कोसल प्रदेश यानी हमारा छत्तीसगढ़... यहां भांजा रामतुल्य: आरती थोंबरे
- रामायाण पात्रों की चर्चा की श्रृंखला में माता कौशल्या का वर्णन
रायपुर। मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का ननिहाल दक्षिण कोसल है और यह दक्षिण कोसल और कहीं नहीं हमारा छत्तीसगढ़ ही है। यहां राजधानी रायपुर के निकट कौशल्याधाम में माता कौशल्या का प्रदेश का इकलौता मंदिर स्थित है। यहां प्रभु श्रीराम माता की गोद में बाल रुप में विराजमान है। छत्तीसगढ़ में भगवान राम का ननिहाल होने के कारण यहां की संस्कृति में बहन के बेटे यानी भांजे को रामतुल्य माना जाता है। इसलिए यहां के लोग अपने भांजे का पैर छूते है।
रामायण के पात्रों की चर्चा की श्रृंखला में आरती थोंबरे ने माता कौशल्या और छत्तीसगढ़ के परिदृश्य में कहा कि छत्तीसगढ़ से भगवान श्रीराम को गहरा नाता है। पहला तो यह कि छत्तीसगढ़ उनका ननिहाल है। और ननिहाल के प्रेम का कोई सामी नहीं है। वहीं दूसरा यह कि अपने वनवास काल में श्रीराम ने सबसे अधिक समय दण्यकारण्य यानी हमारे बस्तर के जंगलों में बिताए। छत्तीसगढ़ के मूल निवासियों के यहां हर घर में अपने भांजों को श्रीराम तुल्य माना जाता है। यहां भांजों का पैर छूकर आशीर्वाद लेने की परंपरा है।
मंडल के आध्यात्मिक समिति की समन्वयक आस्था काले ने बताया कि रामायण के पात्रों की चर्चा के पूर्व प्रभु श्रीराम का पूजन, रामरक्षा स्त्रोत्र और हनुमान चालीसा का पाठ किया गया। वहीं अंत में धनश्री पेंडसे ने सुंदर भजन प्रस्तु कर सभी को राम नाम पर झूमने पर मजबूर कर दिया। जिसके बाद आरती और प्रसाद वितरण किया गया।