देश-विदेश
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ कॉरपोरेट अफेयर्स ने मानेसर में कॉरपोरेट बचाव रणनीतियों पर राष्ट्रीय प्रतियोगिता ‘सामर्थ्य’ 2025 का शुभारंभ किया
यह कार्यक्रम छात्रों को वित्तीय संकट का सामना कर रहे व्यवसायों के लिए नए बदलावों की रणनीति तैयार करने के लिए एक गतिशील मंच प्रदान करता है।
सामर्थ्य 2025 विश्व दुनिया की कॉरपोरेट बचाव रणनीतियों और विशेषज्ञ संलग्नता पर केंद्रित है।
नई दिल्ली | इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ कॉरपोरेट अफेयर्स (आईआईसीए) ने हरियाणा के मानेसर स्थित अपने कैंपस में 22 मार्च, 2025 को कॉरपोरेट बचाव रणनीतियों पर राष्ट्रीय प्रतियोगिता सामर्थ्य 2025 का उद्घाटन किया । 22 और 23 मार्च, 2025 को आयोजित यह कार्यक्रम छात्रों को वित्तीय संकट का सामना कर रहे व्यवसायों के लिए नए बदलावों की रणनीति तैयार करने के लिए एक गतिशील मंच प्रदान करता है।

यह कार्यक्रम कॉरपोरेट बचाव में व्यावहारिक शिक्षा और रणनीतिक सोच पर जोर देता है, जिससे प्रतिभागियों को वैश्विक दुनिया वित्तीय संकट परिदृश्यों से निपटने में व्यावहारिक अनुभव मिलता है। प्रतिभागी वित्तीय विवरणों का विश्लेषण करेंगे, कॉर्पोरेट बचाव रणनीतियां विकसित करेंगे और अपने समाधान प्रतिष्ठित न्यायाधीशों के पैनल के सामने प्रस्तुत करेंगे। इसके अतिरिक्त, वे पैनल चर्चाओं और नेटवर्किंग अवसरों के माध्यम से दिवालियापन पेशेवरों, कानूनी पेशेवरों और व्यावसायिक दिग्गजों के साथ जुड़ेंगे। यह प्रतियोगिता उद्योग जगत में मूल्यवान अनुभव, विशेषज्ञ प्रतिक्रिया और अपने अभिनव समाधानों के लिए मान्यता प्राप्त करने का अवसर प्रदान करती है।
उद्घाटन समारोह की शुरुआत पारंपरिक दीप प्रज्ज्वलन से हुई, जिसे कार्यक्रम के प्रतिष्ठित निर्णायकों और मंच पर उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों ने प्रस्तुत किया। यह छात्र संयोजकों आयुषी अग्रवाल, ईप्सा बंसल और हर्षिता उल्फास द्वारा कार्यक्रम के परिचय के साथ प्रतियोगिता की औपचारिक शुरुआत का प्रतीक था। इसके बाद, कोर्स डायरेक्टर और स्कूल ऑफ कॉरपोरेट लॉ के प्रमुख डॉ. पायला नारायण राव ने उद्घाटन भाषण दिया, जिसमें उन्होंने व्यवसाय की स्थिरता और वित्तीय लचीलापन सुनिश्चित करने में कॉरपोरेट बचाव रणनीतियों के महत्व पर जोर दिया।
गुजरात नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर पवित्रा रवि ने उद्घाटन भाषण देते हुए प्रतियोगिता के उद्देश्यों के बारे में जानकारी दी। एलएलएम संकाय के कपिलेश्वर भल्ला के एक वीडियो संदेश ने प्रतिभागियों को अपने वित्तीय ज्ञान, आलोचनात्मक सोच और समस्या-समाधान कौशल को लागू करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने सभी प्रतिभागियों को अपनी शुभकामनाएं दीं और इस आयोजन को सफल बनाने के लिए आयोजकों की सराहना की।
समारोह का समापन आईआईसीए में एलएलएम (आईबीएल) के पाठ्यक्रम समन्वयक प्रमोद जांगड़ा द्वारा धन्यवाद प्रस्ताव के साथ हुआ, जिन्होंने सभी वक्ताओं, प्रतिभागियों और आयोजकों के प्रति उनके योगदान के लिए आभार व्यक्त किया।
प्रतियोगिता में छात्रों को वैश्विक वित्तीय संकट परिदृश्यों का अनुकरण करने वाली व्यावहारिक केस स्टडीज़ की चुनौती दी जाएगी। प्रतिभागियों का मूल्यांकन उनके प्रस्तावित समाधानों में प्रदर्शित व्यवहार्यता, नवाचार और रणनीतिक अंतर्दृष्टि के आधार पर किया जाएगा। इस मंच के माध्यम से, आईआईसीए का लक्ष्य जटिल वित्तीय चुनौतियों का समाधान करने के लिए पूर्णतः कुशल कॉरपोरेट दिग्गजों और विशेषज्ञों की अगली पीढ़ी को तैयार करना है।
आईआईसीए के महानिदेशक एवं सीईओ डॉ. अजय भूषण पांडे ने आयोजन की सफलता के लिए शुभकामनाएं दीं।
औरंगजेब विवाद पर RSS के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबले ने खुलकर रखी अपनी बात
डेस्क। कर्नाटक के बेंगलुरु में आरएसएस सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबले ने कहा कि औरंगजेब ने जो किया इसके लिए उसको आइकॉन नहीं मानना चाहिए। होसबले ने कहा, दिल्ली में एक औरंगजेब रोड थी, जिसका नाम बदलकर अब्दुल कलाम रोड कर दिया गया, इसके पीछे कुछ कारण थे।
होसबले ने कहा, औरंगजेब के भाई दारा शिकोह को हीरो नहीं बनाया गया। गंगा-जमुनी तहजीब की वकालत करने वालों ने कभी दारा शिकोह को आगे लाने के बारे में नहीं सोचा, क्या हम किसी ऐसे व्यक्ति को आइकॉन बनाएंगे जो भारत की संस्कृति के खिलाफ था, या हम उन लोगों के साथ जाएंगे जिन्होंने इस भूमि की परंपराओं के अनुसार काम किया?
#WATCH | Bengaluru, Karnata | General Secretary of RSS, Dattatreya Hosabale, says, "... There have been a lot of incidents in the past. There was an 'Aurangzeb Road' in Delhi, which was renamed Abdul Kalam Road. There was some reason behind it. Aurangzeb's brother, Dara Shikoh,… pic.twitter.com/hHAXzyCZGS
— ANI (@ANI) March 23, 2025
उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता की लड़ाई सिर्फ अंग्रेजों से नहीं लड़ी गई, शिवाजी और महाराणा प्रताप ने भी मुगलों से स्वतंत्रता की लड़ाई लड़ी थी. वो भी स्वतंत्रता संग्राम था। देश के लोगों को तय करना है की उनको अपना आइकॉन औरंगजेब को मानते हैं या दारा शिकोह को? उन्होंने कहा कि एक स्वतंत्र देश को ये गंभीरता से सोचना होगा कि हमें स्वतंत्रता कैसे मिली थी? अंग्रेजों से पहले आए आक्रांताओं से देश के वीर सपूतों ने लड़ाई लड़ी है।
महाराष्ट्र में मुगल शासक औरंगजेब को लेकर सियासत गरमाई हुई है। छत्रपति संभाजीनगर जो कि पहले औरंगाबाद नाम से जाना जाता था वहां पर औरंगजेब की कब्र है। इस कब्र को लेकर विवाद नहीं रुक रहा है। राज्य में इस मुद्दे पर सियासी घमासान होने के बाद अब पूरा मामला बॉम्बे हाई कोर्ट पहुंच गया है। हाई कोर्ट में भी इसको लेकर याचिका दाखिल की गई है। अदालत से औरंगजेब की कब्र को राष्ट्रीय स्मारकों की लिस्ट से हटाने का निर्देश देने की मांग की है।
मुख्यमंत्री ने जामसांवली में चमत्कारिक हनुमान मंदिर में दर्शन कर की पूजा अर्चना
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जामसांवली में चमत्कारिक हनुमानजी का पूजन-अर्चन कर प्रदेश के कल्याण एवं सुख-समृद्धि की प्रार्थना की। उन्होंने कन्या-पूजन कर सभा को संबोधित किया। मुख्यमंत्री ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कुशल निर्देशन में सभी क्षेत्रों में विकास के कार्य तेजी से हो रहे है। विकास के कीर्तिमान स्थापित हुये हैं मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जामसांवली सहित प्रदेश में 13 अलग-अलग लोक के निर्माण कार्य से धार्मिक एवं पर्यटन क्षेत्र को बढ़ावा मिलेगा।
हनुमान लोक का प्रथम चरण का कार्य मई तक पूर्ण करने का लक्ष्य है और द्वितीय चरण में शीघ्र ही हनुमान लोक के विकास के कार्य होंगे। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में प्रत्येक वर्ग के कल्याण के कदम उठाए गए हैं। पांढुर्णा में सभी विकास कार्य होंगे, जिससे जिले में औद्योगिक विकास होगा और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुड़ी पडवा (नये विक्रम संवत) की शुभकामनाएँ देते हुये कहा कि नये साल में पांढ़ुर्णा के विकास को प्राथमिकता से किया जाएगा। । मुख्यमंत्री डॉ. यादव शनिवार को पांढुर्ना में चमत्कारिक हनुमानजी के मंदिर परिसर जामसांवली में आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए।
मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में लगातार विकास हो रहे हैं और सभी वर्गों के कल्याण के लिये सरकार प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि किसान, युवा, महिला और गरीबों के लिये सरकार प्राथमिकता से कार्य कर रही है। इस बार किसानों से 2600 रूपये प्रति क्विंटल गेहूं खरीदी जायेगी। साथ ही धान उत्पादन पर भी प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। युवाओं को अधिक से अधिक संख्या में रोजगार देने का लक्ष्य है। लोकसेवा आयोग की परीक्षाएं जो रुकी थीं, वे सभी हो रही हैं। इसी प्रकार गरीबों के हित लिये भी लगातार कार्य किये जा रहे हैं।
विक्रमोत्सव के शुभारंभ के लिए राष्ट्रपति मुर्मु को मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किया आमंत्रित
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शनिवार को दिल्ली में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से भेंट कर विक्रमोत्सव के शुभारंभ के लिए आमंत्रित किया। विक्रमोत्सव आगामी 30 मार्च को गुड़ी पड़वा के दिन से प्रारंभ होगा।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि गुड़ी पड़वा विक्रम संवत परिवर्तन का दिन है और वर्षों से इसका आयोजन मध्यप्रदेश में किया जाता है। मुख्यमंत्री ने उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य के शासनकाल के बारे में विस्तार से बताते हुए कहा कि उन्होंने आदिकाल में ही गणराज्य की स्थापना की और उनका शासनकाल न्याय, पराक्रम और सुशासन के लिए जाना जाता है। उनके मंत्रिमंडल को सिंहासन बत्तीसी के नाम से जाना जाता है। मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि आगामी 12, 13 और 14 अप्रैल को नई दिल्ली में विक्रमोत्सव का आयोजन किया जाएगा। राज्य शासन का ध्येय है कि युवा पीढ़ी विक्रमादित्य के सिद्धांतों को पढ़े, समझे और अंगीकार करें।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि इसी दिन से जल गंगा अभियान पूरे प्रदेश में शुरू किया जाएगा जो 3 महीने तक चलाया जाने वाला है। उन्होंने बताया कि इसी समय विक्रम विश्वविद्यालय में दीक्षांत समारोह का भी आयोजन किया जाना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि राष्ट्रपति मुर्मु ने निमंत्रण सहर्ष स्वीकार किया और आश्वासन दिया कि सुविधानुसार कार्यक्रम बनाकर सूचित करेंगे।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह से भी मुलाकात की। भेंट के दौरान मुख्यमंत्री ने बताया कि मध्यप्रदेश सरकार ने किसानों के हित के लिए नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड के साथ एमओयू के माध्यम से दुग्ध उत्पादन को 9% से बढ़कर 20% तक ले जाने का लक्ष्य रखा है। सहकारिता के माध्यम से प्रदेश के छोटे और मझोले किसानों तक भी इस योजना की जानकारी पहुंचे, जिससे वे लाभान्वित हो सकें।
मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने बताया कि इस अभियान को सफल बनाने के लिए उन्होंने सहकारिता मंत्री अमित शाह को मध्यप्रदेश आने का निमंत्रण दिया है। केंद्रीय मंत्री ने अप्रैल के प्रथम सप्ताह में आने का आश्वासन दिया है। भेंट के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने केंद्रीय मंत्री शाह का ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के सफल आयोजन और मार्गदर्शन के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया।
जल सभ्यताओं की जीवन रेखा, इसे भविष्य की पीढिय़ों के लिए बचाना जरूरी : पीएम मोदी
नई दिल्ली | विश्व जल दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के जरिए जल संरक्षण का संदेश दिया। नेताओं ने लोगों से पानी की बचत और इसके महत्व को समझने की अपील की। प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी पोस्ट में लिखा कि विश्व जल दिवस पर हम जल संरक्षण और सतत विकास के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हैं। उन्होंने कहा, जल सभ्यताओं की जीवन रेखा है, इसलिए इसे भविष्य की पीढिय़ों के लिए बचाना जरूरी है।

केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने जल दिवस के मौके पर अपने सोशल मीडिया एक्स हैंडल पर पोस्ट किया। इसमें उन्होंने विश्व जल दिवस पर सभी देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए लिखा कि जल-प्रकृति का अमूल्य वरदान- न केवल जीवन का आधार है, बल्कि हमारी संस्कृति, कृषि और भविष्य की समृद्धि का मूल स्रोत भी है। उन्होंने आगे लिखा कि इसकी सतत उपलब्धता सुनिश्चित करना हम सभी की संयुक्त जिम्मेदारी है।
इसके साथ ही उन्होंने जानकारी दी कि पंचकूला में कैच द रेन अभियान की शुरुआत हो रही है। उन्होंने आगे लिखा, आज हरियाणा के पंचकूला में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी जी के साथ जल शक्ति अभियान: कैच द रेन 2025 का शुभारंभ होने जा रहा है। इस वर्ष की थीम है: जल संचय, जनभागीदारी: जन जागरूकता की ओर। यह सिर्फ एक थीम नहीं, जन-जन के जीवन से जुड़ा एक राष्ट्रीय आंदोलन भी है।
वहीं, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी इस मौके पर शुभकामनाएं दीं। उन्होंने लिखा, विश्व जल दिवस की बधाई! आइए, जल को बचाने का संकल्प लें और स्वच्छ व समृद्ध भविष्य की ओर बढ़ें। उनका संदेश पानी के संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करने पर केंद्रित था।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने संदेश में कहा, प्रदेशवासियों को विश्व जल दिवस की शुभकामनाएं! उत्तराखंड पवित्र नदियों का उद्गम स्थल और जल संपदा से भरपूर है। यह हमारी धरोहर है, जिसे बचाना हमारा कर्तव्य है।
उन्होंने जल के सही उपयोग को सतत विकास की कुंजी बताया और कहा कि सरकार जल संसाधनों को संरक्षित करने के लिए लगातार काम कर रही है। धामी ने लोगों से भविष्य के लिए जल संरक्षण का संकल्प लेने को कहा।
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी इस दिन को खास माना। उन्होंने लिखा, जल है तो कल है। विश्व जल दिवस पर प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं। आइए, प्रकृति के इस अनमोल तोहफे को बचाएं और समृद्ध भविष्य बनाएं। उनका संदेश पानी की अहमियत और इसके संरक्षण पर जोर देता है।
राष्ट्रपति भवन में ‘पर्पल फेस्ट’ का आयोजन
नई दिल्ली | दिव्यांगजनों की प्रतिभा, उपलब्धियों और आकांक्षाओं का उत्सव मनाने के लिए 21 मार्च, 2025 अमृत उद्यान में एक दिवसीय ‘पर्पल फेस्ट’ का आयोजन किया गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने महोत्सव का दौरा किया और दिव्यांगजनों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक प्रस्तुतियों को देखा। अपने संक्षिप्त वक्तव्य में उन्होंने कहा कि वंचित वर्ग के प्रति संवेदनशीलता ही किसी देश या समाज की प्रतिष्ठा निर्धारित करती है।

करुणा, समावेशिता और सद्भावना हमारी संस्कृति और सभ्यता के मूल्य रहे हैं। हमारे संविधान की प्रस्तावना में सामाजिक न्याय, समानता और व्यक्ति की गरिमा की बात कही गई है। आगंतुकों के लिए दिन भर विभिन्न गतिविधियां जैसे खेल, डिजिटल समावेशन और उद्यमिता पर कार्यशालाएं, एबिलिम्पिक्स, रचनात्मक कार्यक्रम और सांस्कृतिक उत्सव का आयोजन किया गया।

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा आयोजित ‘पर्पल फेस्ट’ का उद्देश्य विभिन्न दिव्यांगता और लोगों के जीवन पर उनके प्रभाव के बारे में जागरूकता बढ़ाना तथा समाज में दिव्यांगजनों की समझ, स्वीकृति और समावेश को बढ़ावा देना है।
जस्टिस यशवंत वर्मा मामले में दिल्ली HC के चीफ जस्टिस ने सौंपी रिपोर्ट, अब CJI करेंगे आगे की कार्रवाई
डेस्क। इलाहाबाद हाई कोर्ट बार एसोसिएशन ने न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा को दिल्ली हाई कोर्ट से इलाहाबाद हाई कोर्ट ट्रांसफर किए जाने के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल तिवारी ने कहा कि इलाहाबाद हाई कोर्ट कोई कूड़ाघर अथवा भ्रष्टाचार का अड्डा नहीं है, जहां पर किसी भी भ्रष्टाचार में आरोपी न्यायमूर्ति को स्थानांतरित कर दिया जाए।
जस्टिस यशवंत वर्मा के सरकारी बंगले से कथित तौर पर नकदी मिलने के मामले की जांच कर रहे दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय ने अपनी रिपोर्ट भारत के प्रधान न्यायाधीश जस्टिस संजीव खन्ना को सौंप दी है। सीजेआई इस जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई करेंगे। दिल्ली हाई कोर्ट के वरिष्ठ जज यशवंत वर्मा उस वक्त चर्चा में आए, जब उनके सरकारी आवास से बड़े पैमाने पर नकदी मिलने की खबर सामने आईं।
भारतीय नौसेना और तटरक्षक बल ने समुद्र में साहसिक बचाव अभियान संचालित किया
नई दिल्ली | भारतीय नौसेना ने 21 मार्च 2025 की सुबह गोवा से लगभग 230 समुद्री मील पश्चिम में स्थित पनामा के ध्वज वाला भारी सामान ले जाने में सक्षम बल्क कैरियर एमवी हेइलन स्टार से एक महत्वपूर्ण चिकित्सा निकासी (एमईडीईवीएसी) अभियान सफलतापूर्वक संचालित किया।
मुंबई स्थित भारतीय तटरक्षक बल के समुद्री बचाव समन्वय केंद्र (एमआरसीसी) ने 20/21 मार्च, 2025 की रात को भारतीय नौसेना को सूचित किया था कि एमवी हेइलन स्टार के चार चालक दल के सदस्य गंभीर रूप से जल गए हैं और उन्हें तत्काल उन्नत चिकित्सा देखभाल की आवश्यकता है।

भारतीय नौसेना ने त्वरित प्रतिक्रिया करते हुए दो जहाजों आईएनएस विक्रांत और दीपक को उनकी तैनाती से हटाकर सहायता प्रदान करने के लिए भेजा था।
आईएनएस विक्रांत के एक सीकिंग हेलीकॉप्टर ने 21 मार्च, 2025 की सुबह में तीन घायल चालक दल के सदस्यों यानी कि दो चीनी और एक इंडोनेशियाई नागरिक को एमवी हेइलन स्टार से निकालने के लिए एक चुनौतीपूर्ण कार्य किया। दुर्भाग्यवश, चौथे सदस्य की चोटों के कारण पहले ही मृत्यु हो चुकी थी। चालक दल के बचाए गए सदस्यों को तुरंत गोवा स्थित आईएनएस हंसा ले जाया गया, जहां से उन्हें आगे की चिकित्सा देखभाल के लिए सिविल अस्पताल में स्थानांतरित कर दिया गया।

यह ऑपरेशन चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद, जीवन रक्षक प्रयासों और मानवीय सहायता के लिए त्वरित प्रतिक्रिया के प्रति भारतीय नौसेना तथा भारतीय तटरक्षक बल की अटूट प्रतिबद्धता को उजागर करता है। यह अभियान राष्ट्रीय समुद्री सीमाओं से परे होने के कारण और भी कठिन था।
ग्वालियर रेडीमेड गारमेंट पार्क की 7 एवं मुरैना पिपरसेवा की 11 इकाईयों का भूमि-पूजन
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश के औद्योगिक विकास का जो सपना देखा है, चंबल क्षेत्र उसमें सुनहरा अध्याय लिख रहा है। चंबल की भूमि उपजाऊ है, कमाऊ है, साथ ही टिकाऊ भी है। चंबल जैसा टिकाऊ जज्बा और कहीं देखने को नहीं मिलता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शुक्रवार को भिण्ड जिले के मालनपुर में एक हजार करोड़ रूपए की लागत से एलिक्सर इण्डस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड की आधुनिक मेगा इकाई का भूमि-पूजन करते हुए यह बात कही। इस मौके पर रेडीमेड गारमेंट ग्वालियर की 7 इकाईयों और मुरैना जिले के औद्योगिक क्षेत्र पिपरसेवा की 11 इकाईयों का भी भूमिपूजन किया है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि चंबल अब विकास के नाम से पहचाना जाता है। इस क्षेत्र में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सोच और प्रदेश सरकार के संकल्प के कारण अनेक औद्योगिक इकाईयां प्रारंभ हुई हैं। इन औद्योगिक इकाईयों के प्रारंभ होने से बेरोजगार युवकों को रोजगार उपलब्ध हो रहा है। कार्यक्रम में प्रदेश के पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री प्रहलाद पटेल, नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री राकेश शुक्ला, जिला पंचायत अध्यक्ष कामना सिंह भदौरिया, राष्ट्रीय अनुसूचित जातिआयोग के अध्यक्ष लाल सिंह आर्य, विधायक गोहद केशव देसाई, लहार विधायक अम्बरीश शर्मा, देवेन्द्र सिंह नरवरिया एवं एलिक्सर इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड के चेयरमेन अरुण गोयल सहित क्षेत्रीय जन-प्रतिनिधिगण एवं बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित थे। ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर कार्यक्रम में वर्चुअलउपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में औद्योगिक विकास के लिये हर संभव कार्य किया जा रहा है। इन्वेस्टर्स समिट व रीजनल इंडस्ट्रीज कॉन्क्लेव से न केवल देश बल्कि विदेशों से भी इन्वेस्टर्स को आमंत्रित करने का कार्य किया गया है, जिसके सार्थक परिणाम भी परिलक्षित हो रहे हैं। ग्वालियर-चंबल संभाग में भी अनेक औद्योगिक इकाइयां स्थापित हो रही हैं, जिनके माध्यम से ग्वालियर-चंबल संभाग के युवाओं को बेहतर रोजगार उपलब्ध होगा।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में औद्योगिक विकास के साथ ही किसानों के हित में भी अनेक निर्णय लिए गए हैं। चंबल-कालीसिंध-पार्वती (पीकेसी) लिंक परियोजना क्षेत्र में खुशहाली लेकर आयेगी। इस परियोजना से चंबल को सर्वाधिक लाभ प्राप्त होगा।
पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री एवं भिण्ड जिले के प्रभारी मंत्री पटेल ने कहा कि चंबल क्षेत्र औद्योगिक रूप से विकसित हो रहा है। यह हम सबके लिये प्रसन्नता की बात है। औद्योगिक विकास से न केवल क्षेत्र का आर्थिक विकास होगा, बल्कि यहां के युवाओं को बेहतर रोजगार भी उपलब्ध होंगे। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के प्रयासों से मालनपुर में एक हजार करोड रूपए के निवेश से जो नई इकाई प्रारंभ हो रही है, वह इस क्षेत्र के विकास में नया अध्याय लिखेगी। ग्वालियर-चंबल संभाग के साथ-साथ सम्पूर्ण प्रदेश में औद्योगिक विकास का बेहतर माहौल बना है, जिसके सार्थक परिणाम हमें सम्पूर्ण प्रदेश में दिखाई दे रहे हैं।
डॉ. मनसुख मांडविया ने दूसरे खेलो इंडिया पैरा गेम्स का उद्घाटन किया
जब कोई दृढ़ निश्चय कर लेता है, सही दिशा में आगे बढ़ता है और कड़ी मेहनत करता है, तो परिणाम हमेशा सकारात्मक होता है - डॉ. मांडविया
खेलो इंडिया पैरा गेम्स के माध्यम से, हमारे एथलीटों को सर्वश्रेष्ठ अवसर मिल रहे हैं और वे सफलता के मार्ग पर आगे बढ़ रहे हैं - डॉ. मांडविया
केन्द्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया और डॉ. वीरेन्द्र कुमार की उपस्थिति में पांच पैरालिंपियन ने अनूठी मशाल रैली में भाग लिया |
नई दिल्ली | केन्द्रीय युवा कार्य एवं खेल तथा श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने नई दिल्ली में इंदिरा गांधी स्टेडियम परिसर के केडी जाधव इंडोर हॉल में दूसरे खेलो इंडिया पैरा गेम्स 2025 की शुरुआत की घोषणा की। आठ दिन तक चलने वाली इस चैंपियनशिप में छह खेल विधाओं में 1300 से अधिक पैरा एथलीट हिस्सा लेंगे।

छह पैरालिंपियन - सिमरन शर्मा (एथलेटिक्स), प्रवीण कुमार (बैडमिंटन), नितेश कुमार (बैडमिंटन), नित्या (बैडमिंटन) और प्रीति पाल (एथलेटिक्स) खेलो इंडिया पैरा गेम्स 2025 को औपचारिक रूप से हरी झंडी दिखाने के लिए केन्द्रीय युवा कार्य और खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया, केन्द्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेन्द्र कुमार, अरुणाचल प्रदेश के खेल और युवा कार्य मंत्री केंटो जिनी और भारतीय पैरालंपिक समिति के अध्यक्ष और पूर्व पैरालिंपियन देवेंद्र झाझरिया के साथ एक अनूठी मशाल रैली में शामिल हुए।
डॉ. मनसुख मांडविया ने कहा कि वह खेलो इंडिया के हर आयोजन को मिल रही प्रतिक्रिया को देखकर उत्साहित हैं, जो अब देश के लिए सम्मान जीतने के इच्छुक सभी एथलीटों के लिए “प्रतिष्ठा” बन गया है। डॉ. मांडविया ने कहा, “खेलो इंडिया द्वारा भारतीय खेलों में दिए गए योगदान से मैं बेहद गर्वित और उत्साहित हूं। चाहे वह खेलो इंडिया यूथ गेम्स हो, खेलो इंडिया स्कूल गेम्स हो, खेलो इंडिया विंटर गेम्स हो या खेलो इंडिया पैरा गेम्स हो, हमारे एथलीट हर जगह अपनी प्रतिभा से देश को गौरवान्वित कर रहे हैं।”
डॉ. मांडविया ने आगे कहा, "जब कोई दृढ़ निश्चय कर लेता है, सही दिशा में आगे बढ़ता है और कड़ी मेहनत करता है, तो परिणाम हमेशा सकारात्मक होता है। पेरिस पैरालिंपिक 2024 में मिली सफलता, जहाँ हमने कुल 29 पदक जीते, ने साबित कर दिया कि हमारे एथलीटों में देश को वैश्विक मंच पर गौरवान्वित करने की क्षमता है। खेलो इंडिया पैरा गेम्स के माध्यम से हमारे एथलीटों को बेहतरीन अवसर मिल रहे हैं और वे सफलता का मार्ग प्रशस्त कर रहे हैं। यह बिल्कुल वैसा ही है जिसकी हमारे माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कल्पना की थी।"
डॉ. कुमार ने भी खेलो इंडिया पहल की सराहना की और कहा, "खेलो इंडिया पैरा गेम्स 2025 भारतीय एथलीटों के लिए एक दूसरे के साथ प्रतिस्पर्धा करने और अपनी प्रतिभा को सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करने के लिए एक विश्व स्तरीय मंच है। साथ ही, यह पैरा एथलीटों को न केवल खुद को साबित करने का मौका देता है, बल्कि अपनी चुनौतीपूर्ण यात्रा के माध्यम से दूसरों को प्रेरित भी करता है।"
उद्घाटन समारोह में देश भर से एथलीट, कोच और सहयोगी स्टाफ शामिल हुए। सचिव (खेल) सुजाता चतुर्वेदी और भारतीय खेल प्राधिकरण के वरिष्ठ अधिकारी भी उद्घाटन समारोह में मौजूद थे।
खेलो इंडिया पैरा गेम्स, खेलो इंडिया मिशन का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य प्रतिभाशाली एथलीटों को अपने खेल और प्रतिस्पर्धी कौशल का प्रदर्शन करने के लिए एक मंच प्रदान करना है। दिसम्बर 2023 में आयोजित खेलो इंडिया पैरा गेम्स का पहला संस्करण पैरा-एथलीटों को राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा दिखाने में सक्षम बनाने के लिए आयोजित किया गया था। खेल नई दिल्ली में तीन स्थानों पर सात खेल विधाओं में खेले गए। राजधानी में तीन स्थानों पर 20-27 मार्च, 2025 के बीच आयोजित होने वाले केआईपीजी के दूसरे संस्करण में छह विधाएँ - पैरा-एथलेटिक्स, पैरा तीरंदाजी, पैरा पावरलिफ्टिंग, पैरा बैडमिंटन, पैरा टेबल टेनिस और पैरा शूटिंग - आयोजित की जाएँगी।
भारत सरकार देश में चिप डिजाइनिंग का लोकतंत्रीकरण कर रही है : भारत के सेमीकंडक्टर का दौर आ चुका
विजेताओं की घोषणा: 'एनालॉग और डिजिटल डिज़ाइन हैकथॉन' (2,210 टीमों, 10,040 छात्रों ने भाग लिया)
स्वदेशीकरण को बढ़ावा: मेसर्स वर्वेसेमी माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स प्राइवेट लिमिटेड 90% बीओएम के साथ बीएलडीसी मोटर कंट्रोलर चिप डिजाइन करेगा, जो ‘मेड इन इंडिया’ होगा
अगली बड़ी छलांग: ‘डिजिटल इंडिया आरआईएससी-वी (डीआईआर-वी) ग्रैंड चैलेंज’ का शुभारंभ
नई दिल्ली | चिप डिज़ाइन को एक रणनीतिक आवश्यकता मानते हुए, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) अपनी श्रृंखलाबद्ध एवं सक्रिय पहलों के साथ, पूरे देश में 300 से अधिक संगठनों (जिसमें 250 शैक्षणिक संस्थान और 65 स्टार्ट-अप कंपनियां शामिल हैं) में सेमीकंडक्टर डिज़ाइन दृष्टिकोण को व्यवस्थित करने की प्रक्रिया में है। इन कदमों का उद्देश्य रचनात्मक सक्षमता वाले युग की शुरुआत करना है, जहां देश में कहीं से भी, स्वभाविक कौशल वाला कोई भी व्यक्ति सेमीकंडक्टर चिप्स डिज़ाइन कर सकता है। इस प्रक्रिया में, माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दृष्टिकोण के अनुरूप कि 'भारत में डिज़ाइन उतना ही महत्वपूर्ण है जितना मेक इन इंडिया', चिप डिज़ाइन को लोकतांत्रिक बनाया जाएगा।

सी2एस कार्यक्रम का उद्देश्य सेमीकंडक्टर चिप डिजाइन में विशेषज्ञता प्राप्त बी.टेक, एम.टेक और पीएचडी स्तर पर उद्योग-अनुकूल 85,000 मानव संसाधन तैयार करना है। यह कार्यक्रम चिप डिज़ाइन, निर्माण एवं परीक्षण में छात्रों को पूर्ण व्यावहारिक अनुभव प्रदान करके एक समग्र दृष्टिकोण अपनाता है। इसे नियमित प्रशिक्षण सत्रों के माध्यम से उद्योग सहयोगियों की भागीदारी से प्राप्त किया जाता है, और छात्रों को चिप डिज़ाइन, निर्माण और परीक्षण संसाधनों, जैसे ईडीए उपकरणों, अपने चिप्स के निर्माण के लिए सेमीकंडक्टर फ़ाउंड्रीज़ तक पहुंच प्रदान करके मेंटॉरशिप और सहायता प्रदान किया जाता है। इन अवसरों में एएसआईसी, एसओसी और आईपी कोर डिजाइनों के कार्यशील प्रोटोटाइप के विकास के लिए अनुसंधान एवं विकास परियोजनाओं का कार्यान्वयन शामिल है।
चिपइन केंद्र सी2एस कार्यक्रम के अंतर्गत स्थापित किया गया है, यह सी-डैक में स्थापित सबसे बड़े सुविधाओं में से एक है, जिसका लक्ष्य देश में सेमीकंडक्टर डिज़ाइन समुदाय के दरवाज़े पर चिप डिज़ाइन अवसंरचना लाना है। यह एक केंद्रीकृत डिजाइन सुविधा है, जो न केवल 5एनएम या उन्नत नोड तक जाने वाले संपूर्ण चिप डिजाइन चक्र के लिए सबसे उन्नत उपकरणों की मेजबानी करती है, बल्कि फाउंड्री और पैकेजिंग में डिजाइन के निर्माण के लिए समग्र सेवाएं भी प्रदान करती है।
‘बीएलडीसी कंट्रोलर चिप’ की निम्नलिखित विशेषताएं हैं: आत्मनिर्भर सेमीकंडक्टर समाधान के लिए 90% बीओएम भारत में निर्मित, 1.50 डॉलर से कम में पूर्ण पावर एवं नियंत्रण समाधान तथा 10 मिलियन यूनिट/वर्ष की स्केलेबिलिटी आदि।
वर्वेसेमी एक फेबलेस सेमीकंडक्टर कंपनी है जिसकी स्थापना 2017 में हुई और यह अत्याधुनिक डेटा कन्वर्टर्स और विभेदित एनालॉग आईपी की विशेषज्ञता का उपयोग करते हुए सेंसर और वायरलेस के लिए उच्च प्रदर्शन करने वाली एएसआईसी विकसित कर रही है। वर्वेसेमी के आईसी को सैमसंग, यूएमसी, टीएसएमसी, एसएमआईसी पीएसएमसी के 8एनएम, 22एनएम, 28एनएम, 40एनएम, 55एनएम, 90एनएम, 180एनएम, 110एनएम नोड पर प्राप्त किया गया है।
“देश ने सेवा उद्योग में महत्वपूर्ण उपलब्धियां प्राप्त की हैं और यह लगातार आगे बढ़ रहा है, इसलिए अब इसे एक उत्पादक राष्ट्र बनना चाहिए। सॉफ़्टवेयर और हार्डवेयर उत्पादों के विकास पर आज की घोषणाएं उस लक्ष्य की प्राप्ति की ओर कुछ सफल कदम हैं।”
ये समाधान एक व्यापक श्रेणी के हिस्सेदारों से आने चाहिए, जिसमें सभी स्तरों के विश्वविद्यालय, स्टार्ट-अप, छात्रों एवं शोधकर्ताओं कीच भागीदारी शामिल है, न कि केवल कुछ चुनिंदा लोगों की।
इन समाधानों को प्राप्त करने के लिए वृद्धिशील लेकिन प्रगतिशील दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है। कुछ चिप्स का मूल्य कम हो सकता है लेकिन उनका वितरण संभावना उच्च हो सकता है, जबकि अन्य का मूल्य उच्च हो सकता है लेकिन वितरण संभावना सीमित हो सकती है। पूरे स्पेक्ट्रम को लक्षित करना चाहिए। आज घोषित बीएलडीसी कंट्रोलर चिप विकास में महत्वपूर्ण मात्रा तैनाती की क्षमता है, आरआईएससी-वी, जो ओपन-सोर्स है, सीपीयू, जीपीयू और देश के लिए स्थायी उत्पादों के डिज़ाइन में इसके उपयोग के कारण बहुत उच्च मूल्य रखता है।
भारत आज नए उद्यमियों एवं शोधकर्ताओं के लिए सेमीकंडक्टर सिस्टम, उपकरणों और भविष्य के उत्पादों को डिजाइन और पुनः परिभाषित करने के क्षेत्र में अग्रणी होने का एक महत्वपूर्ण अवसर प्रस्तुत करता है। भारत सरकार और एमईआईटीवाई का "चिप्स टू स्टार्ट-अप (सी2एस) कार्यक्रम" देश की मजबूत एवं आत्म-निर्भर सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण की अविचल प्रतिबद्धता के अनुरुप है, जो इंजीनियरों, शोधकर्ताओं एवं उद्यमियों की अगली पीढ़ी को भारत की तकनीकी प्रगति को आगे बढ़ाने और देश को एक वैश्विक शक्ति के रूप में विकसित करने के लिए सशक्त बना रहा है।
सबके जीवन में खुशहाली लाना ही हमारा मूल लक्ष्य: मुख्यमंत्री डॉ. यादव
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सुख और दुःख मनुष्य के जीवन से उसी तरह जुड़े हैं, जैसे दिन के बाद रात। सुख-दुख जीवन के अभिन्न अंग हैं। लोक कल्याणकारी राज्य का प्रथम कर्तव्य है कि वह अपने नागरिकों के जीवन में खुशहाली लेकर आये। हमारी सरकार इसी दिशा में कार्य कर रही है। सबका कल्याण ही हमारा मूल लक्ष्य है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि त्याग, तप, साधना, बलिदान, असंचय, अपरिग्रह और निस्वार्थ सेवा भाव से मन की शांति ही सुख है। प्रकृति के सानिध्य में जब मन, परमात्मा के भावों में लीन हो जाता है, तब ही तादात्म्य ही सच्चा सुखानंद प्राप्त होता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुरुवार को कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आनंद विभाग द्वारा आयोजित दो दिवसीय नेशनल हैप्पीनेस कार्यशाला को संबोधित करते हुए ये विचार व्यक्त किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेशवासियों के जीवन में सुख-समृद्धि लाने की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि प्रदेश के सभी नागरिकों के जीवन में उल्लास भरने के लिए हमारी सरकार जी-जान से जुटी है।
कार्यक्रम में म.प्र. जन अभियान परिषद के उपाध्यक्ष डॉ. मोहन नागर, श्री रामकृष्ण मिशन, बेलूर मठ, कोलकाता से आए स्वामी श्री समर्पणानन्द जी, पंजाब तकनीकी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रजनीश अरोड़ा, आईआईएम इंदौर के पूर्व निदेशक डॉ. एन. रविचन्द्रन, प्रमुख सचिव, आनंद विभाग श्री राघवेन्द्र कुमार सिंह, राज्य आनंद संस्थान के सीईओ श्री आशीष कुमार गुप्ता सहित बड़ी संख्या में सुधिजन एवं आनंदक उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश के हर नागरिक के जीवन में हर्ष, आनंद और खुशहाली लाना हमारी प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार जनहितैषी योजनाओं के माध्यम से प्रदेश के हर वर्ग को लाभान्वित कर रही है। नागरिकों के जीवन में खुशहाली और संतोष ही हमारी सबसे बड़ी सफलता है। उन्होंने कहा कि कष्ट सहकर भी जीवन देने का सुख पाये, वो है माता और साधक बनकर भी जीवन का असीम सुख पाये वो है सन्यासी। कष्ट में भी सुख है, इसलिए जीवन का मर्म समझिए कि परमात्मा ने हम सबको आनंद में जीवन जीने के लिए इस धरा पर भेजा है, इसलिए जीवन को आनंदमय होकर ही जियें।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे सकारात्मक दृष्टिकोण से सरकार के साथ मिलकर एक खुशहाल समाज के निर्माण में योगदान दें। आनंद विभाग के तत्वावधान में आयोजित इस दो दिवसीय नेशनल हैप्पीनेस सेमिनार का उद्देश्य आनंद के नए आयाम और नित नई परिस्थितियों में आनंद की खोज करना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के समक्ष राज्य आनंद संस्थान भोपाल एवं म.प्र. जन अभियान परिषद के बीच एम.ओ.यू (समझौता ज्ञापन) का आदान-प्रदान हुआ। यह समझौता ज्ञापन मात्र प्रपत्रों का आदान-प्रदान न होकर दो जमीन स्तर से प्रभावी संगठनों के समन्वय की महत्वाकांक्षी पहल है। यह समझौता दोनों विभागों के बीते एक वर्ष में कुल 24 हजार 310 और बीते तीन वर्षों में 72 हजार 390 लोगों के जीवन में स्वैच्छिकता और आनंद का कारक बना।
एएफएमएस और निम्हांस, बेंगलुरु में सहयोगात्मक अनुसंधान और प्रशिक्षण के लिए समझौता
नईदिल्ली। देश के रक्षा कर्मियों के मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए सशस्त्र बल चिकित्सा सेवा (एएफएमएस) और राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य और तंत्रिका विज्ञान संस्थान (निम्हांस) ने सहयोगात्मक अनुसंधान और प्रशिक्षण के लिए समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। इसका उद्देश्य सशस्त्र बलों के लिए मानसिक स्वास्थ्य सहायता और देखभाल को बढ़ाना है।
सशस्त्र बल चिकित्सा सेवा के महानिदेशक सर्जन वाइस एडमिरल आरती सरीन, एवीएसएम, वीएसएम और निम्हांस की निदेशक डॉ प्रतिमा मूर्ति ने एक समारोह में इस समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर दोनों संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। एएफएमएस और निम्हांस के बीच यह सहयोग मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने, चिकित्सा कर्मियों के लिए विशेष प्रशिक्षण आयोजित करने और सैनिकों, नाविकों, वायुसैनिकों, उनके परिवारों तथा आश्रितों के मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं को दूर करने के लिए अभिनव कार्यक्रम विकसित करने पर केंद्रित होगा।
समझौता ज्ञापन के मुख्य उद्देश्यों में सहयोगात्मक अनुसंधान, संकाय आदान-प्रदान और शैक्षणिक गतिविधियां शामिल हैं। न्यूरोसाइकियाट्री में अपनी विशेषज्ञता के साथ, निम्हांस सैन्य कर्मियों को उन्नत मनोचिकित्सा देखभाल और सहायता पर अनुसंधान करने में सहायता प्रदान करेगा, जो पोस्ट ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (पीटीएसडी), चिंता और अवसाद जैसे सामान्य समस्याओं से छुटकारा दिलाएगा।
सर्जन वीएडम आरती सरीन ने एक बयान में कहा कि हमारे सैनिकों का मानसिक स्वास्थ्य उनके शारीरिक स्वास्थ्य जितना ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि निम्हांस के साथ यह साझेदारी सुनिश्चित करेगी कि हमारे कर्मियों को हमारे देश की सेवा करते समय आने वाली चुनौतियों से निपटने में सर्वोत्तम संभव सहायता मिले।
निम्हांस की निदेशक डॉ प्रतिमा मूर्ति ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य देखभाल में संस्थान की विशेषज्ञता को रक्षा क्षेत्र में लाने के लिए सशस्त्र बल चिकित्सा सेवाओं के साथ सहयोग करना सम्मान की बात है। इसका उद्देश्य हमारे देश की सेवा करने वालों को विश्व स्तरीय चिकित्सकीय सहायता प्रदान करना होगा, यह सुनिश्चित करना होगा कि उन्हें वह मानसिक स्वास्थ्य देखभाल मिले जिसके वे हकदार हैं।
यह सहयोगी उपक्रम सशस्त्र बलों के कर्मियों के लिए मानसिक स्वास्थ्य के महत्व को पहचानने में महत्वपूर्ण कदम है। इससे देश भर में इसी तरह की पहल के लिए एक बेंचमार्क स्थापित होने की उम्मीद है। दोनों संगठन व्यापक मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं जो सशस्त्र बलों के समग्र कल्याण में योगदान करती हैं।
करीला धाम के विकास के लिए एक करोड़ रूपये की राशि करेंगे स्वीकृत : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सरकार भगवान श्रीराम के प्रदेश में विभिन्न आगमन स्थलों के संरक्षण और उन्नयन का कार्य कर रही है। इसके साथ ही प्रदेश में भगवान श्रीकृष्ण लीला-स्थलों को तीर्थ के रूप में विकसित करने के लिये श्रीकृष्ण पाथेय योजना को क्रियान्वित करने का काम भी किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि करीला धाम में भी श्रृद्धालुओं को आवश्यक मूलभूत सुविधाओं को और अधिक बेहतर बनाने के लिए एक करोड़ रूपये की राशि स्वीकृत की जायेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बुधवार को अशोकनगर के करीला धाम में माँ जानकी के दर्शन कर पूजा-अर्चना की और प्रदेशवासियों के सुख-समृद्धि की कामना की। उन्होंने रंगपंचमी के पावन पर्व पर श्रृद्धालुओं के साथ फूलों की होली भी खेली।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि करीला धाम में श्रृद्धालुओं के लिए आवश्यक सुविधाओं का विस्तार किया जायेगा। मेले की व्यवस्थाओं को और अधिक पुख्ता किया जायेगा, यह प्रयास किया जायेगा कि करीला धाम मेला राष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाये। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में करीला धाम में आने जाने वाले मार्गों पर श्रृद्धालुओं के लिए छाया की व्यवस्था की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का संबंध चंदेरी से होने के कारण यहां की गढ़ी को भव्य बनाया जायेगा।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भगवान श्रीराम, माता जानकी और रघुकुल के आदर्शों का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके द्वारा स्थापित किये गये आदर्श संपूर्ण समाज के लिए प्रेरणादायक है। उन्होंने कहा कि करीला धाम की दिव्यता और आध्यात्मिक ऊर्जा ऐसी है कि एक बार जो यहां आता है, वह स्वयं को बार-बार आने से रोक नहीं पाता। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राई नृत्य का जिक्र करते हुए कहा कि जब भगवान श्रीराम के घर में लव-कुश का जन्म हुआ होगा, तब इसे 'रघुराई नृत्य' कहा जाता रहा होगा।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसानों को 175 रूपये बोनस देकर 2600 रूपये क्विंटल गेहूं खरीदा जा रहा है। धान पर भी 4000 रूपये प्रति हेक्टेयर अनुदान किसानों को मिलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सरकार दूध उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए 'गोपाल योजना' प्रारंभ कर रही है। उन्होंने कहा कि 10 से अधिक गाय पालने वालों को सरकार अनुदान देगी। सहकारी संस्थाओं के माध्यम से दूध पर 5 रूपये प्रति लीटर की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी। वर्तमान में मध्यप्रदेश दूध उत्पादन में देश में तीसरे स्थान पर है। हमने प्रदेश को पहले स्थान पर लाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
देश का पहला पीपीपी ग्रीन वेस्ट प्रोसेसिंग प्लांट इंदौर में स्थापित किया जाएगा
नई दिल्ली | स्वच्छ भारत मिशन-शहरी के अंतर्गत सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के माध्यम से देश के पहले हरित अपशिष्ट प्रसंस्करण संयंत्र के शुभारंभ के साथ एक प्रमुख उपलब्धि हासिल करने के लिए तैयार है।
स्वच्छ भारत मिशन-शहरी के तहत भारत के पहले पीपीपी-मॉडल आधारित हरित अपशिष्ट प्रसंस्करण संयंत्र के शुभारंभ के साथ इंदौर पर्यावरणीय स्थिरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रगति के लिए तैयार है। इस अभूतपूर्व पहल का उद्देश्य हरित अपशिष्ट को मूल्यवान संसाधनों में परिवर्तित करके शहर की अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली में क्रांतिकारी बदलाव लाना है। यह परियोजना शहरी अपशिष्ट चुनौतियों से निपटने में नवाचार और स्थिरता के लिए शहर की प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है।

यह सुविधा न केवल हरित अपशिष्ट को संसाधित करेगी बल्कि राजस्व भी उत्पन्न करेगी, इंदौर नगर निगम (आईएमसी) लकड़ी और शाखाओं की आपूर्ति के लिए प्रति टन रॉयल्टी के रूप में लगभग 3,000 रुपये कमाएगा। बिचोली हप्सी में 55,000 वर्ग फीट भूमि पर निर्मित, यह संयंत्र लकड़ी और शाखाओं को रीसाइकिल करके लकड़ी की पट्टियां बनाएगा, जो कोयले के विकल्प के रूप में काम करेगा और ऊर्जा संरक्षण को बढ़ावा देगा।
बड़े पेड़ों की शाखाओं को सिटी फ़ॉरेस्ट में हरित अपशिष्ट प्रसंस्करण संयंत्र में भेजा जाएगा, जहाँ उन्हें मूल्यवान उत्पादों में बदला जाएगा। इसके अलावा, प्रमुख संस्थानों के परिसर से उत्पन्न होने वाले हरे कचरे को सीधे एकत्र किया जाएगा और एक निश्चित शुल्क के साथ संयंत्र में भेजा जाएगा। प्रति दिन, इंदौर जैसे व्यस्त शहर में लगभग 30 टन हरा कचरा- लकड़ी, शाखाएं, पत्तियां और फूल निकलता है। जैसे-जैसे मौसम बदलता है, खासकर शरद ऋतु के दौरान यह मात्रा 60 से 70 टन तक बढ़ सकती है।
इंदौर नगर निगम के साथ साझेदारी करते हुए, एस्ट्रोनॉमिकल इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड ने शहर के हरे कचरे को स्थायी और मूल्यवान वस्तुओं में बदलने की महत्वाकांक्षी पहल की है - एक ऐसा महीन चूरा जिसका उपयोग विभिन्न उद्योगों में किया जा सकता है। एक विस्तृत योजना के साथ, विचार यह है कि हरे कचरे को तीन से चार महीने की अवधि में सुखाया जाए। इस समय के दौरान, नमी की मात्रा 90 प्रतिशत तक कम हो जाएगी, जिससे सामग्री अगले चरण के लिए तैयार हो जाएगी। जैसे-जैसे महीने बीतते जाएंगे, हरा कचरा, जो कभी नम होता था, लगभग परिवर्तन के लिए तैयार हल्का और भंगुर हो जाएगा। अत्याधुनिक मशीनें फिर इसे बारीक धूल कणों में तोड़ने में मदद करेंगी। कभी लकड़ी मिलों का एक साधारण उत्पाद अब एक टिकाऊ, चक्रीय अर्थव्यवस्था में योगदान दे रहा है।
बुरादे को पर्यावरण के अनुकूल ईंधन में बदला जा सकता है, जो पारंपरिक जलाने के तरीकों का एक स्वच्छ विकल्प प्रदान करता है। इसका उपयोग टिकाऊ पैकिंग सामग्री बनाने के लिए किया जा सकता है, जो प्लास्टिक की आवश्यकता को कम करता है। फर्नीचर निर्माता इसे एक मिश्रित सामग्री के रूप में उपयोगी पाते हैं, जो कुर्सियों और मेजों जैसे उत्पादों को मजबूती प्रदान करता है। बुरादे से बने उर्वरक मिट्टी को समृद्ध करते हैं, जिससे किसानों को अच्छी फसलें उगाने में मदद मिलती है और खाद्य उद्योग में बुरादे को डिस्पोजेबल प्लेटों में ढाला जा सकता है, जो प्लास्टिक और स्टायरोफोम का एक बायोडिग्रेडेबल विकल्प प्रदान करता है।
स्वच्छ भारत मिशन के तहत, आईएमसी प्लांट तक भूमि और हरित अपशिष्ट उपलब्ध कराने और परिवहन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इस बीच, निजी कंपनी शेड, बिजली और पानी की सुविधाओं सहित शेष बुनियादी ढांचे को स्थापित करने की जिम्मेदारी लेगी। निजी फर्म प्लांट की पूरी स्थापना और संचालन की देखरेख भी करेगी, ताकि शुरू से अंत तक इसका सुचारू संचालन सुनिश्चित हो सके।
यह परियोजना कोयले का एक वैकल्पिक स्रोत भी उपलब्ध कराएगी, जो स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के लिए एक प्रभावी समाधान प्रदान करते हुए वायु गुणवत्ता सूचकांक नियंत्रण में योगदान देगी। यह पहल स्वच्छ भारत मिशन-शहरी के तहत कचरा मुक्त शहरों के दृष्टिकोण के अनुरूप है, जो एक स्वच्छ, हरित और अधिक स्थिरता शहरी पर्यावरण की दिशा में प्रयासों को आगे बढ़ाती है।
ट्रेनों की आवागमन क्षमता विस्तार से जुड़े कार्य हर बड़े शहर में चल रहे : रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव
नई दिल्ली | रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को लोकसभा में बताया कि देश के हर बड़े शहर के स्टेशनों पर ट्रेनों की आवागमन की क्षमता बढ़ाने के प्रयास किये जा रहे हैं। वैष्णव ने प्रश्नकाल में एक सवाल के जवाब में बताया कि महाराष्ट्र के पुणे शहर के लिये ट्रेन चलाने की मांग देश के हर क्षेत्र से आती रहती है, इसके मद्देनजर पुणे में ट्रेनों के आवागमन की क्षमता बढ़ाने के लिये चार स्टेशनों पर कार्य चल रहा है।

उन्होंने कहा कि इसी तरह देश के हर बड़े स्टेशन पर ट्रेनों की आवागमन की क्षमता बढ़ाने के प्रयास किये जा रहे हैं। यह क्षमता बढ़ जाने से इन स्टेशनों पर और रेलगाड़ियों के आने-आने की व्यवस्था की जा सकेगी। उन्होंने बताया कि छत्रपति शिवाजी महाराज से जुड़े स्थलों को भारत गौरव सर्किट से जोड़ा जायेगा। रेल मंत्री ने बताया कि देश के अनेक क्षेत्रों से स्टेशनों पर गाड़ियों के ठहराव के आग्रह आते रहते हैं, लेकिन तकनीकी और सुरक्षा कारणों को ध्यान में रखते हुये ही इस बारे में निर्णय लिये जाते हैं।
जैविक खेती पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी सह प्रदर्शनी
स्वस्थ जीवन के लिए सुरक्षित भोजन”
नई दिल्ली | राष्ट्रीय जैविक एवं प्राकृतिक खेती केंद्र (एनसीओएनएफ), गाजियाबाद द्वारा 18-19 मार्च 2025 को गाजियाबाद में "जैविक खेती पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी सह प्रदर्शनी" का आयोजन किया गया। कार्यक्रम और प्रदर्शनी का उद्घाटन मुख्य अतिथि के.एम.एस. खालसा, निदेशक (वित्त) - कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार, डॉ. गगनेश शर्मा, निदेशक, एनसीओएनएफ, और डॉ. ए.के. यादव, सलाहकार, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा किया गया। इस अवसर पर पद्मश्री डॉ. भारत भूषण त्यागी, बंसी गिर गौशाला, अहमदाबाद से गोपाल भाई सुतारिया और एनसीओएनएफ एवं आरसीओएनएफ के अधिकारी उपस्थित थे।

मुख्य अतिथि के.एम.एस. खालसा ने अपने विचार-विमर्श में जैविक खेती के महत्व और आज की दुनिया में इसके बढ़ते महत्व पर जोर दिया। उन्होंने आश्वासन दिया कि जैविक और प्राकृतिक खेती से संबंधित प्रस्तावों के प्रचार और कार्यान्वयन के लिए प्राथमिकता पर विचार किया जाएगा। इस अवसर पर "जैविक खेती की पुस्तिका" और "स्मारिका" का भी विमोचन किया गया।
एनसीओएनएफ के निदेशक डॉ. गगनेश शर्मा ने मुख्य भाषण दिया। उन्होंने जैविक और प्राकृतिक खेती के क्षेत्र में एनसीओएनएफ की वर्तमान स्थिति और उपलब्धियों को रेखांकित किया। डॉ. शर्मा ने प्रमाणीकरण, जैविक इनपुट गुणवत्ता प्रबंधन के महत्व पर भी चर्चा की और किसानों की आय बढ़ाने में मदद करने के लिए जैविक और प्राकृतिक उत्पादों के विपणन के संभावित अवसरों पर प्रकाश डाला।
डॉ. ए.के. यादव ने भारत में जैविक खेती की स्थिति पर जानकारी साझा की और किसानों तथा हितधारकों को घरेलू तथा अंतर्राष्ट्रीय बाजारों के लिए जैविक उत्पादों के उत्पादन तथा प्रसंस्करण में भाग लेने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि यह किसानों के साथ-साथ देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में भी सहायक होगा।
पद्मश्री डॉ. भारत भूषण त्यागी ने गांव में क्लस्टर आधारित दृष्टिकोण के रूप में जैविक खेती को बढ़ावा देने के बारे में बात की। उन्होंने जैविक खेती की अनुकूलता में सुधार करने और अधिक भूमि को जैविक प्रमाणीकरण के तहत लाने के लिए गांव क्लस्टर-आधारित दृष्टिकोण से आगे बढ़ने पर जोर दिया।
गोपाल भाई सुतारिया ने गाय आधारित प्राकृतिक खेती के महत्व और इसकी संभावनाओं पर ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने “गौकृपा कृषि” पद्धति पेश किया, जिसमें बताया गया कि किसान किस तरह प्राकृतिक और जैविक खेती के तरीकों को अपना सकते हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि यह पद्धति सभी हितधारकों के लिए निःशुल्क उपलब्ध होगी।
दो दिवसीय सम्मेलन में कुल चार सत्र हुए, जिनमें जैविक खेती से संबंधित प्रमुख उद्देश्यों पर अठारह विचार-विमर्श हुए। इन सत्रों में नीति निर्माता, शोधकर्ता, शिक्षाविद, प्रगतिशील किसान, नवोन्मेषक, उद्यमी, उद्योग और अन्य हितधारक एक साथ आए। उन्होंने टिकाऊ कृषि-खाद्य प्रणालियों में किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) और प्रसंस्करण समूहों की भूमिका बढ़ाने पर ज्ञान और अनुभव साझा किए। चर्चाओं में अभिनव किसान-अनुकूल प्रौद्योगिकियों के उपयोग, प्रमाणीकरण, प्रसंस्करण और जैविक उत्पादों के विपणन पर भी चर्चा हुई। इस अवसर पर देश भर के चैंपियन किसानों को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर देश भर के 23 प्रदर्शकों ने जैविक और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने और जागरूकता पैदा करने की दिशा में अपनी उपलब्धियों और गतिविधियों का प्रदर्शन किया।
इस कार्यक्रम में गाजियाबाद, नागपुर, बेंगलुरु, भुवनेश्वर और इंफाल के जैविक एवं प्राकृतिक खेती के क्षेत्रीय केंद्रों (आरसीओएनएफ) के अधिकारियों ने भी हिस्सा लिया। कार्यक्रम में देश भर के चैंपियन किसानों सहित 200 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।
सत्र का समापन सभी वक्ताओं और प्रतिभागियों के बहुमूल्य योगदान को स्वीकार करते हुए धन्यवाद प्रस्ताव के साथ हुआ।