रामनवमीं के पूर्व हुई माता कौशल्या की गोद भराई रस्म
रायपुर। भारत वर्ष के सभी संतों की वाणी है कि ईश्वर को प्राप्त करने का सबसे सरल माध्यम नाम जप और अपनापन है। राजा राम हो या बालमुकुंद जी। या जिस पर भी आपकी आस्था हो, उन्हें अपने घर के एक सदस्य की भांति समझेंगे तो निःसंदेह वह भी आपका ख्याल रखेंगे। तात्यापारा स्थित हनुमान मंदिर में नवरात्र की पंचमी के दिन माता कौशल्या के गोद भराई (डोहाळ जेवण) की रस्म बहुच हर्षोल्लास के साथ मनाई गई।
मंदिर समिति की नमिता शेष ने बताया कि पंचमी पर माता कौशल्या की गोदभराई रस्म उल्लास के साथ मनाई गई। रामनवमीं पर श्रीराम के जन्मोत्सव के पूर्व यह परंपरा निभाई जाती है। हम जिस पर अपने घरों पर नवजात के जन्म के पहले गोद भराई की रस्म अदायगी करते है, ठीक उसी तरह मंदिर समिति के सदस्यों और महिलाओं द्वारा यह रस्म निभाई गई। माता कौशल्या के स्नान, श्रृंगार के साथ उन्हें नाना प्रकार के व्यंजनों औऱ फलों का भोग लगाया गया। उनकी ओली भरी गई।
कार्यकारिणी सदस्य सुरेशा हिशीकर, रिया खानखोजे और आराधना शेष ने बताया कि कार्यक्रम में समाज की 80 से अधिक महिलाएं उपस्थित थीं। समाज की बुजुर्ग महिलाओं ने डोहाळ गीत के साथ माता कौशल्या और श्रीराम के सुंदर भजन का गायन भी किया। जिसके उपरांत आरती और प्रसाद वितरण किया गया।