दिव्य महाराष्ट्र मंडल

‘भाव मराठी’ की प्रस्तुति ने किया भाव-विभोर... झूम उठे श्रोतागण

रायपुर। मराठी संस्कृति में भगवान, स्वजनों, बच्चों के प्रति स्नेह, प्रेम और समर्पण की भावना को प्रेरित करते भाव मराठी की अपना अलग महत्व है। इसमें न केवल भावनाएं व्यक्त होती है, बल्कि व्यक्ति के सोचने के तरीके, मनःस्थिति और कार्यों में ईमानदारी भी परिलक्षित होती है। मराठी भावगीत और नाटक में 'भाव' का अपना अलग ही महत्व है। इसमें संगीत के माध्यम से भावनाओं को अभिव्यक्त किया जाता है, जो इसे कला और संस्कृति का अभिन्न अंग बनाता है। महाराष्ट्र मंडल में आयोजित शहीद मेजर यशवंत गोरे स्मृति गणेशोत्सव में आयोजनों की श्रृंखला में गुरुवार 4 सितंबर को भाव मराठी की प्रस्तुति ने सभी को भाव-विभोर कर दिया।

कला संस्कृति समिति की समन्वयक भारती पलसोदकर ने बताया कि गणेशोत्सव में समिति की ओर से भाव मराठी की शानदार प्रस्तुति दी गई। जिसमें समिति के सदस्यों ने सुंदर सुंदर भावनाओं के साथ मनमोहक गायन किया। कार्यक्रम की शुरूआत युवा कलाकार अक्षता मातुरकर ने गणनायकाय गणदेवताय की प्रस्तुति के साथ की।

वैभव शाह ने मराठी गीत रुपे सुंदर सावळा ग मायकी प्रस्तुति दी। जिसमें शाम का वर्णन किया गया है। सुमित मोड़क ने तू सुख कर्ता तू दुख हर्ता प्रस्तुत किया। वहीं सुकृत गनोदवाले ने ज्या सुखा कारणेमराठी गीत के माध्यम से अपने भाव प्रकट किए। जिसमें भगवान के बैकुंठ छोड़कर संत के घर रहने का भाव नजर आता है। गायक उस संत को नमन करता है जहां लक्ष्मी के साथ नारायण सुशोभित है। अंकिता किरवई ने ये ग ये ग रखुमाई गीत प्रस्तुत किया। जिसमें भगवान विठ्ठल की पत्नी रखुमाई को समर्पित है। जिसमें वे रखुमाई यानी साक्षात लक्ष्मी जी को अपने घर बुलाती है बतादें कि रखुमाई को भक्ति और प्रेम का प्रतीक माना जाता है

भारती ने आगे बताया कि इसी तरह धनश्री पेंडसे ने ओंकार स्वरूपा तुज नमो, निखिल मुकादम ने देहची तिजोरी,  आशीष जोशी ने विठू माउली तु माउली जगा ची श्रीकांत कोरान्ने ने शोधिसी मानवा, सुमिता रायजादा ने त्या फुलांच्या गंध कोशी, अजय पोतदार ने ताळ बोले चिपळी ला और स्वाती जोशी ने सुंदर ते ध्यान मराठी गीत प्रस्तुत किया।