श्रुतिकृति पर्दे के पीछे रहकर भांति- भांति के कार्य कुशलता से करतीं थीं: कुमुद लाड
2025-04-03 07:41 AM
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रायपुर। यूं तो श्रुतिकृति का अर्थ प्रसिद्ध या ख्याति प्राप्त होता है लेकिन रामायण की श्रुतिकृति अपने पति शत्रुघ्न की तरह पर्दे के पीछे रहकर भांति- भांति के कार्य कुशलता से करतीं थीं। सेवानिवृत्त शिक्षिका और वरिष्ठ आजीवन सभासद कुमुद लाड ने इस आशय के विचार व्यक्त किए। वे महाराष्ट्र मंडल के छत्रपति सभागृह में आध्यात्मिक समिति की ओर से आयोजित रामनवमी महोत्सव के चौथे दिन रामायण के पात्र श्रुतिकृति पर बोल रहीं थीं। इस अवसर पर अर्चना मुकादम ने मंथरा पर और संध्या खंगन ने रामभक्त हनुमान पर चर्चा की।
कुमुद लाड ने चर्चा को आगे बढाते हुए कहा कि श्रुतिकृति शस्त्रविद्या और शास्त्रविद्या में निपुण थीं। चारों बहनों में सबसे छोटी श्रुतिकृति बचपन से ही अपनी उम्र से अधिक परिपक्व, दूरदर्शी, सहनशील और समर्पण की भावना से ओतप्रोत थीं। प्रभु राम के वनागमन के बाद पूरे महल में शत्रुघ्न के साथ श्रुतिकृति ने पारिवारकि और प्रशासनिक जिम्मेदारियों का कुशलता से निर्वहन किया। उन्होंने न केवल अपने बेटों सुबाहू और शत्रुघाती बल्कि सभी राजपुत्रों को शास्त्र, शस्त्र शिक्षा में दक्ष करने के अलावा राजकार्य की शिक्षा भी दी थी।
कुमुद लाड के अनुसार श्रुतिकृति अपने विचारों को अभिव्यक्त करने में साहसी और बेबाक थीं। उन्होंने वनवास से लौटे भगवान श्रीराम से सीधा प्रश्न किया था कि मां सीता की ही अग्निपरीक्षा क्यों की ली गई। उन्होंने लक्ष्मण के सामने भी उर्मिला को छोडकर वन जाने को लेकर असहमति और नाराजगी व्यक्त की थीं। आधुनिक युग की नारियों को श्रुतिकृति के समान ही कैरियर ओरिंयटेंड, एडमिस्ट्रेटर, डेशिंग होना चाहिए, ताकि वे अपने परिवार को सुव्यस्थित चला सके। साथ ही प्रगतिशील समाज में अपनी पहचान बना सके।