कलचुरी राजवंश काल हुई थी तात्यापारा स्थित हनुमान मंदिर की स्थापना
रायपुर। आज हनुमान जयंती है, हम आज आपको एक ऐसा मंदिर की जानकारी देने जा रहे हैं, जो 100-200 साल नहीं अपितु 12वीं सदी का दक्षिणमुखी हनुमान मंदिर है। जी..हां... यह मंदिर राजधानी रायपुर के तात्यापारा चौक पर स्थित है। मंदिर में स्थापित हनुमान जी की प्रतिमा 12वीं सदी में कलचुरी राजवंश काल में की गई थी।
मंदिर समिति के अध्यक्ष चंद्रकांत मोहदीवाले और श्री हनुमान मंदिर समिति के साथ महाराष्ट्र मंडल की कार्यकारिणी सदस्य नमिता शेष ने बताया कि मंदिर में स्थापित हनुमान जी की प्रतिमा में सिंदूर का चोला चढ़ाया जाता था। अक्टूबर 2017 में मूर्ति के सामने के हिस्से से सिंदूर का चोला गिर गया, मंदिर ट्रस्ट के लोगों ने पहली बार मूर्ति से सारा चोला हटवाया। तब जाकर मूर्ति का नया स्वरूप सामने आया। सभी लोगों ने पहली बार मूर्ति का नया स्वरूप देखा था। इसके बाद पुरातत्व विभाग की टीम मंदिर पहुंची और जांच के बाद यह पता चला कि 12वीं सदी में कलचुरी राजवंश काल में मूर्ति की स्थापना की गई है।
मंदिर के उपाध्यक्ष दीपक किरवईवाले ने बताया कि मूर्ति का नया स्वरूप आने के बाद अब बजरंग बली की मूर्ति में सिंदूर का चोला नहीं चढ़ाया जाता। मूर्ति में केवल फूलों की माला ही चढ़ाई जाती है। नया स्वरूप आने के बाद मूर्ति के ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए अभिषेक और चोला चढ़ाने की परंपरा बंद कर दी गई है। मंदिर में प्रत्येक शनिवार भजन कीर्तन सौ सालों से अनवरत होते आ रहा है। भजन गाने वाले भी तीन पीढ़ियों से इससे जुड़ी हुई हैं। हर मंगलवार को रात आठ बजे भक्तगण मंदिर में सुंदरकांड का पठन करेंगे।
आज मनाया जा रहा जन्मोत्सव
तात्यापारा स्थित प्राचीन हनुमान मंदिर में श्री हनुमान जन्मोत्सव शनिवार, 12 अप्रैल को धूमधाम से मनाया जा रहा है। हरि कीर्तन और सुंदरकांड पाठ के साथ शाम 7 बजे महाराष्ट्र मंडल के सभासद, भक्तों के साथ रामरक्षा स्रोत और हनुमान चालीसा का सामूहिक पाठ किया जाएगा। तत्पश्चात श्री हनुमान की महाआरती की जाएगी। इस दौरान प्रत्येक भक्त के हाथ में एक- एक दीया होगा। महाआरती के बाद महाप्रसाद का वितरण किया जाएगा। तत्पश्चात भजन- कीर्तन होगा।