दिव्य महाराष्ट्र मंडल

जानिए... महाराष्ट्र मंडल की सोलह श्रृंगार स्पर्धा पूछे रोचक सवालों और उसके जवाबों को

रायपुर। महाराष्ट्र मंडल के अवंती विहार, देवेंद्र नगर, शंकर नगर व सड्डू- मोवा केंद्र की ओर से आयोजित किए गए सावन उत्सव और सोलह श्रृंगार प्रतियोगिता में प्रतिभागियों को तीन राउंड से गुजरना था। पहला राउंड कैटवाक का था। वहीं दूसरा राउंड अपना परिचय देने का था। तीसरा और रोचक राउंड जजों द्वारा पूछे गए सवाल थे। जो महिलाओं के सोलह श्रृंगार से जुड़े थे। प्रतिभागियों ने अपने-अपने स्तर पर इनके जवाब भी दिए, लेकिन आयोजन टीम ने इन उत्तरों को दिव्य महाराष्ट्र मंडल के साथ सांझा किया। ताकि दर्शक दीर्घा में बैठी महिलाएं जिनके मन में इन सवालों को जानने की इच्छा हो वह जान सके। बतादें कि प्रतियोगिता के लिए इन प्रश्नों को अवंती विहार महिला केंद्र की सदस्या जागृति भाखरे, शुभदा चौधरी और पूजा भंडारी ने मिलकर तैयार किया है। 

प्रश्नः बिंदी क्यों लगाते हैं?

उत्तरः बिंदी दोनों भौंहो के बीच आज्ञाचक्र को सक्रिय करती है। बिंदी प्रेम, सौभाग्य और शुभता का प्रतीक है जो देवी शक्ति से जुडी है। यह ऊर्जा को केंद्रित करने में मदद करती है। यह विवाहित महिलाओं की पहचान है और पति की लंबी आयु की कामना से जुड़ी है। महिलाओं के सोलह श्रृंगार का प्रमुख अंग है।

प्रश्नः गजरा श्रृंगार में क्या महत्व रखता है?

उत्तरः गजरे की खुशबू से मन को ताजगी और ऊर्जा मिलती है। मन प्रसन्न और शांत रहता है। यह दुल्हन के श्रृंगार का अभिन्न अंग है जो सुंदरता में वृद्धि करता है। यह शुभता का प्रतीक है और पूजा एवं उत्सवों में पहना जाता है। यह भारतीय संस्कृति एवं परंपरा में विशेष महत्व रखता है।

प्रश्नः मंगलसूत्र का क्या महत्व हैं और इसे क्यों पहना जाता है?

उत्तरः मंगलसूत्र स्त्री के सौभाग्य का प्रतीक है, इसका हिंदू विवाद में बहुत महत्व है। मंगलसूत्र पहनना हिंदू विवाह विधि का प्रमुख चरण है। यह वैवाहिक जीवन के प्रेम, समर्पण को दर्शाता है। यह विवाहित महिलाओं के लिए एक सुरक्षात्मक आवरण है और प्रेम बंधन का प्रतिनिधित्व करता है।

प्रश्नः करधनी या कमरबंध क्यों पहनते है?

उत्तरः करधनी या कमरबंध महिलाओं द्वारा कमर की सुंदरता बढ़ाने और पारंपरिक श्रृंगार हेतु पहना जाता है। स्वास्थ्य की दृष्टि से भी इसे महत्वपूर्ण माना जाता है। यह रीढ़ की हड्डी और कमर दर्द से राहत देती है। नाभि खिसकने से बचाती है। यह नकारात्मक ऊर्जा को सोखकर सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करती है। ऐसी मान्यता है कि यह राहू और केतु के अशुभ प्रभावों को कम करती है।

प्रश्नः पायल क्यों पहनी जातीहै, इसका क्या महत्व है?

उत्तरः पायल सौभाग्य और समृद्धि का प्रतीक है। पाल में लगी घुंघुरूओं की आवास एक सुखद ध्वनि पैदा करती है जो सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है। पायल पहनने से पैरों के कुछ बिंदूओं पर दवाब पड़ता है जो एक्यूप्रेशर के सिद्धांत पर कार्य करते है। चांदी धातु में शीतलता का गुण होता है जो शरीर के तापमान को नियंत्रित करता है।

प्रश्नः नथ पहनने के फायदे और महत्व बताइए?

उत्तरः नथ के श्रृंगार से महिलाओं के मुख का सौंदर्य बढ़ता है। नथ सौभाग्य का प्रतीक है, इसे पहनने से एक्यूपंचर का फायदा भी मिलता है जिससे कफ, सिरदर्द और हार्मोनल असंतुलन से राहत मिलती है। नाक छिदवाने से रक्त संचार बेहतर होता है। नाक का छल्ला विशेष रुप से बायीं ओर की जीवन शक्ति ऊर्जा को बढ़ाता है।

प्रश्नः पैरों में बिछिया क्यों पहनी जाती हैं?

उत्तरः बिछिया  महिलाओं के सौभाग्य का प्रतीक है, इसे पहनने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती  है और घर में समृद्धि आती है। पैर की दूसरी अंगुली में बिछिया पहनने से रक्त संचार में सुधार होता है और शरीर के निचले अंगों की नसों और मांसपेशियों को मजबूती मिलती है। चांदी की बिछिया शरीर को शीतलता प्रदान करती है और शरीर के तापमान को नियंत्रित करती है।

प्रश्नः कान छिदवाने का क्या महत्व है और कानों में बाली क्यों पहनी जाती है?

उत्तरः कान छिदवाने से सुनने की क्षमता में सुधार होता है, आंख की रोशनी बढ़ती है। मस्तिष्क का विकास होता है और मानसिक शांति मिलती है। कान की बाली न केवल महिलाओं का सौन्दर्य बढ़ाती है बल्कि उन्हें एक्यूपंचर का फायदा भी प्रदान करती है। कान छिदवाना और बाली पहनना हमारी संस्कृति में बहुत महत्व रखता है।

प्रश्नः चूड़ियां पहनने का महत्व और फायदा क्या है?

उत्तरः चूड़िया सोलह श्रृंगार का अभिन्न अंग है। चूड़ियों की खनक सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है। चूड़ियां कलाई पर धर्षण करके एक्यूप्रेशर प्वाइंट्स पर दवाब  डालती है, जिससे रक्त संचार बढ़ता है और शरीर स्वस्थ एवं ऊर्जावान रहता है। चूड़ियों की मधुर खनक घर के वातावरण में प्रसन्नता लाती है।

प्रश्नः अंगूठी का क्या महत्व है?

उत्तरः अंगूंठी प्रेम, प्रतिबद्धता और सुरक्षा का प्रतीक मानी जाती है। अंगूठी का गोलाकार विवाहित जोड़े के अटूट बंधन को दर्शाता है। ज्योतिष एवं कुछ धार्मिक परंपराओं में अंगूठी को विशेष महत्व दिया गया है। चांदी की अंगूठी शरीर के तापमान को संतुलित और सोने की अंगूठी रक्त संचार को बेहतर करती है।

प्रश्नः महादेव को चातुर्मास शिरोमणि क्यों कहा जाता है?

उत्तरः आषाढ़ी एकादशी से कार्तिक एकादशी का समय चार्तुमास कहलाता है। इस अवधि में भगवान विष्णु के योग निद्रा में जाने के बाद भगवान शिव ही सृष्टि का संचालन करते है। इसलिए उन्हें चातुर्मास शिरोमणि कहा जाताहै। इस दौरान शिव की पूजा अराधना का विशेष महत्व है।

प्रश्नः शिव धनुष का नाम क्या है, इसे किसने और कब तोड़ा।

उत्तरः शिव धनुष का नाम पिनाक है, इसे सीता स्वयंवर में प्रभुश्रीराम ने तोड़ा था।

प्रश्नः हरियाली तीज क्यों मनाई जाती है?

उत्तरः हरियाली तीज भगवान शिव और देवी पार्वती के पुर्नमिलन के उपलक्ष्य पर मनाई जाती है।

प्रश्नः हरियाली तीज कब आती है और इसमें हरे रंग का क्या महत्व है?

उत्तरः हरियाली तीज श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को आती है। यह पर्व जीवन में ऊर्जा और ताजगी लाने का प्रतीक है। और हरा रंग जीवन में ताजगी, ऊर्जा, शांति, प्रेम, उर्वरता, सौभाग्य और समृद्धि का रंग माना जाता है। इस महीने में प्रकृति चारों और हरियाली से भर जाती है, हरा रंग स्वस्थ्य वर्धक और शिव को प्रिय है।

प्रश्नः मृत्युंजय मंत्र के रचियता कौन है?

उत्तरः मृत्युंजय मंत्र के रचियता महर्षि मार्कंडेय है।

प्रश्नः श्रावण मास में आने वाले व्रत और त्योहारों के नाम?

उत्तरः हरियाली तीज, मंगलागौर, नागपंचमी, खमरछठ, रक्षाबंधन, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, सावन सोमवार, गणेश चतुर्थी, भाई पांचे, कमिका एकादशी, मौना पंचमी और शिवरात्रि शामिल है। 

प्रश्नः शिवजी के 10 नाम बताइए?

उत्तरः महादेव, शंकर, महेश, नटराज, भोलनाथ, रूद्र, नीलकंठ, महाकाल, बैद्यनाथ, गंगाधर, आशुतोष, गौरी पति, जटाधर, त्र्यंबक, भूतनाथ और सदाशिव।

प्रश्नः माता पार्वती के 10 नाम बताइए?

उत्तरः उमा, गौरी, भवानी, गिरजा, शैलजा, अंबिका, रूद्राणी, शिवानी, शांभवी,आद्या, दुर्गा, चित्रा, भगवती, कल्याणी और प्रियंवदा।

प्रश्नः शिवजी के गणों के नाम बताइए?

उत्तरः नंदी, भैरव, वीरभद्र, मणिभद्र, श्रृंगी, जय, विजय, गौकर्ण, घंटाकर्ण, शैल, पिशाच, दैत्य और नाग-नागिन।

प्रश्नः भैरव के बारे में क्या जानते है।

उत्तरः भैरव को शिव का उग्र रूप माना जाता है। उन्हें शिव मंदिरों का रक्षक भी कहा जाता है।

प्रश्नः सोलह श्रृंगार की सामग्री के नाम बताइए?

उत्तरः मांगटीका, बिंदी, सिंदूर, काजल, झूमके, मंगलसूत्र,  गजरा, नथ, बाजूबंद, कमरबंद,  चूड़ियां, अंगूठी, बिछिया, पायल, मेहंदी और वस्त्र।

प्रश्नः पंचोपचार पूजा की सामग्री क्या-क्या है।

उत्तरः गंध, पुष्प, धूप, दीप और नैवैद्य।