कानन पेंडारी मिनी जू में ‘व्हाइट प्रिंस’ रमन की धमाकेदार एंट्री, खुले पिंजरे में मस्ती करते देख पर्यटक रोमांचित..…
2025-10-24 11:14 AM
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बिलासपुर – कानन पेंडारी मिनी जू में करीब एक महीने से क्वारंटाइन में रह रहे वाइट टाइगर रमन को आखिरकार खुले पिंजरे में छोड़ दिया गया। ग्वालियर से लाए इस नन्हे टाइगर ने जैसे ही ओपन केज में कदम रखा अपनी मस्ती और ऊर्जा से पूरे जू को जीवंत कर दिया।
17 सितंबर को ग्वालियर जू से ये वाइट टाइगर रमन कानन पेंडारी लाया गया था । महज एक साल का यह टाइगर कानन पहुंचने के बाद से क्वारंटाइन में था,जहां उसकी सेहत और व्यवहार पर वन्य प्राणी चिकित्सकों और जू-कीपर्स की लगातार निगरानी बनी रही । धीरे-धीरे रमन ने अपने नए माहौल को अपनाना शुरू किया जू-कीपर्स की आवाज पहचानने लगा और बुलाने पर उत्सुकता से देखने लगता। पिछले हफ्ते उसे ट्रायल के तौर पर एक छोटे एरिया में छोड़ा गया था।
और बुधवार का दिन उसके लिए किसी उत्सव से कम नहीं रहा जैसे ही ओपन केज का दरवाजा खुला, रमन बिजली की रफ्तार से बाहर निकल गया। कभी पानी के टब में छलांग, कभी ऊँची बैठक पर उछाल,कभी दीवारों के किनारे तेज रफ्तार से दौड़ हर अंदाज़ में उसने अपनी आज़ादी का जश्न मनाया। जू में मौजूद पर्यटकों के लिए भी ये नजारा बेहद रोमांचक रहा। पहली बार उन्होंने कानन में किसी वाइट टाइगर को इतनी मस्ती करते,उछलते-कूदते और खेलते हुए देखा, लोगों ने कैमरे में रमन की हर हरकत कैद कर ली।
पूरा दिन खुली हवा और धूप का मजा लेने के बाद शाम को उसे वापस पिंजरे में लाना जू-कीपर्स के लिए किसी चुनौती से कम नहीं था। कई बार बुलाने के बावजूद रमन बाहर ही घूमता रहा। जू-कीपर्स को काफी मशक्कत करनी पड़ी, तब जाकर देर शाम उसे अंदर लाया जा सका। कानन पेंडारी में अब तक दो वाइट टाइग्रेस 15 साल की सिद्धि और 9 साल की ईशा थीं। वाइट टाइगर की जोड़ी पूरी करने के लिए ही रमन को ग्वालियर से लाया गया है।अब कानन पेंडारी में तीनों मिलकर इस दुर्लभ प्रजाति की खूबसूरती और आकर्षण को बढ़ाएंगे। रमन के आने से कानन को नया “व्हाइट प्रिंस” मिल गया है, जो आने वाले वक्त में जू की सबसे बड़ी पहचान बनने वाला है।
इस एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत कानन पेंडारी प्रबंधन ने ग्वालियर जू को एक मादा भालू, दो मादा और एक नर चौसिंघा उपहार स्वरूप भेजे हैं। जू प्रबंधन की योजना है कि वाइट टाइगर की नस्ल सुधारने के लिए एक और नर वाइट टाइगर लाया जाए। यह दूसरा टाइगर लगभग दो साल का होगा। इसके बदले में कानन पेंडारी जू से एक रॉयल बंगाल टाइगर ग्वालियर भेजा जाएगा। इससे वाइट टाइगर की ब्रीडिंग और संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।