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श्रीलंका के सिविल सेवकों के लिए 9वां क्षमता निर्माण कार्यक्रम राष्ट्रीय सुशासन केंद्र मसूरी में शुरू
नईदिल्ली। राष्ट्रीय सुशासन केंद्र (एनसीजीजी) ने श्रीलंका के मध्य-स्तरीय सिविल सेवकों के लिए 9वें क्षमता निर्माण कार्यक्रम की शुरुआत की है। 26 मई से 6 जून 2025 तक आयोजित, दो सप्ताह के इस कार्यक्रम में लोक प्रशासन, रक्षा, स्वास्थ्य और मास मीडिया और शिक्षा सहित मंत्रालयों के वरिष्ठ सहायकों, विभागीय सचिवों और उप निदेशकों जैसे प्रमुख पदों पर कार्यरत 40 अधिकारी भाग ले रहे हैं। यह कार्यक्रम डिजिटल शासन पर बल देता है, इसे प्रभावी, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित प्रशासन के लिए राष्ट्रीय प्राथमिकता के रूप में मान्यता देता है। केंद्रित सत्रों के माध्यम से, इस पहल का उद्देश्य सार्वजनिक सेवा वितरण में डिजिटल उपकरणों और ई-गवर्नेंस रणनीतियों की प्रतिभागियों की समझ और कार्यान्वयन को मजबूत करना है।
राष्ट्रीय सुशासन केंद्र (एनसीजीजी) के महानिदेशक आईएएस डॉ. सुरेन्द्र कुमार बागड़े ने सत्र का उद्घाटन किया। उन्होंने सभी प्रतिभागियों का गर्मजोशी से स्वागत किया और उनके विविधतापूर्ण और संतुलित प्रतिनिधित्व की सराहना की। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि यह कार्यक्रम डिजिटल शासन और प्रशासन की व्यापक समझ प्रदान करने के लिए तैयार किया गया है, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों में भारत की सर्वोत्तम नियमों को साझा करने पर ध्यान केंद्रित किया गया है। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि यहां आयोजित होने वाले सत्र शासन को बदलने में प्रौद्योगिकी की भूमिका पर ध्यान केंद्रित करेंगे।
कार्यक्रम के दौरान एसोसिएट प्रोफेसर और राष्ट्रीय सुशासन केंद्र के कोर्स कोऑर्डिनेटर डॉ. एपी सिंह ने कार्यक्रम का अवलोकन किया। दो सप्ताह के इस कार्यक्रम में शासन के बदलते प्रतिमान, डिजिटल पब्लिक गवर्नेंस, आधार, भारत में डिजिटल भुगतान, जीईएम, भारत में सार्वजनिक वित्त प्रबंधन प्रणाली, साइबर धोखाधड़ी, डीआईएलआरएमपी जैसे विषयों को शामिल करते हुए कई तरह के सत्र शामिल हैं। प्रतिभागी, एलबीएसएनएए, कम्प्यूटरीकृत भूमि रिकॉर्ड केंद्र, उत्तराखंड, एमडीडीए, यमुना नगर के डिजिटल गवर्नेंस जिले का दौरा करने का साथ ही, पीएम गति शक्ति अनुभूति केंद्र, चुनाव आयोग, राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस डिवीजन और ताजमहल भी जाएंगे।
कृषि विकास से ही आयेगी देश में समृद्धि, मप्र की तर्ज पर हर राज्य में हों कृषि उद्योग समागम : उप राष्ट्रपति
Bhopal News: खेती-किसानी देश की अर्थव्यवस्था की नींव है। यह हमारी प्रगति का मूल आधार है। कृषि के क्षेत्र में विकास और नित नए नवाचार जरूरी हैं, इससे कृषि के विकास से ही देश में समृद्धि आएगी। देश का उदर-पोषण करने वाले अन्नदाता की खुशहाली में ही हमारे देश की खुशहाली सन्निहित है। उक्ताशय के विचार उप राष्ट्रपति जदगीप धनखड़ ने नरसिंहपुर जिला मुख्यालय में कृषि उद्योग समागम-2025 के शुभारंभ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहीं।
उपराष्ट्रपति ने कृषि उद्योग समागम के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को बधाई देते हुए कहा कि उनकी इस पहल का अन्य राज्यों को भी अनुसरण करना चाहिए। किसान हमारे अन्नदाता हैं। अन्नदाताओं का अभिनंदन करते हुए कहा कि किसान भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। इनकी जितनी प्रशंसा की जाए कम है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव बेहद कर्मठ और कार्यशील है। कोई ऐसा दिन नहीं रहता, जब वे गांव, गरीब और किसान की चिंता न करें। मध्यप्रदेश सरकार ने गांव-किसान और उद्योग को जोड़ने की अभिनव पहल शुरू की है। उपराष्ट्रपति धनखड़ ने कृषि-उद्योग समागम के आयोजन के लिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव को बधाई दी।
राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि नरसिंहपुर जिला मध्यप्रदेश की आध्यात्मिक विरासत को संजोकर रखने वाला एक प्रमुख केंद्र है। यहां मां नर्मदा के तट पर बरमान में मकर संक्रांति का सुप्रसिद्ध मेला लगता है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में कृषि मेलों और कृषि उद्योग समागमों के जरिए किसानों को भरपूर लाभ दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव किसानों के लिए हर समय उपलब्ध रहते हैं। देश के किसान कड़े परिश्रम से अन्न उगाते हैं, वहीं हमारे वैज्ञानिक भी तकनीक का उपयोग कर किसानों के लिए नए-नए संयंत्र तैयार करते हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश कृषि के मामले में शस्य श्यामला है। नरसिंहपुर पर मां नर्मदा की विशेष कृपा है। नरसिंहपुर जिला दाल का कटोरा है, यहां की तुअर दाल को जीआई टैग मिला है। दाल उत्पादक किसान देशभर में पहचान बना चुके हैं। प्रधानमंत्री श्री मोदी के मार्गदर्शन में किसानों की आय बढ़ाने के लिए राज्य सरकार संकल्पित है। मध्यप्रदेश तो नदियों का मायका है। मध्यप्रदेश 247 नदियों का उद्गम है, जो देश में सर्वाधिक है। यहां घने जंगल नदियों एवं जलराशि को समृद्ध करते हैं।
मुंबई बना कोरोना का हॉटस्पॉट, महाराष्ट्र में 24 घंटे में सामने आए 43 नए मामले
डेस्क। महाराष्ट्र में कोविड-19 संक्रमण के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। राज्य के स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी रिपोर्ट के मुताबिक पिछले 24 घंटे में एक ही दिन में 43 नए मामले सामने आए हैं, जिनमें से 35 मामले अकेले मुंबई से सामने आए हैं। बाकी 8 मामले राज्य के अन्य जिलों से सामने आए हैं।
मरीजों की होम आइसोलेशन और अस्पतालों में देखभाल की जा रही है और स्वास्थ्य विभाग नागरिकों को सावधानी बरतने, मास्क पहनने और भीड़भाड़ से बचने की सलाह दे रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि कोविड का खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है और बदलते वैरिएंट के कारण स्थिति पर नजर रखना जरूरी है।
मुंबई महानगरपालिका क्षेत्र में कोरोना पॉजिटिव मरीज सामने आने के बाद गाइडलाइन जारी की है। नई गाइडलाइन में बीएमसी ने लोगों से कहा है कि महानगरपालिका के अस्पतालों में कोविड-19 मरीजों के इलाज और मार्गदर्शन की सुविधा दी जा रही है। मुंबई महानगरपालिका के अस्पतालों में मरीजों के लिए विशेष बेड और विशेष कमरों की भी व्यवस्था की गई है।
देश भर में कोविड के मामलों में बढ़ोतरी के बीच दो नए वैरिएंट- NB.1.8.1 और LF.7 ने चिंता बढ़ा दी है। भारतीय SARS-CoV-2 जीनोमिक्स कंसोर्टियम (INSACOG) की रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल में तमिलनाडु में NB.1.8.1 का एक मामला पाया गया था। मई में LF.7 के चार मामले सामने आए हैं।
वनों को समाप्त करने का दुष्परिणाम है, जलवायु परिवर्तन : राज्यपाल पटेल
Bhopal News: वर्तमान समय में मौसम कुछ ऐसा चल रहा है कि सुबह ठंड लगती है, दोपहर में तेज गर्मी एवं शाम होने तक बारिश होने लगती है। यह सब जलवायु परिवर्तन के कारण हो रहा है। जलवायु परिवर्तन के लिए हम मनुष्य ही दोषी हैं, क्योंकि हमने वनों को काटकर उन्हें समाप्त कर दिया है। प्रकृति ने हर मौसम के लिए चार माह का समय निर्धारित किया है, परन्तु मनुष्य ने अपने स्वार्थ के लिए वनों को समाप्त कर प्रकृति के चक्र में अवरोध उत्पन्न किया है। वर्तमान में मौसम का जो स्वरूप है उसके लिए यह आवश्यक है कि हम सभी अधिक से अधिक पेड़ लगाकर प्रकृति का पुनः श्रृंगार करें।
राज्यपाल पटेल ने उक्त बातें रविवार को बड़वानी जिले की राजपुर तहसील के ग्राम पंचायत इंदरपुर के ग्राम लोटनदेव में गुजराती चारण समाज न्यास द्वारा आयोजित कार्यक्रम के दौरान कहीं। इस दौरान उन्होंने कहा कि प्रकृति ने हमें बहुत कुछ दिया है, परन्तु मनुष्य ने तो सिर्फ लिया ही लिया है। प्रकृति में मनुष्य की हर राशि, नक्षत्र के हिसाब से भी पेड़ निर्धारित हैं। अगर हर व्यक्ति वर्षाकाल में मात्र दो ही पेड़ लगाकर उन्हें बड़ा करे तो जलवायु परिवर्तन की स्थिति पर नियंत्रण पाया जा सकता है, अन्यथा इसी तरह वनों का दोहन होता रहा तो आने वाले समय में जलवायु परिवर्तन की भयावह स्थिति हमारे समक्ष होगी और हम उसका सामना भी नहीं कर पायेंगे।
राज्यपाल ने अपने उद्बोधन में बालिका शिक्षा पर जोर देते हुए कहा कि परिवार एवं समाज के उत्थान के लिए सभी लोग अपनी बेटियों को अनिवार्य रूप से शिक्षित करें क्योंकि बेटी जब शिक्षित होगी तो वह अपने मायके एवं ससुराल दोनों का नाम रोशन करेगी। शिक्षा के कारण उसकी शादी अच्छे परिवार में होगी, जहां वह अपने बच्चों को भी शिक्षा देकर उनका भी जीवन संवारेगी। शिक्षित माता ही बच्चों में वे सभी संस्कारों को डाल सकती है जो आगे चलकर समाज और देश की उन्नति के लिए आवश्यक है, एक शिक्षित मां 100 शिक्षकों के बराबर है ।
ग्राम लोटनदेव पहुंचकर महामहिम राज्यपाल ने सबसे पहले ग्राम में स्थित आवड़ माताजी के मंदिर में पहुंचकर माताजी का पूजन अर्चन कर ग्रामवासियों के सुख एवं समृद्धि की कामना की। साथ ही मंदिर में उनके स्वागत में खड़ी चारण समुदाय की बालिकाओं के सिर पर हाथ रखकर उन्हे आर्शीवाद भी दिया। साथ ही महामहिम राज्यपाल ने मंदिर के समीप ही त्रिवेणी (पीपल, बरगद, नीम) पौधों का भी रोपण किया।
दिल्ली में भारी बारिश का कहर, जलभराव, ट्रैफिक जाम, रेल और विमान सेवा प्रभावित
नईदिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में बीती रात हुई मूसलाधार बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया। भारी बारिश के कारण कई इलाकों में जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो गई, जिससे सड़कों पर ट्रैफिक जाम की समस्या बढ़ गई. कई वाहन जलजमाव में फंस गए, और रेल तथा विमान सेवाएं भी बाधित हुईं।
दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड ने सुबह 6:50 बजे एक एडवाइजरी जारी की, जिसमें कहा गया: “कल रात खराब मौसम के कारण कुछ उड़ानें प्रभावित हुई हैं। यात्रियों को सलाह दी जाती है कि वे नियमित रूप से अपनी उड़ान की स्थिति की जांच करें और अपडेट के लिए एयरलाइन कर्मचारियों के संपर्क में रहें.
दिल्ली के कई निचले इलाकों जैसे कि आईटीओ, कनॉट प्लेस, और आश्रम में भारी जलभराव की स्थिति देखी गई. जल निकासी व्यवस्था के अपर्याप्त होने के कारण सड़कों पर पानी जमा हो गया, जिससे ट्रैफिक पूरी तरह ठप हो गया. कई वाहन चालकों ने घंटों जाम में फंसे रहने की शिकायत की।
भारी बारिश और आंधी-तूफान के कारण दिल्ली मेट्रो की रेड, येलो, और पिंक लाइनों पर सेवाएं बाधित हुईं. तूफान के कारण कई जगहों पर पेड़ और अन्य वस्तुएं ट्रैक पर गिर गईं, जिससे मेट्रो संचालन में देरी हुई। रेलवे स्टेशनों पर भी पानी भरने की खबरें आईं, जिससे ट्रेनों का संचालन प्रभावित हुआ।
भारतीय मौसम विभाग ने दिल्ली-एनसीआर के लिए येलो अलर्ट जारी किया है। विभाग के अनुसार, अगले कुछ घंटों में और बारिश के साथ तेज हवाएं चल सकती हैं। तापमान में 2-3 डिग्री की गिरावट संभव है, लेकिन उमस बनी रहेगी।
दिल्ली प्रशासन ने लोगों से सावधानी बरतने की अपील की है. नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे जलभराव वाले क्षेत्रों से बचें, पेड़ों के नीचे खड़े न हों, और गैर-जरूरी यात्रा से बचें. आपातकालीन सेवाओं को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
गाजा में भुखमरी का कहर, राहत ट्रकों पर लूट की भीड़, इजरायली हमलों ने बिगाड़े हालात
डेस्क। गाजा पट्टी में मानवीय संकट अपने चरम पर पहुंच गया है, जहां भुखमरी और अभाव ने लोगों को इस कदर मजबूर कर दिया है कि राहत सामग्री ले जा रहे ट्रकों को रास्ते में ही लूट लिया जा रहा है। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरस ने गाजा की स्थिति को अब तक का सबसे भयावह दौर बताया है। इजरायल की लंबी नाकाबंदी के बाद हाल ही में राहत सामग्री के लिए 400 ट्रकों को अनुमति दी गई थी, लेकिन इनमें से केवल 115 ही गाजा पहुंच पाए। भूख से त्रस्त लोगों ने दर्जनों ट्रकों को रास्ते में लूट लिया, क्योंकि उन्हें यह भरोसा नहीं है कि भविष्य में और सहायता मिलेगी।
वर्ल्ड फूड प्रोग्राम ने बताया कि शुक्रवार रात दक्षिणी गाजा में 15 ट्रक लूट लिए गए। गाजा सिविल डिफेंस एजेंसी के अधिकारी मोहम्मद अल मुगायीर के अनुसार, शुक्रवार को इजरायली हवाई हमलों में कम से कम 71 लोग मारे गए और दर्जनों घायल हुए, जबकि कई लोग अब भी लापता हैं। इन हमलों ने गाजा के बुनियादी ढांचे को और तबाह कर दिया है, जिससे भोजन, पानी और दवाओं की कमी और गंभीर हो गई है। एक स्थानीय निवासी ने दर्द बयां करते हुए कहा, मेरी बेटी सुबह से ब्रेड मांग रही है, लेकिन मेरे पास उसे देने के लिए कुछ नहीं है।
संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरस ने इजरायल पर राहत सामग्री की आपूर्ति में बाधा डालने का आरोप लगाया और इसे क्रूरता की हद करार दिया। उन्होंने चेतावनी दी कि गाजा में भुखमरी और कुपोषण के कारण हालात बदतर होते जा रहे हैं। इजरायल रक्षा बल (आईडीएफ) ने शुक्रवार को दावा किया कि उनकी वायुसेना ने गाजा में 75 से अधिक आतंकी ठिकानों, रॉकेट लांचरों, हथियार भंडारों और सैन्य परिसरों को निशाना बनाया। हालांकि, इन हमलों में बड़ी संख्या में आम नागरिकों के हताहत होने की खबरें भी सामने आई हैं।
प्रधानमंत्री 26 और 27 मई को गुजरात में …. गुजरात शहरी विकास की 20वीं वर्षगांठ के समारोह में लेंगे भाग
नईदिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 26 और 27 मई को गुजरात का दौरा करेंगे। वे दाहोद जाएंगे और करीब 11:15 बजे लोकोमोटिव विनिर्माण संयंत्र राष्ट्र को समर्पित करेंगे और इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव को हरी झंडी भी दिखाएंगे। इसके बाद वे दाहोद में करीब 24,000 करोड़ रुपये की लागत की कई विकास परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण करेंगे। वे एक सार्वजनिक समारोह को भी संबोधित करेंगे।
प्रधानमंत्री भुज जाएंगे और शाम करीब 4 बजे भुज में 53,400 करोड़ रुपये से अधिक की लागत की कई विकास परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण करेंगे। वह एक सार्वजनिक समारोह को भी संबोधित करेंगे। इसके अलावा, प्रधानमंत्री गांधीनगर जाएंगे और 27 मई को सुबह करीब 11 बजे गुजरात शहरी विकास की 20वीं वर्षगांठ के समारोह में भाग लेंगे और शहरी विकास वर्ष 2025 का शुभारंभ करेंगे। इस अवसर पर वे उपस्थित लोगों को संबोधित भी करेंगे।
कनेक्टिविटी बढ़ाने और विश्व स्तरीय यात्रा अवसंरचना के निर्माण की प्रतिबद्धता के अनुरूप, प्रधानमंत्री दाहोद में भारतीय रेलवे के लोकोमोटिव विनिर्माण संयंत्र का उद्घाटन करेंगे। इस संयंत्र में घरेलू उद्देश्यों और निर्यात के लिए 9000 एचपी के इलेक्ट्रिक इंजनों का निर्माण किया जाएगा। मोदी संयंत्र से निर्मित पहले इलेक्ट्रिक इंजन को भी हरी झंडी दिखाएंगे। ये इंजन भारतीय रेल की माल ढुलाई क्षमता बढ़ाने में मदद करेंगे। ये इंजन पुनर्योजी ब्रेकिंग सिस्टम से लैस होंगे और इन्हें ऊर्जा की खपत को कम करने के लिए डिजाइन किया जा रहा है, जो पर्यावरणीय स्थिरता में योगदान देता है।
इसके बाद, प्रधानमंत्री दाहोद में 24,000 करोड़ रुपये से अधिक की लागत की कई विकास परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण करेंगे। इन परियोजनाओं में रेल परियोजनाएं और गुजरात सरकार की विभिन्न परियोजनाएं शामिल हैं। वह वेरावल और अहमदाबाद के बीच वंदे भारत एक्सप्रेस और वलसाड और दाहोद स्टेशनों के बीच एक्सप्रेस ट्रेन को हरी झंडी दिखाएंगे। प्रधानमंत्री आमान परिवर्तित कटोसन-कलोल खंड का भी उद्घाटन करेंगे और इस पर एक मालगाड़ी को हरी झंडी दिखाएंगे।
प्रधानमंत्री भुज में 53,400 करोड़ रुपये से अधिक की लागत की कई विकास परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण करेंगे। बिजली क्षेत्र की परियोजनाओं में खावड़ा अक्षय ऊर्जा पार्क में उत्पन्न अक्षय ऊर्जा की निकासी के लिए ट्रांसमिशन परियोजनाएं, ट्रांसमिशन नेटवर्क विस्तार, तापी में अल्ट्रा सुपर क्रिटिकल थर्मल पावर प्लांट इकाई आदि शामिल हैं। इनमें कांडला बंदरगाह की परियोजनाएं और गुजरात सरकार की कई सड़क, जल और सौर परियोजनाएं भी शामिल हैं।
गुजरात में "शहरी विकास वर्ष 2005" तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू की गई प्रमुख पहल थी। इसका उद्देश्य योजनाबद्ध बुनियादी ढांचे, बेहतर शासन और शहरी निवासियों के लिए बेहतर जीवन स्तर के माध्यम से गुजरात के शहरी परिदृश्य का कायाकल्प करना था। "शहरी विकास वर्ष 2005" के 20 वर्ष पूरे होने के अवसर पर, प्रधानमंत्री गांधीनगर में शहरी विकास वर्ष 2025, गुजरात की शहरी विकास योजना और राज्य स्वच्छ वायु कार्यक्रम का शुभारंभ करेंगे। वे शहरी विकास, स्वास्थ्य और जल आपूर्ति से संबंधित कई परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास भी करेंगे। मोदी पीएमएवाई के तहत 22,000 से अधिक आवास इकाइयों को भी समर्पित करेंगे। वे स्वर्णिम जयंती मुख्यमंत्री शहरी विकास योजना के तहत गुजरात में शहरी स्थानीय निकायों को 3,300 करोड़ रुपये की धनराशि भी जारी करेंगे।
मध्यप्रदेश को अग्रणी राज्य बनाने के लिए सरकार संकल्पित: मुख्यमंत्री डॉ. यादव
Bhopal News: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शनिवार को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता मे नीति आयोग की शासी परिषद (गवर्निंग काउंसिल) की 10वीं बैठक में भाग लिया। यह बैठक ‘विकसित राज्य फॉर विकसित भारत @2047’ थीम पर केंद्रित रही।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 'विकसित भारत-आत्मनिर्भर भारत' के निर्माण के विजन से प्रेरित होकर मध्यप्रदेश को देश के अग्रणी राज्यों की प्रथम पंक्ति में स्थापित करने के लिए राज्य सरकार संकल्पित है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बैठक में शामिल होकर प्रधानमंत्री श्री मोदी का मार्गदर्शन प्राप्त किया और इसे भारत के भविष्य निर्माण की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल बताया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सोशल मीडिया 'एक्स' पर कहा कि प्रधानमंत्री जी के दूरदर्शी नेतृत्व में सभी राज्य ‘टीम इंडिया’ की भावना के साथ कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज मध्यप्रदेश विकास और लोक कल्याण के संकल्प पथ पर अग्रसर है और निरंतर नए प्रतिमान स्थापित कर रहा है।
केंद्रीय मंत्री हरदीप एस पुरी ने की पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस पर परामर्शदात्री समिति की बैठक की अध्यक्षता
नईदिल्ली। केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने हरियाणा के मानेसर में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की परामर्शदात्री समिति की बैठक की अध्यक्षता करते हुए ऊर्जा की वहनीयता (सस्ता बनाना), पहुंच और बुनियादी ढांचे के विकास में भारत की उल्लेखनीय प्रगति पर प्रकाश डाला। उन्होंने ईंधन की कीमतों को स्थिर करने, एलपीजी कवरेज का विस्तार करने और देश भर में रिफाइनिंग एवं वितरण क्षमता को बढ़ाने में सरकार के सक्रिय उपायों के बारे में बताया। पुरी ने समावेशी और उपभोक्ता-केंद्रित ऊर्जा नीतियों के प्रति मंत्रालय की प्रतिबद्धता की फिर से पुष्टि की।
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी भी इस बैठक में शामिल हुए, जिसमें 27 सांसदों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। सांसदों ने ईंधन की वहनीयता, एलपीजी की उपलब्धता, क्षेत्रीय बुनियादी ढांचे की असमानताओं और ऊर्जा लचीलेपन सहित प्रमुख मुद्दों पर व्यावहारिक सुझाव और प्रतिक्रिया साझा की।
मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने विस्तार से बताया कि नागरिकों के लिए बिना किसी कमी के ऊर्जा की वहनीयता और उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत कैसे भू-राजनीतिक प्रतिकूलताओं को सफलतापूर्वक पार करने में सक्षम रहा है। उन्होंने कहा कि जब पूरी दुनिया में ईंधन की कीमतें आसमान छू रही थीं, तब भारत एकमात्र ऐसा देश था, जहां कीमतें कम हुईं। उल्लेखनीय है कि सरकार ने 4 नवंबर 2021 और 22 मई 2022 को दो बार उत्पाद शुल्क में कटौती की, जिससे पेट्रोल पर 13 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 16 रुपये प्रति लीटर की कमी हुई। हाल ही में अप्रैल 2025 में की गई बढ़ोतरी को तेल विपणन कंपनियों ने अपने ऊपर ले लिया, जिससे उपभोक्ताओं को अतिरिक्त बोझ से बचाया जा सका।
एलपीजी सुधारों पर प्रकाश डालते हुए, केंद्रीय मंत्री ने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (पीएमयूवाई) के परिवर्तनकारी प्रभाव के बारे में विस्तार से बताया। इसकी शुरुआत के बाद से, एलपीजी कवरेज 2014 के 55% से बढ़कर आज लगभग सार्वभौमिक स्तर तक पहुंच गई है। एलपीजी की खपत उल्लेखनीय रूप से बढ़कर दैनिक डिलीवरी 56 लाख सिलेंडर से अधिक हो गई है। अब देश भर में 25,000 से अधिक एलपीजी वितरक काम कर रहे हैं, जिनमें से 86% ग्रामीण क्षेत्रों में हैं, जो अंतिम छोर तक गहरी पहुंच सुनिश्चित करते हैं।
हरदीप सिंह पुरी ने बताया कि भारत में एलपीजी की कीमतें दुनिया में सबसे कम हैं। अंतरराष्ट्रीय एलपीजी की कीमतों में 58% की भारी वृद्धि के बावजूद, पीएमयूवाई उपभोक्ता अब 14.2 किलोग्राम के सिलेंडर के लिए केवल 553 रुपये का भुगतान करते हैं, जो जुलाई 2023 में भुगतान किए गए 903 रुपये से 39% कम है।
एलपीजी की कीमतें किफायती रखने के लिए तेल कंपनियों को पिछले साल 40,000 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है। लगभग 1,058 रुपये की लागत वाला सिलेंडर पीएमयूवाई लाभार्थियों को सिर्फ 553 रुपये में उपलब्ध कराया जा रहा है। सामान्य उपभोक्ताओं के लिए, कीमत 853 रुपये है। नतीजतन, प्रतिदिन खाना पकाने की लागत पीएमयूवाई परिवारों के लिए लगभग 6.8 रुपये और गैर-पीएमयूवाई उपयोगकर्ताओं के लिए 14.7 रुपये आती है।
47वें फ्लाइट टेस्ट कोर्स के अधिकारी उत्कृष्ट अंकों के साथ उत्तीर्ण हुए
नईदिल्ली। भारतीय वायु सेना परीक्षण पायलट स्कूल के प्रतिष्ठित 47वें उड़ान परीक्षण पाठ्यक्रम का समापन 23 मई, 2025 को विमान और प्रणाली परीक्षण प्रतिष्ठान (एएसटीई), बेंगलुरु में एक औपचारिक समापन समारोह, "सुरंजन दास डिनर" के साथ हुआ।
वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। उन्होंने उत्तीर्ण अधिकारियों को प्रमाण पत्र और मेधावी अधिकारियों को ट्रॉफी प्रदान की। उन्होंने इस कठिन और विशिष्ट पाठ्यक्रम के दौरान अधिकारियों के असाधारण प्रदर्शन को मान्यता दी। फ्लाइट टेस्ट कोर्स 48 सप्ताह की अवधि के अपने कठोर प्रशिक्षण के लिए जाना जाता है। यह अत्याधुनिक हवाई प्लेटफार्मों और प्रणालियों के लिए देश की उड़ान परीक्षण क्षमता के निर्माण की दिशा में एक आधारशिला है।
एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने अपने संबोधन में परीक्षण उड़ान की एक विशेष डोमेन के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला, जिसके लिए पेशेवर क्षमता, ईमानदारी और सेवा के प्रति समर्पण के उच्चतम मानकों की आवश्यकता होती है। भारतीय वायु सेना की आत्मनिर्भरता के प्रति प्रतिबद्धता पर जोर देते हुए, उन्होंने उन्नत मध्यम लड़ाकू विमान (एएमसीए) और एलसीए एमके-II जैसी विकास परियोजनाओं के माध्यम से स्वदेशीकरण के प्रयासों को रेखांकित किया। उन्होंने उत्तीर्ण अधिकारियों से सटीकता और उत्कृष्टता के मूल मूल्यों को बनाए रखने का भी आह्वान किया, जो सशक्त, सक्षम और आत्मनिर्भर भारत को आकार देने के लिए आवश्यक हैं।
सर्वश्रेष्ठ ऑल-राउंड छात्र परीक्षण पायलट के लिए प्रतिष्ठित "सुरंजन दास ट्रॉफी" स्क्वाड्रन लीडर एस भारद्वाज को प्रदान की गई, जबकि उड़ान मूल्यांकन में सर्वश्रेष्ठ छात्र परीक्षण पायलट के लिए "चीफ ऑफ द एयर स्टाफ ट्रॉफी" स्क्वाड्रन लीडर अजय त्रिपाठी को प्रदान की गई। सर्वश्रेष्ठ ऑल-राउंड छात्र उड़ान परीक्षण इंजीनियर के लिए "महाराजा हनुमंत सिंह स्वॉर्ड" स्क्वाड्रन लीडर सुभ्रज्योति पॉल को प्रदान की गई। उड़ान मूल्यांकन में सर्वश्रेष्ठ छात्र परीक्षण इंजीनियर के लिए "डनलप ट्रॉफी" विंग कमांडर अश्विनी सिंह को प्रदान की गई। ग्राउंड विषयों में सर्वश्रेष्ठ छात्र के लिए "कपिल भार्गव ट्रॉफी" मेजर कौस्तुभ कुंटे को प्रदान की गई।
लहार में स्थापित होगा नया औद्योगिक केंद्र : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
Bhopal News: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने लहार में नया औद्योगिक केंद्र स्थापित करने की घोषणा की है। इसके साथ ही मछण्ड और असवार क्षेत्र को नगर परिषद बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रदेशभर में उद्योगों को बढ़ावा देकर युवाओं को रोजगार से जोड़ा जा रहा है। दूसरी ओर किसानों की आय बढ़ाने के लिए किसान और कृषि हित में अनेक निर्णय लिए गए हैं। किसान को फसलों का उचित दाम मिले और फसल बर्बाद न हो, इसके लिए प्रदेश में कृषि आधारित उद्योग स्थापित करने की दिशा में प्रयास हो रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार को भिंड जिले के लहार में महिला स्व-सहायता समूह सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय सेना ने शौर्य की गाथा लिखी है। भिंड के घर-घर से निकले जवान मां भारती की रक्षा में सीमाओं पर तैनात हैं। चंबल की धरती के सपूत लंबे समय से बॉर्डर पर दुश्मन का खात्मा करते आ रहे हैं। लहार का गौरवशाली अतीत महाभारत काल से भी जुड़ता है। ऐसा माना जाता है कि लहार में ही पांडवों के खिलाफ षड्यंत्र रचते हुए लाक्षागृह बनवाया गया था। भिंड वो धरती है, जहां कभी किसी के साथ अन्याय नहीं हो सकता है। वो दिन लद गए जब चंबल क्षेत्र में दस्युओं का डर दिखाकर लोगों पर अत्याचार होते थे। अब भिंड की जनता ने परिवर्तन का रास्ता चुना है। मध्यप्रदेश सरकार चंबल क्षेत्र के विकास के लिए पूरी तरह संकल्पित है। यहां जनता का प्रेम और आत्मीयता से मन भाव-विभोर है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि लोकमाता देवी अहिल्याबाई का 300वां जयंती वर्ष चल रहा है। भिंड जिले के आलमपुर का कॉलेज अब लोकमाता देवी अहिल्याबाई के नाम से जाना जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भिंड में विकास को गति प्रदान करते हुए 117 करोड़ रुपए से अधिक लागत के 33 विकास कार्यों का भूमिपूजन और 17 विकास कार्यों का लोकार्पण किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश का सिंचित क्षेत्र वर्तमान में 55 लाख हेक्टेयर है, इसे निकट भविष्य में 100 लाख हेक्टेयर तक लेकर जाएंगे। सिंचाई का रकबा बढ़ाने के लिए नदी जोड़ो परियोजनाओं पर कार्य हो रहा है। राजस्थान के साथ पार्वती-कालीसिंध-चंबल नदी परियोजना को 40 साल बाद मंजूरी मिली है। लगभग 70 हजार करोड़ की लागत से इस परियोजना का कार्य जारी है।
इसी प्रकार पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी के सपने को पूरा करते हुए केंद्र सरकार की सहायता से केन-बेतवा लिंक परियोजना की नींव रखी गई है। बुंदेलखंड के कई जिले इससे लाभान्वित होंगे। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश के किसान की समृद्धि और जीवन सरल बनाने के लिए 5 रुपए में स्थायी बिजली कनेक्शन और 30 लाख सोलर पंप प्रदान करने की शुरुआत की गई है। किसानों को सिर्फ 10 प्रतिशत कीमत पर सोलर पंप मिल रहे हैं। किसानों को सम्मान निधि का लाभ मिल रहा है। हर महीने माताओं-बहनों को लाड़ली बहना योजना की राशि भी मिलती रहेगी।
प्रधानमंत्री नई दिल्ली में राइजिंग नॉर्थ ईस्ट इन्वेस्टर्स समिट का आज करेंगे उद्घाटन
नईदिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 23 मई को सुबह लगभग 10:30 बजे नई दिल्ली के भारत मंडपम में राइजिंग नॉर्थ ईस्ट इन्वेस्टर्स समिट का शुभारंभ करेंगे। पूर्वोत्तर क्षेत्र को अवसरों की भूमि के रूप में उजागर करना, वैश्विक और घरेलू निवेश को आकर्षित करना तथा प्रमुख हितधारकों, निवेशकों और नीति निर्माताओं को एक मंच पर लाना इस शिखर सम्मेलन का लक्ष्य है।
23-24 मई से दो दिवसीय राइजिंग नॉर्थ ईस्ट इन्वेस्टर्स समिट, शिखर सम्मेलन से पहले की विभिन्न गतिविधियों का समापन है। पहले की गतिविधियों में केंद्र सरकार द्वारा पूर्वोत्तर क्षेत्र की राज्य सरकारों के सक्रिय समर्थन से राजदूतों की बैठक और द्विपक्षीय चैंबर्स मीट सहित रोड शो की श्रृंखला और राज्यों के गोलमेज सम्मेलन का आयोजन शामिल है। शिखर सम्मेलन में मंत्रिस्तरीय सत्र, कारोबार और सरकार पर आधारित सत्र, कारोबारी बैठकें, स्टार्टअप और निवेश प्रोत्साहन के लिए राज्य सरकार और केंद्रीय मंत्रालयों द्वारा की गई नीति और संबंधित पहलों की प्रदर्शनी शामिल होगी।
निवेश प्रोत्साहन के मुख्य फोकस क्षेत्रों में पर्यटन और आतिथ्य, कृषि-खाद्य प्रसंस्करण और वस्त्र, हथकरघा और हस्तशिल्प जैसे संबद्ध क्षेत्र, स्वास्थ्य देखभाल, शिक्षा और कौशल विकास, सूचना प्रौद्योगिकी या सूचना प्रौद्योगिकी समर्थित सेवाएं, इंफ्रास्ट्रक्चर और रसद, ऊर्जा तथा मनोरंजन एवं खेल शामिल हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव देवी अहिल्याबाई होलकर महानाट्य मंचन में हुए शामिल
Bhopal News: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि यह हम सब का सौभाग्य है कि मध्यप्रदेश की ऐसी महान शासिका देवी अहिल्याबाई के जीवन के विभिन्न प्रसंगों को नाट्य मंचन के माध्यम से परिचित होने का अवसर मिल रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुरूवार को कालिदास संस्कृत अकादमी के पण्डित सुर्यनारायण व्यास संकुल सभा गृह में देवी अहिल्या बाई की 300वीं जयंती वर्ष के अवसर पर अहिल्या बाई होलकर महानाटय – जीवन, अवदान और वैभव का गान के मंचन कार्यक्रम में शामिल हुए।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने डॉ. साधना बलवटे की लिखी पुस्तक ‘’अहिल्या रूपेण संस्थिता’’ का विमोचन किया गया। इस अवसर पर प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल, विधायक अनिल जैन कालुहेड़ा, महापौर मुकेश टटवाल, नगर निगम सभापति कलावती यादव, संजय अग्रवाल, संस्कार भारती के सह कोषाअध्यक्ष श्रीपाद जोशी, विशाल राजोरिया, जगदीश अग्रवाल, देवी अहिल्या बाई जयंती समारोह के जिला संयोजक उमेश सेंगर, जगदीश पांचाल एवं अन्य गणमान्य नागरिक मौजूद थे।
अतिथियों द्वारा मां सरस्वती और देवी अहिल्या बाई के चित्र के समक्ष दीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। संस्कृति संचलनालय के संचालक एनपी नामदेव और कालिदास संस्कृत अकादमी के निदेशक ड़ॉ. गोविंद गंधे ने अतिथियों का स्वागत किया।
केन्द्र और राज्य सरकार देवी अहिल्याबाई होल्कर की 300वीं जयंती वर्ष के दौरान विभिन्न कार्यक्रम आयोजित करा रही हैं। देवी अहिल्याबाई ऐसी बेटी थीं, जो विवाह के बाद सास-ससुर की भी बेटी ही बन कर रहीं। बचपन में देवी अहिल्याबाई ने बाजीराव जी की सवारी निकलने पर अपने स्थान से हटने से मना कर दिया था, क्योंकि वे उस समय भगवान शिव की पूजा कर रही थीं, यह प्रसंग उनके साहस को दर्शाता है। देवी अहिल्या बाई सदगुणों की खान थीं। उन्हें शास्त्रों के साथ शस्त्रों की भी शिक्षा प्रदान की गई थी। पति द्वारा युद्ध में जीती गई धन राशि को उन्होनें शासकीय खजाने में जमा करने के लिए कहा था, जो कि उनकी उदारता को दर्शाता है।
उपराष्ट्रपति ने दिया प्राचीन ग्रंथों के साक्ष्य-आधारित सत्यापन, डिजिटलीकरण, अनुवाद और बहुविषयक अध्ययन पर बल
नईदिल्ली। भारत के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने आज गोवा राजभवन में आयोजित एक कार्यक्रम में प्राचीन ग्रंथों के साक्ष्य-आधारित सत्यापन, डिजिटलीकरण, अनुवाद और उन्हें आधुनिक संदर्भों में उपयोगी बनाने हेतु अनुसंधान व नवाचार पर बल दिया। उन्होंने कहा, “हम एक अलग प्रकार का राष्ट्र हैं… हम अपनी जड़ों को फिर से खोज रहे हैं और उन्हीं में दृढ़ता से स्थापित हो रहे हैं। मैं वैकल्पिक चिकित्सा पर विशेष बल देता हूँ क्योंकि भारत इसका जन्मस्थल है। यह आज भी व्यापक रूप से प्रचलित है… हमारे प्राचीन ग्रंथ केवल पुस्तकालयों की अलमारियों के लिए नहीं हैं। ये शाश्वत विचार हैं और इन्हें आधुनिक वैज्ञानिक उपकरणों की सहायता से पुनः जीवित करने की आवश्यकता है।”
कार्यक्रम के अपने संबोधन में उन्होंने कहा, “अपने वेदों, उपनिषदों, पुराणों और इतिहास में झांकने का समय आ गया है और हमें हमारे बच्चों को जन्म से ही हमारी सभ्यतागत गहराई की जानकारी देनी चाहिए।”
प्रतिमाओं के अनावरण के उपरांत श्री धनखड़ ने कहा, “आज हम उन महापुरुषों को श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं जो ज्ञान के प्रतीक हैं — चरक और सुश्रुत। चरक कुषाण साम्राज्य में राजवैद्य थे और 'चरक संहिता' के रचयिता हैं, जो आयुर्वेद का मूल आधार है। वहीं सुश्रुत शल्य चिकित्सा के जनक माने जाते हैं। मुझे उनके समय के शल्य चिकित्सा उपकरणों की चित्रकारी देखने का अवसर मिला — अत्यंत दूरदर्शी सोच थी। हमें कभी नहीं भूलना चाहिए कि सुश्रुत धन्वंतरि के शिष्य थे, जो स्वयं एक प्रतिष्ठित आयुर्वेदाचार्य माने जाते हैं। चरक और सुश्रुत का जीवन आज की पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत बनना चाहिए।”
उपराष्ट्रपति ने कहा कि कुछ वर्गों में यह प्रवृत्ति देखी जाती है कि ‘भारतीय या प्राचीन कुछ भी पिछड़ा है’—यह मानसिकता अब आधुनिक भारत में स्वीकार्य नहीं है। “दुनिया हमारी प्राचीन प्रणाली की महत्ता को पहचान रही है — समय आ गया है कि हम भी इसे पहचानें। यह धारणा कि केवल पश्चिम ही प्रगतिशील है, अब चलन से बाहर होनी चाहिए। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने भी माना है कि भारत आज संभावनाओं का केंद्र है।”
उन्होंने आगे कहा, “पश्चिम चकित रह जाएगा यदि हम अपने प्राचीन ज्ञान को और गहराई से समझें। चरक, सुश्रुत, धन्वंतरि, जीवक (जो बुद्ध के निजी चिकित्सक थे) — ऐसे अनेक आयुर्वेदाचार्य हैं। गणित और खगोल विज्ञान में हमारे पास आर्यभट्ट, बौधायन, वराहमिहिर जैसे नाम हैं। चंद्रगुप्त विक्रमादित्य के समय वराहमिहिर उज्जैन वेधशाला में कार्यरत थे।”
उपराष्ट्रपति ने हमारे प्राचीन चिकित्सा विज्ञान की उपलब्धियों पर गर्व व्यक्त करते हुए कहा, “सैकड़ों साल पहले हम 300 से अधिक शल्य क्रियाएं, प्लास्टिक सर्जरी, अस्थि चिकित्सा और यहां तक कि सिजेरियन डिलीवरी भी करते थे। सुश्रुत के लेखन केवल शारीरिक रचना को नहीं दर्शाते, बल्कि वैज्ञानिक सोच, शुद्धता, प्रशिक्षण, स्वच्छता और रोगी देखभाल के उच्च मानकों को भी रेखांकित करते हैं।
जलीय जीवों का भी हो विशेष प्रबंधन: मुख्यमंत्री डॉ. यादव
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि थलीय जीवों की तरह जलीय जीवों के संरक्षण और उनके प्रबंधन के लिए भी विशेष प्रयास किए जाएं और आवश्यकता हो, तो इस कार्य के लिए पृथक अधिकारी नियुक्त किया जाए। यह अधिकारी जलीय जीवों की गिनती करें और उनका प्रबंधन भी करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को मंत्रालय में मध्यप्रदेश राज्य वन्यप्राणी बोर्ड की 29 वीं बैठक की अध्यक्षता करते हुए संबोधित कर रहे थे।
बैठक में वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री दिलीप अहिरवार, वन्य प्राणी बोर्ड के सदस्य एवं बैतूल विधायक हेमन्त खंडेलवाल, मुख्य सचिव अनुराग जैन, मुख्यमंत्री कार्यालय के अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा, अपर मुख्य सचिव वन अशोक वर्णवाल, प्रधान मुख्य वन संरक्षक असीम श्रीवास्तव, वन्य प्राणी बोर्ड के सदस्य मोहन नागर, डॉ. नारायण व्यास, डॉ. सुदेश बाघमारे, डॉ. रविचंद्रन सहित अन्य सदस्यगण भी उपस्थित थे।
बैठक में मुख्यमंत्री एवं राज्य वन्य प्राणी बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. यादव ने बोर्ड के दो बड़े प्रस्तावों को सर्व सहमति से पारित किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बैतूल जिले में ताप्ती कंजर्वेशन रिजर्व के गठन को मंजूरी दी। इसके तहत बैतूल जिले के अंतर्गत दक्षिण बैतूल सामान्य वन मंडल के ताप्ती परिक्षेत्र का 84.006 वर्ग किमी, पश्चिम बैतूल सामान्य वन मंडल के चिचौली परिक्षेत्र का 65.205 वर्ग किमी, एवं तावड़ी परिक्षेत्र का 100.789 वर्ग किमी क्षेत्र, यानि कुल 250.00 वर्ग किमी वन क्षेत्र में ताप्ती कंजर्वेशन रिजर्व का गठन किया जाएगा।
इसी प्रकार मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बालाघाट जिले के सोनेवानी वन क्षेत्र को कंजर्वेशन रिजर्व घोषित किए जाने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी। इसके अंतर्गत बालाघाट जिले में 163.195 वर्ग किमी सोनेवानी आरक्षित वन क्षेत्र को कंजर्वेशन रिजर्व घोषित कर नए कंजर्वेशन रिजर्व के गठन को मंजूरी दी गई। दोनों की अधिसूचना भी जल्द ही जारी की जाएगी।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सोन घड़ियाल अभ्यारण्य में सीधी जिले के मुर्दाडीह-तरिहा से सोनतीर पटेहरा पहुंचमार्ग में सोननदी पर उच्चस्तरीय पुल निर्माण के लिए लोक निर्माण विभाग सेतु निर्माण संभाग, रीवा को वन्य जीव अनुमति दी। इसी प्रकार बफर जोन वन मंडल, कान्हा टाइगर रिजर्व, मण्डला के अंतर्गत ग्राम धमनगांव तहसील-बिछिया में वन कक्ष क्रमांक 324 में कुल 0.95 हेक्टेयर वनभूमि पर एक अस्थायी पुलिस केंप की स्थापना के लिए एसपी मण्डला को वन्य जीव अनुमति दी गई। मुख्यमंत्री ने बोर्ड द्वारा प्रस्तावित अन्य प्रस्तावों को भी मंजूरी दी।
भारत ने ब्राजील में ब्रिक्स देशों के ऊर्जा मंत्रियों की बैठक में समावेशी ऊर्जा प्रबंधन का किया आह्वान
नईदिल्ली। केंद्रीय बिजली और आवास एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल ने 19 मई को ब्राजील की अध्यक्षता में ब्रासीलिया में आयोजित ब्रिक्स देशों के ऊर्जा मंत्रियों की बैठक के लिए भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया।
केंद्रीय मंत्री ने ऊर्जा सुरक्षा को वर्तमान की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बताया तथा आर्थिक स्थिरता और स्थिरता सुनिश्चित करने के साथ-साथ वैश्विक स्तर पर ऊर्जा संसाधनों तक समान पहुंच को बढ़ावा देने के लिए ब्रिक्स देशों के बीच सहयोग को मजबूत करने की जरूरत पर बल दिया।
उन्होंने टिकाऊ और समावेशी ऊर्जा भविष्य के निर्माण के लिए भारत की अटूट प्रतिबद्धता की पुष्टि की और ‘अधिक समावेशी और टिकाऊ प्रबंधन के लिए वैश्विक दक्षिण सहयोग को मजबूत करना’ विषय के तहत ब्राजील के नेतृत्व की सराहना की। उन्होंने वैश्विक विकास लक्ष्यों को आगे बढ़ाने में ऊर्जा सुरक्षा, पहुंच और सामर्थ्य की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया।
केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने जैव ईंधन क्षेत्र में सहयोग को आगे बढ़ाने में वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन की भूमिका पर भी जोर दिया और ऊर्जा संरक्षण सतत भवन संहिता, छत सौर पहल और कुशल उपकरण मानकों जैसे अभिनव कार्यक्रमों के जरिए ऊर्जा दक्षता के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया।
मनोहर लाल ने वैश्विक ऊर्जा मिश्रण में जीवाश्म ईंधन की महत्वपूर्ण भूमिका को विशेष रूप से विकासशील देशों के लिए रेखांकित किया। उन्होंने कोयला गैसीकरण, कार्बन कैप्चर एवं भंडारण, और हरित रासायनिक नवाचारों जैसी प्रौद्योगिकियों के माध्यम से उनके स्वच्छ और कुशल उपयोग को बढ़ावा देने में अधिक सहयोग का आग्रह किया।
अंत में, श्री मनोहर लाल ने ब्रिक्स देशों को भारत में 2026 में होने वाले अगले ब्रिक्स ऊर्जा सम्मेलन में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया और वैश्विक दक्षिण के लिए ऊर्जा एजेंडे का नेतृत्व करने के लिए देश की प्रतिबद्धता की पुष्टि की।
पद्म पुरस्कार-2026 के लिए 31 जुलाई, 2025 तक किए जा सकेंगे नामांकन
डेस्क। गणतंत्र दिवस, 2026 के अवसर पर घोषित किए जाने वाले पद्म पुरस्कार-2026 के लिए ऑनलाइन नामांकन/सिफारिशें 15 मार्च 2025 से शुरू हो गई हैं। पद्म पुरस्कारों के नामांकन की अंतिम तारीख 31 जुलाई 2025 है। पद्म पुरस्कारों के लिए नामांकन/सिफारिशें राष्ट्रीय पुरस्कार पोर्टल https://awards.gov.in पर ऑनलाइन प्राप्त की जाएंगी।
पद्म पुरस्कार, अर्थात पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्म श्री देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में शामिल हैं। वर्ष 1954 में स्थापित, इन पुरस्कारों की घोषणा प्रतिवर्ष गणतंत्र दिवस के अवसर पर की जाती है। इन पुरस्कारों के अंतर्गत ‘उत्कृष्ट कार्य’ के लिए सम्मानित किया जाता है। पद्म पुरस्कार कला, साहित्य एवं शिक्षा, खेल, चिकित्सा, समाज सेवा, विज्ञान एवं इंजीनियरी, लोक कार्य, सिविल सेवा, व्यापार एवं उद्योग आदि जैसे सभी क्षेत्रों/विषयों में विशिष्ट और असाधारण उपलब्धियों/सेवा के लिए प्रदान किए जाते हैं। जाति, व्यवसाय, पद या लिंग के भेदभाव के बिना सभी व्यक्ति इन पुरस्कारों के लिए पात्र हैं। चिकित्सकों और वैज्ञानिकों को छोड़कर अन्य सरकारी सेवक, जिनमें सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में काम करने वाले सरकारी सेवक भी शामिल है, पद्म पुरस्कारों के पात्र नहीं हैं।
सरकार पद्म पुरस्कारों को “पीपल्स पद्म” बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। अत:, सभी नागरिकों से अनुरोध है कि वे नामांकन/सिफारिशें करें। नागरिक स्वयं को भी नामित कर सकते हैं। महिलाओं, समाज के कमजोर वर्गों, अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों, दिव्यांग व्यक्तियों और समाज के लिए निस्वार्थ सेवा कर रहे लोगों में से ऐसे प्रतिभाशाली व्यक्तियों की पहचान करने के ठोस प्रयास किए जा सकते हैं जिनकी उत्कृष्टता और उपलब्धियां वास्तव में पहचाने जाने योग्य हैं।
नामांकन/सिफारिशों में पोर्टल पर उपलब्ध प्रारूप में निर्दिष्ट सभी प्रासंगिक विवरण शामिल होने चाहिए, जिसमें वर्णनात्मक रूप में एक उद्धरण (citation) (अधिकतम 800 शब्द) शामिल होना चाहिए, जिसमें अनुशंसित व्यक्ति की संबंधित क्षेत्र/अनुशासन में विशिष्ट और असाधारण उपलब्धियों/सेवा का स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया हो।
इस संबंध में विस्तृत विवरण गृह मंत्रालय की वेबसाइट (https://mha.gov.in) पर ‘पुरस्कार और पदक’ शीर्षक के अंतर्गत और पद्म पुरस्कार पोर्टल (https://padmaawards.gov.in) पर उपलब्ध हैं। इन पुरस्कारों से संबंधित संविधि (statutes) और नियम वेबसाइट पर https://padmaawards.gov.in/AboutAwards.aspx लिंक पर उपलब्ध हैं।