छत्तीसगढ़

प्रमाणपत्र वैध होने के बावजूद छात्रा को बताया फर्जी मेडिकल सीट पर छाया संकट

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के तहसील कार्यालय में EWS प्रमाण पत्र फर्जीवाड़े का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। प्रशासन ने जहां तीन प्रमाण पत्रों को फर्जी घोषित कर दिया है, वहीं चार को संदिग्ध मानकर जांच जारी है लेकिन एक छात्रा के सामने आने से इस पूरे प्रकरण में नया मोड़ आ गया है। 

तहसील कार्यालय के रिकॉर्ड में इनके नाम से न तो आवेदन मिला और न ही कोई प्रमाणपत्र जारी हुआ। अब तक सात संदिग्ध मामले सामने आए हैं,जिनमें से तीन की पुष्टि हो चुकी है लेकिन प्रभावित सरकंडा निवासी छात्रा भव्या मिश्रा का कहना है कि उसका प्रमाणपत्र पूरे नियमों के तहत जारी हुआ था एडमिशन से पहले वेरिफिकेशन भी हुआ,तभी उसने काउंसलिंग में हिस्सा लिया लेकिन अब उसे गलत तरीके से फर्जी करार दिया जा रहा है।

SDM मनीष साहू ने कहा कि यानी तस्वीर साफ यही है कि… आयुक्त चिकित्सा शिक्षा के आदेश के बाद प्रशासन ने इतनी हड़बड़ी में कार्रवाई की कि सही प्रमाण पत्र को भी अवैध ठहरा दिया। दरअसल, भव्या के EWS प्रमाण पत्र में अधिकारी का हस्ताक्षर फर्जी पाया गया। लेकिन सवाल ये है कि इसमें छात्रा का क्या दोष आवेदन सही,दस्तावेज सही और प्रमाणपत्र भी तहसील कार्यालय से जारी हुआ तो फिर इसकी सजा एक मासूम छात्रा क्यों भुगते|

भव्या और उसके परिजन अब इसी आस में हैं कि प्रशासन संवेदनशीलता दिखाए और जल्द से जल्द उनकी परेशानी दूर करे। लगातार हो रही देरी से उसकी पढ़ाई बाधित हो रही है।  या फिर यह मामला भी महज औपचारिकताओं और फाइलों में दबकर रह जाएगा