देश-विदेश
भारतीय नौसेना और तटरक्षक बल ने समुद्र में साहसिक बचाव अभियान संचालित किया
नई दिल्ली | भारतीय नौसेना ने 21 मार्च 2025 की सुबह गोवा से लगभग 230 समुद्री मील पश्चिम में स्थित पनामा के ध्वज वाला भारी सामान ले जाने में सक्षम बल्क कैरियर एमवी हेइलन स्टार से एक महत्वपूर्ण चिकित्सा निकासी (एमईडीईवीएसी) अभियान सफलतापूर्वक संचालित किया।
मुंबई स्थित भारतीय तटरक्षक बल के समुद्री बचाव समन्वय केंद्र (एमआरसीसी) ने 20/21 मार्च, 2025 की रात को भारतीय नौसेना को सूचित किया था कि एमवी हेइलन स्टार के चार चालक दल के सदस्य गंभीर रूप से जल गए हैं और उन्हें तत्काल उन्नत चिकित्सा देखभाल की आवश्यकता है।

भारतीय नौसेना ने त्वरित प्रतिक्रिया करते हुए दो जहाजों आईएनएस विक्रांत और दीपक को उनकी तैनाती से हटाकर सहायता प्रदान करने के लिए भेजा था।
आईएनएस विक्रांत के एक सीकिंग हेलीकॉप्टर ने 21 मार्च, 2025 की सुबह में तीन घायल चालक दल के सदस्यों यानी कि दो चीनी और एक इंडोनेशियाई नागरिक को एमवी हेइलन स्टार से निकालने के लिए एक चुनौतीपूर्ण कार्य किया। दुर्भाग्यवश, चौथे सदस्य की चोटों के कारण पहले ही मृत्यु हो चुकी थी। चालक दल के बचाए गए सदस्यों को तुरंत गोवा स्थित आईएनएस हंसा ले जाया गया, जहां से उन्हें आगे की चिकित्सा देखभाल के लिए सिविल अस्पताल में स्थानांतरित कर दिया गया।

यह ऑपरेशन चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद, जीवन रक्षक प्रयासों और मानवीय सहायता के लिए त्वरित प्रतिक्रिया के प्रति भारतीय नौसेना तथा भारतीय तटरक्षक बल की अटूट प्रतिबद्धता को उजागर करता है। यह अभियान राष्ट्रीय समुद्री सीमाओं से परे होने के कारण और भी कठिन था।
ग्वालियर रेडीमेड गारमेंट पार्क की 7 एवं मुरैना पिपरसेवा की 11 इकाईयों का भूमि-पूजन
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश के औद्योगिक विकास का जो सपना देखा है, चंबल क्षेत्र उसमें सुनहरा अध्याय लिख रहा है। चंबल की भूमि उपजाऊ है, कमाऊ है, साथ ही टिकाऊ भी है। चंबल जैसा टिकाऊ जज्बा और कहीं देखने को नहीं मिलता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शुक्रवार को भिण्ड जिले के मालनपुर में एक हजार करोड़ रूपए की लागत से एलिक्सर इण्डस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड की आधुनिक मेगा इकाई का भूमि-पूजन करते हुए यह बात कही। इस मौके पर रेडीमेड गारमेंट ग्वालियर की 7 इकाईयों और मुरैना जिले के औद्योगिक क्षेत्र पिपरसेवा की 11 इकाईयों का भी भूमिपूजन किया है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि चंबल अब विकास के नाम से पहचाना जाता है। इस क्षेत्र में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सोच और प्रदेश सरकार के संकल्प के कारण अनेक औद्योगिक इकाईयां प्रारंभ हुई हैं। इन औद्योगिक इकाईयों के प्रारंभ होने से बेरोजगार युवकों को रोजगार उपलब्ध हो रहा है। कार्यक्रम में प्रदेश के पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री प्रहलाद पटेल, नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री राकेश शुक्ला, जिला पंचायत अध्यक्ष कामना सिंह भदौरिया, राष्ट्रीय अनुसूचित जातिआयोग के अध्यक्ष लाल सिंह आर्य, विधायक गोहद केशव देसाई, लहार विधायक अम्बरीश शर्मा, देवेन्द्र सिंह नरवरिया एवं एलिक्सर इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड के चेयरमेन अरुण गोयल सहित क्षेत्रीय जन-प्रतिनिधिगण एवं बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित थे। ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर कार्यक्रम में वर्चुअलउपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में औद्योगिक विकास के लिये हर संभव कार्य किया जा रहा है। इन्वेस्टर्स समिट व रीजनल इंडस्ट्रीज कॉन्क्लेव से न केवल देश बल्कि विदेशों से भी इन्वेस्टर्स को आमंत्रित करने का कार्य किया गया है, जिसके सार्थक परिणाम भी परिलक्षित हो रहे हैं। ग्वालियर-चंबल संभाग में भी अनेक औद्योगिक इकाइयां स्थापित हो रही हैं, जिनके माध्यम से ग्वालियर-चंबल संभाग के युवाओं को बेहतर रोजगार उपलब्ध होगा।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में औद्योगिक विकास के साथ ही किसानों के हित में भी अनेक निर्णय लिए गए हैं। चंबल-कालीसिंध-पार्वती (पीकेसी) लिंक परियोजना क्षेत्र में खुशहाली लेकर आयेगी। इस परियोजना से चंबल को सर्वाधिक लाभ प्राप्त होगा।
पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री एवं भिण्ड जिले के प्रभारी मंत्री पटेल ने कहा कि चंबल क्षेत्र औद्योगिक रूप से विकसित हो रहा है। यह हम सबके लिये प्रसन्नता की बात है। औद्योगिक विकास से न केवल क्षेत्र का आर्थिक विकास होगा, बल्कि यहां के युवाओं को बेहतर रोजगार भी उपलब्ध होंगे। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के प्रयासों से मालनपुर में एक हजार करोड रूपए के निवेश से जो नई इकाई प्रारंभ हो रही है, वह इस क्षेत्र के विकास में नया अध्याय लिखेगी। ग्वालियर-चंबल संभाग के साथ-साथ सम्पूर्ण प्रदेश में औद्योगिक विकास का बेहतर माहौल बना है, जिसके सार्थक परिणाम हमें सम्पूर्ण प्रदेश में दिखाई दे रहे हैं।
डॉ. मनसुख मांडविया ने दूसरे खेलो इंडिया पैरा गेम्स का उद्घाटन किया
जब कोई दृढ़ निश्चय कर लेता है, सही दिशा में आगे बढ़ता है और कड़ी मेहनत करता है, तो परिणाम हमेशा सकारात्मक होता है - डॉ. मांडविया
खेलो इंडिया पैरा गेम्स के माध्यम से, हमारे एथलीटों को सर्वश्रेष्ठ अवसर मिल रहे हैं और वे सफलता के मार्ग पर आगे बढ़ रहे हैं - डॉ. मांडविया
केन्द्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया और डॉ. वीरेन्द्र कुमार की उपस्थिति में पांच पैरालिंपियन ने अनूठी मशाल रैली में भाग लिया |
नई दिल्ली | केन्द्रीय युवा कार्य एवं खेल तथा श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने नई दिल्ली में इंदिरा गांधी स्टेडियम परिसर के केडी जाधव इंडोर हॉल में दूसरे खेलो इंडिया पैरा गेम्स 2025 की शुरुआत की घोषणा की। आठ दिन तक चलने वाली इस चैंपियनशिप में छह खेल विधाओं में 1300 से अधिक पैरा एथलीट हिस्सा लेंगे।

छह पैरालिंपियन - सिमरन शर्मा (एथलेटिक्स), प्रवीण कुमार (बैडमिंटन), नितेश कुमार (बैडमिंटन), नित्या (बैडमिंटन) और प्रीति पाल (एथलेटिक्स) खेलो इंडिया पैरा गेम्स 2025 को औपचारिक रूप से हरी झंडी दिखाने के लिए केन्द्रीय युवा कार्य और खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया, केन्द्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेन्द्र कुमार, अरुणाचल प्रदेश के खेल और युवा कार्य मंत्री केंटो जिनी और भारतीय पैरालंपिक समिति के अध्यक्ष और पूर्व पैरालिंपियन देवेंद्र झाझरिया के साथ एक अनूठी मशाल रैली में शामिल हुए।
डॉ. मनसुख मांडविया ने कहा कि वह खेलो इंडिया के हर आयोजन को मिल रही प्रतिक्रिया को देखकर उत्साहित हैं, जो अब देश के लिए सम्मान जीतने के इच्छुक सभी एथलीटों के लिए “प्रतिष्ठा” बन गया है। डॉ. मांडविया ने कहा, “खेलो इंडिया द्वारा भारतीय खेलों में दिए गए योगदान से मैं बेहद गर्वित और उत्साहित हूं। चाहे वह खेलो इंडिया यूथ गेम्स हो, खेलो इंडिया स्कूल गेम्स हो, खेलो इंडिया विंटर गेम्स हो या खेलो इंडिया पैरा गेम्स हो, हमारे एथलीट हर जगह अपनी प्रतिभा से देश को गौरवान्वित कर रहे हैं।”
डॉ. मांडविया ने आगे कहा, "जब कोई दृढ़ निश्चय कर लेता है, सही दिशा में आगे बढ़ता है और कड़ी मेहनत करता है, तो परिणाम हमेशा सकारात्मक होता है। पेरिस पैरालिंपिक 2024 में मिली सफलता, जहाँ हमने कुल 29 पदक जीते, ने साबित कर दिया कि हमारे एथलीटों में देश को वैश्विक मंच पर गौरवान्वित करने की क्षमता है। खेलो इंडिया पैरा गेम्स के माध्यम से हमारे एथलीटों को बेहतरीन अवसर मिल रहे हैं और वे सफलता का मार्ग प्रशस्त कर रहे हैं। यह बिल्कुल वैसा ही है जिसकी हमारे माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कल्पना की थी।"
डॉ. कुमार ने भी खेलो इंडिया पहल की सराहना की और कहा, "खेलो इंडिया पैरा गेम्स 2025 भारतीय एथलीटों के लिए एक दूसरे के साथ प्रतिस्पर्धा करने और अपनी प्रतिभा को सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करने के लिए एक विश्व स्तरीय मंच है। साथ ही, यह पैरा एथलीटों को न केवल खुद को साबित करने का मौका देता है, बल्कि अपनी चुनौतीपूर्ण यात्रा के माध्यम से दूसरों को प्रेरित भी करता है।"
उद्घाटन समारोह में देश भर से एथलीट, कोच और सहयोगी स्टाफ शामिल हुए। सचिव (खेल) सुजाता चतुर्वेदी और भारतीय खेल प्राधिकरण के वरिष्ठ अधिकारी भी उद्घाटन समारोह में मौजूद थे।
खेलो इंडिया पैरा गेम्स, खेलो इंडिया मिशन का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य प्रतिभाशाली एथलीटों को अपने खेल और प्रतिस्पर्धी कौशल का प्रदर्शन करने के लिए एक मंच प्रदान करना है। दिसम्बर 2023 में आयोजित खेलो इंडिया पैरा गेम्स का पहला संस्करण पैरा-एथलीटों को राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा दिखाने में सक्षम बनाने के लिए आयोजित किया गया था। खेल नई दिल्ली में तीन स्थानों पर सात खेल विधाओं में खेले गए। राजधानी में तीन स्थानों पर 20-27 मार्च, 2025 के बीच आयोजित होने वाले केआईपीजी के दूसरे संस्करण में छह विधाएँ - पैरा-एथलेटिक्स, पैरा तीरंदाजी, पैरा पावरलिफ्टिंग, पैरा बैडमिंटन, पैरा टेबल टेनिस और पैरा शूटिंग - आयोजित की जाएँगी।
भारत सरकार देश में चिप डिजाइनिंग का लोकतंत्रीकरण कर रही है : भारत के सेमीकंडक्टर का दौर आ चुका
विजेताओं की घोषणा: 'एनालॉग और डिजिटल डिज़ाइन हैकथॉन' (2,210 टीमों, 10,040 छात्रों ने भाग लिया)
स्वदेशीकरण को बढ़ावा: मेसर्स वर्वेसेमी माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स प्राइवेट लिमिटेड 90% बीओएम के साथ बीएलडीसी मोटर कंट्रोलर चिप डिजाइन करेगा, जो ‘मेड इन इंडिया’ होगा
अगली बड़ी छलांग: ‘डिजिटल इंडिया आरआईएससी-वी (डीआईआर-वी) ग्रैंड चैलेंज’ का शुभारंभ
नई दिल्ली | चिप डिज़ाइन को एक रणनीतिक आवश्यकता मानते हुए, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) अपनी श्रृंखलाबद्ध एवं सक्रिय पहलों के साथ, पूरे देश में 300 से अधिक संगठनों (जिसमें 250 शैक्षणिक संस्थान और 65 स्टार्ट-अप कंपनियां शामिल हैं) में सेमीकंडक्टर डिज़ाइन दृष्टिकोण को व्यवस्थित करने की प्रक्रिया में है। इन कदमों का उद्देश्य रचनात्मक सक्षमता वाले युग की शुरुआत करना है, जहां देश में कहीं से भी, स्वभाविक कौशल वाला कोई भी व्यक्ति सेमीकंडक्टर चिप्स डिज़ाइन कर सकता है। इस प्रक्रिया में, माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दृष्टिकोण के अनुरूप कि 'भारत में डिज़ाइन उतना ही महत्वपूर्ण है जितना मेक इन इंडिया', चिप डिज़ाइन को लोकतांत्रिक बनाया जाएगा।

सी2एस कार्यक्रम का उद्देश्य सेमीकंडक्टर चिप डिजाइन में विशेषज्ञता प्राप्त बी.टेक, एम.टेक और पीएचडी स्तर पर उद्योग-अनुकूल 85,000 मानव संसाधन तैयार करना है। यह कार्यक्रम चिप डिज़ाइन, निर्माण एवं परीक्षण में छात्रों को पूर्ण व्यावहारिक अनुभव प्रदान करके एक समग्र दृष्टिकोण अपनाता है। इसे नियमित प्रशिक्षण सत्रों के माध्यम से उद्योग सहयोगियों की भागीदारी से प्राप्त किया जाता है, और छात्रों को चिप डिज़ाइन, निर्माण और परीक्षण संसाधनों, जैसे ईडीए उपकरणों, अपने चिप्स के निर्माण के लिए सेमीकंडक्टर फ़ाउंड्रीज़ तक पहुंच प्रदान करके मेंटॉरशिप और सहायता प्रदान किया जाता है। इन अवसरों में एएसआईसी, एसओसी और आईपी कोर डिजाइनों के कार्यशील प्रोटोटाइप के विकास के लिए अनुसंधान एवं विकास परियोजनाओं का कार्यान्वयन शामिल है।
चिपइन केंद्र सी2एस कार्यक्रम के अंतर्गत स्थापित किया गया है, यह सी-डैक में स्थापित सबसे बड़े सुविधाओं में से एक है, जिसका लक्ष्य देश में सेमीकंडक्टर डिज़ाइन समुदाय के दरवाज़े पर चिप डिज़ाइन अवसंरचना लाना है। यह एक केंद्रीकृत डिजाइन सुविधा है, जो न केवल 5एनएम या उन्नत नोड तक जाने वाले संपूर्ण चिप डिजाइन चक्र के लिए सबसे उन्नत उपकरणों की मेजबानी करती है, बल्कि फाउंड्री और पैकेजिंग में डिजाइन के निर्माण के लिए समग्र सेवाएं भी प्रदान करती है।
‘बीएलडीसी कंट्रोलर चिप’ की निम्नलिखित विशेषताएं हैं: आत्मनिर्भर सेमीकंडक्टर समाधान के लिए 90% बीओएम भारत में निर्मित, 1.50 डॉलर से कम में पूर्ण पावर एवं नियंत्रण समाधान तथा 10 मिलियन यूनिट/वर्ष की स्केलेबिलिटी आदि।
वर्वेसेमी एक फेबलेस सेमीकंडक्टर कंपनी है जिसकी स्थापना 2017 में हुई और यह अत्याधुनिक डेटा कन्वर्टर्स और विभेदित एनालॉग आईपी की विशेषज्ञता का उपयोग करते हुए सेंसर और वायरलेस के लिए उच्च प्रदर्शन करने वाली एएसआईसी विकसित कर रही है। वर्वेसेमी के आईसी को सैमसंग, यूएमसी, टीएसएमसी, एसएमआईसी पीएसएमसी के 8एनएम, 22एनएम, 28एनएम, 40एनएम, 55एनएम, 90एनएम, 180एनएम, 110एनएम नोड पर प्राप्त किया गया है।
“देश ने सेवा उद्योग में महत्वपूर्ण उपलब्धियां प्राप्त की हैं और यह लगातार आगे बढ़ रहा है, इसलिए अब इसे एक उत्पादक राष्ट्र बनना चाहिए। सॉफ़्टवेयर और हार्डवेयर उत्पादों के विकास पर आज की घोषणाएं उस लक्ष्य की प्राप्ति की ओर कुछ सफल कदम हैं।”
ये समाधान एक व्यापक श्रेणी के हिस्सेदारों से आने चाहिए, जिसमें सभी स्तरों के विश्वविद्यालय, स्टार्ट-अप, छात्रों एवं शोधकर्ताओं कीच भागीदारी शामिल है, न कि केवल कुछ चुनिंदा लोगों की।
इन समाधानों को प्राप्त करने के लिए वृद्धिशील लेकिन प्रगतिशील दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है। कुछ चिप्स का मूल्य कम हो सकता है लेकिन उनका वितरण संभावना उच्च हो सकता है, जबकि अन्य का मूल्य उच्च हो सकता है लेकिन वितरण संभावना सीमित हो सकती है। पूरे स्पेक्ट्रम को लक्षित करना चाहिए। आज घोषित बीएलडीसी कंट्रोलर चिप विकास में महत्वपूर्ण मात्रा तैनाती की क्षमता है, आरआईएससी-वी, जो ओपन-सोर्स है, सीपीयू, जीपीयू और देश के लिए स्थायी उत्पादों के डिज़ाइन में इसके उपयोग के कारण बहुत उच्च मूल्य रखता है।
भारत आज नए उद्यमियों एवं शोधकर्ताओं के लिए सेमीकंडक्टर सिस्टम, उपकरणों और भविष्य के उत्पादों को डिजाइन और पुनः परिभाषित करने के क्षेत्र में अग्रणी होने का एक महत्वपूर्ण अवसर प्रस्तुत करता है। भारत सरकार और एमईआईटीवाई का "चिप्स टू स्टार्ट-अप (सी2एस) कार्यक्रम" देश की मजबूत एवं आत्म-निर्भर सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण की अविचल प्रतिबद्धता के अनुरुप है, जो इंजीनियरों, शोधकर्ताओं एवं उद्यमियों की अगली पीढ़ी को भारत की तकनीकी प्रगति को आगे बढ़ाने और देश को एक वैश्विक शक्ति के रूप में विकसित करने के लिए सशक्त बना रहा है।
सबके जीवन में खुशहाली लाना ही हमारा मूल लक्ष्य: मुख्यमंत्री डॉ. यादव
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सुख और दुःख मनुष्य के जीवन से उसी तरह जुड़े हैं, जैसे दिन के बाद रात। सुख-दुख जीवन के अभिन्न अंग हैं। लोक कल्याणकारी राज्य का प्रथम कर्तव्य है कि वह अपने नागरिकों के जीवन में खुशहाली लेकर आये। हमारी सरकार इसी दिशा में कार्य कर रही है। सबका कल्याण ही हमारा मूल लक्ष्य है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि त्याग, तप, साधना, बलिदान, असंचय, अपरिग्रह और निस्वार्थ सेवा भाव से मन की शांति ही सुख है। प्रकृति के सानिध्य में जब मन, परमात्मा के भावों में लीन हो जाता है, तब ही तादात्म्य ही सच्चा सुखानंद प्राप्त होता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुरुवार को कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आनंद विभाग द्वारा आयोजित दो दिवसीय नेशनल हैप्पीनेस कार्यशाला को संबोधित करते हुए ये विचार व्यक्त किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेशवासियों के जीवन में सुख-समृद्धि लाने की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि प्रदेश के सभी नागरिकों के जीवन में उल्लास भरने के लिए हमारी सरकार जी-जान से जुटी है।
कार्यक्रम में म.प्र. जन अभियान परिषद के उपाध्यक्ष डॉ. मोहन नागर, श्री रामकृष्ण मिशन, बेलूर मठ, कोलकाता से आए स्वामी श्री समर्पणानन्द जी, पंजाब तकनीकी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रजनीश अरोड़ा, आईआईएम इंदौर के पूर्व निदेशक डॉ. एन. रविचन्द्रन, प्रमुख सचिव, आनंद विभाग श्री राघवेन्द्र कुमार सिंह, राज्य आनंद संस्थान के सीईओ श्री आशीष कुमार गुप्ता सहित बड़ी संख्या में सुधिजन एवं आनंदक उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश के हर नागरिक के जीवन में हर्ष, आनंद और खुशहाली लाना हमारी प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार जनहितैषी योजनाओं के माध्यम से प्रदेश के हर वर्ग को लाभान्वित कर रही है। नागरिकों के जीवन में खुशहाली और संतोष ही हमारी सबसे बड़ी सफलता है। उन्होंने कहा कि कष्ट सहकर भी जीवन देने का सुख पाये, वो है माता और साधक बनकर भी जीवन का असीम सुख पाये वो है सन्यासी। कष्ट में भी सुख है, इसलिए जीवन का मर्म समझिए कि परमात्मा ने हम सबको आनंद में जीवन जीने के लिए इस धरा पर भेजा है, इसलिए जीवन को आनंदमय होकर ही जियें।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे सकारात्मक दृष्टिकोण से सरकार के साथ मिलकर एक खुशहाल समाज के निर्माण में योगदान दें। आनंद विभाग के तत्वावधान में आयोजित इस दो दिवसीय नेशनल हैप्पीनेस सेमिनार का उद्देश्य आनंद के नए आयाम और नित नई परिस्थितियों में आनंद की खोज करना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के समक्ष राज्य आनंद संस्थान भोपाल एवं म.प्र. जन अभियान परिषद के बीच एम.ओ.यू (समझौता ज्ञापन) का आदान-प्रदान हुआ। यह समझौता ज्ञापन मात्र प्रपत्रों का आदान-प्रदान न होकर दो जमीन स्तर से प्रभावी संगठनों के समन्वय की महत्वाकांक्षी पहल है। यह समझौता दोनों विभागों के बीते एक वर्ष में कुल 24 हजार 310 और बीते तीन वर्षों में 72 हजार 390 लोगों के जीवन में स्वैच्छिकता और आनंद का कारक बना।
एएफएमएस और निम्हांस, बेंगलुरु में सहयोगात्मक अनुसंधान और प्रशिक्षण के लिए समझौता
नईदिल्ली। देश के रक्षा कर्मियों के मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए सशस्त्र बल चिकित्सा सेवा (एएफएमएस) और राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य और तंत्रिका विज्ञान संस्थान (निम्हांस) ने सहयोगात्मक अनुसंधान और प्रशिक्षण के लिए समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। इसका उद्देश्य सशस्त्र बलों के लिए मानसिक स्वास्थ्य सहायता और देखभाल को बढ़ाना है।
सशस्त्र बल चिकित्सा सेवा के महानिदेशक सर्जन वाइस एडमिरल आरती सरीन, एवीएसएम, वीएसएम और निम्हांस की निदेशक डॉ प्रतिमा मूर्ति ने एक समारोह में इस समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर दोनों संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। एएफएमएस और निम्हांस के बीच यह सहयोग मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने, चिकित्सा कर्मियों के लिए विशेष प्रशिक्षण आयोजित करने और सैनिकों, नाविकों, वायुसैनिकों, उनके परिवारों तथा आश्रितों के मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं को दूर करने के लिए अभिनव कार्यक्रम विकसित करने पर केंद्रित होगा।
समझौता ज्ञापन के मुख्य उद्देश्यों में सहयोगात्मक अनुसंधान, संकाय आदान-प्रदान और शैक्षणिक गतिविधियां शामिल हैं। न्यूरोसाइकियाट्री में अपनी विशेषज्ञता के साथ, निम्हांस सैन्य कर्मियों को उन्नत मनोचिकित्सा देखभाल और सहायता पर अनुसंधान करने में सहायता प्रदान करेगा, जो पोस्ट ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (पीटीएसडी), चिंता और अवसाद जैसे सामान्य समस्याओं से छुटकारा दिलाएगा।
सर्जन वीएडम आरती सरीन ने एक बयान में कहा कि हमारे सैनिकों का मानसिक स्वास्थ्य उनके शारीरिक स्वास्थ्य जितना ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि निम्हांस के साथ यह साझेदारी सुनिश्चित करेगी कि हमारे कर्मियों को हमारे देश की सेवा करते समय आने वाली चुनौतियों से निपटने में सर्वोत्तम संभव सहायता मिले।
निम्हांस की निदेशक डॉ प्रतिमा मूर्ति ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य देखभाल में संस्थान की विशेषज्ञता को रक्षा क्षेत्र में लाने के लिए सशस्त्र बल चिकित्सा सेवाओं के साथ सहयोग करना सम्मान की बात है। इसका उद्देश्य हमारे देश की सेवा करने वालों को विश्व स्तरीय चिकित्सकीय सहायता प्रदान करना होगा, यह सुनिश्चित करना होगा कि उन्हें वह मानसिक स्वास्थ्य देखभाल मिले जिसके वे हकदार हैं।
यह सहयोगी उपक्रम सशस्त्र बलों के कर्मियों के लिए मानसिक स्वास्थ्य के महत्व को पहचानने में महत्वपूर्ण कदम है। इससे देश भर में इसी तरह की पहल के लिए एक बेंचमार्क स्थापित होने की उम्मीद है। दोनों संगठन व्यापक मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं जो सशस्त्र बलों के समग्र कल्याण में योगदान करती हैं।
करीला धाम के विकास के लिए एक करोड़ रूपये की राशि करेंगे स्वीकृत : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सरकार भगवान श्रीराम के प्रदेश में विभिन्न आगमन स्थलों के संरक्षण और उन्नयन का कार्य कर रही है। इसके साथ ही प्रदेश में भगवान श्रीकृष्ण लीला-स्थलों को तीर्थ के रूप में विकसित करने के लिये श्रीकृष्ण पाथेय योजना को क्रियान्वित करने का काम भी किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि करीला धाम में भी श्रृद्धालुओं को आवश्यक मूलभूत सुविधाओं को और अधिक बेहतर बनाने के लिए एक करोड़ रूपये की राशि स्वीकृत की जायेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बुधवार को अशोकनगर के करीला धाम में माँ जानकी के दर्शन कर पूजा-अर्चना की और प्रदेशवासियों के सुख-समृद्धि की कामना की। उन्होंने रंगपंचमी के पावन पर्व पर श्रृद्धालुओं के साथ फूलों की होली भी खेली।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि करीला धाम में श्रृद्धालुओं के लिए आवश्यक सुविधाओं का विस्तार किया जायेगा। मेले की व्यवस्थाओं को और अधिक पुख्ता किया जायेगा, यह प्रयास किया जायेगा कि करीला धाम मेला राष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाये। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में करीला धाम में आने जाने वाले मार्गों पर श्रृद्धालुओं के लिए छाया की व्यवस्था की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का संबंध चंदेरी से होने के कारण यहां की गढ़ी को भव्य बनाया जायेगा।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भगवान श्रीराम, माता जानकी और रघुकुल के आदर्शों का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके द्वारा स्थापित किये गये आदर्श संपूर्ण समाज के लिए प्रेरणादायक है। उन्होंने कहा कि करीला धाम की दिव्यता और आध्यात्मिक ऊर्जा ऐसी है कि एक बार जो यहां आता है, वह स्वयं को बार-बार आने से रोक नहीं पाता। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राई नृत्य का जिक्र करते हुए कहा कि जब भगवान श्रीराम के घर में लव-कुश का जन्म हुआ होगा, तब इसे 'रघुराई नृत्य' कहा जाता रहा होगा।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसानों को 175 रूपये बोनस देकर 2600 रूपये क्विंटल गेहूं खरीदा जा रहा है। धान पर भी 4000 रूपये प्रति हेक्टेयर अनुदान किसानों को मिलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सरकार दूध उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए 'गोपाल योजना' प्रारंभ कर रही है। उन्होंने कहा कि 10 से अधिक गाय पालने वालों को सरकार अनुदान देगी। सहकारी संस्थाओं के माध्यम से दूध पर 5 रूपये प्रति लीटर की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी। वर्तमान में मध्यप्रदेश दूध उत्पादन में देश में तीसरे स्थान पर है। हमने प्रदेश को पहले स्थान पर लाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
देश का पहला पीपीपी ग्रीन वेस्ट प्रोसेसिंग प्लांट इंदौर में स्थापित किया जाएगा
नई दिल्ली | स्वच्छ भारत मिशन-शहरी के अंतर्गत सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के माध्यम से देश के पहले हरित अपशिष्ट प्रसंस्करण संयंत्र के शुभारंभ के साथ एक प्रमुख उपलब्धि हासिल करने के लिए तैयार है।
स्वच्छ भारत मिशन-शहरी के तहत भारत के पहले पीपीपी-मॉडल आधारित हरित अपशिष्ट प्रसंस्करण संयंत्र के शुभारंभ के साथ इंदौर पर्यावरणीय स्थिरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रगति के लिए तैयार है। इस अभूतपूर्व पहल का उद्देश्य हरित अपशिष्ट को मूल्यवान संसाधनों में परिवर्तित करके शहर की अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली में क्रांतिकारी बदलाव लाना है। यह परियोजना शहरी अपशिष्ट चुनौतियों से निपटने में नवाचार और स्थिरता के लिए शहर की प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है।

यह सुविधा न केवल हरित अपशिष्ट को संसाधित करेगी बल्कि राजस्व भी उत्पन्न करेगी, इंदौर नगर निगम (आईएमसी) लकड़ी और शाखाओं की आपूर्ति के लिए प्रति टन रॉयल्टी के रूप में लगभग 3,000 रुपये कमाएगा। बिचोली हप्सी में 55,000 वर्ग फीट भूमि पर निर्मित, यह संयंत्र लकड़ी और शाखाओं को रीसाइकिल करके लकड़ी की पट्टियां बनाएगा, जो कोयले के विकल्प के रूप में काम करेगा और ऊर्जा संरक्षण को बढ़ावा देगा।
बड़े पेड़ों की शाखाओं को सिटी फ़ॉरेस्ट में हरित अपशिष्ट प्रसंस्करण संयंत्र में भेजा जाएगा, जहाँ उन्हें मूल्यवान उत्पादों में बदला जाएगा। इसके अलावा, प्रमुख संस्थानों के परिसर से उत्पन्न होने वाले हरे कचरे को सीधे एकत्र किया जाएगा और एक निश्चित शुल्क के साथ संयंत्र में भेजा जाएगा। प्रति दिन, इंदौर जैसे व्यस्त शहर में लगभग 30 टन हरा कचरा- लकड़ी, शाखाएं, पत्तियां और फूल निकलता है। जैसे-जैसे मौसम बदलता है, खासकर शरद ऋतु के दौरान यह मात्रा 60 से 70 टन तक बढ़ सकती है।
इंदौर नगर निगम के साथ साझेदारी करते हुए, एस्ट्रोनॉमिकल इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड ने शहर के हरे कचरे को स्थायी और मूल्यवान वस्तुओं में बदलने की महत्वाकांक्षी पहल की है - एक ऐसा महीन चूरा जिसका उपयोग विभिन्न उद्योगों में किया जा सकता है। एक विस्तृत योजना के साथ, विचार यह है कि हरे कचरे को तीन से चार महीने की अवधि में सुखाया जाए। इस समय के दौरान, नमी की मात्रा 90 प्रतिशत तक कम हो जाएगी, जिससे सामग्री अगले चरण के लिए तैयार हो जाएगी। जैसे-जैसे महीने बीतते जाएंगे, हरा कचरा, जो कभी नम होता था, लगभग परिवर्तन के लिए तैयार हल्का और भंगुर हो जाएगा। अत्याधुनिक मशीनें फिर इसे बारीक धूल कणों में तोड़ने में मदद करेंगी। कभी लकड़ी मिलों का एक साधारण उत्पाद अब एक टिकाऊ, चक्रीय अर्थव्यवस्था में योगदान दे रहा है।
बुरादे को पर्यावरण के अनुकूल ईंधन में बदला जा सकता है, जो पारंपरिक जलाने के तरीकों का एक स्वच्छ विकल्प प्रदान करता है। इसका उपयोग टिकाऊ पैकिंग सामग्री बनाने के लिए किया जा सकता है, जो प्लास्टिक की आवश्यकता को कम करता है। फर्नीचर निर्माता इसे एक मिश्रित सामग्री के रूप में उपयोगी पाते हैं, जो कुर्सियों और मेजों जैसे उत्पादों को मजबूती प्रदान करता है। बुरादे से बने उर्वरक मिट्टी को समृद्ध करते हैं, जिससे किसानों को अच्छी फसलें उगाने में मदद मिलती है और खाद्य उद्योग में बुरादे को डिस्पोजेबल प्लेटों में ढाला जा सकता है, जो प्लास्टिक और स्टायरोफोम का एक बायोडिग्रेडेबल विकल्प प्रदान करता है।
स्वच्छ भारत मिशन के तहत, आईएमसी प्लांट तक भूमि और हरित अपशिष्ट उपलब्ध कराने और परिवहन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इस बीच, निजी कंपनी शेड, बिजली और पानी की सुविधाओं सहित शेष बुनियादी ढांचे को स्थापित करने की जिम्मेदारी लेगी। निजी फर्म प्लांट की पूरी स्थापना और संचालन की देखरेख भी करेगी, ताकि शुरू से अंत तक इसका सुचारू संचालन सुनिश्चित हो सके।
यह परियोजना कोयले का एक वैकल्पिक स्रोत भी उपलब्ध कराएगी, जो स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के लिए एक प्रभावी समाधान प्रदान करते हुए वायु गुणवत्ता सूचकांक नियंत्रण में योगदान देगी। यह पहल स्वच्छ भारत मिशन-शहरी के तहत कचरा मुक्त शहरों के दृष्टिकोण के अनुरूप है, जो एक स्वच्छ, हरित और अधिक स्थिरता शहरी पर्यावरण की दिशा में प्रयासों को आगे बढ़ाती है।
ट्रेनों की आवागमन क्षमता विस्तार से जुड़े कार्य हर बड़े शहर में चल रहे : रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव
नई दिल्ली | रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को लोकसभा में बताया कि देश के हर बड़े शहर के स्टेशनों पर ट्रेनों की आवागमन की क्षमता बढ़ाने के प्रयास किये जा रहे हैं। वैष्णव ने प्रश्नकाल में एक सवाल के जवाब में बताया कि महाराष्ट्र के पुणे शहर के लिये ट्रेन चलाने की मांग देश के हर क्षेत्र से आती रहती है, इसके मद्देनजर पुणे में ट्रेनों के आवागमन की क्षमता बढ़ाने के लिये चार स्टेशनों पर कार्य चल रहा है।

उन्होंने कहा कि इसी तरह देश के हर बड़े स्टेशन पर ट्रेनों की आवागमन की क्षमता बढ़ाने के प्रयास किये जा रहे हैं। यह क्षमता बढ़ जाने से इन स्टेशनों पर और रेलगाड़ियों के आने-आने की व्यवस्था की जा सकेगी। उन्होंने बताया कि छत्रपति शिवाजी महाराज से जुड़े स्थलों को भारत गौरव सर्किट से जोड़ा जायेगा। रेल मंत्री ने बताया कि देश के अनेक क्षेत्रों से स्टेशनों पर गाड़ियों के ठहराव के आग्रह आते रहते हैं, लेकिन तकनीकी और सुरक्षा कारणों को ध्यान में रखते हुये ही इस बारे में निर्णय लिये जाते हैं।
जैविक खेती पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी सह प्रदर्शनी
स्वस्थ जीवन के लिए सुरक्षित भोजन”
नई दिल्ली | राष्ट्रीय जैविक एवं प्राकृतिक खेती केंद्र (एनसीओएनएफ), गाजियाबाद द्वारा 18-19 मार्च 2025 को गाजियाबाद में "जैविक खेती पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी सह प्रदर्शनी" का आयोजन किया गया। कार्यक्रम और प्रदर्शनी का उद्घाटन मुख्य अतिथि के.एम.एस. खालसा, निदेशक (वित्त) - कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार, डॉ. गगनेश शर्मा, निदेशक, एनसीओएनएफ, और डॉ. ए.के. यादव, सलाहकार, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा किया गया। इस अवसर पर पद्मश्री डॉ. भारत भूषण त्यागी, बंसी गिर गौशाला, अहमदाबाद से गोपाल भाई सुतारिया और एनसीओएनएफ एवं आरसीओएनएफ के अधिकारी उपस्थित थे।

मुख्य अतिथि के.एम.एस. खालसा ने अपने विचार-विमर्श में जैविक खेती के महत्व और आज की दुनिया में इसके बढ़ते महत्व पर जोर दिया। उन्होंने आश्वासन दिया कि जैविक और प्राकृतिक खेती से संबंधित प्रस्तावों के प्रचार और कार्यान्वयन के लिए प्राथमिकता पर विचार किया जाएगा। इस अवसर पर "जैविक खेती की पुस्तिका" और "स्मारिका" का भी विमोचन किया गया।
एनसीओएनएफ के निदेशक डॉ. गगनेश शर्मा ने मुख्य भाषण दिया। उन्होंने जैविक और प्राकृतिक खेती के क्षेत्र में एनसीओएनएफ की वर्तमान स्थिति और उपलब्धियों को रेखांकित किया। डॉ. शर्मा ने प्रमाणीकरण, जैविक इनपुट गुणवत्ता प्रबंधन के महत्व पर भी चर्चा की और किसानों की आय बढ़ाने में मदद करने के लिए जैविक और प्राकृतिक उत्पादों के विपणन के संभावित अवसरों पर प्रकाश डाला।
डॉ. ए.के. यादव ने भारत में जैविक खेती की स्थिति पर जानकारी साझा की और किसानों तथा हितधारकों को घरेलू तथा अंतर्राष्ट्रीय बाजारों के लिए जैविक उत्पादों के उत्पादन तथा प्रसंस्करण में भाग लेने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि यह किसानों के साथ-साथ देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में भी सहायक होगा।
पद्मश्री डॉ. भारत भूषण त्यागी ने गांव में क्लस्टर आधारित दृष्टिकोण के रूप में जैविक खेती को बढ़ावा देने के बारे में बात की। उन्होंने जैविक खेती की अनुकूलता में सुधार करने और अधिक भूमि को जैविक प्रमाणीकरण के तहत लाने के लिए गांव क्लस्टर-आधारित दृष्टिकोण से आगे बढ़ने पर जोर दिया।
गोपाल भाई सुतारिया ने गाय आधारित प्राकृतिक खेती के महत्व और इसकी संभावनाओं पर ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने “गौकृपा कृषि” पद्धति पेश किया, जिसमें बताया गया कि किसान किस तरह प्राकृतिक और जैविक खेती के तरीकों को अपना सकते हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि यह पद्धति सभी हितधारकों के लिए निःशुल्क उपलब्ध होगी।
दो दिवसीय सम्मेलन में कुल चार सत्र हुए, जिनमें जैविक खेती से संबंधित प्रमुख उद्देश्यों पर अठारह विचार-विमर्श हुए। इन सत्रों में नीति निर्माता, शोधकर्ता, शिक्षाविद, प्रगतिशील किसान, नवोन्मेषक, उद्यमी, उद्योग और अन्य हितधारक एक साथ आए। उन्होंने टिकाऊ कृषि-खाद्य प्रणालियों में किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) और प्रसंस्करण समूहों की भूमिका बढ़ाने पर ज्ञान और अनुभव साझा किए। चर्चाओं में अभिनव किसान-अनुकूल प्रौद्योगिकियों के उपयोग, प्रमाणीकरण, प्रसंस्करण और जैविक उत्पादों के विपणन पर भी चर्चा हुई। इस अवसर पर देश भर के चैंपियन किसानों को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर देश भर के 23 प्रदर्शकों ने जैविक और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने और जागरूकता पैदा करने की दिशा में अपनी उपलब्धियों और गतिविधियों का प्रदर्शन किया।
इस कार्यक्रम में गाजियाबाद, नागपुर, बेंगलुरु, भुवनेश्वर और इंफाल के जैविक एवं प्राकृतिक खेती के क्षेत्रीय केंद्रों (आरसीओएनएफ) के अधिकारियों ने भी हिस्सा लिया। कार्यक्रम में देश भर के चैंपियन किसानों सहित 200 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।
सत्र का समापन सभी वक्ताओं और प्रतिभागियों के बहुमूल्य योगदान को स्वीकार करते हुए धन्यवाद प्रस्ताव के साथ हुआ।
सुनीता विलियम्स की वापसी पर पीएम मोदी ने कहा : आपका स्वागत है क्रू-9
नई दिल्ली | प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स और क्रू-9 टीम की धरती पर सुरक्षित वापसी के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी खुशी जाहिर की।
पीएम नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सुनीता विलियम्स के साथ एक पुरानी तस्वीर शेयर करते हुए कैप्शन में लिखा, आपका स्वागत है क्रू-9, धरती ने आपको याद किया। यह उनके धैर्य, साहस और मानवीय भावना की परीक्षा रही। सुनीता विलियम्स और क्रू-9 के अंतरिक्ष यात्रियों ने एक बार फिर हमें दिखाया है कि दृढ़ता का वास्तव में क्या मतलब है। अज्ञात के सामने उनका अटूट दृढ़ संकल्प हमेशा लाखों लोगों को प्रेरित करेगा।

पीएम मोदी ने आगे कहा, अंतरिक्ष अन्वेषण का मतलब है मानवीय क्षमता की सीमाओं को आगे बढ़ाना, सपने देखने का साहस करना और उन सपनों को हकीकत में बदलने का साहस रखना। सुनीता विलियम्स, एक पथप्रदर्शक और एक आइकान, ने अपने पूरे करियर में इस भावना का उदाहरण दिया है। हमें उन सभी पर बहुत गर्व है जिन्होंने क्रू-9 की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने के लिए अथक मेहनत की। उन्होंने दिखाया है कि जब सटीकता, जुनून से मिलती है और तकनीक, दृढ़ता से मिलती है तो क्या होता है।
बता दें कि अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स और बुच विलमोर, साथ ही नासा के निक हैग और रूसी अंतरिक्ष यात्री अलेक्जेंडर गोर्बुनोव, नौ महीने के लंबे मिशन के बाद पृथ्वी पर वापस लौटे हैं। एस्ट्रोनॉट्स को स्पेसएक्स के ड्रैगन अंतरिक्ष यान द्वारा सुरक्षित रूप से फ्लोरिडा के तट पर उतारा गया। धरती पर लौटे अंतरिक्ष यात्रियों को एक सुंदर और अप्रत्याशित अनुभव हुआ। उनका स्वागत डॉल्फिन ने किया। ड्रैगन कैप्सूल के समुद्र में उतरते ही डॉल्फिन कैप्सूल के आसपास तैरते हुए देखे गए।
यह एक लगभग जादुई क्षण था जब डॉल्फिन ने ड्रैगन कैप्सूल के चारों ओर चक्कर लगाया, इससे पहले कि इसे रिकवरी पोत पर रखा जाता। रिकवरी टीम ने कैप्सूल के साइड हैच को सावधानी से खोला, जो सितंबर के बाद से पहली बार खुला था। अंतरिक्ष यात्रियों को कैप्सूल से बाहर निकाला गया और 45 दिनों के पुनर्वास कार्यक्रम के लिए ह्यूस्टन ले जाया गया। क्रू-9 की पृथ्वी पर वापसी में अपनी चुनौतियां थीं।
मूल रूप से, यह मिशन (जो बोइंग के स्टारलाइनर की पहली चालक दल वाली उड़ान होने वाला था) केवल आठ दिनों तक चलने वाला था।
भारत और फ्रांस की नौसेनाएं द्विपक्षीय नौसैनिक अभ्यास के 23वें संस्करण : वरुण 2025 के लिए तैयार
नई दिल्ली | भारत और फ्रांस के बीच स्थायी समुद्री साझेदारी के प्रमाण के रूप में द्विपक्षीय नौसैनिक अभ्यास वरुण का 23वां संस्करण 19 से 22 मार्च, 2025 तक आयोजित किया जाएगा। साल 2001 में अपनी शुरुआत होने के बाद से अभ्यास वरुण सहयोग की आधारशिला के रूप में विकसित हुआ है, जो नौसैनिक सहभागिता और परिचालन हेतु तालमेल को बढ़ाने के लिए दोनों देशों की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

इस वर्ष के संस्करण में सतह के नीचे, धरातल और हवाई क्षेत्र में समुद्री अभ्यासों तथा जटिल युद्धाभ्यासों की एक रोमांचक श्रृंखला आयोजित करने का संकेत दिया गया है। इस अभ्यास में विमानवाहक पोत विक्रांत और चार्ल्स डी गॉल के साथ-साथ उनके लड़ाकू विमान, विध्वंसक जहाज, फ्रिगेट तथा एक भारतीय स्कॉर्पीन श्रेणी की पनडुब्बी की संयुक्त भागीदारी होना वास्तव में दोनों नौसेनाओं की सहयोगी सामर्थ्य को उजागर करती है।
नौसैन्य अभ्यास वरुण 2025 में उन्नत वायु रक्षा व लड़ाकू अभ्यास आयोजित किये जाएंगे, जिसमें फ्रांसीसी राफेल-एम और भारतीय मिग-29 के बीच हवा से हवा में संघर्ष भी शामिल होगा, जिसे सामरिक एवं परिचालन क्षमताओं को निखारने के लिए तैयार किया गया है। पनडुब्बी रोधी युद्ध अभ्यास में समुद्र के भीतर की स्थिति के बारे में कठोर प्रशिक्षण दिया जाएगा, जबकि सतह पर युद्ध संचालन में भारतीय और फ्रांसीसी बेड़े द्वारा समन्वित युद्धाभ्यास तथा मुठभेड़ अभ्यास का प्रदर्शन किया जाएगा। समुद्री गश्ती विमान परिस्थितिजन्य सुरक्षा की समझ को बढ़ाएंगे और समुद्र में पुनःपूर्ति अभ्यास से दोनों देशों का सैन्य सहयोग भी सशक्त होगा। यह अभ्यास एक स्वतंत्र, खुले और सुरक्षित समुद्री पर्यावरण की सुरक्षा के समग्र साझा दृष्टिकोण को रेखांकित करता है।
यह अभ्यास सर्वोत्तम कार्य प्रणालियों और आपसी समझ के आदान-प्रदान को बढ़ावा देकर दोनों देशों के सबसे जटिल समुद्री परिदृश्यों में भी निर्बाध रूप से कार्रवाई करने की क्षमता को स्पष्ट करता है। अभ्यास वरुण 2025 समुद्री शांति एवं सुरक्षा की दिशा में भारत और फ्रांस की नौसेनाओं के बीच शक्तिशाली होते हुए गहन संबंधों की पुष्टि भी करता है।
भारत-मलेशिया राज्य मंत्री स्तरीय द्विपक्षीय बैठक नई दिल्ली में आयोजित
नई दिल्ली | केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने 18 मार्च 2025 को वाणिज्य भवन, नई दिल्ली में मलेशिया के निवेश, व्यापार एवं उद्योग उप मंत्री ल्यू चिन टोंग के साथ द्विपक्षीय बैठक की। बैठक के दौरान मलेशियाई राजनयिक और मलेशिया के निवेश, व्यापार एवं उद्योग मंत्रालय, मलेशिया तथा भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, विदेश मंत्रालय और भारतीय मानक ब्यूरो के वरिष्ठ सरकारी अधिकारी भी उपस्थित थे।

दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय व्यापार मुद्दों, बाजार पहुंच मुद्दों, सेमीकंडक्टर उद्योग में सहयोग, सेवा क्षेत्र में सहयोग और भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) की विदेशी निर्माता प्रमाणन योजना (एफएमसीएस) से संबंधित मुद्दों पर भी चर्चा की। दोनों पक्षों ने उम्मीद जताई कि बैठक द्विपक्षीय व्यापार मुद्दों के समाधान में तेजी लाने और दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाने में मदद करेगी।
मलेशिया आसियान में भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, जिसका 2023-24 के दौरान कुल व्यापार 20.02 बिलियन डॉलर रहा था, जो आसियान के साथ भारत के कुल व्यापार का लगभग 17% है।
भारतीय रेल की वित्तीय स्थिति अच्छी, यात्रियों को दे रहे पहले से अधिक सब्सिडी : केंद्रीय रेल मंत्री
ट्रेन से प्रति किलोमीटर यात्रा की लागत ₹1.38 है, लेकिन यात्रियों से केवल 73 पैसे लिए जाते हैं
इस साल 1,400 लोकोमोटिव का उत्पादन हुआ, जो अमेरिका और यूरोप के संयुक्त उत्पादन से अधिक है
31 मार्च तक भारतीय रेल 1.6 बिलियन टन कार्गो ढुलाई के साथ दुनिया के टॉप 3 देशों में शामिल होगा
भविष्य में नई दिल्ली रेलवे स्टेशन जैसे हादसे को रोकने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं: केंद्रीय रेल मंत्री
नई दिल्ली | केंद्रीय रेल, सूचना एवं प्रसारण तथा इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने आज राज्यसभा में रेल मंत्रालय के कार्यों पर हुई चर्चा के दौरान भारतीय रेल की उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि भारतीय रेल न केवल यात्रियों को किफायती किराए पर सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण सेवाएं प्रदान कर रही है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी अपनी अलग पहचान बना रही है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि भारत में रेलवे का किराया पड़ोसी देशो जैसे पाकिस्तान, बांग्लादेश और श्रीलंका की तुलना में कम है, जबकि पश्चिमी देशों में यह भारत की अपेक्षा 10 से 20 गुना अधिक है।

रेल यात्रियों दी जा रही सब्सिडी पर रेल मंत्री ने कहा कि अभी ट्रेन से प्रति किलोमीटर यात्रा की लागत ₹1.38 है, लेकिन यात्रियों से केवल 73 पैसे लिए जाते हैं, यानी 47% सब्सिडी दी जाती है। वित्त वर्ष 2022-23 में यात्रियों को ₹57,000 करोड़ की सब्सिडी दी गई, जो 2023-24 (प्रोविजनल फिगर) में बढ़कर करीब ₹60,000 करोड़ हो गई। हमारा लक्ष्य न्यूनतम किराए पर सुरक्षित और बेहतर सेवाएं देना है
रेल विद्युतीकरण के फायदों पर प्रकाश डालते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यात्रियों और माल परिवहन की बढ़ती संख्या के बावजूद ऊर्जा खर्च स्थिर बना हुआ है। भारतीय रेल वर्ष 2025 तक ‘स्कोप 1 नेट जीरो’ और 2030 तक ‘स्कोप 2 नेट जीरो’ हासिल करने के लक्ष्य पर कार्यरत है। उन्होंने बताया कि बिहार के मढौरा कारखाने में निर्मित लोकोमोटिव का निर्यात जल्द ही शुरू किया जाएगा। वर्तमान में भारतीय रेल के यात्री कोच मोज़ाम्बिक, बांग्लादेश और श्रीलंका को निर्यात किए जा रहे हैं, जबकि लोकोमोटिव मोज़ाम्बिक, सेनेगल, श्रीलंका, म्यांमार और बांग्लादेश को भेजे जा रहे हैं। इसके अलावा, बोगी के अंडर-फ्रेम यूनाइटेड किंगडम, सऊदी अरब, फ्रांस और ऑस्ट्रेलिया को निर्यात किए जा रहे हैं, वहीं प्रपल्शन पार्ट्स फ्रांस, मैक्सिको, जर्मनी, स्पेन, रोमानिया और इटली को भेजे जा रहे हैं।
इस साल भारत में 1,400 लोकोमोटिव का उत्पादन हुआ, जो अमेरिका और यूरोप के संयुक्त उत्पादन से अधिक है। साथ ही, 2 लाख नए वैगन बेड़े में जोड़े गए हैं। रेल मंत्री ने बताया कि 31 मार्च को समाप्त हो रहे वित्त वर्ष में भारतीय रेल 1.6 बिलियन टन कार्गो ढुलाई कर दुनिया के टॉप 3 देशों में शामिल होगा, जिसमें चीन, अमेरिका और भारत होंगे। यह रेलवे की बढ़ती क्षमता और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाता है।
केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने राज्यसभा में घोषणा किया कि रेल सुरक्षा पर विशेष ध्यान देते हुए, 41,000 LHB कोच तैयार किए गए हैं तथा सभी ICF कोच को LHB में बदला जाएगा। लंबी रेल, इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग, फॉग सेफ्टी डिवाइस और 'कवच' सिस्टम तेजी से लागू किए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद देते हुए वैष्णव ने कहा कि पहले रेलवे को ₹25,000 करोड़ का समर्थन मिलता था, जो अब बढ़कर ₹2.5 लाख करोड़ से अधिक हो गया है। इससे बुनियादी ढांचे में सुधार हुआ है। वहीं 50 नमो भारत ट्रेनों का निर्माण किया जा रहा है, जो कम दूरी की यात्रा के लिए AC और नॉन-AC विकल्पों के साथ है।
हाल ही में नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर हुए हादसे लेकर केंद्रीय रेल मंत्री ने सदन को बताया कि इस दुखद हादसे की जांच हाई-लेवल कमेटी कर रही है। CCTV फुटेज समेत सभी डेटा सुरक्षित रखा गया है, करीब 300 लोगों से बातचीत कर फैक्ट्स की जांच हो रही है। भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं।
केंद्रीय रेल मंत्री ने कहा कि हमारा सरकार गरीब से गरीब व्यक्ति के लिए प्रतिबद्ध है। यही वजह है कि जनरल कोचों की संख्या एसी कोचों की तुलना में ढ़ाई गुना अधिक बढ़ाई जा रही है। वर्तमान प्रोडक्शन प्लान के अनुसार 17 हजार नॉन-एसी कोचों के मैन्युफैक्चरिंग का प्रोग्राम है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि भारतीय रेल की वित्तीय स्थिति अच्छी है और इसमें लगातार सुधार के प्रयास जारी हैं। रेलवे ने कोविड महामारी से जुड़ी चुनौतियों पर सफलतापूर्वक काबू पा लिया है। यात्रियों की संख्या बढ़ रही है और माल ढुलाई में वृद्धि देखी जा रही है। अब रेलवे का राजस्व करीब 2 लाख 78 हजार करोड़ रुपये है और 2 लाख 75 हजार करोड़ के खर्चे हैं। भारतीय रेल सभी बड़े खर्चे खुद के इनकम से कर रही है, जो कि रेलवे के बेहतर प्रदर्शन से संभव हुआ है
राज्यसभा में दिए गए अपने बयान में केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भरोसा दिलाया कि रेलवे भविष्य में और अधिक आधुनिक, सुरक्षित और पर्यावरण-अनुकूल परिवहन प्रणाली के रूप में उभरेगा।
केरोसिन के स्थान पर स्वच्छ ऊर्जा के विकल्प को बढ़ावा देने हेतु सरकार के कदम
नई दिल्ली | 1 मार्च, 2020 से, सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) केरोसिन का खुदरा विक्रय मूल्य अखिल भारतीय स्तर पर शून्य अंडर-रिकवरी स्तर पर बनाए रखा जा रहा है।
सरकार खाना पकाने और रोशनी के उद्देश्य से सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) केरोसिन का आवंटन करती है। इसके अलावा, सरकार ने 2012 में राज्यों/केन्द्र-शासित प्रदेशों को प्राकृतिक आपदाओं, धार्मिक कार्यों, मत्स्यपालन, विभिन्न यात्राओं आदि जैसी विशेष जरूरतों के लिए प्रत्येक वित्तीय वर्ष के दौरान गैर-सब्सिडी दरों पर पीडीएस केरोसिन के एक महीने के कोटे का आवंटन करने का अधिकार दिया है। केरोसिन की प्रदूषणकारी प्रकृति को देखते हुए, पीडीएस के तहत एसकेओ के आवंटन को तर्कसंगत बनाया गया है। इसके अलावा, सरकार ने 2015-16 से 2019-20 तक पीडीएस केरोसिन आवंटन को स्वैच्छिक रूप से छोड़ने के लिए केरोसिन के लिए प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण योजना (डीबीटीके) के तहत राज्यों को नकद प्रोत्साहन प्रदान किया। तब से, वित्तीय वर्ष 2023-24 तक 13 राज्य केरोसिन मुक्त हो गए हैं।

सरकार स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में परिवर्तन का नेतृत्व करने हेतु विभिन्न अंतरराष्ट्रीय पहलों के साथ काम करने के साथ-साथ उनका नेतृत्व भी कर रही है। भारत नवंबर 2015 में अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन और सितंबर 2023 में जी20 की अध्यक्षता के दौरान वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन के संस्थापक सदस्यों में से एक था। भारत ऊर्जा सप्ताह 2025 के दौरान, भारत ने ग्लोबल साउथ के सामने आने वाली चुनौतियों का समाधान करने के तरीकों पर चर्चा करने और भारत की प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (पीएमयूवाई) के सबक को साझा करने हेतु स्वच्छ पाक कला पर एक मंत्रिस्तरीय गोलमेज सम्मेलन की मेजबानी की थी।
सरकार ने स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक बहुआयामी रणनीति अपनाई है। इस रणनीति में अन्य बातों के साथ-साथ अर्थव्यवस्था में प्राकृतिक गैस की हिस्सेदारी बढ़ाने और गैस आधारित अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ने हेतु देश भर में ईंधन/कच्चे माल के रूप में प्राकृतिक गैस के उपयोग को बढ़ावा देकर मांग प्रतिस्थापन, इथेनॉल, दूसरी पीढ़ी के इथेनॉल, संपीड़ित जैव गैस तथा जैव डीजल जैसे नवीकरणीय एवं वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा देना, रिफाइनरी प्रक्रिया में सुधार, ऊर्जा दक्षता एवं संरक्षण को बढ़ावा देना और विभिन्न नीतिगत पहलों के माध्यम से तेल एवं प्राकृतिक गैस के उत्पादन को बढ़ाने के प्रयास आदि शामिल हैं। ऑटोमोटिव ईंधन के रूप में संपीड़ित जैव गैस (सीबीजी) के उपयोग को बढ़ावा देने हेतु, किफायती परिवहन के लिए टिकाऊ विकल्प (एसएटीएटी) पहल भी शुरू की गई है।
प्रकाश व्यवस्था के लिए केरोसिन के स्वच्छ विकल्प के रूप में, भारत ने सौभाग्य (प्रधानमंत्री सहज बिजली हर घर योजना) और दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना (डीडीयूजीजेवाई) के माध्यम से बिजली की सुलभता के मामले में लगभग सार्वभौमिक संतृप्ति हासिल कर ली है।
देश भर के गरीब परिवारों को स्वच्छ खाना पकाने के ईंधन सुलभ कराने के उद्देश्य से, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (पीएमयूवाई) मई, 2016 में शुरू की गई थी। पीएमयूवाई उपभोक्ताओं के लिए एलपीजी को और अधिक किफायती बनाने तथा उनके द्वारा एलपीजी का निरंतर उपयोग सुनिश्चित करने हेतु, सरकार ने मई 2022 में पीएमयूवाई उपभोक्ताओं को प्रति वर्ष 12 रिफिल तक (और 5 किलोग्राम वाले कनेक्शन के लिए आनुपातिक रूप से समानुपातिक) 200 रुपये प्रति 14.2 किलोग्राम वाले सिलेंडर की लक्षित सब्सिडी शुरू की। अक्टूबर 2023 में, सरकार ने प्रति वर्ष 12 रिफिल तक (और 5 किलोग्राम कनेक्शन के लिए आनुपातिक रूप से समानुपातिक) 14.2 किलोग्राम वाले सिलेंडर पर लक्षित सब्सिडी को बढ़ाकर 300 रुपये कर दिया। पीएमयूवाई उपभोक्ताओं को 300 रुपये प्रति सिलेंडर की लक्षित सब्सिडी के बाद यह योजना देश भर में 10.33 करोड़ से अधिक उज्ज्वला लाभार्थियों के लिए उपलब्ध है।
देश भर में एलपीजी के लाभों के बारे में जागरूकता बढ़ाने हेतु, अन्य बातों के साथ-साथ विभिन्न कदम उठाए गए हैं, जिनमें पीएमयूवाई के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए अभियान चलाना, कनेक्शनों को नामांकित व वितरित करने के लिए मेला/शिविर आयोजित करना, आउट ऑफ होम (ओओएच) होर्डिंग्स, रेडियो जिंगल्स, सूचना, शिक्षा एवं संचार (आईईसी) वैन आदि के माध्यम से प्रचार करना, एलपीजी पंचायतों के माध्यम से अन्य पारंपरिक ईंधनों की तुलना में एलपीजी के उपयोग के लाभों तथा एलपीजी के सुरक्षित उपयोग के बारे में जागरूकता फैलाना, विकसित भारत संकल्प यात्रा के तहत नामांकन/जागरूकता शिविर, पीएमयूवाई कनेक्शन प्राप्त करने के लिए आधार नामांकन तथा बैंक खाते खोलने के लिए उपभोक्ताओं एवं उनके परिवारों को सुविधा प्रदान करना, एलपीजी कनेक्शन प्राप्त करने की प्रक्रिया का सरलीकरण, www.pmuy.gov.in, निकटतम एलपीजी वितरक, कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) आदि पर पीएमयूवाई कनेक्शन के लिए ऑनलाइन आवेदन, 5 किलोग्राम डबल बोतल कनेक्शन (डीबीसी) का विकल्प, 14.2 किलोग्राम से 5 किलोग्राम तक स्वैप विकल्प, प्रवासी परिवारों के लिए पते के प्रमाण एवं राशन कार्ड के बजाय स्व-घोषणा पर नया कनेक्शन प्राप्त करने का प्रावधान आदि शामिल हैं। इसके अलावा, तेल विपणन कंपनियां लगातार नए एलपीजी वितरकों की स्थापना कर रही हैं, खासकर ग्रामीण इलाकों में। पीएमयूवाई योजना के शुभारंभ के बाद से, तेल विपणन कंपनियों ने (01.04.2016 से लेकर 31.12.2024 के दौरान) देश भर में 7959 वितरकों की स्थापना की है, जिनमें से 7373 (यानी 93 प्रतिशत) ग्रामीण इलाकों में हैं। सरकार के हस्तक्षेप के परिणामस्वरूप, देश में एलपीजी की सुलभता अप्रैल 2016 में 62 प्रतिशत से बढ़कर अब लगभग संतृप्ति तक पहुंच गई है।
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्यमंत्री सुरेश गोपी ने यह जानकारी आज राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।
सुनीता विलियम्स 9 महीने बाद अंतरिक्ष से रवाना
10:35 बजे स्पेस स्टेशन से अलग हुआ यान
नई दिल्ली | अंतरिक्ष में फंसे सुनीता विलियम्स और बुच विलमोर के लौटने का समय आ गया है। 9 महीने 13 दिन बाद दोनों अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी पर लौट रहे हैं। मंगलवार (18 मार्च) को सुनीता, विलमोर और स्पेस स्टेशन में मौजूद क्रू-9 के दो एस्ट्रोनॉट ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट में सवार हुए।

स्पेसक्राफ्ट का दरवाजा बंद हुआ। 10-35 बजे स्पेसक्राफ्ट इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन से अलग हुआ। 19 मार्च को सुबह 2-41 बजे इंजन को फायर किया जाएगा। फिर पृथ्वी के वातावरण प्रवेश करेगा। बुधवार (19 मार्च) की सुबह 3-27 बजे समुद्र में यान की लैंडिंग होगी। करीब 17 घंटे के सफर के बाद दोनों एस्ट्रोनॉट धरती पर पहुंच जाएंगे।
अमेरिकी स्पेस एजेंसी ने सुनीता और विलमोर की वापसी की डीटेल शेयर की है। भारतीय समयानुसार 18 मार्च को सुबह 8 बजकर 15 मिनट पर यान का हैच बंद हो गया। बुधवार (19 मार्च) सुबह 3-27 बजे समुद्र में यान की लैंडिंग होगी। 19 मार्च को 5 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस करके दोनों अंतरिक्ष यात्रियों के वापसी की आधिकारिक सूचना दी जाएगी। 5 जून 2024 को नासा का बोइंग क्रू फ्लाइट टेस्ट मिशन लॉन्च किया गया था।
रक्षा मंत्री ने नई दिल्ली में अमरीका की राष्ट्रीय खुफिया निदेशक से भेंट की
दोनों देश अत्याधुनिक रक्षा नवाचार और विशिष्ट प्रौद्योगिकियों में सहयोग की संभावनाएं तलाशने के लिए कार्यरत |
नई दिल्ली | रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 17 मार्च, 2025 को नई दिल्ली में अमरीका की राष्ट्रीय खुफिया निदेशक तुलसी गबार्ड के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की हाल ही में हुई बैठक के बाद जारी संयुक्त वक्तव्य से यह बात सामने आई है कि चर्चाओं में भारत तथा अमरीका द्विपक्षीय रक्षा साझेदारी की बढ़ती ताकत की पुष्टि हो रही है।

दोनों नेताओं ने इस तथ्य पर बल दिया कि सामरिक सुरक्षा दोनों देशों के बीच व्यापक वैश्विक सामरिक सहयोग का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बनी हुई है। बातचीत के दौरान राजनाथ सिंह और तुलसी गबार्ड ने भारत व अमरीका के बीच सैन्य अभ्यास, रणनीतिक सहभागिता, रक्षा औद्योगिक आपूर्ति श्रृंखलाओं के एकीकरण एवं सूचना-साझाकरण सहयोग तथा विशेष रूप से समुद्री क्षेत्र में हुई महत्वपूर्ण प्रगति की समीक्षा की।
राजनाथ सिंह और तुलसी गबार्ड ने अत्याधुनिक रक्षा नवाचार एवं विशिष्ट प्रौद्योगिकियों में सहयोग के अवसरों पर चर्चा की, जो पारस्परिक रणनीतिक हितों को आगे बढ़ाने के लिए उनकी साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इसके अलावा, उन्होंने अंतर-सहभागिता को बढ़ाने और लचीलेपन तथा नवाचार को विस्तार देने के उद्देश्य से रक्षा औद्योगिक आपूर्ति श्रृंखलाओं के अधिक एकीकरण को प्रमुखता देने जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया।
रक्षा मंत्री ने भारतीय संस्कृति एवं विरासत के प्रति अमरीका की राष्ट्रीय खुफिया निदेशक तुलसी गबार्ड की निरंतर भावना और प्रशंसा के लिए उनका आभार व्यक्त किया। सिंह ने कहा कि ऐसी भावनाएं भारत व अमरीका के बीच मित्रता के बंधन को और भी सशक्त बनाती हैं।