दिव्य महाराष्ट्र मंडल

शेषावतार लक्ष्मण हर समय प्रभु की सेवा में रहे उपस्थितः चारूशीला देव

रायपुर। रामायण में प्रभु श्रीराम के अनुज लक्ष्मण साक्षात शेषनाग के अवतर कहे जाते है। वह रामायण के बहुत महत्वपूर्ण पात्र है। अन्य सभी पात्र कभी न कभी श्रीराम से जुदा हुए, लेकिन लक्ष्मण ही एक ऐसे पात्र थे, जो हमेशा श्रीराम के साथ रहे। हमेशा उनकी सेवा में उपस्थित नजर आए। अत्यंत कोपिष्ट, बलशाली लक्ष्मण प्रभु श्रीराम की हर बात को शिरोधार्य मानते थे। उक्ताशय के विचार मंडल की वरिष्ठ सदस्या चारूशीला देव में रामायण के पात्रों की चर्चा की श्रृंखला में लक्ष्मण पर बोलते हुए कहा।

चारूशीला देव ने कहा कि 14 वर्ष तक निराहार और निद्रा का त्याग करने वाले लक्ष्मण ही रावणपुत्र इंद्रजीत का वध करने की शक्ति रखते है।  इसलिए उन्होंने इंद्रजीत का वध किया। इससे पूर्व उन्होंने इंद्रमित का कुंभलिका यज्ञ विफल किया था।  कर्तव्य कठोर श्रीराम कठिन प्रसंगों में हमेशा लक्ष्मण को ही भेजते रहे। राम के राज्याभिषेक के बाद राम की आज्ञा से माता सीता को वन छोड़ने भी लक्ष्मण ही गए थे।

काफी समय राजपाठ संभालने के बाद एक दिन यमराज प्रभु श्रीराम से मिलने आए। इस दौरान उन्होंने लक्ष्मण का आदेश दिया कि हमारी गुप्त वार्ता के बीच कोई व्यवधान नहीं आना चाहिए। व्यवधान डालने वाले को मृत्युदंड दिया जाएगा। इस पर लक्ष्मण स्वयं द्वार पर खड़े हो गए। उसी समय दुर्वासा ऋषि राम से मिलने आए। उन्होंने राम से तत्काल मिलने की इच्छा व्यक्त की। ऋषि का क्रोध में देख लक्ष्मण भीतर प्रवेश कर गए। इस पर राम ने लक्ष्मण को दंड दिया। और लक्ष्मण ने सरयुनदी में अपना शरीर त्याग दिया।