पृथ्वी पर जहां-जहां होती है रामकथा.. वहां-वहां आते हैं श्री हनुमानः संध्या खंगन
रायपुर। सनातन धर्म में जिन सात चिरंजीवियों का उल्लेख मिलता है, उनमें से एक हैं महाबली हनुमान जी। और इसकी खासियत यह है कि पृथ्वी में जहां-जहां प्रभु श्रीराम की रामकथा होती है वहां-वहां श्री हनुमान जी स्वयं उपस्थित होकर रामकथा सुनते है। आज हम यहां राम के नाम का सुमिरन कर रहे है, यहां भी हनुमान जी उपस्थित है। उक्ताशय के विचार संध्या खंगन ने मंडल में आयोजित रामायण के पात्रों पर चर्चा के दौरान श्री हनुमान जी पर चर्चा करते हुए कहीं।
संध्या खंगन ने कहा कि बजरंगबली को चिंरजीवी होने का वरदान प्राप्त है इसलिए माना जाता है कि हनुमान जी कलियुग में भी सशरीर निवास करते हैं। रामायण की कथा के अनुसार गंधमादन पर्वत से जुड़ीं कई कहानियां मिलती हैं। गंधमादन पर्वत के क्षेत्र को यक्षलोक भी कहा जाता है। ऐसा कहा जाता है कि यहां एक अद्भुत सरोवर है जहां खिलने वाले कमलों को रोजाना हनुमान अपने आराध्य श्रीराम की पूजा में अर्पित करते हैं। श्रीमद्भावत में वर्णन मिलता है कि द्वापर युग में भी हनुमान जी गंधमादन पर्वत पर निवास करते थे। इसी क्षेत्र में हनुमान जी भीम से मिले थे। अज्ञातवास के समय हिमवंत पार करके पांडव गंधमादन पर्वत के क्षेत्र में पहुंचे। इसी दौरान एक बार भीम सहस्रदल कमल लेने के लिए गंधमादन पर्वत के वन में पहुंच गए थे, जहां पर हनुमान जी ने भीम का अंहकार तोड़ा था। इस पर्वत पर कई ऋषि-मुनि, देवता, गंधर्व निवास किया करते थे।