*गुदगुदाते हुए जीवन में झांकता हैं 'चूक भूल द्यावी घ्यावी'
2025-09-05 10:13 PM
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0 महाराष्ट्र मंडल गणेशोत्सव के 10वें दिन मराठी नाटक का मंचन
रायपुर। सफल वैवाहिक जीवन के पीछे कहीं न कहीं प्यार, भरोसा और समर्पण का भाव होता है। न जाने कितने ही पति अपनी कुछ राज की बातें अपनी पत्नी को अपने जीवन के अंत तक नहीं बताते। ऐसा ही कुछ पत्नियां भी करतीं होंगी। ऐसी बातें आमतौर पर लगभग सभी के साथ होती है। ऐसी ही घटनाओं पर आधारित है मराठी नाटक ‘चूक- भूल द्यावी- घ्यावी’ (चूक- भूल लेनी देनी) का मंचन ....।
महाराष्ट्र मंडल के शहीद मेजर यशवंत गोरे स्मृति गणेशोत्सव में 10वें दिन शुक्रवार को शाम सात बजे किया गया। दिलीप प्रभावलकर द्वारा लिखित इस नाटक ने दर्शकों को जिंदगी से सच्चाई से रूबरू कराते हुए हंसाया भी। साथ ही एक- दूसरे पर विश्वास करना सिखाया भी। नाटक में एक वयोवृद्ध दंपती का वैवाहिक समर्पण ने दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया। अनेक दृश्यों और संवाद इतने वास्तविक लगे कि दर्शक अपने जीवन में भी झांकते .... सोचते हुए दिखे।

संत ज्ञानेश्वर सभागृह के कुमुदिनी वरवंडकर रंगमंच पर वरिष्ठ रंगसाधक प्रा. अनिल श्रीराम कालेले के मार्गदर्शन और प्रसन्न निमोणकर के दिग्दर्शन में मंचित ‘चूक- भूल द्यावी में राजाभाऊ की भूमिका प्रसन्न निमोणकर और उषा की भूमिका में प्रिया बक्षी ने नाटक की दिलचस्प शुरुआत की। वहीं तरुण राजाभाऊ और उषा की रोल में भगीरथ और कुंतल कालेले ने नाटक को मनोरंजक ढंग से गति प्रदान की। पवन ओगले और गौरी क्षीरसागर सास- ससूर की भूमिका में न्याय किया।
इधर तरुण राजाभाऊ की महिला मित्र कीर्ति हिशीकर, राजभाऊ की बुआ प्रगति ओगले और गुरुजी की भूमिका आचार्य चेतन दंडवते अपनी- अपनी संक्षिप्त भूमिकाओं में जंचे हैं। नाटक में संगीत संयोजन परितोष डोनगांवकर, मंच सज्जा व प्रकाश व्यवस्था प्रवीण क्षीरसागर, प्रकाश गुरव और विनोद गौतम, वेशभूषा अपर्णा कालेले, रंगभूषा में युवा साथी प्रांजल बक्षी, वर्तिका क्षीरसागर और मंच सहायक नवीन देशमुख रहे।