देश-विदेश
पीएम सूर्याघर का उद्देश्य नागरिकों को ऊर्जा उत्पादक बनने के लिए सशक्त बनाना है : केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी
पीएम सूर्याघर और पीएम कुसुम के लाभार्थी भारत के नवीकरणीय ऊर्जा आंदोलन के राजदूत बन सकते हैं: केंद्रीय मंत्री जोशी
नई दिल्ली | केंद्रीय नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रहलाद जोशी ने कहा कि प्रधानमंत्री सौरघर-मुफ्त बिजली योजना का उद्देश्य नागरिकों को ऊर्जा उत्पादक बनाकर उन्हें सशक्त बनाना है, साथ ही डिस्कॉम को बिजली बेचकर अतिरिक्त आय अर्जित करने में सक्षम बनाना है। मंत्री महोदय नई दिल्ली में गणतंत्र दिवस परेड देखने के लिए आमंत्रित नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के 750 विशेष अतिथियों को संबोधित कर रहे थे।

केंद्रीय मंत्री ने कहा "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में, आम लोग अब भारत की अक्षय ऊर्जा क्रांति के केंद्र में हैं। उनका काम, समर्पण और सफलता इस बात का सबूत है कि हम एक राष्ट्र के रूप में क्या हासिल कर सकते हैं। पीएम सूर्यघर और पीएम कुसुम के लाभार्थी भारत के अक्षय ऊर्जा आंदोलन के असली राजदूत हैं।" उन्होंने देश की अक्षय ऊर्जा यात्रा में नेतृत्व करने के लिए उनकी सराहना भी की।
देश के विभिन्न भागों से पीएम सूर्याघर और पीएम कुसुम के लाभार्थियों ने इस अवसर पर बात की। उन्होंने समय पर प्राप्त होने वाली सब्सिडी, बिना किसी हस्तक्षेप के पीएम सूर्याघर पोर्टल पर आसानी से पंजीकरण कराने और इसके कारण बिजली बिल शून्य होने और भारी बचत की सराहना की।
केंद्रीय मंत्री ने कहा, "कर्नाटक के धारवाड़ में, पीएम सूर्य घर के एक लाभार्थी ने सौर ऊर्जा अपनाकर शून्य बिजली बिल प्राप्त किया। केंद्र सरकार से ₹78,000 की सब्सिडी के साथ, यह सफलता की कहानी पूरे देश में टिकाऊ और ऊर्जा-कुशल समाधानों को बढ़ावा देने के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण को उजागर करती है।"
उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर के पीएम कुसुम लाभार्थी राकेश रोही ने बताया कि पीएम कुसुम योजना से लाभान्वित होने के बाद उन्होंने अपने खेत में सोलर पंप लगवाए हैं। इससे उनकी उपज में काफी सुधार हुआ है।
एमएनआरई के विशेष अतिथियों ने पीएम संग्रहालय का दौरा किया और गणतंत्र दिवस परेड देखेंगे।
नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा सचिव सुश्री निधि खरे ने कहा कि मंत्रालय योजनाओं के क्रियान्वयन में सुधार के लिए लाभार्थियों से सीखने और उन्हें सुनने के लिए हमेशा तत्पर है।
इस अवसर पर नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के संयुक्त सचिव ललित बोहरा और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।
नाविक सैटेलाइट सिस्टम : लॉन्च करेगा इसरो 29 जनवरी को
नई दिल्ली | भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) 29 जनवरी को अपने जीएसएलवी-एफ15 रॉकेट के जरिए एनवीएस -02 सैटेलाइट लॉन्च करने वाला है। यह सैटेलाइट नेविगेशन विथ इंडियन कांस्टेलेशन (नाविक) सिस्टम का हिस्सा है, जो भारत की नेविगेशन आवश्यकताओं को निजी और सैन्य क्षेत्रों में बेहतर बनाने के लिए डिजाइन किया गया है।

एनवीएस -02 सैटेलाइट को बेंगलुरु के यूआर सैटेलाइट सेंटर में डिजाइन और विकसित किया गया है। श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से यह लॉन्च होगा। नाविक भारत का स्वदेशी क्षेत्रीय नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम है, जो भारत और इसके आसपास 1,500 किलोमीटर तक के क्षेत्र में काम करता है। यह यूजर्स को सटीक स्थिति, गति और समय सेवाएं प्रदान करता है। नाविक 2 सेवाएं (एक आम उपयोग के लिए मानक स्थिति सेवा और दूसरा अधिकृत यूजर्स के लिए प्रतिबंधित सेवा देता है। यह सिस्टम 20 मीटर से बेहतर स्थान सटीकता और 40 नैनोसेकंड से बेहतर समय सटीकता सुनिश्चित करती है।
एनवीएस -02 सैटेलाइट नाविक की सेवाओं को बेहतर करेगा और इसे नेविगेशन, आपातकालीन सेवाओं, सटीक कृषि, बेड़े प्रबंधन और मोबाइल लोकेशन सेवाओं के लिए अधिक उपयोगी बनाएगा। यह सैटेलाइट 3 फ्रीक्वेंसी बैंड में काम करता है, जिससे इसकी सटीकता और उपयोगिता बढ़ती है। इसके साथ रुबिडियम परमाणु घड़ी भी है, जो सटीक समय प्रदान करती है। इस मिशन का उद्देश्य भारत को नेविगेशन तकनीक में आत्मनिर्भर बनाना और रणनीतिक क्षेत्रों में उपयोग बढ़ाना है।
भारत और इंडोनेशिया के बीच द्विपक्षीय संबंध नई ऊंचाई पर
इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांटो गणतंत्र दिवस पर भारत के मेहमान हैं
नई दिल्ली | भारत और इंडोनेशिया के बीच द्विपक्षीय संबंध नई ऊंचाई पर पहुंच रहे हैं। रिश्तों को और मजबूत बनाने के लिए आज दोनों देशों के बीच कई समझौते हुए हैं। दोनों ने रक्षा विनिर्माण और आपूर्ति श्रृंखला के क्षेत्रों में संयुक्त रूप से काम करने पर सहमति जताई।
दोनों देशों के बीच ये बढ़ती दोस्ती चीन को एक संदेश भी है। बता दें कि इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांटो गणतंत्र दिवस पर भारत के मेहमान हैं। आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनकी मेजबानी की और उनके साथ वार्ता भी की।

भारत की तीन दिवसीय यात्रा पर आए सुबियांटो रविवार को कर्तव्य पथ पर गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि होंगे।
मोदी ने इंडोनेशिया को 10 देशों के आसियान ब्लॉक के साथ-साथ इंडो-पैसिफिक में भारत का “महत्वपूर्ण साझेदार” बताया और कहा कि दोनों देश इस क्षेत्र में नियम-आधारित व्यवस्था के लिए प्रतिबद्ध हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और इंडोनेशिया रक्षा विनिर्माण और आपूर्ति श्रृंखलाओं पर संयुक्त रूप से काम करने के लिए सहमत हुए हैं। मोदी ने कहा कि समुद्री सुरक्षा क्षेत्र में शनिवार को भारत और इंडोनेशिया के बीच हस्ताक्षरित एक समझौते से अपराध की रोकथाम, खोज और बचाव तथा क्षमता निर्माण में सहयोग और मजबूत होगा।
प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि दोनों देशों के बीच कई और मुद्दों पर समझौते हुए |
बता दें कि भारत कई देशों को हथियार बेच रहा है। अब इस सूची में इंडोनेशिया भी शामिल है। इंडोनेशिया को हथियार आपूर्ति करते हुए भारत चीन को घेरने की कोशिश में है। भारत के ब्रह्मास्त्र कहे जाने वाले ब्रह्मोस मिसाइल (Brahmos Missile India) को इंडोनेशिया खरीदने जा रहा है, दोनों देशों के बीच इस पर सौदा भी हो चुका है।
दरअसल, हिंद प्रशांत क्षेत्र में चीन का दबदबा कम करने के लिए भारत अपने पड़ोसी मुल्कों के साथ संबंध बेहतर बनाने में लगा है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश को सुशासन वाले प्रदेश की पहचान दी है : उपराष्ट्रपति
आज उत्तर प्रदेश राजधर्म के आधारभूत एवं जन केंद्रित शासन सिद्धांतो की प्रयोगशाला है- उपराष्ट्रपति
भगवान बुद्ध ने जिस प्रदेश में अपना प्रथम संदेश दिया, वहां से मुख्यमंत्री योगी के विकास की गाथा का सुखद प्रसारण हो रहा है- उपराष्ट्रपति
विश्व स्तरीय संस्थागत ढांचे के निर्माण में उत्तर प्रदेश सबसे आगे -उपराष्ट्रपति
नई दिल्ली | माननीय उपरष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तरप्रदेश सुशासन प्रदेश के रूप में पेहचानन प्राप्त कर रहा है और प्रदेश का संस्थागत ढांचा वैश्विक मानकों पर खरा उतर रहा है।

उत्तर प्रदेश दिवस के शुभारंभ कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में अपना संबोधन देते हुए धनखड़ ने कहा कि “ भगवान बुद्ध ने जिस प्रदेश में अपना प्रथम संदेश दिया, वहां से आज मुख्यमंत्री योगी के विकास की गाथा का सुखद प्रसारण हो रहा है। स्वतंत्रता आंदोलन की गाथाओं से ओतप्रोत रहे इस प्रदेश में 1998 से 26 साल की उम्र में लोकसभा के पांच चुनाव निरंतरता से जीतते हुए। 2017 मार्च से मुख्यमंत्री के पद का दायित्व निर्वहन करते हुए, अब तक 26 साल जनसेवा को समर्पित कर दिया।”
शासन की जन केन्द्रित नीतियों की सराहना करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा, “ ये क्षेत्र राजधर्म के आधारभूत एवं जन केंद्रित शासन सिद्धांतो की प्रयोगशाला बन गया है। एक समय था, बहुत पीछे नहीं जाना पड़ेगा जब भारत को 5 विश्व की कमज़ोर आर्थिक ताकतें में माना जाता था।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने पैशन से, कमिटमेंट से, मिशन से कार्यान्वयन से उसको धराशायी किया और हम आज विश्व की पांचवी महाशक्ति हैं। उसी तरीके से एक समय था, आपके मुख्यमंत्री पद ग्रहण करने से पहले इस प्रदेश की पहचान थी बीमारू राज्य आज इसका कोई ज़िक्र नहीं करता क्योंकि जो परिवर्तन है वो 180 डिग्री हो गया है।”
“इस प्रांत की चर्चा क्यों ना हो, प्रदेश को अयोध्यावासी प्रभु श्री राम की कृपा है। काशी स्थित भगवान विश्वनाथ का संरक्षण है। मथुरा वासी भगवान श्री कृष्ण का आशीष है। वृंदावन वासी भगवान बांके बिहारी का स्नेह है और संकट मोचन श्री हनुमान जी का सामर्थ्य प्राप्त है और यह सब होते हुए गोरखनाथ मठ के महंत योगी आदित्यनाथ इसका संचालन कर रहे हैं, जब सारथी मजबूत होता है तो विकास गुणात्मक होता है”, उन्होंने जोर दिया।
प्रदेश की बेहतर कानून व्यवस्था के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व की सराहना करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा, माननीय मुख्यमंत्री जी, एक ज़माना था उत्तर प्रदेश की पहचान क़ानून और व्यवस्था की चिंता से होती थी। सभी के लिए चिंतन और चिंता का विषय था। उससे निकलने का कोई रास्ता नज़र नहीं आ रहा था। ऐसा लगता था कि प्रांत एक चक्रव्यूह में फँस गया है और प्रांत की जो संभावनाएं हैं वो कुंठित होती जा रही हैं । आपने चमत्कारिक तरीके से उत्तर प्रदेश को सुशासन वाले प्रदेश की पहचान दी है। ये प्रगति की चर्चा देश में है, विदेश में है, और प्रांत में तो निश्चित रूप से है........ विश्व स्तरीय संस्थागत ढांचे का निर्माण और इसमें उत्तर प्रदेश सबसे आगे है। दुनिया के लिए एक उदाहरण है। आपके यहां जो ढांचा दिख रहा है जो उच्चतम वैश्विक मानकों को पूरा करता है।”
प्रदेश में हो रहे विकास की और ध्यान आकर्षित करते हुए श्री धनखड़ ने कहा, “ यह आयोजन जो प्रांत के 75 जिलों में हो रहा है भारत के सबसे बड़े प्रांत की पहचान और अस्मिता की अभिव्यक्ति है। आज के दिन जो पहले नहीं था वो है--उत्तर प्रदेश विकास का सूचक है। उत्तर प्रदेश की पहचान इसकी विकास गति है। प्रांत निरन्तरता से तीव्र गति से अप्रत्याशित प्रगति के पथ पर अग्रसर है।”
इस अवसर पर उत्तर प्रदेश की माननीय राज्यपाल आनंदीबेन पटेल जी, उत्तर प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी एवं अन्य गढ़मान्य जान भी मौजूद थे।
केंद्रीय मंत्री रक्षा निखिल खडसे के नेतृत्व में आयोजित 'जय हिंद' यात्रा से श्री विजयपुरम (पोर्ट ब्लेयर) देशभक्ति के नारे से गूंज उठा
नई दिल्ली | केंद्रीय युवा मामले एवं खेल राज्य मंत्री रक्षा निखिल खडसे ने अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह के श्री विजयपुरम (पोर्ट ब्लेयर) में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर पराक्रम दिवस समारोह में ‘जय हिंद’ पदयात्रा का नेतृत्व किया। इस कार्यक्रम में नेताजी की अदम्य देशभक्ति की भावना का स्मरण कर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई और भारतीय स्वाधीनता संग्राम में नेताजी के अमूल्य योगदान को याद किया गया।
फ्लैग पॉइंट से नेताजी स्टेडियम तक लगभग 5 किलोमीटर मार्ग में पदयात्रा निकाली गई, जिसमे लगभग 1500 माई भारत युवा स्वयंसेवकों और अन्य युवा नेताओं ने भाग लिया। कार्यक्रम में भारत के स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान और नेताजी की स्वतंत्र तथा प्रगतिशील भारत की भविष्य दृष्टि को रेखांकित किया गया।

कार्यक्रम में युवाओं को प्रेरित करने के उद्देश्य से चित्रकला, निबंध लेखन और प्रश्नोत्तरी सहित कई प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। समूह गान और पारंपरिक नृत्यों से युक्त सांस्कृतिक कार्यक्रमों में नेताजी के आदर्शों को दोहराया गया। नेताजी के जीवन पर एक फोटो प्रदर्शनी और स्थानीय हस्तशिल्प कला स्टॉल लोगों के आकर्षण के केंद्र रहे। आयोजन में राष्ट्र निर्माण में लगे प्रमुख युवा नेताओं को उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में सेना के अधिकारियों और उनके परिवारों ने भी भाग लिया जो नेताजी की विरासत और भारत के रक्षा बलों के साथ उनके स्थायी संबंध को प्रमुखता से रेखांकित करता है।
संविधान के 75 वर्ष पूर्ण होने और भारत की जीवंत सांस्कृतिक विविधता दर्शाने के लिए आयोजित की जा रही 24 पदयात्राओं की श्रृखंला में 'जय हिंद' पदयात्रा कड़ी की पांचवीं पद यात्रा है। केंद्रीय मंत्री रक्षा निखिल खडसे ने इस महत्वपूर्ण आयोजन का हिस्सा बनने पर गर्व व्यक्त किया और देशभक्ति की भावना को बढ़ावा देने तथा भारत की समृद्ध विरासत से गहरे जुड़ाव के लिए माई भारत स्वयंसेवकों की सराहना की।
केंद्रीय मंत्री ने आयोजन में उत्साहजनक भागीदारी के लिए युवाओं की सराहना करते हुए भारत के भविष्य को आकार देने में नेताजी के आदर्शों का उल्लेख किया।
भारत के डीप ओशन मिशन को मिली गति : इस वर्ष मानव पनडुब्बी लॉन्च की जाएगी
भारत का पहला मानवयुक्त अंडरवाटर सबमर्सिबल (गहरे समुद्र में चलने वाला मानवयुक्त वाहन) इस वर्ष 500 मीटर तक, अगले वर्ष 6,000 मीटर तक: डॉ. जितेंद्र सिंह |
मिशन शत-प्रतिशत स्वदेशी प्रौद्योगिकी के साथ नीली अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देगा: डॉ. जितेंद्र सिंह
डीप ओशन मिशन को वैज्ञानिक उत्कृष्टता में दोहरी छलांग के लिए गगनयान के साथ जोड़ा गया
स्थायित्व और आर्थिक विकास के लिए अंडरवाटर खजाने को खोलने का मिशन
नई दिल्ली | केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), पृथ्वी विज्ञान और प्रधानमंत्री कार्यालय, परमाणु ऊर्जा विभाग, अंतरिक्ष विभाग, कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने भारत की वैज्ञानिक क्षमताओं को आगे बढ़ाने और नीली अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। इस संदर्भ में उन्होंने घोषणा करते हुए कहा है कि देश इस साल अपना पहला मानव अंडरवाटर वाहन (डीप-सी मैनड व्हीकल) लॉन्च करने के लिए तैयार है।

"डीप ओशन मिशन" पर मिशन संचालन समिति की दूसरी बैठक में अपने संबोधन में डॉ. जितेन्द्र सिंह ने इस पहल की अभूतपूर्व प्रकृति के बारे में बताया, जिससे भारत को ऐसे महत्वाकांक्षी प्रयास को शुरू करने के लिए तकनीकी क्षमता वाले छह देशों के चुनिंदा समूह में शामिल का अवसर मिला है।
केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह नई दिल्ली के पृथ्वी भवन में डीप ओशन मिशन (डीओएम) पर संचालन समिति की बैठक की अध्यक्षता करते हुए।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि शुरुआती पनडुब्बी 500 मीटर की गहराई पर काम करेगी, और अगले साल तक 6,000 मीटर की आश्चर्यजनक गहराई तक पहुंचने का लक्ष्य है। यह उपलब्धि भारत के अन्य ऐतिहासिक मिशनों की समयसीमा के साथ तालमेल रखेगी। इसमें गगनयान अंतरिक्ष मिशन भी शामिल है, जो वैज्ञानिक उत्कृष्टता की ओर देश की यात्रा में एक "सुखद संयोग" को दर्शाता है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में शुरू किया गया प्रमुख कार्यक्रम डीप ओशन मिशन, स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से उनके द्वारा दो बार उजागर किया गया।
डॉ. जितेन्द्र सिंह ने महत्वपूर्ण खनिजों, दुर्लभ धातुओं और अज्ञात समुद्री जैव विविधता सहित बृहद संसाधनों को खोलने की इसकी क्षमता को चिन्हित किया, जो देश की आर्थिक वृद्धि और पर्यावरणीय स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण हैं।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा, "इस मिशन के माध्यम से हम न केवल अपने महासागरों की गहराई का पता लगा रहे हैं, बल्कि एक मजबूत नीली अर्थव्यवस्था का निर्माण भी कर रहे हैं, जो भारत के भविष्य को आगे बढ़ाएगी।" डॉ. सिंह ने जोर देकर कहा कि पूरी पहल स्वदेशी तकनीक पर आधारित है, जिसे पूरी तरह से भारत में विकसित और निर्मित किया गया है, जो अत्याधुनिक विज्ञान में देश की आत्मनिर्भरता को दर्शाता है।
मिशन का उद्देश्य गहरे समुद्र के इकोसिस्टम की समझ को बढ़ाना है, जिससे टिकाऊ मत्स्य पालन और जैव विविधता संरक्षण में योगदान मिल सके। पानी के नीचे की इन संपदाओं का दोहन करके, भारत अपनी अर्थव्यवस्था, वैज्ञानिक समुदाय और पर्यावरणीय लचीलेपन के लिए दीर्घकालिक लाभ सुनिश्चित करने के लिए तैयार है।
महामारी के कारण डीप ओशन मिशन में देरी हुई, लेकिन डॉ. जितेंद्र सिंह ने इस प्रगति के बारे में आशा व्यक्त करते हुए इसे भारत के दृढ़ संकल्प और नवोन्मेषी भावना का प्रमाण बताया। उन्होंने आने वाले वर्षों की अनूठी दोहरी उपलब्धियों पर भी प्रकाश डाला, जिसमें एक भारतीय अंतरिक्ष की यात्रा कर रहा है और दूसरा समुद्र की गहराई में जा रहा है, जो अंतरिक्ष और समुद्री अन्वेषण दोनों में देश की अद्वितीय प्रगति को दर्शाता है।
भारत अपनी प्रथम मानवयुक्त डीप ओशन पनडुब्बी भेजने की तैयारी कर रहा है। यह मिशन सतत विकास और वैज्ञानिक खोज के लिए आशा की किरण है, तथा एक ऐसे भविष्य का मार्ग प्रशस्त करता है, जहां महासागर की क्षमता का जिम्मेदारीपूर्वक और प्रभावी ढंग से उपयोग किया जाएगा।
बैठक में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी, रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ, नीति आयोग के उपाध्यक्ष सुमन के बेरी, भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. अजय कुमार सूद, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव डॉ. एम. रविचंद्रन तथा विभिन्न मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारियों जैसे प्रतिष्ठित हस्तियों ने भाग लिया।
पूर्वाभ्यास के दौरान केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की गणतंत्र दिवस 2025 की झांकी ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया
नई दिल्ली | कला, मूर्तिकला और सांस्कृतिक विविधता के एक अनूठे मिश्रण के साथ गणतंत्र दिवस 2025 के लिए केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की झांकी भारतीय संविधान के 75 वर्षों को प्रदर्शित कर रही है। इसने 23 जनवरी, 2025 को कर्तव्यपथ, नई दिल्ली में पूर्वाभ्यास के दौरान दर्शकों को रोमांचित कर दिया।
भारत का संविधान न्याय, समानता, स्वतंत्रता और बंधुत्व के लिए मार्गदर्शक शक्ति है, और इसकी नींव प्रदान करता है। यह विकास और उन्नति के लिए एक ढाँचा प्रदान करता है, जिससे आर्थिक समावेशन के माध्यम से बड़ी संख्या में लोगों को गरीबी से ऊपर उठाया जा सके। यह झांकी संविधान में मौजूद जटिल चित्रणों को जीवंत करती है। इसमें ज़ेबू बैल - जो शक्ति और नेतृत्व का प्रतीक है (हड़प्पा की मुहर से लिया गया), अशोक की लाट - जो लचीलापन और एकता का प्रतिनिधित्व करता है, और घूमने वाला चक्र - जो निरंतर प्रगति दिखाता है, शामिल हैं।

किनारों पर बनी जटिल रूप से तराशी गई आकृतियाँ आप्टिक्स के सिद्धांत का उपयोग करती हैं, जिससे दर्शकों को उनका पीछा करने का आभास होता है, और इस प्रकार एकता और भाईचारे का संदेश फैलाया जाता है। संविधान में नंदलाल बोस की कलाकृतियों को मूर्तिकला पैनलों पर प्रमुखता से दर्शाया गया है। मुख्य आकर्षण संविधान की एक प्रतिकृति है, जिसमें प्रस्तावना को प्रमुखता से दिखाया गया है। विविध क्षेत्रों के लोगों के जीवंत दृश्य झांकी में नवीनता जोड़ते हैं।
महाराष्ट्र के भंडारा जिले स्थित एक ऑर्डिनेंस फैक्ट्री में भयंकर विस्फोट : राहत टीमें मौजूद
नई दिल्ली | महाराष्ट्र के भंडारा जिले स्थित एक ऑर्डिनेंस फैक्ट्री में शुक्रवार सुबह को भयंकर विस्फोट की घटना सामने आई है। इस हादसे में अब तक 5 कर्मचारियों की मौत की सूचना प्राप्त हुई है, जबकि कई अन्य के घायल होने की खबर है। यह विस्फोट फैक्ट्री के आरके ब्रांच सेक्शन में हुआ। फैक्ट्री में हुए इस भयानक ब्लास्ट की तस्वीरें सामने आई हैं, जिनमें भारी सामान और हथियारों के टुकड़े फैले हुए दिखाई दे रहे हैं।
घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस और फायर ब्रिगेट की टीम मौके पर पहुंची और रेस्क्यू कार्य में जुट गई। घटना के बाद से आसपास के इलाके में हड़कंप मच गया।

हादसे की सूचना के बाद मौके पर पहुंची पुलिस - प्रशासन की टीम ने राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया है। घायलों को अस्पताल में भर्ती किया गया है।
अभी भी कई लोग फैक्ट्री के अंदर फंसे होने का अनुमान हैं। मौके पर दमकल की कई गाड़ियां पहुंची हैं। पुलिस और प्रशासन के अफसर भी मौके पर मौजूद हैं।
बताया जा रहा है ब्लास्ट इतना तेज था कि दूर-दूर तक इसकी आवाज सुनाई दी है। लोग इधर-उधर भागने लगे, जिससे इलाके में हड़कंप मच गया।
बचाव और चिकित्सा दलों को विस्फोट स्थल पर तैनात किया गया है और जीवित बचे लोगों की तलाश की जा रही है। विस्फोट के कारण कारखाने में आग की चपेट में आने से लोगों की मौत हई। अधिकारियों को आशंका है कि मरने वालों की संख्या और बढ़ सकती है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, धमाके की आवाज 4 से पांच किमी दूर तक सुनाई दी है | आवाज सुनकर आसपास के लोग कारखाने की ओर दौड़े, कारखाने से आग की लपटें उठती हुई दिखाई दी | जानकारी के मुताबिक, यह विस्फोट जवाहरनगर स्थित फैक्ट्री की सी सेक्शन 23 बिल्डिंग में हुआ। घटनास्थल पर पुलिस, फायर ब्रिगेड और राहत टीमें मौजूद हैं।
आईएनएस सर्वेक्षक ने मॉरीशस में हाइड्रोग्राफिक सर्वेक्षण पूरा किया
नई दिल्ली | आईएनएस सर्वेक्षक ने मॉरीशस के हाइड्रोग्राफिक सर्वेक्षण के अंतिम चरण को पूरा कर लिया है। इसमें 25,000 वर्ग समुद्री मील से अधिक का व्यापक क्षेत्र शामिल है। जहाज पर आयोजित एक स्वागत समारोह के दौरान, मॉरीशस में भारत के उच्चायुक्त अनुराग श्रीवास्तव ने हाइड्रोग्राफिक सर्वेक्षण की फेयर शीट, साथ ही नए सिरे से तैयार समुद्री चार्ट और सर्वेक्षण उपकरण, मॉरीशस गणराज्य के राष्ट्रपति धरमबीर गोखूल, जीसीएसके (ग्रैंड कमांडर ऑफ द स्टार एंड की ऑफ द इंडियन ओशन) को औपचारिक रूप से सौंपे। नए समुद्री चार्ट के निर्माण से मॉरीशस को अपनी समुद्री इंफ्रास्ट्रक्चर, संसाधन प्रबंधन और तटीय विकास योजना विकसित करने में मदद मिलेगी। यह महत्वपूर्ण आयोजन समुद्री विकास और क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देने में भारत और मॉरीशस के बीच स्थायी साझेदारी को दर्शाता है।

परिचालन संबंधी प्रतिबद्धता के अलावा, जहाज ने 20 जनवरी, 2025 को एक संयुक्त भारत-मॉरीशस योग सत्र का आयोजन किया। इस योग सत्र के आयोजन में जहाज के चालक दल, राष्ट्रीय तट रक्षक, मॉरीशस और इंदिरा गांधी भारतीय संस्कृति केंद्र (आईजीसीआईसी) के कर्मचारी शामिल हुए। आईएनएस सर्वेक्षक के कमांडिंग ऑफिसर कैप्टन त्रिभुवन सिंह ने मॉरीशस के आवास और भूमि मंत्री शकील अहमद यूसुफ अब्दुल रजाक मोहम्मद से मुलाकात की और भारतीय नौसेना द्वारा किए गए सर्वेक्षण कार्यों के विवरण पर चर्चा की। मौजूदा यात्रा ' सागर' के दृष्टिकोण के अनुरूप दोनों देशों के बीच निरंतर प्रतिबद्धता और व्यापक साझेदारी की पुष्टि करती है ।
महाकुंभ त्रिवेणी संगम में अब तक : 10 करोड़ श्रद्धालुओं ने लगाई डुबकी
हर रोज लाखों की भीड़ आ रही प्रयागराज
नई दिल्ली | मां गंगा, मां यमुना और अदृश्य मां सरस्वती के पवित्र संगम में श्रद्धा और आस्था से ओत-प्रोत साधु-संतो, श्रद्धालुओं, कल्पवासियों, स्नानार्थियों और गृहस्थों के स्नान ने नया रिकॉर्ड स्थापित किया है। गुरुवार को महाकुंभ में खानार्थियों की संख्या ने नया इतिहास बनाते हुए 10 करोड़ का आंकड़ा पार कर लिया। दोपहर 12 बजे का डेटा जारी होते ही स्नानार्थियों की संख्या 10 करोड़ का आंकड़ा पार कर गई।

महाकुंभ में प्रतिदिन लाखों की संख्या श्रद्धालु पुण्य स्नान का फल प्राप्त कर रहे हैं। स्नान पर्व पर यह संख्या करोड़ों में पहुंच रही है। उल्लेखनीय है कि योगी सरकार का अनुमान है कि इस बार महाकुंभ में 45 करोड़ लोगों से ज्यादा लोग आने वाले हैं। महाकुंभ की शुरुआत में ही 10 करोड़ स्नानार्थियों की संख्या पार कर जाना सरकार के सटीक अनुमान की ओर संकेत दे रहा है | प्रयागराज में त्रिवेणी संगम पर आज 23.22 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाई। अब तक 10 करोड़ करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाई। उत्तर प्रदेश सरकार ने यह आंकड़ा जारी किया है। एएनआई ड्रोन कैमरे से उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में चल रहे महाकुंभ 2025 का विहंगम दृश्य दिखाया गया। भाजपा नेता नितिन पटेल महाकुंभ 2025 में भाग लेने प्रयागराज पहुंचे। उन्होंने कहा कि यह महाकुंभ सनातन धर्म का पालन करने वालों और सभी भारतीयों के लिए जीवन में एक बार मिलने वाला अवसर है। करोड़ों लोग इस महाकुंभ में भाग ले रहे हैं।
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने गुजरात के हलोल में प्राकृतिक खेती पर दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया
गुजरात के माननीय राज्यपाल श्री आचार्य देवव्रत जी ने कहा कि प्राकृतिक खेती से मृदा स्वास्थ्य में सुधार होता है और इनपुट लागत भी कम होती है |
राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन (एनएमएनएफ) का लक्ष्य 18.75 लाख किसानों को प्राकृतिक खेती करने के लिए प्रशिक्षित करना है और वे एक करोड़ किसानों को प्रशिक्षित करेंगे |
नई दिल्ली | गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत जी ने इस बात पर जोर दिया कि प्राकृतिक खेती की पद्धतियां प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र और मानवीय आवश्यकताओं की परस्पर निर्भरता को पहचानती हैं। उन्होंने गुरुवार को गुजरात के हलोल स्थित गुजरात प्राकृतिक खेती विज्ञान विश्वविद्यालय में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा प्राकृतिक खेती पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का उद्घाटन करते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती से एक ओर जहां मृदा स्वास्थ्य में सुधार होता है, वहीं दूसरी ओर प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र भी बहाल होता है। किसानों की बाहरी बाजार पर निर्भरता कम होती है। इनपुट लागत कम होती है और जलवायु परिवर्तन के प्रति अधिक लचीलापन मिलता है तथा सबसे बढ़कर हमारी भावी पीढ़ियों को सुरक्षित और स्वस्थ भोजन और पर्यावरण मिलता है।

कार्यशाला की अध्यक्षता करते हुए भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के सचिव डॉ. देवेश चतुर्वेदी ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा 2025 में स्वीकृत राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन (एनएमएनएफ) देशभर के उन किसानों और समुदायों से प्रेरित है जो दशकों से प्राकृतिक खेती कर रहे हैं। एनएमएनएफ योजना का उद्देश्य किसानों के खेतों पर अभ्यास के माध्यम से कृषि पद्धतियों को वैज्ञानिक रूप से मजबूत करना है। इस प्रकार एनएमएनएफ योजना कार्यान्वयन में प्राकृतिक खेती करने वाले सभी किसानों, वैज्ञानिकों और संस्थानों को सक्रिय रूप से शामिल किया जाता है ताकि देशभर में प्राकृतिक खेती की क्षमता निर्माण, प्रशिक्षण और विस्तार किया जा सके।
राष्ट्रीय कार्यशाला में हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, गुजरात, झारखंड, तमिलनाडु, जम्मू और कश्मीर, पश्चिम बंगाल आदि के सात प्राकृतिक खेती केंद्रों (सीओएनएफ) के 90 रिसोर्स पर्सन्स ने भाग लिया। उल्लेखनीय है कि मेजबान विश्वविद्यालय, गुजरात प्राकृतिक खेती विज्ञान विश्वविद्यालय, मिशन के लिए पहचाने गए सीओएनएफ में से एक है। कार्यशाला में गुजरात से प्राकृतिक खेती करने वाले 10 स्थानीय किसानों और गुजरात प्राकृतिक खेती विज्ञान विश्वविद्यालय के 52 छात्रों और प्रोफेसरों ने भी भाग लिया।
इस अवसर पर गुजरात सरकार की अतिरिक्त मुख्य सचिव (कृषि) डॉ. अंजू शर्मा, भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के संयुक्त सचिव (एनआरएम/आरएफएस/आईएनएम) फ्रैंकलिन एल. खोबंग, भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की उप सचिव (आईएनएम/एनएफ) रचना कुमार भी उपस्थित थीं।
यह दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन (एनएमएनएफ) में की जाने वाली आगामी प्रशिक्षण गतिविधियों में से पहली है। रिसोर्स पर्सन्स को इस ऐतिहासिक मिशन के राजदूत बनने के लिए प्रोत्साहित किया गया है, जिससे भारतीय कृषि प्रणाली में स्थिरता की दिशा में एक आदर्श बदलाव का मार्ग प्रशस्त होगा।
भारत सरकार ने 2025 में स्वीकृत एक ऐतिहासिक मिशन-राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन (एनएमएनएफ) का शुभारंभ करके मिट्टी, पानी और पर्यावरण के स्वास्थ्य को फिर से जीवंत करने, किसानों के जीवन में समृद्धि लाने और सुरक्षित और स्वस्थ भोजन की ओर अपनी प्रतिबद्धता को मजबूत किया है। राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन (एनएमएनएफ) का लक्ष्य 7.5 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में प्राकृतिक खेती शुरू करना और सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 15,000 क्लस्टरों में 10,000 जरूरत आधारित जैव-इनपुट संसाधन केंद्र (बीआरसी) स्थापित करना है। मिशन 18.75 लाख किसानों को प्राकृतिक खेती करने के लिए प्रशिक्षित करेगा और वही किसान एक करोड़ किसानों को प्रशिक्षित करेंगे। एनएमएनएफ मिशन केवीके, केंद्रीय और राज्य कृषि विश्वविद्यालयों और स्थानीय प्राकृतिक खेती संस्थानों और प्राकृतिक खेती केंद्रों (सीओएनएफ) के राज्य और जिला अधिकारियों के वैज्ञानिकों और किसान मास्टर प्रशिक्षकों के व्यावहारिक प्रशिक्षण के दौर के माध्यम से क्षेत्र में शुरू होता है। सीओएनएफएस कृषि विश्वविद्यालय और राष्ट्रीय स्तर के प्राकृतिक खेती संस्थान हैं जो प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दे रहे हैं। उनके पास प्राकृतिक खेती के प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने का अनुभव, विश्वसनीयता और विशेषज्ञता है और उनके पास निरंतर शोध पहल भी हैं। सीओएनएफएस के पास प्रशिक्षण गतिविधियों और प्रदर्शन यात्राओं के लिए किसानों के खेतों में प्राकृतिक खेती के मॉडल प्रदर्शन फार्म हैं।
महाकुंभ में आयुष : 1.21 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने निशुल्क परामर्श और दवाइयां लीं
आयुष स्टॉल अंतरराष्ट्रीय आगंतुकों के लिए प्रमुख आकर्षण बना
डेस्क | प्रयागराज महाकुंभ में श्रद्धालुओं, तीर्थयात्रियों और आगंतुकों के लिए आयुष ओपीडी, क्लीनिक, स्टॉल और सत्र प्रमुख आकर्षण का केंद्र बन कर उभर रहे हैं। आयुष मंत्रालय ने राष्ट्रीय आयुष मिशन, उत्तर प्रदेश के सहयोग से इस महाकुंभ में आयुष सुविधाओं की एक श्रृंखला की व्यवस्था की है, जिसमें घरेलू और अंतरराष्ट्रीय श्रद्धालुओं को निशुल्क स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की जा रही हैं। इन सुविधाओं पर 1.21 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने आयुष सेवाओं का लाभ उठाया है।

महाकुंभ में आयुष टीम में 20 ओपीडी में 80 डॉक्टर शामिल हैं, जो चौबीस घंटे लगातार चिकित्सा सेवाएं प्रदान करते हैं। ये ओपीडी कई तरह की सामान्य और पुरानी बीमारियों को ठीक करने के लिए सुसज्जित हैं। विदेशी श्रद्धालु भी ओपीडी परामर्श सहित आयुष सेवाओं का उपयोग कर रहे हैं। इसके अलावा, संगम क्षेत्र और सेक्टर-8 में निर्धारित शिविरों में सुबह 8 बजे से 9 बजे तक प्रतिदिन चिकित्सीय योग सत्र आयोजित किए जा रहे हैं, जिनका नेतृत्व आयुष मंत्रालय, नई दिल्ली के मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान (एमडीएनआईवाई) के प्रशिक्षकों द्वारा किया जा रहा है। इन सत्रों में अंतरराष्ट्रीय भक्तों की भागीदारी स्थानीय और वैश्विक जनता के बीच आयुष सेवाओं में बढ़ती रुचि और विश्वास को दर्शाती है।
इन पहलों का उद्देश्य आयुष चिकित्सा पद्धति और औषधीय पौधों आदि में हुई प्रगति के बारे में भक्तों को जानकारी देकर उन्हें सशक्त बनाना है।राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड (एनएमपीबी) ने औषधीय पौधों की रचनात्मक प्रदर्शनी लगाई और इन पौधों के सामान्य लाभों सहित इनके बारे में जानकारी साझा करने के लिए विशेषज्ञों को भी तैनात किया। भक्तों को इन पौधों को उगाने के संभावित वित्तीय लाभों के बारे में भी बताया गया और निशुल्क पौधे भी वितरित किए गए।
महाकुंभ में आयुष नोडल अधिकारी डॉ. अखिलेश सिंह ने कहा, "हमारी टीम न केवल रोगियों का इलाज करती है, बल्कि उन्हें औषधीय पौधों की आर्थिक क्षमता के बारे में भी बताती है। हमारा उद्देश्य उनकी खेती को बढ़ावा देकर लोगों के स्वास्थ्य में सुधार के साथ-साथ उनके लिए आजीविका का स्रोत भी बनाना है।"
महाकुंभ में आयुष टीम ने इम्युनिटी बूस्टर और कैल्शियम की गोलियों सहित दवाओं के निशुल्क वितरण की भी व्यवस्था की है। बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने के आयुष मंत्रालय के जारी प्रयासों के अनुरूप, महाकुंभ में आयुष टीम बुजुर्गों की सुविधा के लिए समर्पित है और उन्हें आयुष सेवाएं प्रदान कर रही है। अब तक लगभग 45 प्रतिशत लाभार्थी बुजुर्ग आबादी के सदस्य हैं। आम बीमारियों और उनके आयुष उपचारों पर जानकारीपूर्ण पर्चे भी वितरित किए जा रहे हैं।
त्वचा रोग से पीड़ित सुल्तानपुर के एक श्रद्धालु रघुनंदन प्रसाद ने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा, "आयुष शिविर से दवाइयां लेने के बाद मेरी सेहत में धीरे-धीरे सुधार हुआ है। मैं सरकार और आयुष के प्रयासों के लिए उनका आभारी हूं।"
रक्षा मंत्री ने केरल के अलाप्पुझा में विद्याधिराज विद्यापीठम सैनिक स्कूल का उद्घाटन किया
सैनिक स्कूल बच्चों में अनुशासन, समर्पण, आत्मसंयम और राष्ट्र सेवा के मूल्यों को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा: राजनाथ सिंह
"रक्षा' एवं 'शिक्षा' का संगम राष्ट्र निर्माण के लिए निर्णायक भूमिका निभाता है"
“वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में युवा अहम भूमिका निभाएंगे”
नई दिल्ली | रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 22 जनवरी, 2025 को केरल के अलाप्पुझा जिले में विद्याधिराज विद्यापीठम सैनिक स्कूल का उद्घाटन किया। यह स्कूल उन 100 नए सैनिक स्कूलों में से एक है, जिन्हें गैर सरकारी संगठनों/संस्थाओं/निजी स्कूलों/राज्य सरकार के विद्यालयों के साथ साझेदारी में क्रमबद्ध तरीके से स्थापित किया जा रहा है, इसके अलावा मौजूदा 33 सैनिक स्कूल पहले से ही पूर्ववर्ती पैटर्न के तहत शिक्षा प्रदान कर रहे हैं।

रक्षा मंत्री ने विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को संबोधित करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि स्कूल विद्यार्थियों में अनुशासन, समर्पण, आत्म-नियंत्रण और राष्ट्र के प्रति सेवा के मूल्यों को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि 100 नए सैनिक स्कूल स्थापित करने का उद्देश्य राष्ट्र के समग्र विकास के लिए बुनियादी शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करना है।
रक्षा मंत्री ने कहा कि सैनिक स्कूल प्रशिक्षण प्रदान करते हैं, जो सामान्य शिक्षा से भिन्न है। यहां छात्रों को शैक्षणिक व शारीरिक प्रशिक्षण दिया जाता है, जिसका उद्देश्य बच्चों का शारीरिक, मानसिक एवं नैतिक विकास करना है। उन्होंने कहा कि इस पहल से सशस्त्र बलों में शामिल होने की इच्छा रखने वाले लोग आसानी से अपना लक्ष्य हासिल कर लेते हैं। श्री राजनाथ सिंह ने कहा कि इस प्रकार, "रक्षा' एवं 'शिक्षा' का संगम राष्ट्र निर्माण के लिए निर्णायक भूमिका निभाता है।"
रक्षा मंत्री ने वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए प्रत्येक भारतीय से देश के भविष्य को आकार देने, चुनौतियों पर काबू पाने और अपनी उपलब्धियों पर गर्व करने के लिए एकजुट होने के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आह्वान को दोहराया। उन्होंने कहा कि युवा भारत को विकासशील से विकसित राष्ट्र बनाने में अहम भूमिका निभाएंगे।
राजनाथ सिंह ने बताया, "ऐसा कहा जा रहा है कि 01 जनवरी, 2025 के बाद जन्म लेने वाले बच्चों को 'बीटा जेनरेशन' कहा जाएगा और उनमें नई चीजें तथा नई तकनीक सीखने की क्षमता अधिक होगी।" उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में, यह स्कूल बच्चों को भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने के लिए एक आधार प्रदान करेगा। रक्षा मंत्री ने कहा, "शिक्षा में उत्कृष्टता हासिल करके और चरित्र निर्माण करके, हमारे विद्यार्थी न केवल 21वीं सदी, बल्कि अगली सदी को भी नेतृत्व प्रदान करेंगे।"
रक्षा मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि 'सैनिक' शब्द न केवल योद्धा या युद्ध कला में निपुण होने का प्रतीक है; बल्कि यह इस तथ्य का भी प्रतीक है कि एक सैनिक में अनुशासन, समर्पण, आत्म-नियंत्रण व राष्ट्र के प्रति निस्वार्थ सेवा जैसे कई गुण होते हैं। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद, आदि शंकराचार्य, नारायण गुरु या राजा रवि वर्मा जैसे महान व्यक्तित्वों में यही गुण थे और सैनिक स्कूल समाज, विशेषकर युवाओं में इन मूल्यों को विकसित करने में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।
राजनाथ सिंह ने कहा कि सरकार एक ऐसे भारत का निर्माण करने के लिए सैनिक स्कूलों की स्थापना कर रही है, जिसका नेतृत्व वे लोग करेंगे जो अपने पूर्वजों द्वारा दिखाए गए रास्ते पर चलेंगे, उनके गुणों को अपनाएंगे और पूरी दुनिया में भारत का नाम रोशन करेंगे। उन्होंने कहा कि स्कूल का नाम महान समाज सुधारक विद्याधिराज चट्टंबी स्वामी के नाम पर रखा गया है, जिनके कार्य एवं सामाजिक सुधार के प्रति उत्साह शिक्षा को आत्म-प्राप्ति और मातृभूमि की सेवा के लिए एक उपकरण के रूप में इस्तेमाल करने की प्रेरणा के रूप में कार्य करते हैं। रक्षा मंत्री ने विद्यार्थियों में आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ सही मूल्यों को विकसित करने की दिशा में स्कूल प्रबंधन के प्रयासों की सराहना की।
रक्षा मंत्री ने कहा कि सैनिक स्कूल न केवल समाज के सभी वर्गों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करते हैं, बल्कि लड़कियों को समान अवसर भी प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा, "हमारी सरकार का मानना है कि जब सैनिक स्कूल बच्चों के विकास में अहम भूमिका निभा रहे हैं, तो बालिकाओं को पीछे नहीं छोड़ा जा सकता।" सिंह ने कहा कि एक तरफ जहां महिलाओं को सशस्त्र बलों में स्थायी कमीशन दिया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर सैनिक स्कूल भी बड़ी संख्या में महिलाओं को सेना में शामिल होने के लिए एक मजबूत आधार तैयार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह भारत को सशक्त, देशभक्त, गौरवान्वित और अनुशासित युवा नागरिकों के साथ प्रस्तुत करने के हमारे दृष्टिकोण को साकार करेगा, जो पूरे राष्ट्र की संपत्ति हैं।
राजनाथ सिंह ने आत्मनिर्भरता के पथ पर भारत की तीव्र प्रगति का उल्लेख करते हुए कहा कि सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्रों के सहयोग से स्वास्थ्य, संचार, उद्योग, परिवहन और रक्षा जैसे क्षेत्रों में नई ऊंचाइयां हासिल की जा रही हैं। रक्षा मंत्री ने सरकार के इस प्रयास को भी दोहराया कि भारत के युवा राष्ट्र के समग्र विकास को सुनिश्चित करते हुए अपनी आकांक्षाओं के अनुरूप जीवन में आगे बढ़ेंगे।
गणतंत्र दिवस परेड 2025 में पहली बार तीनों सेनाओं की ऐसी संयुक्त झांकी भाग लेगी : जिसका विषय होगा ‘सशक्त और सुरक्षित भारत’
नई दिल्ली | देशवासियों के समक्ष संयुक्तता और एकीकरण की भावना को प्रदर्शित करते हुए तीनों सेनाओं की संयुक्त झांकी 26 जनवरी, 2025 को 76वें गणतंत्र दिवस परेड के दौरान पहली बार कर्तव्य पथ पर दिखाई जाएगी। यह झांकी ‘सशक्त और सुरक्षित भारत’ की विषय-वस्तु के साथ, सशस्त्र बलों में संयुक्तता व एकीकरण के वैचारिक दृष्टिकोण को प्रदर्शित करेगी, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा एवं परिचालन उत्कृष्टता सुनिश्चित होगी।

इस झांकी में तीनों सेनाओं के बीच नेटवर्किंग और संचार को सुविधाजनक बनाने वाले संयुक्त संचालन कक्ष को दर्शाया जाएगा। इसमें युद्ध क्षेत्र के परिदृश्यों को प्रदर्शित किया जाएगा, जिसमें जमीन, पानी और हवा में समकालिक ऑपरेशन को दिखाया जाएगा। झांकी में स्वदेशी अर्जुन मुख्य युद्धक टैंक, तेजस एमके II लड़ाकू विमान, उन्नत हल्के हेलीकॉप्टर, विध्वंसक युद्धपोत आईएनएस विशाखापत्तनम और एक दूर से संचालित होने वाले विमान की झलक देखने को मिलेगी। यह झांकी मुख्य रूप से बहु-डोमेन परिचालनों में तीनों सेनाओं की तालमेल को प्रदर्शित करेगी। ये प्लेटफॉर्म रक्षा क्षेत्र में ‘आत्मनिर्भरता’ हासिल करने के दृष्टिकोण का उदाहरण हैं।
रक्षा मंत्रालय में 2025 को ‘परिवर्तन का वर्ष’ घोषित किया गया है। सैन्य मामलों के विभाग को आवंटित अधिदेश के मूल में संयुक्तता और एकीकरण है। इन्हें समकालीन और भविष्य के दोनों तरह के संघर्षों में सशस्त्र बलों की लड़ाकू क्षमता को अधिकतम करने की दिशा में प्रमुख आधारशिला के रूप में पहचाना गया है। एकीकृत रक्षा कार्मिक मुख्यालय ने सुधारों को सही दिशा में ले जाने के लिए तीनों सेवाओं के बीच तालमेल की दिशा में केंद्रित कार्रवाई की है।
तीनों सेनाओं के बीच तालमेल से प्रेरित संयुक्तता और एकीकरण की दिशा में यह विकास, राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा में साझा जिम्मेदारी तथा एकीकृत कार्रवाई की संस्कृति को बढ़ावा देकर देश की सैन्य क्षमताओं को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाएगा।
केन्द्रीय मंत्री अमित शाह 24 जनवरी को मुंबई में राष्ट्रीय शहरी : सहकारी वित्त एवं विकास निगम के कॉर्पोरेट कार्यालय का उद्घाटन करेंगे
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के “सहकार से समृद्धि” के विजन को और अधिक सशक्त बनाने के लिये सहकारिता के क्षेत्र में अनेक महत्वपूर्ण पहल का शुभारंभ भी किया जाएगा |
अमित शाह अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष 2025 के दौरान गतिविधियों के वार्षिक कैलेंडर का विमोचन, देशभर में 10,000 नवगठित बहुउद्देशीय सहकारी समितियों के प्रशिक्षण कार्यक्रम और प्राथमिक सहकारी समितियों के लिए रैकिंग फ्रेमवर्क का शुभारंभ भी करेंगे |
शहरी सहकारी बैंकों को उनके व्यवसाय में आ रही कठिनाइयों को दूर करने के लिए NUCFDC नाम से एक अम्ब्रेला संगठन की स्थापना की गयी है, इससे लगभग 1,500 शहरी सहकारी बैंकों को आवश्यक IT अवसरंचना व संचालन में सहायता मिलेगी |
प्राथमिक सहकारी समितियों के रैंकिंग फ्रेमवर्क से समितियों को पारदर्शिता, दक्षता, और कार्यक्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी, और उनकी विश्वसनीयता व प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता में वृद्धि होगी |
नई दिल्ली | केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह 24 जनवरी को मुंबई में एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रीय शहरी सहकारी वित्त और विकास निगम (NUCFDC) के कॉर्पोरेट कार्यालय का उद्घाटन करेंगे। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के “सहकार से समृद्धि” विजन को और अधिक सशक्त बनाने के लिये सहकारिता क्षेत्र में अनेक महत्वपूर्ण पहल का शुभारंभ किया जाएगा। अमित शाह अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष 2025 के दौरान गतिविधियों के वार्षिक कैलेंडर का विमोचन, देशभर में 10,000 नवगठित बहुउद्देशीय सहकारी समितियों के प्रशिक्षण कार्यक्रम और प्राथमिक सहकारी समितियों के लिए रैकिंग फ्रेमवर्क का शुभारंभ भी करेंगे।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व और केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की दूरदर्शिता और अथक प्रयासों से सहकारी बैंकों को उनके व्यवसाय में आ रही, कठिनाइयों को दूर करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने “राष्ट्रीय शहरी सहकारी वित्त एवं विकास निगम (NUCFDC) नाम से एक अम्ब्रेला संगठन (UO)”, की स्थापना को मंजूरी दी है। इससे लगभग 1,500 शहरी सहकारी बैंकों (UCBs) को आवश्यक IT अवसरंचना और संचालन में सहायता मिलेगी। RBI की मंजूरी के अनुसार अम्ब्रेला संगठन 300 करोड़ रूपये की पेड-अप कैपीटल प्राप्त करने के बाद, स्व-नियामक संगठन के रूप में कार्य करेगा, जिसके कार्य और गतिविधियाँ RBI द्वारा निर्धारित की जाएँगी। अम्ब्रेला संगठन को RBI द्वारा पंजीकरण की तिथि से एक वर्ष के भीतर अर्थात 8 फरवरी, 2025 तक पेड-अप कैपीटल प्राप्त करने के लिए निर्देशित किया गया है ।
अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष 2025 के वार्षिक गतिविधियों के कैलेंडर के विमोचन से सहकारी आंदोलन को एक नया आयाम मिलेगा। इस कैलेंडर के माध्यम से देशभर में सहकारी संगठनों की सहभागिता बढ़ाई जाएगी और सहकारिता को वैश्विक स्तर पर मजबूती मिलेगी। सहकारिता वर्ष का आयोजन सहकारिता के महत्व को वैश्विक स्तर पर उजागर करने में मदद करेगा। इससे विभिन्न देशों के बीच अनुभव और बेस्ट प्रैक्टिसस का आदान-प्रदान होगा, जिससे भारत में सहकारी संस्थाओं को और मजबूती मिलेगी। सहकारिता के माध्यम से ग्रामीण विकास, रोजगार सृजन, और आर्थिक समृद्धि के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए यह एक प्रेरणास्त्रोत बनेगा। साथ ही, यह स्थानीय समुदायों को सशक्त बनाने और उनके सामाजिक-आर्थिक विकास में सहायक होगा।
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह 10,000 नवगठित बहुउद्देशीय सहकारी समितियों के प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ करेंगे, जो इन समितियों को आवश्यक दक्षताओं से सशक्त बनाकर उनकी कार्यक्षमता को बढ़ाएगा। इसके तहत सहकारी समितियों को आधुनिक प्रबंधन, वित्तीय नियोजन, डिजिटलीकरण, और सुशासन पर विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। कुल 11,352 बहुउद्देश्यीय सहकारी समितियों (MPACS) के लिये 1,135 प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किये जाएंगे। प्रत्येक कार्यक्रम में 50 प्रतिभागियों का प्रशिक्षण कर कुल 56,760 लोगों को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य रखा गया है। प्रशिक्षण में 33 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को शामिल किया जाएगा, जिसमें 43 मास्टर प्रशिक्षक की सहायता ली जाएगी ।
अमित शाह प्राथमिक सहकारी समितियों के लिए रैंकिंग फ्रेमवर्क का भी शुभारंभ करेंगे, जो सहकारी समितियों के प्रदर्शन मूल्यांकन के लिए एक समर्पित प्रणाली प्रदान करेगा। इस रैंकिंग फ्रेमवर्क के माध्यम से समितियों को पारदर्शिता, दक्षता, और कार्यक्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी, जिससे उनकी विश्वसनीयता और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता में वृद्धि होगी। यह रैंकिंग फ्रेमवर्क प्राथमिक सहकारी समितियों को कुशल और पारदर्शी बनाने की दिशा में gap identification, मूल्यांकन, निर्णय लेने की प्रणाली के लिए एक platform प्रदान करता है। साथ ही शाह, सहकारिता मंत्रालय और विभिन्न राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों में प्रमुख क्षेत्रों में शीर्ष प्रदर्शन और कामकाज करने वाली सहकारी समितियों को सम्मानित करेंगे।
मौनी अमावस्या के अमृत स्नान पर्व पर : चलेंगी रिकार्ड 150 से अधिक मेला स्पेशल ट्रेनें
मौनी अमावस्या के पर्व पर प्रयागराज रेल मण्डल चलाएगा हर 4 मिनट में एक ट्रेन
एक दिन में 150 से अधिक स्पेशल ट्रेनों का संचालन होगा एक कीर्तिमान
प्रयागराज के सभी 9 स्टेशनों से दिशावार मेला स्पेशल ट्रेनों का होगा संचालन
मकर संक्रांति के स्नान पर्व पर चलाई गई थी रिकार्ड 101 स्पेशल ट्रेनें
मौनी अमावस्या के स्नानार्थियों के लिए बनाए गये हैं अतिरिक्त होल्डिंग एरिया
डेस्क | महाकुम्भ 2025 की प्रयागराज में शुरूआत 13 जनवरी को पौष पूर्णिमा के स्नान के साथ हो गई है। मकर संक्रांति के दिन महाकुम्भ के पहले अमृत स्नान पर्व पर उम्मीद से अधिक लगभग 3.5 करोड़ श्रद्धालुओं ने पवित्र संगम में स्नान किया था। अब तक 9 करोड़ से अधिक श्रद्धालु महाकुम्भ में स्नान कर चुके हैं। इसी क्रम में महाकुम्भ के सबसे बड़े स्नान पर्व मौनी अमावस्या के लिए तैयारियां पूरे जोर पर हैं। प्रयागराज रेल मण्डल ने भी मौनी अमावस्या के दिन करोड़ों की संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए 150 से अधिक मेला स्पेशल ट्रेन चलाने की योजना तैयार कर ली है जो अपने आप में भारतीय रेलवे के लिए एक कीर्तिमान होगा।

दिव्य-भव्य महाकुम्भ 2025 में प्रयागराज आकर संगम स्नान करने वाले श्रद्धालुओं के सभी रिकार्ड ध्वस्त हो रहे हैं। मकर संक्रांति के पहले अमृत स्नान के दिन लगभग 3.5 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने संगम स्नान किया, जिनके लिए प्रयागराज रेल मण्डल ने 101 मेला स्पेशल ट्रेनें चलानी गई थी। जो अपने आप में एक रिकार्ड था। इसी अनुरूप रेल प्रशासन महाकुम्भ के सबसे बड़े अमृत स्नान पर्व मौनी अमावस्य़ा के लिए भी तैयारियां कर रहा है। मेला प्राधिकरण का अनुमान है कि मौनी अमावस्या के दिन 10 करोड़ से अधिक श्रद्धालु संगम स्नान करेंगे। जिनमें से दस से बीस फीसदी श्रद्धालुओं के ट्रेन से आने का अनुमान है। जिनके लिए प्रयागराज रेल मण्डल ने पूरी तैयारियां कर ली हैं। ट्रेनों के अवागमन के साथ यात्रियों के ठहरने और सही ट्रेनों तक पहुंचने के लिए कलर कोडिंग के आधार पर टिकट और अतिरिक्त आश्रय स्थलों का प्रबंध कर लिया गया है।
मौनी अमावस्या के स्नान पर्व के लिए रेलवे की तैयारियों के बारे में बताते हुए प्रयागराज रेलवे के सीनियर पीआरओ अमित मालवीय ने कहा कि मौनी अमावस्या के दिन प्रयागराज रेलवे 150 से अधिक मेला स्पेशल ट्रेनें चलाएगा। सबसे अधिक ट्रेने प्रयागराज जंक्शन से चलेंगी, इसके अलावा मण्डल के अन्य स्टेशनों से दिशावार स्पेशल ट्रेनों का संचालन किया जाएगा। इसके अलावा नियमित ट्रेनों का संचालन भी समयानुसार किया जाएगा। उन्होंने बताया कि किसी स्टेशन से एक दिन में 150 से अधिक स्पेशल ट्रेनों का संचालन करना अपने आप में एक कीर्तिमान होगा। कुम्भ 2019 में मौनी अमावस्या के पर्व पर लगभग 85 मेला स्पेशल ट्रेनों का ही संचालन हुआ था। उन्होंने बताया कि प्रयागराज रेलवे से चलने वाली नियमित ट्रेनों और स्पेशल ट्रेनों की संख्या के अनुमान से मौनी अमावस्या के दिन लगभग हर 4 मिनट पर एक ट्रेन का होगा संचालन।
डीआरआई ने उत्तर पूर्व क्षेत्र में दो मामलों में लगभग 32 करोड़ रुपए मूल्य की : 32 किलोग्राम मेथमफेटामाइन गोलियां जब्त की
वित्तीय वर्ष-2024-25 में, डीआरआई ने पूर्वोत्तर क्षेत्र में 70 लोगों को गिरफ्तार किया और 355 करोड़ रुपएमूल्य की 231 किलोग्राम से अधिक मेथामफेटामाइन टैबलेट, 16 किलोग्राम हेरोइन, 1,375 किलोग्राम गांजा (कैनबिस) और 3.7 किलोग्राम हाइड्रोपोनिक खरपतवार जब्त की; और 36 मामलों से जुड़े32 वाहन पकड़े |
नई दिल्ली | भारत के उत्तर पूर्वी क्षेत्र में सक्रिय संगठित ड्रग सिंडिकेट्स के खिलाफ राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) ने बड़े ऑपरेशन में, मिजोरम में भारत-म्यांमा सीमा के रास्ते भारत में तस्करी कर लाई गई 26 किलोग्राम मेथामफेटामाइन गोलियां 19.01.2025 को असम के कछार जिले केद्वारबंद बाजार इलाके में जब्त की। इस ऑपरेशन में असम राइफल्स, सिलचर के कर्मियों ने सहायता की।

19.01.2025 को डीआरआई ने असम के सिलचर में एक ट्रक से 26 किलोग्राम मेथमफेटामाइन गोलियां जब्त की |
इस संबंध में एक व्यक्ति को नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट, 1985 के तहत गिरफ्तार किया गया है। अंतरराष्ट्रीय अवैध ड्रग्स बाजार में जब्त की गई ड्रग्स का मूल्य 26 करोड़रुपए होने का अनुमान है। इस बड़ी अवैध नशीली दवा की खेप को अशोक लीलैंड ट्रक में विशेष रूप से निर्मित कैविटी में ले जाया जा रहा था।
एक अन्य मामले में, डीआरआई ने 20.01.2025 को त्रिपुरामें अगरतलाके बाहरी इलाके में एक ट्रक से 6 करोड़ रुपए की6 किलोग्राम मेथामफेटामाइन गोलियां जब्त कीं। मादक पदार्थ ट्रक के डैशबोर्ड के नीचे छिपा हुआ पाया गया। इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
उत्तर पूर्वी क्षेत्र में नशीली दवाओं की तस्करी और ट्रैफिकिंग के खतरे से निपटने और क्षेत्र में ड्रग डीलरों और सिंडिकेट के नेटवर्क को खत्म करने के अपने निरंतर प्रयास में, डीआरआई ने वर्तमान वित्तीय वर्ष के दौरान यानी अप्रैल 2024 सेअब तक पूर्वोत्तर में प्रतिबंधित दवाओं की तस्करी और तस्करी के 36 मामले दर्ज किए हैं और70 लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें सात महिलाएं हैं।
जब्त की गई प्रतिबंधित दवाओं में 231 किलोग्राम से अधिक मेथमफेटामाइन टैबलेट, 16 किलोग्राम हेरोइन, 1,375 किलोग्राम गांजा (कैनबिस) और 3.7 किलोग्राम हाइड्रोपोनिक खरपतवार शामिल हैं, जिनकी कीमत 355 करोड़ रुपए है। अवैध दवाओं को छिपाने और परिवहन के लिए इस्तेमाल किए गए बत्तीस वाहनों (19 कारों और 13 ट्रकों) को भी जब्त कर लिया गया है।
हवाई यात्रियों द्वारा उत्तर पूर्वी भारत में हाइड्रोपोनिक खरपतवार की तस्करी नया चलन है। हाइड्रोपोनिक खरपतवार एक प्रकार का मारिजुआना है जो भांग के पौधों से प्राप्त होता है। यह मिट्टी पर पारंपरिक तरीके से नहीं उगाए जाते हैं बल्कि पोषक तत्वों से भरपूर पानी में उगाए जाते हैं।
डीआरआई ने 17.12.2024 को मेघालय के शिलांग में एक ट्रक से 242 किलोग्राम गांजा जब्त किया |
जांच के बाद एनडीपीएस अधिनियम के तहत सक्षम न्यायालयों में मामले दायर किये गये हैं।

