देश-विदेश
प्रधानमंत्री के आह्वान पर आयुष लैब्स ने खोले दरवाजे : 'एक वैज्ञानिक के रूप में एक दिन'
पहल के तहत युवाओं ने विज्ञान और नवाचार की दुनिया में कदम रखा
नई दिल्ली | प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अपने मन की बात संबोधन के दौरान किए गए आह्वान के जवाब में, आयुष मंत्रालय के तहत संस्थानों ने युवा विद्यार्थियों को 'वैज्ञानिक के रूप में एक दिन' पहल में सक्रिय रूप से शामिल किया है। इस कार्यक्रम ने इच्छुक युवाओं को वैज्ञानिक अनुसंधान में गहन अनुभव प्रदान किया है, उन्हें प्रयोगशाला के काम, उन्नत उपकरणों और आधुनिक वैज्ञानिक प्रगति के साथ पारंपरिक चिकित्सा के एकीकरण का प्रत्यक्ष अनुभव प्रदान किया है।

प्रधानमंत्री ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम के माध्यम से राष्ट्र को संबोधित करते हुए, विद्यार्थियों को अपनी जिज्ञासा बढ़ाने और वैज्ञानिक स्वभाव को बढ़ावा देने के लिए अनुसंधान प्रयोगशालाओं, तारामंडल, अंतरिक्ष केंद्रों और विज्ञान संस्थानों का दौरा करने के लिए प्रोत्साहित किया। इस दृष्टिकोण से प्रेरित होकर, आयुष संस्थानों ने अपनी अनुसंधान सुविधाओं में विद्यार्थियों का स्वागत किया, जिससे उन्हें वैज्ञानिकों के साथ बातचीत करने, अत्याधुनिक तकनीक का पता लगाने और मुख्यधारा की स्वास्थ्य देखभाल में आयुष प्रणालियों की विशाल क्षमता को समझने का मौका मिला।
इस पहल के हिस्से के रूप में, एमिटी विश्वविद्यालय, जयपुर के विद्यार्थियों ने 19 फरवरी, 2025 को राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान (मानित विश्वविद्यालय), जयपुर का दौरा किया। प्रो. सीआर यादव (डीन रिसर्च और एचओडी), डॉ. महेंद्र प्रसाद, डॉ. सारिका यादव, डॉ. भानु प्रताप सिंह और डॉ. रश्मी प्रकाश गुराओ के मार्गदर्शन में, विद्यार्थियों ने श्वसन प्रणाली पर विशेष ध्यान देने के साथ क्रिया शरीर विभाग के उन्नत उपकरण और मशीनरी का पता लगाया। उन्हें बॉडी प्लेथीस्मोग्राफ, सीपीईटी और 3डी वीआर लैब जैसे अत्याधुनिक उपकरणों की कार्यप्रणाली देखने का अवसर मिला। विद्यार्थियों ने स्वास्थ्य देखभाल अनुसंधान को आगे बढ़ाने में इसकी क्षमता को पहचानते हुए नवीन प्रौद्योगिकी में गहरी रुचि व्यक्त की।
इसी तरह, 28 फरवरी, 2025 को डॉ. गुरुराजू सरकारी होम्योपैथी मेडिकल कॉलेज, गुडीवाड़ा के विद्यार्थियों ने राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के उपलक्ष्य में केंद्रीय होम्योपैथी अनुसंधान परिषद (सीसीआरएच) के तहत क्षेत्रीय अनुसंधान संस्थान (एच), गुडीवाड़ा की अनुसंधान प्रयोगशाला का दौरा किया। प्रयोगशाला कर्मचारियों ने विद्यार्थियों को होम्योपैथी में उपयोग किए जाने वाले प्रयोगशाला उपकरणों और अनुसंधान विधियों का विस्तृत प्रदर्शन प्रदान किया। सत्र की अध्यक्षता डॉ. किशन बनोथ, एडी (एच) प्रभारी, आरआरआई (एच), गुडीवाड़ा ने की, जिन्होंने पारंपरिक चिकित्सा में वैज्ञानिक जांच के महत्व पर जोर दिया।
कैप्टन जयलाल एकेडमिक स्कूल, लोहाट, गुरुग्राम, बादली, झज्जर, हरियाणा के विद्यार्थियों ने आयुष अनुसंधान में व्यावहारिक और गहन अनुभव के लिए केंद्रीय योग और प्राकृतिक चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (सीआरआईवाईएन), झज्जर का दौरा किया। इस यात्रा ने युवाओं को योग और प्राकृतिक चिकित्सा के वैज्ञानिक सिद्धांतों का पता लगाने, शोधकर्ताओं के साथ बातचीत करने और आधुनिक वैज्ञानिक पद्धतियों के माध्यम से पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों का अध्ययन कैसे किया जा रहा है, यह प्रत्यक्ष रूप से देखने का अनूठा अवसर रहा।
राष्ट्रीय विज्ञान दिवस 2025 की थीम, 'विकसित भारत के लिए विज्ञान और नवाचार में वैश्विक नेतृत्व के लिए भारतीय युवाओं को सशक्त बनाना', इस पहल की भावना से पूरी तरह मेल खाती है। इन यात्राओं ने न केवल विद्यार्थियों में शोध के प्रति जुनून जगाया बल्कि विज्ञान और नवाचार में भविष्य के नेताओं को विकसित करने के भारत के दृष्टिकोण को भी मजबूत किया।
इन दौरों में भाग लेने वाले विद्यार्थियों ने इस अवसर के लिए उत्साह और सराहना व्यक्त की। कई लोग आयुष क्षेत्र में काम कर रहे वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं के समर्पण से प्रेरित हुए और उन्होंने पारंपरिक चिकित्सा अनुसंधान में करियर तलाशने की इच्छा व्यक्त की। संकाय सदस्यों और संस्थागत प्रतिनिधियों ने भी इस पहल की सराहना की, यह देखते हुए कि कैसे इस तरह की बातचीत छात्रों को स्वास्थ्य देखभाल और नवाचार में वैज्ञानिक प्रक्रियाओं और कैरियर मार्गों की गहरी समझ प्रदान करती है।
इन यात्राओं को सुविधाजनक बनाकर, आयुष मंत्रालय ने युवाओं में वैज्ञानिक स्वभाव और जिज्ञासा को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता को मजबूत किया है। सकारात्मक प्रतिक्रिया से प्रोत्साहित होकर, मंत्रालय पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक वैज्ञानिक अन्वेषण के बीच अंतर को पाटते हुए इसी तरह की पहल का विस्तार करने के लिए तत्पर है।
एमआईटी के प्रोफेसर जोनाथन फ्लेमिंग ने महिला सशक्तिकरण में भारत सरकार के प्रयासों और उल्लेखनीय उपलब्धियों की सराहना की
फ्लेमिंग ने आईसीएआर, पूसा परिसर में नमो ड्रोन दीदियों के साथ बातचीत की
नमो ड्रोन दीदियों ने ड्रोन तकनीक का उपयोग कर क्षेत्र में इसका लाइव प्रदर्शन किया
नई दिल्ली | प्रोफेसर जोनाथन फ्लेमिंग, एमआईटी स्लोअन स्कूल ऑफ मैनेजमेंट, अमेरिका के वरिष्ठ व्याख्याता ने महिला सशक्तिकरण में भारत सरकार के प्रयासों और उल्लेखनीय उपलब्धियों की सराहना की है। नई दिल्ली में आईसीएआर पूसा परिसर में नमो ड्रोन दीदियों के साथ बातचीत करते हुए, फ्लेमिंग ने कहा कि वह यह देखकर बहुत उत्साहित हैं कि भारत किस प्रकार से महिला सशक्तिकरण के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग कर रहा है और ऐसा पहल न केवल भारत के ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं के लिए, बल्कि अन्य देशों के लिए भी प्रेरणादायक है और वे इस अवधारणा से सीख सकते हैं। प्रोफेसर फ्लेमिंग नवीनतम प्रौद्योगिकी के उपयोग द्वारा महिलाओं को मिल रहे प्रशिक्षण एवं लाभ प्रक्रिया से बहुत प्रभावित हुए।

ड्रोन दीदियों ने प्रोफेसर फ्लेमिंग को भारत सरकार के प्रयासों के बारे में जानकारी दी कि किस प्रकार से उन्हें ड्रोन तकनीक का उपयोग करने और ड्रोन दीदियां बनने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है। प्रोफेसर फ्लेमिंग के साथ बातचीत करते हुए, ड्रोन दीदियों ने बताया कि ड्रोन का उपयोग कैसे उन्हें सघन फसलों में उर्वरक एवं कीटनाशक छिड़कने में सहायता प्रदान करता है, जहां मैनुअल छिड़काव करना एक बहुत बड़ी चुनौती है। उन्होंने यह भी बताया कि वे ड्रोन दीदी कहलाने में गर्वान्वित महसूस करती हैं और इससे उनकी वित्तीय स्थिति में भी बहुत सुधार हुआ है। ड्रोन दीदियों ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एक महान दूरदर्शी व्यक्ति हैं और वह उनके लिए एक महान योजना लेकर आए हैं।
प्रोफेसर जोनाथन ने आईआरएआई के ड्रोन रोबोटिक और मशीन लर्निंग केंद्र का भी दौरा किया, जहां उन्होंने संस्थान द्वारा विकसित विभिन्न प्रकार के ड्रोनों का अवलोकन किया जहां उन्हें बताया गया कि वे तकनीक का उपयोग कर किस प्रकार से पारंपरिक कृषि में बदलाव ला रहे हैं। डॉ. रवि साहू, प्रधान वैज्ञानिक, कृषि भौतिकी विभाग, आईआरएआई, नई दिल्ली ने प्रोफेसर जोनाथन को भारत की ड्रोन यात्रा के बारे में संक्षिप्त जानकारी प्रदान की और बताया कि भारत कैसे स्वदेशी ज्ञान एवं आधुनिक प्रौद्योगिकी को कृषि क्षेत्र में सुधार के लिए एकीकृत कर रहा है, जो भारतीय अर्थव्यवस्था और सामाजिक प्रणाली का आधार है। प्रोफेसर जोनाथन ने इस तकनीकी विकास में बहुत दिलचस्पी व्यक्त की और कहा कि भारत न केवल वर्तमान कृषि प्रणाली में परिवर्तन ला रहा है बल्कि भविष्य में भी निवेश कर रहा है।
रमन वाधवा, उप निदेशक, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ने आगंतुक प्रोफेसर को नमो ड्रोन दीदी योजना के बारे में जानकारी प्रदान की। चार नमो दीदियों अर्थात् गीता, सीता, प्रियंका और हेमलता ने अमेरिकी प्रोफेसर के समक्ष आईएआरआई परिसर के खेतों में ड्रोन द्वारा छिड़काव का लाइव प्रदर्शन किया।
बाद में मीडिया से बात करते हुए, प्रोफेसर जोनाथन फ्लेमिंग ने कहा कि अमेरिका में ड्रोन प्रोत्साहन योजना के लाभार्थी 100 प्रतिशत पुरुष हैं, जबकि भारत में यह पूरी तरह से विपरीत है क्योंकि सभी लाभार्थी महिलाएं हैं, जो यह दर्शाता है कि भारत प्रौद्योगिकी का उपयोग महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए किस प्रकार से कर रहा है। उन्होंने कहा कि “मैं भारत में प्राप्त अपने अद्भुत अनुभवों के साथ अपनी सरकार के लिए बहुत सारे सकारात्मक संदेश लेकर अपने देश वापस जा रहा हूं।”
इस अवसर पर डॉ. राजीव रंजन, वरिष्ठ वैज्ञानिक, कृषि भौतिकी प्रभाग, आईएआरआई, नई दिल्ली और उनकी वैज्ञानिकों की टीम; एसबी पवार, कृषि मंत्रालय; विभू और अरविंद, एनआरएलएम; इफको के अधिकारी, हरियाणा और उत्तर प्रदेश राज्य आजीविका मिशन के अधिकारी भी उपस्थित हुए।
मोबाइल वर्ल्ड कांग्रेस 2025 में वैश्विक मंच पर भारत की प्रगति का प्रतिनिधित्व करेंगे ज्योतिरादित्य सिंधिया
रायपुर। केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, 3-6 मार्च, 2025 को स्पेन के बार्सिलोना में आयोजित होने वाले प्रतिष्ठित मोबाइल वर्ल्ड कांग्रेस (एमडब्ल्यूसी) 2025 में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। यह विश्व के सबसे बड़े और प्रभावशाली प्रौद्योगिकी और दूरसंचार कार्यक्रमों में से एक है। सिंधिया मोबाइल वर्ल्ड कांग्रेस (एमडब्ल्यूसी) में इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2025 के उद्घाटन समारोह का भी अनावरण करेंगे और ‘भारत पैवेलियन’ का उद्घाटन करेंगे।
इंडिया मोबाइल कांग्रेस एक ऐसा मंच है जो भारत के नवाचार पारिस्थितिकी सिस्टम को उजागर करता है। इस मंच के माध्यम से अग्रणी दूरसंचार कंपनियां एवं इनोवेटर्स अपनी अत्याधुनिक प्रगति और स्थायी समाधानों का प्रदर्शन करते हैं। भारत पैवेलियन में 38 भारतीय दूरसंचार उपकरण निर्माता अपने अत्याधुनिक उत्पादों, हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर दोनों का प्रदर्शन करेंगे।
इस कार्यक्रम में ज्योतिरादित्य सिंधिया की भागीदारी डिजिटल और मोबाइल पारिस्थितिकी व्यवस्था में वैश्विक प्रमुख के रूप में भारत की बढ़ती भूमिका को रेखांकित करती है। उनकी उपस्थिति डिजिटल परिवर्तन, नवाचार और संचार और प्रौद्योगिकी में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देने के लिए भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाएगी।
अपनी यात्रा के दौरान, संचार मंत्री 5जी, एआई (कृत्रिम बुद्धिमत्ता), 6जी, क्वांटम और अगली पीढ़ी की मोबाइल प्रौद्योगिकियों में अत्याधुनिक विकास का पता लगाने के लिए वैश्विक उद्योग प्रमुखों, नीति निर्माताओं और नवप्रवर्तकों के साथ जुड़ेंगे। यह कार्यक्रम मोबाइल उद्योग को आकार देने वाले प्रमुख रुझानों पर चर्चा करने के लिए एक मंच के रूप में कार्य करेगा और भारत की डिजिटल महत्वाकांक्षाओं का उल्लेख करेगा।
अपनी यात्रा के संदर्भ में विचार प्रकट करते हुए सिंधिया ने कहा कि भारत तेजी से एक वैश्विक प्रौद्योगिकी केंद्र के रूप में विकसित हो रहा है, और मोबाइल वर्ल्ड कांग्रेस जैसे आयोजनों में अंतर्राष्ट्रीय भागीदारों के साथ हमारा जुड़ाव नवाचार को गति देने और डिजिटल बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि वह वैश्विक विशेषज्ञों के साथ विचारों का आदान-प्रदान करने और मोबाइल और दूरसंचार क्षेत्र में सहयोग के अवसरों पर चर्चा करने के लिए उत्सुक हैं। मंत्री ने कई महत्वपूर्ण सत्रों को संबोधित करने की भी आशा है, जिनमें ‘ग्लोबल टेक गवर्नेंस: राइजिंग टू द चैलेंज’ और ‘बैलेंसिंग इनोवेशन एंड रेगुलेशन: ग्लोबल पर्सपेक्टिव्स ऑन टेलीकॉम पॉलिसी’ शामिल हैं।
बार्सिलोना में मोबाइल वर्ल्ड कांग्रेस 2025 में भागीदारी से दुनिया भर के शीर्ष अधिकारियों, दूरदर्शी और नवप्रवर्तकों के एक साथ आने की उम्मीद है, जो रणनीतिक सहयोग, ज्ञान के आदान-प्रदान और भारत के तकनीकी नेतृत्व को प्रदर्शित करने के लिए एक मंच प्रदान करेगा।
भारत में वैज्ञानिक व्यवस्थाओं के विकास की प्राचीन परंपरा विद्यमान है: मुख्यमंत्री डॉ. यादव
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि विज्ञान के आधार पर व्यवस्थित कार्यप्रणाली, जिज्ञासु प्रवृत्ति को प्रोत्साहन और नवीनतम तकनीकों के उपयोग ने देश को विश्व के शीर्ष राष्ट्रों में गिने जाने का मार्ग प्रशस्त किया है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और मार्गदर्शन से ही यह उपलब्धि संभव हो पाई है। राज्य सरकार शिक्षा सहित शासकीय कार्य प्रणाली और सामान्य व्यवस्थाओं के संचालन में विज्ञान का अधिक से अधिक उपयोग कर आम आदमी के जीवन को बेहतर बनाने की दिशा में निरंतर प्रयासरत है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर "विकसित भारत के लिए विज्ञान और नवाचार में वैश्विक नेतृत्व में भारतीय युवाओं को सशक्त बनाने" की थीम पर भोपाल में विज्ञान भवन में आयोजित कार्यक्रम में विद्यार्थियों और युवाओं को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्ज्वलित कर तथा माँ सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इसके पूर्व उन्होंने नोबल पुरूस्कार से सम्मानित महान वैज्ञानिक श्री सीवी रमन की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर नमन किया।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर "सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन स्टेम एजुकेशन" का विज्ञान भवन में शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सेंटर में प्रस्तुत मॉडल तथा विद्यार्थियों को विज्ञान के विभिन्न सिद्धांत, सरलता से समझाने में सहायक उपकरणों के संबंध में जानकारी प्राप्त की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अवसर पर विद्यार्थियों द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी का अवलोकन किया और विद्यार्थियों द्वारा बनाए गए मॉडल और नवाचारों के संबंध में उनसे चर्चा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने एक पेड़ माँ के नाम के अंतर्गत वृक्षारोपण किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने टीकमगढ़ से आए प्रगतिशील कृषक श्री पूरनलाल कुशवाहा से भेंट कर उनके द्वारा सिंचाई के लिए विकसित किए गए पवन और पानी से चलने वाले पंप का अवलोकन कर जानकारी भी प्राप्त की। कार्यक्रम में मध्यप्रदेश हिन्दी ग्रंथ अकादमी के संचालक श्री अशोक कड़ेल, निदेशक विक्रमादित्य शोधपीठ तथा मुख्यमंत्री के संस्कृति सलाहकार श्री श्रीराम तिवारी, मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के महानिदेशक डॉ. अनिल कोठारी उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने फसल बीमा के लिए क्षमता विकास कार्यक्रम, 13वें मध्यप्रदेश कारीगर विज्ञान सम्मेलन, विज्ञान मंथन यात्रा, उद्यमिता विकास कार्यक्रम, विक्रमोत्सव-2025 के अंतर्गत राष्ट्रीय वैज्ञानिक सम्मेलन और विज्ञान उत्सव तथा पेटेंट और प्रौद्योगिकी आधारित प्रशिक्षण व केंद्र स्थापना पर विकसित पोस्टरों का विमोचन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की उपस्थिति में मध्यप्रदेश विज्ञान और प्रौद्योगिकी परिषद तथा वीआईटी भोपाल के मध्य अकादमिक और वैज्ञानिक क्षेत्र में परस्पर सहयोग के लिए समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर हुए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश हिंदी ग्रंथ अकादमी की पत्रिका "रचना" का भी विमोचन किया।
उत्तराखंड में ग्लेशियर टूटने से भारी तबाही : सड़क निर्माण में लगे 57 मजदूर फंसे
16 को निकाला गया, हाईवे निर्माण में लगे थे
राज्य में आज देर रात भारी बारिश की चेतावनी
नई दिल्ली | उत्तराखंड के बद्रीनाथ में हिमस्खलन की चपेट में आने से 47 लोगों के फंसे होने की आशंका है। पुलिस मुख्यालय के प्रवक्ता आईजी नीलेश आनंद भरणे ने एएनआई को बताया कि माणा के सीमावर्ती इलाके में सीमा सड़क संगठन के कैंप के पास भारी हिमस्खलन हुआ है, जिसमें सड़क निर्माण में लगे 57 मजदूर फंस गए हैं। उन्होंने कहा कि इन मजदूरों में से 10 मजदूरों को बचा लिया गया है और गंभीर हालत में माणा के पास सेना कैंप में भेज दिया गया है।

इस बीच, बीआरओ (सीमा सड़क संगठन) के कार्यकारी अभियंता सीआर मीना ने कहा कि 57 श्रमिक मौके पर मौजूद थे। तीन से चार एंबुलेंस भी भेजी गई हैं, लेकिन भारी बर्फबारी के कारण बचाव दल को वहां पहुंचने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
कुल्लु में घरों में पानी घुसा, मलबे में दबी कारें हिमाचल प्रदेश में 3 दिन से बर्फबारी बारिश हो रही है। लाहौल स्पीति, चंबा के पांगी भरमौर और किन्नौर जिले में बर्फबारी के बाद सड़कें बंद कर दी गई हैं। सभी स्कूलों में 28 फरवरी को छुट्टी घोषित कर दी गई है। कुल्लू के अखाड़ा बाजार में भारी बारिश के चलते लोगों के घरों में पानी घुस गया। बाढ़ से कई गाड़ियां मलबे में दब गई।
मौसम विभाग के मुताबिक इस साल मार्च में भीषण गर्मी पड़ सकती है। इस दौरान तापमान 38 से 40 डिग्री तक रहने का अनुमान है। मार्च के दूसरे हफ्ते से दिन और रात का तापमान असामान्य रूप से बढ़ेगा। सूत्रों के मुताबिक मार्च में भारी गर्मी की वजह से गेहूं के पैदावार पर असर पड़ेगा। 2022 में भी मार्च महीने में भारी गर्मी की वजह से गेहूं की फसल को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचा था। सरकार को गेहूं के निर्यात पर प्रतिबंध लगाना पड़ा था 127 फरवरी को दिल्ली में 74 साल की सबसे गर्म रात दिल्ली में भी फरवरी महीने में गर्मी ने 74 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया है।
नासा के अनुभवी माइक मासिमिनो ने पीएमश्री केंद्रीय विद्यालय के छात्रों के साथ बातचीत की
नई दिल्ली | उन्होंने प्रयोगशालाओं का जायजा लिया, भारत के चंद्र मिशन की प्रशंसा की, पीएमश्री स्कूल के दौरे के समय जीरो ग्रेविटी के अनुभव साझा किए
नासा के पूर्व अंतरिक्ष यात्री माइक मैसिमिनो ने आज नई दिल्ली में पीएमश्री केंद्रीय विद्यालय के छात्रों से बातचीत की। मैसिमिनो ने विद्यालय की सुविधाओं का भी जायजा लिया, जिसमें एआर-वीआर लैब, अटल टिंकरिंग लैब, भाषा प्रयोगशाला आदि शामिल हैं।

छात्रों से बातचीत करते हुए, मैसिमिनो ने भारत के चंद्रयान-3 मिशन की प्रशंसा की। उन्होंने न केवल भारत के लिए बल्कि वैश्विक अंतरिक्ष समुदाय के लिए इसके महत्व पर जोर दिया। उन्होंने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरने की चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कैसे यह उपलब्धि वहां बसने के लिए आवश्यक जल स्रोतों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान कर सकती है। इसके अतिरिक्त, उन्होंने भविष्य के अंतरिक्ष कार्यक्रमों में अंतरराष्ट्रीय सहयोग के महत्व पर जोर दिया।
मैसिमिनो ने बताया कि कैसे 7 अंतरिक्ष यात्रियों पर आधारित एक फिल्म ने उन्हें अंतरिक्ष यात्री बनने के लिए प्रेरित किया। छात्रों के साथ बातचीत करते हुए, उन्होंने अंतरिक्ष अन्वेषण, अंतरिक्ष यात्राओं के दौरान उनके द्वारा खाए जाने वाले भोजन आदि के बारे में उनके सवालों के जवाब दिए। अपने व्यक्तिगत अनुभवों को याद करते हुए, उन्होंने बताया कि कैसे उन्होंने अंतरिक्ष में जीरो ग्रेविटी के साथ तालमेल बिठाया और उनके सोने की व्यवस्था, काम करने के लिए कंसोल आदि के बारे में विस्तार से बताया। छात्र अंतरिक्ष अन्वेषण में एआई की भूमिका के बारे में भी उत्सुक थे। जवाब में, उन्होंने बताया कि एआई प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करेगा, जिससे वे अधिक कुशल, किफायती और सुरक्षित बनेंगे। अपनी बातचीत को समाप्त करते हुए, उन्होंने छात्रों को उन विषयों और कौशलों के बारे में सलाह दी, जिन्हें उन्हें अंतरिक्ष अन्वेषण में करियर बनाने के लिए अपनाना चाहिए।
कार्यक्रम के दौरान छात्रों ने अंतरिक्ष यात्री के रूप में करियर बनाने की चुनौतियों और उनकी तैयारी के लिए आवश्यक प्रमुख विषयों के बारे में कई सवाल पूछे। श्री मैसिमिनो ने मृदा विज्ञान और समुद्री जीव विज्ञान सहित विभिन्न क्षेत्रों की खोज के महत्व पर जोर दिया। उनके व्यावहारिक और अंतर्दृष्टि से परिपूर्ण उत्तरों ने छात्रों को उत्साहित करते हुए गहराई से प्रेरित किया। उन्होंने उनसे नासा में उनके द्वारा किए गए काम जुड़े सबसे चुनौतीपूर्ण प्रोजेक्ट के बारे में भी पूछा और क्या निकट भविष्य में मंगल ग्रह पर मानव का बसना संभव होगा। उन्होंने बताया कि चंद्रमा पर रहना जल्द ही एक वास्तविकता बन सकता है, लेकिन मंगल ग्रह पर बसने में अभी भी तकनीकी चुनौतियों के कारण अधिक समय लगेगा, जिन्हें अभी भी दूर करने की आवश्यकता है।
नासा के पूर्व अंतरिक्ष यात्री माइक मैसिमिनो कोलंबिया विश्वविद्यालय में मैकेनिकल इंजीनियरिंग के प्रोफेसर हैं तथा इंट्रेपिड सी, एयर एंड स्पेस म्यूजियम में अंतरिक्ष कार्यक्रमों के वरिष्ठ सलाहकार हैं। उन्होंने कोलंबिया विश्वविद्यालय से बीएस की डिग्री तथा मैकेनिकल इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी एवं नीति में एमएस की डिग्री प्राप्त की है। इसके साथ ही उन्होंने मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में पीएचडी की डिग्री भी प्राप्त की है।
आईबीएम, नासा और मैकडॉनेल डगलस एयरोस्पेस में इंजीनियर के रूप में काम करने के बाद, राइस यूनिवर्सिटी और जॉर्जिया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में अकादमिक नियुक्तियों के साथ, उन्हें 1996 में नासा द्वारा एक अंतरिक्ष यात्री के रूप में चुना गया था। वे दो अंतरिक्ष उड़ानों- 2002 और 2009 में चौथा और पाँचवाँ हबल स्पेस टेलीस्कोप सर्विसिंग मिशन के अनुभवी हैं। माइक के पास एक ही स्पेस शटल मिशन में स्पेसवॉक करने के घंटों की संख्या के लिए एक टीम रिकॉर्ड है। वे अंतरिक्ष से ट्वीट करने वाले पहले व्यक्ति भी हैं। अपने नासा करियर के दौरान उन्हें दो नासा स्पेस फ़्लाइट मेडल, नासा डिस्टिंग्विश्ड सर्विस मेडल, अमेरिकन एस्ट्रोनॉटिकल सोसाइटी का फ़्लाइट अचीवमेंट अवार्ड और स्टार ऑफ़ इटैलियन सॉलिडैरिटी मिले।
वे न्यूयॉर्क शहर में इंट्रेपिड सी, एयर एंड स्पेस म्यूजियम में अंतरिक्ष कार्यक्रमों के वरिष्ठ सलाहकार हैं। वह कोलंबिया विश्वविद्यालय के इंजीनियरिंग स्कूल, द फू फाउंडेशन स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग एंड एप्लाइड साइंस में प्रोफेसर भी हैं।
कार्यक्रम में संयुक्त आयुक्त (कार्मिक) सोमित श्रीवास्तव, केवीएस मुख्यालय के उपायुक्त (शैक्षणिक) बीके बेहरा, केवीएस दिल्ली क्षेत्र के उपायुक्त एसएस चौहान, दिल्ली क्षेत्र के सहायक आयुक्त जीएस पांडे और केसी मीणा, केवी नंबर 2, दिल्ली छावनी के प्रधानाचार्य वीके मठपाल और अन्य उपस्थित थे।
लोक सभा अध्यक्ष ने युवाओं से आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य के प्रति समर्पित होने का आग्रह किया
विकसित देशों की ओर देखने के बजाय, हमारे युवाओं को 2047 तक भारत को विकसित देश बनाने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए: लोक सभा अध्यक्ष
शिक्षा की सफलता समाज के गरीब, उपेक्षित और अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के जीवन को बेहतर बनाने में निहित है: लोक सभा अध्यक्ष
लोकतंत्र के रूप में भारत की सफल यात्रा दुनिया के लिए प्रेरक है: लोक सभा अध्यक्ष
लोक सभा अध्यक्ष ने भारती विद्यापीठ, पुणे के छात्रों को संबोधित किया
नई दिल्ली | लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने आज युवाओं से रोजगार के अवसर पैदा करके आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य के प्रति स्वयं को समर्पित करने का आग्रह किया। इस बात पर जोर देते हुए कि नए भारत में विभिन्न क्षेत्रों में अपार अवसरों के साथ अनेक संभावनाएं हैं, उन्होंने युवाओं से 2047 तक विकसित भारत के संकल्प को प्राप्त करने के लिए अनुसंधान और नवाचार में अग्रणी बनने का आह्वान किया।

बिरला ने ये विचार भारती विद्यापीठ, पुणे के 26वें दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में व्यक्त किए। उन्होंने इस अवसर पर कहा कि भारतीय युवा पहले से ही अपने ज्ञान, क्षमताओं और बुद्धिमत्ता के साथ दुनिया का नेतृत्व कर रहे हैं। साथ ही उन्होंने यह उल्लेख किया कि भारतीय युवाओं ने विकसित देशों की समृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
बिरला ने कहा कि नया भारत नए अवसरों के साथ समृद्धि के पथ पर अग्रसर है। उन्होंने कहा कि भारत के युवाओं को अपने भविष्य के लिए विकसित देशों की ओर देखने के बजाय अपनी प्रतिभा और ऊर्जा को 2047 तक भारत को विकसित देश बनाने पर केंद्रित करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय युवाओं में वैश्विक चुनौतियों का समाधान करने की योग्यता है तथा ज्ञान, बुद्धि और क्षमताओं से संचालित भारत वैश्विक चुनौतियों के नए समाधान प्रदान करने में दुनिया का नेतृत्व करेगा। उन्होंने युवाओं से बड़े सपने देखने, कड़ी मेहनत करने और देश की समृद्धि में सक्रिय भागीदार बनने का आह्वान किया। बिरला ने कहा कि शिक्षा तभी सफल मानी जाएगी जब इसका लाभ समाज के गरीब, उपेक्षित और अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को मिलेगा।
पिछले 75 वर्षों के दौरान भारत की यात्रा का उल्लेख करते हुए बिरला ने कहा कि लोकतंत्र के रूप में भारत की सफल यात्रा दुनिया के लिए प्रेरक है और आज दुनिया के अन्य देश लोकतांत्रिक भावना को बढ़ावा देने के लिए भारत की ओर देख रहे हैं।
महाराष्ट्र के गौरवशाली इतिहास का उल्लेख करते हुए, बिरला ने कहा कि महाराष्ट्र संघर्षों तथा सामाजिक एवं आध्यात्मिक क्रांति की भूमि है। उन्होंने वीर शिवाजी, ज्योतिबा फुले, सावित्रीबाई फुले का उल्लेख करते हुए कहा कि इन विभूतियों की भारत के इतिहास में महत्वपूर्ण भूमिका रही है तथा वे आने वाले वर्षों में भी हमारे लिए प्रेरणास्रोत बने रहेंगे।
दीक्षांत समारोह के अवसर पर बिरला ने भारती विद्यापीठ के सफल विद्यार्थियों को प्रमाण-पत्र एवं पुरस्कार प्रदान किए।
केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने 9वें राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन समिट का उद्घाटन किया ओडिशा के पुरी में
डेस्क | केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने आज ओडिशा के पुरी में 9वें राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन समिट का उद्घाटन किया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य देशभर में सफल स्वास्थ्य पहलों और नवाचारों को प्रस्तुत करना है। कार्यक्रम के दौरान जेपी नड्डा ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की सराहना करते हुए कहा कि इस मिशन ने बेहतरीन प्रगति की है। उन्होंने ओडिशा में मातृ मृत्यु दर (MMR) में आई गिरावट की भी तारीफ की। उन्होंने कहा, “राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ने बहुत अच्छा काम किया है। हमारी प्रगति काफी प्रभावशाली रही है।”

पुरी में आयोजित इस शिखर सम्मेलन में देशभर के स्वास्थ्य मंत्रियों, नीति-निर्माताओं, स्वास्थ्य विशेषज्ञों और अन्य प्रमुख हितधारकों की भागीदारी रही। इस अवसर पर ओडिशा के उपमुख्यमंत्री प्रवती परिडा ने कहा कि पीएम मोदी ने एक बार मुझसे कहा था कि ओडिशा को सिर्फ आध्यात्मिक पर्यटन ही नहीं, बल्कि “MICE टूरिज्म” (मीटिंग्स, इंसेंटिव्स, कॉन्फ्रेंस और एग्जीबिशन) को भी बढ़ावा देना चाहिए। इससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
उन्होंने यह भी बताया कि विदेशी प्रतिनिधि भी इस शिखर सम्मेलन में शामिल हुए। इससे पहले केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक्स पर पोस्ट कर जानकारी दी कि इस कार्यक्रम में ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. मुकेश महालिंग भी मौजूद रहें |
भारत एक आर्थिक महाशक्ति और विश्व के भविष्य का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन रहा है : स्कॉट फॉल्कनर
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी दुनिया के शीर्ष नेताओं में से एक और दूसरों के लिए प्रेरणा : पूर्व अमेरिकी हाउस चीफ एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफिसर स्कॉट फॉल्कनर
नई दिल्ली | पूर्व अमेरिकी हाउस चीफ एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफिसर स्कॉट फॉल्कनर ने गुरुवार को कहा कि भारत एक आर्थिक महाशक्ति बन रहा है और दुनिया के भविष्य को आकार देने में एक प्रमुख भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि देश 21वीं सदी के विकास में सबसे आगे है, जो अपने लोगों की उभरती जरूरतों को पूरा करने के लिए प्रौद्योगिकी और शासन को सहजता से एकीकृत कर रहा है। फॉल्कनर एक मीडिया कॉन्क्लेव में भाग लेने के लिए एक सप्ताह के भारत दौरे पर हैं।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की प्रशंसा करते हुए फॉल्कनर ने उन्हें दुनिया के शीर्ष नेताओं में से एक और दूसरों के लिए प्रेरणास्रोत बताया। प्रधानमंत्री संग्रहालय का दौरा करने के बाद उन्होंने दुनिया भर में ऐसे और संग्रहालयों की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि यह संग्रहालय एक प्रेरणास्रोत है और इसे व्यापक रूप से साझा किया जाना चाहिए।
फॉल्कनर ने प्रधानमंत्री संग्रहालय और नवनिर्मित संसद का दौरा किया। अपने दौरे के बाद, उन्होंने वैश्विक मंच पर भारत की प्रगति और नेतृत्व की सराहना की। पहले उन्होंने रीगन अभियान के लिए डायरेक्टर ऑफ पर्सनल के रूप में कार्य किया और प्रेसिडेंसियल ट्रांजिशन एवं व्हाइट हाउस स्टाफ का हिस्सा रहे थे। उन्होंने फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन, जनरल सर्विसेस एडमिनिस्ट्रेशन और पीस कॉर्प्स में कार्यकारी पदों पर कार्य किया है।
फॉल्कनर ने अमेरिकन यूनिवर्सिटी से पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में मास्टर डिग्री और लॉरेंस यूनिवर्सिटी से गवर्नमेंट में बैचलर डिग्री हासिल की है। उन्होंने लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स और जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी से भी पढ़ाई की है और वर्तमान में शेफर्ड यूनिवर्सिटी के जॉर्ज वाशिंगटन इंस्टीट्यूट ऑफ लिविंग एथिक्स के वाइस प्रेसिडेंट के रूप में कार्यरत हैं।
फॉल्कनर नए संसद भवन के दौरे के बाद बताया कि वे इस भवन की अत्याधुनिक वास्तुकला और तकनीकी नवाचारों से बहुत प्रभावित हुए हैं। उन्होंने विशेष रूप से कई भाषाओं के कुशल प्रबंधन, एक साथ अनुवाद की सुविधाओं और पूरी तरह से स्वचालित दस्तावेज प्रणाली के बारे में चर्चा करते हुए कहा कि दुनिया इनसे सीख सकती है।
पीएम जनमन योजना से बदल रहा जनजातीय समुदाय का जीवन : राज्यपाल पटेल
भोपाल। राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि केन्द्र और प्रदेश सरकार विशेष पिछड़ी जनजातियों को प्राथमिकता के साथ लाभान्वित कर रही हैं। पीएम जन-मन योजना के द्वारा बैगा, सहरिया एवं भारिया विशेष पिछड़ी जनजातीय बसाहटों में पक्का आवास, सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य, स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने का विशेष प्रयास किया जा रहा है। राज्यपाल ने यह बात कटनी जिले के ढीमरखेड़ा तहसील के पीएम जनमन ग्राम कोठी में बैगा जनजाति के लोगों से संवाद के दौरान कही।
राज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के रूप में जनमन ग्रामों के समग्र विकास के लिए दूरदर्शी और संवदेनशील नेतृत्व मिलना हम सब के लिए सौभाग्य की बात है। प्रधानमंत्री जनजातीय समुदाय के प्रति विशेष संवेदनशील हैं। समाज के पिछड़े वर्ग और व्यक्तियों के कल्याण के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी सतत् काम कर रहे हैं। राज्यपाल पटेल जनमन ग्राम कोठी में बैगा हितग्राहियों के साथ संवाद कार्यक्रम के पहले, प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना के हितग्राहियों के घर भी पहुचें। उन्होंने योजना से लाभ मिलने के बाद हितग्राही के जीवन में आए बदलाव को जाना।
राज्यपाल पटेल ने सर्वप्रथम पीएम जनमन आवास हितग्राही चंदाबाई बैगा, भल्लू बैगा और सोनी बैगा को प्रधानमंत्री आवास योजना से बने पक्के आवास में विधि-विधान और पूजा-अनुष्ठान के साथ गृह प्रवेश कराया। राज्यपाल श्री पटेल का बैगा समुदाय के लोगों ने तिलक लगाकर और शाल पहनाकर स्वागत किया। बैगा परिवारों ने उपहार स्वरूप उन्हें लोक कला पर आधारित पेन्टिंग भेंट की गई।
राज्यपाल ने कहा कि स्व-सहायता समूहों से जुड़कर महिलाओं का आर्थिक और सामाजिक विकास हुआ है। महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ा है। महिलाएं अब स्वयं का रोजगार शुरू कर आत्मनिर्भर बन रही है। परिवार में भी महिलाओं का मान सम्मान बढ़ा है। राज्यपाल श्री पटेल ने संवाद कार्यक्रम में लाभान्वित हितग्राहियों से चर्चा भी की। इस दौरान आजीविका मिशन के मुर्गी पालन समूह की दीदी राजकुमारी ने बताया कि स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद करीब 8 हजार रूपये प्रतिमाह की अतिरिक्त आमदनी हो जाती है। पति खेती-किसानी का काम करते हैं, जिससे उनका अच्छे से जीविकोपार्जन हो रहा है।
देश के दिल मध्यप्रदेश में पर्यटन के स्वर्ण युग का हुआ आरंभ : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि हिंदुस्तान के दिल मध्यप्रदेश की समृद्ध प्राकृतिक सुंदरता, ऐतिहासिक धरोहरों और सांस्कृतिक विविधता के कारण देश के प्रमुख पर्यटन स्थलों में गिना जाता है। यहाँ के घने जंगल, दुर्लभ वन्य जीव, ऐतिहासिक किले, प्राचीन मंदिर और जीवंत संस्कृति हर साल लाखों पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की नीतियों और योजनाओं के कारण न केवल पर्यटन क्षेत्र में निवेश बढ़ा है, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था और रोजगार के अवसरों में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि राज्य सरकार के प्रयासों से मध्यप्रदेश भारत के शीर्ष पर्यटन स्थलों में अपनी अलग पहचान बना चुका है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी स्वयं बता चुके हैं कि मध्यप्रदेश को एक विदेशी मैग्जीन ने दुनिया की श्रेष्ठ टूरिज्म डेस्टिनेशन में से एक माना है। राज्य सरकार की योजनाओं से राज्य की सांस्कृतिक और प्राकृतिक धरोहर को संरक्षण मिल रहा है। साथ ही इससे प्रदेश वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर सशक्त पहचान स्थापित कर रहा है।
राज्य में 24 वन्यजीव अभयारण्य, 12 राष्ट्रीय उद्यान, 9 टाइगर रिज़र्व और 14 विश्व धरोहर स्थल स्थित हैं, जो इसे भारत के सबसे समृद्ध जैव विविधता वाले राज्यों में शामिल करते हैं। इसके अलावा, 12 ज्योतिर्लिंगो में एक मात्र उज्जैन का दक्षिणमुखी महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग और ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग श्रद्धालुओं के लिए अगाध आस्था के केंद्र हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया है कि राज्य सरकार पर्यटन को नए आयाम देने के लिए व्यापक स्तर पर काम कर रही है। पर्यटन परियोजनाओं के लिए 758 हेक्टेयर भूमि उपलब्ध कराई गई है, जिसमें से 358 हेक्टेयर भूमि 39 निवेशकों को आवंटित की जा चुकी है। इससे राज्य में कई नए होटल, रिसॉर्ट, गोल्फ कोर्स और आधुनिक सुविधाएं विकसित हो रही हैं। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड द्वारा लागू की गई पर्यटन नीति-2025 और फिल्म पर्यटन नीति 2025 निवेशकों और उद्यमियों के लिए आकर्षक अवसर प्रस्तुत कर रही हैं। इन नीतियों के कारण पर्यटन क्षेत्र में 3 हजार 372 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव आये हैं। इससे 50 हजार 500 से अधिक लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है।
मध्यप्रदेश अपनी प्राकृतिक और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के कारण फिल्म निर्माताओं की फेवरेट शूटिंग डेस्टिनेशन बन चुका है। राज्य में 185 से अधिक फिल्मों और 40 अन्य प्रोजेक्ट्स की शूटिंग की जा चुकी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उम्मीद जताई है कि सरकार द्वारा दी जा रही विशेष सुविधाओं और अनुदानों के कारण आने वाले वर्षों में फिल्म पर्यटन और अधिक बढ़ेगा। उन्होंने बताया कि विगत वर्षों में चंदेरी, ग्वालियर और भोपाल में हुई शूटिंग्स की वजह से इन क्षेत्रों के लिये पर्यटकों में आकर्षण बढ़ा है। साथ ही फिल्म निर्माताओं की नजरों में भी प्रदेश की साफ-सुथरी लोकेशन्स आई हैं।
आंध्रप्रदेश के लाल मिर्च उत्पादक किसानों के हित में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने की बैठक
प्रवास से दिल्ली लौटते ही शिवराज सिंह ने लाल मिर्च उत्पादक किसानों को राहत देने के लिए की बैठक
बाजार हस्तक्षेप योजना (एमआईएस) के कार्यान्वयन के लिए आंध्र प्रदेश सरकार के प्रस्ताव पर हुई चर्चा
आईसीएआर द्वारा आंध्रप्रदेश में लाल मिर्च उत्पादन लागत की समीक्षा की जाएं- शिवराज सिंह
एमआईएस के तहत लाल मिर्च की कवरेज सीमा को उत्पादन के 25% से बढ़ाने के बारे में प्रस्ताव होगा
एमआईडीएच के क्लस्टर विकास कार्यक्रम के तहत प्रशिक्षण व क्षमता निर्माण कार्यक्रम आयोजित होंगे
आंध्रप्रदेश से लाल मिर्च के निर्यात के अवसरों का पता लगाने के लिए निर्यातकों की बैठक शीघ्र होगी
कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने आईसीएआर को खेतों का दौरा करने के लिए विशेषज्ञ दल भेजने को कहा
बैठक में नागरिक उड्डयन मंत्री नायडू, केंद्रीय कृषि सचिव सहित केंद्र-राज्य के अधिकारी हुए शामिल
नई दिल्ली | आंध्रप्रदेश के लाल मिर्च उत्पादक किसानों के हित में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कल आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू से वीडियो कांफ्रेंसिंग से हुई चर्चा के बाद आज त्वरित कदम उठाते हुए कृषि भवन, नई दिल्ली में एक समीक्षा बैठक बुलाई। इस बैठक में, केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण की बाजार हस्तक्षेप योजना (एमआईएस) के कार्यान्वयन के लिए आंध्र प्रदेश सरकार के प्रस्ताव पर चर्चा हुई और विस्तृत विचार-विमर्श के बाद किसानों को राहत देने के लिए केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने वरिष्ठ अधिकारियों को दिशा-निर्देश दिए। बैठक में केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राममोहन नायडू तथा केंद्रीय कृषि सचिव देवेश चतुर्वेदी सहित केंद्र और राज्य सरकार के अधिकारी शामिल हुए।

आंध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू गुरूवार को कृषि भवन, नई दिल्ली में आए थे, जिनसे केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की वीडियो कांफ्रेंसिंग से बात हुई थी। गुरूवार को शिवराज सिंह मध्य प्रदेश में छतरपुर जिले में दूरस्थ स्थान पर पूर्व निर्धारित कायर्क्रम के लिए प्रवास पर थे। शिवराज सिंह ने मुख्यमंत्री नायडू से कहा था कि वे शुक्रवार सुबह दिल्ली आते ही सबसे पहले लाल मिर्च उत्पादक किसानों की समस्या हल करने के लिए बैठक करेंगे। इसी के तहत कृषि मंत्रालय के साथ ही वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, एपीडा, स्पाइस बोर्ड, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) आदि संबद्ध विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ शिवराज सिंह ने विषय के बारे में समीक्षा की।
वर्ष 2024-25 के सीजन के दौरान लाल मिर्च के उत्पादक किसानों को राहत देने के लिए केंद्रीय कृषि मंत्रालय की बाजार हस्तक्षेप योजना (एमआईएस) के कार्यान्वयन के संबंध में आंध्र प्रदेश सरकार के प्रस्ताव पर बैठक में चर्चा की गई। केंद्रीय कृषि सचिव श्री चतुर्वेदी ने विषय के बारे में विस्तार से बताया, जिस पर बैठक में उपस्थित वरिष्ठ अधिकारियों ने अपने-अपने मंत्रालयों/विभागों/संगठनों की ओर से विचार व्यक्त किए तथा सुझाव देते हुए उपाय बताएं। बैठक में मौजूद आंध्र प्रदेश के एक प्रगतिशील किसान ने बताया कि लाल मिर्च की फसल में फूल आने के समय कीट का प्रकोप होने की संभावना रहती है। किसानों को अपनी फसल को कीट से बचाने के लिए किए जाने वाले नियंत्रण के उपायों पर काफी खर्च करना पड़ता है, जिसके परिणामस्वरूप आंध्रप्रदेश में लाल मिर्च उत्पादन की लागत बढ़ जाती है, जिसके लिए उन्होंने ऐसे कीटों से किसानों को बचाने के लिए उपचारात्मक सुझाव दिया।
विस्तृत विचार-विमर्श के बाद, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने दिशा-निर्देश देते हुए कहा कि आईसीएआर द्वारा आंध्रप्रदेश में लाल मिर्च के उत्पादन लागत की समीक्षा की जाएं, तत्संबंधी रिपोर्ट केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण विभाग को उपलब्ध कराई जाएं, ताकि 2024-25 सीजन के दौरान एमआईएस के तहत लाल मिर्च के मूल्य कमी भुगतान के कार्यान्वयन के लिए आंध्रप्रदेश सरकार को राज्य उत्पादन का 25% अग्रिम मंजूरी जारी की जा सके। शिवराज सिंह ने एमआईएस के तहत लाल मिर्च की कवरेज सीमा को उत्पादन के 25% से बढ़ाने के संबंध में भी प्रस्ताव तैयार करने को कहा। इसके साथ ही, एमआईडीएच के क्लस्टर विकास कार्यक्रम के तहत प्रशिक्षण व क्षमता निर्माण कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश केंद्रीय कृषि मंत्री ने दिए। वहीं, आंध्रप्रदेश से लाल मिर्च के निर्यात के अवसरों का पता लगाने के लिए वाणिज्य मंत्रालय, एपीडा व अन्य संबंधित विभागों के प्रतिनिधियों की भागीदारी के साथ मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में निर्यातकों की बैठक शीघ्र ही आयोजित की जाएगी। यह भी तय हुआ कि आईसीएआर, आंध्रप्रदेश में मिर्च के खेतों का दौरा करने के लिए एक विशेषज्ञ दल भेजेगा, जो कीट संक्रमण के कारण फसल को हुए नुकसान का अध्ययन करेगा तथा प्रभावी आईपीएम उपाय सुझाएगा।
भारतीय सेना की ओर से रासायनिक, जैविक, रेडियोधर्मी और आण्विक हमलों से सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण उपकरणों की खरीद
नई दिल्ली | भारतीय सेना ने भारतीय खरीद (स्वदेश में ही डिजाइन, विकसित और निर्मित- आईडीडीएम) श्रेणी के अंतर्गत 80.43 करोड़ रुपये की लागत से 223 स्वचालित रासायनिक एजेंट पहचान और चेतावनी (एसीएडीए) प्रणाली के क्रय के लिए 25 फरवरी 2025 को मेसर्स एलएंडटी लिमिटेड के साथ अनुबंध पर हस्ताक्षर किए हैं। इससे भारत सरकार के आत्मनिर्भरता अभियान को काफी बढ़ावा मिलेगा क्योंकि उपकरणों के 80% से अधिक घटकों और उप-प्रणालियों की खरीद स्थानीय स्तर पर ही की जाएगी।

स्वचालित रासायनिक एजेंट पहचान और चेतावनी (एसीएडीए) प्रणाली को रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) के रक्षा अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान, ग्वालियर ने डिजाइन और विकसित किया है। यह रासायनिक, जैविक, रेडियोधर्मी विकिरण वाले पदार्थों और आण्विक हमलों से सुरक्षा के लिए स्वदेशी उपकरणों के उपयोग के लिए राष्ट्र की पहल की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
स्वचालित रासायनिक एजेंट पहचान और चेतावनी (एसीएडीए) प्रणाली का उपयोग पर्यावरण से वायु का नमूना लेकर रासायनिक युद्ध के लिए उपयोग में लाए जाने वाले एजेंटों (सीडब्ल्यूए) और उसके लिए तैयार किए गए विषैले औद्योगिक रसायनों (टीआईसी) का पता लगाने में किया जाता है। यह आयन मोबिलिटी स्पेक्ट्रोमेट्री (आईएमएस) के सिद्धांत पर काम करता है और इसमें हानिकारक एवं विषैले पदार्थों का निरंतर पता लगाने तथा साथ ही साथ निगरानी के लिए दो अत्यधिक संवेदनशील आयन मोबिलिटी स्पेक्ट्रोमेट्री (आईएमएस) सेल होते हैं। फील्ड यूनिटों में स्वचालित रासायनिक एजेंट पहचान और चेतावनी (एसीएडीए) प्रणाली को शामिल करने से इस क्षेत्र में भारतीय सेना की रक्षात्मक क्षमता में काफी वृद्धि होगी। साथ ही, शांति काल में, विशेष रूप से औद्योगिक दुर्घटनाओं से संबंधित आपदा राहत से जुड़ी परिस्थितियों में प्रतिक्रिया के लिए भी इनका उपयोग किया जा सकेगा।
दुनिया के सबसे बड़े आयोजन का आखिरी दिन बना विश्व रिकार्ड : 64 करोड़ श्रद्धालुओं ने किया संगम स्नान
महाकुम्भ में बने महारिकार्ड, अमेरिका की आबादी से दोगुने 64 करोड़ श्रद्धालुओं ने किया संगम स्नान बना विश्व रिकार्ड
दुनिया के सबसे बड़े आयोजन का आखिरी दिन एयरफोर्स के विमानों ने एयर शो निकाला
डेस्क | आज महाकुंभ का आखिरी दिन है। 13 जनवरी से शुरू हुए इस महाकुंभ में अब तक 64 करोड़ लोग संगम में डुबकी लगा चुके हैं। यानी अमेरिका की आबादी से लगभग दोगुने लोग। ये एक वर्ल्ड रिकॉर्ड है। केवल यही एक रिकॉर्ड नहीं है। इस महाकुंभ में और भी महारिकॉर्ड बने हैं। महाकुंभ श्रद्धालुओं की संख्या के लिहाज से इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया है। कुंभ ही नहीं, दुनिया के किसी भी आयोजन में आज तक एक साथ इतनी बड़ी संख्या में लोग नहीं जुटे हैं, जितने 45 दिनों के अंदर प्रयागराज में बनाए गए एक अस्थायी शहर में जुट गए।

65 करोड़ श्रद्धालुओं के किसी एक स्थान पर जुटने का इतिहास में और कोई उदाहरण नहीं दिखता। सनातन के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था, दृढ़ निश्चय और विश्वास का ही यह फल है कि संगम तट पर इतना विशाल जनसमूह 45 दिनों में जमा हो गया। यदि इस संख्या की दुनिया भर के देशों की आबादी से तुलना की जाए, तो कई देशों की आबादी इसमें समा जाएगी।
अमेरिका की दोगुनी से ज्यादा, पाकिस्तान की ढाई गुना से अधिक और रूस की चार गुनी से ज्यादा आबादी के बराबर श्रद्धालु यहां अब तक आ चुके हैं। यही नहीं, जापान की पांच गुनी आबादी, यूके को 10 गुनी से ज्यादा आबादी और फ्रांस की 15 गुनी से ज्यादा आबादी ने यहां आकर त्रिवेणी संगम में पावन डुबकी लगाई है।
तीर्थराज प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ में संख्या के लिहाज से भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में सनातन धर्म को मानने वाले करोड़ों श्रद्धालु स्नान कर चुके हैं। यदि देश की कुल जनसंख्या से स्नानार्थियों की तुलना की जाए तो इसके अनुसार भी लगभग 50 प्रतिशत भारत ने त्रिवेणी संगम में डुबकी लगा ली है।
वहीं, अगर सनातन धर्मावलंबियों की बात करें तो देश के 60 प्रतिशत से ज्यादा और दुनिया के करीब 55 प्रतिशत सनातनी श्रद्धालुओं ने पावन स्नान कर लिया है। 45 दिन तक चले इस आयोजन में श्रद्धा की डुबकी लगाने के लिए दुनिया भर से श्रद्धालु जुटे हैं।
73 देशों के राजनयिकों के साथ भूटान नरेश नामग्याल वांगचुक समेत तमाम अन्य देशों के अतिथि यहां अमृत स्नान करने पहुंचे। यही नहीं, मां जानकी के मायके नेपाल के 50 लाख से अधिक लोग अब तक त्रिवेणी के पवित्र जल में स्नान कर महाकुंभ के साक्षी बन चुके हैं। इसके अलावा इटली, फ्रांस, यूके, पुर्तगाल, अमेरिका, इजराइल, ईरान, मॉरीसस समेत दुनिया के कोने-कोने से श्रद्धालु यहां पहुंचे हैं। मां गंगा, मां यमुना और अदृश्य मां सरस्वती के पवित्र संगम में श्रद्धा और आस्था से ओत-प्रोत साधु-संतों, श्रद्धालुओं, स्नानार्थियों और गृहस्थों का स्रान अब उस शिखर के भी पार पहुंच गया है, सीएम योगी ने पहले ही अनुमान जताया था कि इस बार जो भव्य और दिव्य महाकुंभ का आयोजन हो रहा है वह स्नानार्थियों की संख्या का नया रिकॉर्ड स्थापित करेगा।
हमारी निवेश नीतियों को सबने सराहा, निवेशकों का बढ़ा है मध्यप्रदेश पर विश्वासः शाह
भोपाल। केन्द्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा है कि भोपाल में सम्पन्न दो दिवसीय ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट सिफ मध्यप्रदेश की नहीं, यह देश की उपलब्धि है। उद्योगों की स्थापना को प्रोत्साहन देने के लिये उठाये गये कदम भारत के विकास को भी गति देने का कार्य कर रहे हैं। मध्यप्रदेश निश्चित ही प्रमुख उद्योग राज्य बनेगा। मध्यप्रदेश में निवेशकों में निवेश करने के प्रति विश्वास बढ़ा है। स्थायी और सशक्त सरकार, पारदर्शी प्रशासन, उपयोगी नीतियां, सहयोगी सामाजिक वातावरण, आर्थिक प्रगति के लिये ऐसे आधार हैं, जो मध्यप्रदेश में मौजूद हैं। मध्यप्रदेश देश का ऐसा पहला राज्य है जिसने जनविश्वास अधिनियम, ईज ऑफ डूइंग के माध्यम से पहल की है। निश्चित ही मध्यप्रदेश टॉप एचीवर बनेगा।
केन्द्रीय मंत्री शाह ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सूत्र वाक्य 'विरासत भी और विकास भी' को मध्यप्रदेश चरितार्थ कर रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने वर्ष@2047 तक पूर्ण विकसित भारत का संकल्प किया है। भारत विश्व की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था होगा। इसमें मध्यप्रदेश अपना योगदान देते हुए महत्वपूर्ण सहयोगी राज्य सिद्ध होगा। मध्यप्रदेश ने लोकल और ग्लोबल दोनों स्तर पर प्रगति के प्रयासों में सहभागी बनने का सराहनीय कार्य किया है। यह ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट बहुत सफल रही है। इसकी सफलता के लिये मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और उनकी टीम बधाई और अभिनंदन की पात्र हैं। मध्यप्रदेश में इस समिट में हुए एमओयू जल्द ही मूर्त रूप लेकर प्रदेश के विकास को गति प्रदान करेंगे।
केन्द्रीय गृह मंत्री शाह ने कहा कि मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. द्वारा किया गया रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव का प्रयोग सफल रहा। सम विकास के लिये ऐसे प्रयास आवश्यक हैं। अन्य राज्य भी यह प्रयोग कर सकते हैं। प्रत्येक क्षेत्र में अलग तरह का निवेश संभव होता है। मध्यप्रदेश में फिजीकल पोटेंशियल, सेक्टोरल और ग्लोबल पोटेंशियल के मार्ग प्रशस्त हुए हैं। प्रधानमंत्री मोदी की भावना के अनुरूप मध्यप्रदेश में औद्योगिक विकास का महत्वपूर्ण कार्य हो रहा है।
कोलकाता में सुबह-सुबह भूकंप के तेज झटके... 5.1 तीव्रता का था भूकंप
डेस्क। भूकंप के झटके से एक बार धरती कांपी है। पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में सोमवार सुबह लोगों ने भूकंप के झटके महसूस किए। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के अनुसार,आज सुबह रिक्टर पैमाने पर 5.1 तीव्रता का भूकंप आया। इसका केंद्र बंगाल की खाड़ी में था।
पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में भी लोगों ने भूकंप के झटके महसूस किए। एनसीएस ने बताया कि भूकंप आज सुबह 6:10 बजे 91 किलोमीटर की गहराई पर आया। अभी तक किसी तरह के जान और माल के नुकसान की जानकारी नहीं मिली है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव से आईटीसी के चेयरमैन श्री पुरी एवं सीआईआई और एक्सिस बैंक के प्रतिनिधियों ने की सौजन्य भेंट
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से रविवार को आईटीसी लिमिटेड के अध्यक्ष एवं भारतीय उद्योग परिसंघ (कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्रीज - सीआईआई) के प्रेसिडेंट संजीव पुरी, सीआईआई के डायरेक्टर जनरल चंद्रजीत बैनर्जी, रीजनल डायरेक्टर राजेश कपूर एवं अनिरुद्ध चौहान ने समत्व भवन (मुख्यमंत्री निवास) में सौजन्य भेंट की। इस दौरान औद्योगिक विकास और परस्पर व्यापारिक सहयोग से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव से एक्सिस बैंक, मुंबई के वाइस प्रेसिडेंट संदीप ओतुरकर व अन्य अधिकारियों ने भी समत्व भवन में ही मुलाकात की। बैठक में वित्तीय क्षेत्र में सहयोग और प्रदेश में बैंकिंग सुविधाओं के आवश्यकतानुसार विस्तार पर विचार-विमर्श किया गया।