भगवान राम के जीवन में गुरु वशिष्ठ और महर्षि विश्वामित्र की खास भूमिका: सुमिता
रायपुर। "गुरु बिना ज्ञान नहीं, गुरु बिना गति नहीं।" यह सिर्फ एक वाक्य या किसी ग्रंथ की कोई लाइन नहीं हम सभी के जीवन की सच्चाई है। जीवन में सफलता के लिए एक अच्छे गुरू का होने बेहद जरूरी है। भगवान श्रीराम के जीवन में गुरु वशिष्ठ और महर्षि विश्वामित्र का अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान था। उक्ताशय के विचार सुमिता रायजदा ने रामायण के पात्रों पर चर्चा के दौरान महाराष्ट्र मंडल के सभागार में रखें।
सुमिता ने आगे बताया कि गुरु वशिष्ठ राजा दशरथ के कुलगुरु थे। उन्होंने श्रीराम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न को बाल्यकाल से ही उत्तम शिक्षा दी। गुरु वशिष्ठ ने उन्हें वेद, शास्त्र, राजधर्म और संयम सिखाया। वनवास के समय उन्होंने राम को धैर्य और कर्तव्य पालन की शिक्षा दी।
विश्वामित्र ने राम को शस्त्रविद्या सिखाई और ब्रह्मास्त्र, वरुणास्त्र जैसे दिव्य अस्त्र प्रदान किए, बाला-अतिबाला जैसी विद्या सिखाई। प्रभु राम ने रावण का वध ब्रह्मास्त्र से ही किया था। ताड़का वध, सुबाहु-मारीच का संहार और मिथिला में शिवधनुष भंग जैसी घटनाओं में उन्होंने प्रभु राम का मार्गदर्शन किया। गुरु वशिष्ठ ने नीति और धर्म सिखाया, जबकि विश्वामित्र ने रणकौशल और धर्मरक्षा की शिक्षा दी।
भगवान श्रीराम के जीवन में गुरूओं के मार्गदर्शन से हम यह समझ सकते है कि जीवन में सफलता पानी के साथ दुविधाओं और परेशानियों से बाहर निकलने के लिए एक अच्छे गुरु का होना जरूरी है।