त्याग, समर्पण, धैर्य और धर्मपरायणता की प्रतिमूर्ति थी उर्मिलाः वैशाली जोशी
रायपुर। रामायण में उर्मिला, लक्ष्मण की पत्नी, एक धैर्यवान, त्यागपूर्ण और धर्मपरायण स्त्री के रूप में चित्रित की गई हैं, जो अपने पति के लिए हर प्रकार का त्याग करने को तैयार रहती हैं। त्याग, समर्पण, धैर्य, सहनशीलता, धर्मपरायणता और आत्मनियंत्रण के गुण के परिपूर्ण उर्मिला रामायण की विशेष पात्र रही। उक्ताशय के विचार मंडल सदस्य वैशाली जोशी ने रामायण के पात्रों की चर्चा के दौरान कहीं।
उन्होंने कहा कि उर्मिला को मिथिला के राजा जनक और रानी सुनयना की पुत्री है, उर्मिला को नागलक्ष्मी का अवतार माना जाता है। उर्मिला और लक्ष्मण के दो पुत्र थे, अंगद और चन्द्रकेतु। उर्मिला ने अपने पति लक्ष्मण के लिए अपने सांसारिक सुखों का त्याग किया, यहां तक कि 14 वर्षों तक पति-वियोग की कठिन अवधि को भी धैर्य से सहन किया। उर्मिला को एक धैर्यवान और सहनशील स्त्री के रूप में दिखाया गया है, जो कठिन परिस्थितियों में भी शांत और स्थिर रहती हैं। उर्मिला धर्म और मर्यादा का पालन करने वाली स्त्री के रूप में चित्रित की गई हैं, जो हमेशा सत्य और न्याय के रास्ते पर चलने में विश्वास रखती हैं।
वैशाली ने आगे कहा कि उर्मिला लक्ष्मण के प्रति पूरी तरह समर्पित हैं और उनकी हर बात का सम्मान करती हैं। रामायण में उर्मिला को आत्म-नियंत्रित और शांत स्वभाव वाली स्त्री के रूप में दिखाया गया है, जो कभी भी क्रोधित या अधीर नहीं होती हैं।