छत्तीसगढ़

Railway सेंसर की शक्ति रेलवे ने छूली सुरक्षा की नई ऊंचाईं

जांजगीर चंम्पा। Railway नई प्रणाली से यात्रियों की सुरक्षा में भी वृद्धि होगी। रेलवे ट्रैक व पुलों पर बाढ़ का खतरा होने पर तुरंत सूचना मिल जाएगी, जिससे संबंधित अधिकारियों को त्वरित कार्रवाई करने का समय मिलेगा।

इसके परिणाम स्वरूप, यात्रियों को सुरक्षित यात्रा का अनुभव मिलेगा। वाटर लेवल मानीटरिंग सिस्टम रेलवे के परिचालन में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन है, जिससे न केवल संरक्षित रेल परिचालन सुनिश्चित होता है, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा भी प्राथमिकता में रहती है।

सुस्कर विपुल विलासराव, मुख्य जनसंपर्क अधिकारी रेलवे ने बताया की बिलासपुर रेलवे जोन के तहत जांजगीर-चाम्पा जिले के दो नदी हसदेव एवं लीलागर नदी पर वाटर सेंसर लगाई गईं है, यह प्रणाली रेलवे और यात्रियों दोनों के लिए एक वरदान साबित हो रही है। बता दें कि पारंपरिक गेज पद्धति से नदियों का जलस्तर मापने में कई चुनौतियां थीं। जैसे त्वरित सूचना प्रदान नहीं कर पाती थी। जलस्तर रीडिंग में त्रुटि की संभावना रहती थी। रेलवे ट्रैक और पुल पर खतरे का आकलन मुश्किल भरा होता था। कई बार बाढ़ का पानी ट्रैक पर आ जाता था, जिससे रेलवे परिचालन बाधित होता था। अब यह चीजें नहीं होंगी।

ई तकनीक से जलस्तर की निगरानी अब आसान हो गई है। इस सिस्टम में लगे सेंसर ट्रैक मैनेजमेंट सिस्टम से जुड़े होते हैं और संबंधित अधिकारियों को त्वरित अलर्ट भेजते हैं। नई तकनीक से बाढ़ के संभावित खतरों से समय रहते आगाह करना संभव हो सका है। इससे रेल परिचालन को सुरक्षित बनाना आसान हो गया है।

01 सेंसर: सेंसर युक्त यह सिस्टम जलस्तर बताने वाले स्केल को लगातार रीड करता है।
02 चिप: इसमें एक चिप लगी होती है, जिसमें संबंधित इंजीनियरों और अधिकारियों के मोबाइल नंबर दर्ज रहते हैं।
03 एसएमएस अलर्ट: जलस्तर खतरे के निशान से बढ़ने या घटने पर यह मशीन स्वतः संबंधित अधिकारियों को एसएमएस भेजती है।
 

बिलासपुर रेलवे जोन के 12 पुलों पर यह प्रणाली स्थापित किये गए है, जांजगीर-चाम्पा जिले के दो नदियों पर सेंसर लगाई गईं है!