रिश्तों में खटास आने पर बनती है अलगाव की स्थितिः विशाखा
0- रोहिणीपुरम महिला केंद्र की मासिक बैठक में प्रेरक संबोधनों के साथ निशानेबाजी की मस्ती भी
रायपुर। हमारा समाज उस नाजुक दौर से गुजर रहा है, जिसमें छोटी सी खटास जीवन के खूबसूरत रंग को ही बदरंग कर देती है, जैसे दूध में पानी मिलाने पर दोनों एक- दूसरे में घुलकर मिल जाते हैं। अब इसी दूध में खटास की कुछ बूंदें डाल दी जाए तो दूध और पानी अलग- अलग हो जाते हैं। इसी तरह रिश्तों में भी अगर कुछ खटास आ जाए तो नतीजा दूध और पानी की तरह अलगाव वाला हो जाता है। रचना रविंद्र ठेंगडी के घर पर आयोजित महाराष्ट्र मंडल के रोहिणीपुरम महिला केंद्र की मासिक बैठक में इस आशय के विचार महिला प्रमुख विशाखा तोपखानेवाले ने व्यक्त किए।
विशाखा ने कहा कि अगर हम एकजुट होकर आपसी लगाव, विश्वास और समर्पण के साथ रहेंगे, तो हमारा परिवार भी सशक्त होगा और हम अपने बच्चों को अच्छे संस्कार दे सकेंगे। हमारा परिवार जितना एकजुट होगा, हम उतना ही ज्यादा समय अपने समाज को भी दे सकेंगे और जनसेवा के कई कार्य कर सकेंगे।
उपाध्यक्ष गीता दलाल ने महाराष्ट्र मंडल के भावी कार्यक्रमों की रूपरेखा की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 15 अगस्त को मंडल की 'आपुलकी योजना' शुरू करने की तैयारी है। इस योजना को फलीभूत करने के लिए समता कॉलोनी स्थित दिव्यांग बालिका विकास गृह के लगभग तीन दशक पुराने भवन के रिनोवेशन का काम तेजी से जारी है। नए अत्याधुनिक सुविधाओं वाले भवन में न केवल दिव्यांग बच्चियों को ऐसी अनेक सुविधाएं भी मिलने लगेंगी, जो अब तक उन्हें नहीं मिल रही थी, बल्कि वरिष्ठ नागरिकों के लिए डे केयर सेंटर की तर्ज पर चलने वाली 'आपुलकी योजना' भी नए दिव्यांग बालिका विकास गृह में ही संचालित होगी।
गीता के मुताबिक इस योजना को धरातल पर लाने की जिम्मेदारी हम सभी की है। इसके लिए हमें दिव्यांग बालिका विकास गृह भवन के रिनोवेशन के लिए मुक्त हस्त से आर्थिक सहित हर तरह का सहयोग करना चाहिए। साथ ही अपने परिचितों, निकटस्थ लोगों को भी दान देने के लिए प्रेरित करना चाहिए। हमें विश्वास है कि आप सभी के सहयोगात्मक रवैये के कारण अापुलकी योजना के रूप में महाराष्ट्र मंडल को एक और पहचान मिलेगी।
रोहिणीपुरम केंद्र की सदस्य और स्वावलंबन समिति की प्रमुख शताब्दी पांडे ने सभी सदस्यों को अपनी समिति की कार्ययोजनाओं की बारे में बताया। उन्होंने कहा कि समिति अब महाराष्ट्र मंडल की युवतियों को स्वावलंबी बनाने की दिशा में कार्य करने जा रही है। इसके लिए उन्हें हमारी समिति हरसंभव मार्गदर्शन तो करेगी ही, साथ ही वित्तीय सहायता अथवा ऋण लेने के आसान उपायों पर भी उनसे चर्चा करेगी।
बैठक में अलका कुलकर्णी, अचला मोहरीकर, सुनिता रामटेके, जयश्री भूरे, वीणा वंडलकर, मीरा कुपटकर, अपर्णा वराडपांडे, संध्या खंगन, श्यामल जोशी, सीमा बक्षी, स्मिता बल्की, प्राची जोशी, श्रेया टल्लू, अपर्णा जोशी, चित्रा बल्की, सोनाली कुलकर्णी, प्राची गनोदवाले, ऋतु बहिरट, साधना बहिरट, राजश्री वैद्य, अनुभा साड़ेगांवकर सहित कई महिलाएं उपस्थित थीं।