दिव्य महाराष्ट्र मंडल

मांडवी ने परोक्ष में रहकर तीनों माताओं की सेवा कीः सुरेखा

रायपुर। रामायण का हर एक पात्र अद्भुत है। सभी से हमें कुछ न कुछ सीखने को मिलता है। ऐसी ही एक पात्र है भरत की पत्नी मांडवी। मांडवी राजा कुशध्वज की पुत्री और श्रुतकीर्ति की बड़ी बहन थी। उनकी माता का नाम चंद्रभागा था। उनके दो पुत्र हुए तक्ष और पुष्कल। रानी मांडवी माता लक्ष्मी के शंख का अवतार मानी जाती है।

मंडल सदस्य सुरेखा पाटिल मंडल में आयोजित रामायण के पात्रों पर चर्चा के दौरान रानी मांडवी पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहती है कि रामायण के अनुसार मांडवी अत्यंत सुंदर, समझकार, धैर्यशील स्त्री थी, जिन्होंने परोक्ष में रहकर अपनी तीनों माताओं की सेवा की।

प्रभु श्रीराम के वनगमन का प्रभाव संपूर्ण राजपरिवार पर पड़ा। राम के दोनों भाईयों लक्ष्मण और भरत को अपनी पत्नी से 14 बरस तक दूर रहना पड़ा। भरत की पत्नी मांडवी ने अपने पति पूर्ण रूप से सहयोग दिया और पति की आज्ञानुसार वे अयोध्या में माताओं की सेवा और परिवार के देखभाल में जुटी रही। मांडवी का चरित्र को देख यह कहावत पूर्ण रूप से चरितार्थ होती है कि पुरूष की सफलता के पीछे स्त्री का हाथ होता है। जो उसे सफल बनाने में पूरा सहयोग करती है।