दिव्य महाराष्ट्र मंडल

जीवन में कितनी भी मुश्किल आ जाए, लेकिन धैर्य नहीं खोनाः वर्णिका शर्मा

- वीर सावरकर जयंती पर बोली छत्तीसगढ़ बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्षा

रायपुर। स्वातंत्र्य वीर विनायक दामोदर सावरकर जी के जीवन को चाहे आप पढ़े और या श्रवण करें, हमको एक ही बात समझ में आती है कि जीवन में कितनी मुश्किलें आए, कोई कठिन परिस्थिति आए आपको धैर्य नहीं खोना है। जीवन में चुनौतियों के आगे घुटने टेक कर अपनी  ईमानदारी से समझौता नहीं करना चाहिए। अंडमार निकोबार की जेल में भी सावरकर ने धैर्य नहीं खोया। जिस तरह महाभारत काल में अर्जुन ने सिर्फ गुरु द्रोणाचार्य की बात मानकर सिर्फ शुक्र की आंख में निशाना साधा, वैसे ही सावरकर ने वीर शिवाजी की बातों को लक्ष्य मानकर स्वराज के लिए निशाना साधा। इसी का परिणाम है कि आज हम हिंद स्वराज के आनंद में महाराष्ट्र मंडल की पावन धरा में बैठे है। उक्ताशय के विचार बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्षा डा. वर्णिका शर्मा ने महाराष्ट्र मंडल के संत ज्ञानेश्वर सभागृह में आयोजित वीर सावरकर की 142वीं जयंती के अवसर पर कहीं।

डा. वर्णिका शर्मा ने आगे कहा कि आज इस सभा में हमने अनुभव से अभिनव की एक नई बात सीखी। अनुभव की गठरी अपने बुजुर्गों से लेकर अभिनव का प्रयास कर अपनी नई पीढ़ी को सौंप सकते है। आज दोनों ही क्षण हमारे बीच है। आज यहां पुर्निनिर्मित सखी संगम का शुभारंभ होने जा रहा है।  हमारा छत्तीसगढ़ संगम के नाम से जाना जाता है। यहां आने वाली प्रत्येक मातृशक्ति गंगा, यमुना वाली  मातृ शक्ति बनकर निकले। यहां से वो बाहर निकले तो लोगों को पता चल जाए कि यह महाराष्ट्र मंडल के सखी संगम की मातृ शक्ति है। आज यहां सेनेटरी पेड मशीन का शुभारंभ भी होने जा रहा है। हमारे यहां इसे मासिक धर्म कहा जाता है, मासिक प्रक्रिया नहीं। हमारे यहां संतान वो संतति है जिसमें आज की बेटी कल है माता वो होती है भारत भाग्य विधाता। इस संतति की उत्पत्ति की जिम्मेदारी जिस बालिका को प्रकृति ने सौंपी है उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी हम सबकी है। बेटियों के लिए सोशल हेल्थ की सुरक्षा भी जरूरी है।