एवं प्रतिबद्धता का प्रमाण है। इस परियोजना और ऐसी अन्य आगामी परियोजनाओं से मध्यप्रदेश, देश ही नहीं बल्कि विश्व के लिए अक्षय ऊर्जा का एक रोल मॉडल होगा।
प्रदेश में नवकरणीय ऊर्जा के अधिक उपयोग एवं ऊर्जा सुरक्षा के लिए ऊर्जा भण्डारण आवश्यक है। प्रदेश में दिन के समय हरित एवं सस्ती सौर ऊर्जा उपलब्ध है, परन्तु शाम के पीक ऑवर्स में विद्युत् आपूर्ति कोयला आधारित और महंगी है। मुरैना सोलर पार्क और ऊर्जा भण्डारण, प्रदेश की पीक ऊर्जा आवश्यकताओं को सौर ऊर्जा से पूरा करने की दिशा में पहला कदम है। यह सोलर प्लस बैटरी आधारित परियोजना है, जिसके अंतर्गत शाम 6 से रात 10 बजे तथा सुबह 6 से 9 बजे तक मध्यप्रदेश पॉवर मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड (एमपीपीएमसीएल) की 440 मेगावॉट तक की पीक आवश्यकताएँ पूरी की जाएँगी। मुरैना का 600 मेगावॉट का सोलर पार्क शाम के पीक ऑवर्स में आपूर्ति के लिए दिन में बैटरी को चार्ज करेगा एवं रात के समय एमपीपीएमसीएल द्वारा सुबह के पीक ऑवर्स की आपूर्ति के लिए बैटरी चार्ज की जाएगी।
मध्यप्रदेश विद्युत उत्पादन में अग्रणी है। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2025 में नवकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में लगभग पौने 6 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव मिले। इन निवेशों से 1 लाख 85 हजार नए रोज़गार सृजित होंगे। प्रदेश सरकार का लक्ष्य वर्ष 2030 तक 50 प्रतिशत ऊर्जा, अक्षय स्रोतों से प्राप्त करना है। प्रदेश में 24 हजार 600 से अधिक मेगावॉट बिजली बनाने की वर्तमान में क्षमता मौजूद है। इसे चालू वर्ष 2 हजार मेगावॉट से अधिक बढ़ाने का लक्ष्य है। ओंकारेश्वर में देश की सबसे बड़ी-फ्लोटिंग सौर परियोजना के पहले चरण में 278 मेगावॉट बिजली बनने लगी है। आगर और नीमच में भी बड़े सौर प्लांट शुरू हुए हैं। मुरैना में 800 मेगावॉट की सोलर परियोजना विकसित की जा रही है, जिसमें 600 मेगावॉट की ऊर्जा भंडारण क्षमता भी होगी।
वायु रक्षा हथियार प्रणाली का पहला सफलतापूर्वक परीक्षण
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने एकीकृत वायु रक्षा हथियार प्रणाली (आईएडीडब्ल्यूएस) का पहला परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। यह परीक्षण 23 अगस्त, 2025 को लगभग 12:30 बजे ओडिशा के समुद्री तट पर किया गया। आईएडीडब्ल्यूएस एक बहुस्तरीय वायु रक्षा प्रणाली है, जिसमें सभी स्वदेशी त्वरित प्रतिक्रिया वाली सतह से हवा में मार करने में सक्षम मिसाइलें (क्यूआरएसएएम), उन्नत अति लघु दूरी वायु रक्षा प्रणाली (वीएसएचओआरएडीएस) मिसाइलें और एक उच्च शक्ति सहित लेजर आधारित निर्देशित ऊर्जा हथियार (डीईडब्ल्यू) शामिल हैं।
सभी हथियार प्रणाली घटकों को एकीकृत संचालन रक्षा अनुसंधान एवं विकास प्रयोगशाला द्वारा विकसित एक केंद्रीकृत कमान व नियंत्रण केंद्र द्वारा नियंत्रित किया जाता है, जो इस परीक्षण से जुड़े विकास कार्यक्रम की नोडल प्रयोगशाला है। वीएसएचओआरएडीएस को रिसर्च सेंटर इमारत और डीईडब्ल्यू को सेंटर फॉर हाई एनर्जी सिस्टम्स एंड साइंसेज द्वारा विकसित किया गया है।
उड़ान परीक्षणों के दौरान, दो उच्च गति वाले फिक्स्ड विंग मानवरहित हवाई लक्ष्यों और एक मल्टी-कॉप्टर ड्रोन सहित तीन अलग-अलग लक्ष्यों को एक साथ क्यूआरएसएएम, वीएसएचओआरएडीएस तथा उच्च ऊर्जा लेजर हथियार प्रणाली द्वारा अलग-अलग दूरी एवं ऊंचाई पर निशाना बनाकर पूरी तरह से नष्ट कर दिया गया। मिसाइल प्रणाली और ड्रोन का पता लगाने तथा विनाश प्रणाली, हथियार प्रणाली कमान एवं नियंत्रण के साथ-साथ संचार व रडार सहित सभी हथियार प्रणाली घटकों ने त्रुटिरहित प्रदर्शन किया, जिसकी पुष्टि उड़ान डेटा को कैप्चर करने के लिए एकीकृत परीक्षण रेंज, चांदीपुर द्वारा तैनात रेंज उपकरणों द्वारा की गई। इस परीक्षण का अवलोकन डीआरडीओ के वरिष्ठ वैज्ञानिकों और सशस्त्र बलों के प्रतिनिधियों ने किया।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आईएडीडब्ल्यूएस के सफल परीक्षण के लिए डीआरडीओ, सशस्त्र बलों और रक्षा उद्योग जगत को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि इस अनूठे उड़ान परीक्षण ने देश की बहुस्तरीय वायु रक्षा क्षमता को स्थापित किया है और यह दुश्मन के हवाई खतरों का मुकाबला करने के लिए क्षेत्रीय रक्षा घेरे को सशक्त बनाएगा।
रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव और डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ. समीर वी. कामत ने भी सफल उड़ान परीक्षणों में शामिल सभी टीमों को बधाई दी है।
अयोध्या के राजा का निधन : सीएम योगी ने जताया शोक, ‘मुखिया’ को दी श्रद्धांजलि
बता दें कि 5 फरवरी 2020 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा संसद सदन में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के गठन में विमलेंद्र मोहन मिश्र को स्थाई सदस्य के रूप में नामित किया गया था. उनके निधन पर ट्रस्ट के अन्य सदस्यों ने भी शोक व्यक्त किया है.
तेंदुए के शावक ने गौशाला में मचाया हड़कंप, वन विभाग ने किया रेस्क्यू, गांव में हाई अलर्ट
यह घटना एक बार फिर इंसान और वन्यजीवों के बीच बढ़ते टकराव की ओर इशारा करती है। वन विभाग अब इस मामले में आगे की कार्रवाई और शावक के संरक्षण पर काम कर रहा है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने टोक्यो के ‘लिटिल इंडिया’ पहुँचकर महात्मा गांधी को किया नमन
रायपुर। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज अपने जापान प्रवास के दौरान टोक्यो स्थित ‘लिटिल इंडिया’ पहुंचकर महात्मा गांधी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की और उन्हें नमन किया। मुख्यमंत्री साय ने इस अवसर पर कहा कि महात्मा गांधी जी का शांति, अहिंसा और सद्भाव का अमर संदेश भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे विश्व में मानवता के लिए प्रेरणास्त्रोत है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि ‘लिटिल इंडिया’ में गांधी जी की प्रतिमा भारत-जापान मैत्री और सांस्कृतिक जुड़ाव का प्रतीक है। यह स्थान न केवल भारतीय समुदाय के लिए गर्व का विषय है, बल्कि जापानी नागरिकों को भी भारत की महान परंपराओं और मूल्यों से जोड़ता है। मुख्यमंत्री साय के साथ इस अवसर पर प्रतिनिधिमंडल के सदस्यगण भी उपस्थित थे।
गंगा स्नान के लिए जा रहे 8 लोगों की मौत….4 की हालत गंभीर
पटना के ग्रामीण एसपी विक्रम सिहांग ने सड़क दुर्घटना में आठ लोगों की मौत की पुष्टि की है जबकि चार गंभीर रूप से घायल हैं। जिनका इलाज अस्पताल में चल रहा है। मृतकों में महिलाओं की संख्या ज्यादा है, सभी हिलसा नालंदा जिला के रहने वाले हैं।
आईएनएस तमाल ने ग्रीस की सौडा खाड़ी में बंदरगाह पर अपनी यात्रा पूरी की
देलही : भारतीय नौसेना का आधुनिकतम और उन्नत तकनीकों से लैस युद्धपोत आईएनएस तमाल भारत में अपने घरेलू बंदरगाह के लिए आने के मार्ग में 19-22 अगस्त, 2025 को ग्रीस के सौडा खाड़ी में रुका। बंदरगाह पर आगमन के दौरान भारतीय जहाज के चालक दल ने हेलेनिक नौसेना और नाटो अधिकारियों के साथ बातचीत की। इसमें 19 अगस्त, 2025 को सौडा खाड़ी नौसेना बेस पर कमांडर कमोडोर डायोनिसियोस मंतादाकिस, नाटो समुद्री अवरोधन परिचालन प्रशिक्षण केंद्र (एनएमआईओटीसी) के प्रमुख कैप्टन कोप्लाकिस इलियास और अमरीकी नौसेना के नौसेना सहायता गतिविधि के कमांडिंग ऑफिसर कैप्टन स्टीफन स्टीसी से कमांडिंग ऑफिसर की मुलाकात भी शामिल थी। बैठकों के दौरान चर्चा परिचालन संबंधी मामलों और समुद्री सहयोग पर केंद्रित रही। आईएनएस तमाल के चालक दल के लिए सौडा खाड़ी में इतालवी नौसेना के लैंडिंग हेलीकॉप्टर डॉक, बहु-भूमिका वाले हमले की इकाई आईटीएस ट्राइस्टे पर एक क्रॉस डेक दौरा आयोजित किया गया।
ग्रीस में भारत के राजदूत रुद्रेन्द्र टंडन ने 20 अगस्त, 2025 को जहाज का दौरा किया और चालक दल के साथ बातचीत की। चालक दल ने युद्धपोत के बंदरगाह प्रवास के दौरान, सौडा नौसेना बेस और आयुध सुविधा, एनएमआईओटीसी और स्थानीय समुद्री संग्रहालय का दौरा किया। जहाज के चालक दल ने क्रेते में द्वितीय विश्व युद्ध के कब्रिस्तान में श्रद्धांजलि अर्पित की।
आईएनएस तमाल 22 अगस्त, 2025 को सौडा खाड़ी से रवाना हुआ और उसने हेलेनिक नौसेना की रूसेन श्रेणी की गश्ती नौका एचएस रिटोस के साथ एक अभ्यास में भाग लिया, जिसका उद्देश्य नौसेनाओं के बीच आपसी सहभागिता को बढ़ावा देना था।
आईएनएस तमाल का बंदरगाह पर आगमन भारत द्वारा ग्रीस के साथ अपने संबंधों को दिए जाने वाले महत्व और दोनों देशों के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग को सशक्त करने के प्रयासों को दर्शाता है। इसने दोनों नौसेनाओं को सर्वोत्तम कार्य प्रणालियों को साझा करने और संयुक्त सहयोग के लिए आगे के अवसरों का लाभ उठाने का अवसर भी प्रदान किया है।
भारत में अपने घरेलू बंदरगाह पहुंचने के रास्ते में यह युद्धपोत एशिया के मित्र देशों के बंदरगाहों का दौरा करेगा, जिससे समुद्री कूटनीति को बढ़ावा मिलेगा और सभी क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों का विस्तार होगा।
ग्रीस में भारत के राजदूत रुद्रेन्द्र टंडन ने 20 अगस्त, 2025 को जहाज का दौरा किया और चालक दल के साथ बातचीत की। चालक दल ने युद्धपोत के बंदरगाह प्रवास के दौरान, सौडा नौसेना बेस और आयुध सुविधा, एनएमआईओटीसी और स्थानीय समुद्री संग्रहालय का दौरा किया। जहाज के चालक दल ने क्रेते में द्वितीय विश्व युद्ध के कब्रिस्तान में श्रद्धांजलि अर्पित की।
आईएनएस तमाल 22 अगस्त, 2025 को सौडा खाड़ी से रवाना हुआ और उसने हेलेनिक नौसेना की रूसेन श्रेणी की गश्ती नौका एचएस रिटोस के साथ एक अभ्यास में भाग लिया, जिसका उद्देश्य नौसेनाओं के बीच आपसी सहभागिता को बढ़ावा देना था।
आईएनएस तमाल का बंदरगाह पर आगमन भारत द्वारा ग्रीस के साथ अपने संबंधों को दिए जाने वाले महत्व और दोनों देशों के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग को सशक्त करने के प्रयासों को दर्शाता है। इसने दोनों नौसेनाओं को सर्वोत्तम कार्य प्रणालियों को साझा करने और संयुक्त सहयोग के लिए आगे के अवसरों का लाभ उठाने का अवसर भी प्रदान किया है।
भारत में अपने घरेलू बंदरगाह पहुंचने के रास्ते में यह युद्धपोत एशिया के मित्र देशों के बंदरगाहों का दौरा करेगा, जिससे समुद्री कूटनीति को बढ़ावा मिलेगा और सभी क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों का विस्तार होगा।
"स्वास्थ्य कोई सीमा नहीं जानता; सहयोग लचीला चिकित्सा उपकरण पारिस्थितिकी तंत्र की कुंजी है ": अमित अग्रवाल,
देलही : अमित अग्रवाल, सचिव, फार्मास्युटिकल्स विभाग ने कल “मेडिकल-टेक नवाचारों के लिए अंतर-क्षेत्रीय नेटवर्किंग का लाभ उठाना” सत्र की अध्यक्षता की। यह दो दिवसीय दक्षिण पूर्व और दक्षिण एशिया क्षेत्रीय बैठक “सार्वजनिक स्वास्थ्य में स्वास्थ्य अनुसंधान और नवाचार: रिसर्च प्लेटफॉर्म पर अच्छे प्रथाओं का आदान-प्रदान” के हिस्से के रूप में स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग और भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) द्वारा सुषमा स्वराज भवन, नई दिल्ली में आयोजित किया गया था। सत्र में भारत, नेपाल, श्रीलंका, भूटान और तिमोर-लेस्ते की सरकारों और सार्वजनिक स्वास्थ्य एजेंसियों के वरिष्ठ स्वास्थ्य पदाधिकारियों ने स्वास्थ्य अनुसंधान प्रणालियों को मजबूत करने, अच्छे प्रथाओं के आदान-प्रदान की सुविधा और दक्षिण और दक्षिण पूर्व एशिया में सीमा पार सहयोग को बढ़ावा देने पर विचार-विमर्श किया। बैठक दक्षिण और दक्षिण पूर्व एशिया स्वास्थ्य अनुसंधान (रिसर्च) प्लेटफॉर्म के लिए क्षेत्रीय प्रवर्तक का हिस्सा है
सत्र को संबोधित करते हुए, औषधि विभाग के सचिव, अमित अग्रवाल ने इस बात पर ज़ोर दिया कि "स्वास्थ्य की कोई सीमा नहीं होती"। उन्होंने कहा कि कोविड-19 महामारी ने लचीली और मज़बूत स्वास्थ्य सेवा प्रणालियाँ बनाने के लिए, सीमाओं के पार, विभिन्न क्षेत्रों के बीच, सरकारी विभागों और सार्वजनिक स्वास्थ्य एजेंसियों के बीच सहयोग की महत्वपूर्ण आवश्यकता को दर्शाया है।
अग्रवाल ने केवल तकनीक और कुशल जनशक्ति के माध्यम से, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं की स्थापना, वैश्विक रूप से सुसंगत मानकों को अपनाने और नवीन उपकरणों के लिए नैदानिक जांच को समर्थन देकर, चिकित्सा उपकरण क्षेत्र के पारिस्थितिकी तंत्र को मज़बूत करने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया ताकि बड़े पैमाने पर अर्थव्यवस्थाएँ हासिल की जा सकें और राष्ट्रीय सीमाओं से परे भी मांग को बढ़ाया जा सके। भारत में चिकित्सा उपकरण पार्कों के निरंतर विकास और आईसीएमआर की मेडटेक मित्र और पेटेंट मित्र पहलों, नैदानिक परीक्षण सहायता योजनाओं और मज़बूत अनुसंधान प्लेटफार्मों के साथ, भारत व्यवस्थित रूप से एक महत्वपूर्ण मेडटेक नवाचार केंद्र के रूप में उभरने की नींव रख रहा है।
सचिव ने कुशल मानव पूंजी के विकास में राष्ट्रीय औषधि शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (एनआईपीईआर) के योगदान पर भी प्रकाश डाला। चिकित्सा उपकरणों पर विशेष पाठ्यक्रम अब सात एनआईपीईआर में चलाए जा रहे हैं, और इन्हें विदेशी नागरिकों के लिए भी खोल दिया गया है।
अग्रवाल ने कहा कि डिजिटलीकरण के माध्यम से चिकित्सा प्रौद्योगिकियाँ अस्पतालों से घरों तक पहुँचेंगी, जिससे स्वास्थ्य सेवा अधिक सुलभ और सस्ती हो जाएगी। उन्होंने औषधि विभाग द्वारा विकसित "अकादमिक से उद्योग: डिस्कवरी मार्केटप्लेस" प्लेटफ़ॉर्म के महत्व पर भी प्रकाश डाला, जिसका उद्देश्य उद्योग, स्टार्टअप्स, शैक्षणिक और अनुसंधान संस्थानों और फार्मा-मेडटेक क्षेत्र के अन्य हितधारकों को नवीन उत्पादों के लिए साझेदारी, सहयोग और गठजोड़ के लिए जोड़ने में सक्षम बनाना और वाणिज्यिक और सार्वजनिक हित दोनों के लिए सफलताओं को बढ़ावा देना है।
अग्रवाल ने दक्षिण पूर्व और दक्षिण एशियाई क्षेत्र को मेडटेक नवाचारों के लिए एक वैश्विक शक्ति केंद्र बनाने में अनुसंधान मंच के महत्व पर बल देते हुए सत्र का समापन किया।
राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री के वीडियो संदेश का मूल पाठ
देलही : केंद्रीय कैबिनेट के साथी, इसरो और स्पेस सेक्टर के सभी वैज्ञानिक एवं इंजीनियर्स, और मेरे प्यारे देशवासियों!
आप सभी को नेशनल स्पेस डे की बहुत-बहुत शुभकामनाएं। इस बार Space Day की थीम है-आर्यभट्ट से गगनयान तक! इसमें अतीत का आत्मविश्वास भी है, और भविष्य का संकल्प भी है। आज हम देख रहे हैं, इतने कम समय में ही, नेशनल स्पेस डे हमारे युवाओं में उत्साह और आकर्षण का अवसर बन गया है। ये देश के लिए गर्व की बात है। मैं स्पेस सेक्टर से जुड़े सभी लोगों को, वैज्ञानिकों को, सभी युवाओं को नेशनल स्पेस डे की बहुत-बहुत बधाई देता हूँ। अभी भारत ने International Olympiad on Astronomy and Astrophysics, उसकी मेज़बानी भी की है। इस competition में दुनिया के साठ से ज्यादा देशों से लगभग 300 युवाओं ने हिस्सा लिया। भारत के युवाओं ने मेडल भी जीते, ये Olympiad स्पेस सेक्टर में भारत की उभरती लीडरशिप का प्रतीक है।
मुझे ख़ुशी है कि युवा साथियों में स्पेस के प्रति रूचि बढ़ाने के लिए, ISRO द्वारा भारतीय अंतरिक्ष हैकाथोन और Robotics Challenge जैसी पहल भी की गई है। मैं इन प्रतिस्पर्धाओं में हिस्सा लेने वाले स्टूडेंट्स और विजेताओं को बहुत-बहुत बधाई देता हूँ।
स्पेस सेक्टर में एक के बाद एक नए माइल स्टोन गढ़ना, ये भारत और भारत के वैज्ञानिकों का स्वभाव बन गया है। दो साल पहले ही भारत पहला ऐसा देश बना था, जिसने चंद्रमा के साउथ पोल पर पहुंचने का इतिहास रचा। हम स्पेस में docking-undocking की क्षमता रखने वाले दुनिया के चौथे देश भी बन गए हैं। अभी तीन दिन पहले ही मेरी ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला से मुलाकात हुई है। उन्होंने इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर तिरंगा फहराकर हर भारतीय को गर्व से भर दिया। जब वो तिरंगा मुझे दिखा रहे थे, वो जो पल थी, वो जो अनुभूति थी, वो शब्दों से परे है। ग्रुप कैप्टन शुभांशु से हुई चर्चा में मैंने नए भारत के युवा के असीम हौसले और अनंत सपनों को देखा है। इन सपनों को आगे बढ़ाने के लिए हम भारत का “Astronaut Pool” भी तैयार करने जा रहे हैं। मैं आज स्पेस डे पर अपने युवा साथियों को भारत के सपनों को उड़ान देने के लिए, इस Astronaut Pool से जुड़ने के लिए आमंत्रित करता हूँ।
आज भारत semi-cryogenic engine और electric propulsion जैसी breakthrough technology में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। जल्द ही, आप सब वैज्ञानिकों की मेहनत से, भारत गगनयान की उड़ान भी भरेगा, और आने वाले समय में भारत अपना स्पेस स्टेशन भी बनाएगा। अभी हम मून और मार्स तक पहुंचे हैं। अब हमें गहरे अन्तरिक्ष में उन हिस्सों में भी झांकना है, जहां मानवता के भविष्य के लिए कई जरूरी रहस्य छिपे हैं! Beyond galaxies lies our horizon!!!
अनंत अन्तरिक्ष हमें हमेशा ये एहसास दिलाता है कि वहां कोई भी पड़ाव अंतिम पड़ाव नहीं है। मैं मानता हूं, स्पेस सेक्टर में, पॉलिसी लेवेल पर भी, कहीं कोई आखिरी ठहराव नहीं होना चाहिए। और इसीलिए, मैंने लालकिले से कहा था, हमारा रास्ता Reform, Perform और Transform का रास्ता है। इसलिए बीते 11 वर्षों में देश ने स्पेस सेक्टर में एक के बाद एक लगातार बड़े reforms किए हैं। एक समय था, जब स्पेस जैसे futuristic सेक्टर को देश में अनेक पाबंदियों से बांध दिया गया था। हमने इन बेड़ियों को खोला। हमने प्राइवेट सेक्टर को स्पेस-टेक में परमीशन दी। और आज देखिए, देश में 350 से ज्यादा स्टार्टअप्स स्पेस-टेक में innovation और acceleration का इंजन बनकर उभर रहे हैं। इस कार्यक्रम में भी उनकी बढ़-चढ़कर के उपस्थिति दिख रही है। हमारे प्राइवेट सेक्टर द्वारा बनाया गया पहला PSLV रॉकेट भी जल्द ही लॉन्च किया जाएगा। मुझे खुशी है कि भारत की पहली private communication satellite भी बनाई जा रही है। Public Private Partnership के जरिए Earth Observation Satellite Constellation भी लॉन्च करने की तैयारी है। आप कल्पना कर सकते हैं, स्पेस सेक्टर में भारत के युवाओं के लिए बहुत बड़ी संख्या में अवसर बनने जा रहे हैं।
मैंने 15 अगस्त को लाल किले से ऐसे अनेक क्षेत्रों का जिक्र किया था, जिसमें भारत को आत्मनिर्भर होना बहुत जरूरी है। मैंने हर सेक्टर को अपने लक्ष्य तय करने को कहा है। आज स्पेस डे के दिन, मैं देश के स्पेस स्टार्टअप्स से कहूंगा, क्या हम स्पेस सेक्टर में अगले पांच वर्षों में पांच यूनिकॉर्न खड़े कर सकते हैं? अभी हम भारत की धरती से साल में 5-6 बड़े लॉन्च देखते हैं। मैं चाहूंगा कि प्राइवेट सेक्टर आगे आए और अगले 5 साल में हम उस स्थिति में पहुंचे की हर साल पचास रॉकेट लॉन्च कर पाएं। हर सप्ताह एक, इसके लिए देश को जिन next gen reforms की जरूरत है, वो करने का सरकार का इरादा भी है और इच्छाशक्ति भी है। मैं आपको विश्वास दिलाता हूँ, सरकार हर कदम पर आपके साथ खड़ी है।
भारत, स्पेस टेक्नोलॉजी को scientific exploration के साथ ही Ease of Living का भी माध्यम मानता है। आज स्पेस-टेक भारत में गवर्नेंस का भी हिस्सा बन रही है। फसल बीमा योजना में satellite based आकलन हो, मछुआरों को satellite से मिल रही जानकारी और सुरक्षा हो, Disaster management हो या PM Gati Shakti National Master Plan में geospatial data का इस्तेमाल हो, आज स्पेस में भारत की प्रगति सामान्य नागरिकों का जीवन आसान बना रही है। इसी दिशा में, केंद्र और राज्यों में स्पेस-टेक का इस्तेमाल बढ़ाने के लिए कल National Meet 2.0 का आयोजन भी हुआ है। मैं चाहूँगा, ऐसे प्रयास आगे भी चलते रहें। हमारे स्पेस स्टार्टअप्स भी नागरिकों की सेवा के लिए नए solutions दें, नए इनोवेशन्स करें। मुझे विश्वास है, आने वाले समय में अन्तरिक्ष में भारत की यात्रा नई ऊंचाइयों को छुएगी। इसी विश्वास के साथ, आप सभी को एक बार फिर नेशनल स्पेस डे की बहुत-बहुत बधाई। धन्यवाद!
57वीं युवा संसद प्रतियोगिताः उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थी और विद्यालय पुरस्कृत
नईदिल्ली। शिक्षा निदेशालय, दिल्ली सरकार और एनडीएमसी के अंतर्गत आने वाले स्कूलों के लिए 57वीं युवा संसद प्रतियोगिता, 2024-25 का पुरस्कार वितरण समारोह आज (शुक्रवार, 22 अगस्त, 2025) जीएमसी बालयोगी सभागार, संसद पुस्तकालय भवन, संसद भवन परिसर, नई दिल्ली में आयोजित किया गया। केन्द्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा संसदीय कार्य राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने समारोह की अध्यक्षता की तथा प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों एवं विद्यालयों को पुरस्कार वितरित किए।
कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री ने छात्रों के साथ एक संवाद सत्र का आयोजन किया। उन्होंने छात्रों से बातचीत करते हुए आह्वान किया कि युवा पीढ़ी को लोकतांत्रिक मूल्यों और नैतिकता को सीखना और अपनाना चाहिए तथा दुनिया के इस सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश की सद्भावना और परंपरा को बढ़ावा देने के लिए खुद को समर्पित करना चाहिए। उन्होंने समारोह में उपस्थित सभी लोगों को पर्यावरण संरक्षण के लिए स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की शपथ भी दिलाई।
संसदीय कार्य मंत्रालय के अपर सचिव डॉ. सत्य प्रकाश ने अपने स्वागत भाषण में विद्यार्थियों से युवा संसद कार्यक्रम को सक्रिय रूप से बढ़ावा देने तथा अपने दैनिक जीवन में लोकतंत्र के मूल्यों को आत्मसात करने का आग्रह किया। संसदीय कार्य मंत्रालय के सचिव श्री निकुंज बिहारी धल ने सभा को संबोधित किया और छात्र समुदाय को लोकतांत्रिक परंपराओं और संसदीय प्रथाओं से परिचित कराने के महत्व पर बल दिया।
57वीं युवा संसद प्रतियोगिता (2024-25) के विजेता, सर्वोदय कन्या विद्यालय नंबर 1, सी-ब्लॉक, यमुना विहार, दिल्ली ने इस अवसर पर अपनी "युवा संसद" बैठक का पुनः प्रदर्शन किया। संसदीय कार्य मंत्रालय पिछले 59 वर्षों से राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली के स्कूलों के लिए युवा संसद प्रतियोगिताओं का आयोजन करता आ रहा है। शिक्षा निदेशालय, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार और नई दिल्ली नगर निगम के अंतर्गत आने वाले स्कूलों के लिए युवा संसद प्रतियोगिता कार्यक्रम के अंतर्गत, इस श्रृंखला की 57वीं प्रतियोगिता 2024-25 के दौरान राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में आयोजित की गई।
युवा संसद कार्यक्रम का उद्देश्य युवा पीढ़ी में आत्म-अनुशासन, विविध विचारों के प्रति सहिष्णुता, विचारों की उचित अभिव्यक्ति और लोकतांत्रिक जीवन शैली के अन्य गुणों का संचार करना है। इसके अलावा, यह कार्यक्रम छात्रों को संसद की कार्यप्रणाली, चर्चा और वाद-विवाद की तकनीकों से भी परिचित कराता है और उनमें आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और प्रभावी भाषण कला का विकास करता है। प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त करने के लिए “जीवी मावलंकर रनिंग पार्लियामेंट्री शील्ड” और ट्रॉफी सर्वोदय कन्या विद्यालय नंबर 1, सी-ब्लॉक, यमुना विहार, दिल्ली को प्रदान की गई।
ऑनलाइन गेमिंग विधेयक बना कानून, राष्ट्रपति ने दी मंजूरी, रियल मनी गेम्स की 400 कंपनिया स्वाहा!
डेस्क। देश में ऑनलाइन गेमिंग को लेकर एक बड़ा बदलाव हुआ है। लोकसभा और राज्यसभा से पारित होने के बाद अब राष्ट्रपति ने ऑनलाइन गेमिंग बिल को मंजूरी दे दी है। यह अब एक आधिकारिक कानून बन गया है।
नए कानून का उद्देश्य ई-स्पोर्ट्स और सोशल गेम्स को बढ़ावा देना है, लेकिन इसके साथ ही रियल मनी गेम्स (real money games) पर सख्त प्रतिबंध लगाया गया है। यानी अब ऐसे ऑनलाइन गेम्स, जहां पैसे लगाकर पैसा कमाने का लालच दिया जाता है, उन्हें पूरी तरह बंद किया जाएगा। पूर्ण प्रतिबंध से 400 से अधिक कंपनियां बंद हो जाएंगी।
इस कानून का असर गेमिंग इंडस्ट्री पर साफ तौर पर दिखाई देने लगा है, खासकर उन कंपनियों पर जो रियल मनी गेम्स के जरिए मुनाफा कमा रही थीं। आंकड़ों के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2024 में रियल मनी गेम्स से 2.4 बिलियन डॉलर की कमाई हुई थी, जो पूरे गेमिंग सेक्टर की कुल 3.8 बिलियन डॉलर की कमाई का बड़ा हिस्सा थी।
बुधवार को यह बिल लोकसभा में और गुरुवार को राज्यसभा में पेश किया गया था, जहां दोनों सदनों से इसे मंजूरी मिल गई। अब राष्ट्रपति की स्वीकृति मिलने के बाद इस पर कानूनन अमल शुरू हो गया है।
नए नियमों के तहत अगर कोई कंपनी या व्यक्ति इस कानून का उल्लंघन करता है, तो उसे तीन साल तक की जेल या एक करोड़ रुपये तक का जुर्माना भुगतना पड़ सकता है। सरकार का मानना है कि इससे युवाओं को जुए जैसी लत से बचाया जा सकेगा और गेमिंग सेक्टर में एक सकारात्मक और सुरक्षित माहौल तैयार किया जा सकेगा।
फास्टैग वार्षिक पास योजना... तीन हजार में मिलेगा वार्षिक पास.. जानिए क्या बोले नितीन गडकरी
नईदिल्ली। सरकार ने 17 जून, 2025 को प्रकाशित राजपत्र संशोधन अधिसूचना संख्या जीएसआर 388 (ई) के माध्यम से राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क (दरों और संग्रह का निर्धारण) नियम, 2008 में संशोधन किया है। संशोधन में सभी गैर-व्यावसायिक कार, जीप और वैन के लिए एक फास्टैग वार्षिक पास पेश किया, जो 15 अगस्त, 2025 से प्रभावी हो गया है। वार्षिक पास योजना 3000/- रुपये के शुल्क के भुगतान पर सभी राष्ट्रीय राजमार्ग/राष्ट्रीय एक्सप्रेस वे शुल्क प्लाजा पर एक वर्ष के लिए या 200 शुल्क प्लाजा क्रॉसिंग तक जो भी पहले हो, यात्रा की सुविधा प्रदान करेगी। एक बंद उपयोगकर्ता शुल्क संग्रह प्रणाली में, शुल्क प्लाजा के माध्यम से वाहन का प्रवेश और निकास एक ही क्रॉसिंग माना जाएगा। वार्षिक पास योजना का उद्देश्य गैर-व्यावसायिक वाहन (कार/जीप/वैन) उपयोगकर्ताओं पर फास्टैग और उपयोगकर्ता शुल्क के बोझ को कम करना है।
वार्षिक पास राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच) और राष्ट्रीय एक्सप्रेसवे (एनई) शुल्क प्लाज़ा पर लागू है। हालांकि वार्षिक पास वर्तमान में राज्य राजमार्गों और एक्सप्रेसवे पर लागू नहीं है, फिर भी यदि राज्य सरकार राज्य राजमार्गों/एक्सप्रेसवे के लिए ऐसी पास प्रणाली शुरू करने को इच्छुक है, तो इस उद्देश्य के लिए पूर्ण तकनीकी सहायता प्रदान की जाएगी। मंत्रालय ने राष्ट्रीय राजमार्गों के शुल्क प्लाजा पर उपयोगकर्ता शुल्क में कमी लाने के लिए निम्नलिखित उपाय शुरू किए हैं:
गैर-वाणिज्यिक कार/जीप/वैन के लिए फास्टैग आधारित वार्षिक पास योजना 15 अगस्त, 2025 से प्रभावी हो गई है, जैसा कि राजपत्र अधिसूचना संख्या जीएसआर 388 (ई) दिनांक 17 जून 2025 में अधिसूचित किया गया है। यह योजना 3000/- रुपये (तीन हजार रुपये) के भुगतान पर 200 राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क प्लाजा क्रॉसिंग या एक वर्ष की वैधता, जो भी पहले हो, प्रदान करती है।
मंत्रालय ने राजपत्र अधिसूचना संख्या जीएसआर 437 (ई) दिनांक 1 जुलाई, 2025 के तहत राष्ट्रीय राजमार्ग के एक खंड के उपयोग के लिए शुल्क की दर को युक्तिसंगत बनाया है, जिसकी गणना संरचना या संरचनाओं की लंबाई को छोड़कर राष्ट्रीय राजमार्ग के खंड की लंबाई में संरचना या संरचनाओं की लंबाई का दस गुना जोड़कर या राष्ट्रीय राजमार्ग के खंड की कुल लंबाई का पांच गुना, जो भी कम हो, जोड़कर की जाएगी। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री श्री नितिन गडकरी ने राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।