दिव्य महाराष्ट्र मंडल

गजानन के साथ हरि और हर की वंदना... देवी जोगवा पर झूमीं महिलाएं

- महाराष्ट्र मंडल की महिला केंद्रों ने दी सुंदर मराठी भजनों की प्रस्तुति

रायपुर। अशी चिक मोत्याची माळ, होती ग तीस तोळ्याची ग….  जय जय हे ओंकारा, ओम जय शिव ओंकारा... आज गोकुळात रंग खेळतो हरी, राधिके, जरा जपून जा तुझ्या घरी... जैसे मराठी भजनों के साथ जहां एक ओर महिलाओं ने प्रथम पूज्य गजानन के साथ हरि यानी भगवान विष्णु और हर यानी भोलेनाथ के भजनों की सुंदर प्रस्तुति दी। वहीं दूसरी ओर देवी की स्तुति कर जोगवा गाया। देवी जोगवा में महिलाएं  झूम उठी। मौका था महाराष्ट्र मंडल में आय़ोजित शहीद मेजर यशवंत गोरे स्मृति गणेशोत्सव में आयोजनों की श्रृंखला में हुए महिला केंद्रों की भजन प्रस्तुति का।

बतादें कि गुरुवार 4 सितंबर को मंडल की डंगनिया, सिविल लाइन, तात्यापारा, बूढ़ापारा, सुंदर नगर, चौबे कालोनी, कोटा और सरोना की महिलाओं ने भजनों की प्रस्तुति दी। इस अवसर पर विशेष रुप से मंडल की महिला प्रमुख विशाखा तोपखानेवाले और उपाध्यक्ष गीता श्याम दलाल उपस्थित रहीं।

मंडल उपाध्यक्ष गीता दलाल ने बताया कि कार्यक्रम की शुरूआत डंगनिया केंद्र की महिलाओं ने श्री अथर्वशीर्ष के पाठ के साथ की। जिसके बाद केंद्र की महिलाओं ने गणपति वंदना प्रस्तुत किया। कोटा महिला केंद्र की टीम ने अशी चिक मोत्याची माळ, होती ग तीस तोळ्याची ग…. ’, ‘ वाजे मृदुंग टाळ वीणा.. ये रे नाचत गौरी गणा।  गणपती बाप्पा मोरया मंगलमूर्ती मोरयाभजन गया।

वहीं बूढ़ापारा केंद्र की महिलाओं ने जय जय हे ओंकाराऔर ओम जय शिव ओंकाराकी प्रस्तुति दी। गीता दलाल ने बताया कि  गणेश, ब्रह्मा, विष्णु और शंकर की प्रस्तुति वाला यह गीत लोकप्रिय आरती 'जय शिव ओमकारा' का मराठी संस्करण है।  चौबे कालोनी केंद्र की महिलाओं ने आज गोकुळात रंग खेळतो हरीकी प्रस्तुति के साथ श्रीकृष्ण का भजन प्रस्तुत किया।

मंडल की महिला प्रमुख विशाखा तोपखानेवाले ने बताया कि बूढ़ापारा केंद्र की महिलाओं ने उधे ग अंबे उधे.... उधे ग अंबे उधे! होऊ दे सर्व दिशी मंगळ, चढवितो रात्रंदिन संबळके साथ जोगवा प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि मराठी जोगवा देवी को भेंट स्वरूप भिक्षा मांगने की एक परंपरा है, जिसमें भक्त देवी के नाम पर सूखा राशन या अनाज मांगते हैं और यह दान 'जोगता' और 'जोगातीन' के बीच बांटा जाता है। यह देवी की पूजा का एक अंग है और विशेष रूप से नवरात्रि के दौरान या देवी के विशेष मंगलवार और शुक्रवार को किया जाता है।