देश-विदेश
आज शाम तय होगा दिल्ली का सीएम कौन... रविशंकर प्रसाद और ओपी धनखड़ बनाए गए पर्यवेक्षक
डेस्क। दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी विधायक दल के नेता के चयन के लिए पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद और राष्ट्रीय सचिव ओम प्रकाश धनखड़ को पार्टी ने अपना केंद्रीय पर्यवेक्षक नियुक्त किया है। बुधवार यानी आज शाम 7 बजे भाजपा विधायक दल की बैठक में ये साफ हो जाएगा कि दिल्ली का अगला सीएम कौन होगा।
पार्टी नेताओं ने बताया कि दिल्ली भाजपा कार्यालय में शाम करीब सात बजे शुरू होने वाली विधायक दल की बैठक में पार्टी के 48 विधायक दिल्ली विधानसभा में सदन का नेता चुनेंगे, जो मुख्यमंत्री बनेगा। बैठक भाजपा के केंद्रीय पर्यवेक्षकों प्रसाद और धनखड़ की उपस्थिति में होगी। पार्टी विधायकों द्वारा नेता चुने जाने के बाद भावी मुख्यमंत्री सरकार बनाने का दावा पेश करने के लिए राजनिवास में दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना से मुलाकात करेंगे।
रामलीला मैदान में होगा शपथ ग्रहण समारोह इस बीच, रामलीला मैदान में नयी सरकार के भव्य शपथ ग्रहण समारोह की तैयारियां जोरों पर हैं। सूत्रों का कहना है कि शपथ ग्रहण समारोह गुरुवार दोपहर में होगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, उनके मंत्रिमंडल के सहयोगी और एनडीए शासित राज्यों के मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री भी शपथ ग्रहण समारोह में शिरकत करेंगे। कुछ विशिष्ट मेहमानों सहित लगभग 50,000 लोगों के इस समारोह में भाग लेने की संभावना है।
अब तक महाकुंभ में 55 करोड़ ने डुबकी लगाई : संगम आने वाले रास्ते जाम
डेस्क | महाकुंभ में अब सिर्फ 8 दिन बचे हैं, लेकिन श्रद्धालुओं की भीड़ कम नहीं हो रही है। आज दोपहर 12 बजे तक 69 लाख श्रद्धालुओं ने स्नान किया। 37 दिनों में 55.31 करोड़ श्रद्धालु स्नान कर चुके हैं। मंगलवार सुबह भी जबरदस्त भीड़ है। संगम आने वाले रास्तों पर लंबा जाम लगा है। पुलिस डायवर्जन के लिए टीन शेड लगा रही है।

अभिनेत्री जूही चावला ने भी संगम में स्नान किया और कहा कि मेरी जिंदगी की सबसे अच्छी सुबह थी। केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी संगम में डुबकी लगाने पहुंचे। आज पूर्व उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू और आंध्र प्रदेश के डिप्टी सी एम और एक्टर पवन कल्याण संगम में डुबकी लगाएंगे।
इससे पहले, सोमवार रात नैनी नया ब्रिज, फाफामऊ जैसे महाकुंभ से सटे इलाकों में 10-12 किमी लंबी कारों की लाइन लगी रही। 8 से 10 किमी के सफर में लोगों को 3 से 4 घंटे लग गए।
प्रशासन का अनुमान था कि वीकेंड के बाद भीड़ कम होगी। हालांकि, सोमवार को ही एक करोड़ से ज्यादा श्रद्धालु स्रान के लिए पहुंचे। पुलिस बाहर से आने वाली गाड़ियों को शहर में एंट्री से पहले ही रोक रही है।
वहां से शटल बस और ई-रिक्शा चल रहे हैं, लेकिन भीड़ ज्यादा होने के चलते श्रद्धालुओं को संगम तक पहुंचने के लिए 10-12 किमी पैदल चलना पड़ रहा है।
अरैल घाट पर जेटी की तरफ बढ़ रहे कोटे के लोगों को पुलिस ने बेरिकेडिंग पर ही रोकना शुरू कर दिया है, ताकि लॉन्च पैड पर ज्यादा भीड़ न बढ़े। अरैल घाट पर जेटी में मानक (40) से ज्यादा लोग चढ़ गए हैं। ये सभी कोटे से दाखिल हुए थे। अब मेला के विवेक चतुर्वेदी माइक से बोल रहे हैं कि 40 से ज्यादा लोग नहीं जाएंगे, चाहें कितनी भी देर जेटी रोकनी पड़ जाए। जेटी (मोटरबोट) पर मानक से ज्यादा घुसने वाले कोटे के लोगों को पुलिस बाहर निकाल रही है।
धर्मेंद्र प्रधान ने हिंदू कॉलेज के 126वें स्थापना दिवस समारोह में शिरकत की
हिंदू कॉलेज ने भारत की बौद्धिक, सांस्कृतिक और राष्ट्रीय पहचान को आकार देने में एक अद्वितीय धरोहर तैयार की है - धर्मेंद्र प्रधान
हिंदू कॉलेज के छात्र भविष्य में संपत्ति सृजक, रोजगार सृजक, गहन-तकनीकी नवप्रवर्तनक, नीति निर्धारक और वैश्विक नागरिक बनेंगे
नई दिल्ली | केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने दिल्ली में हिंदू कॉलेज के 126वें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में शिरकत की। इस अवसर पर शिक्षाविद्, स्टाफ सदस्य और छात्र भी मौजूद रहे। उन्होंने अपने कॉलेज दौरे के दौरान कौशल विकास और उद्यमिता गतिविधियों पर आधारित प्रदर्शनी में छात्रों और शिक्षकों के साथ बातचीत की। विचारों, प्रोटोटाइपों और व्यावसायिक मॉडलों का जिक्र करते हुए, उन्होंने विश्वास जताया कि ये नवाचार, उद्यमिता, रोजगार सृजन और संपत्ति सृजन के ध्वजवाहक के रूप में काम करेंगे।

समारोह को संबोधित करते हुए धर्मेंद्र प्रधान ने हिंदू कॉलेज की प्रतिष्ठित धरोहर पर प्रकाश डाला तथा इसे ज्ञान के मंदिर और शैक्षिक उत्कृष्टता, नवाचार, विविधता, बहुलता, लोकतांत्रिक आदर्शों, राष्ट्रवादी भावना और राष्ट्र निर्माण का उद्गम स्थल बताया।
उन्होंने कॉलेज की स्थापना के समय का उल्लेख करते हुए कहा कि जब मैकाले के भारत की शिक्षा व्यवस्था और संस्कृति को नष्ट करने के प्रयास किया तब इसका मुकाबला करने के लिए कृष्ण दास जी गुरवाले ने इस कॉलजे की स्थापना की। उन्होंने यह भी बताया कि हिंदू कॉलेज ने भारत की बौद्धिक, सांस्कृतिक और राष्ट्रीय पहचान को आकार देने में अद्वितीय योगदान दिया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत आज जिस प्रगति और समृद्धि के मार्ग पर खड़ा है, वह हिंदू कॉलेज द्वारा प्रशस्त किया गया है।
प्रधान ने यह भी कहा कि धरोहर बनाना आसान होता है लेकिन इसे बनाए रखने के लिए निरंतर समर्पण की आवश्यकता होती है। उन्होंने छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों को कॉलेज की परंपरा को बनाए रखने के लिए उनकी अटूट ‘साधना’ के लिए बधाई देते हुए उन्होंने उनसे इस प्रतिबद्धता को जारी रखने और संस्थान को समाधानों के वैश्विक केंद्र में बदलने का प्रयास करने का आग्रह किया।
उन्होंने यह भी कहा कि ‘विकसित भारत 2047’ सभी भारतीयों का सामूहिक लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि अगले 22-25 साल अमृत काल के प्रतीक हैं, जो हिंदू कॉलेज समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण अवधि है। उन्होंने यह भी कहा कि जैसे भारत अपनी स्वतंत्रता की शताब्दी मना रहा है, वैसे ही हिंदू कॉलेज अपने 150वें स्थापना दिवस का जश्न मनाएगा। उन्होंने कहा कि इस महत्वपूर्ण चरण के दौरान, कॉलेज को खुद को अनुसंधान, नवाचार, उद्यमिता और 21वीं सदी की चुनौतियों के समाधान के केंद्र के रूप में स्थापित करने की आकांक्षा रखनी चाहिए।
भारत के भविष्य को आकार देने में हिंदू कॉलेज की भूमिका पर विश्वास व्यक्त करते हुए उन्होंने आने वाले दशकों में भारत के परिवर्तन के 'कप्तान' के रूप में इसके उभरने की कल्पना की। उन्होंने उम्मीद जताई कि इसके छात्र धन-सृजक, नौकरी-सृजक, डीप-टेक इनोवेटर, नीति-निर्माता और कल के वैश्विक नागरिक बनेंगे।
महाकुंभ के ऊपर से हर घंटे 8 से ज्यादा विमान उड़ रहे
महाकुंभ दिखाने काफी नीचे उड़ रहे विमान :40 की जगह 10 हजार फीट पर लगा रहे चक्कर
डेस्क | महाकुंभ के ऊपर से हर घंटे 8 से ज्यादा विमान उड़ रहे हैं। ये इतने नीचे से गुजर रहे हैं कि श्रद्धालु सोच में पड़ जाते हैं। दरअसल, एयरलाइंस कंपनियों ने अपने यात्रियों को हवाई दर्शन कराने के लिए ये खास सुविधा दी है। प्रयागराज के ऊपर से गुजरने वाले विमानों की ऊंचाई घटाई गई है, ताकि यात्री महाकुंभ का एरियल व्यू देख सकें।
विमान महाकुंभ मेले के ऊपर से गुजरते समय 10 हजार फीट की ऊंचाई पर उड़ रहे हैं। आमतौर पर यात्री विमान 30 से 40 हजार फीट की ऊंचाई पर उड़ते हैं। यही स्टैंडर्ड है। हर रोज 200 से ज्यादा विमान महाकुंभ के ऊपर से होकर जा रहे हैं।

सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो भी सामने आए हैं। इनमें देखा जा सकता है कि फ्लाइट महाकुंभ के ऊपर से गुजर रही हैं। इस दौरान यात्री अपनी सीटों से खड़े हो गए और खिड़कियों के पास जाकर महाकुंभ का एरियल व्यू देख रहे हैं।
कई यात्री मोबाइल से वीडियो भी बना रहे हैं। कुछ यात्रियों ने यह भी दावा किया कि जब फ्लाइट महाकुंभ के ऊपर से गुजर रही थी, तब बाकायदा अनाउंसमेंट करके इस बारे में बताया गया। इंडिगो और स्पाइसजेट की सबसे ज्यादा फ्लाइट्स महाकुंभ के चक्कर लगाकर निकल रही हैं।
ब्लॉगर गौरव तनेजा ने एक फ्लाइट से महाकुंभ का एरियल व्यू देखते हुए X पर लिखा- केवल सनातन है, जो स्वर्ग और नरक से भी आगे की बात करता है। मोक्ष और भगवत प्राप्ति।
नेता, सेलिब्रिटी, विदेशी सहित अन्य VIP लोग चार्टर्ड प्लेन से महाकुंभ पहुंच रहे हैं। पिछले दिनों उद्योगपति मुकेश अंबानी अपने निजी विमान से परिवार के साथ महाकुंभ आए थे। इस विमान से पूरे महाकुंभ के दो हवाई चक्कर लगाकर उन्होंने एरियल व्यू देखा था।
बमरौली एयरपोर्ट अथॉरिटी ने उनके विमान को बाकायदा इसकी परमिशन दी थी। इसके अलावा 77 देशों से आए डेलिगेट्स ने भी महाकुंभ का एरियल व्यू देखा।
प्रयागराज के बमरौली एयरपोर्ट पर अब तक करीब 700 चार्टर प्लेन उतर चुके हैं, जबकि कुल विमानों की संख्या इससे काफी ज्यादा है। 11 फरवरी को यहां दिनभर में 157 चार्टर प्लेन उतरने का रिकॉर्ड बना। इससे पहले 14 जनवरी को 43 विमान, 28 को 62 विमान, 31 को 62 विमान, 1 और 4 फरवरी को 87 विमान, 7 को 111, 8 को 138 विमान उतरे। 13 फरवरी को 151 विमान बमरौली एयरपोर्ट पर उतरे।
पवन हंस कंपनी सबसे सस्ती 1250 रुपए में हवाई सेवा मुहैया करा रही है। अरैल में DPS पब्लिक स्कूल के पीछे मैदान से ये हेलिकॉप्टर उड़ता है। पूरा मेला क्षेत्र घुमाकर 7-8 मिनट में वापस आ जाता है।
शुरुआत में ये बुकिंग सिर्फ ऑनलाइन थी। फिर 7 फरवरी से ऑफलाइन भी हो गई। पवन हंस के दो हेलिकॉप्टर श्रद्धालुओं को पूरे महाकुंभ के हवाई दर्शन करा रहे हैं। सबसे सस्ता हवाई टिकट होने की वजह से श्रद्धालु इसका भरपूर फायदा भी उठा रहे हैं। स्थिति ये है कि हेलिकॉप्टर टिकट की बुकिंग वेटिंग संख्या दो हजार तक पहुंच गई है।
वहीं, UP इको-टूरिज्म डेवलपमेंट बोर्ड ने फ्लाई ओला कंपनी के सहयोग से प्रयागराज हवाई अड्डे से त्रिवेणी संगम तक और वापस वहीं तक हेलिकॉप्टर सेवाएं दी हैं। यात्री हवाई अड्डे पर हेलिकॉप्टर में सवार होते हैं। त्रिवेणी संगम के पास बोट क्लब में एक हेलीपैड पर उतरते हैं।
वहां से एक नाव उन्हें स्नान के लिए संगम तक ले जाती है। अनुष्ठान पूरे करने के बाद उन्हें वापस हेलीपैड पर लाया जाता है। इस पूरी सेवा की कीमत प्रति यात्री 35 हजार रुपए है।
फ्लाई ओला कंपनी ने देश के 28 शहरों से भी प्रयागराज के लिए हेलिकॉप्टर सेवाएं शुरू की हैं। दूसरे शहरों से अब तक करीब 200 श्रद्धालु हेलिकॉप्टर से महाकुंभ देखने पहुंच चुके हैं। इसके अलावा प्रयागराज में फिलहाल देश के 25 प्रमुख शहरों से सीधे फ्लाइट्स आ रही हैं।
सामान्य तौर पर कॉमर्शियल फ्लाइट 30 से 40 हजार फीट की ऊंचाई पर उड़ती है। दरअसल, ऊंचाई पर कम वायु प्रतिरोध के कारण ईंधन खपत कम होती है। इससे एयरलाइंस कंपनियों को ईंधन की बचत होती है। हालांकि, यात्रा की दूरी और मौसम की स्थिति के आधार पर ये ऊंचाई बदलती रहती है।
महाकुंभ में हवाई जहाज इतने नीचे कैसे उड़ रहे? क्या कोई छूट है या निर्देश हैं? इस सवाल के जवाब में प्रयागराज में बमरौली एयरपोर्ट के निदेशक मुकेश कुमार उपाध्याय ने मीडिया को बताया- ऐसा कोई आदेश या निर्देश नहीं हुआ है। हवाई जहाज की उड़ान का लेवल बमरौली एयरफोर्स स्टेशन के संज्ञान में है, क्योंकि उन्हीं के पास एयरपोर्ट का भी एयर ट्रैफिक कंट्रोल है।
किसान का बेटा हमेशा सत्य के प्रति समर्पित रहेगा : उपराष्ट्रपति
लुटेरे और आक्रमणकारी आए, हमारे संस्थानों को बेतहाशा नष्ट किया, इसके बाद भी हम संभल जाते हैं, उभर आते हैं: उपराष्ट्रपति
जो शोध ठंडे बस्ते में डाल दिया जाए, वह वह शोध नहीं है जिसकी देश को जरूरत है; शोध अमूर्त नहीं हो सकता: उपराष्ट्रपति
कृषि क्षेत्र के लिए कोई कमी नहीं, किसान के लिए कोई कमी नहीं, यही हमारा आदर्श वाक्य होना चाहिए: उपराष्ट्रपति
उपराष्ट्रपति ने कहा, विकसित भारत का रास्ता गांवों से होकर गुजरता है
उपराष्ट्रपति ने कहा-हमारे देश में कुछ लोग इस बात पर संदेह कर रहे हैं कि यह सदी भारत की है
स्टार्टअप्स को गांवों तक पहुंचना चाहिए: उपराष्ट्रपति
नई दिल्ली | उपराष्ट्रपति ने राष्ट्रीय कृषि-खाद्य एवं जैव विनिर्माण संस्थान (एनएबीआई) में उन्नत उद्यमिता एवं कौशल विकास कार्यक्रम (ए-ईएसडीपी) परिसर का उद्घाटन किया।

भारत के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने सोमवार को कहा, "मैं एक किसान का बेटा हूँ। किसान का बेटा हमेशा सत्य के प्रति समर्पित रहता है... उन्होंने आगे कहा, "भारत की आत्मा उसके गांवों में बसती है और ग्रामीण व्यवस्था देश की रीढ़ की हड्डी है। विकसित भारत का रास्ता गांवों से होकर गुजरता है। विकसित भारत अब केवल एक सपना नहीं है; यह हमारा लक्ष्य है।" उन्होंने कृषि से अपने गहरे जुड़ाव पर जोर दिया।
मोहाली के राष्ट्रीय कृषि-खाद्य और जैव विनिर्माण संस्थान (एनएबीआई) में उन्नत उद्यमिता और कौशल विकास कार्यक्रम (ए-ईएसडीपी) परिसर के उद्घाटन के अवसर पर उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए धनखड़ ने कहा- “यदि हम अपने गौरवशाली इतिहास को देखें, तो भारत को ज्ञान और बुद्धि की भूमि के रूप में जाना जाता था। विशेष रूप से विज्ञान, खगोल विज्ञान और बहुत कुछ में। मानव जीवन के हर पहलू को हमारे वेदों, उपनिषदों, पुराणों में प्रतिबिंबित किया गया है। हम एक ऐसा राष्ट्र हैं जो नालंदा, तक्षशिला और इस तरह के प्राचीन संस्थानों पर गर्व करता है। हमारे यहां 11वीं या 12वीं शताब्दी के आसपास बहुत कुछ नष्ट कर दिया गया। लुटेरे आए, आक्रमणकारी आए और वे हमारी संस्थाओं को नष्ट करने में बुरी तरह मुब्तिला रहे। नष्ट किए जाने वाली संस्थाओं में, नालंदा एक था। हमारे सांस्कृतिक केंद्र, हमारे धार्मिक केंद्रों पर बहुत अलग तरह के प्रतिशोधी, विकृत होने की हद तक चले गए। उन्होंने अपने खुद के केंद्र बनाए। राष्ट्र ने इसका सामना किया। फिर ब्रिटिश शासन आया। व्यवस्थित रूप से, हमें ऐसे कानून मिले जो उनके अधीन थे। हमें ऐसी शिक्षा मिली जिसने हमारी शिक्षा को नष्ट कर दिया और हमारी प्रतिभा के पूर्ण दोहन का इकोसिस्टम नहीं बन पाया। उपराष्ट्रपति ने कहा, सबसे अच्छी बात यह है कि हम जल्दी से संभल जाते हैं और तेजी से उभर रहे हैं।"
शोध के महत्व पर बोलते हुए उपराष्ट्रपति ने स्पष्ट दृष्टिकोण प्रस्तुत किया: “देश के सभी संस्थानों को लिटमस टेस्ट पास करना होगा। लिटमस टेस्ट यह है कि क्या प्रभाव पैदा हो रहा है? सकारात्मक अर्थों में, यह भूकंप की तरह होना चाहिए, जिसका प्रभाव महसूस किया जा सके। शोध के लिए शोध, स्वयं के लिए शोध, शेल्फ पर रखे जाने वाले शोध, व्यक्तिगत अलंकरण के रूप में सामने आने वाले शोध वह शोध नहीं है जिसकी राष्ट्र को आवश्यकता है। शोध सतही रूप से शोधपत्र देना नहीं है। शोध उस व्यक्ति को प्रभावित करने के लिए नहीं है जो विषय से अनभिज्ञ है। शोध उन लोगों को प्रभावित करने के लिए है जो विषय को उतना ही जानते हैं जितना आप जानते हैं या वैश्विक बेंचमार्क पर आपसे अधिक जानते हैं। और वह शोध केवल अमूर्त नहीं हो सकता। हम जो कर रहे हैं उस पर शोध का प्रभाव होना चाहिए। उन्होंने कहा- “मुझे यकीन है कि यह एक ऐसा क्षेत्र है जहाँ आपके पास पर्याप्त गुंजाइश है।”
भारत की सभ्यतागत ताकत को दोहराते हुए उन्होंने कहा, "यह सदी भारत की है। इस पर हमारे देश के कुछ लोगों को छोड़कर किसी को संदेह नहीं है। एक भारतीय के रूप में मेरी उनसे अपील है: हमारे राष्ट्र के प्रति हमारी प्रतिबद्धता, राष्ट्र प्रथम के सिद्धांत में विश्वास और इस विचारधारा को अपनाना कि कोई भी हित - व्यक्तिगत, राजनीतिक या अन्य - राष्ट्रीय हित से बड़ा नहीं है।"
धनखड़ ने कहा, "मैं देखता हूं कि कृषि उपज तब बेची जाती है जब यह किसानों का बाजार नहीं होता, यह खरीदारों का बाजार होता है। सरकार बड़े पैमाने पर गोदाम और सहकारी आंदोलन के जरिए स्टॉक को बनाए रखने की सुविधा प्रदान करती है। मैं आपको बता सकता हूं कि सरकार की कृषि नीतियां किसान की बहुत मदद कर रही हैं। किसान को इसके बारे में जानना होगा। आप एक बड़ी भूमिका निभा सकते हैं क्योंकि हम यह अनुमति नहीं दे सकते कि हमारे किसानों को सबसे अच्छे के अलावा कुछ भी मिले। कृषि क्षेत्र के लिए कोई छोटा बदलाव नहीं। किसान के लिए कोई छोटा बदलाव नहीं। यह हमारा आदर्श वाक्य होना चाहिए। उपराष्ट्रपति ने कहा- आपके जैसे संस्थानों का कृषि विज्ञान केंद्रों, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् के संस्थानों के साथ सीधा संपर्क होना चाहिए।
धनखड़ ने कृषि और डेयरी उत्पादों में मूल्य संवर्धन करने वाले सूक्ष्म उद्योगों के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्थाओं के पुनरुद्धार का आह्वान किया, "गांव या गांवों के समूह में एक ऐसी व्यवस्था विकसित होनी चाहिए, जहां आपके खेत में सूक्ष्म उद्योग हों, जो कृषि उत्पादों में मूल्य संवर्धन करें, जो उत्पादित पशुधन, उत्पादित दूध में मूल्य संवर्धन करें। इससे एक स्थायी समाज विकसित करने में मदद मिलेगी और निश्चित रूप से पोषण संबंधी खाद्य मूल्य में वृद्धि होगी। हमें गांव के समूहों में आइसक्रीम, पनीर, मिठाई और इसी तरह की अन्य चीजें बनाने के लिए उद्यमशीलता कौशल रखने से कौन रोकता है? यह बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे रोजगार पैदा होगा और ग्रामीण युवा संतुष्ट होंगे।"
उन्होंने सामूहिक प्रयासों को प्रोत्साहित करते हुए कहा, "छोटे-छोटे समूह बनाएं, अपने उत्पाद को अपनी पसंद की कीमत पर बेचें। आपको किसी की मदद की ज़रूरत नहीं है। आपको अपनी अर्थव्यवस्था को बहुत ऊँचे स्तर पर बदलने के लिए बस अपनी आंतरिक शक्ति को पहचानना होगा।"
इस अवसर पर प्रियांक भारती, आईएएस, प्रशासनिक सचिव, प्रौद्योगिकी एवं पर्यावरण, पंजाब सरकार, प्रो. अश्विनी पारीक, कार्यकारी निदेशक, ब्रिक-एनएबीआई, एकता विश्नोई, आईआरएस, संयुक्त सचिव, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय, भारत सरकार और अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे।
जीवन में प्रगति के लिये शिक्षा सबसे महत्वपूर्ण : राज्यपाल पटेल
भोपाल। राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि जीवन में प्रगति के लिये शिक्षा सबसे जरूरी है। शिक्षा के बिना कोई भी व्यक्ति या समाज प्रगति नहीं कर सकता। सहरिया समुदाय के लोगों को अपने बच्चों को शिक्षित करने की दिशा में कार्य करना सबसे महत्वपूर्ण हैं, बेटे के साथ-साथ बेटी को भी शिक्षित करें, तभी हम प्रगति की मुख्य धारा से जुड़ सकेंगे। राज्यपाल पटेल ने सोमवार को ग्वालियर की ग्राम पंचायत चैत में सहरिया समुदाय से संवाद करते हुए यह बात कही।
राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सहरिया, भारिया एवं बैगा समुदाय के सम्पूर्ण विकास के लिये केन्द्र सरकार की ओर से 24 हजार करोड़ रूपए की राशि का प्रावधान किया है। इसके माध्यम से इन समुदाय के लोगों को आवास, बिजली, पानी, स्वास्थ्य जैसी महत्वपूर्ण सेवाएँ उपलब्ध कराई जायेंगी। पीएम जनमन योजना के तहत 11 मूलभूत सुविधाओं को 9 विभागों के माध्यम से उपलब्ध कराया जायेगा। इस योजना का लाभ सभी पात्र हितग्राहियों को मिले, इसके सार्थक प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि केन्द्र एवं प्रदेश सरकार की अनेक कल्याणकारी योजनाएँ समाज के उत्थान के लिये संचालित हैं। इन योजनाओं का लाभ लेकर सहरिया परिवारों को अपने जीवन स्तर को और बेहतर बनाने की दिशा में कार्य करने की आवश्यकता है। राज्यपाल ने कहा कि सहरिया परिवार में रानी दुर्गावती, रानी कमलावती और बिरसा मुण्डा जैसे महान लोग हुए हैं, जिन्होंने समाज और देश के लिये अनेक कार्य किए हैं। हम सबको इनसे प्रेरणा लेकर अपने समाज को आगे बढ़ाने के लिये कार्य करना चाहिए।
राज्यपाल पटेल ने ग्राम पंचायत चैत में प्रधानमंत्री जनमन योजना के तहत निर्मित आवास का भी अवलोकन किया। राज्यपाल ने अजमेर आदिवासी के निवास पर पहुँचकर उनके आवास का अवलोकन किया और योजना के संबंध में हितग्राही से चर्चा भी की। उन्होंने हितग्राही के निवास पर सह-भोज भी किया।
एपीडा ने पहली बार ऑस्ट्रेलिया को भारतीय अनार की समुद्री खेप भेजी
नई दिल्ली | भारत के कृषि निर्यात के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में कृषि और प्रसंस्करण खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) ने एग्रोस्टार और के बी एक्सपोर्ट्स के साथ मिलकर समुद्र के रास्ते ऑस्ट्रेलिया को प्रीमियम सांगोला और भगवा अनार की भारत की पहली वाणिज्यिक परीक्षण शिपमेंट सफलतापूर्वक पूरी की। यह भारतीय ताजा उपज के लिहाज से बाजार पहुंच का विस्तार करने में एक बड़ी सफलता है।

ऑस्ट्रेलिया को भारतीय अनार के निर्यात के लिए बाज़ार पहुंच प्राप्त करने के बाद फरवरी 2024 में ऑस्ट्रेलिया को अनार के निर्यात के लिए एक कार्ययोजना और मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) पर हस्ताक्षर किए गए। एपीडा और राष्ट्रीय पौध संरक्षण संगठन (एनपीपीओ) द्वारा सफल बाज़ार पहुँच सुविधा के बाद जुलाई 2024 में पहली हवाई खेप भेजी गई। हवाई खेप ने बाज़ार की मांग का आकलन करने में मदद की, जिसके कारण लागत दक्षता को अनुकूलित करने के लिए समुद्री खेप भेजी गई।
पहली समुद्री माल ढुलाई शिपमेंट 6 दिसंबर, 2024 को भारत से रवाना हुई और 13 जनवरी, 2025 को सिडनी पहुंची, जिसमें महाराष्ट्र के सोलापुर क्षेत्र से प्राप्त 5.7 मीट्रिक टन (एमटी) अनार थे, जिन्हें 1,900 बक्से में पैक किया गया था, प्रत्येक में 3 किलोग्राम प्रीमियम फल थे। भगवा किस्म के 1,872 बक्से (6.56 टन) ले जाने वाला एक और वाणिज्यिक समुद्री शिपमेंट 6 जनवरी, 2025 को ऑस्ट्रेलिया के ब्रिस्बेन पहुंचा। थोक समुद्री शिपमेंट के उपयोग ने प्रतिस्पर्धी मूल्य निर्धारण सुनिश्चित किया, जिससे किसानों को लाभ हुआ और स्थायी व्यापार के अवसर पैदा हुए। दोनों शिपमेंट को भारत की ट्रेसिबिलिटी प्रणाली एएनएआरएनईटी में एकीकृत किया गया, जिससे पारदर्शिता सुनिश्चित हुई और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में उपभोक्ता का विश्वास बना। यह सफल निर्यात न केवल वैश्विक गुणवत्ता मानकों को पूरा करने में भारत की क्षमताओं को रेखांकित करता है, बल्कि नए राजस्व स्रोतों के खुलने से भारतीय किसानों को महत्वपूर्ण बढ़ावा भी प्रदान करता है।
अनार के आगमन पर सिडनी, ब्रिसबेन और मेलबर्न में अत्यधिक सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली। मजबूत मांग के कारण पहले से ही अतिरिक्त शिपमेंट के लिए तत्काल अनुरोध किए गए, जो भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच लाभदायक और टिकाऊ व्यापार संबंधों की बढ़ती संभावना को दर्शाता है। शिपमेंट का समय ऑस्ट्रेलिया के गैर-उत्पादन सीजन के साथ रणनीतिक रूप से संरेखित किया गया था, जिससे भारतीय निर्यातकों के लिए बाजार के अवसरों को अधिकतम किया जा सके।
एपीडा के अध्यक्ष अभिषेक देव ने इस बात पर जोर दिया कि "भारत का कृषि निर्यात परिदृश्य अभूतपूर्व गति से बढ़ रहा है, जिसमें ताजे फलों का निर्यात साल-दर-साल 29 प्रतिशत बढ़ रहा है। अकेले अनार में 20 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है, जो इस सेगमेंट की अपार संभावनाओं को दर्शाता है। ऑस्ट्रेलिया को प्रीमियम अनार की सफल शिपमेंट भारत की समझदार अंतरराष्ट्रीय बाजारों में उच्च गुणवत्ता वाली ताजा उपज की आपूर्ति करने की क्षमता को दर्शाती है। एएनएआरएनईटी जैसी उन्नत ट्रेसेबिलिटी प्रणालियों के माध्यम से हम सुनिश्चित करते हैं कि भारतीय कृषि उत्पाद उच्चतम वैश्विक मानकों को पूरा करते हैं, जिससे दुनियाभर में उपभोक्ता का विश्वास बढ़ता है।"
अभिषेक देव ने भारतीय किसानों के लिए बाज़ार तक पहुंच सुनिश्चित करने और उसे सुविधाजनक बनाने में एपीडा की भूमिका पर भी ज़ोर दिया और कहा- "हम नए और उभरते बाज़ारों में विस्तार करके भारतीय किसानों और कृषि-उद्यमियों का समर्थन करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह सफलता की कहानी भविष्य में और अधिक सहयोग और निर्यात मात्रा में वृद्धि का मार्ग प्रशस्त करती है।"
सितंबर में शुरू होने वाले अगले निर्यात सत्र के साथ एग्रोस्टार के आईएनआई फार्म्स, के बी एक्सपोर्ट्स और अन्य प्रमुख खिलाड़ी इस सफलता को आगे बढ़ाने के लिए तैयार हैं, जिससे ऑस्ट्रेलिया को भारतीय अनार की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित होगी। यह विकास कृषि निर्यात में ग्लोबल लीडर के रूप में भारत की स्थिति की पुष्टि करता है और ऑस्ट्रेलिया के साथ द्विपक्षीय व्यापार संबंधों को मजबूत करता है।
एपीडा भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत एक वैधानिक निकाय है जो कृषि और प्रसंस्करण खाद्य निर्यात को सुविधाजनक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। एपीडा भारतीय किसानों और कृषि-व्यवसायों को बाजार विकास, बुनियादी ढांचे के विस्तार और एएनएआरएनईटी जैसी ट्रेसेबिलिटी प्रणालियों के माध्यम से निर्यात संवर्धन को बढ़ावा देकर उसका समर्थन करता है। ताजे फल, सब्जियां, बासमती चावल और प्रसंस्करण खाद्य पदार्थों सहित भारत के कृषि निर्यात में लगातार मजबूत वृद्धि देखी जा रही है, जिससे वैश्विक कृषि-व्यापार क्षेत्र में देश की स्थिति मजबूत हुई है।
भारतीय नौसेना के जहाज इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू 2025 और बहुपक्षीय नौसैनिक अभ्यास के लिए इंडोनेशिया पहुंचे
नई दिल्ली | भारतीय नौसेना का जहाज आईएनएस शार्दुल और लंबी दूरी की समुद्री निगरानी पी8आई विमान 15 फरवरी से 22 फरवरी 2025 तक निर्धारित इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू (आईएफआर) 2025 में भाग लेने के लिए इंडोनेशिया के बाली पहुंचे हुए हैं। इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू, एक प्रतिष्ठित बहुराष्ट्रीय नौसैनिक आयोजन है, जिसकी समीक्षा इंडोनेशिया के माननीय राष्ट्रपति द्वारा की जाएगी और इसमें विभिन्न देशों के नौसैनिक बल भाग लेंगे।

इस अवधि के दौरान, भारतीय नौसेना अंतर्राष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा संगोष्ठी और सामरिक खेल गतिविधियों सहित विभिन्न उच्च स्तरीय कार्यक्रमों में भी भाग लेगी।
इसके अतिरिक्त, चालक दल बहुराष्ट्रीय गतिविधियों में शामिल होगा, जैसे सिटी परेड, छोटे कछुओं को छोड़ना, मूंगा और मैंग्रोव वृक्षारोपण तथा समुद्र तट की सफाई करना, जो पर्यावरण संरक्षण एवं समुद्री सहयोग के प्रति वचनबद्धता को उजागर करता है।
इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू 2025 के बाद, आईएनएस शार्दुल और पी8आई दोनों ही अभ्यास कोमोडो में भाग लेंगे, जो एक बहुपक्षीय नौसैनिक अभ्यास है, जिसका उद्देश्य समुद्री सहभागिता व क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग को बढ़ाना है।
यह कार्यक्रम जनवरी 2025 में इंडोनेशिया में ला पेरोस अभ्यास में आईएनएस मुंबई और पी8आई विमान की भागीदारी तथा गणतंत्र दिवस परेड 2025 के मुख्य अतिथि महामहिम राष्ट्रपति प्रबोवो सुबिआंतो के साथ उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल के हिस्से के रूप में इंडोनेशियाई नौसेना के चीफ ऑफ स्टाफ एडमिरल मोहम्मद अली की भारत यात्रा के बाद हुआ है।
इस अभ्यास में भारतीय नौसेना की नियमित भागीदारी, क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास (सागर) को बनाए रखने के उद्देश्य से क्षेत्रीय नौसेनाओं के साथ जुड़ने की भारत की प्रतिबद्धता को उजागर करती है।
मेला क्षेत्र में फिर आग लगी एक महीने में आग की पांचवीं घटना : महाकुंभ
डेस्क | प्रयागराज महाकुंभ मेला परिसर में सोमवार दोपहर एक बार फिर आग लग गई है। सेक्टर-8 में लगी आग पर दमकल कर्मियों ने काबू पा लिया है।
श्री कपि मानस मंडल और उपभोक्ता संरक्षण समिति के शिविर में आग लगी थी। दोनों शिविर में दो-दो तंबू जले हैं। मुख्य अग्निशमन अधिकारी प्रशांत सिंह राणा ने कहा- लगभग 3 बजे हमें टेंट में आग लगने की सूचना मिली। जिसके तुरंत बाद हमारी गाड़ियां यहां पहुंची और हमने आग पर काबू पा लिया है। खाली टेंट था, कोई जनहानि नहीं हुई है। आगे की जांच चल रही है।

महाकुंभ में एक महीने में पांचवीं बार लगी आग…
19 जनवरी: सेक्टर 19 में गीता प्रेस के कैंप में आग लगी थी, हादसे में 180 कॉटेज जल गए।
30 जनवरी: सेक्टर 22 में आग लगी थी, जिसमें 15 टेंट जले थे।
7 फरवरी: सेक्टर-18 में आग लगी थी। हादसा शंकराचार्य मार्ग पर हुआ था, जिसमें 22 पंडाल जल गए।
15 फरवरी: सेक्टर 18-19 में आग लगी। आधे घंटे में आग पर काबू पा लिया गया। दावा किया कि नोट से भरे 2 बैग जल गए।
17 फरवरी: सेक्टर-8 में आग लगी। इस पर जल्द ही काबू पा लिया गया।
महाकुंभ में आज फिर जबरदस्त भीड़ है। शाम 4 बजे तक 1.08 करोड़ श्रद्धालु स्नान कर चुके हैं। प्रयागराज के सभी 7 एंट्री पॉइंट जाम हो गए हैं। भीड़ के चलते दारागंज स्थित संगम स्टेशन को 26 फरवरी तक बंद कर दिया गया है। महाकुंभ में तैनात अफसरों की ड्यूटी 27 फरवरी तक बढ़ा दी गई है।
मेला क्षेत्र में वाहनों की एंट्री फिर से रोक दी गई है। सभी तरह के पास रद्द कर दिए हैं। प्रयागराज से गुजरने वाली 19 ट्रेनों का रूट बदला गया है। वाहनों को संगम से 10-12 किमी पहले बनाई गई पार्किंग में रोका जा रहा है, जिससे लोगों को संगम तक पैदल ही जाना पड़ रहा है।
काशी तमिल संगमम में काशी आए तमिलनाडु के मेहमान सोमवार को महाकुंभ पहुंचे। सभी ने एक साथ संगम में स्नान किया। आज महाकुंभ का 36वां दिन है। 13 जनवरी से अब तक 54.04 करोड़ श्रद्धालु संगम में डुबकी लगा चुके हैं।
आज महाकुंभ में गुजरात, महाराष्ट्र, त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल के राज्यपाल भी संगम में स्नान करेंगे। आज गंगा पंडाल में 8 घंटे में करीब 10 हजार लोग हैंड प्रिंटिंग का वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाएंगे। रविवार को प्रयागराज-रीवा हाईवे पर 15 किमी लंबा जाम लग गया। लखनऊ, कानपुर और जौनपुर के रास्तों पर भी गाड़ियों की लंबी कतारें दिखीं। एयरपोर्ट पर भी यात्री जमीन पर बैठे और लेटे हुए नजर आए।
अमेरिका के मध्यपूर्वी हिस्सों में भीषण बाढ़ और तूफान का कहर : 9 लोगों की मौत
डेस्क | अमेरिका के मध्यपूर्वी हिस्सों में खराब मौसम के ताजा दौर के कारण बाढ़ और तूफान ने इलाकों को तबाह कर दिया है। यहां केंटुकी में आठ लोगों सहित कम से कम नौ लोगों की जान चली गई है। गवर्नर एंडी बेशियर ने रविवार को यह जानकारी दी।

बेशियर ने चेतावनी दी कि शनिवार को तूफान शुरू होने के बाद से 1,000 से अधिक बचाव कार्य किए गए हैं और लगभग 39,000 घरों को बिजली कटौती का सामना करना पड़ रहा है, यह स्थिति तूफानी हवाओं के कारण खराब हो सकती है। गवर्नर ने इसे कम से कम एक दशक में हमारे द्वारा झेली गई सबसे गंभीर मौसमी घटनाओं में से एक माना, और चेतावनी दी कि निवासी सडक़ मार्गों से दूर रहें।
उन्होंने तूफान से पहले ही राज्य में आपातकाल की घोषणा कर दी और कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने आपदा राहत प्रयासों के लिए उनके अनुरोध को मंजूरी दे दी है। इस बीच अमेरिका का अधिकांश हिस्सा खराब सर्दियों के मौसम के एक नए दौर की चपेट में है। राष्ट्रीय मौसम सेवा के अनुसार, जबकि उत्तरी मैदानी इलाकों को जानलेवा ठंड का सामना करना पड़ी, फ्लोरिडा और जॉर्जिया के कुछ हिस्सों में भयंकर तूफान आया।
श्रद्धालुओं की सुरक्षा में मजबूत प्रहरीः सेवा का संकल्प लेकर महाकुम्भ में जुटे सीआरपीएफ के जवान
नईदिल्ली। महाकुम्भ 2025 की भव्यता के बीच केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सेवा के लिए पूरी तत्परता से तैनात है। उनकी सेवा भावना और राष्ट्रप्रेम का अद्वितीय उदाहरण महाकुम्भ में देखने को मिल रहा है। सीआरपीएफ के जवान 24 घंटे घाटों, मेला परिसर और प्रमुख मार्गों पर सुरक्षा व्यवस्था संभाल रहे हैं। आधुनिक तकनीक और सतर्क निगाहों से किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तैयारी की गई है।
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बीच सीआरपीएफ के जवान मार्गदर्शन और सहायता प्रदान कर रहे हैं। उनका सौम्य व्यवहार और तत्परता श्रद्धालुओं को सहज अनुभव प्रदान कर रही है। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए सीआरपीएफ की आपदा प्रबंधन टीम पूरी मुस्तैदी से तैनात है। कुम्भ मेले में गुमशुदा बच्चों और बुजुर्गों को उनके परिजनों से मिलाने में भी सीआरपीएफ महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
सीआरपीएफ से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि सीआरपीएफ का हर जवान महाकुम्भ में 'राष्ट्र प्रथम' की भावना के साथ अपनी ड्यूटी निभा रहा है। उनकी सेवा और समर्पण का यह जज़्बा महाकुम्भ की आध्यात्मिकता को और भी पवित्र बना रहा है। महाकुम्भ 2025 में सीआरपीएफ की यह अटूट सेवा और समर्पण न सिर्फ सुरक्षा का विश्वास जगा रहा है, बल्कि पूरे देश के लिए एक प्रेरणा भी है।
ढाई घंटे में दूसरा बड़ा भूकंप.... दिल्ली, यूपी के बाद अब बिहार भी कांपी
डेस्क। दिल्लीवासियों की सोमवार सुबह की शुरूआत भूकंप के तेज झटकों से हुई। इसके ढाई घंटे बाद बिहार की धरती भी कांप उठी। यूपी के कई शहरों में भी भूकंप के झटके महसूस हुए। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (एनसीएस) के अनुसार, सोमवार सुबह 8:02 बजे बिहार के सीवान में रिक्टर पैमाने पर 4.0 तीव्रता का भूकंप आया, जिसका केंद्र जमीन से 10 किलोमीटर की गहराई पर था।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से शांत रहने और सुरक्षा उपायों का पालन करने का आग्रह किया। उन्होंने संभावित झटकों के लिए सतर्क रहने की भी सलाह दी। सबसे पहले, बिहार के सीवान में सुबह 8:02 बजे 4.0 तीव्रता का भूकंप आया, जिसकी गहराई 10 किलोमीटर थी। पूरे इलाके में झटके महसूस किए गए। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCS) ने भूकंप के स्थान (अक्षांश: 25.93 N, देशांतर: 84.42 E) के बारे में जानकारी दी।
Tremors were felt in Delhi and nearby areas. Urging everyone to stay calm and follow safety precautions, staying alert for possible aftershocks. Authorities are keeping a close watch on the situation.
— Narendra Modi (@narendramodi) February 17, 2025
दिल्ली-एनसीआर में सोमवार सुबह भूकंप के तेज झटके... घरों से बाहर आए लोग
डेस्क। दिल्ली-एनसीआर समेत आसपास के इलाकों में सोमवार 17 फरवरी की सुबह भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए। आवाज के साथ आया यह भूकंप इतना तेज था कि काफी लोगों ने इसे महसूस किया। महज कुछ सेकंड के इस भूंकप से लोगों में दहशत फैल गई और लोग अपने घरों से बाहर आ गए।
राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के अनुसार, रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 4.0 मापी गई। सुबह 5 बजकर 36 मिनट 55 सेकेंड पर आए इस भूकंप का केंद्र नई दिल्ली में ही जमीन से करीब 5 किलोमीटर नीचे बताया गया है।
भूकंप से अभी तक किसी भी तरह के नुकसान की कोई खबर नहीं है। हालांकि, इस बीच भूकंप के बाद दिल्ली पुलिस ने सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट कर लिखा, ”हमें उम्मीद है कि आप सभी सुरक्षित होंगे, दिल्ली! किसी भी आपातकालीन सहायता के लिए Dial 112 पर कॉल करें।”
ब्रीदिंग थ्रेड्स : भारत टेक्स 2025 में फैशन शो
नई दिल्ली | भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय के हथकरघा विकास आयुक्त कार्यालय ने शिल्प कौशल के मनोभाव को जानने के लिए, एक जीवित विरासत को सम्मानित करने, आधुनिक आकृतियों में भारतीय हथकरघा की शाश्वत सुंदरता को देखने के लिए "ब्रीदिंग थ्रेड्स" नामक एक फैशन कार्यक्रम का आयोजन किया।
यह कार्यक्रम वैशाली एस कॉउचर, वैशाली एस थ्रेडस्टोरीज प्राइवेट लिमिटेड, मुंबई के सहयोग से और हैंडलूम एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के समन्वय में भारत टेक्स 2025 के दौरान भारत मंडपम के एम्फीथिएटर में आयोजित किया गया था। वैशाली एस कॉउचर एक 24 साल पुराना ब्रांड है जो पुरानी और लुप्त होती हाथ से बुनाई की तकनीकों को पुनर्जीवित करने और उन्हें नया रूप देने, रचनात्मकता और उच्च स्तर की गुणवत्ता के साथ शीर्ष वैश्विक लक्जरी मंचों पर लाने के लिए समर्पित है।
हथकरघा की खूबसूरती और ब्रांड का मिशन भी इसकी स्थिरता और शून्य अपशिष्ट रणनीति है, जो भारतीय गांवों की जीवनशैली के अनुरूप है।
भारतीय हाथ से बुने हुए वस्त्र देश की अप्रयुक्त संपदा हैं, और उन्हें अधिक आधुनिक और वैश्विक भाषा में प्रदर्शित करने की आवश्यकता है, जो उन्हें विश्व भर में सर्वाधिक प्रशंसित लक्जरी फैशन मंचों में वापस लाएगी।
इस शो में 5 अलग-अलग राज्यों यानी पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक और राजस्थान के गांवों में बुने गए कपड़े दिखाए गए और 30 लुक में 20 मॉडलों ने इन बुनाई को 7 अलग-अलग बुनाई तकनीकों में पेश किया: चंदेरी, महेश्वरी, जामदानी, खुन, बनारसी, कोटा डोरिया, मुर्शिदाबाद। प्रत्येक बुनाई को अनूठी बनावट और डोरी के साथ रचनात्मक रूप से सजाया गया था।
यह शो इस बात का प्रमाण था कि हाथ से बुने कपड़े बनाने के लिए कितनी कुशलता और कड़ी मेहनत के साथ-साथ रचनात्मकता की आवश्यकता होती है, और साथ ही यह भी कि कैसे एक शिल्प को विश्व स्तर के लक्जरी ब्रांडों में से एक बनाया जा सकता है।
यह प्रदर्शनी एक बड़ी सफलता थी और इसमें भारतीय विरासत के वस्त्रों की शक्ति का वैश्विक रूप में प्रदर्शन हुआ, जिसे देखकर विदेशी देशों जैसे ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, रूस, श्रीलंका, बांग्लादेश, कुवैत, चिली आदि के खरीदार मंत्रमुग्ध हो गए, साथ ही भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय के हथकरघा विकास आयुक्त के अटूट समर्थन से भारतीय वस्त्र उद्योग के हितधारकों ने भी इसका भरपूर आनंद उठाया।
भारत की राष्ट्रपति ने नए प्रारूप में गार्ड परिवर्तित समारोह देखा
आम जनता 22 फरवरी से समारोह देख सकेगी |
नई दिल्ली | भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज सुबह (16 फरवरी, 2025) राष्ट्रपति भवन के प्रांगण में नए प्रारूप में चेंज ऑफ गार्ड समारोह के उद्घाटन समारोह को देखा।

यह समारोह अगले शनिवार यानी 22 फरवरी, 2025 से बड़ी संख्या में आगंतुकों के लिए खुला रहेगा, जिसमें लोग राष्ट्रपति भवन की पृष्ठभूमि में एक गतिशील दृश्य और संगीत प्रदर्शन देख सकेंगे। राष्ट्रपति के अंगरक्षक दल की टुकड़ियों और घोड़ों द्वारा सैन्य अभ्यास, और सेरेमोनियल गार्ड बटालियन की टुकड़ियां, साथ ही सेरेमोनियल मिलिट्री ब्रास बैंड, एक बड़े क्षेत्र में फैले हुए, नए प्रारूप का हिस्सा होंगे।

पशुपालन एवं डेयरी विभाग और विश्व पशु स्वास्थ्य संगठन ने पशुधन क्षेत्र में सार्वजनिक निजी भागीदारी के लिए रोडमैप तैयार किया
भारत में पशु स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए जिला स्तरीय पशु चिकित्सा प्रयोगशालाओं में, एफएमडी मुक्त क्षेत्रों और स्वस्थ्य वैक्सीन मूल्य श्रृंखला पर ध्यान केंद्रित किया गया |
भारत में पशु चिकित्सा सेवाओं को मजबूत करने के लिए एक वर्ष के भीतर एक पशुचिकित्सा संबंधी पीपीपी नीति विकसित करने की आवश्यकता है: सचिव डीएएचडी
नई दिल्ली | मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के तहत पशुपालन और डेयरी विभाग (डीएएचडी) ने विश्व पशु स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूओएएच) के सहयोग से 11 से 13 फरवरी 2025 तक नई दिल्ली में डब्ल्यूओएएच पीवीएस-पीपीपी (पशु चिकित्सा सेवाओं का प्रदर्शन-सार्वजनिक निजी भागीदारी) केन्द्रित सहायता कार्यशाला का सफलतापूर्वक आयोजन किया। कार्यशाला का उद्देश्य वैक्सीन प्लेटफॉर्म, पशु चिकित्सा कार्यबल विकास, संस्थागत बुनियादी ढांचे और खुरपका-मुंहपका रोग (एफएमडी) मुक्त क्षेत्रों के निर्माण जैसे क्षेत्रों में सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) के माध्यम से पशु चिकित्सा सेवाओं को मजबूत करना था।

चर्चा का मुख्य विषय पशु चिकित्सा संबंधी पीपीपी भागीदारी के माध्यम से भारत में पशु चिकित्सा सेवाओं में महत्वपूर्ण अंतराल को खत्म करना था, जिसमें निम्नलिखित पर जोर दिया गया |
जिला स्तर पर एनएबीएल-मान्यता प्राप्त पशु चिकित्सा प्रयोगशालाओं की स्थापना सहित पशु चिकित्सा बुनियादी ढांचे का विस्तार करना।
उन्नत निगरानी और एफएमडी मुक्त क्षेत्र विकास के माध्यम से रोग नियंत्रण कार्यक्रमों को मजबूत करना।
पशु चिकित्सा संबंधी प्रशिक्षण और ज्ञान-साझाकरण प्लेटफार्मों के माध्यम से पशु चिकित्सा कार्यबल क्षमता का निर्माण करना।
एक मजबूत टीका मूल्य श्रृंखला विकसित करके पशु चिकित्सा टीका उत्पादन में आत्मनिर्भरता को मजबूत करना।
पशु चिकित्सा अनुसंधान, निदान और विस्तार सेवाओं में निजी क्षेत्र की विशेषज्ञता को एकीकृत करने के लिए एक व्यापक पीपीपी नीति ढांचे को परिभाषित करना।
डीएएचडी की सचिव अलका उपाध्याय ने पशुधन क्षेत्र को समर्थन देने में पशु चिकित्सा सेवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला, जो भारत के कृषि सकल मूल्य वर्धन (जीवीए) में 30% से अधिक का योगदान देता है। उन्होंने एनएबीएल मान्यता के साथ पशु चिकित्सा प्रयोगशालाएं स्थापित करने की आवश्यकता को रेखांकित किया और इस बात पर बल दिया कि रोग निगरानी, कार्यबल क्षमता और टीका उत्पादन के लिए निजी क्षेत्र का सहयोग आवश्यक है। “ इस कार्यशाला ने पशु चिकित्सा सेवाओं में संरचित पीपीपी जुड़ाव के लिए एक मंच तैयार किया है । उन्होंने कहा कि चर्चाएं एक ऐसे रोडमैप में योगदान देंगी जो राष्ट्रीय रोग नियंत्रण कार्यक्रमों को बढ़ाती हैं, पशु चिकित्सा बुनियादी ढांचे का विस्तार करती हैं और पशु स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए एक स्थायी पारिस्थितिकी तंत्र सुनिश्चित करती हैं। सुश्री उपाध्याय ने पशु चिकित्सा सेवाओं में दीर्घकालिक निवेश और निजी क्षेत्र की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए एक वर्ष के भीतर एक पशु चिकित्सा संबंधी पीपीपी नीति विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
विश्व पशु स्वास्थ्य संगठन के एशिया और प्रशांत क्षेत्र के क्षेत्रीय प्रतिनिधि डॉ. हिरोफुमी कुगिता ने पशु चिकित्सा सेवाओं में भारत के नेतृत्व तथा ज्ञान-साझाकरण और प्रयोगशाला सहयोग के माध्यम से सर्वोत्तम प्रथाओं में योगदान देने की इसकी क्षमता को स्वीकार किया।
पशुपालन आयुक्त और देश के मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. अभिजीत मित्रा ने कहा कि पशु चिकित्सा सेवाओं को बढ़ाने के लिए एक संरचित संस्थागत ढांचे की आवश्यकता है, जहां सार्वजनिक और निजी क्षेत्र मिलकर काम करें। उन्होंने कहा, "इस कार्यशाला ने इस तरह के ढांचे को परिभाषित करने के लिए आधार तैयार किया है, और अगले कदम क्रियान्वयन और क्षमता निर्माण पर केंद्रित होंगे।"
कार्यशाला में राज्य पशुपालन विभागों, पशु चिकित्सा परिषदों, रोग निदान प्रयोगशालाओं, आईसीएआर अनुसंधान संस्थानों, पशुधन उत्पादन के स्वास्थ्य और विस्तार एजेंट (ए-हेल्प), भारतीय कृषि कौशल परिषद, केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन, निजी क्षेत्र के हितधारकों, भारतीय पशु स्वास्थ्य कंपनियों के महासंघ (आईएनएफएएच), वैक्सीन निर्माताओं, खाद्य और कृषि संगठन और विश्व बैंक से 100 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। कार्यशाला के दौरान संसाधन जुटाने, जोखिम प्रबंधन और हितधारक एकीकरण के लिए पीपीपी रणनीतियों को परिभाषित करते हुए सात ड्ब्ल्यूओएएच विशेषज्ञों ने चर्चाओं को सुगम बनाया। कार्यशाला का समापन पशु चिकित्सा क्षेत्र के लिए पीपीपी रोडमैप की प्रस्तुति के साथ हुआ, जिसमें पशु चिकित्सा सेवाओं, रोग निगरानी और पशुधन उत्पादकता को बढ़ाने के लिए कार्रवाई योग्य रणनीतियों की रूपरेखा तैयार की गई। परिणाम नीति विकास, निवेश जुटाने और संरचित पीपीपी कार्यान्वयन में योगदान देंगे, जिससे भारत के पशुपालन क्षेत्र के लिए दीर्घकालिक लाभ सुनिश्चित होंगे।
भारत और श्रीलंका ने महत्वपूर्ण खनिजों : अन्वेषण और खनन में संबंधों को मजबूत किया
नई दिल्ली | केंद्रीय कोयला और खान राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने नई दिल्ली के शास्त्री भवन में श्रीलंका के उद्योग और उद्यमिता विकास मंत्री सुनील हंडुनेट्टी के साथ एक सार्थक बैठक की। चर्चा में खनिज अन्वेषण और खनन में द्विपक्षीय सहयोग को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित किया गया, विशेष रूप से दोनों देशों के आर्थिक और औद्योगिक विकास के लिए आवश्यक महत्वपूर्ण खनिजों को सुरक्षित करने पर। श्रीलंका के विशाल ग्रेफाइट और समुद्र तट रेत खनिज संसाधनों पर मुख्य ध्यान दिया गया, जो स्वच्छ ऊर्जा, उन्नत बैटरी प्रौद्योगिकियों और उच्च तकनीक उद्योगों की ओर वैश्विक बदलाव का समर्थन करने में अपार संभावनाएं रखते हैं।

दोनों नेताओं ने बैठक के दौरान श्रीलंका में भारतीय कंपनियों के लिए खनिज अन्वेषण और खनन अवसरों में सहयोग को मजबूत करने के महत्व को स्वीकार किया। दुबे ने कहा कि भारत के राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन का उद्देश्य देश के महत्वाकांक्षी नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्य को पूरा करने के लिए लिथियम, ग्रेफाइट, निकल, कोबाल्ट और तांबे जैसे आवश्यक कच्चे माल की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि भारत महत्वपूर्ण खनिजों के लिए खनन अधिकार देने, अंतर्राष्ट्रीय साझेदारी बनाने और भारतीय कंपनियों को वैश्विक स्तर पर खनिज संपत्ति हासिल करने के लिए प्रोत्साहित करने की दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रहा है। दोनों पक्षों ने इन क्षेत्रों में अन्वेषण के अवसरों, तकनीकी सहयोग और निवेश की संभावनाओं पर गहन चर्चा की।
सरकार-से-सरकार आधार पर खनिज अन्वेषण की संभावना पर भी चर्चा की गई, जिसमें भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण ने श्रीलंका में खनिज मूल्यांकन करने में अपनी रुचि व्यक्त की। इसके अतिरिक्त श्रीलंका ने भारत से अनुरोध किया कि वह भारतीय कंपनियों को अपने समुद्र तट की रेत और ग्रेफाइट संसाधनों के अन्वेषण और विकास में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित करे।
भारत के खान मंत्रालय और श्रीलंका के भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण एवं खान ब्यूरो के बीच "भूविज्ञान और खनिज संसाधनों के क्षेत्र में सहयोग" पर समझौता ज्ञापन को अंतिम रूप देने पर भी चर्चा की गई। श्री दुबे ने विश्वास व्यक्त किया कि यह समझौता ज्ञापन एक बार संपन्न होने के बाद क्षमता निर्माण, खनन अन्वेषण और उन्नत खनिज प्रसंस्करण में सहयोग को बढ़ाने के लिए एक मजबूत ढांचा प्रदान करेगा। उन्होंने कौशल विकास, ज्ञान के आदान-प्रदान और तकनीकी और वित्तीय सहायता के माध्यम से अपने खनन उद्योग के आधुनिकीकरण में श्रीलंका का समर्थन करने के लिए भारत की प्रतिबद्धता दोहराई।
दुबे ने कहा की "भारत और श्रीलंका एक दीर्घकालिक साझेदारी साझा करते हैं और खनन क्षेत्र में हमारा सहयोग हमारे आर्थिक संबंधों को और मजबूत करेगा। एक साथ काम करके, हम अपने खनिज संसाधनों की पूरी क्षमता का दोहन कर सकते हैं, जिससे आपसी विकास और स्थिरता सुनिश्चित हो सके।"
बैठक सकारात्मक नोट पर समाप्त हुई, जिसमें दोनों नेताओं ने समझौतों को औपचारिक बनाने और खनिज क्षेत्र में सहयोग के नए रास्ते तलाशने की दिशा में प्रयासों में तेजी लाने पर सहमति व्यक्त की।