संपूर्ण व्यक्ति विकास पर शिक्षकों को ध्यान देना होगा: अर्पिता
2025-06-13 10:41 AM
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0- महाराष्ट्र मंडल के संत ज्ञानेश्वर स्कूल में टीचर्स डेवलपमेंट वर्कशाप में दिए जा रहे महत्वपूर्ण टिप्स
रायपुर। प्रतियोगी परीक्षा के लिए बच्चों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर आधारित प्रश्नों की तैयारी करानी चाहिए। इसी तरह केस स्टडी पर आधारित, क्षमता पर आधारित सवालों की तैयारी भी बच्चों से करानी चाहिए। इससे भी बढ़कर ब्लूम टेक्सानॉमी बेस्ट सवालों पर आधारित अर्थात ऐसे सवाल, जिसके सारे विकल्प सही हो लेकिन उनमें से सर्वाधिक सही उत्तर देने की तैयारी बच्चे करें, तो बेहतर होगा। शिक्षाविद अर्पिता राठौर ने महाराष्ट्र मंडल के संत ज्ञानेश्वर स्कूल में टीचर्स डेवलपमेंट वर्कशॉप में इस आशय के विचार व्यक्त किए।
अर्पिता ने कहा कि शिक्षकों को अपने विषय पर एकदम स्पष्ट होना चाहिए। उनका सबसे बड़ा गोल मानवीय होना चाहिए। इसी तरह उन्हें जुनूनी होना चाहिए। बच्चों के ओवर आल पर्सनालिटी डेवलपमेंट की जिम्मेदारी उनकी ही होती है। शिक्षक को न सिर्फ शैक्षणिक बल्कि सामाजिक, स्वास्थ्यगत मामलों में भी बच्चों के विकास में सहायक होना चाहिए।
श्रीमती राठौर के अनुसार हर एक बच्चे की अपनी क्षमता, पहचान और सामर्थ्य होता है। इसके अनुरूप ही हमें बच्चों को ट्रिट करना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि वर्तमान परिवेश में बच्चों से ज्यादा अभिभावकों के काउंसिलिंग की जरूरत है। जरूरी नहीं कि आपकी तरह ही आपका बच्चा भी डॉक्टर, इंजीनियर, सीएम या प्रोफेशनल ही बने। बच्चों की क्षमता को सबसे पहले पहचानने की जिम्मेदारी अभिभावकों की ही है और अपनी महत्वाकांक्षाओं का बोछ उन पर लादने की जरूरत नहीं है।
अर्पिता राठौर ने कहा कि शिक्षकों को सबसे अधिक सहयोगी होना चाहिए, चाहे अपने सहयोगी शिक्षक स्टाफ के साथ हो, बच्चों के साथ हो या फिर बच्चों के अभिभावकों के साथ हो। हमने कोई सवाल क्लास रूप में पूछा है तो जरूरी नहीं कि उसका जवाब सभी बच्चों को मालूम हो। जिसे उत्तर नहीं मालूम, उसने कोई गलत जवाब दिया हो या शरारत की हो, तो जरूरी नहीं कि हम उसे क्लास रूम से ही बाहर निकाल दें, बल्कि उसे क्लास रूम में ही रखकर इंगेज करें। हमारे पढ़ाने का तरीका कुछ तरह का हो कि अधिकाधिक बच्चों के लिए वो समझ में आए। जिन्हें न भी आए तो उन्हें दोबारा समझाने की जरूरत होगी।
अर्पिता मैडम ने कहा कि नान स्टाप 40 मिनट पढ़ाने से बच्चे बोर होने लगते हैं और उनका ध्यान भी भटकता है। ऐसे में बीच में एक ब्रेक लेकर उनसे अलग एक्टिविटी करवानी चाहिए या दूसरी किसी चीज में उन्हें इंगेज करना चाहिए, ताकि दोबारा वे फ्रेश हो सके। इस मौके पर स्कूल के प्रभारी परितोष डोनगांवकर ने अर्पिता राठोर का स्मृति चिन्ह देकर सम्मान किया। कार्यशाला में रचना ठेंगड़ी, उप प्राचार्य राहुल वाडितेलवार सहित स्कूल का पूरा शिक्षक स्टाफ उपस्थित रहा।